ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
३४. मरुद्गण की स्तुति १-१५
व्याप्त, उत्पत्ति, सोने के टोप वाले, पहुंचना, आयुधधारक, अन्न व बल याचना १-७
अन्नदाता, शत्रुता, हंता, धन मांगना, अंधकार का नाश रूप धरना, होता,
पापत्राता ८-१५
३५. अग्नि का वर्णन १-१५
अन्न, उत्तम रूप, निर्माता, बाड़वाग्नि, अपांनपात्, इड़ा, सरस्वती, भारती १-५
उच्चैःश्रवा अश्व, संसार की उत्पत्ति ६
घर में रहना, वनस्पतियों के उत्पादक ७-८
नदियां, धन देना, भाग्य स्तुति, व्याप्त, उत्तम स्थान, पुत्र-पौत्र प्राप्ति हेतु
प्रार्थना १२-१५
३६. इंद्र, त्वष्टा, अग्नि, वरुण एवं मित्र की स्तुति १-६
भेड़ के बाल, दशापवित्र, भरत के पुत्र, देवपत्नियां मधु, सोमपान, प्राचीन
स्तुतियां १-६
३७. अग्नि की स्तुति १-६
द्रविणोदा, सोमरूप मधु, नेष्टा १-३
मृत्यु निवारक, रथ, सोमपान हेतु प्रार्थना ४-६
३८. सविता का वर्णन १-११
दाता, हाथ फैलाना, सविता का त्याग, प्रकाश समेटना, शय्या का त्याग, घर
अभिलाषा, कार्य क्षीण न होना, निवास, बुलाना १-९
रक्षक, आह्वान १०-११
३९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-८
बाधा, ज्ञाता, वेगवान्, दुःखत्राता, बुढ़ापा, सुखदाता १-६
स्तुतियां, स्तोत्र रचना ७-८
४०. सोम व पूषा की स्तुति १-६
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अमरता, सेवा, रथ, वरणीय एवं कीर्तिशाली प्राणि-उत्पत्ति, धनस्वामी १-६
४१. इंद्र, वायु मित्र, वरुण आदि की स्तुति १-२१
नियतगुण, पुकार, दाता, सोमरस, हजार खंभे, दानशील, पेय सोम, धन, नाना रूप,
अचंचल, कल्याण, मेधावी, पुकार, प्रसन्नदाता, दान १-१५
उत्तम सरस्वती, शुनहोत्र, हव्य, प्रार्थना, साधक, यज्ञयोग्य देवता १६-२१
४२. कपिंजल पक्षी रूपी इंद्र का वर्णन १-३
प्रेरित करना, मंगलकारी, चोर एवं पाप की बात १-३
४३. कपिंजल पक्षी रूपी इंद्र का वर्णन १-३
बोल, पुण्यकारी शब्द, सुमति की इच्छा १-३
तृतीय मंडल
सूक्त विषय मंत्र सं.
१. अग्नि की स्तुति १-२३
वाहक, समिधा, उत्तम बंधु, बढ़ाना, शुद्धि, धारण करना १-६
माता-पिता-धरती, आकाश, किरणें, जल बहाना, लोकपोषण, शयन,
प्रकाशमान ७-१२
जन्म, बढ़ना, तेज, स्तुति, यज्ञ, अनुग्रह, होता, भूमि याचना १३-२३
२. अग्नि का वर्णन १-१५
संस्कार, पूजन, स्तुति, हितकारक, यज्ञमंडप, अग्नि, अन्नार्थ जाना, ज्ञाता, चारों ओर
जाने वाले, प्रजास्वामी १-१०
गरजना, स्वर्गारोहण, धन-अन्न याचना ११-१५
३. अग्नि का वर्णन १-११
दूषित न करना, प्रेरणा, सुख चाहना १-३
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प्रवेश, स्थापना, आना-जाना, प्रेरणा, नमस्कार, प्रशंसा, घेरना, पूर्ण करना,
उत्पत्ति ४-११
४. अग्नि का वर्णन १-११
मित्र, यज्ञ, कुशल, समीप जाना, मार्ग बनाना, कृपा १-६
आह्वान, सोमरस ८-९
जन्मदाता, आह्वान १०-११
५. अग्नि का वर्णन १-११
द्वार खोलना, जागना, स्थापित, रक्षक, उत्पादक, नया बनाना, धारण करना,
बुलाना १-९
अग्नि जलाना, पुत्र-याचना १०-११
६. अग्नि का वर्णन १-११
सुच, पूजा, दीप्तियां, स्तुति, फलदाता, आह्वान, घोड़े, जलभाग जलाना, यज्ञयोग्य,
आह्वान १-९
होता, भूमि, पुत्र व गाय की याचना १०-११
७. अग्नि का वर्णन १-११
