भारतकोश
संग्रह पर लौटें

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

१० मिश्रित भाषाओं में प्राप्त पद १ तनक हरि चितवो जी मेरी ओर . २२३ १३९ २ आज सखी मेरे आनन्द भयो है, घर मे मोहन लाधोरी २२४ ,, ३ आण मिल्यो अनुरागी (गिरधर) आण मिल्यो २२५ १४० ब्रजभाषा में प्राप्त पद १ बदला रे तू जल भरि ले आयो २२६ १४१ २. नन्द नन्दन बिलमाई, बदरा ने घेरी माई, २२७ ,, • (१) चित नन्दन बिलमाई, बदरा ने घेरी माई ,, ३ मेहा बरसवो करे रे, आज तो रमियो मैरे घर रे २२८ १४२ ४ देखी बरषा की सरसाई, मेरे पिया जी के मन आई २२९ ,, ५ रग भरी रग भरी, रग सूं भरी री २३० ,, ६. बसो मोरे नैनन मे नन्दलाल २३१ ,, ७ जोमीडा ने लाख बधाई, अब घर आये स्याम २३२ १४४ • (१) जोसीडा ने लाख बधाई, आज घर आये स्याम ,, ८. पायो जी मैं तो राम रतन धन पायो २३३ ,, •(१) राम रतन धन पायो, १४५ ९. माई मै तो लियो रमैयो मोल २३४ ,, •(१) माई, म्हैं गोविन्द लीनी मोल १४६ (२) माई, म्है लीयोरी गोविन्दो मोल ,, (३) मै तो गोविन्द लीन्हो मोल ,, (४) माई, मै तो लियो है साँवरियो मोल १४७ ˙ . (५) माई, मै तो लियो छै साँवरियो मोल " गुजराती में प्राप्त पद १. मने मलिया मित्र गोपाल, नही जाऊँ सासरिए २३५ १४८ २. अरज करे छे मीरा राकडी, ऊँभी ऊँभी अरज करे छे २३६ ,, ३. अबोला सीद जीही रहा मारा राज २३७ १४९ समर्पण द्योतक पद राजस्थानी में प्राप्त पद १ मीराँ रग लाग्यो हो नाम हरी, और रग अटकि परी . • २३८ १५१ • (१) मीराँ रग लाग्यो नाँव हरी, और रग अटकि परी ,, • (२) मीराँ लागो रग हरी, और रग सब अटक परी १५२ २ चालाँ वाही देस, चालाँ वाही देस २३९ १५३

११ मिश्रित भाषाओं में पाप्त पद १ म्हाँने चाकर राखो जी गिरधारी लाला, चाकर राखो जी २४० १५४ २ मैं तो थाँरे दामन लागी जी गोपाल २४१ ,, ब्रजभाषा में प्राप्त पद १. मेरे मन राम द्राम बसी . २४२ १५५ २ हमारे मन राधा स्याम बसी २४३ ,, ३ माई मैं तो गोविन्द सो अटकी २४४ १५६ ४. पग घुँघरू बाँध मीराँ नाची रे . २४५ ,, ५ चितननन्दन आगे नाचूँगी २४६ १५७ • (१) घुघरूँ बाँध मीराँ नाची रे, पग घुघरूँ ,, ६ मै गिरिधर के घर जाऊँ २४७ ,, ७ हरि मेरे जीवन प्राण अधार २४८ १५८ ८ निपट यकट छबि अटकै मेरे नैना २४९ ,, ९ सखी मेरो कानूडो कलेजे कोर २५० विभिन्न बोलियों में प्राप्त पद १. हमरे रौरे लागिल कैसे छूटी .. २५१ १५९ २ जो तुम तोडो पिया, मै नही तोडू . .. २५२ ,, गुजराती में प्राप्त पद १. मुखडानी माया लागी रे मोहन प्यारा . .. २५३ १६० ३. लेह लागी मने तारी, अल्याजी , २५४ ,, ३ नागर नन्दा रे बाल मुकुन्दा, छोडी छोने जनना धधारे २५५ ,, ४ राम चमकडू-जडियो रे राणाजी, २५६ १६१ ५ राम सीतापती थारी नेह लागी हो २५७ ,, ६. सुन्दरि स्याम सरीर म्हाँरा दिल २५८ १६२ ७ नही रे बिसरूँ हरि अन्तर माँ थी २५९ ,, “दासी” और “जन” प्रयोग युक्त पद राजस्थानी में प्राप्त पद १ तुमरे कारण सब सुख छाड या, .. २६० १६५ २ थाँरी छूं रमैया मोसूँ नेह निभावी २६१ ,, ३. पपइया रे पिव की बाणी न बोल .. . २६२ १६६ ४ साजन घर आवो जी मिठबोला . ∩ २६३ ,, • (१) सजन घर आवो जी मीठाँ बोलॉ १६७

