सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Samaveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
हे देवताओ! आप का संरक्षण पूजनीय व महान है. आप सारी इच्छाओं को पूरा करते हैं. यह संरक्षण हमारे लिए धन रूप है. हम अपने संरक्षण के लिए आप से चारों ओर से (सब ओर से) प्रार्थना करते हैं. (४) सोमाना ꣲ स्वरं कृणुहि ब्रह्मणस्पते. कक्षीवन्तं य औशिजः.. (५) हे ब्रह्मणस्पति! आप सोम यज्ञ करने वाले उशिज के पुत्र कक्षीवान को प्रकाशित करने की कृपा कीजिए. (५) बोधन्मना इदस्तु नो वृत्रहा भूर्यासुतिः. शृणोतु शक्र आशिषम्.. (६) हे इंद्र! आप वृत्र नामक राक्षस को मारने वाले हैं. आप के लिए बहुत से लोग सोमरस तैयार करते हैं. आप हमेशा हमारे मनोरथों को जानने वाले हैं. आप युद्ध में शत्रुओं का नाश करने वाले हैं. आप सामर्थ्यवान हैं. कृपया आप हमारी स्तुति सुनिए. (६) अद्या नो देव सवितः प्रजावत्सावीः सौभाग्यम्. परा दुःष्वप्न्यं ꣲ सुव.. (७) हे सूर्य! आप हमें पुत्रपौत्रों सहित धन प्रदान कीजिए. गरीबी बुरे सपने की तरह दुःखदायी है. आप उसे दूर कीजिए. (७) क्व ३ स्य वृषभो युवा तुविग्रीवो अनानतः. ब्रह्मा कस्त ꣲ सपर्यति.. (८) हे इंद्र! आप समर्थ व युवा हैं. आप इच्छाएं पूरी करने वाले हैं. आप बलवान हैं. आप किसी के सामने झुकने वाले नहीं हैं. आप कहां हैं? इस समय कौन ज्ञानी आप की पूजा कर रहा है? (८) उपह्वरे गिरीणा ꣲ सङ्गमे च नदीनाम्. धिया विप्रो अजायत.. (९) पर्वतों पर और नदियों के संगम पर बुद्धि से की हुई प्रार्थना को सुनने के लिए बुद्धिमान इंद्र प्रकट होते हैं. (९) प्र सम्राजं चर्षणीनामिन्द्र ꣲ स्तोता नव्यं गीर्भिः. नरं नृषाहं म ꣲ हिष्ठम्.. (१०) मनुष्यों में इंद्र भली प्रकार प्रकाशित हैं. वे स्तुति करने योग्य हैं. शत्रुओं को जीतने वाले हैं. हम उन महान इंद्र की स्तुति करते हैं. (१०) चौथा खंड अपादु शिप्रयन्धसः सुदक्षस्य प्रहोषिणः. इन्दोरिन्द्रो यवाशिरः.. (१) हे इंद्र! आप सुंदर ठोड़ी वाले और सुंदर मुकुट धारण करने वाले हैं. यजमान हवि देने में विशेष कुशल हैं. आप ने दूध और जौ से बनाए हुए सोमरस को ग्रहण किया. (१) इमा उ त्वा पुरूवसो ऽ भि प्र नोनुवुर्गिरः. गावो वत्सं न धेनवः.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*
हे इंद्र! आप अनेक प्रकार के वैभव वाले हैं. हमारी स्तुतियां बारबार आप के पास उसी तरह आना चाहती हैं, जैसे दूध वाली गाएं बारबार बछड़ों की ओर आती हैं. (२) अत्राह गोरमन्वत नाम त्वष्टुरपीच्यम्. इत्था चन्द्रमसो गृहे.. (३) गतिमान चंद्र मंडल में सूर्य का दिव्य तेज है, ऐसा विद्वान् मानते हैं अर्थात् सूर्य के छिप जाने पर उन्हीं के प्रकाश से चंद्रमा प्रकाशित होता है. (३) यदिन्द्रो अनयद्रितो महीरपो वृषन्तमः. तत्र पूषाभुवत्सचा.. (४) हे इंद्र! आप बहुत बरसात के रूप में जल प्रवाहित करते हैं, इस लोक तक पहुंचाते हैं तब पूषा देवता आप के सहायक होते हैं. वे पोषण करने में समर्थ देवता हैं. (४) गौर्धयति मरुता ᳵ श्रवस्युर्माता मघोनाम्. युक्ता वह्नी रथानाम्.. (५) पृथ्वी माता धनसंपन्न हैं. वे मरुतों के रथ में जुड़ी हुई हैं. वे सब ओर पूजित हैं. वे अन्न आदि उत्पन्न कर के अपने पुत्रों का पालनपोषण करती हैं. (५) उप नो हरिभिः सुतं याहि मदानां पते. उप नो हरिभिः सुतम्.. (६) हे इंद्र! आप सोम के स्वामी हैं. हम ने आप के लिए सोमरस निचोड़ कर रखा है. आप अपने हजारों घोड़ों से (सहित या माध्यम से) हमारे इस यज्ञ में पधारिए. आप जल्दी और बारबार पधारिए. (६) इष्टा होत्रा असृक्षतेन्द्रं वृधन्तो अध्वरे. अच्छावभृथमोजसा.. (७) हे इंद्र! हम यजमान बारबार आप की स्तुति करते हैं. हम अपने तेज से यज्ञ खत्म होने पर होने वाले स्नान तक बारबार आप के लिए आहुति प्रदान करते हैं. (७) अहमिद्धि पितुषपरि मेधामृतस्य जग्रह. अह ᳵ सूर्य इवाजनि.. (८) हे इंद्र! आप पालनकर्ता हैं. हम ने आप की बुद्धि को अपनी ओर आकर्षित कर लिया है. यानी हम ने आप की कृपा प्राप्त कर ली है. अब हम सूर्य देव के समान प्रकाशित हो गए हैं. (८) रेवतीर्नः सधमाद इन्द्रे सन्तु तुविवाजाः. क्षुमन्तो याभिर्मदेम.. (९) हे इंद्र! आप की कृपा से हम धनधान्य संपन्न हो कर प्रसन्न हो जाते हैं. हमारी गायों पर भी आप की कृपा हो. वे भी अधिक अन्न और दूध देने वाली हो जाएं. (९) सोमः पूषा च चेततुर्विश्वासा ᳵ सुक्षितीनाम्. देवत्रा रथ्योर्हिता.. (१०) सोम और पूषा देवताओं के रथ में विराजमान हैं. वे इसी रथ में बैठने योग्य हैं. वे सभी मनुष्यों का उत्साह बढ़ाने वाले हैं. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*