अन्नदाता, नदी में वास, घोड़ियां, वहन, आज्ञापालन, सुख, यज्ञ में जाना, रक्षा,
अलंकरण, ज्वालाएं १-९
पापनाशार्थ प्रार्थना, गौ मांगना १०-११
८. यूप अर्थात् बलिस्तंभ का वर्णन १-११
धन याचना, पाप, नापना, आना, बनाने वाला, गड्ढे में डालना, यज्ञ-साधक १-८
अंतरिक्ष, रक्षार्थ प्रार्थना, सौभाग्य प्राप्ति ९-११
९. अग्नि का वर्णन १-९
वरण, शांत होना, प्राप्ति होना, अरणिमंथन, ग्रहण, पूजन, १-९
१०. अग्नि का वर्णन १-९
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प्रजास्वामी, यज्ञरक्षक पुत्र-पौत्र प्राप्ति, सिक्त होना १-४
तेजधारी, बढ़ाना, शत्रुजेता, पापशोधक, उत्पत्ति ५-९
११. अग्नि का वर्णन १-९
ज्ञाता, देवदूत, अंधकारनाशक, अग्रगामी, अवध्य, घर पाना, धन याचना, प्रवेश १-९
१२. इंद्र एवं अग्नि की स्तुति १-९
आह्वान, सोमपान, वरण, अन्नदाता, अर्चना, नगरों को कंपाना, उपस्थित रहना, धन में
अभिन्नता, ज्ञान १-९
१३. अग्नि का वर्णन १-७
श्रेष्ठ, द्यावा-पृथिवी, सेवा, नियामक, प्रचलन, रक्षा व धन याचना १-७
१४. अग्नि का वर्णन १-७
प्रज्ञा प्रार्थना, सिंचन, धारक, द्रव्य देना, रक्षण व अन्न हेतु अग्नि के समीप जाना १-७
१५. अग्नि की स्तुति १-७
विनाश, स्तुतियां, फल, शत्रु-नगर, धन, हव्य वहन, विजय व पुत्र-पौत्र हेतु
प्रार्थना १-७
१६. अग्नि का वर्णन १-६
पापनाशक, शत्रुजेता, धनयुक्त, रक्षक, विश्व में निवास, कीर्तिदाता १-६
१७. अग्नि की स्तुति १-५
स्वीकार्य, जातवेद, तीन अन्न, अमृत की नाभि, यज्ञ पूर्णता हेतु प्रार्थना १-५
१८. अग्नि की स्तुति १-५
साधक, शत्रुनाशक, अन्न याचना १-५
१९. अग्नि की स्तुति १-५
वरण, पात्र, महिमायुक्त १-३
तेजधारक, अन्न याचना ४-५
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२०. अग्नि का वर्णन १-५
अधिकारहीन उदरपूरक, अमर, वृत्रनाशक, आह्वान १-५
२१. अग्नि की स्तुति १-५
चर्बी, बूंदें टपकना, मेधावी, यज्ञपालक, आह्वान, निवासदाता १-५
२२. अग्नि का वर्णन १-५
सोम, विस्तारक, प्रेरक, अन्न, पुत्र-पौत्र याचना १-५
२३. अग्नि की स्तुति १-५
जरारहित, देवाश्रय, देववात, सुबुद्धि, उंगलियों से उत्पन्न १-३
दृषद्वती, आपया व सरस्वती ४-५
२४. अग्नि की स्तुति १-५
अजित, मरणहीन, जागृत, धन एवं संतान मांगना १-५
२५. अग्नि की स्तुति १-५
ज्ञाता, अन्नदाता, जनक, आह्वान, प्रकाशमान १-५
२६. अग्नि का वर्णन १-९
स्तुति, आह्वान, कुशिक गोत्री, कंपाना, गरजना, जलदाता, मरुत्, यज्ञ में जाना १-६
प्राण, रमणीय बनाना, पालक ७-९
२७. अग्नि का वर्णन १-१५
देव प्राप्ति, स्तुति, छुटकारा, मनचाहा फल, हव्य वहन, अभिमुख, अग्रगामी, मेधावी,
गर्भ १-९
हव्य, प्रदीप्त करना, स्तुति, दर्शनीय, हव्यवाहक, प्रज्वलित करना १०-१५
२८. अग्नि की स्तुति १-६
पुरोडाश, कर्मकुशल, पुरोडाश सेवनार्थ प्रार्थना १-६
२९. अग्नि का वर्णन १-१६
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साधन, प्रकट होना, स्थापना, सुखयुक्त, अवरोधहीन, हव्यवाहक, अन्न याचना १-८
कामवर्षक, शोभा, नराशंस, उत्तम स्थान, शब्द, सनातन, कुशिकगोत्रीय,
वरण ९-१६
३०. इंद्र की स्तुति १-२२
विरोध, आना, भयंकर, स्थित होना, मिलाना, शक्ति याचना, धनदान, वृत्रवध, समतल,