१२ • (२) साजन घर आवो जी मीठाँ बोलाँ ,, ५ राणा जी म्हौरी प्रीत पुरबली मे काँई करूँ २६४ ,, ६ म्हाँरा ओलगिया घर आज्यो जी २६५ १६८ ७ जोगिया म्हाँने दरस दिया सुख होइ २६६ १६९ ८ तुम आवो जी प्रीतम मोरे, नित बिरहणी रागा हेरे २६७ ,, ९ प्यारे दरसन दीज्यौ रे, आइ रे आइ २६८ १७० १० माई, म्हौरी हरी हूँ न बूझी बात २६९ ,, •(१) माई, म्हौरी हरि न बूझी बैात १७१ ११ कुण बाचे पाती, प्रभु बिन २७० १७२ १२ रावलौ बिदद मोहि रूडो लागे, पीडित परायं प्राण २७१ ,, १३ तुम जीमो गिरधर लाल जी २७२ १७३ १४ तुम जीमो गिरधर लाल जू २७३ ,, १५ पिया तेरे नाम लुभाणी हो २७४ ,, १६ कहो तो गुण गाऊँ रे २७५ १७४ १७ नहि जाऊँ सासरे, माई, म्हाँने मिलिया छै सिरजणहार २७६ १७५ १८ दीजो म्हाँने द्वारिका को बास, रूडा रण छोड जी हो २७७ ,, • (१) द्वारका रो बास दीज्यो, म्हाँने द्वारका रो बास १७६ १९ द्वारका को बास हो, मोहि द्वारका को बास २७८ ,, २० म्हाँरा सतगुरु बेगा आज्यो जी २७९ १७७ मिश्रित भाषाओं मे प्राप्त पद १ ऐसो पिया जान न दीजै हो २८० १७८ २ हे मेरो मन मोहना . २८१ ,, ३ वारी वारी हो रामा हूँ वारी , तुम आज्यौ गली हमारी २८२ ,, ४ वैद को सारो नहिं रे माई, वैद को नही सारो . २८३ १७९ ५ अच्छे मीठे चाख चाख, बेर लाई भीलणी २८४ ,, ६ प्रभु, मेरा बेडा पार बाधान्यो जी २८५ १८० ७ मेरी कानाँ सुनज्यो जी, करुणा निधान २८६ ,, ८ जोगिया ने कहज्यो जी आदेस २८७ ,, ९ जोगिया ने कहियो रे आदेस २८८ १८१ १० जोगिया ने कहजो जी आदेस २८९ १८२ ११ राख कमडल गूदडी रे बौला, कियो नेवलो भेष २९० ,, १२ जोगिया जी दरसण दीज्यो आइ २९१ १८३

  • १२ - ब्रजभाषा में प्राप्त पद १ सखी मन स्याम सूरत बसी २९२ . २ पिया अब घर आज्यो मोरे, तुम मेरे हूँ तोरे २९३ " ३ कैसे जिऊँ री माई, हरि बिन कैसे जिऊँ री २९४ १८४ ४ मैं हरि बिन क्यो जिऊँ री माय २९५ " ५ प्रभु बिन ना सरै माई २९६ " ६ मैं अपने सैयाँ सग साँची २९७ १८५ ७. राणाजी, साँवरे रंग राची २९८ " ८ माई, मैं तो गिरधर के रंग राची २९९ १८६ ९ माई, मैं तो गिरधर रंग राची ३०० " १० राणा जी मै तो साँवरे रग राची ३०१ १८७ ११ मैं तो रग राती गुँसाइयाँ, मै तेरे रंग राती ३०२ .. १२ मैं गिरधर रग राती, सैयों ३०३ १८८ १३ सखी री, मै तो गिरधर के रग राती ३०४ ' १४ साँवरे रग राची, राणा जी हूँ तो . ३०५ १८९ १५. राणा जी, हो मै साधून रग राती ... ३०६ " १६. राम तने रंगू राची, राणा जी मैं तो साँवलियों रग राची ३०७ १९० १७ गोपाल रग राची, मैं श्याम रंग राची ३०८ .. १८ भीड छाँडि बीर बैद मेरे पीर न्यारी है ३०९ १९१ १९ हरि बिन कूंण गति मेरी ३१० " २० हरि तुम हरो जन की भीर . ३११ १९२ (१) हरी तुम हरौ जन की भीर " २१. मन रे परसि हरि के चरण . ३१२ १९३ २२ मैं तो तेरी सरण परी रे, राम, ज्यूँ जाणे ज्यूँ तार . ३१३ " २३ नहि ऐसो जनम बारम्बार ३१४ " . (१) नहि ऐसो जनम बारम्बार .. १९४ २४ यहि विधी भक्ति कैसे होय . ३१५ " २५ मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई . ३१६ १९५ २६ मेरे तो राम नाम, दूसरा न कोई ... ३१७ " २७. गोविन्द सूं प्रीत करत, तब ही क्यूँ न हटकी .. ३१८ १९६ .२८. सखी री, लाजि बैरन भई ३१९ १९७. २९. सखी, मोहे लाज बैरन भई ३२० ३०. अब तो हरि नाम लौ लागी ३२१

