आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
आल्हाकामनावन । ४८१ १० गारी देवो नहिं ऊदन का प्यारी मित्र हमारो जान ॥ करैं बियारी नहिं महलन में प्यारी सत्य प्रतिज्ञा मान १६६ सुनिकै बातैं लखराना की पदमा ठीक लीन ठहराय ॥ प्रीतम हमरे अब मनिहैं ना जैहैंअवशि मोहोबा धाय २०० यहै सोचिकै मन अपने मा रानी बोली फेरि सुनाय ॥ डोला हमरा सँगमा लैके राजन कूच देव करवाय २०१ मोरि लालसा यह इवालतिहै बालम मोहबा देउ दिखाय ॥ बनोवास को रघुनन्दन गे सीता लैगे साथ लिवाय २०२ सुर औ असुरन के संगर मा दशरथ साथ केकई माय ॥ लै सतिभामा कृष्णचन्द्र सँग भौमासुरै पछारा जाय २०३ जिन मर्याद्दा यह बाँधी है तेई नारि संग मा लीन ॥ बड़े प्रतापी कृष्णचन्द्र जी सोऊ पन्थ सत्य यह कीन २०४ आगे चलिगे जो क्षत्री हैं तिनमग चलनवही महराज ॥ संग में लैके बालम चालिये करिये सत्य धर्मको काज २०५ इतना कहिकै रानी पदमा आँखिनभरे आँसु अधिकाय ॥ तब लखराना लै रुमाल को आँसूपोंछि कहा समुझाय २०६ धीरज राखो चार मास लौं पँचये मिलब तुम्हें हम आय ॥ सत्य सनेहू ज्यहि ज्यहिपर है सोत्यहिमिलैतड़ाकाधाय २०७ यामें संशय कछु नाहीं है ब्राह्मण रोज कहैं यह गाय ॥ शास्त्र पुरातन की बानी यह रानी तुम्हें दीन बतलाय २०८ धर्म पतिव्रत ज्यहि नारी के प्यारी प्रीतम के अधिकाय ॥ कहा न टारै सो प्रीतम का चहु जस परै आपदा आय २०६ जो विलगावौ अब महलन मा तौ सब कीरति जाय नशाय॥ हँसै बनाफर म्वाहं मारग मा मेहरा बड़े कनौजीराय २१० ॥
आल्हखण्ड । ४८२ शोहरा फैली यहु दुनिया मा हँसिहैं जाति बिरादर भाय ॥ मेहरा लड़का रतीभान का सँगमालिहे जनानाजाय २११ तैसो समया अब नाहीं है जैसे समय भये रघुराय ॥ बड़े प्रतापी कृष्णचन्द्रजी द्वापरजन्मलीनतिनआय २१२ कलियुग बाबा की रजधानी रानी कहा गई बौराय ॥ दया धर्म दुनिया तें उठिगे दर दर सत्य पछारा जाय २१३ घर घर कुलटा हैं कलियुग में नर नर पाप भरा अधिकाय ॥ जर जर जरना है दुनिया मा हर हर हरी हरी बिसराय २१४ आखिर मरना है दुनिया मा लरना धर्म हमारा आय ॥ इतना कहिकै चला कनौजी रानी फेरि लीन बैठाय २१५ दिया बुझायो तुम परहुलका इतना किह्यो राहमें जाय ॥ पाँव पिछारी का डारयो ना चहुतनधजीधजीउड़िजाय २१६ कीरति प्यारी नर नारिन के निन्दा सुने मौत है जाय ॥ तहिले ठाकुर बघऊदन जी लाखनिलाखनिरहेबुलाय २१७ हाँक पाय कै बघऊदन कै तुरतै चला कनौजीराय ॥ द्वारे मिलिकै बघऊदन को जयचंदसभागयोफिरिधाय २१८ मस्तक धरिकै दुउ चरणनमा लाखनि ठाढ़भयो शिरनाय ॥ तब शिर सूंध्यो जयचंदराजा आयसु फेरिदीन हर्षाय २१९ आल्हा ऊदन को बुलवायो लाखनि बाँह दीन पकराय ॥ तुम्हें कनौजी का सौंपत हैं दोऊ सुनो बनाफरराय २२० सुनिकै बातें महराजा की दोऊ भाय बनाफरराय ॥ बोलन लागे महराजा ते राजन साँचदेयँ बतलाय २२१ जहाँ पसीना लखराना का तहँ गिरि जैहैं मूड़ हमार ॥ यामें संशय कछु नाहीं है मानो सत्य भूमिभरतार २२२