सुगम बनाना, शूर १-११
दिशाएं निश्चित, उत्तम कर्म, गाय का भ्रमण १२-१४
शत्रुवध, राक्षसों पर अस्त्र फेंकने, अश्व स्वामी बनाने की प्रार्थना १५-१८
इच्छाएं बढ़ना, स्तुति, आह्वान १९-२२
३१. इंद्र का वर्णन १-२२
धेवता, कन्या का अधिकार, पुत्र, इंद्र से मिलना १-४
गो प्राप्ति, सरमा नामक देवशुनी, गाएं मिलना, शुष्णवध, अमरता, नियुक्ति, निमित्त,
निर्माण, शक्तियां घोड़ियां, उत्पत्ति, जल उत्पत्ति, मरुतों की सहायता ५-१७
स्वामी, नवीन, पापनाशक, बंद करना, आह्वान १८-२२
३२. सोम व इंद्र की स्तुति १-१७
घोड़ों के जबड़ों में घास भरना १
दान, सुंदर ठोढ़ी, गमनशील, जल छोड़ना २-६
नित्य तरुण, लोकधारक, तेजस्वी, सोमपान ७-१०
धरती दबाना, वृद्धि, आकर्षित करना, पुकारना, सामने जाना, आह्वान ११-१७
३३. इंद्र का वर्णन १-१३
विश्वामित्र व नदियों का संवाद, सतलज व व्यास नदी, भरतवंशियों का उनके पास
जाना १-१३
३४. इंद्र का वर्णन १-११
धरती व आकाश की तृप्ति, स्तुति १-२
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वध, युद्ध जीतना, पीसना, धन बांटना, वरणीय दान, पालन, दमन, आह्वान ३-११
३५. इंद्र की स्तुति १-११
सोम देना, घोड़े जोड़ना, जौ, रथ में जोड़ना, हरी नामक घोड़े, सोमपानार्थ प्रार्थना,
जौ, स्तुतियां १-८
सहायता, आह्वान ९-११
३६. इंद्र की स्तुति १-११
संगति, सोमरस, ओज, गाएं, अंतरिक्ष, लताएं निचोड़ना, बांटना, धन मांगना,
आह्वान १-११
३७. इंद्र की स्तुति १-११
प्रेरणा, अनुकूल बनाना, शतक्रतु, मानवाधारक, धन देने एवं असुर नाशार्थ
पुकारना १-६
वृत्रहंता, जागरणशील, पांच जन, अन्न देने व यज्ञ में आने की प्रार्थना ७-११
३८. इंद्र का वर्णन १-१०
स्मरण, स्वर्ग प्राप्ति, सुशोभित, इंद्रसभा, जल निर्माण, देखना, समर्पण, मिलन, कर्मों
को देखना, पुकारना १-१०
३९. इंद्र का वर्णन १-९
स्तुतियों का पितरों के पास से आना १-२
यज्ञकर्मों से संगत होना ३
पितरों का निंदक ४
सूर्य दर्शन, असुर, वरण, धन याचना, विश्वनेता इंद्र ५-९
४०. इंद्र की स्तुति १-९
सोमपान हेतु आह्वान, आग्रह, बढ़ना, आह्वान १-९
४१. इंद्र की स्तुति १-९
आह्वान, कुश बिछाना, स्तुतियां, पुरोडाश, उक्थ, शक्तिस्वामी १-५
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हवि, सोमयुक्त, रथ ६-९
४२. इंद्र की स्तुति १-९
तृप्त, सामने जाना, धन मांगना, सोमपानार्थ आग्रह, प्रेरित करना १-९
४३. इंद्र की स्तुति १-८
घोड़े खोलने, समीप आने व स्तुतियां सुनने हेतु प्रार्थना १-४
धन याचना, हरि नामक घोड़े, सोमाभिलाषी, उत्साही ५-८
४४. इंद्र की स्तुति १-५
इंद्र का सोम, वृद्धिकर्त्ता, गायों को छुड़ाने वाले १-५
४५. इंद्र की स्तुति १-५
यज्ञ में रथ से आने की प्रार्थना १-२
सोम से मिलना, पुत्र याचना, स्तुत इंद्र ३-५
४६. इंद्र की स्तुति १-५
प्रसिद्ध, पूज्य, अज्ञेय, रक्षक, सोमधारक १-५
४७. इंद्र की स्तुति १-५
स्वामी, वृत्रहंता, सहायता व प्रसन्न करना, आह्वान १-५
४८. इंद्र का वर्णन १-५
जलवर्षक, सोम पिलाना, सोम देखना, शत्रुजेता, आह्वान १-५
४९. इंद्र का वर्णन १-५
पाप व फलदाता, शत्रुनाशक, हवनीय, अन्न के विभाजक १-५
५०. इंद्र का वर्णन १-५
आग्रह, कुशिकगोत्रीय ऋषि, विनाशकारी १-५