१४ गुजराती में प्राप्त पद १ सूं करूँ राना जी मारो चितडूं चुराये मारे मनडूं बेधाये ३२२ . १९९ २ म्हाँरे घेरे आवो सुन्दर श्याम, ३२३ ,, ३ विट्ठल वाहेला आवो रे, ३२४ २०० ' ४ जेने मारा प्रभु जी नी भक्ति न भावे, ३२५ ,, ५ भजलो नी सन्तो भजलो नी साधो, ३२६ २०१ विभिन्न बोलियों में प्राप्त पद पजाबी मे प्राप्त पद १ लागी सोही जाणै, कठण लगण ही पीर ३२७ २०२ २ कठण लगन की पीर रे, हरि लागी सोई जाने ३२८ .. उपासना खण्ड वैष्णव प्रभावद्योतक--निर्वेदाभिव्यक्ति राजस्थानी मे प्राप्त पद- १ थोडी थोडी पावो गिरधारी लालु जी ३२९ २०५ २ म्हॉरो मनडो लाग्यो हरि सूं में अरज करूँ अतर सूं ३३० ,, ३ मै थांरे गुण रीझी हो रसिक गोपाल .३३१ ' ४ बाना रो बिडद दुहेलो रे ३३२ २०६ ५ हरि से गरब किया सोई हारा ३३३ ,, ६ राणा जी, करमा रो सगाती कुल मे कोई नही ३३४ २०७ ७ साधू म्हॉरे आइया हेली, वे गिरधर जी रा प्यारा ३३५ २०८ ८ बडे घर ताली लागी रे, म्हारा मनथी उणारथ भागी रे ३३६ ,, ९ आवो सखी रली कराँ हे, पर घर गवण निवारि ३३७ ' १० राम मोरी बाँहडली जी गहो ३३८ २०९ ' ॰ (१) बाँहडली जी गहो राम जी २१० ११ सूरत दीनानाथ सो लगी ३३६ ,, १२ सब जग रूठ्या, रूठण द्यो, येक राम रूठ्यो नहि पावै ३४० २११ मिश्रित भाषाओं में प्राप्त पद १ अरे, मै तो ठाढी जपूँ रे राम माला रे . ३४१ ,, २ ज्योँरों चित चरणों से लागा, वे ही सबेरे जागा ३४२ ,, ३ माई म्हाँरे निरधन को धन राम • ३४३ २१२. ॰ (१) माई म्हाँरे निरधन को धन राम .. ,, ४, भजु मन चरण कवल अविनासी ... .. .. ३४४ . ,,

१५

  • ५ लगे रहना, लगे रहना, हरी भजन मे लगे रहना ३४५ २१३ ६ भजन भरोसे अविनासी, मे तो भजन भरोसे ३४६ " ७ भजन बिना जिवडा दु खी, मन तू राम भजन करीले ३४७ २१४ ८ तुम सुनो दयाल म्होरी अरजी ३४८ " ९ जग मे जीवणा थोडा रे, राम कुण करे जजाल ३४९ १० काय कूं न लियो, तब तू काय कूं न लियो ३५० २१५ ११ भजले रे मन् गोपाल गुणा . ३५१ १२ राम कहिये रे गोविन्द कहियेरे .. ३५२ २१६ १३. रमईयी बिन या जिवडो दुख पावै ३५३ " ब्रजभाषा में प्राप्त पद १ बसो मोरे नैनन मे नन्दलाल ३५४ २१७ २ मेरो मन राम ही राम रटै रे . ३५५ " ३ नैया मेरी हरी तुम ही खवैया ३५६ " ४ राम नाम रस पीजै मतुआ ३५७ २१८ ५ मेरा बेडा लगाय दीजो पार ३५८ " ६. कृष्ण करो जजमान ३५९ " ७. धन आज की घरी, सतसंग मे परी ३६० " ८ डब्बा मे सालगराम बोलत क्यों नहियाँ ३६१ २१९ ९ तुम बिन स्याम कौन सुने (गो) मेरी ३६२ " १० काहे को देह धरी, भजन बिन काहे को देह धरी .. ३६३ " ११. अब कोऊ कछु कहो दिल लागा रे.. ... . ३६४ २२० १२ करम की गति न्यारी सन्तो .. ... ३६५ " १३. भजन भरोसे अविनाशी, मैं तो . ३६६ " १४ कोई ना जाने हरिया तारी गति ... . ३६७ २२१ १५ चरण रज महिमा मे जानी .. ... ३६८ ' १६ मेरो मन हर लिनो राजा रणछोड, .. ३६९ " गुजराती में प्राप्त पद १. बोल माँ बोल माँ बोल माँ रे ... ... ३७० २२२ २. ध्यान धनी केरूँ धरवूं रे, बीजं मारे शुं करबूं . .. ३७१ " ३ राम नाम साकर कटका हाँ रे, मुख आवे अमी रस गटका ३७२ २२३ ४. मुझ अबला ने मोटी नीराँत थई . ... ३७३ " ५ मुखडानी माया लागी रे, मोहन प्यारा ... ३७४ २२४ ६ . काम नही आवे तो काम नही आवे " ... ३७५ "

१६ ७ हाँ रे चालो डाकोर माँ जई बसिय - ३७६ २२४ ८ सोकलडा नूं साल भरि भोटूं हो जी रे घर माँ ३७७ २२५ ९ लेताँ लेता राम नाम रे, लोक बडियाँ तो लाज मरे छे ३७८ ' १० हाँ रे मे तो की धी है ठाकोर थाली रे, पधारो बनमाली ३७९ " ११ कायेकूं न लीयो तब तु काय को न लीयो, ३८० २२६ खड़ीबोली में प्राप्त पद १ मै तो हरि गुण गावत नाचूंगी ३८१ " २ मालक कुल आलम के हो, तुम साँचे श्री भगवान ३८२ " ३ कछु लेना न देना मगन रहना ३८४ २२७ ४ मीराँ को प्रभु साँची दासी बनाओ ३८५ २२८ विभिन्न बोलियों में प्राप्त पद