पांचवां खंड पान्तमा वो अन्धस इन्द्रमभि प्र गायत. विश्वासाह २३ शतक्रतुं म २३ हिष्ठं चर्षणीनाम्.. (१) हे याजको (यज्ञ करने वालो)! आप इंद्र की विशेष स्तुति करें. वे शत्रुओं का नाश करने वाले हैं. सैकड़ों कर्म करने वाले हैं. वे धन दाता हैं. वे सोमरस का पान करने वाले हैं. (१) प्र व इन्द्राय मादन २३ हर्यश्वाय गायत. सखायः सोमपाव्ने.. (२) हे साधको! इंद्र हरि नामक घोड़े वाले हैं. वे सोमरस पीने वाले हैं. आप इन इंद्र को प्रसन्न करने वाली प्रार्थनाएं गाइए. (२) वयमु त्वा तदिदर्था इन्द्र त्वायन्तः सखायः. कण्वा उक्थेभिर्जरन्ते.. (३) हे इंद्र! हम आप को अपना मित्र बनाना चाहते हैं. हम आप के मित्र होना चाहते हैं. हम कण्ववंशी हैं. हम आप की स्तुति करना अपना कर्तव्य मानते हैं. हम आप की स्तुति कर रहे हैं. (३) इन्द्राय मद्धने सुतं परि ष्टोभन्तु नो गिरः. अर्कमर्चन्तु कारवः.. (४) हे इंद्र! आप प्रसन्न स्वभाव वाले हैं. हम आप के लिए निचोड़े गए सोमरस की स्तुति करते हैं. यज्ञ करने वालों से निवेदन है कि सोमरस की स्तुति करें. सोमरस पूजा योग्य है. (४) अयं त इन्द्र सोमो निपूतो अधि बर्हिषि. एहीमस्य द्रवा पिब.. (५) हे इंद्र! वेदी के आसन पर आप के लिए शुद्ध कर के सोमरस रखा हुआ है. आप इस स्थान पर शीघ्र पधारिए. आप इस सोमरस को ग्रहण कीजिए. (५) सुरूपकृत्नुमूतये सुदुघामिव गोदुहे. जुहूमसि द्यविद्यवि.. (६) हे इंद्र! आप सुंदर कार्य करने वाले हैं. हम आप को अपने संरक्षण के लिए उसी प्रकार बुलाते हैं, जिस प्रकार अच्छा दूध देने वाली गाय को पुकारा जाता है. (६) अभि त्वा वृषभा सुते सुत २३ सृजामि पीतये. तृम्पा व्यश्नुही मदम्.. (७) हे इंद्र! आप इच्छा पूरी करने वाले हैं. हम सोम यज्ञ में पीने के लिए आप को सोमरस अर्पित कर रहे हैं. आप आनंददायी सोमरस ग्रहण कीजिए. (७) य इन्द्र चमसेष्वा सोमश्चमूषु ते सुतः. पिबेदस्य त्वमीशिषे.. (८) हे इंद्र! आप के लिए सोमरस 'चमस' और 'ग्रह' नामक बरतनों में रखा हुआ है. आप इसे अवश्य ग्रहण कीजिए. आप बहुत सामर्थ्य वाले हैं. (८) योगेयोगे तवस्तरं वाजेवाजे हवामहे. सखाय इन्द्रमूतये.. (९) ebook converter DEMO Watermarks*
हे इंद्र! हम हर शुभ काम के शुरू में आप को आमंत्रित करते हैं. हर तरह के संग्राम (युद्ध, कष्ट) में आप को आमंत्रित करते हैं. हम अपने संरक्षण के लिए मित्र की तरह आप को आमंत्रित करते हैं. (९) आ त्वेता नि षीदतेन्द्रमभि प्र गायत. सखायः स्तोमवाहसः.. (१०) हे यज्ञ करने वाले मित्रो! आप जल्दीजल्दी आओ. आ कर बैठ जाओ. आप हर प्रकार से इंद्र की स्तुति करो. (१०) छठा खंड इद २४ ह्यन्वोजसा सुत २४ राधानां पते. पिबा त्वा ३ स्य गिर्वणः.. (१) हे इंद्र! आप धन के स्वामी हैं. आप प्रार्थना करने योग्य हैं. हम ने बहुत मेहनत से आप के लिए सोमरस निचोड़ा है. आप रुचिपूर्वक इसे ग्रहण कीजिए. (१) महाँ इन्द्रः पुरश्च नो महित्वमस्तु वज्रिणे. द्यौर्न प्रथिना शवः.. (२) हे इंद्र! आप महान हैं. आप के गुण श्रेष्ठ हैं. आप वज्रधारी हैं. आप की कीर्ति स्वर्गलोक की तरह फैले. आप के बल की चारों ओर प्रशंसा हो. (२) आ तू न इन्द्र क्षुमन्तं चित्रं ग्राभ २४ सं गृभाय. महाहस्ती दक्षिणेन.. (३) हे इंद्र! आप बड़ेबड़े हाथों वाले हैं. आप हमारे लिए यशदायी धन दाएं हाथ में लीजिए. वह धन बहुत प्रशंसनीय हो. कई लोगों द्वारा लेने योग्य हो. (३) अभि प्र गोपतिं गिरेन्द्रमर्च यथा विदे. सूनु २४ सत्यस्य सत्पतिम्.. (४) हे याजको! यज्ञ वाले इंद्र गौओं के स्वामी हैं. वे यजमानों के पालनहार हैं. वे यज्ञ के पुत्र व सत्य के रक्षक हैं. आप मन से उन की स्तुति कीजिए. (४) कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृधः सखा. कया शचिष्ठया वृता.. (५) हे इंद्र! आप सदा बढ़ने वाले हैं. आप विलक्षण हैं. आप किस कर्म, पूजा विधि और भेंट से हम पर कृपा करेंगे? आप किन दिव्य तेजों से भर कर हमारे पास पधारेंगे? (५) त्यमु वः सत्रासाहं विश्वासु गीर्ष्वायतम्. आ च्यावयस्यूतये.. (६) हे याजको! इंद्र बहुत से शत्रुओं का नाश करने वाले हैं. सभी स्तुतियों में इंद्र का वर्णन है. आप अपने संरक्षण के लिए उन का आह्वान कीजिए. (६) सदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम्. सनिं मेधामयासिषम्.. (७) हे इंद्र! आप अपूर्व, इच्छित धन देने वाले और श्रेष्ठ हैं. अपनी बुद्धि को बढ़ाने के लिए हम ने आप को प्राप्त किया. (७) ebook converter DEMO Watermarks*
ये ते पन्था अधो दिवो येभिर्व्यश्वमैरयः. उत श्रोषन्तु नो भुवः.. (८) हे इंद्र! स्वर्गलोक में नीचे जो रास्ता है, जिस रास्ते से आप पृथ्वी का संचालन करते हैं, वह रास्ता हमारे यज्ञ स्थान तक पहुंचता है. आप उस रास्ते से हमारे यज्ञ में पधारें. (८) भद्रंभद्रं न आ भरेषमूर्ज २३ शतक्रतो. यदिन्द्र मृडयासि नः.. (९) हे इंद्र! आप सैकड़ों काम करने वाले हैं. आप हमें खूब सुखदायी धन व बलशाली बनाने वाला अन्न दीजिए. आप हमें सुखी बनाने वाले हैं. हे इंद्र! हमें सुख दीजिए. (९) अस्ति सोमो अय २३ सुतः पिबन्त्यस्य मरुतः. उत स्वराजो अश्विना.. (१०) हे इंद्र! हम ने साफ, छान कर यह सोमरस तैयार किया है. तेजस्वी मरुद्गण और अश्विनी देवता इस सोमरस का पान करते हैं. (१०) सातवां खंड ईङ्खयन्तीरपस्युव इन्द्रं जातमुपासते. वन्वानासः सुवीर्यम्.. (१) इंद्र की माता उत्तम बल चाहने वाली हैं. वे श्रेष्ठ कार्य करने की इच्छुक हैं. वे इंद्र से वीरतापूर्ण धन चाहती हैं. वे प्रकट हुए इंद्र की सेवा करती हैं. (१) न कि देवा इनीमसि न क्या योपयामसि. मन्त्रश्रुत्यं चरामसि.. (२) हे इंद्र! हम वेद मंत्रों के अनुसार आचरण करते हैं. हम किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. हम धर्म (नियम) के विरुद्ध