५१. इंद्र का वर्णन १-१२
प्रशंसनीय, नेता, स्तुति, नमस्कार, शासक, सखा १-६
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शार्यात, विभूषित होना, मित्रभाव ७-९
सोमपान का आग्रह १०-१२
५२. इंद्र का वर्णन १-८
सोमपान, पुरोडाश भक्षण हेतु प्रार्थना १-२
भक्षण, सेवा, जौ, उत्साहित करना ३-८
५३. इंद्र का वर्णन १-२४
हव्य खाने, यज्ञ में रहने व कुशों पर बैठने का आग्रह १-३
पत्नीयुक्त घर, प्रयोजन, कल्याणी, पत्नी, विश्वामित्र, रूप बदलना, सरिता रोकना,
सोमपान का आग्रह, राजा सुदास, भरतवंशीय, वज्रधारी, प्रमंगद, अमृतरूप, अन्न,
जमदग्नि ४-१६
दृढ़ रथ, बैल, खदिर, शीशम, रथ १७-२०
उपाय, कुल्हाड़ी, सर्वज्ञ, भरतवंशी क्षत्रिय, वसिष्ठ २१-२४
५४. विश्वेदेव का वर्णन १-२२
स्तोत्र बोलना, अनुभव, नमस्कार, महत्त्व जानना, स्वर्गमार्ग १-५
धरती व आकाश देखना, जागरूक, विभाजन, दुःखी न होना, वाहन, जिह्वा, यज्ञ में
आना, याचना ६-१२
ऋष्टि, पादविक्षेप, इंद्र, अश्विनीकुमार, देवत्व, वरुण १३-१८
आकाश, मरुद्गण, स्तुति सुनने का आग्रह १९-२०
मित्रता, हव्य का स्वाद २१-२२
५५. उषा, अग्नि, इंद्र एवं धरती-आकाश की स्तुति १-२२
बल, हिंसा न करने की प्रार्थना, प्रकाशक, अरणि, वृक्षों में रहना, सूर्य का सोना १-६
मूलकारण, प्राणियों का भागना, सूर्य के साथ चलना, भूवन ज्ञाता, जोड़ा धारण
करना, स्तुति ७-१२
भीगना, पुण्यात्मा, पापात्मा १३-१६
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गर्जन, वृष्टि, ऋतुएं, पांच अश्व १७-१८
प्रजापालन, शत्रुओं से संपत्ति छीनना १९-२०
मरुतों का आगे रहना, ओषधि २१-२२
५६. विश्वेदेव का वर्णन १-८
बाधक न बनना, ऋतुएं, संवत्सर, जल १-४
इला, सरस्वती एवं भारती से यज्ञ में आने की प्रार्थना ५
धन याचना, वाग्देवी ६-७
तीन उत्तम स्थान ८
५७. विश्वेदेव का वर्णन १-६
ज्ञानी, मनचाही वर्षा, ओषधियां, दीप्तियां १-४
प्रेरणा देना, उत्तम बुद्धि ५-६
५८. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-९
दूध देना, रथ, वृत्ति १-३
सूर्य का उदय होना, स्तोत्र, जाह्नवी गंगा, नित्यतरुण अश्विनीकुमार, हवि अन्न, शुद्ध
घर ४-९
५९. मित्र अर्थात् सूर्य का वर्णन १-९
कामों में लगाना, अनुग्रह, यज्ञ के समीप रहना, सेव्य, नमस्कार के योग्य १-५
मित्र का अन्न, अंतरिक्ष को हराना, हवि देना, अन्नदाता ६-९
६०. ऋभुगण एवं इंद्र की स्तुति १-७
कर्म जानना, देवत्व, अमृत पद की प्राप्ति, सीमा जानना असंभव, सुधन्वा १-५
कर्म निश्चित, आह्वान ६-७
६१. उषा का वर्णन १-७
स्तुत, सच बोलना, सूर्य का ज्ञान कराने वाली, सूर्य की पत्नी, तेज धारण करना १-५
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सत्ययुक्त, प्रकाश फैलाना ६-७
६२. इंद्र, वरुण, बृहस्पति, पूषा व सोम की स्तुति १-१८
अन्नदाता, स्तुति सुनने, रक्षा करने हेतु प्रार्थना १-३
हव्य सेवनार्थ प्रार्थना, बल व मनचाहा फल मांगना, सामने आने की प्रार्थना ४-८
रक्षक, तेज का ध्यान, दान चाहना ९-११
सेवा करना, यज्ञ में आना, पशुओं को रोगरहित अन्न देने की याचना १२-१४
यज्ञ में बैठने, मधुर रस देने की प्रार्थना, सुशोभित बनने व सोमपान का
आग्रह १५-१८
चतुर्थ मंडल
सूक्त विषय मंत्र सं.