आल्हाकामनावन । ४८३ २१ इतना कहिकै आल्हा ऊदन लाखनि साथ चले शिरनाय ॥ बाजे डंका अहलंका के हाहाकार शब्द गे छाय २२३ चारों राजा गाँजर वाले बारहु कुँवर बनौधा केर ॥ लला तमोली धनुवाँ तेली इनते कहा चँदेले टेर २२४ लाखनि तुमका हम सौंपत हैं रक्षा किह्यो सबै सरदार ॥ बंश लकड़िया यह इकली है इतना लीन्ह्यो खूब विचार २२५ इतना कहिकै जयचँद राजा पंडित लीन्ह्यो तुरत बुलाय ॥ प्रथम पुजायो श्रीगणेश को पाछे तिलक दिह्यो करवाय २२६ गजाननहिं अरु लम्बोदर को तीसर गणाध्यक्ष को ध्याय ॥ सुमिरि भवानीसुत गणेशको लेशकलेश दीनबिसराय २२७ रानी तिलका पूजन कीन्ह्यो भूरी हथिनी तुरत मँगाय ॥ थाती सौंप्यो लखराना को हथिनीसम्मुख बैन सुनाय २२८ फिरि कर पकरयो लखरानाका ऊदन हाथ दीन पकराय ॥ मोहिं अभागिनि के बालककी रक्षा किह्यो बनाफरराय २२९ सुनिकै बातें महरानी की दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥ जहाँ पसीना लखराना का तहँ हम मूड़ देयँ कटवाय २३० घाटि न जानैं हम भाई ते माता साँच देयँ बतलाय ॥ फिकिरि न राख्यो लखरानाकी इनको बार न बाँको जाय २३१ इतना कहिकै महरानी ते ऊदन फेरि कहा ललकार ॥ करो तयारी अब मोहबे की सबियाँ शूरवीर सरदार २३२ हुकुम पायकै बघऊदन का सबहिन बाँधिलीन हथियार ॥ हथी चदैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार २३३ पायँ लागिकै दोउ तिलका के भूरी चढ़ा कनौजियाराय ॥ बजे नगारा त्यहि समया मा हाहाकार शब्द गा छाय २३४
५२ - आल्हाखण्ड । ४८४ मारु मारु कै मौहरि बाजी बाजी हाव हाव करनाल ॥ खर खर खर खर कै रथ दौरे रव्वा चले पवनकी चाल २३५ आगे हलका भे हाथिन के पाछे चलन लाग असवार ॥ बीच म डोला महरानिन के ह्वैगे अगलबगल सरदार २३६ भूरी हथिनी पर लाखनि हैं ऊदन बेंदुलपर असवार ॥ आल्हा बैठे पचशब्दा पर इन्दल सहित भये तय्यार २३७ कीनि सवारी हरनागर पर भैने जौनु चँदेले क्यार ॥ घोड़ मनोहरपर देवा है सय्यद सिर्गापर असवार २३८ लला तमोली धनुवाँ तेली येऊ लिये ढाल तलवार ॥ पैदल सेना अनगन्ती सब गर्जतचलीसमरत्यहिबार २३९ चारिकोस जब परहुल रहिगा लाखनि डेरा दीन डराय ॥ लाखनि बोले तहँ आल्हा ते साँची सुनो बनाफरराय २४० दियना अंटापर परहुल मा सो त्यहि आप देउ उतराय ॥ बचन मानिकै हम पदमिन के वादा कीन तहांपर भाय २४१ दियना शालत है जियरे मा मानो कही बनाफरराय ॥ सुनिकै बातें कनौजिया की आल्हाधावनलीनबुलाय२४२ लिखिकै चिट्ठी दै धावन को परहुल तुरत दीन पठवाय ॥ जहाँ कचहरी है सिंहा कै धावन तहाँ पहुँचा जाय २४३ चिट्ठी दै कै महराजा का बाकी हाल कहा शिरनाय ॥ पढ़िकै चिट्ठी सिंहा जरिगा डंका तुरतदीन बजवाय २४४ धावन चलिभा तब परहुल ते लश्कर फेरि पहुँचा आय ॥ कही हकीकति सब आल्हा ते तब जरिगये कनौजीराय२४५ हुकुम लगायो अपने दलमा डंका तुरत दीन बजवाय ॥ सजिकै सेना दुहुँतरफा ते पहुँची समरभूमिमें आय २४६
आल्हाकामनावत । ४८५ ५३ लाखनि राना इत हाथी पर वैसी परहुल का सरदार ॥ भाला छूटे असवारन के पैदलचलनलागितलवार २४७ झुके सिपाही दुहुँ तरफा के लागे करन भड़ाभड़ मार ॥ मूंड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डनके लगे पहार २४८ बड़ी लड़ाई मै परहुल में लाखनि राना के मैदान ॥ लड़ैं सिपाही दुहुँ तरफा के कटि २ गिरैंसुघरूवाज्वान२४९ उठि उठि ठाकुर लरैं खेत में कहुँ कहुँ रुण्ड करैं तलवार ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार २५० जैसे भेड़िन भेड़हा पैठे जैसे अहिर विडारै गाय ॥ तैसे मारै ऊदन ठाकुर सिंहाफौजगई बिललाय २५१ भागीं फौजै जब परहुल की लाखनि हाथी दीन बढ़ाय ॥ लाखनिराना के मुर्चा मा सिंहा आपु पहुँचा आय २५२ सूँड़ि लपेटा हाथी भिड़िगे दोऊ लड़न लागि सरदार ॥ सिंहा मार्यो तलवारी को लाखनिलीन ढालपरवार २५३ भाला मार्यो लखराना ने नीचे गिरा महाउत आय ॥ बलछी मारा सिंहा ठाकुर लाखनि लैगे वार बचाय २५४ खाली वार परी सिंहा की लाखनि तुरत लीन बँधवाय ॥ जायकै पहुँचे फिरि परहुल मा तुरतै दिया दीन गिरवाय २५५ लैके फौजैं सिंहा ठाकुर संगै कूच दीन करवाय ॥ कोस अढ़ाई कुड़हरि रहिगा डेरा तहाँ दीन डखाय २५६ भैने बोल्यो परिमालिक का मानो कही बनाफरराय ॥ गंगा ठाकुर कुड़हरि वाला कोड़ा घोड़ा लीन चुराय २५७ सवा लाख का सो कोड़ा है जो बनवा राजापरिमाल ॥ महामुशकिलिन घोड़ा दीन्ह्यो कोड़ानहींदीनत्यहिकाल २५८
२४ आल्हाखण्ड । ४८६ कीन प्रतिज्ञा हम कुड़हरिमां लौटति नगर ल्याब लुटवाय ॥ साँची करिये यहि समया मा मानो कही बनाफरराय २५६ इतना सुनिकै ऊदन जरिगे तुरतै हुकुम दीन फरमाय ॥ लागैं तोपैं अब कुड़हरि मा सबियाँगर्द देउ मिलवाय २६० इतना सुनिकै लाखनि बोले मानो कही बनाफरराय ॥ गंगाधर कुड़हरि का राजा मामा सगो हमारो आय २६१ लिखिकै चिट्ठी दै धावन को उनको खबरि देउ करवाय ॥ मैने तुम्हरे लाखनि आये कोड़ा आपु देउ पठवाय २६२ सुनिकै बातें लखराना की चिट्ठी लिखा बनाफरराय ॥ तुरतै धावन को बुलवायो औ कुड़हरिको दीनपठाय २६३ लैके चिट्ठी धावन चलिभा औ दरबार पहुँचाजाय ॥ चिट्ठी दीन्ह्यो गंगाधर को धावन हाथजोरिशिर नाय २६४ कही हकीकति सब गंगा ते जो कछु कह्यो बनाफरराय ॥ सुनि संदेशा पढ़ि चिट्ठी को ठाकुरक्रोधकीनअधिकाय २६५ तुरत नगड़ची को बुलवायो डङ्का दीन तहाँ बजवाय ॥ कह्यो सँदेशा फिरि धावन ते आल्है खबरि जनावोजाय २६६ राजा आवत समरभूमि में कोड़ा लेउ तहाँ पर आय ॥ इतना सुनिकै धावन चलिभा आल्है खबरि बताईजाय २६७ बाजे डङ्का ह्याँ कुड़हरि मा क्षत्री होन लागि तय्यार ॥ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार २६८ झीलम बख्तर पहिरि सिपाहिन हाथ म लई ढाल तलवार ॥ रणकी मौहरि बाजन लागी रणकाहोनलागब्यवहार २६६ चढ़िकै हथिनी गंगा ठाकुर तुरतै कूच दीन करवाय ॥ चारि घरी का अरसा गुजरा पहुँचे समरभूमिमाआय २७०
आल्हाकामनावन । ५८७ २१ जहँना हाथी गंगाधर का तहँ पर गये कनौजीराय ॥ कहि समुझावा भल मामा का कोड़ा अबै देउ मँगवाय २७१ नहीं बनाफर उदयसिंह जी कुड़हरि गर्द देयँ करवाय ॥ कौन दुसरिहा है आल्हा का सरबर करै समरमें आय २७२ त्यहिते तुमका समुझाइत है मामा कूच देउ करवाय ॥ इतना सुनिकै गंगा जरिगे बोले सुनो कनौजीराय २७३ काह हकीकति है आल्हा कै हमते कोड़ा लेयँ मँगाय ॥ एक बनाफर कै गिन्ती ना लाखनचढ़ैं बनाफरधाय २७४ हमते कोड़ा को पैहैं ना मैने साँच दीन बतलाय ॥ इतना सुनिकै चले कनौजी तम्बुन फेरि पहुँचे आय २७५ बत्ती दैदै दुहुँ तरफा ते तोपन दीन्हीं रारि मचाय ॥ अररर अररर गोला छूटे हाहाकार शब्दगा छाय २७६ गोला लागै ज्यहि हाथी के मानो गिरा धौरहर आय ॥ जउने ऊंट के गोला लागै तुरतै कूला जुदा है जाय २७७ गोला लागै ज्यहि क्षत्री के साथै उड़ा चील्ह अस जाय ॥ जउने रथमा गोला लागै ताके टूक टूक है जायें २७८ गोला लागै ज्यहि घोड़े के मानो मगर कुल्याचै खायँ ॥ अँधाधुंध भा दूनों दलमा धुवना रहा सरगमें छाय २७९ चुकी बरूदैं जब तोपन की तब फिरि मारु बन्द है जाय ॥ दूनों दल आगे को बढ़िगे रहिगा एक खेतरणआय २८० कहूँकहूँ भाला कहूँकहूँ बरछीं कहूँ कहूँ कड़ाबीनकी मार ॥ गोली ओला सम कहुँ बरषैं कोताखानी चलैं कटार २८१ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ॥ मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डनके लगे पहार २८२
