सम्पूर्ण चिकित्सा
Sampoorna Chikitsa
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा
स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)
- ● अर्जुन की छाल का 10 ग्राम पाउडर और पाषाणवैध का 10 ग्राम पाउडर लेकर 500 मिली पानी में उबालें और पानी आधा रहने पर ठंडा करके सुबह शाम पीयें। इससे हृदय घात की बीमारी दूर होती है।
- ● गाजर का रस निकालकर सूप बनाकर पीने से लाभ मिलता है।
- ● इस बीमारी में लहसुन का प्रयोग सर्वश्रेष्ठ हैं। खाने में पके रूप में और कच्चे रूप में भी ले सकते हैं
❖ मोटापा
शरीर में जब वसा की मात्रा बढ़ जाती है और वह शरीर में एकत्र होने लगती है तो इसी से मोटापा आता जाता है। वह एकत्र वसा ही मोटापा है। मोटापा आने के बाद शरीर में सुस्ती रहती है, थकान होने लगती है। इसी कारण शुगर, हृदय रोग, अपच, कब्ज आदि बीमारी होने लगती है।
- ● सुबह-शाम खाली पेट गर्म पानी में नींबू निचोड़कर, सेंधा नमक मिलाकर पीयें।
- ● 10 ग्राम सौंठ को शहद में मिलाकर चाटने से भी मोटापा कम होता है।
- ● मूली के सलाद में नींबू और नमक मिलाकर प्रतिदिन लें।
- ● खाने के बाद एक चुटकी काले तिल चबाकर खायें।
❖ खाज खुजली
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खाज-खुजली एक संक्रामक रोग है। जिसके कारण त्वचा पर छोटी-छोटी फुन्सियां निकल आती हैं और उनमें से पानी भी निकलता है। कभी-कभी पेट साफ न होने से, कब्ज रहने से तथा खून में अशुद्धि होने से भी ये खुजली पैदा होती है।
- ● नारियल के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर गरम करें और खुजली वाले स्थान पर लगायें।
- ● गाय के घी में कुछ लहसुन मिलाकर गर्म करें और उसकी मालिश खुजली वाले स्थान पर करें।
- ● नींबू के रस में पके हुए केले को मसलकर खुजली वाले स्थान पर लगायें।
- ● भुने हुए सुहागे को पानी में मिलाकर लगाने से खुजली में आराम मिलता है।
❖ फोड़ा फुन्सी
खून में विकार होने से फोड़े फुन्सी निकलते हैं। वर्षा ऋतु में अधिक आम खाने से या गंदे पानी में घूमने से फोड़े फुन्सी निकलते हैं।
- ● लौंग को चंदन के साथ घिसकर लगाने से फुन्सियों में लाभ होता है।
- ● नीम की पत्तियों की पुल्टीस बांधने से तथा नीम की छाल का पानी लगाने से फोड़े फुन्सी जल्दी ठीक हो जाते हैं।
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- ● फोडे-फुन्सियों पर लौंग धिसकर लगाने से आराम मिलता है।
- ● हल्दी के साथ शहद चाटें।
❖ दाद (छलन)
दाद रोग अपच होने, लू लगने, खून में विकार रहने, साबुन , चूने का अत्याधिक प्रयोग करने, माँ के दूध में खराबी होने से तथा स्त्रियों में मासिक धर्म की गड़बड़ियों की वजह से होता है। यह रोग हाथ, पैर, मुहँ, कोहनी, गर्दन, पेट आदि कहीं पर भी हो सकता है। लाल फुन्सियां शरीर पर हो जाती हैं।
- ● सबसे पहले अत्याधिक मिर्च मसाले, मिठाई, तेल और अचार, खट्टी चीजे खाना बंद करना चाहिए। क्योंकि यह पदार्थ रोग को बढ़ाते हैं। पेट साफ रखें और कब्ज न होने दें।
- ● नींबू के रस में सुहागे को मिलाकर लगाने से दाद समाप्त होता है।
- ● भूना हुआ सुहागा और भुनी हुई फिटकरी समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें और दाद पर लगायें।
- ●
❖ जलजाना
आग या किसी गर्म चीज से अचानक से जल जाने से शरीर में फफोले पड़ जाते हैं। घी, तेल, दूध, चाय, भाप, गर्म तवे से जलने से भी फफोले पड़ जाते हैं। काफी तेज जलन होती है। कभी-कभी फफोलों में मवाद भी आ जाता है।
- ● सबसे पहले जले हुए हिस्से को ठंडे पानी में डालकर रखें।
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- ● दही के पानी में थोड़ा सा चूना मिलाकर जले हुए स्थान पर लगायें। (तेल से जलने पर)
- ● आग से जल जाने पर तारपीन के तेल में कपूर मिलाकर लेप करें।
- ● नारियल के तेल में मोम मिलाकर गरम करें और ठंडा होने पर मरहम की तरह लगायें।
- ● मुल्लानी मिट्टी को दही में मिलाकर जले हुए स्थान पर लेप करें।
शरीर पर किसी भी तरह का घाव, बहुत गंभीर चोट
❖ मिरगी
शारीरिक तथा मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को मिरगी अधिकांश रूप से आती है। अत्याधिक शराब पीना, अधिक शारीरिक श्रम, सिर में चोट लगने से यह बीमारी हो सकती है। इस रोग में अचानक से दौरा पड़ता है और रोगी गिर पड़ती है। हाथ और गर्दन अकड़ जाती है, पलकें एक जगह रूक जाती हैं रोगी हाथ पैर पटकता है, जीभ अकड़ जाने से बोली नहीं निकलती, मुँह से पीला झाग निकलता है। चारों तरफ या तो काला अंधेरा दिखाई देता है या सब चीजें सफेद दिखाई देती हैं। इस तरह के दौरे 10-15 मिनट से लेकर 1-2 घंटे तक के भी हो सकते हैं।
- ● दौरा पड़ने पर रोगी को दायीं करवट लिटायें ताकि उसके मुँह से सभी झाग आसानी से निकल जायें। दौरा पड़ने के समय रोगी को कुछ भी न खिलायें बल्कि दौरे के समय अमोनिया या चुने की गंध सुघानी चाहिए, इससे उसकी बेहोशी दूर हो सकती है।
- ● ब्रह्मी बूटी का रस 1 चम्मच प्रतिदिन सुबह-शाम पिलाने से आधा रहने पर हल्का सा संधा नमक मिलाकर दिन में 2 बार पिलायें।
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- ● नीम की कोमल पत्तियाँ, अजवायन और काला नमक इन सबको पानी में पीसकर पेस्ट बनाकर सेवन करें।
- ● तुलसी के 4-5 पत्ते कुचलकर उसमें कपूर मिलाकर रोगी को सुंघाये।
❖ लकवा
लकवा/पक्षाघात होने पर रोगी का आधा शरीर संवेदनहीन हो जाता है। पेट में अधिक गैस बनने, मस्तिष्क पर वायु का दबाव पड़ने और हृदय पर वायु का दबाव बढ़ने से शरीर पर वायु का झटका लगता है। स्नायु शिथिल हो जाते हैं। शरीर का आधा भाग टेढ़ा हो जाता है।
- ● 250 मिली गाय के दूध में 8-10 लहसुन की कलियाँ डालकर उबालें। गाढ़ा होने पर रोगी को पिलायें।
- ● 250 ग्राम सरसों के तेल में थोड़ी काली मिर्च पीसकर डालें और मालिश करें।
- ● तुलसी के 8-10 पत्ते, सेंधा नमक और दही की चटनी बनाकर लकवे वाले स्थान पर लेप करें।
- ● सौंठ और उड़द उबालकर उसका पानी पीने से लकवे में काफी लाभ होता है।
❖ आधा सीसी
आधा सीसी का दर्द अधिकांशतः दिन में ही होता है। यह अत्याधिक मानसिक श्रम, पेट में वायु के बने रहने से शरीर में धातु दोष होने से होता है। यह पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक होता है। आधा सीसी का रोग सिर के आधे हिस्से में ही होता है और काफी ते दर्द होता है और रोगी बैचेन हो जाता है।
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- ● छोटी पीपली का चूर्ण शहद के साथ चाटने से लाभ होता है।
- ● संतरे के छिलके का रस उस नथुने में डाले जिस ओर आधा सीसी दर्द नहीं हो रहा है।
- ● देशी गाय का घी नाक के नथुनों पर डालें
- ● मेहंदी की पत्तियों को पीसकर माथे पर लेप लगायें।
❖ कमर दर्द
महिलाओं को श्वेत प्रदर या मासिक धर्म की गड़बड़ी के कारण यह दर्द रहता है। तथा पुरुषों को अधिक परिश्रम करने या वायुप्रकोप या गलत ढंग से उठने बैठने या सोने से यह रोग हो जाता है।
- ● प्रातः काल खाली पेट अखरोट की गिरी खाने से कमर दर्द में आराम मिलता है।
- ● नारियल के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करें।
- ● सौंठ+हरड+गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। सुबह शाम आधा चम्मच लेने से कमर दर्द में आराम मिलेगा।
- ● पीपला की छाल का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम लें।
❖ याददाश्त कम होना
कमजोर स्मरण शक्ति आजकल प्रायः युवा लोगों में देखी जाती है। बुढ़ापे में भी इसकी आम शिकायत रहती है। अत्याधिक चिंता या भय से ग्रस्त होने पर अथवा क्रोध या शोक से प्रभावित होने पर या अत्याधिक पढ़ने से स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है।
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- ● शंख पुष्पी को पीसकर चूर्ण बनायें और 250 ग्राम दूध में आधा चम्मच शंख पुष्पी और 1 चम्मच शहद मिलाकर प्रातःकाल लें।
- ● आठ दस बादाम की मिगी रात्रि में पानी में भिगायें तथा सुबह इनके छिलके उतारकर अच्छी तरह पीसें। 250 ग्राम देशी गय के गर्म दूध में इसे मिलाये तथा थोड़ा सा काली मिर्च चूर्ण और दो चम्मच शहद दूध में मिलाये, (ठंडा होने पर), इसके साथ दूध में 1 चम्मच देशी गाय का घी भी मिलायें और सेवन करें।
- ● प्रतिदिन गाय के दूध में मुलहठी का 1 चम्मच चूर्ण डालकर पीयें।
❖ अनिद्रा
अनिद्रा मानसिक अशांति के कारण होती है। बहुत अधिक थकान, गलत ढंग के खाने पीने से, कब्ज रहने से, मानसिक तनाव और चिंता रहने से, या शरीर के किसी भी भाग के रोगग्रस्त हो जाने से यह बीमारी होती है। अत्याधिक धूम्रपान और मदिरापान करने से भी यह बीमारी होती है।
- ● रात्रि में सोने से पूर्व अच्छे ढंग से गर्म पानी से हाथ पैर धोकर तलवों पर सरसों के तेल की मालिश करें।
- ● 2 चम्मच शहद में 1 चम्मच प्याज का रस मिलाकर चाटें।
- ● रात्रि को भोजन के बाद घूमने अवश्य जाये, भोजन जल्दी करें, देर रात में न खाये, हल्का भोजन करें।
- ● 10 मिनट ध्यान मुद्रा योग करें, बहुत अच्छी नींद आयेगी।
❖ सिरदर्द
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पेट की खराबी बढ़हजमी या पेट में गैस बनने से सिरदर्द हो सकता है। दर्द के कारण नींद नहीं आती तथा सिर फटता हुआ सा महसूस होने लगता है। सिर दर्द में कई बार उल्टियाँ भी होती हैं।
- • तुलसी के पत्तों के रस में जरा सी सौंठ मिलाकर माथे पर लेप करें।
- • लहसुन की एक कली को घी में भुन कर खाये
- • हल्दी और ऐलोवेरा को मिलाकर माथे पर लेप करें।
- • दो चम्मच त्रिफला चूर्ण और थोड़ी सी मिश्री मिलाकर भोजन से पूर्व ले।
श्वसन संस्थान के रोग
श्वसन संस्थान हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमारे साँस लेने से लेकर और साँस निकालने तक की प्रक्रिया में ढेर सारे अंगों का उपयोग होता है। नाक, गला, हृदय, फेफड़े, पसलियाँ, डायफ्राम, आदि अंगों का उपयोग होता है। यदि हमें पर्याप्त मात्रा में शुद्ध ऑक्सीजन ना मिले तो इन सभी अंगों में बीमारियाँ उत्पन्न होने लगती हैं। अत्याधिक शराब पीने, चिंता करने, तम्बाकू, गुटखा खाने, दूषित और विषैले भोज्य पदार्थ खाने से तथा अत्याधिक धूम्रपान करने से यह अंग खराब होते हैं। इनके अंतर्गत खाँसी, दमा, सर्दी, जुकाम, टॉन्सिल्स, श्वास रोग आदि सब होते हैं।
❖ ब्रेन मलेरिया, टाइफाईड, चिकुनगुनिया, डेंगू,
स्वाइनफ्लू, इन्सेफेलाइटिस, माता व अन्य के बुखार
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- ● 20 पत्ते तुलसी, नीम की गिलोई 5 ग्राम, सोंठ(सूखी अदरक) 10 ग्राम, 10 छोटी पीपर के टुकड़े, सब आपके घर में आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। इन सब को एक गिलास पानी में उबालकर काढ़ा बनाना है ठण्डा होने के बाद दिन में सुबह, दोपहर और शाम तीन बार पीना चाहिए।
- ● नीम गिलोई – इसका डेंगू रोग में श्वेत रक्त कणिकाये, प्लेट-लेट्स कम होने पर तुरंत बढ़ाने में बहुत ज्यादा काम आता है।
- ● एक और अच्छी दवा है, एक पेड़ होता है उसे हिन्दी में हारसिंगार कहते हैं, संस्कृत में पारिजात कहते हैं बंगला में शिउली कहते हैं, उस पेड़ पर छोटे छोटे सफेद फूल आते हैं, और फूल की डंडी नारंगी रंग की होती है, और उसमें खुशबु आती है, रात को फूल खिलते हैं और सुबह जमीन में गिर जाते हैं। इस पेड़ के पांच पत्ते तोड़ के पत्थर में पीस के चटनी बनाइये और एक ग्लास पानी में इतना गर्म करो के पानी आधा हो जाए फिर इसको ठंडा करके रोज सुबह खाली पेट पियो तो बीस से बीस साल पुराना गठिया का दर्द इससे ठीक हो जाता है। और यही पत्ते को पीस के गर्म पानी मे डाल के पियो तो बुखार ठीक कर देता है और जो बुखार किसी दवा से ठीक नहीं होता वो इससे ठीक होता है जैसे चिकनगुनिया का बुखार, डेंगू फीवर, ब्रेन मलेरिया, ये सभी ठीक होते हैं।
❖ खाँसी
खाँसी तीन प्रकार की होती है, सुखी खाँसी, काली खाँसी और कफ खाँसी। खाँसी आने पर मुहँ से खों- खों की आवाज आती है। सूखी खाँसी में रोगी खाँसने से बेहाल हो जाता है। लेकिन बलगम वाली खाँसी में कफ बाहर निकलता है। यहाँ जो घरेलू नुस्खे दिये जा रहे हैं वह तीनों प्रकार की खाँसी के लिए हैं।
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- • अदरक के टुकड़ों को नमक लगाकर चूसते रहने से खाँसी में आराम मिलता है।
- • काली खांसी में दो रती शोधित हींग चाटने पर आराम मिलता है।
- • लौंग को पीसकर आग पर भून लें तथा शहद में मिलाकर चाटे।
- • 7 – 8 काली मिर्च का पाउडर 2 चम्मच शहद में मिलाकर दिन में 3-4 बार चाटें।
- • थोड़ी सी हल्दी और 1 चुटकी नमक सादे पानी में मिलाकर पीएँ।
❖ न्यूमोनिया
जब फेफड़ों में लगातार दर्द रहने लगे तो न्यूमोनिया कहलाता है। यह मुख्य रूप से ठंड लग जाने के कारण तथा फेफड़ों में सूजन आ जाने से हो जाता है। सर्दी, गर्मी में परिवर्तन एका एक पसीना आना, जीवाणुओं द्वारा संक्रमण आदि के कारण हो जाता है। इस बीमारी में फेफड़ों में कफ बढ़ जाता है। छाती में तेज दर्द रहता है। रोगी को बेहोशी आने लगती है। श्वास लेने में कष्ट होता है और खाँसी की भी शिकायत रहती है।
- • गेहूँ की जगह जो की रोटी और गर्म लगातार पिलाने से न्यूमोनिया में काफी लाभ होता है।
- • 2.हल्दी की गांठ को बालू में भूनकर उसका चूर्ण बना लें तथा दिन में दो बार गर्म पानी के साथ सेवन करें।
- • अदरक और तुलसी का रस बराबर मात्रा में निकलाकर शहद के साथ चाटने से काफी आराम मिलता है।
- • बच्चों के लिए 1 चुटकी हींग पानी में घोलकर पिलाने से जमा हुआ कफ बाहर निकलता है।
❖ दमा
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जब फेफड़ों में जकड़न एवं संकुचन होने के कारण साँस लेने में तकलीफ हो तो दमा की स्थिति कहलाती है। ज्यादातर यह रोग अधिक उम्र के लोगों को होता है। धूल और धुआँ भरे माहौल में रहने के कारण भी यह हो सकता है। प्रायः यह रोग अनुवांशिक होता है। अत्याधिक धूम्रपान करने वालों को भी यह रोग होता है। इसमें रोगी को साँस लेने में तकलीफ होती है यह तकलीफ कभी कम कभी ज्यादा घटती-बढ़ती रहती है। कभी-कभी खाँसी के साथ कफ निकलता है तो रोगी को आराम मिलता है। बलगम न निकले तो रोगी का हाल बेहाल हो जाता है।
- • तेजपात के पतों का चूर्ण अदरक के रस के साथ लेने से दमे में काफी लाभ होता है।
- • प्रातः काल खाली पेट 3-4 चम्मच अदरक का रस शहद के साथ लेने से काफी आराम मिलता है।
- • तुलसी के पतों के साथ 2-3 काली मिर्च चबाने से रोग में आराम मिलता है।
- • जब दमे का दौरा पड़े उस समय जरा सी फिटकरी जीभ पर रखकर चूसने से तुरंत आराम मिलता है।
- • लहसुन की कच्ची कली पर लौंग के तेल की दो-तीन बूंदे चबायें और गर्म पानी पीयें। दमा के दौरे नहीं पड़ेगे।
❖ नजला जुकाम
सामान्य रूप से ठंड लगने, या ठंडे पानी में चलने-फिरने से नजला-जुकाम हो जाता है। यह एक प्रकार का संक्रामक रोग है। जुकाम होने पर बार-बार छींके आती हैं और नाक से पानी आता है कभी-कभी बलगम भी आता है।
- • कच्चे लहसुन की 1-2 कली चबाकर खायें और पानी पीयें।
- • 10 पत्ते पुदीना और 6 दाने काली मिर्च और 1 चुटकी सेंधा नमक और 10 पत्ते तुलसी इन सबको मिलाकर काढ़ा बनायें तथा आधा पानी रह तने पर काढ़ा पिलाएं।
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- • ऑवले के रस को शहद में मिलाकर चाटने से आराम मिलता है।
- • राई पीसकर नाक पर लगाने से जुकाम में आराम मिलता है।
- • दालचीनी और जायफल बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें और सुबह शाम लें।
- • गाय का घी नाक में डालें।
❖ तपेदिक (टी.बी.)
टी.बी. का रोग किटाणुजन्य होता है। इसके अलावा प्रदूषित वातावरण में रहने से, अधिक श्रम करने से, चिंता करने से और पौष्टिक आहार न मिलने से यह रोग होता है। शुरूआत में हल्का बुखार आता है और थकान का अनुभव होता है। धीरे-धीरे थकान बढ़ती जाती है और खाँसी शुरू होती है और खाँसी के साथ खून भी आने लगता है। धीरे-धीरे वजन कम होता जाता है और भूख भी नहीं लगती। छाती में लगातार दर्द रहना, अपच होना, मिचली आना और साँस लेने में तकलीफ और पतले दस्त होना और बूंद-बूंद करके पेशाब आना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
- ● केले के पत्तों को सुखाकर उसकी राख बनायें। आधा चम्मच राख शहद के साथ प्रतिदिन चाटें। इसके साथ – साथ कच्चे केले की सब्जी बनाकर खायें और 2 चम्मच केले के तने का रस भी पीयें। भोजन के बाद पके केले खाने से भी रोग में काफी आराम मिलता है।
- ● आधा चम्मच पीपल के फलों का चूर्ण गाय के दूध के साथ लें।
- ● दालचीनी का चूर्ण शहद के साथ दिन में 3-4 बार चाटें।
- ● देशी गाय के घी में 2 लौंग का चूर्ण बनाकर चाटें।
- ● मुलहठी का चूर्ण, शहद और मिश्री को समान मात्रा में लेकर मिलायें, तथा प्रातः काल में सेवन करें।
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- ● आधा कप देशी गाय का गोमूत्र सुबह पीने से टीबी ठीक हो जाता है, लगातार 5-6 महीने पीने पड़ता है।
❖ गले में कोई भी इन्फेक्शन, टौन्सिल
गले में कितनी भी खराब से खराब बीमारी हो, कोई भी इन्फेक्शन हो, इसकी सबसे अच्छी दवा है हल्दी। जैसे गले में दर्द है, खरास है, गले में खांसी है, गले में कफ जमा है, गले में टौन्सिल हो गया, ये सब बीमारियों में आध चम्मच कच्ची हल्दी क रस लेना और मुँह खोल कर गले में डाल देना, और फिर थोड़ी देर चुप हकर बैठ जाना तो ये हल्दी गले में नीचे उतर जाएगी लार के साथ, और एक खुराक में ही सब बीमारी ठीक होगी दुबारा डालने की जरूरत नहीं। ये छोटे बच्चों को तो जरूर करना ये बच्च के टौन्सिल जब बहुत तकलीफ देते हैं ना तो हम ऑपरेशन करवाकर उनको कटवाते हैं वो करने की जरूरत नहीं है हल्दी से सब ठीक होता है।
❖ मधुमेह (डायबिटीज)
आजकल मधुमेह की बीमारी आम बीमारी है। जब किसी व्यक्ति को मधुमेह की बीमारी होती है। इसका मतलब है वह व्यक्ति दिन भर में जितनी भी मीठी चीजें खाता है (चीनी, मिठाई, शक्कर, गुड़ आदि) वह ठीक प्रकार से नहीं पचती अर्थात् उस व्यक्ति का अग्राशय उचित मात्रा में उन चीजों से इन्सुलिन नहीं बना पाता इसलिए वह चीनी तत्व मूत्र के साथ सीधी निकलता है। इसे पेशाब में शुगर आना भी कहते हैं। जिन लोगों को अधिक चिंता, मोह, लालच, तनाव रहते हैं। उन लोगों को मधुमेह की बीमारी अधिक होती है। मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है, लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सूखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है। अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रोगी का वजन कम होती जाता है। शरीर में कहीं भी जख्म/घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।
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- • जामुन मधुमेह के रोगी के लिए सर्वोत्तम दवाई हैं। सीधे जामुन खाना लाभदायक तो है ही, लेकिन जामुन की गुठली का चूर्ण ताजे पानी के साथ दिन में 2-3 बार लेने पर मधुमेह में बहुत लाभकारी होता है। इसके साथ जामुन के हरे पत्तों की चटनी बनाकर 1 ग्लास पानी में प्रतिदिन पीने से लाभ होता है।
- • पान के साथ चार पत्ती बंग भस्म लेने से मधुमेह दूर होता है।
- • प्रातःकाल 20 ग्राम गिलोय का रस बराबर मात्रा में शहद के साथ मिलाकर लेने से बीमारी में लाभ मिलता है।
- • प्रतिदिन रात्रि विश्राम से पहले शहद के साथ त्रिफला चूर्ण लेने से लाभ होता है।
- • इन्द्र जौ, बादाम और चने का चूर्ण बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर प्रतिदिन सुबह और शाम फीके दूध से लें।
- • त्रिफला चूर्ण में मैथी के दानों का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाये और प्रतिदिन प्रातः काल 2 चम्मच चूर्ण गुनगुने जल के साथ सेवन करें।
❖ बहुमूत्र (बार-बार पेशाब आना)
बहुमूत्र रोग में बार-बार पेशाब आता है। और थोड़ा-थोड़ा पेशाब आता है। यह रोग बच्चों तथा युवाओं को अधिक होता है और अधिकांशतः अनुवांशिक है। इस रोग में कब्ज, अपच, अधिक मूत्र आना, और नींद न आना इस तरह की शिकायतें रहती हैं। रोगी प्रतिदिन कमजोर होता जाता है कमर और कमर के नीचे के हिस्सों में दर्द रहता है।
- • आँवले का सूखा चूर्ण या आँवले का रस गुड़ के साथ मिलाकर लेने से बीमारी में लाभ होता है।
- • 20 ग्राम काले तिल और 10 ग्राम अजवायन को मिलाकर पाउडर बना लें फिर इस पाउडर को 50 ग्राम गुड़ में मिलाकर सुबह-शाम 1-1 चम्मच सेवन करें।
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- • प्रातःकाल खाली पेट अदरक का रस १ चम्मच लेने से बहुमूत्र की शिकायत दूर होती है।
- • रात्रि विश्राम से पहले गाय के दूध में पकाये हुए ४ छुआरे खाने से बहुमूत्र के रोग में आराम मिलता है।
❖ मूत्राशय प्रदाह (जलन)
इस रोग में मूत्राशय में दर्द होता है। और बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होती है और पेशाब करते समय मूत्राशय में जलन और दर्द रहता है कष्ट के साथ पेशाब आती है।
- • प्रतिदिन गाजर का रस पीने से जलन में आराम मिलता है।
- • चावल के मांड में मिश्री मिलाकर पीने से बीमारी में लाभ होता है।
- • त्रिफला चूर्ण का काढ़ा गुड़ मिलाकर पीने से आराम मिलता है।
- • ३ चम्मच मूली का रस जरा सी सेंधा नमक डालकर पीयें।
❖ गुर्दे की पथरी
जिन लोगों के मूत्र में कैल्शियम अधिक मात्रा में बनता है उनको पथरी जल्दी होती है। यह भिन्न भिन्न प्रकार के छोटे-छोटे क्षारीय तत्व होते हैं। जो किन्हीं कारणों से मूत्राशय तथा मूत्रनली से नहीं निकल पाते और धीरे-धीरे एकत्र होकर पथरी का रूप ले लेते हैं। पथरी होने के बाद जब व्यक्ति मूत्र त्याग करता है तब उसे दर्द का अनुभव होता है। ऐसे में मूत्र धीरे-धीरे और रूककर बाहर आता है।
- • चौलाई अथवा बथुआ के साग को अच्छी तरह धोकर पानी में उबालें और यह उबला हुआ पानी कपड़े से छान लें तथा इसमें कालीमिर्च, जीरा, तथा जरा सा सेंधा नमक मिलाकर दिन में कई बार पियें कुछ ही सप्ताह में लाभ अवश्य मिलेगा।
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- • जीरे के पाउडर को शहद के साथ लेने पर पथरी घुलकर पेशाब के साथ निकल जाती है।
- • सफेद प्याज को कूटकर कपड़े से उसका रस निकालें। सुबह खाली पेट पीयें। इससे पथरी जल्दी टूट- टूटकर खत्म हो जायेगी।
- • सूखे आँवले का पाउडर बनायें और प्रातः काल खाली पेट मूली पर लगाकर चबा-चबाकर खायें।
- • मूली के बीजों का चूर्ण १ चम्मच शहद में मिलाकर चाटें।
गुप्त रोग
❖ शीघ्र पतन
शीघ्र पतन प्रायः उन लोगों को होता है जो प्रकृति के विरुद्ध सहवास की प्रक्रिया अपनाते हैं। हस्त मैथून, मुख मैथून करते हैं, या अत्याधिक अश्लील साहित्य पढ़ते हैं अथवा अत्यधिक सम्भोग में रत रहते हैं। इस बीमारी का प्रमुख लक्षण यह है कि संभोग के समय पुरुष स्त्री को संतुष्ट करने से पूर्व ही स्खलित हो जाता है। और इसी को शीघ्रपतन कहते हैं। कई बार तो स्त्री का आलिंगन करने या चूम्बन लेने मात्रा से ही पुरुष स्खलित हो जाता है। लेकिन घरेलू चिकित्सा करने और अच्छा साहित्य पढ़ने से यह बीमारी आसानी से दूर हो सकती है।
प्रातः काल खाली पेट एक पका हुआ केला एक चम्मच गाय के घी के साथ लगाकर एक महीने खाने से यह बीमारी दूर होती है।
- • 10 ग्राम घी + 5 ग्राम शहद + 10 ग्राम मुलहठी मिलाकर चाटें तथा गर्म दूध भी पीयें यह सहवास के पश्चात ही लें तो शीघ्रपतन धीरे-धीरे दूर होगी तथा कमजोरी भी नहीं होगी।
- • सूखा धनियाँ + मिश्री बराबर मात्रा में मिलाकर पाउडर बनायें प्रतिदिन सुबह ठंडे पानी में लेने पर काफी लाभ मिलेगा।
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- • तुलसी के बीज+ मिश्री को बराबर की मात्रा में मिलाकर पाउडर बनायें तथा प्रातः दूध के साथ सेवन करें।
- • लौंग का तेल लिंग पर लगाकर सहवास करने से शीघ्रपतन दूर होता है।
❖ स्वप्नदोष
रात में सोते समय या दिन में कभी भी कामेच्छा मात्रा से ही जब वीर्य स्थलित हो जाये तो उसे स्वप्न दोष कहते हैं। कामुक दृश्यों, सिनेमा देखने या अश्लील किताबों को पढ़ने से कामुक भावनाएं मन में बैठ जाती हैं। जो स्वप्न में आती हैं। इसी कारण वीर्य स्थलित हो जाता है।
- • प्रातः काल उठकर ताम्रपत्र में रखा हुआ ठंड पानी पीने से यह बीमारी दूर होती है। गर्म प्रकृति वाले लोगों को यह नुस्खा अवश्य अपनाना चाहिए।
- • प्रातःकाल शहद के साथ केला खाने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।
- • सूखा धनिया और मिश्री बराबर मात्रा में पीसकर ठंडे पानी के साथ लें। स्वप्नदोष की शिकायत दूर होगी।
- • गुलकंद को गाय के दूध में मिलाकर पीने से स्वप्न दोष दूर होता है।
- • प्रातःकाल आँवले का चूर्ण और मिश्री बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से स्वप्नदोष ठीक होता है।
- • विषय वासना, व हस्तमैथून से दूर रहें, सदा प्रसन्ना रहें तथा अच्छी संगत में रहें। योग और व्यायाम करें। अवश्य लाभ होगा।
❖ नपुंसकता
यह बीमारी अत्याधिक स्त्री सम्भोग, मोटापा बढ़ने या चर्बी बढ़ने, या किसी प्रकार की अण्डकोष संबंधी दुर्घटना या हार्निंग, बहुमूल आदि के
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होने से होता है। अधिक शराब पीने या नशा करने वालों में भी नपुंसकता आती है। इस बीमारी में मैथुन शक्ति कमजोर होती जाती है। पुरुष में उत्तेजना खत्म होती जाती है। और लिंग में तनाव नहीं आता यदि आता भी हो तो वह शीघ्र ही खत्म हो जात है इस बीमारी के कारण कई अन्य मानसिक बीमारियाँ भी हो सकती हैं।
- • लहसुन की 6-8 कलियों को छीलकर घी में तलकर पीसकर खायें यह बीमारी दूर करती है। कच्ची कलियाँ शहद के साथ भी ले सकता है।
- • प्रातः काल गाय के गर्म दूध के साथ तुलसी से बीज और गुड़ बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से नपुंसकता दूर होती है। दूध में दो छुआरे और किशमिश डालकर पीयें।
- • शहद + गाय का घी + सफेद प्याज का रस बराबर मात्रा में मिलाकर दूध के साथ लें।
- • जमीकंद और तुलसी की जड़ दोनों को पान के साथ खाने से वीर्य जल्दी स्खलित नहीं होगा।
- • प्यास के रस में शहद मिलाकर चाटने से वीर्य बढ़ता है।
मुख के रोग
❖ आँखों के रोग
अधिक ठंड, अधिक गर्मी, या आँखों में धूल जाने से या आँखों में किसी संक्रमक बीमारी के कारण दर्द होना शुरू हो जाता है और आँखें आ जाती हैं। इस कारण आँखों से पानी निकलता है और आँखें लाल हो जाती हैं। आँखों में से कीचड़ निकलना शुरू हो जाता है।
- • सफेद प्याज का रस आँखों में लगाने से दर्द में कमी होती है।
- • सुबह उठकर बासी मुँह की लार आँखों में लगाने से आँखों के प्रत्येक रोग दूर होते हैं।
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- • त्रिफला चूर्ण, घी और शहद मिलाकर खाने से आँखों की बीमारी दूर होती है।
- • देशी गाय का घी आँख में लगाने से जलन दूर होती है।
- • गुलाब जल में फूली फिटकरी डालकर आँखों को धोने से जलन एवं सूजन समाप्त होती है। केवल गुलाबजल डालने से भी आँखों में राहत मिलती है।
- • बथुए के रस को 1-1 बूंद करके आँखों में डालें।
- • गुलाब जल, ताजे खीरे का रस और थोड़ा सा ठंडा दूध मिलाकर इसमें रूई के फोहो को भिगोकर पलकों के ऊपर रखें। आँखों में अनार का रस डालने से भी काफी लाभ होता है।
❖ गुहेरी
आँख की पलकों के ऊपर कोने में फुन्सी निकल आने को गुहेरी कहते हैं। यह एक गांठ की तरह होती है और हल्का –हल्का दर्द भी होता है।
- • लौंग को पानी में घिसकर लगाने से गुहेरी बैठ जाती है।
- • रात में भिगाये हुए त्रिफला चूर्ण के पानी से आँखों को छप्पे मार मार कर धोयें। बीमारी में काफी लाभ होगा।
- • गुलाब जल में छोटी हरड को घिसकर लेप करने से लाभ मिलता है।
- • गुलाब जल में थोड़ा फिटकरी का पानी मिलाकर डालने से गुहेरी बैठ जाती है।
❖ रतौंधी
अत्याधिक धूल, तीव्र प्रकाश, और दूषित पर्यावरण के कारण रतौंधी होती है। इसमें रोगी को रात्रि में बिल्कुल नहीं दिखाई देता तथा दिन में ठीक दिखाई देता है।
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- • तुलसी के पत्तों का रस दिन में 3-4 बार आँखों में डालें।
- • सफेद प्याज का रस आँखों में डालने से काफी लाभ होता है।
- • देशी गाय का मूत्र आँखों में डालने से काफी लाभ होता है।
- • आँखों में शुद्ध शहद लगाने से भी काफी आराम मिलता है।
❖ मोतियाबिंद
इस बीमारी में आँखों की पुतली पर सफेदी आती है और रोगी की दृष्टि धुंधली पड़ जाती है। कोई भी चीज स्पष्ट नहीं दिखाई देती। यह रोग प्रायः वृद्धा अवस्था में होता है।
- • सुबह शाम 1 गिलास गाजर का रस पीने से मोतियाबिंद में लाभ होता है।
- • रात में पानी में भिगोई हुई लहसुन की कालियों को प्रातः काल उठकर खायें और पानी पीयें। मोतियाबिंद में लाभ होगा।
- • शुद्ध शहद आँखों में लगाने से भई मोतियाबिंद में लाभ होता है।
- • सूखा धनियाँ और सौंफ और देशी शक्कर बराबर मात्रा में मिलाकर पाउडर बनायें सुबह शाम जल से सेवन करें।
❖ कान के रोग
कान में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं। कान का बहना, फोड़े-फुन्सी, कर्ण शूल, बहरापन आदि हैं।
- • सरसों का तेल कान में डालने से फोड़े – फुन्सी ठीक होते हैं।
- • दर्द होने पर प्याज का रस गर्म करके कान में डालने पर आराम मिलेगा।
- • तुलसी के पत्तों के रस में थोड़ा सा कपूर मिलाकर गर्म करें और कान में डालें।
- • कान में गौमूत्र डालने से फोड़े फुन्सी ठीक होते हैं।
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