१. अग्नि एवं वरुण की स्तुति १-२०
प्रेरक, सेव्य, ज्ञाता, दीप्तिशाली, पूजनीय, आह्वान १-७
ज्वालाएं, उत्तरवेदी, सिंचन, श्रेष्ठ, स्तुति, अंगिरा का यज्ञ फलदाता, उद्घाटन ८-१५
उषा, ऊपर पहुंचना, गोधन, स्तुति, पूजनीय १६-२०
२. अग्नि की स्तुति १-२०
स्थापना, दर्शनीय, स्तुति, आह्वान, हव्य अन्न, रक्षक दानी, प्रसन्न करना, सेवा १-९
होता, छांटना, मेधावी, धन मांगना १०-१३
अरणि मंथन, दीप्ति युक्त, गाएं निकालना, गोधन, संपन्न, अग्नि धारण,
वरेण्य १४-२०
३. अग्नि की स्तुति १-१६
यज्ञस्वामी, तय करना, स्तोत्र, कारण पूछना, फलदाता, कहानी, सत्यरूप १-८
दूध याचना, सर्वत्र जाना, पहाड़ उखाड़ना, नदियों का बहना, कुटिलबुद्धि, उन्नत
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बनाने व मंत्र स्वीकार हेतु प्रार्थना, स्तुतियां ९-१६
४. अग्नि की स्तुति १-१५
आगे बढ़ने, चिनगारियों को फैलाने, अनिष्ट से बचाने, राक्षसों, शत्रुओं का नाश करने
व प्रकाशित होने का आग्रह १-६
फलदाता, स्तुति, सेवा, आतिथ्य, गौतम, रक्षक ७-१२
दीर्घतमा, अन्न देने व अपयश से बचाने की प्रार्थना १३-१५
५. अग्नि का वर्णन १-१५
स्वर्ग थामना, नेताश्रेष्ठ, विराजमान, तीखे दांत, नरक, धन याचना १-६
स्थापना, रक्षक, वैश्वानर, जिह्वा, प्रतिज्ञा, जातवेद, उषाएं, अतृप्त लोग,
ज्वालाएं ७-१५
६. अग्नि की स्तुति १-११
होता, प्रजा, प्रदक्षिणा, परिक्रमा १-४
कल्याणी मूर्ति, प्रकाशित होना, अंगुलियां, आह्वान, आवाज करना, धन याचना
५-११
७. अग्नि का वर्णन १-११
स्थापित, ग्रहण, यज्ञशाला, कल्याणार्थ लाना, तेज १-५
स्थापना, प्रसन्न करना, स्वर्ग, दूत, जलाना, बलयुक्त करना ६-११
८. अग्नि का वर्णन १-८
बढ़ाना, ज्ञाता, धन देना, दूतकर्म, प्रसन्न करना, प्रसिद्ध बनना, पापनाशक १-८
९. अग्नि की स्तुति १-८
आह्वान, जाना, होता, ब्रह्मा १-४
उपवक्ता, हव्य वहन, स्तोत्र सुनने का आग्रह, रक्षक ५-८
१०. अग्नि की स्तुति १-८
उपकारक, नेता, तेजस्वी गमनकर्त्ता, शब्द करना, शोभित होना, पापरहित,
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पापनाशक, द्योतमान १-८
११. अग्नि की स्तुति १-६
तेज, स्तुत, उक्थ, अश्व, सेवा, बलपुत्र १-६
१२. अग्नि की स्तुति १-६
जातवेद, धन प्राप्ति, स्वामी, पापरहित करने, सुख देने व आयु बढ़ाने की
प्रार्थना १-६
१३. अग्नि का वर्णन १-५
आगमन, सहारा, वहन, अंधकार का नाश, स्वर्गपालक १-५
१४. अग्नि का वर्णन १-५
बढ़ना, सहारा, उषा का आना १-३
सोमरस, सूर्य ४-५
१५. अग्नि, सोम एवं अश्विनीकुमारों का वर्णन १-१०
अग्नि लाना, हव्य, घेरना, सृज्व १-४
तेजस्वी, समर्थ, कुमार, घोड़े लेना, कुमार के दीर्घायु हेतु प्रार्थना ५-१०
१६. इंद्र का वर्णन १-२१
सोम निचोड़ना, स्तुति, किरणें, अंधकार का नाश १-४
महिमा, बरसा, प्रेरणा ५-७
विदीर्ण करना, कुत्स ऋषि, शची, शत्रुनाशक, शुष्ण, कुयव को मारना ८-१२
मृगय का वध, ऋजिश्व्रा, भयानक, समीप जाना, आह्वान, रक्षक बनने की
प्रार्थना १३-१७
हिंसारहित, धनपूर्ण, स्तोत्र की रचना, अन्न वृद्धि हेतु प्रार्थना १८-२१
१७. इंद्र का वर्णन १-२१