२६ आल्हखण्ड । १८८८ ना मुँह फेरैं कुड़हरि वाले ना ई मोहबे के सरदार ॥ कउँधालपकनिबिजुलीचमकनि रणमा चलै खूब तलवार २८३ भागि सिपाही कुड़हरि वाले अपने डारि डारि हथियार ॥ गंगा ठाकुर के मुर्चा मा आवा उदयसिंह सरदार २८४ ऍंड़ लगावा तब बेंबुल के हाथी उपर पहुँचा जाय ॥ भाला मारा बघऊदन ने गंगा लैगा वार बचाय २८५ तवलों आये आल्हा ठाकुर हाथी भिड़ा बरोबरि आय ॥ दैकै साँकरि पचशब्दा को तुरतै कैदलीन करवाय २८६ लैकै फौजैं ऊदन ठाकुर कुड़हरिशहर लीन लुटवाय ॥ काछी कुरमी तेली भागे कोरीभागि थानविसराय २८७ दर्जी भुर्जी सब भागे तहँ भागे बड़े बड़े महराज ॥ कौन बखानै त्यहि समयाकै रहिगैनहींक्यहूँकहूँलाज २८८ साँच वातकरि जगनायक कै दीन्ह्यों लूट बन्दकरवाय ॥ लैकै कोड़ा बौना चलिभा आल्हानजरिगुजाराजाय २८६ कोड़ा दीन्ह्यो जगनायक को आल्हा तुर्त तहाँ बुलवाय ॥ कैद छुड़ाय दई गंगा की आदर कियो कन्नौजीराय २६० लैकै फौजैं गंगा ठाकुर साथै कूच दीन करवाय ॥ चलिभालश्कर कनौजियाका यमुना उपर पहुँचा जाय २६१ मज्जन करि कै श्रीयमुनाजल पाछे शम्भुचरण धरि ध्यान ॥ संध्या तर्पण विधिवत करिकै दीन्ह्योद्विजनतहाँपरदान २६२ कूच करायो श्रीयमुना ते कलपी पास पहुँचे जाय ॥ लैकै फौजैं लाखनिराना कलपीशहरलीनलुटवाय २६३ ऊदन बोले तब लाखनि ते यह्र का कीन कन्नौजीराय ॥ बदले कुड़हरिके लुटवावा मानो साँच बनाफरराय २६४
आल्हाकामनावन । ४८६ २७ बातैं सुनिकै लखराना की देवा कहा तुरत शिरनाय ॥ साँचे धर्मन के राँचे हैं याँचे मिले कनौजीराय २६५ कर्म कुलीनन के कीन्हे हैं साँचे मित्र बनाफरराय ॥ बातैं सुनिकै ये देवा की बोले तुरत उदयसिंहराय २६६ स्याबसि स्याबसि लाखनिराना कीन्ह्यो धर्म युद्धसों रार ॥ काहे न होवै यश क्षत्रिन को ऐसे युद्ध बीर बरियार २६७ इतना कहिकै उदयसिंह ने तुरतै कूच दीन करवाय ॥ नदी बेतवा के ऊपर मा छोरी कमर बनाफरराय २६८ डेरा गड़िगे तहँ क्षत्रिन के तम्बू गड़ा बनाफर क्यार ॥ जहँ महराजा लाखनि बैठे भारी लाग तहाँ दरबार २६६ आल्हा ठाकुर के तम्बू मा भैने गयो चँदेले क्यार ॥ कलम दवाइति कागज लैके आल्हा पत्र कीन तैयार ३०० चिट्ठी दीन्ही आल्हा ठाकुर बोले उदयसिंह सरदार ॥ खबरि जनावो तुम मल्हनाको आये कनउज राजकुमार ३०१ हमरी दादाकी दिशि हैंकै रानिन कीन्ह्यो दण्ड प्रणाम ॥ काह हकीकति है पिरथी कै सुखसोंकरो महल बिश्राम ३०२ जितनी बिल्ली हैं दिल्ली की किल्ली पकरि नचावों माय ॥ तौ तौ साँचे हम ऊदन हैं यहतुमकह्योसँदेशाजाय ३०३ सुनि संदेशा बघऊदन का हरनागरै लीन कसवाय ॥ चढ़ा तड़ाका हरनागर पर जगनिकयथातथ्यशिरनाय ३०४ नदी बेतवाको उतरत भा पहुँचत भयो मोहोबेद्वार ॥ फाटक खोल्यो दरवानी ने पहुँचे राजभवन सरदार ३०५ रानी मल्हना के महलन मा माहिल आयगयो त्यहिबार ॥ तबलौं पहुँचे जगनायक जी बोला उरई का सरदार ३०६