  • १ वन्दे वन्दगी मत भूल ३८६ पौराणिक गाथाएँ वैष्णव प्रभाव द्योतक पद राजस्थानी में प्राप्त पद १ क्यूं कर म्हे दिन काटाँ (नाथजी), ३८७ २२९ २ दूर रहो रे कबर नदना रे ३८८ " ३ रुकमणी री लाज राखो ३८९ २३० ४ माधो जी, आया ही सरँगो, राणी रुकमण का भरतार ३९० " ५ मत आवै रे नन्दका म्हाकी गली ३९१ २३१ ६ म्हाँसूं मुखडै क्यूं नहि बोलो . ३९२ " ' ७ मोहन मुसक्याने सखी लागे सो ही जाने ३९३ " * ८ नन्द जी रे आज बधावणौ छे ३९४ २३२ ९ हेरी माँ नन्दको गुमानी, म्हॉरे मनडे बस्यो ३९५ १० कुछ दोष नहि कुबज्या ने, बीर अपना श्याम खोटा ३९६ २३३ ११ हमने सुणी छै हरि अधम उधार ण . ३९७ " १२. म्हॉर नैणा आगे रहोजी, स्याम गोविन्द . ३९८ २३४० मिश्रित भाषाओं में प्राप्त पद १ राम गरीब निवाज, मेरे सिर पर गरीब निवाज ३९९ " २ किरपा भई सतगुर अपने की बेर बेर, हरि नॉव लियो रीं ४०० २३५ ३ प्रीत मत तोडो गिरधर लाल . . ४०१ 〃 ४, नन्द को बिहारी म्हॉरे हिवड़े बस्यो छै . .. ... ४०२ २३६

१७ ५. मिथुला, कर पूजन की त्यारी ... ४०३ ,, • (१) मिथुला, सुन यह बात हमारी . ,, ६ मन मोह्यो रे बसीवाला ४०४ २३७ ७ वाह वाह रे मोहन प्यारे, कहां चले जादू करिके ४०५ ,, ८ पाछो रथ फेरो द्वारका रा रा ४०६ ,, ९ मैया ले थारी लकरी, ले थारी काँवरी ४०७ २३८ १० आज अनारी ले गयो सारी, बैठी कदम के डारी हो माय ४०८ ,, ११ वाटडली निहारों जी हरि ठाडी . ४०९ २३९ १२. मोरी गलियन मे आवो जी घनश्याम ४१० , ब्रजभाषाओं में प्राप्त पद । १ कुबज्या ने जादू डारा री, जिन मोहे श्याम हमारा . ४११ २४० २ मेरे प्यारे गिरिवरधारी जी, दासी क्यो बिसार डारी ४१२ ,, ३ छैल, गैल मत रोकै तू हमारी रे ४१३ ,, ४ छाँडो लगर मोरी बहियाँ गहो ना ४१४ २४१ ५ बडी बडी आँखियन वारो सांवरो, मो तन हेरो हँसि केरी ४१५ ,, • (१) हे माँ बडी बडी आँखियन वारो सांवरो २४२ ६ अब नही जाने दूँ गिरधारी, ४१६ ,, ७ मेरी चूनर भिजावे, मेरे भिजे अंगी पाक ४१७ २४३ ८ जागो मोहन प्यारे ललना, जागो बसीवारे ४१८ ,, ९ तुम सों तो मन लाग रह्यो, तुम जागो मोहन प्यारे . ४१९ २४४ १० सखी मेरो कानूड़ो कलेजे की कोर ४२० ,, ११ रे री कौन जाति पनिहारी ४२१ २४५. १२. गागर ना भरन देत तेरो कान्ह माई ४२२ ,, १३ कमल दल लोचना, तैने कैसे नाथ्यो भुजग ४२३ ,, १४ मन अटकी मेरे दिल अटकी हो ४२४ ,, १५. यदुबर लागत है मोहि प्यारो . ४२५ २४६ १६. भज केशव गोविन्द गोपाल हरि हरि ४२६ ,, १७ या मोहन के मैं रूप लुभानी .. ४२७ २४७ १८ अब मै शरण तिहारी जी मोहि राखो कृपानिधान . ४२८ ,, १९. सुण लीजो बिनती मोरी, में सरन गही प्रभु तोरी .. ४२९ ,, २०. तुम बिन मोरी कौन खबर ले, गोबरधन गिरधारी . ४३० २४८ २१ देखत राम हँसे सुदामा कूं, देखत राम हँसे . ४३१ ,, २२ गोकुल के बासी भले ही आये . ४३२ ,, २३: आये आये जी महाराज आये ... ... . ४३३ २४९

१८ २४ कोइ न जाने हरि या तारी गती, कोई ना जाणे ४३४ ,, २५ निपट विकट ठौर, अटके री नैना मेरे ४३५ ,, २६ जब ते मोहि नन्दनन्दन दृष्टि पड्यो माई ४३६ २५० • (१) जब ते मोहि नन्दनन्दन दृष्टि पड्यो माई ,, • (२) जब ते मोहि नन्दनन्दन् दृष्टि पड्यो माई २५१ • (३) जब ते मोहि नन्दनन्दन दृष्टि पर्यो माई ,, • (४) जब ते मोय नन्दनन्दन दृष्टि पडयो माई २५२- २७ कोई स्याम मनोहर ल्योरे, सिर धरे मटकिया डोले ४३७ ,, २८ या ब्रज मे कछु देख्यो री टोना ४३८ २५३ २६ शिव मठ पर सोहै लाल ध्वजा ४३९ ,, ३० शिवके मन माँही बसी कासी ४४० २५४ ३१ वे न मिले जिनकी हम दासी ४४१ ,, ३२ नमो नमो तुलसी महाराणी, नमो नमो हरि की पटरानी ४४२ ,, ३३ अजी ये लला जू आज गोकुल वासी ४४३ २५५ ३४ नागर नन्दा रे मुगट पर वारी जाऊँ ४४४ ,, ३५ कृष्ण करो यजमान, अब तुम ४४५ २५६ ३६ माई मोरे नैन बसे रघुबीर ४४६ ,, ३७ दोनो ठाढे कदम की छइयाँ ४४७ ,, ३८ गोरस लीने नन्दलाल, रस माँ ४४८ ,, विभिन्न बोलियों मे प्राप्त पद खडी बोली मे प्राप्त पद १ एरी बरजो जसोदा कान, मेरे घर नित्य आता है ४४९ २५७ २ बसीवारे की चितवन सालति है ४५० ,, ३ बता दे सखी साँवरियाँ को डेरो किती दूर ४५१ , पजाबी मे प्राप्त पद १ दसियो मोहन किस दानी ४५२ २५८ भोजपुरी मे प्राप्त पद • १ मेरो मन बसि गयो गिरधर लाल सो ४५३ ,, बिहारी मे प्राप्त पद १. मै तो लागी रहो नन्दलाल सों ४५४ २५९ २ हरि सो बिनती कर जोरी ४५५ , ३ जागिस गिरधारी लाल, भक्तन हितकारी ... ... ४५६ ,,