कोई काम नहीं करते हैं. (२) दोषो आगाद् बृहद्गाय द्युमद्गामन्नाथर्वण. स्तुहि देव २३ सवितारम्.. (३) हे बृहत्साम का गायन करने वाले, प्रकाश वाले मार्ग से जाने वाले अथर्ववेदी ब्राह्मण! आप यज्ञ कार्य से जाने अनजाने होने वाले दोष को दूर करने के लिए सविता देवता की स्तुति कीजिए. (३) एषो उषा अपूर्व्या व्युच्छति प्रिया दिवः. स्तुषे वामश्विना बृहत्.. (४) यह उषा अपूर्व और बहुत प्रसन्नता देने वाली है. यह स्वर्गलोक से आ कर अंधकार का नाश करती है. हे उषा के कार्य सहयोगी अश्विनीकुमारो! हम आप की विशेष स्तुति करते हैं. (४) इन्द्रो दधीचो अस्थभिर्वृत्राण्यप्रतिष्कुतः. जघान नवतीर्नव.. (५) हे इंद्र! आप को कोई नहीं जीत सकता. आप ने दधीचि की हड्डियों से बने वज्र से निन्यानवे असुरों का नाश किया. (५) ebook converter DEMO Watermarks*
इन्द्रेहि मत्स्यन्धसो विश्वेभिः सोमपर्वभिः महाँ अभिष्टिरोजसा.. (६) हे इंद्र! आप सोमरस के रूप में अन्न ग्रहण कीजिए व प्रसन्न होइए. हमारे यहां पधारिए. अपनी शक्ति से हमें शक्तिमान बनाइए. शत्रुओं को जीतने की शक्ति दीजिए. (६) आ तू न इन्द्र वृत्रहन्नस्माकमर्धमा गहि. महान्महीभिरूतिभिः.. (७) हे इंद्र! आप शत्रुनाशक व बहुत महान हैं. आप हमारे पास जल्दी आइए. आप अपने रक्षा साधनों के साथ शीघ्र हमारे यहां पधारिए. (७) ओजस्तदस्य तित्त्विष उभे यत्समवर्तयत्. इन्द्रश्चर्मेव रोदसी.. (८) हे इंद्र! आप का बल प्रकट होने लगा है. आप स्वर्गलोक और पृथ्वी को चमड़े के समान फैला रहे हैं. (८) अयमु ते समतसि कपोत इव गर्भधिम्. वचस्तच्चिन्न ओहसे.. (९) हे इंद्र! सोमरस के पास आप उसी तरह बराबर बने रहते हैं, जिस तरह गर्भवती कबूतरी के साथ कबूतर बना रहता है. आप से निवेदन है कि आप भी हमारी स्तुतियों के साथ बने रहें. (९) वात आ वातु भेषज ꣳ शम्भु मयोभु नो हृदे. प्र न आयू ꣳ षि तारिषत्.. (१०) वायु हमारे पास शांति और सुखदायी ओषधियां पहुंचाएं. ये ओषधियां हमारी आयु बढ़ाएं. (१०) आठवां खंड य ꣳ रक्षन्ति प्रचेतसो वरुणो मित्रो अर्यमा. न किः स दभ्यते जनः.. (१) जिस यजमान की रक्षा श्रेष्ठ ज्ञान वाले वरुण, मित्र तथा अर्यमा देवता करते हैं, उस यजमान का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता. (१) गव्यो षु णो यथा पुराश्वयोत रथया. वरिवस्या महोनाम्.. (२) हे इंद्र! आप हमेशा की तरह गौओं का समूह, घोड़ों का समूह और यशदायी धन वैभव देने के लिए पधारिए. (२) इमास्त इन्द्र पृश्नयो घृतं दुहत आशिरम्. एनामृतस्य पिप्युषीः.. (३) हे इंद्र! आप की गौएं बहुत सुंदर रंग वाली हैं. ये सत्य और यज्ञ को बढ़ाने वाली हैं. ये हमारे लिए घी देने वाले दूध को टपकाती हैं (देती हैं). (३) अया धिया च गव्यया पुरुणामन्पुरुष्टुत. यत्सोमेसोम आभुवः.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*
हे इंद्र! आप अनेक नामों वाले हैं. अनेक लोग आप की स्तुति करते हैं. आप जहां पधारते हैं, वहां हम गौओं की इच्छा से आप की प्रार्थना करते हैं. (४) पावकाः नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती. यज्ञं वष्टु धियावसुः.. (५) सरस्वती पवित्र करने वाली, पोषण देने वाली व बुद्धि से धन देने वाली हैं. विद्या की वे देवी हमारे यज्ञ को सफल बनाएं. (५) क इमं नाहुषीष्वा इन्द्र ॐ सोमस्य तर्पयात्. स नो वसून्या भरात्.. (६) मनुष्यों में ऐसी क्षमता कहां, जो इंद्र को तृप्त कर सकें? वे हमारे यज्ञ में तृप्त हों तथा हमें धन प्रदान करें. (६) आ याहि सुषुमा हि त इन्द्र सोमं पिबा इमम्. इदं बर्हिः सदो मम.. (७) हे इंद्र! आप आइए. हम ने आप के लिए सोमरस निकाला है. आप उसे पीजिए. हम ने आप के लिए कुश का आसन बिछाया है. आप उस पर विराजमान होइए. (७) महि त्रीणामवरस्तु द्युक्षं मित्रस्यार्यम्णः. दुराधर्षं वरुणस्य.. (८) इंद्र, अर्यमा और वरुण—इन तीनों देवताओं का तेजस्वी संरक्षण हमें मिले ताकि हम शत्रुओं को हरा सकें. (८) त्वावतः पुरूवसो वयमिन्द्र प्रणेतः. स्मसि स्थातर्हरीणाम्.. (९) हे इंद्र! आप बहुत धनवान, श्रेष्ठ कर्म करने वाले व हरि नामक घोड़े वाले हैं. हमारी रक्षा करिए. हम आप के अपने हैं. (९) नौवां खंड उत्त्वा मन्दन्तु सोमाः कृणुष्व राधो अद्रिवः. अव ब्रह्मद्विषो जहि.. (१) हे इंद्र! सोमरस आप को आनंद दे. हे वज्रधारी इंद्र! आप हम पर धन बरसाइए. आप ब्राह्मणों के द्वेषियों का नाश कीजिए. (१) गिर्वणः पाहि नः सुतं मधोर्धाराभिरज्यसे. इन्द्र त्वादातमिद्यशः.. (२) हे इंद्र! आप स्तुति करने योग्य हैं. आप हमारे छाने हुए इस सोमरस को पीजिए. आप को सोम की धारा से सींचा जाता है. हमें आप की कृपा से शुद्ध किया हुआ अन्न (धन) प्राप्त होता है. (२) सदा व इन्द्रश्चर्कृषदा उपो नु स सपर्यन्. न देवो वृतः शूर इन्द्रः.. (३) हे यजमानो! इंद्र हमेशा आप के पास हैं. वे पूजा किए जाने पर आप के यज्ञ की ओर आते हैं. हम ने महान इंद्र का वरण किया है. (३) ebook converter DEMO Watermarks*