२८ आल्हाखण्ड । ४६० कवलों अइहैं आल्हा ठाकुर नीके हवैं बनाफरराय ॥ इतना सुनिकै जगनायक जी तुरतै बोले बचन बनाय ३०७ हिंया न अइहैं आल्हा ठाकुर अब चहु करू मनावनजाय ॥ उनकै खातिर कनौजिया घर नीके दऊ बनाफरराय ३०८ पारस लैके तुम कुठरी ते पिरथी पास देउ पहुँचाय ॥ लैके कुंजी जगनायक जी कुठरीखोलिदीनवतलाय ३०६ उठे झड़ाका माहिल ठाकुर कुठरी अटे तड़ाकाधाय ॥ साँकरिमारी जगनायक जी ताला तुरत दीन डरवाय ३१० बन्द कुठरिया माहिल ठाकुर मल्हना गई सनाकाखाय ॥ चिट्ठी दीन्ह्यो फिरिजगनायक औसबहालकह्योसमुझाय ३११ पढ़िकै चिट्ठी मल्हना रानी औ जगनायक संग लिवाय ॥ जहाँ कचहरी परिमालिक की चिट्ठी तहाँ दिखाई जाय ३१२ छन्द ॥ पढ़ि पत्रतहाँ। लहिमोद महाँ॥ परिमाल जहाँ। तजिशोकतहाँ॥ भवनमें आय । महासुख पाय ॥ लखिकैदतहाँ । उरई को जहाँ ॥ महरानि गई । तजि बन्धु दई ॥ अतिबेगचला । उरईको लला ॥ पृथिराजजहाँ। स्वउ आयतहाँ॥ सबहालकहा। बिपदाजोलहा३१३ सुनिकै बातें सब माहिल की यहु महराज पिथौराराय ॥ घाट बयालसि तेरहघाटी सबियाँतुरंतदीन रुकवाय ३१४ पहरा घूमें कहुँ पैदल का कहुँ कहुँ फिरैं घोड़असवार ॥ अनँद बधैया मोहबे बाजै घर घर होयं मंगलाचार ३१५ फाटक बन्दी है मोहवे मा घरका अवै न बाहर जाय ॥ आल्हा ऊदन की कीरति तहँ घर घर रहे नारि नर गाय ३१६ आल्ह मनौआ पूरण करिकै ध्यावों रामचन्द्र महराज ॥
आल्हाकामनावन । ४६१ २६ जलथलजनमों जहँ दुनियामा होवों तहाँ भक्त शिरताज ३१७ पिता मातु के मैं चरणन का ध्यावों बार बार शिरनाय ॥ जिन बल गाथा यह पूरण भै भुजबलनहीं भरोसाभाय ३१८ खेत छूटिगा दिननायक सों झंडा गड़ा निशाको आय ॥ तारागण सब चमकन लागे संतन धुनी दीन परचाय ३१६ आशिर्बाद देउँ मुन्शीसुत जीवो प्रागनरायण भाय ॥ हुकुम तुम्हारो जो पावत ना ललितेकहतगाथकसगाय ३२० रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥ मालिक ललिते के तबलों तुम यशसों रहौ सदा भरपूर ३२१ सुमिरि भवानी शिवशङ्कर को ह्वाँते करों तरँग को अन्त ॥ राम रमा मिलि दर्शन देवो इच्छा यही मोरि भगवन्त ३२२ इति श्रीलखनऊनवासि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मजबाबू प्रयागनारायणजीकीआज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गतपँडरीकलां निवासिमिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनुपण्डितललिताप्रसाद कृत आल्हामनावनवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः ॥ १ ॥ ठाकुरआल्हासिंहजीकामनावन सम्पूर्ण ॥ इति ॥
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अथ आल्हखण्ड ॥ नदीबेतवापरलाखनिपृथ्वीराज काप्रथमयुद्धवर्णन ॥ सवैया ॥ रामसिया पद दोउ मनाय सो ध्याय शिवा शिव चर्ण यथारथ । कीरति कृष्ण बखान करों जिनके बलसों बलवान भे पारथ ॥ भीषम कर्ण सुयोधन ज्वान महान सबै मरिगे रणभारथ । चाहत कृष्ण नहीं ललिते बलते थलते जगते सो अकारथ १ सुमिरन ॥ दशरथ नन्दन को बन्दन करि सीता चरण कमलको ध्याय ॥ सुमिरि भवानी शिवशंकर को औ यदुनन्दन चरण मनाय १ बड़े प्रतापी कुंती नन्दन बन्दन करों युधिष्ठिरराय ॥ गदा प्रहारी भीमसेन को ध्यावों बार बार शिरनाय २ शूर धनुर्धर नर अर्जुन की कीरति सकै कौन नर गाय ॥