बल स्वीकारना, प्यास मिटाना, शत्रुजेता, उत्पत्ति, स्तुति १-५
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प्रजाधारक, रक्षक, स्तुति, अन्नधारक, शत्रुनाशक, गाएं छीनना, धन बांटना ६-११
बल प्राप्ति, धनदाता, भिगाना, झुकना १२-१६
सुखदाता, पूजन, शत्रुहंता, प्रजाधारक, नई स्तुतियां १७-२१
१८. इंद्र का वर्णन १-१३
इंद्र एवं वामदेव का वार्तालाप १-४
घेरना, मेघ भेदना, वृत्रवध, निगलना, सिर काटना, अजेय इंद्र ५-१०
वार्ता, कुत्ते की आंत ११-१३
१९. इंद्र का वर्णन १-११
समर्थ, पानी रोकना, वृत्रवध, जल छिन्न-भिन्न करना १-४
जलभरना, तुर्वीति व वय्य, गो दोहन, छुड़ाना, वल्मीक, वर्णन, नई स्तुतियां ५-११
२०. इंद्र की स्तुति १-११
घिरना, यज्ञ में आने, उसे पूरा करने व सोमरस पीने की प्रार्थना, प्रशंसा करना १-५
विशाल, आहूत, शासक, बुद्धिबल, धन मांगना, स्तुतियां ६-११
२१. इंद्र का वर्णन १-११
आह्वान, शत्रु हराना, बुलाना १-३
स्थूल व विशाल, लोक-स्तंभक, क्रोधी, पालक, गौर व गवय की प्राप्ति, उत्तम कर्म,
स्तुतियां ४-११
२२. इंद्र का वर्णन १-११
हव्य आदि स्वीकार करना, परुष्णी नदी, धरती व आकाश कंपाना १-३
शब्द करना, अहि का नाश, अधिक दूध देना, स्तुति ४-७
प्रेरणा, बल, गाय व अन्न हेतु प्रार्थना ८-११
२३. इंद्र का वर्णन १-११
अभिलाषा, कृपादृष्टि, उपाय जानना, स्तुतियां, मित्रता, गतिशील १-६
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तेज आयुध, स्तुतियों का प्रवेश ७-८
गायों का प्रवेश, ऋतदेव, स्तुतियां स्वीकार हेतु प्रार्थना ९-११
२४. इंद्र का वर्णन १-११
बलशाली, धनदाता, रक्षक, यज्ञ, पुरोडाश १-५
मित्र बनाना, बल धारण, संग्राम, कम मूल्य मिलना, स्तुतियां ६-११
२५. इंद्र का वर्णन १-८
हितैषी, प्रार्थना, सोमरस निचोड़ना, पुरोडाश १-६
हिसा, मित्र, अन्न हेतु पुकारना ७-८
२६. इंद्र का वर्णन १-७
उशना कवि, संकल्प, दिवोदास, मनु प्रजापति, सोम लाना १-५
श्येन पक्षी, शत्रुनाश ६-७
२७. श्येन पक्षी का वर्णन १-५
जन्म जानना, हराना, सोम छीनना, भुज्यु, सोमपानार्थ आग्रह १-५
२८. इंद्र एवं सोम की प्रार्थना १-५
प्रेरणा, पहिया तोड़ना, सेनानाश, गुणहीन बनाना, गोदान १-५
२९. इंद्र व सोम की स्तुति १-५
आह्वान, प्रसन्न रहना, डर भगाने की प्रार्थना, घोड़े जोड़ना, धन-पात्र बनना १-५
३०. इंद्र की स्तुति १-२४
प्रसिद्ध न होना, महान्, युद्ध, पहिया चुराना, युद्ध करना, एतश ऋषि, दनुपुत्र का
नाश १-७
उषा का वध, टूटी गाड़ी, गाड़ी का गिरना, स्थापना, नगरों का नाश, शंबर, वचि व
सेवकों का वध, परावृक्त, तुर्वश एवं यदु नामक राजा ८-१७
और्व व चित्ररथ का वध, कृपा करना, दिवोदास को नगर देना, राक्षसों का संहार,
अजेय, शत्रु विदारक १८-२४
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३१. इंद्र की स्तुति १-१५
बढ़ना, पूजनीय, रक्षक, गोल चक्कर, स्मरण, परिक्रमा, फलदाता, धनदाता १-८
असमर्थ राक्षस, प्रयास, मित्रता, रक्षार्थ प्रार्थना, उपाय दीप्तिशाली, आकाश ९-१५
३२. इंद्र की स्तुति १-२४
शत्रुहंता, अभीष्टदाता, शत्रुनाशक, स्तुति, मनोहर, गोस्वामी के मित्र, गोधन का स्वामी,
अपरिवर्तनीय अभिलाषा, गौतम, नगरों का नाश, प्रदर्शन, वर्द्धित १-१२
आह्वान, अन्न, हरि नामक घोड़े लाने व पुरोडाश भक्षण हेतु प्रार्थना १३-१७
आकर्षित करना, सोना मांगना, १८-१९
धन याचना, घोड़ों की प्रशंसा, गोदाता, घोड़ों का सुशोभित होना २०-२४
३३. ऋभुओं का वर्णन १-११
घेरना, पुष्टि, तरुण बनाना, अमर पद, बात मानना, अभिलाषा, सुख से रहना १-७
रथ बनाना, कर्म स्वीकारना, हर्षित करना, मित्र न बनाना ८-११
३४. ऋभुओं की स्तुति १-११
विभु, देवश्रेणी, पूज्य देव, यज्ञ में आने व सोमपान हेतु प्रार्थना, प्रसन्न रहना, प्रशंसक,
धनदाता १-११
३५. ऋभुओं की स्तुति १-९
सुधन्वा की संतान, चमके भाग होना, कृपा, सोम निचोड़ने का आग्रह १-४
सोम वाले विभु, सोम निचोड़ना, स्वर्ग में बैठना, दानयुक्त बनाना ५-९
३६. ऋभुओं की स्तुति १-९
आकाश में घूमना, कुटिलताहीन रथ, युवा बनाना, गोचर्म से ढकना, प्रशंसनीय १-५
संरक्षण, दर्शनीय, अन्न उपजाने व यश संपादन का आग्रह ६-९
३७. ऋभुओं की स्तुति १-८
यज्ञ धारण, इच्छा, सोमरस धारण, ठोड़ियां, पुकारना १-५
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अश्वयुक्त बनना, बल, धन+अन्न याचना ६-८
३८. द्यावा-पृथिवी एवं दधिक्रा देव की स्तुति १-१०
त्रसदस्यु, दधिक्रा, तेज चाल वाले, उपभोग, भागना, साथ चलना, सहनशील १-७
दधिक्रा को न रोक पाना, स्तुति, प्रजा बढ़ाना ८-१०
३९. दधिक्रा देव का वर्णन १-६
स्तुति, कामवर्षी, पापनाशक, स्तोताओं के कल्याण हेतु बुलाना, दीर्घायु की
प्रार्थना १-६
४०. दधिक्रा देव का वर्णन १-५
स्तुति, भरणकुशल, उड़ने वाले, शीघ्र चलना, सूर्य का निवास १-५
४१. इंद्र एवं वरुण की स्तुति १-११
अमर होता, भाई बनाना, धन देने व बल प्रयोग की प्रार्थना १-४
स्तुति, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना, प्रेम एवं मित्र मांगना, स्तुतियों का जाना ५-९
धन व विजय हेतु प्रार्थना १०-११
४२. इंद्र, वरुण एवं त्रसदस्यु का वर्णन १-१०
दो प्रकार के राज्य, बल करना, धारक, बांटना १-४
पुकारना, डरना, शत्रु-वध, पुरुकुत्स, त्रसदस्यु, विश्वनाशक ५-१०
४३. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-७
वंदनशील, कल्याणकारी, शक्ति प्रदर्शन, रक्षा १-४
रथ चलना, सूर्यपुत्री, स्तुति ५-७
४४. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-७
रथ को पुकारना, शोभा प्राप्ति, प्रशंसा, धन याचना १-४
स्वर्ग से आना, साथ देना, आश्रित ५-७
४५. अश्विनीकुमारों का वर्णन १-७
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चर्मपात्र, अंधकार का नाश १-३
सुनहरे पंखों वाले, स्तुति, तेज फैलाना, भ्रमण ४-७
४६. वायु एवं इंद्र की स्तुति १-७
प्रथम सोमपानकर्त्ता, लोक कल्याणकारी, सोमपान, आसन, निकट आना १-५
सोमपान हेतु प्रार्थना ६-७
४७. वायु एवं इंद्र की स्तुति १-४
सोमरस लाना, इंद्र-वायु, रथ पर चढ़ना, अश्व याचना १-४
४८. वायु की स्तुति १-५
सोमपान हेतु आह्वान, अश्व स्वामी १-२
अनुगमन, तेज गति वाले, जोड़ने की प्रार्थना ३-५
४९. इंद्र एवं बृहस्पति की स्तुति १-६