१९ गुजराती में प्राप्त पद १. कन्हैया बल जाऊँ, अब नहि बसूं रे गोकुल म ४५७ २६० २ लेने तुरी लकडी रे, लेने तुरी कामली ४५८ " ३ नन्दलाल नही रे आऊँ ४५९ २६१ ४ वारे वारे कहो ने कहीए, दिलडानीं वातो ४६० " ५ आँखलडी दाँकी रे, अलबेला तारी . ४६१ २६२ ६ झगडो लाग्यो श्री जमना जी आरे . ४६२ " ७ कौणभरे रे पानी कोण भरे .. ४६३ " ८ चाल सखी वृन्दाबन जइये, ४६४ " ९ चढी ने कदम्ब पर बैठो रे, वालो म्हांरो चीर तो हरी ने ४६५ २६३ १०. नाव रीसायो रे, बेनी म्हारो .. ... . ४६६ " ११ कानुडे न जाणी मोरी पीर .. .. ४६७ " १२ काँकरी मारे घुनारो काह्न, पाणी लाँ केम करी जईये ४६८ २६४ १३. भूली मोतियन को हार, सखी तट जमुना किनारे . ४६९ " १४ हाँ रे कोइ माधव ल्यो माधव ल्यो, बेचती ब्रजनारी रे ४७० " १५ मेलो ने मारगडो मेलीनी मावां . .. . ४७१ २६५ १६. मने मेली ना जाशो मावा रे, .. . ४७२ " १७ जल भरंवा केम जाऊँ, कानो मारी केडे पडयो रे ४७३ " १८ काँनुडे कामण कीधा, ओधव ने वाला .. ४७४ " १९ प्रेम नी प्रेम नी प्रेम नी रे, मने लागी कटारी प्रेम नी रे ४७५ २६६ २० जागो रे अलबेला कान्हा, मोटा मुकुट धारी रे ४७६ " २१ ब्रजमा कयम र'वाशे, ओधवना वा'ला ४७७ " २२ शामले मेल्यां ते बिसारी ४७८ २६७ २३. लाल ने लोचनीए दिल लीधाँ रे ४७९ " २४ लेशे रे महीडाँ केरा दान आ तो मोठुँ ४८० " २५ कोने कोने कहुँ दिलडानी बात ४८१ " २६. हाँ रे नन्द कुँवर तारूँ नाम सांभली ने ४८२ २६८ २७ नाखेल प्रेम नी दोरी, गला माँ अमने नाखेल ४८३ ' २८ शाने रोको छो वाट माँ, जवादो मने शाने रोको छो ४८४ ". २९ बहीयाँ जो ग्रही रे, मेरी सुद्ध न रही रे काहना ४८५ २६९ ३० शामरे की दृष्टि मानुं प्रेम की कटारी है . ४८६ " ३१. ब्रज माँ नाव्याँ फरीने गोपी नो वा'लो . ४८७ २७० ३२ गगरिया वेडा ढल से, उढानी भारी आयो . ४८८ " ३३˙ वा'ला ना कान हेडा रे ओधव जी .. .. ४८९ "

२० ३४ उठानी मोरे आलो रे, गागरिया बेढ़ा ढल से ४९० " ३५ ज्ञान कटारी मारी, अमने प्रेम कटारी मारी ४९१ २७१ ३६ राखो रे श्याम हरि लज्जा मोरी . ४९२ " ३७ ओ आवे हरि हसता सजनी, ओ आवे हरि हसता ४९३ " ३८ दव तो लागेल डुंगर मे, कहो ने ओधा जी ४९४ २७२ ३९ जाण्यूं जाण्यूं हेत तमारूँ जदवारे लोल ४९५ " राधा वर्णन राजस्थानी में प्राप्त पद १ मोहन जावो कठे साँवरियाँ, मोहन जावो कठे ४९६ २७५ (१) जावो कठे रे रामा, रहवो अठे साँवरियोयाँ " - २ आली ! म्हाँने लागे बृन्दाबन नीको ४९७ २७६ ३ उधो ! म्हाँने लागे वृन्दावन नीको रे ४९८ " मिश्रित भाषाओं में प्राप्त पद १ आवत मोरी गलियन मे गिरधारीँ ४९९ २७७ २ थाने कुब्जा ही मन मानी, हम सो न बोलना हो राज ५०० ' (१) थॉरे कुब्जा ही मन मानी, म्हाँसूं अनबोलना " २७८ (२) थॉके दासी ही मनमानी, म्हाँ से अनबोलना २७९ ब्रजभाषा में प्राप्त पद १ तेरो कान्ह कालो हो माई, मेरी राधा गोरी हो ५०१ " २ झूलत राधा सग गिरधारी ५०२ २८० • (१) झूलत राधा सग गिरिधारी " ३ चलो ब्रज की नारी, सखी, नन्द पौरी ठाढे मुरारी . ५०३ २८१ • (१) होरी खेलन चलो ब्रजनारी, सखि नन्द पौरि " ४ कैसे आवो हो नन्दलाल तेरी ब्रज नगरी ५०४ २८२ ५ हमरो प्रणाम बाँके बिहारी को ५०५ " ६. झट द्यो मेरो चीर रे मोरारी रे ५०६ " गुजराती में प्राप्त पद १ वारो यशोदा तारा दानी ने . •५०७ २८३ २ बोले झीणा मोर, राधे तारा डुँगरिया पर बोले ५०८ " ३ काहानो माग्यो दे, धुतारो भाग्यो दे .. ५०९ २८४°