२ आल्हाखण्ड। ४६४ विद्या पूरण सहदेऊ की कीरति रही जगतमें छाय ३ बड़ा प्रतापी रण मण्डल मा नकुलो समरधनी तलवार ॥ करण न होतो जो दुनिया मा तौ को होत दान वरियार ४ छूटि सुमिरनी गै देवन कै शाका सुनो पिथौरा क्यार ॥ नदी बेतवाके डाँड़ेपर लाखनि करी खूब तलवार ५ अथ कथाप्रसंग ॥ आल्हा ठाकुर के तम्बू मा भारी लाग राज दरवार ॥ त्यही समैया त्यहि औसर मा बोले उदयसिंह सरदार १ घाट बयालस पिरथी रोंके दादा करो कछू तदबीर ॥ इतना सुनिकै आल्हा बोले ऊदन धरो हृदय में धीर २ इतना कहिकै आल्हा ठाकुर तुरतै पान दीन धरवाय ॥ है कोउ योधा दूनों दल मा जो बितवा पर पान चवाय ३ इतना सुनिकै दोऊ दल के क्षत्री गये सनाकाखाय ॥ बोलि न आवा क्यहु क्षत्री ते सबहिन मूड़ लीन अउँधाय ४ ऊदन तड़पे त्यहि समया मा पहुँचे पाननिकट फिरिजाय ॥ आल्हा बोले तब ऊदन ते मानो कही लघुरवाभाय ५ अबती बारी है लाखनि कै गाँजर फते कीन तुम जाय ॥ नदी बेतवा के मोर्चा पर जावैं अवशि कनौजीराय ६ मीराताल्हन धनुवाँ तेली बोले दोऊ शीश नवाय ॥ तजी सम्पदा सब कनउज की आये लड़न कनौजीराय ७ नव दिन दश दिन भे गौने के सो तजिदई पदमिनी नारि ॥ बीरा खैये लाखनि राना करिये नदी भयानक रारि ८ बात बराबरी की सहिये ना चहिये जायँ नदी पर प्रान ॥ बातैं सुनिकै ये सय्यद की बीरा लीन कनौजी जवान ६
नदीबेतवांकासमर । ५६५ ३ ऊदन बोले तब लाखनि ते हमरे बचन करो परमान ॥ संग कनौजी हमहूं चलिबे करिबे घोर शोर घमसान १० मान न रखिबे क्यहु क्षत्री के तुम्हरे संग कनौजी ज्वान ॥ ऊदन लाखनि के मुर्चा ते जैहैं लौटि बीर चौहान ११ इतना सुनिकै लाखनि बोले मानो उदयसिंह सरदार ॥ रतीभान का मैं लड़काहूं नाती बेनचकवै क्यार १२ काह हकीकति हैं दिल्लीपति जो तुम चलो संगमें ज्वान ॥ भूरी हथिनी कछु बूढ़ी ना ना कछु असारोग बलवान १३ संग न लेबे हम काहू को आल्हा बचन करब परमान ॥ इतना कहिकै लाखनि ठाकुर नदी हेतु कीन प्रस्थान १४ धनुवाँ तेली मीरा सय्यद येऊ भये साथ तय्यार ॥ नदी बेतवा के पाँजर मा पहुँचा कनउजका सरदार १५ नौसै हाथी लखरानाके पानी पियनगये त्यहिकाल ॥ पार उतरिगे ते नदी के सहिनहिंसकेघाम बिकराल १६ तब हरिकारा पृथीराज का चौंड़ै खबरि जनाई जाय ॥ बहुतक हाथी पार आयगे मानों कही चौंडियाराय १७ इतना सुनिकै चौंड़ा बाम्हन अपनो हाथी लीन मँगाय ॥ चढ़ा तड़ाका फिरि हाथीपर नदी उपर पहुँचा आय १८ सबियाँ हथिनी लखराना की चौंड़ा तुरत लीन खिदवाय ॥ भगे महाउत सब तहँना ते आये जहाँ कनौजीराय १६ हाल बताइने सब हाथिनका ज्यहिविधिचौंड़ालीनखिदाय ॥ सुनि संदेशा लाखनिराना डंका तुरत दीन बजवाय २० भारी लश्कर लखराना का गर्जति चला समरको जाय ॥ घरी मुहूरत के अरसा मा पहुँचे समरभूमि में आय २१
४ आल्हाखण्ड । ४६६ लाखनिराना मीरा सय्यद धतुवाँ सहित उतरिगे पार ॥ नौसै हाथी लखराना का सातसै हथी पिथौरा क्यार २२ सोलासै के हाथी दलमा पहुँचे तुरत कनौजीराय ॥ जितने हाथी दूनों दल के सोसब तुरतलीन खिदवाय २३ गा हरिकारा पृथीराज का चौंड़ै खबरि जनाई जाय ॥ हमरी अपनी सब हथिनिनको लाखनिराना लीनखिदाय २४ सुनिकै बातैं हरिकारा की चौंडा फौज लीन सजवाय ॥ धाँधूठाकुर को सँग लैके तुरतैं कूचदीन करवाय २५ बीस खेत जब लाखनि रहिगे चौंड़ा बोला वचन सुनाय ॥ कहाँते आयो औ कहँ जैहौ आपन हाल देउ बतलाय २६ इकलो हाथी लखि चौंड़ाको लाखनि भूरी दीन बढ़ाय ॥ सम्मुख आये जब चौंड़ा के बोले तबै कनौजीराय २७ बेन चकवै के नाती हम बेटा रतीभान को जान ॥ मोहबा देखन हम जाइत हैं लाखनि नाम हमारो मान २८ आल्हा ऊदन के सँग आयन चौंड़ा साँच दीन बतलाय ॥ इतना सुनतै चौंड़ा बोला मानो कही चँदेलेराय २६ आल्हा चाकर परिमालिक के सो कनउजको गये रिसाय ॥ कीनि चाकरी उन जयचँदकी तिनके साथ कनौजीराय ३० ऐसी कहिये नहिं काहू सों अबहीं कूच देउ करवाय ॥ संगति राजा अरु चाकर की कतहूँ न सुनाकनौजीराय ३१ इतना सुनिकै लाखनि बोले मानो कही चौंड़ियाराय ॥ बड़ी बड़ाई ऊदन कीन्ही तब मनगई लालसा आय ३२ बिना मोहोबा आँखिन दीखे कैसे कूच देयं करवाय ॥ इतना सुनिकै चौंड़ा बोला मानो साँच कनौजीराय ३३
नदी बेतवा का समर । ४६७ ५ चढ़ा पिथौरा सात लाख सों सबियाँ घाट दये रुकवाय ॥ जो तुम लड़िहौ है चाकर सँग तौ रजपूती धर्म नशाय ३४ इतना सुनिकै लाखनि बोले चौंड़ा काहगये बौराय ॥ किरिया कीन्ही हम गंगा में चलिबे साथ बनाफर राय ३५ पाँउँ पिछारी का डरिबे ना चहुतन धजी धजी उड़िजाय ॥ चुवै निशाकर ते आगी चहु औ नभ मिलै धरणि में आय ३६ उवै दिवाकर चहु पश्चिम को सातौं सूखि समुन्दर जायँ ॥ लाखनि भागैं नहिं नदिया ते चौंड़ा साँच दीन बतलाय ३७ इतना सुनिकै जरा चौंड़िया तुरतै दीन्ही ढाल चलाय ॥ होउ बहादुर जो लखराना हमरी ढाल लेउ उठवाय ३८ लाखनि बोले तब धनुवाँ ते लावो ढाल यार यहिबार ॥ दाबि बछेड़ा धनुवाँ चलिभा धाँधू कहा बचन ललकार ३६ पाँउँ अगाड़ी को डारे ना नहिं मुहुँ धाँसि देउँ तलवार ॥ बात न मानी कछु धाँधू की धनुवाँ घोड़े का असवार ४० भाला धमका धाँधू ठाकुर धनुवाँ लैगा वार बचाय ॥ ढाल उठाई जब धनुवाँ ने स्याबासिकह्यो कनौजी राय ४१ लीन कटारी लाखनि राना औ रेतीमा दीन चलाय ॥ होय बहादुर जो दिल्ली को सो अब लेय कटार उठाय ४२ इतना सुनिकै भूरा चलिभा सय्यद उठा तड़ाका धाय ॥ तब ललकारा वहि भूराने सय्यद खबरदार है जाय ४३ कहा न माना कछु भूरा का सय्यद लीन कटार उठाय ॥ सो दैदीन्ही लखराना का चौंड़ा बहुत गयो शरमाय ४४ झुके सिपाही दुहुँ तरफा के फिरितहँ चलन लागि तलवार ॥ पैदल पैदल के बरणी मै औ असवार साथ असवार ४५ ११
६ आल्हखण्ड । १४८ मूँड़ि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतन क्यार ॥ गजके हौदाते शर बरषैं नीचे करैं महाउत मार ४६ कटि कटि कल्ला गिरैं खेतमा घायल भये सुघरुआ ज्वान ॥ नदी बेतवा के डांडेपर लाखनि चौंडाका मैदान ४७ दाब्यो लश्कर लखराना का लाग्यो होन भड़ाभड़ मार ॥ भागि सिपाही दिल्लीवाले अपने डारि डारि हथियार ४८ चौंडा बाम्हन औ लाखनिका परिगा समर बरोबरि आय ॥ तीर चौंडिया तकिकै मारा लाखनि लैगे वार बचाय ४६ तुरतै भूरी को दौरावा चौंडा पास पहुँचे जाय ॥ भाला मारा लखराना ने हाथी गिरा पछाराखाय ५० तुरत चौंडिया पैदल हैगा तब यह कहा कनौजीराय ॥ पायँ पियादे को मारैं ना हाथी और लेउ मँगवाय ५१ इतना कहिकै लाखनिराना आगे दीन्ही फौजबढ़ाय ॥ बाजे डंका अहतक के हाहाकार शब्द गा छाय ५२ सुर्चा हटिगा जब चौंडा का धावन तबै पहुँचा जाय ॥ सुनि हरिकारा की बातैं सब ताहर बेटा लीन बुलाय ५३ हुकुम लगावा महराजा ने तुम चढ़िजाउ नदीपर धाय ॥ हुकुम पिथौरा का पावतखन डंका तुरत दीन बजवाय ५४ सजा रिसाला घोड़न वाला आला तीनि लाखलों भाय ॥ कच्छी मच्छी ताजी तुर्की हरियल सुर्ख परैं दिखराय ५५ को गति वर्णैं तहँ सिरगनकी मिरगन चाल चलेसब जायें ॥ हंस चालपर पँचकल्यानी मुश्की मोरसरिस दिखरायें ५६ लवा कि चालन ताजी जावैं हरियल चलैं कबूतर चाल ॥ कच्छी कच्छपकी चालनमा मच्छी मगरमच्छकी चाल ५७