स्तुतियां, सोमपान, धन देने, सोमपान करने व निवास करने का आग्रह १-६
५०. बृहस्पति व इंद्र की स्तुति १-११
दिशाएं स्थिर करना, शत्रु का कांपना, स्वर्ग से आना, अंधकारनाशक, गाएं
छुड़ाना १-५
कामवर्षी, शत्रु को हराना, फलों से बढ़ना, याचना, दया भावना ६-११
५१. उषा का वर्णन १-११
उगना, घेरना, उत्साहित करना, दीप्त करना १-४
उषा, प्रकाश फैलाना ५-६
कल्याणकारी, प्रशंसा का पात्र, विचरना ७-९
धन हेतु जगाना, यश व अन्न-स्वामी बनाने की प्रार्थना १०-११
५२. उषा की स्तुति १-७
अंधकारनाशक, स्तुत, मां १-३
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जगाना, संसार भरना, अंधकार मिटाने व अंतरिक्ष व्याप्त करने की प्रार्थना ४-७
५३. सविता का वर्णन १-७
धन मांगना, कवच, काम में लगाना, व्रतरक्षक, व्यापक, कल्याण, पुत्र, पौत्र व धन
याचना १-७
५४. सविता की स्तुति १-६
रक्तदाता, सोम की उत्पत्ति, पाप दूर करने की प्रार्थना १-३
निवास स्थान व धन याचना ४-६
५५. विश्वेदेव की स्तुति १-१०
रक्षार्थ प्रार्थना, इच्छापूरक स्तुति १-३
यज्ञ-मार्ग बताना, रक्षा हेतु प्रार्थना स्तुति, रक्षा व धन याचना ४-१०
५६. धरती-आकाश की स्तुति १-७
गरजना, यज्ञयोग्य, प्रेरित करना, स्वामी बनाने की प्रार्थना १-४
द्युति संपन्न, यज्ञवहन करने व पास बैठने का आग्रह ५-७
५७. खेती का वर्णन १-८
सहायता, मधुर जल, ओषधियां मांगना, अनुगमन, चाबुक, जल-निर्माण १-५
हल से धन व धरती से फसलें मांगना ६-८
५८. अग्नि, सूर्य, जल, गाय एवं घृत का वर्णन १-११
मरणरहित, पालन, मानवों में प्रवेश, घृत उत्पत्ति १-४
जल का गिरना, घृत का अग्नि पर गिरना, आगे बढ़ना, मिलना, रूप निखारना,
मधुरतापूर्वक चलना, मधुरस ५-११
पंचम मंडल
सूक्त विषय मंत्र सं.
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१. अग्नि का वर्णन १-१२
बढ़ना, मुक्त होना प्रकट करना, मन का जाना, उत्पन्न होना, बैठना, स्तुति, सुखकर,
तेजों को हराना १-९
बलि, देवों को लाना, स्तुति १०-१२
२. अग्नि का वर्णन १-१२
गुफा में रखना, उत्पत्ति, स्तुति, युवा बनना, प्रार्थना १-५
छिपाना, शुनःशेप, व्रत पालक, चमकना ६-९
उत्पत्ति, स्तुतियां बनाना, धन पर अधिकार १०-१२
३. अग्नि की स्तुति १-१२
अनुगमन, अर्यमा, गोपनीय उदक, दर्शनीय, शत्रु-नाश, प्रज्वलित करना, पापी के
नाशार्थ प्रार्थना १-७
दूत बनाना, पाप से अलग करने की प्रार्थना ८-९
स्वीकारना, भागना, अपराध १०-१२
४. अग्नि की स्तुति १-११
स्तुति, हव्यवाहक, बंटवारा १-३
आह्वान, शत्रुनाश, प्रकाशयुक्त, बल के पुत्र, रक्षार्थ प्रार्थना ४-९
बुलाना, अश्व, पुत्र व अक्षय धन मिलना १०-११
५. यज्ञशाला का वर्णन १-११
हवन, नराशंस, सुखदाता, स्तुति, साधन, यज्ञ निर्माता १-६
चलना, सुखकारी देवियां, व्याप्त होना, हव्य ले जाने की प्रार्थना, प्रसन्न करना ७-११
६. अग्नि की स्तुति १-१०
आश्रयदाता, निवासदाता, अन्न व पुत्र देना, प्रकाशमान, प्रजापालक, अन्न लाने की
प्रार्थना १-७
अन्न मांगना, मुख में चमस, पास जाना ८-१०
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