२१ बाँसुरी वर्णन ब्रजभाषा में प्राप्त पद १ कान्हा रसिया वृन्दावन बासी ५१० " ⸚ (१) म्हाँरी बालपना की परीति थ्रे निभाज्यो रैना ५१० " २ आजु मैं देख्यो गिरधारी ५११ २८५ ३ प्यारी मैं ऐसे देखे श्याम ५१२ २८५ ४ कही ऐसे देखे री घनश्याम ५१३ २८६ ५ बाँकैं साँवरियाँ ने घेरि मोहि आन के ५१४ " ६ भई हो बावरी सुनके बाँसुरी ५१५ " ७ मुरलिया बाजे जमुना तीर ५१६ " ८ मोरे अँगना मे मुरली बजाय गयो रे ५१७ २८७ ९ कवन गुमान भरी बसी तू ५१८ " १० राधा प्यारी दे डारो जू बसी हमारी ५१९ २८८ ˙ (१) श्री राधे रानी, दे डारो बसी मोरी ५१९ " ११ चालो मन गगा जमुनी तीर ५२० २८९ १२ बंसीवारे हो कान्हा मोरी रे गगरी उतार. ५२१ " १३. तो सु लाग्यो नेहरा, प्यारे नागर नद कुमार ५२२ २९० १४. गावे राग कल्याण, मोहन गावे राग कल्याण ५२३ " १५. गौडी तो अब मिट गई, जब अस्त भयो है भाण ५२४ " गुजराती में प्राप्त पद १. वागे छे रे, वागे छे रे, पेला बनडा माँ ५२५ २९१ २. ए रे मोरली बृन्दावन वागी .. ५२६ " ३ चालो नी जोवा जइये रे, माँ मोरली वागी ५२७ " ४ एक दिन मोरली बजाई कनैय्या .. ५२८ २९२ ५ लीधाँ रे लटके, म्हाँरा मन लीधाँ रे लटके . ५२९ " ६ मोरली ए मोह्याँ मोहन, तारी मोरली ए मन मोह्याँ ५३० " ७ मार्या छे मोहन बाण, बाँली डे .. ५३१ " ८. वागे छे रे, वागे छे, वृन्दावन मुरली, बागे छे ५३२ २९३ नाथ-प्रभाव द्योतक पद राजस्थानी में प्राप्त पद १ जावा दे जावा दे. जोगी किसका मीत ५३३ २९५ २ जोगिया जी छाइ रह्यो परदेस ५३४ "

२२ ३ जोगिया जी ! निसि दिन जोवहाँ थारी बाट ५३५ ,, ४ पिय बिन सूनो छै जी म्हाँरो देस ५३६ २९६ ५ जोगिया जी आवो थे या देस ५३७ ,, ⬝ (१) जोगिया जी आजो इण देश ,, ६ म्हारे घर रमतो ही आई रे जोगिया ५३८ २९७ ७ जोगिया जी दरसण दीजो राज ५३९ ,, ⬝ (१) जोगिया दरस दीजो राज, बाँह गह्मा की लाज २९८ ८ तेरो मरम नहि पायो रे जोगी ५४० ,, ९ कोई दिन याद करोगे, रमता राम अतीत' ५४१ ,, १० धूतारा जोगी एकर सूं हँसि बोल ५४२ २९९ ११ धूतारा जोगी एक बेरिया मुख बोल रे ५४३ ,, १२ जोगिया आँणि मिल्यो अनुरागी ५४४ ३०० ⬝ (१) जोगिया आणि मिल्यो अनुरागी ,, मिश्रित भाषाओं में प्राप्त पद १ आपणाँ गिरधर के कारणे ५४५ ३०१ (१) आपणॉ गिरधर कै कारणै, मीराँ वैरागण भई रे ,, (२) अपणै प्रीतम के कारणै, मीराँ वैरागण भई रे ,, (३) अपने प्रीतम के कारणै, मीराँ वैरागन हो गई रे ,, २ ऐसी लगन लगाय कहाँ तू जासी ५४६ ३०२ ३ माई। म्हाँनै रमइयो है दे गयो भेष ५४७ ,, ब्रजभाषा मे प्राप्त पद १ जोगिया, मेरे तेरी . ... ५४८ ३०३ २ जोगिया री सूरत मन मे बसी .. ५४९ ,, ३ जोगिया जी, तूं कबरे मिलोगे आई ५५० ,, ४ जोगिया से प्रीतं किया दुख होई ५५१ ,, ५ जोगी मत जा, मत जा, पाँव परूँ मै तेरी ५५२ ३०४, गुजराती मे प्राप्त पद १ मैने सारा जगल ढूँढा रे, जोगिडा ना पाया ५५३ २ मलवो जटाधारी जोगेश्वर बाबा, मल्यो रे जटाधारी ५५४ *, ३ उठ तो चाले अवधूत, मठ माँ कोई ना बिराजे ५५५ ३०५