आ त्वा विशन्त्विन्दवः समुद्रमिव सिन्धवः. न त्वामिन्द्राति रिच्यते.. (४) हे इंद्र! जैसे नदियां समुद्र में मिलती हैं, वैसे ही सोमरस आप में मिलता है. आप से बढ़ कर कोई महान नहीं है. (४) इन्द्रमिद्गाथिनो बृहदिन्द्रमर्केभिरर्किणः. इन्द्रं वाणीरनूषत.. (५) सामगान गाते हुए उद्गाता (साम गाने वाले पुरोहित) बृहतसाम गा कर इंद्र को प्रसन्न करते हैं. पूजा करने वाले मनुष्य स्तोत्रों से और हम यजमान मंत्रों के द्वारा उन्हें प्रसन्न करते हैं. (५) इन्द्र इषे ददातु न ऋभुक्षणमृभु ॐ रयिम्. वाजी ददातु वाजिनम्.. (६) हम जिस इंद्र की स्तुति कर रहे हैं, वे हमें श्रेष्ठ धन प्रदान करें. इंद्र हमें उन ऋभु देवता को प्रदान करें, जो सोमरस पीने से अमर हो गए. बलवान इंद्र! हमें बलवान छोटे भाई दें ताकि हम अन्न प्राप्त कर सकें. (६) इन्द्रो अङ्ग महद्भयमभी षदप चुच्यवत्. स हि स्थिरो विचर्षणिः.. (७) हे इंद्र! आप स्थिर हैं. आप सारे संसार को देखने वाले व ज्ञानी हैं. आप शीघ्र ही भय को दूर करने वाले तो हैं ही, साथ ही भय को हमेशा के लिए हटा देते हैं. (७) इमा उ त्वा सुतेसुते नक्षन्ते गिर्वणो गिरः. गावो वत्सं न धेनवः.. (८) हे इंद्र! आप ऋचा (मंत्रों) से स्तुति करने योग्य हैं. प्रत्येक यज्ञ में हमारी प्रार्थनाएं आप के पास वैसे ही जल्दी पहुंचती हैं, जैसे दुधारू गाएं अपने बछड़ों के पास पहुंचती हैं. (८) इन्द्रा नु पूषणा वय ॐ सख्याय स्वस्तये. हुवेम वाजसातये.. (९) इंद्र और पूषा देवता को अपने कल्याण के लिए बुलाते हैं. हम मित्रता के लिए उन्हें बुलाते हैं. हम अन्न व जल की प्राप्ति के लिए इन दोनों देवताओं को बुलाते हैं. (९) न कि इन्द्र त्वदुत्तरं न ज्यायो अस्ति वृत्रहन्. न क्येवं यथा त्वम्.. (१०) हे इंद्र! आप वृत्र नामक असुर को मारने वाले हैं. इंद्रलोक में भी आप से श्रेष्ठ कोई नहीं है. आप जैसा महान कोई दूसरा नहीं है. (१०) दसवां खंड तरणिं वो जनानां त्रदं वाजस्य गोमतः. समानमु प्र श ॐ सिषम्.. (१) हे यजमानो! इंद्र हमारा बेड़ा पार लगाने वाले हैं. वे हमारे शत्रुओं को भय दिखाने वाले हैं. वे पशु धन देने वाले हैं. वे अन्नधन देने वाले हैं. मैं उन की सदा स्तुति करता हूं. (१) असृग्रमिन्द ते गिरः प्रति त्वामुदहासत. सजोषा वृषभं पतिम्.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*
हे इंद्र! आप के लिए हम ने स्तुतियां रची हैं. आप बलशाली हैं. सब का पालनपोषण करने वाले हैं. वे स्तुतियां आप तक पहुंचीं. सोम पीने वाले इंद्र ने उन का भी सेवन किया. (२) सुनीथो घा स मर्त्यो यं मरुतो यमर्यमा. मित्रास्पान्त्यद्रुहः.. (३) हे इंद्र! द्रोह (द्वेष) न करने वाले मरुत्, अर्यमा और मित्र देवता जिस की रक्षा करते हैं, वह यजमान निश्चय ही अच्छी राह पर चलने वाला होता है. (३) यद्दीडाविन्द्र यत्स्थिरे यत्पर्शाने पराभृतम्. वसु स्पार्हं तदा भर.. (४) हे इंद्र! आप के पास जो अचंचल और स्थिर धन है, ऐसा ही पुरुषार्थ वाला धन हमें प्रदान कीजिए. (४) श्रुतं वो वृत्रहन्तमं प्र शर्धं चर्षणीनाम्. आशिषे राधसे महे.. (५) वृत्रासुर को मारने वाले बल की महिमा सब ने सुनी है. मनुष्य को अच्छा धन प्राप्त कराने की इच्छा से वह बल आप को देता हूं. (५) अरं त इन्द्र श्रवसे गमेम शूर त्वावतः. अरं ॐ शक्र परेमणि.. (६) हे इंद्र! आप वीर हैं. आप की प्रसिद्धि हम ने कई बार सुनी है. आप जैसे श्रेष्ठ दूसरे देवता की प्रसिद्धि भी हमें प्राप्त हो. (६) धानावन्तं करम्भिणमपूपवन्तमुक्थिनम्. इन्द्र प्रातर्जुषस्व नः.. (७) हे इंद्र! दही और भुजे हुए सत्तूओं वाले यज्ञ के पुरोडाश (प्रसाद) की हवि हम मंत्र के साथ समर्पित कर रहे हैं. आप इस सोम को प्रातःकाल ग्रहण कीजिए. (७) अपां फेनेन नमुचेः शिर इन्द्रोदवर्तयः. विश्वा यदजय स्पृधः.. (८) जब डाह करने वाली राक्षसों की सारी सेना को इंद्र ने हरा दिया तब आप ने जल के झाग से नमुचि राक्षस का सिर तोड़ (काट) दिया. (८) इमे त इन्द्र सोमाः सुतासो ये च सोत्वाः. तेषां मत्स्व प्रभूवसो.. (९) हे इंद्र! आप के लिए यह सोमरस निचोड़ व छान कर तैयार किया है. आप बहुत धनवान हैं. आप सोमरस से प्रसन्न होने की कृपा करें. (९) तुभ्य ॐ सुतासः सोमाः स्तीर्णं बर्हिर्विभावसो. स्तोतृभ्य इन्द्र मृडय.. (१०) हे इंद्र! आप तेजस्वी व धनवान हैं. आसन पर शुद्ध सोमरस रखा हुआ है. आप कुशासन पर बैठिए. सोमरस पीजिए. स्तुति करने वालों को सुख (अपनी कृपा) दीजिए. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*
ग्यारहवां खंड आ व इन्द्रं कृविं यथा वाजवन्तः शतक्रतुम्. म ꣳ हिष्ठ ꣳ सिञ्च इन्दुभिः.. (१) हे यजमानो! जैसे अन्न चाहने वाले खेत को जल से सींचते हैं, वैसे ही बल (पराक्रम) चाहने वाले हम पूजनीय इंद्र को सोमरस से सींचते हैं. (१) अतश्चिदिन्द्र न उपा याहि शतवाजया. इषा सहस्रवाजया.. (२) हे इंद्र! आप सैकड़ों प्रकार के बल से पूर्ण हो कर हमारे यज्ञ में पधारिए. आप हजारों प्रकार के अन्न से युक्त हो कर हमारे यज्ञ में पधारिए. आप अनेक रस ले कर हमारे यज्ञ में पधारिए. (२) आ बुन्दं वृत्रहा ददे जातः पृच्छाद्विमातरम्. क उग्राः के ह शृण्विरे.. (३) हे यजमानो! जन्म लेते ही हाथ में बाण ले कर वृत्रासुर को मारने वाले इंद्र ने अपनी मां से पूछा कि अन्य प्रसिद्ध वीर कौनकौन से हैं. (३) बृबदुक्थ ꣳ हवामहे सूप्रकरस्नमूतये. साधः कृण्वन्तमवसे.. (४) लोक की रक्षा और पालन के लिए हम साधन सहित इंद्र को आमंत्रित करते हैं. इंद्र की बहुत स्तुति की जाती है. (४) ऋजुनीती नो वरुणो मित्रो नयति विद्वान्. अर्यमा देवैः सजोषाः.. (५) मित्र और वरुण देवता हमें सरल गति से न्याय के उत्तम पथ पर ले जाते हैं. अन्य देवताओं के साथ अर्यमा देवता भी सरल गति से हमें उस स्थान पर पहुंचाएं. (५) दूरादिहेव यत्सतो ऽ रुणप्सुरशिश्वितत्. वि भानुं विश्वथातनत्.. (६) दूर आकाश से पास आती उषा प्रकाश फैलाने वाली है, जिस से सारा जग प्रकाशित हो जाता है. (६) आ नो मित्रावरुणा घृतैर्गव्यूतिमुक्षतम्. मध्वा रजा ꣳ सि सुक्रतू.. (७) मित्र और वरुण देवता अच्छे काम करने वाले हैं. ये देवता हमारी गायों के समूह को घी, दूध से सींचें. ये देवता परलोकों को भी मधुर रस (अमृत) से सींचें. (७) उदु त्ये सूनवो गिरः काष्ठा यज्ञेष्वत्नत. वाश्रा अभिज्ञु यातवे.. (८) प्रसिद्ध गर्जना करते हुए मरुत् देवता यज्ञ में जल के समान फैलते हैं. जल का विस्तार करते हैं. उस जल को पीने के लिए रंभाती हुई गायों के समूह को घुटनों तक के पानी से जाना पड़ता है. (८) इदं विष्णुर्वि चक्रमे त्रेधा नि दधे पदम्. समूढमस्य पा ꣳ सुले.. (९) ebook converter DEMO Watermarks*
विष्णु के वामन अवतार ने तीन पैरों से विश्व को नाप लिया. उन के धूल से भरे चरणों के नापे गए स्थान में सारा जग समाया. (९) बारहवां खंड अतीहि मन्युषाविण २४ सुषुवा २४ समुपेरय. अस्य रातौ सुतं पिब.. (१) हे इंद्र! जो यजमान क्रोधित हो कर सोमरस निचोड़े, आप उसे स्वीकार मत कीजिए. जो अच्छे विधिविधान से सोमरस निचोड़े, आप उसी के यज्ञ में सोमरस ग्रहण कीजिए. (१) कदु प्रचेतसे महे वचो देवाय शस्यते. तदिद्ध्यस्य वर्धनम्.. (२) हे इंद्र! आप महान हैं. आप की कृपा से हमारी मामूली प्रार्थना भी प्रशंसा पाती है. हमारी ये प्रार्थनाएं भी आप का गुणगान करती हैं. अतः यजमान पर आप की कृपा होती है. (२) उक्थं च न शस्यमानं नागो रयिरा चिकेत. न गायत्रं गीयमानम्.. (३) स्तुति न करने वाले इंद्र के शत्रु हैं. इंद्र यजमानों द्वारा पढ़े गए स्तोत्रों को अच्छी तरह जानते हैं. इंद्र पुरोहित के गाए गए साम को भी जानते व समझते हैं. हम इंद्र की स्तुति करते हैं. (३) इन्द्र उक्थेभिर्मन्दिष्ठो वाजानां च वाजपतिः. हरिवांत्सुताना २४ सखा.. (४) हे इंद्र! आप शक्तिशालीयों में सब से ज्यादा शक्तिशाली हैं. आप हरि नामक घोड़े वाले हैं. आप प्रार्थनाओं से बहुत प्रसन्न होते हैं. आप सोमरस से मित्र के समान स्नेह रखने की कृपा करें. (४) आ याह्युप नः सुतं वाजेभिर्मा हृणीयथाः. महाँ इव युवजानिः.. (५) हे इंद्र! जिस प्रकार युवा स्त्री (पत्नी) वाला पुरुष किसी दूसरी स्त्री पर नजर नहीं डालता, उसी प्रकार आप भी औरों की हवि पर नजर मत डालिए (मत ललचाइए). आप हमारे ही सोम यज्ञ में पधार कर हवि ग्रहण करने की कृपा करें. (५) कदा वसो स्तोत्र २४ हर्यत आ अव श्मशा रुधद्द्वाः. दीर्घ २४ सुतं वाताप्याय.. (६) हे इंद्र! आप सब ओर व्यापक हैं. बनाई गई नहर में जल रोकने की तरह हम सोमरस तैयार कर के आप को भेंट करने के लिए कब रोकें. (६) ब्राह्मणादिन्द्र राधसः पिबा सोममृतू २४ रनु. तवेद २४ सख्यमस्तृतम्.. (७) हे इंद्र! ब्राह्मण यजमान से सोमरस पीजिए. आप मौसम के अनुसार सोमरस पीजिए. आप का और हमारा अटूट नाता है. (७) ebook converter DEMO Watermarks*
वयं घा ते अपि स्मसि स्तोतार इन्द्र गिर्वणः. त्वं नो जिन्व सोमपाः.. (८) हे इंद्र! हम आप के प्रशंसक व पूजक हैं. आप सोम पान करने वाले हैं. आप हमें संतुष्टि (तृप्ति) प्रदान कीजिए. (८) एन्द्र पृक्षु कासु चिन्नृम्णं तनूषु धेहि नः. सत्राजिदुग्र पौरुष्यम्.. (९) हे इंद्र! आप बहुत शक्तिमान हैं. आप हमारे अंगों में शक्ति दीजिए, हमें ऐसी शक्ति दीजिए जिस से हम अपने सारे शत्रुओं को एक साथ जीत सकें. (९) एवा ह्यसि वीरयुरेवा शूर उत स्थिरः. एवा ते राध्यं मनः.. (१०) हे इंद्र! आप वीर व अडिग हैं. आप वीर शत्रुओं का भी नाश कर सकते हैं. आप धैर्यवान हैं. आप का मन स्तुतियों से आराधना करने योग्य है. (१०)
तीसरा अध्याय
तीसरा अध्याय पहला खंड अभि त्वा शूर नोनुमो ऽ दुग्धा इव धेनवः. ईशानमस्य जगतः स्वर्द्दशमीशानमिन्द्र तस्थुषः.. (१) हे इंद्र! आप इस जग के व जड़चेतन के स्वामी हैं. आप सब कुछ देख सकते हैं. जैसे थनों में दूध लिए गाएं बछड़ों के पास जाने के लिए उतावली रहती हैं, वैसे ही हम उतावले हो कर आप को प्रणाम करते हैं. (१) त्वामिद्धि हवामहे सातौ वाजस्य कारवः. त्वां वृत्रेष्विन्द्र सत्पतिं नरस्त्वां काष्ठास्वर्वतः.. (२) हे इंद्र! स्तुति करने वाले यजमान हवि दान के लिए आप को आमंत्रित करते हैं. आप सत्य (या सज्जनों) के पालनहार हैं. हम तथा दूसरे सभी शत्रु या घोड़ों से संबंधित युद्धों में मदद के लिए आप को ही पुकारते हैं. (२) अभि प्र वः सुराधसमिन्द्रमर्च यथा विदे. यो जरितृभ्यो मघवा पुरूवसुः सहस्रेणेव शिक्षति.. (३) हे यजमानो! इंद्र पशु आदि बहुत प्रकार के धन वाले हैं. वे अपनी स्तुति करने वाले को बहुविध धन देते हैं. आप श्रेष्ठ धन देने वाले इंद्र की हर प्रकार से पूजाअर्चना करें. (३) तं वो दस्ममृतीषहं वसोर्मन्दानमन्धसः. अभि वत्सं न स्वसरेषु धेनव इन्द्रं गीर्भिर्नवामहे.. (४) हे यजमानो! जैसे गाएं बछड़ों को देख कर खुशी से रंभाती हैं, वैसे ही आप भी सोमरस पीने से प्रसन्न इंद्र के लिए स्तुति गाइए. वे शत्रुओं (दुःखों) का नाश करने वाले हैं. (४) तरोभिर्वो विदद्वसुमिन्द्र २३ सबाध ऊतये. बृहद्गायन्तः सुतसोमे अध्वरे हुवे भरं न कारिणम्.. (५) हे यजमानो! इंद्र के बहुत तेज गति वाले घोड़े हैं. वे इंद्र बहुत धनदाता हैं. वे बाधाओं से हमारी रक्षा करते हैं. हम बृहतसाम गाते हुए उन को उसी प्रकार रक्षा के लिए बुलाते हैं, जैसे बच्चे अपनी रक्षा के लिए अपने मातापिता को बुलाते हैं. (५) तरणिरित्सिषासति वाजं पुरन्ध्या युजा. ebook converter DEMO Watermarks*
आ व इन्द्रं पुरुहूतं नमे गिरा नेमिं तष्टेव सुद्रुवम्.. (६) इंद्र तारनहार हैं. हम बुद्धि से अन्न प्राप्त करना चाहते हैं. जैसे बढ़ई अपनी कारीगरी से लकड़ी को नम्र कर के पहिए को गाड़ी के अनुकूल कर लेता है, वैसे ही हम इंद्र देव को अपनी स्तुतियों से अपने अनुकूल करना चाहते हैं. (६) पिबा सुतस्य रसिनो मत्स्वा न इन्द्र गोमतः. आपिनों बोधि सधमाद्ये वृधे ३ ऽ स्मां अवन्तु ते धियः.. (७) हे इंद्र! आप गाय का दूध मिला कर तैयार किए हुए रसीले सोमरस को पीजिए. उसे पी कर आप प्रसन्न होइए. आप हमें धन देने वाले बंधु बनिए. आप हमें प्रगति की राह दिखाइए. आप की बुद्धि हम यजमानों की रक्षा करे. (७) त्व २४ ह्येहि चेरवे विदा भगं वसुत्तये. उद्वावृषस्व मघवन् गविष्टय उदिन्द्राश्वमिष्टये.. (८) हे इंद्र! आप मुझे धन देने के लिए आइए. अच्छे आचारविचार वाले हम लोगों को राह दिखाइए व धन दीजिए. हम गायों के इच्छुक हैं. हमें गोधन दीजिए. हम घोड़ों के इच्छुक हैं. हमें अश्वधन दीजिए. (८) न हि वश्चरमं च न वसिष्ठः परिम २४ सते. अस्माकमद्य मरुतः सुते सचा विश्वे पिबन्तु कामिनः.. (९) हे मरुद्गणो! वसिष्ठ ऋषि आप में से छोटों को भी छोड़ कर स्तुति नहीं करते हैं अर्थात् छोटों की भी स्तुति करते हैं. आज हमारे इस सोम यज्ञ में आप सभी इकट्ठे हो कर सोमरस पीजिए. (९) मा चिदन्यद्वि श २४ सत सखायो मा रिषण्यत. इन्द्रमित्स्तोता वृषण सचा सुते मुहुरुक्था च श २४ सत.. (१०) हे यजमानो! आप इंद्र के अलावा किसी अन्य देव की स्तुति मत करो. बेकार मेहनत मत करो. एक साथ सोम यज्ञ में बलवान इंद्र की ही स्तुति करो. उन्हीं के बारे में प्रार्थनाओं को बारबार उचारो. (१०) दूसरा खंड नकिष्टं कर्मणा नशद्यश्चकार सदावृधम्. इन्द्रं न यज्ञैर्विश्वगूर्तमृभ्वसमधृष्टं धृष्णुमोजसा.. (१) हे यजमानो! इंद्र सदा उन्नतिशील व समृद्ध हैं. वे सब से पूजित और महान बलशाली हैं. किसी से नहीं दबने वाले व शत्रुनाशक हैं. जो यज्ञ से इंद्र को अपने अनुकूल बना लेता है, उसे कोई भी नहीं दबा सकता है. (१) ebook converter DEMO Watermarks*
य ऋते चिदभिश्रिषः पुरा जत्रुभ्य आतृदः. सन्धाता सन्धिं मघवा पुरूवसुर्निष्कर्ता विहुत पुनः.. (२) हे इंद्र! आप गले की नाड़ियों को खून निकलने पर भी बिना जोड़ने की सामग्री के ही जोड़ सकते हैं. इंद्र बहुत वैभव वाले हैं. वे कटे हुए भागों को फिर से जोड़ सकते हैं. (२) आ त्वा सहस्रमा शतं युक्ता रथे हिरण्यये. ब्रह्मयुजो हरय इन्द्र केशिनो वहन्तु सोमपीतये.. (३) हे इंद्र! आप के घोड़े मंत्र के प्रभाव से रथ में जुत जाते हैं. आप के घोड़ों की गरदन पर लंबे-लंबे बाल हैं. वे सैकड़ों घोड़े आप के सुनहरे रथ में जुत जाएं और सोमपान के लिए आप को यज्ञ में ले आएं, यह अनुरोध है. (३) आ मन्द्रैरिन्द्र हरिभिर्याहि मयूररोमभिः. मा त्वा के चिन्नि येमुरिन्न पाशिनो ऽ ति धन्वेव तां इहि.. (४) हे इंद्र! जैसे राहगीर शीघ्र ही रेगिस्तान को पार कर लेता है, वैसे ही आप भी मोर जैसे रोम वाले घोड़ों से यहां आइए. जाल फैलाने वाले शिकारी आप की राह में रोड़ा न अटका सकें. (४) त्वमङ्ग प्र श ंश सिषो देवः शविष्ठ मर्त्यम्. न त्वदन्यो मघवन्नस्ति मर्दितेंद्र ब्रवीमि ते वचः.. (५) हे इंद्र! आप बलवान व प्रकाश वाले हैं. आप अपने पूजकों की प्रशंसा करते हैं. आप धनवान हैं. आप के अलावा कोई सुख देने वाला नहीं है. इसी कारण मैं आप की स्तुति करता हूं. (५) त्वमिन्द्र यशा अस्यृजीषी शवसस्पतिः. त्वं वृत्राणि ह ंश स्यप्रतीन्येक इत्पुर्व्वनुत्तश्चर्षणीधृतिः.. (६) हे इंद्र! आप शक्तिशाली हैं. आप सोमरस पीने वाले और यशवान हैं. आप यजमानों के हित के लिए बड़े से बड़े शत्रु को भी अकेले ही नष्ट कर सकते हैं. (६) इन्द्रमिद्देवतातय इन्द्रं प्रत्यत्यध्वरे. इन्द्र ंश समीके वनिनो हवामह इन्द्रं धनस्य सातये.. (७) देवों के लिए किए जाने वाले यज्ञ में हम इंद्र को ही आमंत्रित करते हैं. यज्ञ के शुरू और समापन दोनों ही समय हम इंद्र को आमंत्रित करते हैं. धन लाभ के लिए हम इंद्र को ही आमंत्रित करते हैं. आप शीघ्र पधारिए. (७) इमा उ त्वा पुरूवसो गिरो वर्धन्तु या मम. पावकवर्णाः शुचयो विपश्चितो ऽ भिस्तोमैरनूषत.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*
हे इंद्र! आप धनवान हैं. हमारी प्रार्थनाएं आप का यश बढ़ाएं. यजमान अग्नि के समान पवित्र, तेजस्वी व विद्वान् हैं. वे प्रार्थनाओं से बारबार आप की स्तुति करते हैं. (८) उदु त्ये मधुमत्तमा गिर स्तोमास ईरते. सत्राजितो धनसा अक्षितोतयो वाजयन्तो रथा इव.. (९) हे इंद्र! आप हमेशा शत्रुओं को जीतने वाले व धन देने वाले हैं. आप का दिया संरक्षण कभी खत्म नहीं होता. बलशाली रथ के समान ये प्रार्थनाएं आप की ओर बढ़ रही हैं. ये प्रार्थनाएं मधुर और श्रेष्ठ वचनों से भरी हुई हैं. (९) यथा गौरो अपा कृतं तृष्यन्नेत्यवेरिणम्. आपित्वे नः प्रपित्वे तूयमा गहि कण्वेषु सु सचा पिब.. (१०) हे इंद्र! जैसे प्यासे गौर हिरण पानी से भरे हुए तालाब के पास जाते हैं, उसी प्रकार आप हमारी प्रार्थनाओं से भरेपूरे यज्ञ में पधारिए. कण्व के यज्ञ में जल्दी से जल्दी आइए. सोमरस पी कर प्रसन्न होइए. (१०) तीसरा खंड शग्ध्यू ३ षु शचीपत इन्द्र विश्वाभिरूतिभिः. भगं न हि त्वा यशसं वसुविद्मनु शूर चरामसि.. (१) हे इंद्र! आप शची के पति हैं. आप पराक्रमी हैं. आप हमें संरक्षण के साथसाथ चाहे गए वरदान दीजिए तथा सौभाग्य जैसा यशस्वी धन दीजिए. हम आप की आराधना करते हैं. (१) या इन्द्र भुज आभरः स्वर्वाँ असुरेभ्यः. स्तोतारमिन्मघवन्नस्य वर्धय ये च त्वे वृक्तबर्हिषः.. (२) हे इंद्र! आप आत्म शक्ति वाले हैं. आप ने बलवान राक्षसों से भोग के साधन जीते हैं. इस धन से आप अपने पूजकों को संरक्षण दीजिए. जो आप को बारबार आमंत्रित या याद करते हैं, आप उन्हें धनवान बनाइए. (२) प्र मित्राय प्रार्यम्णे सचथ्यमृतावसो. वरूथ्ये ३ वरुणे छन्द्यं वचः स्तोत्र २४ राजसु गायत.. (३) हे यज्ञ करने वालो! आप का धन आप के यज्ञ हैं. आप मित्र, वरुण और अर्यमा देवता के लिए छंदबद्ध प्रार्थनाएं उन के यज्ञशाला में विराजमान हो जाने पर गाइए. (३) अभि त्वा पूर्वपीतय इन्द्र स्तोमेभिरायवः. समीचीनास ऋभवः समस्वरन्नुदा गृणन्त पूर्व्यम्.. (४) हे इंद्र! प्रार्थना करने वाले यजमान सब से पहले आप सभी देवताओं से स्तोत्र के ebook converter DEMO Watermarks*
वृत्र ँह हनति वृत्रहा शतक्रतुर्वज्रेण शतपर्वणा.. (५)
माध्यम से सोमरस पीने का निवेदन करते हैं. सब ने इकट्ठे हो कर आप की आराधना की. रुद्र के पुत्र मरुत् ने भी आदि पुरुष (पहले पुरुष) के रूप में आप की स्तुति की. (४) प्र व इन्द्राय बृहते मरुतो ब्रह्मार्चत. वृत्र ँह हनति वृत्रहा शतक्रतुर्वज्रेण शतपर्वणा.. (५) हे यजमानो! आप अपने इंद्र के लिए स्तुति करो. इंद्र वृत्रासुर के नाशक हैं. वे सौ धारों वाले वज्र से राक्षसों (कष्टों) का नाश करें. (५) बृहदिन्द्राय गायत मरुतो वृत्रहन्तमम्. येन ज्योतिरजनयन्नृतावृधो देवं देवाय जागृवि.. (६) हे याजको! इंद्र के लिए बृहतसाम स्तोत्र का पाठ कीजिए. यज्ञ को बढ़ाने वाले ऋषियों ने उस के सहयोग से इंद्र के लिए दिव्य ज्योति पैदा की है. (६) इन्द्र क्रतुं न आ भर पिता पुत्रेभ्यो यथा. शिक्षा णो अस्मिन्पुरुहूत यामनि जीवा ज्योतिरशीमहि.. (७) हे इंद्र! हमें यज्ञ कार्य करने की शिक्षा दीजिए, जैसे पिता अपने पुत्र को शिक्षा देता है. यानी हमें शिक्षा रूपी धन दीजिए. हम प्रतिदिन सुबह सूर्य के दर्शन करें. (७) मा न इन्द्र परा वृणग्भवा नः सधमाद्ये. त्वं न ऊती त्वमिन्न आप्यं मा न इन्द्र परावृणक्.. (८) हे इंद्र! आप हम यज्ञ करने वालों को कभी मत छोड़िए. आप हमारे संरक्षक हैं. आप हमारे बंधु हैं. आप हमें अपनी शरण में रखिए. आप कभी अपनेआप से हमें दूर मत करिए. (८) वयं घ त्वा सुतावन्त आपो न वृत्तबर्हिषः. पवित्रस्य प्रस्रवणेषु वृत्रहन्परि स्तोतार आसते.. (९) हे इंद्र! आप वृत्रासुर के नाशक हैं. जैसे जल नीचे की ओर बहता है, वैसे ही सोमरस के साथ हम आप को नीचे झुक कर नमस्कार करते हैं. पवित्र यज्ञ में सभी यजमान कुश के आसन पर बैठ कर आप की आराधना करते हैं. (९) यदिन्द्र नाहुषीष्वा ओजो नृम्णं च कृष्टिषु. यद्वा पञ्चक्षितीनां द्युम्नमा भर सत्रा विश्वानि पौ ँह स्या.. (१०) हे इंद्र! मनुष्यों में जो धन व पांच भूमियों का चमकता हुआ अन्न है, वह सब हमें दीजिए. हमें आप सब प्रकार के बल (शक्ति) भी दीजिए. (१०) चौथा खंड
सत्यमित्था वृषेदसि वृषजूतिनो ऽ विता. वृषा ह्युग्र शृण्विषे परावति वृषो अर्वावति श्रुतः.. (१) हे इंद्र! निश्चय ही आप वीर व मनोकामना पूरी करने वाले हैं. सोम यज्ञ करने वाले यजमानों ने अपनी रक्षा के लिए आप को बुलाया है. आप हमारी रक्षा कीजिए. आप की प्रसिद्धि पास भी है और बहुत दूरदूर तक भी फैली हुई है. (१) यच्छक्रासि परावति यदर्वावति वृत्रहन्. अतस्त्वा गीर्भिर्द्युगदिन्द्र केशिभिः सुतावाँ आ विवासति.. (२) हे इंद्र! आप वृत्रासुर नाशक हैं. आप हमारे पास हों चाहे दूर, पर हम सोम यज्ञ करने वाले यजमान आप को आमंत्रित करते हैं. हम गरदन पर सुंदर बाल वाले घोड़ों के समान अपनी श्रेष्ठ स्तुतियों से आप को बुलाते हैं. (२) अभि वो वीरमन्धसो मदेषु गाय गिरा महा विचेतसम्. इन्द्रं नाम श्रुत्य शाकिनं वचो यथा.. (३) हे यजमानो! आप अपने हित के लिए इंद्र की स्तुति करो. वे राक्षसों को जीतने वाले हैं. वे सोमरस से खुश होने वाले हैं. वे यशस्वी, वीर व बुद्धिमान हैं. आप ऐसे इंद्र की जैसे भी हो विशेष स्तुति करो. (३) इन्द्र त्रिधातु शरणं त्रिवरूथ स्वस्तये. छर्दिर्र्यच्छ मघवद्भ्यश्च मह्यं च यावया दिद्युमेभ्यः.. (४) हे इंद्र! आप धनवान यजमानों को और मुझे तीनों