नदीबेतवाकासमर । ४६६ ७ सुर्खा जावैं शशाचालपर तुर्की तीतर के अनुहार ॥ भाला बलछी छुरी कटारी लीन्हे चढ़े ढाल तलवार ५८ अंगद पंगद मकुना भौंरा सजिगे श्वेतवरण गजराज ॥ धरी अँबारी तिन हाथिन के बहुतन हौदा रहे बिराज ५६ आदि भयंकर हाथी ऊपर पिरथीराज भये असवार ॥ तीरकमानै अनगिन्ती लै लीन्ही फेरि ढाल तलवार ६० छुरी कटारी भाला वरछी लीन्हे सबै नृपति हथियार ॥ घोड़नाम दलगंजन ऊपर ताहर आगे राजकुमार ६१ ढढ़ी करखा बोलन लागे विप्रन कीन वेद उच्चार ॥ औरि बयरिया डोलन लागीं औरै होनलाग ब्यवहार ६२ मारु मारु कै मौहरि बाजी बाजी हाव हाव करनाल ॥ खर खर खर खर कै रथ दौरे रब्वा चले पवनकी चाल ६३ घोड़ा हींसैं हाथी चिघेरैं बैगा अन्धधुन्ध त्यहिबार ॥ डेढ़ लाख दल पैदल लीन्हे राजा दिल्ली का सरदार ६४ डगमग डगमग धरती डोली देवता झाँकि गये असमान ॥ देवी देवता पृथ्त्री वाले चक्रित भये देखि चौहान ६५ को गति बरणै त्यहि समया कै जा क्षण चला पिथौराजवान ॥ लाली लाली आँखी कीन्हे गजभरि छातीका चौहान ६६ जहाँ हैं फौजैं लखराना की प्यारो पूत कन्नौजी क्यार ॥ मीराताल्हन बनरस वाला सिर्गा घोड़े पर असवार ६७ धनुवाँ तेली है घोड़े पर बारह कुँवर बनौधा केर ॥ चारौराजा गाँजर वाले तिनते कहा कन्नौजी टेर ६८ आई फौजैं पृथीराज की यारो वेगिहोउ हुशियार ॥ इतना सुनिकै कनउन वाले बोले सबै शूरसरदार ६६
८ आल्हखण्ड । ५०० हुकुम लगावो अब तोपन को गोलंदाज होयें तय्यार ॥ लखि अस मर्जी सरदारन की लाखनिहुकुमदीनत्यहिबार७० लै लै थैली बारूदन की सो तोपनमा दई डराय ॥ गोला छूटे दुहुँ तरफा के हाहाकार शब्द गा छाय ७१ लागै गोला ज्यहि हाथी के मानो चोर सेंधि कैजाय ॥ जउने ऊंट के गोला लागै तुरतै गिरै सार अललाय ७२ लागै गोला ज्यहि घोड़ा के मानो मगर कुल्याचै खाय ॥ गोला लागै ज्यहि क्षत्री के धुनकतरूईसरिसउड़िजाय ७३ जउने रथमा गोला लागै बिजली गिरै वृक्ष जस आय ॥ तैसे चूरण करि स्यन्दन को पहियाधुरी देय अलगाय ७४ फूटै गोला जब ठुकरे मा बिथरैं पाँच खेतलों भाय ॥ गोली निकरैं तिन गोलन ते ओलनसरिसजायँतहँछाय ७५ बोलि न पावैं कोउ ठाकुर तहँ चुप्पे भूमि देयँ पौढ़ाय ॥ बड़ी दुर्दशा भै तोपन मा तब फिरि मारु वन्दहैजाय ७६ दुनों गोल आगे को बढ़िगे रहिगा डेढ़ खेत मैदान ॥ भाला वलछी की मारुन मा व्याकुलभये सिपाहीज्वान७७ शुण्डा कटिगे हैं हाथिन के रुण्डन हैगा ऊंच पहार ॥ कङ्का कटि कटि गिरैं बछेड़ा घैहा होन लागि सरदार ७८ गंगा ठाकुर कुड़हरि वाला पूरन पटना का सरदार ॥ देवी मरहटा दक्षिण वाला अंगदनृपतिग्वालियरक्यार७९ हिरसिंह विरसिंह बिरिया वाले इनके साथ करें तलवार ॥ भुरा मुगलिया काबुल वाला सय्यद बनरस का सरदार ८० धौंधू धनुवाँ का मुर्त्ता है औ दतियाके बंशगुपाल ॥ चिंता ठाकुर रुसनी वाला गुरखा नृपति शहरबंगाल ८१