२३ संत-मत प्रभाव द्योतक पद राजस्थानी में प्राप्त पद १ ग्यान कूं बाण बसी हो, म्हॉरा सतगुरु जी हो ५५६ ३०७ २ बडे घर ताली लागी रे ५५७ " ३ चालो अभम के देस, काल देखत डरै ५५८ ३०८ ४ राम नाम मेरे मन बसियो ५५९ " *(१) रसियो राम रिझाऊँ ए माइ . ३०६ ५ म्हाँरो जनम मरण रो साथी ५६० " ६ मिलता जाज्यो हो गुरु ज्ञानी ५६१ ३१० ७ आज्यो आज्यो गोविन्द म्हॉरे म्हैल ५६२ ३११ ८ आवो आवो जी रग भीना ५६३ " ९ राणो जी गिरधर रा गुण गास्याँ ५६४ " १० सतगुरु म्हॉरी प्रीत निभाज्यो जी ५६५ ३१२ ११ पिया की खुमार, मै तो बावरी भई माय ५६६ " १२ जागो म्हॉरा, जगपति राइकेँ, हँसि बोलो क्यूं नहि ५६७ ३१३ १३. साँवरियो म्हाने भाँग पिलाई .. .. ५६८ " १४ प्रभु जी मन माने तब तार . ५६९ " १५ करना फकीरी तो क्या दिलगीरी ५७० ३१४ मिश्रित भाषाओं में प्राप्त पद १ कित गयो पछी बोल तो ... .. ५७१ " २ वाल्हा, मै वैरागिन हूँगी हो ५७२ " ३ हेली, सुरत सोहागिन नार .. ५७३ ३१५ • (१) पिरथिवी माया जल मे पडी ३१६ ४ मनख जनम पदारथ पायो, ऐसी बहुर न आता . ५७४ " ५. मै तो हरि चरणन की दासी .. ५७५ ३१७ ब्रजभाषा में प्राप्त पद १ कोई कछु कहै मन लागा ५७६ ३१८ २ मोहिं लागी लगन गुरु चरनन की . ५७७ " ३ गली तो झाारो बन्द हुई, मैं हरि सो कैसे मिलूं जाय ५७८ " ४ हेरी में तो प्रेम दिवानी, मेरो दरद न जाने कोय . ५७९ ३१९ • (१) राम की दिवानी, मेरो दरद नहिं जाने कोई . " ५. मीराँ मनमानी सुरत सैल असमानी . ५८० "

२४ ६ सखी, तैनै नैन गमाय दिया रोय ५८१ ३२० ७ पिया मोहि आरति तेरी हो ५८२ ,,- (१) स्याम तेरी आरति लागी हो ३२१ (२) पिया मोहे आरति तेरी हो ३२२ (३) पिया मोहिं आरति तेरी हो ,, ८ री मेरे पार निकस गया, सतगुरु मारया तीर ~५८३ ३२३ ९ भर मारी रे वाना, मेरे सतगुरु बिरह लगाय के ५८४ ,, १० नैनन बनज बसाऊँ री, जो मैं साहिब पाऊँ- ५८५ ~ ,, गुजराती मे प्राप्त पद १ मार्या रे मोहना बाण, धूतारे, मने मार्या मोहना बाण ५८६ ३२४ २ तमे जानि लियो समुद्र सरीखा, मारा वीरा रे ५८७ ,, ३ मदर माँ दिवडा बिना नुँ अँधारूँ ५८८ ,, ४ जुनैं थयूं रे, देवल, जुनूं थयूं ५८९ ३२५ ५ आरति तोरी रे प्रिय, मोरी आरत तोरी रे ५९० ,,

जीवन खण्ड

मतभेद राजस्थानी में प्राप्त पद १ तू मत बरजै माई री, साधाँ दरसन जाती । राम नाम हिरदै बसै, माहिले मदमाती । माई कहै सुन धीहड़ी, काहे गुण फूली । लोक सोवै सुख नीदड़ली, थे कथूँ रैणज भूली । गेली दुनियाँ बावली, ज्याँकूँ राम न भावै । ज्याँ रे हिरदै हरि बसै, त्याँ कूँ नीद न आवै । चौबास्याँ की बावड़ी, ज्याँ कूँ नीर न पीजै । हरि नारे अमृत झरै, ज्याँ की आस करीजै । रूप सुरगा राम जी, मुख निरखत जीजै । मीराँ व्याकुल विरहणी, अपनी कर लीजै ॥१॥† उपर्युक्त पद मे "माहिले" के स्थान मे "म्हाँरे" होना युक्तियुक्त है, क्योकि "माहिले" जैसा कोई शब्द हिन्दी या राजस्थानी मे नही है । २ मीराँ . माई, म्हाँने सुपणे मे परण गया जगदीस । सोती को सुपणा आविया जी, सुपणा बिस्वाबीस¹ । माँ गेली² दीखे मीरा बावली, सुपणा आल जंजाल । मीराँ माई, म्हाँने सुपणे मे, परण गया गोपाल । १ शुभ, २ पागल,