ऋतुओं में सुखदायी कल्याणकारी तीन मंजिला घर दीजिए. इन्हें पाने के लिए हमें शस्त्रों का प्रयोग न करना पड़े. (४) श्रायन्त इव सूर्यं विश्वेदिन्द्रस्य भक्षतः. वसूनि जातो जनिमान्योजसा प्रति भागं न दीधिमः.. (५) हे यजमानो! जैसे सारी किरणें सूर्य के सहारे रहती हैं, वैसे ही सारा संसार इंद्र के सहारे है. हम भी उन्हीं के सहारे हैं. जैसे पिता के धन में संतान की भागीदारी होती है, वैसे ही इंद्र के धन में हमारी भागीदारी हो. इंद्र उत्पन्न हुए और उत्पन्न होने वालों को बल से भाग प्रदान करते हैं. (५) न सीमदेव आप तदिषं दीर्घायो मर्त्यः. एतग्वा चिद्य एतशो युयोजत इन्द्रो हरी युयोजते.. (६) हे इंद्र! आप चिरायु हैं. आप के प्रति श्रद्धा के बिना मनुष्य उस श्रेष्ठ अन्न को नहीं पा सकता है. जो इंद्र को पाने के लिए अपनी स्तुतियों के घोड़े नहीं जोड़ता है, इंद्र भी उस के यज्ञ में जाने के लिए हरि तथा अन्य घोड़ों को नहीं जोड़ते हैं. (६) ebook converter DEMO Watermarks*
आ नो विश्वासु हव्यमिन्द्र 28 समत्सु भूषत. उप ब्रह्माणि सवनानि वृत्रहन्परमज्या ऋचीषम.. (७) हे इंद्र! युद्धों में सहायता के लिए आप को बुलाया जाता है. आप हमारी प्रशंसा, प्रार्थनाओं से सुशोभित होते हैं. आप वृत्रासुर नाशक हैं. आप के धनुष की प्रत्यंचा अविनाशी है. आप तीनों समय की संध्याओं की प्रार्थनाओं को शोभित कीजिए. (७) तवेदिन्द्रावमं वसु त्वं पुष्यसि मध्यमम्. सत्रा विश्वस्य परमस्य राजसि न किष्ट्वा गोषु वृण्वते.. (८) हे इंद्र! आप निम्न, मध्यम और उत्तम सभी तरह के धनों के अकेले स्वामी हैं. आप जब गाय आदि अपने यजमानों को दान करना चाहते हैं तो आप को कोई भी नहीं रोक सकता है. (८) क्वेयथ क्वेदसि पुरुत्रा चिद्धि ते मन:. अलर्षि युध्म खजकृत्पुरंदर प्र गायत्रा अगासिषु:.. (९) हे इंद्र! आप पहले कहां चले गए थे? आप इस समय कहां हैं? आप बहुत जगह रमते (घूमते) रहते हैं. आप राक्षसों का नाश करने वाले हैं. हमारे यजमान प्रार्थना गाने में कुशल हैं. वे आप की स्तुति करते हैं. (९) वयमेनमिदा ह्यो ऽ पीपेमेह वज्रिणम्. तस्मा उ अद्य सवने सुतं भरा नूनं भूषत श्रुते.. (१०) हे इंद्र! हम ने कल भी आप को सोमरस भेंट किया था. हम आज भी यज्ञ में आप को सोमरस भेंट करते हैं. हे यजमानो! आप स्तोत्र गा कर इंद्र की शोभा बढ़ाइए. (१०) पांचवां खंड यो राजा चर्षणीनां याता रथेभिरध्रिगु:. विश्वासां तरुता पृतनानां ज्येष्ठं यो वृत्रहा गृणे.. (१) हे इंद्र! आप मनुष्यों के राजा हैं. आप के रथ की गति की कोई भी बराबरी नहीं कर सकता है. आप शत्रुओं की सेना और वृत्रासुर को मारने वाले हैं. हम सर्वश्रेष्ठ इंद्र की स्तुति करते हैं. (१) यत इन्द्र भयामहे ततो नो अभयं कृधि. मघवञ्छग्धि तव तन्न ऊतये वि द्विषो वि मृधो जहि.. (२) हे इंद्र! जिस से हम डरें आप उसी से हमें निडर बनाइए. हमें अभय दान दीजिए. हमारे शत्रुओं को और हमें मारने वालों को आप नष्ट कीजिए. (२)
वास्तोष्पते ध्रुवा स्थूणा ꣲ सत्र ꣲ सोम्यानाम्. द्रप्सः पुरां भेत्ता शश्वतीनामिन्द्रो मुनीना ꣲ सखा.. (३) हे इंद्र! आप घर के स्वामी हैं. हमारे घर के खंभे व सोम यज्ञ करने वालों का शरीर मजबूत हो. सोम पीने वाले राक्षसों की बहुत सी नगरियां उजाड़ने वाले इंद्र हम ऋषियों के मित्र हों. (३) वण्महाँ असि सूर्य बडादित्य महाँ असि. महस्ते सतो महिमा पनिष्टम महा देव महाँ असि.. (४) हे इंद्र! आप प्रेरणा देने वाले, बहुत तेजस्वी, अदिति के पुत्र व बहुत बलशाली हैं. हम सच कहते हैं कि आप बहुत महान हैं. (४) अश्वी रथी सुरूप इदगोमान् यदिन्द्र ते सखा. श्वात्रभाजा वयसा सचते सदा चन्द्रैर्याति सभामुप.. (५) हे इंद्र! जो आप को अपना मित्र बना लेता है, वह बहुत सुंदर रूप वाला हो जाता है. वह बहुत घोड़ों वाला हो जाता है. वह बहुत रथों वाला हो जाता है. वह बहुत गायों वाला हो जाता है. वह बहुत अन्न, धन वाला हो जाता है. वह सदा अच्छे वस्त्रों और आभूषणों से तैयार हो कर सभा में जाता है. (५) यद्द्याव इन्द्र ते शत ꣲ शतं भूमीरुत स्युः. न त्वा वज्रिन्तसहस्र ꣲ सूर्या अनु न जातमष्ट रोदसी.. (६) हे इंद्र! स्वर्गलोक सौ गुना हो जाए तो भी आप की बराबरी नहीं कर सकता. भूमिलोक (पृथ्वीलोक) सौ गुना हो जाए तो भी आप के समान नहीं हो सकता. हे वज्रधारी इंद्र! सौ सूर्य भी आप को प्रकाशित नहीं कर सकते. बाद में होने वाले भी आप की बराबरी नहीं कर सकते यानी आप के सामने कोई कुछ नहीं है. आप ही सब से बड़े हैं. (६) यदिन्द्र प्रागपागुदङ्न्यग्वा हूयसे नृभिः. सिमा पूरू नृषूतो अस्यानवे ऽ सि प्रशर्ध तुर्वशे.. (७) हे इंद्र! पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण सभी दिशाओं से मनुष्य आप को सहायता के लिए बुलाते हैं. आप शत्रुओं का नाश करने वाले हैं. अनु और तुर्वश के लिए स्तुतियों से आप को बुलाया जाता है. (७) कस्तमिन्द्र त्वा वसवा मर्त्यो दधर्षति. श्रद्धा हि ते मघवन्पार्ये दिवि वाजी वाज ꣲ सिषासति.. (८) हे इंद्र! आप सब को बसाने वाले हैं. आप को कौन डरा सकता है. आप के प्रति जो यजमान श्रद्धालु होता है, वह दुःख से पार होने पर भी हवि देने की इच्छा रखता है. (८) ebook converter DEMO Watermarks*