४ मीराँ-वृहद्-पद संग्रह अंग अंग हल्दी मै करी जी, सूधे भीज्यो गात । माई, म्हाँने सुपणे मे परण गया दीनानाथ । छप्पन कोटि जहाँ जाण¹ पधारे, दुलूहा श्री भगवान । सुपणे में तोरण² बाँधियो जी, सुपणे मे आयी जाण । मीराँ को गिरधर मिल्यां जी, पूर्व जनम के भाग । सुपणे मे म्हाँने परण गया जी, हो गया अचल सुहाग ॥२॥† पाठान्तर--१ माई म्हाँने सुपना मे परणी गोपाल । गैली ये मीराँ भई बावरी, सपनू छै आल जंजाल । जो तू ने सपना मे गिरधर मिलिया, तो कछुक सैनाण बताय । हल्दी तो पीठी म्हाँरे̂ अग लिपटाई, मँहदी सूँ राच्या म्हाँरा हाथ। छप्पन कोड जाटू जान-पधारिया, दूल्हो श्री भगवान । साँवरियो सिर पेच कलगी, सोरठणी तलवार । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, पूरबले भरतार ।† पाठान्तर--२ माई, री म्हाँने सुपणे में परणी गोपाल । राती पीरी चूनर पहरी, महदी पान रसाल । कॉई करों और संग भाँवर, म्हाँने जग जंजाल । मीराँ प्रभु गिरधरन लाल सूँ , करी सगाई हाल ।† पाठान्तर--३ माई, मै तो सपना मे परणी गोपाल । हाथी भी लायो घोडा भी लायो और लायो सुखपाल ।† १ बारात, ̂ २ लकडी का बनाया हुआ एक चित्रित त्रिकोण जो बारात के समय पर लडकी के पिता के दरवाजे पर बाँध दिया जाता है। नियमानुसार दुलहा नीम की छड़ी से इसको छू देता है, तंब अन्य रस्में की जाती हैं।

मतभेद पाठान्तर--४ माई हूँ सुपणे मे परणी गोपाल। मति करो म्हारी ब्याव सगाई, क्यूँ बाँधो जजाल। झूठा मात पिता बधु, बध्यो अबध्या ख्याल। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, साँचो पति नन्दलाल।† उपर्युक्त दोनो पदो की प्रामाणिकता संदिग्ध है। मीराँ की छोटी बयस मे ही मीराँ की माता का निधन हो गया था, यही अद्यावधि सर्वमान्य है। भाषा पर भी आधुनिक राजस्थानी का प्रभाव स्पष्ट है। ३ कूड़ो वर कुण परणीजे माय, परणूं तो मर मर जाय। लख चौरासी को चूडलो रे बाला, पहर्यो कितीयक बार। कै तो जीव जानत है सजनी, कै जाने सिरजणहार। सात बरस की मै राम आरध्यौ, जब पाया करतार। मीराँ ने परमातम मिलीया, भव भव का भरतार॥३॥† यह पद श्री भटनागर जी द्वारा प्राप्त हुआ है। पदाभिव्यक्ति मे अर्थ संगति नही है। अत पद को प्रक्षिप्त कहा जा सकता है। ४ म्हाँने गुरू गोविन्द री आण, गोरल ना पूजॉ। और जो पूजो गोरज्या जी, थे क्यूँ न पूजो गोर। मन बाँछत फल पावस्यो जी, थे क्यूँ पूजो और। नहि हम पूजॉ गोरज्याँ जी, नहि पूजॉ अनदेव। बाल सनेही गोविन्दो, साध सता को काम। थे बेटी राठोडाँ की, थॉने राज दियो भगवान। राज करे ज्यॉने करने दीज्यो, मै भगता री दास।

६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह सेवा साधू जनन की, म्हाँरे राम मिलण की आस। लाजै पीहर सासरो, माइतणौ मौसाल। सब ही लाजै मेडतिया जी, थाँसू बुरा कहै ससार। चोरी करूँ न मारगी¹, नहि मै करूँ अकाज। पुन्न के मारग चालताँ, झक मारो ससार। नहि मै पीहर सासरे, नहि मै पिया जी की साथ। मीराँ ने गोविन्द मिलिया जी, गुरू मिलया रैदास ॥४॥ पाठान्तर—१ साधो रो सग निवारो राईं², भाभी जी गोरल पूजो जी राज। साइयाँ³ पूजे गोर ने थे पूजो गणगोर, मन बाँछत फल पावस्यौ। भाभी जी रुठे गणगोर। नै पूजूं गणगौर नै नहि पूजूँ अनदेव, बाल सामरो जाको थे नहि जानो भेव। सेवा सालगराम की साध संता रो काम, थे, बेटी राठौड की, थाँने राज दियो भगवान। राज करे ज्याँने करन द्यो, मै सन्तां की दास। भगति करौ भगवान की, म्हाँरे राम मिलण की आस। लाजै पीहर सासरो, लाजै या मोसार, नितराँ⁴ आवै ओलमा, थाने बुरा कहै संसार। चोरी न करूँ कुमारगी, नहि कुमाऊं पाप, पुन रे मारग चालता, म्हांसू कांई हठ लाग्या छो आप। कदि⁵ ठाकुर परचो⁶ दियो, कदि मानी परतीति। कुल को नातो तोडियो, भाभी जी नहि छै राजां की रीति। नहि जाऊं पीहर सासरे, नहि पिया के पास। मीराँ सरणै राम के, म्हांने गुरू मिलिया रैदास। १ कुमार्गी होना, २ राजा, ३ सखियाँ, ४ नित्यप्रति, ५ कब, ६ प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाना,