ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
नाव पर चढ़ाना, विशाल घर, घर व रक्षा की याचना ४-७ ८९. वरुण की स्तुति १-५ मिट्टी का घर, सुख व दया हेतु, प्रार्थना १-४ देवों के प्रति द्रोह ५ ९०. वायु एवं इंद्र की स्तुति १-७ आह्वान, धनपात्र, वायु धन के लिए उत्पन्न, गोधन मिलना १-४ धन, सुख आदि के लिए प्रार्थना ५-७ ९१. वायु एवं इंद्र की स्तुति १-७ संगत करना, धन याचना, सेवा, करना १-३ सोमपान करने, पापमुक्ति व रक्षा हेतु आह्वान ४-७ ९२. वायु एवं इंद्र की स्तुति १-५ सोमपान हेतु आह्वान १-२ ऐश्वर्य हेतु प्रार्थना, शत्रुनाशक, कल्याण हेतु प्रार्थना ३-५ ९३. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-८ अन्न हेतु स्तुति १-२ पुकारना, धन हेतु स्तुति, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना, अन्न याचना, रक्षार्थ स्तुति ३-८ ९४. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-१२ स्तुति, यज्ञ पूरा करने शत्रुनाश के लिए स्तुति, रक्षार्थ आह्वान १-६ सुख, अन्न, धन के लिए स्तुति, जनसेवा के लिए आह्वान, सेवा, अपहर्त्ता की संपत्ति के नाश हेतु प्रार्थना ७-१२ ९५. सरस्वती नदी का वर्णन १-६ बढ़ना, सागर तक जाने वाली, यज्ञयोग्य स्त्री, धनसंपन्न १-४ अन्न, धन व पालन हेतु स्तुति ५-६ ebook converter DEMO Watermarks*
९६. सरस्वती नदी व सरस्वान् देव का वर्णन १-६ स्तुति, अन्न हेतु स्तुति, कल्याण याचना, पत्नी व पुत्र की कामना से स्तुति, रक्षार्थ हेतु, सरस्वान् की स्तुति १-६ ९७. इंद्र, मित्र, बृहस्पति आदि की स्तुति १-१० आह्वान, धन याचना, हव्य, वरेण्य, अन्न मांगना १-५ प्रकाशयुक्त घोड़े, अन्न देना, जलों की रचना, यज्ञरक्षा, शत्रुसेना के संहार व पालन हेतु प्रार्थना ६-१० ९८. इंद्र व बृहस्पति का वर्णन १-७ गौरमृग, सोमपान के लिए आह्वान, जन्मते ही सोमपान, युद्ध जीतने व विजय पाने की प्रार्थना, सोमरस केवल इंद्र के लिए, हितकारक, धनदाता व पालक बृहस्पति की स्तुति १-७ ९९. इंद्र एवं विष्णु की स्तुति १-७ वामन अवतार, महिमाशाली, द्यावा-पृथिवी को धारण करना, इंद्र द्वारा उत्पन्न, शंबर की नगरियों का नाश १-५ अन्नवृद्धि व पालन हेतु स्तुति ६-७ १००. विष्णु की स्तुति १-७ धन प्राप्ति, धन याचना, तीन चरण रखना, स्तुति, तेजस्वी रूप न छिपाने हेतु प्रार्थना, पालन हेतु प्रार्थना १-७ १०१. बादलों का वर्णन १-६ अग्नि की उत्पत्ति, घर व सुख याचना, शरीर बदलना, जल बरसाना, फलवती ओषधियों की कामना, शतायु हेतु प्रार्थना १-६ १०२. बादलों का वर्णन १-३ गर्भधारण करने व अन्न हेतु स्तुति १-३ १०३. मेंढकों का वर्णन १-१० वर्षभर सोना, ‘अख्खल’ शब्द करना १-३ ebook converter DEMO Watermarks*
भूरे व हरे मेंढक, अनुकरण, एक नाम और भिन्न रूप वाले, अतिरात्र यज्ञ, बिलों में छिपे मेंढक, गड्ढों से निकलना आयुवृद्धि हेतु प्रार्थना ४-१० १०४. इंद्र एवं सोम की स्तुति १-२५ राक्षसों के विनाश हेतु स्तुति, आह्वान, राक्षसों के नाशार्थ कामना, आयुध उत्पत्ति हेतु प्रार्थना, साधन १-५ स्तुति भेजना, राक्षसों का संहार करने व उन्हें देने व पुत्रहीन करने आदि हेतु प्रार्थना ६-११ सत्य व असत्य में विरोध, वज्र तेज करना, रक्षार्थ आना, राक्षसों के नाशार्थ व पाप से बचाने हेतु प्रार्थना १२-२५ अष्टम मंडल सूक्त विषय मंत्र सं. १. इंद्र की स्तुति १-३४ अभिलाषा, शत्रुनाशक, रक्षार्थ स्तुति, विपत्तियां पार करना, वज्रधारक, १-६ गान, शत्रुनगरियां तोड़ना, शीघ्रगामी घोड़े, गाय की स्तुति, आक्रमण हेतु जाना ७-११ सुधारना, वज्रधारी, वृत्रहंता, प्रसन्न करना, कामना, जल दुहना १२-१७ स्तुति सुनने हेतु प्रार्थना, सोमरस देने का आग्रह, भयानक, जेतापुत्र देने की प्रार्थना, धनदाता, विशाल उदर १८-२३ सोमपान हेतु प्रार्थना, टोप पहनना, पीछा करना, निवासदाता २४-२९ हारना, घोड़े जोड़ना, आसंग राजा, आगे निकलना, भोगसाधन ३०-३४ २. इंद्र का वर्णन १-४२ निर्भय, घट, स्वादिष्ट बनाना, अन्नयुक्त, स्तुति १-५ सोम बनाने का आग्रह, सोम खोजना, प्रसन्न करना ६-९ दीप्तिशाली, समझना, युद्ध, धनी होना, उक्थ जानना, शत्रु को न देने की ebook converter DEMO Watermarks*
प्रार्थना १०-१५ स्तुति, वज्रधारी, नशीला सोम, आह्वान, असह्य, जानना १६-२१ रक्षासाधन युक्त, वीर, पशु याचना व सोमरस याचना, आह्वान, सेवनीय मित्र, आह्वान, वृद्धि करना २२-२९ शक्ति धारण, वृत्रनाश, अनुकूल बनना, अन्न देना, हव्य वहन, रक्षक ३०-३६ प्रसन्न होना, पालक, देवों का, मेधातिथि ऋषि, गोदान, स्तुति ३७-४२ ३. इंद्र की स्तुति एवं राजा पाकस्थामा का वर्णन १-२४ प्रसन्न रहने व सुखी करने की प्रार्थना, स्वामी, महिमागान, आह्वान १-५ विस्तार करना, स्तुति, ओज बढ़ाना, भृगु, प्रस्कण्व, महिमा, धन याचना, पुरु, रूशम आदि, महिमा, धनस्वामी, पूजन, दर्शनीय ६-१७ स्तुति, अर्बुद व मृग का हनन, प्रकाशन, शोभा पाना, लाल घोड़ा, भुज्यु, स्तुति १८-२४ ४. इंद्र, अश्विनीकुमारों एवं पूषा की स्तुति १-२१ अनुपुत्र, कण्वगोत्रीय ऋषि, आह्वान, शक्ति धारण, धराशायी होना, वीरपुत्र की प्राप्ति, महान कार्य, ढकना १-८ सभा में जाना, धनस्वामी, इंद्र का आना, सोमरस रखना, सुशोभित होना, हरि नामक घोड़े, पापत्राता, धन देना, कामना, वज्र, सामज्ञाता पज्र, दीप्तिशाली, धन प्राप्ति १२-१९ मेधातिथि, प्रसन्न होना २०-२१ ५. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-३९ प्रकाश फैलाना, रथ में जुड़ना, प्रार्थना, स्तुति, घर जाना, हव्यदाता १-६ आह्वान, पशु, अन्न, धन मांगना, सोमपान की प्रार्थना, धनी, स्तुतियों की रक्षा व धनवहन हेतु प्रार्थना ७-१६ बुलाना, स्तुति समूह समीपवर्ती होने, सोमपान करने, अन्न व सरिताओं को लाने की प्रार्थना, भुज्यु, कण्व, धनसम्पन्न, आवत, अत्रि आदि, अंक्ष, अगस्त्य १७-२६ धन याचना, आह्वान, रथ, आह्वान, धन, बल, आदि लाने का आग्रह शीघ्रगामी घोड़े, ebook converter DEMO Watermarks*
पहिया, अन्न मांगना २७-३६ कशु, कशु सा दाता व विद्वान् अन्य नहीं ३७-३९ ६. इंद्र का वर्णन १-४८ बढ़ना, स्तुति, यज्ञभाई, प्रणाम, सिर काटना, मिलाना १-८ अन्न व कृपादृष्टि याचना, बलधारण, बढ़ना, अतुल, भेजना, वज्र चलाना, अतुल शक्ति, जल में वृत्र का हनन ९-१६ विलीन करना, भृगुगोत्रीय ऋषि, दूध-घृत देना, गायों द्वारा गर्भधारण, बढ़ाना, आयोजन, गाय व पुत्र देने की इच्छा करने की प्रार्थना, नहुष, गोशाला, अजेय, स्तुति १७-२७ संगम, सागर, दीप्ति प्राप्ति, शक्तिवर्धन, बुद्धि बढ़ाने की प्रार्थना, विस्तार, योग्य बनना, अजर, आह्वान, अनुगमन, शर्यणा देश २८-३९ शब्द करना, एकमात्र स्वामी, अश्व याचना, उक्थ, स्वीकारना, आह्वान, धन ग्रहण, स्वर्ग मिलना ४०-४८ ७. मरुद्गण की स्तुति १-३६ प्रकाशित होना, कांपना, दान, बिखेरना, मार्ग नियत, आह्वान, आगमन, स्थित रहना, स्तोत्र, सोमरस दुहना, आह्वान, शोभनज्ञान, नशा टपकाना १-१३ मतवाला होना, सुख मांगना, मेघ दुहना, ऊपर जाना, ध्यान, अन्नवृद्धि, कुश उखाड़ना, बल बढ़ाना, संयोग, उत्साह धारण, रक्षा, टोप पहनना १४-२५ कांपना, मरुतों का आना, गमन काल, जाना, स्तुतिप्रिय, आयुधयुक्त, दयालु बनाना, स्थिर रहना, अन्न देना, स्थित होना २६-३६ ८. अश्विनीकुमारों का वर्णन १-२३ दर्शनीय, ज्ञानी, आह्वान, वत्स ऋषि, आह्वान, सूर्या, मधुर बोलना, वहन, संपत्ति, सत्य स्वभाव, वर्धन, धन व सुखार्थ स्तुति १-१६ शत्रुभक्षक, बुलाना, रोगनाशक, कण्व, मेधातिथि, त्रसदस्यु, शत्रुनाशक, आह्वान १७-२३ ९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-२१
जाना, धन याचना, अनुष्ठान, जानना, पाक धारण, पास आना, स्तोत्र जानना, आना, ले जाना, स्तुति, आह्वान विजयी, रक्षासाधन, हव्यनिर्माण १-१४ धन याचना, देवी, यज्ञ में जाना, सोमलता निचोड़ना, प्रार्थना १५-२१ १०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६ बुलाना, यज्ञज्ञाता, निकट आने की प्रार्थना १-६ ११. अग्नि की स्तुति १-१० प्रशंसनीय, यज्ञनेता, अलगाने की प्रार्थना, इच्छा न करना, अमर १-५ बुलाना, कामना, मालिक ६-८ विचित्र धन वाले, सौभाग्य याचना ९-१० १२. इंद्र की स्तुति एवं वर्णन १-३३ याचना, रक्षा, भेजना, जानने की प्रार्थना, अभिलाषाएं पूर करना, कल्याण करना, धन मिलना, कल्याण देना १-७ बल बढ़ना, जलाना, स्तुति का समीप जाना, पुनीत करना, सीमा बांधना, प्रमुदित करना, स्तोत्र उत्पत्ति, स्तुति, प्रसन्न होना, कामना ८-१९ बढ़ाना, धनदान, स्वामी बनाना, स्तुति, दीप्त होना, नापना, बांधना, नियमित करना, स्तुति भेजना, धरती की नाभि यज्ञ, पशु याचना २०-३३ १३. इंद्र की स्तुति १-३३ पवित्र करना, बढ़ाना, बुलाना, आहुतियां, धनाभिलाषा, स्तुति, फल देना, प्रशंसा, पालक १-९ घर जाना, सुख मिलना, श्रेष्ठ शक्तिशाली, आह्वान, प्रसन्न होने व धन देने की प्रार्थना, श्रद्धा रखना, बढ़ाना, त्रिकद्रुक, स्तुति १०-१९ स्तुति, सोमपान, याचना, आह्वान, स्तुत, अन्न याचना, दया प्राप्ति आह्वान, हव्य ग्रहणार्थ प्रार्थना २०-२८ उत्तरवेदी, योग्य फल, शतक्रतु, इच्छापूरक, आह्वान २९-३३ १४. इंद्र की स्तुति १-१५ ebook converter DEMO Watermarks*
धनस्वामी, शक्तिशाली, पशुदान, इंद्र का न रुकना, मेघ दुहना, धनजेता, अंतरिक्ष बढ़ाना, मेघ का नाश १-७ बल असुर का नाश, दृढ़ करना, स्तुतियों का जाना, केशधारी घोड़े ८-१२ सिर काटना, औंधा करना, विरोधीनाशक १३-१५ १५. इंद्र की स्तुति १-१३ स्तुत इंद्र, जलधारक, वध, प्रशंसा, यज्ञकर्त्ता १-५ पूर्ववत् स्तुति, बल का बढ़ना, यश बढ़ाना ६-९ जन्म लेना, अवध्य, रक्षार्थ स्तुति, प्रशंसा का आग्रह १०-१३ १६. इंद्र की स्तुति १-१२ प्रशंसनीय, हव्यान्न, सेवा, आह्वान, स्वामी बनाना, शत्रुजेता, बढ़ाना, स्तुत्य, आहूत, धन व मार्ग याचना १-१२ १७. इंद्र की स्तुति १-१५ सोमरस निचोड़ना, बुलाना, शोभन शिरस्त्राण, पूर्ण करना, सोम, विशेषद्रष्टा, शत्रुनाशक, जगत्स्वामी, धनदाता १-११ आह्वान, कुंडपाट्य यज्ञ, सखा, भर्त्ता १२-१५ १८. अदिति का वर्णन एवं आदित्यों की स्तुति १-२२ सुख याचना, पालक, मार्ग, सुख मांगना, बहुतों के प्रिय, राक्षसों को अलगाने का ज्ञान, अदिति, स्तुत्य, सुख याचना, आरोग्य, सुख याचना, शत्रुओं को दूर रखने की प्रार्थना, पापियों के भी त्राता, पापी के नष्ट होने, व शत्रुओं को पाप व्याप्त करने की प्रार्थना १-१४ परिपक्व ज्ञाता, वरण, नाव, दीर्घायु व सुख याचना १५-१९ घर मांगना, आयु बढ़ाने की प्रार्थना २०-२२ १९. अग्नि का वर्णन एवं स्तुति १-३७ हव्य देना, नियंता, शोभनकर्त्ता, स्तुति, सेवा, दीप्त होना, स्वामी, फलदाता, सेवनीय १-९ ebook converter DEMO Watermarks*
ऊर्ध्वगति, देवों के पास जाना, निवासदाता, समृद्ध बनना, यश प्राप्ति, क्रोध दबाना, प्रकाशमान होना, ध्यान १०-१७ कामना, तृप्त, जेता, मनु द्वारा स्थापित, नित्य तरुण, आहूत, बलपुत्र १८-२५ अपवाद, भर्त्ता, सेवा की कामना, बुद्धिरक्षक, मित्रता बढ़ना, द्रवणशील, त्रसदस्यु, समाहित, फल पाना, शत्रुजेता २६-३५ पत्नियों का दान, धन, वस्त्र आदि देना ३६-३७ २०. मरुद्गण की स्तुति १-२६ कंपाना, अभिलषित, बलज्ञाता, द्वीपों का गिरना, शब्द करना १-५ ऊपर जाना, नेता, वीणा, उत्तमगति, सेचन समर्थ आयुध, विजय, एक नाम होना, दान, भक्त बनना, सुख फैलाना, जलकर्त्ता, सेवा, प्रशंसा करना, यशस्वी, समान जाति, ६-२१ मित्रता, सखा, शत्रुशून्य, रोग भगाने की प्रार्थना २२-२६ २१. इंद्र की स्तुति १-१८ रूप धरना, वरण, सेनापति, आह्वान, स्तुति, वज्रधारी, मित्रता जानना, धन, गाएं, घोड़े लाना, वृष्टिकर्त्ता १-११ आहूत, बांधवहीन, धन देना, बैठने का आग्रह, अक्षय धन, सौभरि, धन देना १२-१८ २२. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१८ रथ बुलाना, स्तुति का आग्रह, शत्रुजेता, पहिए चमकाना, खेती, तृप्त करना, सोमरस निचोड़ना १-८ धनवर्षक, इलाज की प्रार्थना, आह्वान, वरेण्य, स्तुति, बुलाना, रक्षक, दर्शनीय, बली ९-१८ २३. अग्नि का वर्णन १-३० बाधाहीन, रथदाता, पूज्य, आश्रय, ज्वालाएं, शोभन स्तुतियां, प्रशंसा, तृप्त, हव्ययुक्त १-९ होता, प्रदर्शन, धन याचना, प्रजापालक, हवि देना, व्यश्व ऋषि, स्थापना, यज्ञयोग्य, दूत, अजर १०-२० ebook converter DEMO Watermarks*
प्राप्ति, साथ जाना, सेवा, स्थूलयूप ऋषि, स्तुति, स्तुत्य, गान, अन्न-धन मांगना, यशस्वी २१-३० २४. इंद्र की स्तुति १-३० वज्रधारी, वृत्रहर, अश्वस्वामी, धन याचना, निर्बाध, धन हेतु प्रार्थना, आह्वान, आहूत, पूजनीय, नचाने वाले १-१२ अन्न, धन देना, व्यश्व ऋषि का पुत्र, स्तुत्य नहीं, अलंघनीय, बुलाना, स्तुत्य, दीप्तिशाली, वीरता के कर्म, पूजनीय १३-२२ दसवां प्राण, ज्ञान, कुत्स, धन याचना, पापत्राता, व्यश्व, परिजन, वरु, गोमती के किनारे वरु का वास २३-३० २५. मित्र, वरुण, अदिति, अश्विनीकुमार आदि का वर्णन १-२४ रक्षक, स्वामी, उत्पत्ति, यज्ञ प्रकाशन, धनदाता, अन्नदाता, सुशोभित, सत्ययुक्त, प्रेरक, वेगवान्, रक्षार्थ प्रार्थना, शोभनदाता १-११ धनदाता, आश्रय, दर्पनाशक, व्रताचरण, प्रकाश फैलाना, मित्र, पूर्ण करना १२-१९ धन स्वामी, स्तुति, राजा वरु, अश्व प्राप्ति २०-२४ २६. अश्विनीकुमार, इंद्र वायु आदि की स्तुति १-२५ आह्वान, सत्यरूप, अन्नयुक्त धनी, समर्थ, अभिलाषापूरक जलपालक १-६ अजेय, बुलाना, पणि, नेता, धन देने, कल्याण करने व सोमपानार्थ आह्वान ७-१५ दूत, श्वेतयावरी नदी, पोषक, निवासस्थान दाता, धन मांगना, शोभन गति वाले, आह्वान, अन्न, धन मांगना १६-२५ २७. विभिन्न देवों की स्तुति १-२२ स्थापना, निकट, तेज प्रसारक, शत्रुनाशक, बैठने की प्रार्थना, बुलाना, स्तुति, बाधा रहित घर मांगना १-९ शत्रुनाशक, स्तुति, काम में लगना, आह्वान, धनदाता, स्तुति, अन्न बढ़ना, रक्षक, गमन सरल बनाने की प्रार्थना १०-१८ घर याचना, धन धारण, धन मांगना १९-२२ २८. विभिन्न देवों की स्तुति १-५ ebook converter DEMO Watermarks*
धन याचना, बुलाना, रक्षार्थ प्रार्थना १-३ अक्षय अभिलाषाएं, सात दीप्तियां ४-५ २९. विभिन्न देवों का वर्णन १-१० गहने, स्थान पाना, कुल्हाड़ी, वज्र, एकाकी, मार्गरक्षक, तीन कदम १-७ सूर्या के साथ रहना, स्थान बनाना, दीप्तिशाली बनाना ८-१० ३०. विभिन्न देवों की स्तुति १-४ सभी देव महान्, स्तुति, राक्षसों से बचाने, सुख, गाय व घोड़ा देने की प्रार्थना १-४ ३१. यज्ञ का वर्णन १-१८ बार-बार बोलना, पाप से बचाना, रथ आना, अन्न पाना, सोमरस में गोदुग्ध, अन्न प्राप्ति, सेवा करना, सेवनीय आयु प्राप्ति, दान करना, सेवनीय १-११ पापरहित दान, रक्षक, धन हेतु स्तुति, देवकामी, जीतना, पुत्र प्राप्ति १२-१८ ३२. इंद्र की स्तुति १-३० वर्णन का आग्रह, सुविंद, अनर्शानि, पिप्रु आदि का वध, महान्, शत्रुनाशक, द्वार खोलना, अन्नदाता, प्रसन्नतादाता, धन की अधिकता, गाय, घोड़ा सोना व अन्न मांगना, रक्षार्थ आह्वान १-१० अन्नदाता, दानशील, शोभनव्रत, धनस्वामी, अनियंत्रित, देवऋण न रहना, स्तोत्र बनाने का आग्रह, स्तुत्य, सोमपान हेतु प्रार्थना, पास आने व धन देने की प्रार्थना, जल धाराएं गिराना, असुरवध ११-२६ शत्रुनाशक, यज्ञकर्म बताना, इंद्र को लाने की प्रार्थना, हरि नामक घोड़े २७-३० ३३. इंद्र की स्तुति १-१९ सेवा, स्तुति, अन्न याचना, रथ, शोभनकर्म, अभिलाषापूरक, शत्रुनगर-नाशक, भ्रमणकर्त्ता, पुकार सुनना, प्रसिद्ध, सोने का हंटर, हरि नामक अश्व, धनी, वृत्रहंता, स्तोम यज्ञ, प्रसन्न न होना, स्त्री पर शासन असंभव १-१७ रथ, स्त्री होना १८-१९ ३४. इंद्र की स्तुति १-१८ ebook converter DEMO Watermarks*
शासक, सोमलता को कंपाना, आह्वान, दीप्त हवि वाले, विश्वरक्षक १-६ धनयुक्त, स्तुत्य, पंख ढोना, स्वाहा बोलना, उक्थ मंत्र, आह्वान, स्वर्ग जाने, गाएं, घोड़े तथा मनचाही वस्तुएं देने की प्रार्थना ७-१५ घोड़े लेना, तेजस्वी घोड़े, पारावत १६-१८ ३५. इंद्र की स्तुति १-२४ सोमपान, अन्न, स्तोत्र स्वीकार करने का आग्रह, सोमपान की प्रार्थना, बल, धन व संतान की याचना, अंगिरा, विष्णु आदि के साथ स्तोत्र सुनने का आग्रह, गायों-अश्वों को जीतने व राक्षसों के नाशार्थ स्तुति १-१८ श्यावाश्व, सोमपान हेतु आग्रह, रक्षार्थ बुलाना, रत्न याचना १९-२४ ३६. इंद्र की स्तुति १-७ रक्षक, सज्जनपालक, जनक, शत्रुजेता, घोड़े व गायों के जनक, अत्रिगोत्रीय ऋषि, श्यावाश्व, त्रसदस्यु १-७ ३७. इंद्र की स्तुति १-७ वृत्रहंता, रक्षार्थ व स्तुति सुनने हेतु प्रार्थना, स्वामी होना, बल देने का कारण, त्रसदस्यु रक्षक १-७ ३८. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-१० ऋत्विज्, अजेय, सोमरस तैयार होना, यज्ञनेता, हव्य वहन, स्तुति स्वीकारने व सोमपान की प्रार्थना, शत्रुधन जेता, बुलाना, रक्षा हेतु प्रार्थना १-१० ३९. अग्नि का वर्णन १-१० स्तुति, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना, हवन, सुखकारी, प्रसिद्धि, रहस्य जानना, मांधता दूत, चारों ओर जल १-१० ४०. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-१२ हराना, यज्ञ करना, युद्ध में रहना, धन धारण १-४ सागर ढकना, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना, आह्वान, धनभोग कामना, आह्वान, नदियों को खोलना, प्रेरक, जल जीतना ५-१० शुष्ण की संतान का वध, स्तुतियां बोलना ११-१२ ebook converter DEMO Watermarks*
४१. वरुण का वर्णन १-१० पशुरक्षक, प्रशंसा, नाभाक ऋषि, आलिंगन, संसार, धरती निर्माता, काव्य पोषण, काव्य स्थित होना, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना १-७ माया का नाश, वरुण का स्थान, द्यावा-पृथिवी के धारक ८-१० ४२. वरुण व अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६ सम्राट् बनना, अमृतरक्षक, नाव, सोमपान व शत्रुनाशार्थ प्रार्थना १-६ ४३. अग्नि की स्तुति १-३३ बुद्धिमान्, जातवेद, वनभक्षण, अलग जाना, झंडा, काली धूल, शांत न होना, झुकाना १-८ प्रवेश, स्रुच, सेवा, याचना, आह्वान, सखा, हव्यदाता, अश्वस्वामी ९-१६ स्तुतियों का जाना, प्रसन्न करना, स्तुति, आह्वान शत्रुनाशक स्तुति १७-२४ हितकारी, द्वेषियों के संहारक, मनु द्वारा प्रज्वलित, आह्वान अन्न देना, तत्त्वद्रष्टा २५-३० याचना, अंधकारनाशक, धन याचना ३१-३३ ४४. अग्नि की स्तुति १-३० प्रिय, कामना हेतु प्रार्थना, स्थापना, किरणों का उठना, धनयुक्त, स्रुच, स्तुति, सेवित, श्रेष्ठ अग्नि, आह्वान, वस्तुएं मांगना, शक्ति से उत्पन्न, मेधावियों के संग बढ़ना, आह्वान, बैठना, धन मिलना १-१५ कूबड़, प्रेरित करना, धनस्वामी, प्रसन्न करना, कामना, मेधावी, मित्रता जानने का आग्रह, आशीर्वाद सत्य होने हेतु प्रार्थना, अनुग्रह में रहने की प्रार्थना, स्तुतियों का पहुंचना १६-२५ नित्यतरुण, यज्ञनेता, पवित्रकर्त्ता, जागृत रहना, उमर बढ़ाने की प्रार्थना २६-३० ४५. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-४२ कुश बिछाना, समिधाएं, झुकाना, बाण उठाना, दृढ़ करना, प्रधान रथी, अन्नदाता बनने, रथ लाने व पास जाने की प्रार्थना १-१० उपद्रवहीन, सुखसाधन देना, रक्षक, वस्तुएं मांगना, धन लाने हेतु प्रार्थना, पशु देखना, ebook converter DEMO Watermarks*
आह्वान, पुकार सुनने, गाय देने के लिए जागने की प्रार्थना, बलपति ११-२० अजेय, सोमरस देना, धन प्राप्ति, कद्रु ऋषि, अहन्वाय्य, स्तुति, प्रशंसा, मार्ग बनाना २१-३० सुख मांगना, प्रसिद्ध होना, शोभन प्रसिद्धियां, शूर, पापनाशी, बात कहना, एवार, धन देना, धन लाने की प्रार्थना ३१-४२ ४६. इंद्र, वायु एवं सोमरस की स्तुति १-३३ अश्वस्वामी, धनदाता, स्तुतिगान, मरुद्गण, यज्ञ पूरा होना, बढ़ना, धन मांगना, सेना, धन छीनना, आह्वान, वस्तुएं देना, आह्वान १-१२ आगे रहना, शत्रुजेता, अन्न, धन एवं पुत्रादि हेतु प्रार्थना, शत्रुरोधी, गुणगान, गिरना, दुर्बुद्धिनाशक, सहनशील १३-२० पृथुश्रवा, वश, रथ खींचना, कीर्ति मिलना, स्तुति, मिलना, अक्ष, नहुष आदि, अन्न भेजना, गो-प्राप्ति २१-२९ बैल का आना, पृथुश्रवा, गो व अश्व प्राप्ति, युवती को लाना ३०-३३ ४७. मित्र, वरुण, आदित्य एवं उषा की स्तुति १-१८ शोभन रक्षाएं, सुख व धन मांगना १-७ पाप रक्षार्थ प्रार्थना, माता अदिति, सेवनीय, शोभन मार्ग पर ले जाने, शोभनपुत्र देने, पापों से दूर रखने, कष्ट से बचाने हेतु प्रार्थना व बुरे स्थानों को दूर करने व बुरे सपनों से बचाने की देवों से प्रार्थना ८-१८ ४८. सोम की स्तुति १-१५ घूमना, धन वहन की प्रार्थना, अमर सोम, आयु बढ़ाने, व्यभिचार से बचाने व धनी बनाने की प्रार्थना, आयु बढ़ाने का आग्रह, शत्रु का जाना, सुख याचना, सखा सोम १-१० आयु बढ़ना, हृदय में प्रवेश, विस्तार करना, स्तुतियां बोलने व रक्षार्थ प्रार्थना ११-१५ ४९. अग्नि की स्तुति १-२० वरण, स्तुति, मननीय स्तोत्र, यजमान, रक्षक, पवित्र, पूजक रक्षार्थ प्रार्थना, शक्तिस्वामी, यजन १-१० ebook converter DEMO Watermarks*
प्रशंसनीय धन मांगना, कंपित करना, धन मांगना, जलाना, स्तुति, आह्वान, स्तुति, प्रजापालक, पीड़ा से बचाने की प्रार्थना ११-२० ५०. इंद्र की स्तुति एवं वर्णन १-१८ आह्वान, संस्कार, धनी, सत्यरक्षक, शूर, स्वर्णदेह, धन व पशु देने की प्रार्थना १-७ नगर भेदक, आनंद की प्राप्ति, धनस्वामी, मित्र बनाना, मिलाना, धनस्वामी, बुलाना, वृत्रहंता, रक्षार्थ प्रार्थना, मिलना ८-१८ ५१. इंद्र की स्तुति १-१२ बढ़ाना, अद्वितीय, स्तुत्य, कल्याणकारी, फलदाता, मित्र बनाना १-६ स्तुत, स्तुति, ज्ञान कराना, सुख, प्रशंसा, अवध्य ७-१२ ५२. इंद्र का वर्णन एवं स्तुति १-१२ आना, स्वर्ग निर्माता, स्तुति, सुखकर, शक्तियां १-६ स्तुति, जौ खाना, रक्षाभिलाषी, तेजस्वी, आना ७-१२ ५३. इंद्र की स्तुति १-१२ धन मांगना, प्रतिद्वंद्वी नहीं, अन्नराजा, आह्वान, भेदन, आह्वान, १-६ नित्य युवक, वृष्टिकारक, वृत्रहंता, सोमपान का आग्रह, आह्वान ७-१२ ५४. इंद्र की स्तुति १-१२ आह्वान, स्वर्गदाता, आह्वान, वहन हेतु प्रार्थना, बुलाना १-७ सोमरस निचोड़ना, यश याचना, गोदाता, विस्तृत, अन्न प्राप्ति ८-१२ ५५. इंद्र का वर्णन एवं स्तुति १-१५ आह्वान, धनदाता, वृत्रनाशक, कामनाएं पूरी करना, समर्पण, धन देना १-६ आह्वान, पुरुषार्थ, ताड़न, स्तुति, मार्गज्ञाता, पलायन ७-१५ ५६. आदित्य, वरुण, मित्र, अर्यमा व अदिति की स्तुति १-२१ रक्षा याचना, ज्ञाता, स्तुत्य धन, रक्षार्थ प्रार्थना आह्वान, पुण्य, प्रसिद्ध, रक्षा-इच्छुक, स्तुति, पुत्र को न मारने की प्रार्थना १-११ ebook converter DEMO Watermarks*
अदिति, रक्षक, फंसना, शोभनदाता १२-१६ छोड़ना, अतुलनीय वेग, रक्षण व पापियों के नाश की प्रार्थना १७-२१ ५७. इंद्र की स्तुति १-१९ बुलाना, व्याप्त करना, वज्र पकड़ना, बुलाना, आह्वान, शक्तिशाली, वज्रधारी, याचना, निर्माण, हर्षकारक १-११ धन याचना प्रार्थना, पास आना, अश्व प्राप्ति १२-१६ अश्व-ग्रहण, सुंदर लगाम वाले घोड़े व घोड़ियां, निंदा वचन न बोलना १७-१९ ५८. वरुण एवं इंद्र का वर्णन १-१८ सत्कार करना, आह्वान, मिलाना, गोपालक, हरे अश्व, दूध देना, सखा आदित्य, पूजा, शब्द करना, सोमरस ले जाने का आग्रह १-१० स्तुति, नदियों का गिरना, मुक्त, मेघभेदन, रथ पर बैठना ११-१५ रथ मिलना, धन प्राप्ति, प्रियमैध ऋषि १६-१८ ५९. इंद्र का वर्णन १-१५ स्तुति, स्वभाव, स्तुत्य, स्तुति, सीमा बनाना असंभव, सेना जीतना, यज्ञ में आना, पूज्य १-८ शूर, प्रसन्न होना, प्रेरित करना, शक्तिशाली, झुकाना, बछड़े देना, धनी ९-१५ ६०. अग्नि का वर्णन १-१५ रक्षार्थ प्रार्थना, तेजस्वी होना, धन याचना, हव्यदाता, प्रेरणा, धन प्राप्ति १-६ जातवेद, धनस्वामी, धन मांगना, प्रशंसित, दो रूप, स्तुति, धन व घर मांगना, स्तुति ७-१५ ६१. अग्नि का वर्णन १-१८ सेवा, पास बैठना, लेना, चढ़ना, कामना, रथ, जल का दोहन १-७ याचना, पूजा, मधु, सिक्त करना, सोने के कान ८-१२ दूध सींचने का आग्रह, मिलना, पोषण, दोहन, सोमरस लेना, दवा, हव्य १३-१८
६२. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१८ उन्नत बनने का आग्रह, आह्वान, अत्रि, पास जाना, घर बनाना, उष्णता से रक्षा की प्रार्थना, सप्तवध्रि, पुनः सुलाना, आह्वान १-१० अनुरोध, समान होना, घूमना, आह्वान, रक्षार्थ पास रहने की प्रार्थना, प्रकाश फैलाना, अंधकार का नाश, संदूक जलाना ११-१८ ६३. अग्नि का वर्णन, अग्नि एवं जल की स्तुति १-१५ गूढ़वचन, स्तुति, प्रशंसक, श्रुतर्वा व ऋक्षपुत्र, अमर, स्तुति, अर्पण, सुखकर स्तुति, अन्नयुक्त १-९ पालक, गोपवन ऋषि, स्तुति, शीश छूना, भुज्यु, श्रुतर्वा १०-१५ ६४. अग्नि की स्तुति १-१६ रथ जोड़ने का आग्रह, वरणीय धन, सत्ययुक्त, मेधावी, गतिशील, शोभन, पणि, परिचारिकाएं न छोड़ने का आग्रह, बाधा न पहुंचाने की प्रार्थना १-९ नमस्कार, धन देने, शत्रुधन जीतने, बल व वेग बढ़ाने की प्रार्थना १०-१३ अग्नि का जाना, सेना रक्षा हेतु प्रार्थना, पालक १४-१६ ६५. अग्नि की स्तुति १-१२ आह्वान, सिर काटना, जल बनाना, स्वर्ग जीतना, आह्वान १-५ आह्वान, वज्र को तेज करने व जबड़े कंपाने की प्रार्थना, विनाशक, स्तुति ६-१२ ६६. इंद्र का वर्णन एवं स्तुति १-११ पूछना, माता शवसी, ऊर्णनाभ, अहीशुव आदि, खींचना, संहार, मंत्रपान, मेघ को मारना, बादल छेदना, फलक १-७ विशाल पर्वत बनाना, जल देना, बाण ८-११ ६७. इंद्र का वर्णन एवं स्तुति १-१० गाएं, घोड़े, तेल व गहने मांगना, सहायक, शक्तिशाली, अजेय १-६ वृत्रहंता, शोभन-दान, समीप जाना, दरांत ७-१० ebook converter DEMO Watermarks*
६८. सोम की स्तुति १-९ पूज्य, लूले का चलना, रक्षक, अलग करने की प्रार्थना, कामनाएं पूरी होना १-५ प्रेरणा, सुखदाता, सोम, हिंसकों को मारने की प्रार्थना ६-९ ६९. इंद्र की स्तुति १-१० सुखदाता, सुख मांगना, धन याचना, शत्रुहंता, विजयार्थ प्रार्थना १-६ धन याचना, रक्षक, एकद्यु ऋषि ७-१० ७०. इंद्र की स्तुति १-९ स्तुत्य, जानना, शूर, दीप्तिशाली, कृपार्थ, धन मांगना, शत्रुधर्षक, धन याचना १-७ धन व अन्न याचना ८-९ ७१. इंद्र की स्तुति १-९ आह्वान, प्रसन्न होने की प्रार्थना, बुलाना १-४ सोमरस निचोड़ना, सोमपान हेतु प्रार्थना, चमू पात्र में सोमरस, स्वामी ५-९ ७२. विभिन्न देवों की स्तुति १-९ रक्षार्थ प्रार्थना, धनवर्धक, यज्ञनेता १-३ धन मांगना, ज्ञानी, आह्वान, शोभनदाता ४-९ ७३. अग्नि की स्तुति १-९ स्तुति, रक्षार्थ प्रार्थना, वरेण्य व शत्रुओं के अपमानकर्त्ता १-४ बलपुत्र, घर-अन्न मांगना, गोलाभ, पूजन, बढ़ना ५-९ ७४. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-९ आह्वान, पुकार सुनने की प्रार्थना, कृष्ण ऋषि, आह्वान १-४ घर, आह्वान, कामपूरक, आने की प्रार्थना ५-९ ७५. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-५ विश्वक, ऋषि, विमना, विष्णायु, अश्वक ऋषि, ऋजीश, शत्रुजेता १-५ ebook converter DEMO Watermarks*
७६. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६ आह्वान, सोमपान हेतु आह्वान, अन्न हेतु बुलाना १-६ ७७. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-६ बुलाना, गाएं व अन्न मांगना, रोकने में असमर्थ, शत्रुसंहार १-४ द्युलोक से भी महान्, धनस्वामी ५-६ ७८. मरुतों एवं इंद्र की स्तुति १-७ सूर्य बनाना, मित्रता, वृत्रनाश, महान् अन्न, धरती दृढ़ करना, हराना, दुधारू बनाना, सूर्य १-७ ७९. इंद्र की स्तुति १-६ बुलाने योग्य, धनदाता, स्तुति, संहारक, शक्तिस्वामी, धन मांगना १-६ ८०. इंद्र की स्तुति १-७ अपाला, सोमपान हेतु जाना, कामना, धनयाचना, खेत उपजाऊ बनाने व बाल उगाने की प्रार्थना, प्रभावान करना १-७ ८१. इंद्र की स्तुति १-३३ धनदाता, आहूत, अन्नदाता, सुदक्ष ऋषि, बढ़ाना, हराना, व्याप्त, आह्वान, शत्रुनाशक, शत्रुओं का धन देने व पास आने की प्रार्थना १-१० वज्रधारी, प्रसन्न करना, इच्छाएं रखना, बलपुत्र, भयानक प्रसन्न बनाने की प्रार्थना, बलदाता, दर्शनीय, स्तुति, बुलाना, विस्तार, इंद्र से बढ़कर न होना, प्रवेश ११-२३ पर्याप्त होना, श्रुतकक्ष, दानशील, धन मांगना, शूर, धनधारक, अन्नस्वामी, अधिकारी न बनने की प्रार्थना, सबके इंद्र, स्तुतियों द्वारा सेवा २४-३३ ८२. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-३४ हितैषी, मेघ हनन, धन मांगना, सज्जनपालक, सामने जाना, आह्वान, तेजस्वी, दीप्तिशाली, स्तुत, विरोध न होना, पूजा १-१२ दूध धारण, बली, भागना, अजातशत्रु, शक्तिशाली, कामनापूरक, सोमपान, रमण, धन मांगना, पास जाना, विसर्जन, हरि नामक घोड़े १३-२४ ebook converter DEMO Watermarks*
कुशा बिछाना, बल, रत्न, सुख, अन्न व मंगल, याचना, आह्वान, शतक्रतु, वृत्रहंता, ऋषि ऋभुक्षा व ऋभु २५-३४ ८३. मरुद्गण का वर्णन १-१२ सोमपान, व्रत धारण, स्तुति, सोमपान, प्रशंसा १-६ बुद्धिमान्, दीप्तिशाली, विस्तृत करना, बुलाना, स्तब्ध करना, बुलाना ७-१२ ८४. इंद्र की स्तुति १-९ स्तुतिपात्र, चरु-पुरोडाश, आने व सोमपान हेतु प्रार्थना, तिरश्ची ऋषि १-४ स्तुतिवचन का निर्माण, सेवा, दशापवित्र, आह्वान, शत्रुघातक ५-९ ८५. इंद्र का वर्णन १-२१ गति बढ़ाना, पर्वत तोड़ना, निकट पहुंचना, मानना, स्तुति, जीवोत्पत्ति, शत्रुजेता, बढ़ाना, तेज आयुध १-८ असुरों को भगाने व धन हेतु प्रार्थना, सेना का संहार, बुलाना, सहायता, आनंद देना, जल जीतना, शत्रुनाशक, रक्षक, बुलाने योग्य बनना ९-२१ ८६. इंद्र की स्तुति १-१५ धन छीनना, पणि, भेजने की प्रार्थना, वृत्रहंता, आह्वान, शक्तिस्वामी, रक्षा करने व साथ बैठने की प्रार्थना १-८ सर्वजेता, शक्तिशाली बनाना, स्तुति, बलशाली, वज्रधारी ९-१५ ८७. इंद्र की स्तुति १-१२ मेधावी, तेजस्वी बनाना, मित्रता हेतु यत्न, स्वर्गस्वामी, शत्रुनगरियों के नाशक, स्तोत्र भेजना, बढ़ाना १-८ जोड़ना, बल व धन याचना ९-१२ ८८. इंद्र की स्तुति १-८ सोमपान, निचोड़ना, धन उत्पत्ति, पापहीन धन देना, हराना १-५ सेना का नाश, शत्रुजेता, बुलाना ६-८ ebook converter DEMO Watermarks*
८९. इंद्र की स्तुति १-१२ शत्रुजेता, भाग रखना, नेम ऋषि, बढ़ाना, रोना, प्रकट करना, शरभ, वज्र मारना, सोम लाना, वज्र प्राप्ति १-९ जल दुहना, वाणी की उत्पत्ति, पराक्रम दिखाने की प्रार्थना १०-१२ ९०. मित्र, वरुण, अश्विनीकुमारों एवं सूर्या की स्तुति १-१६ हवि बनाना, कर्म करना, देवदूत, नशीला सोम, रक्षा याचना, प्रशंसा करने का आग्रह, स्थान देखना, आह्वान १-८ निश्चित करना, हव्य ले जाना, प्रशंसा उपदेशक, उषा का दिखाई देना, स्थित होना, गोवध न करने का आग्रह, दीप्तिशाली ९-१६ ९१. अग्नि का वर्णन व स्तुति १-२२ अन्न देना, दीप्तिशाली, अतिशय युवा, बुलाना, आह्वान, सागरवासी, निकट आने व कर्त्तव्यों को बढ़ाने का आग्रह, आह्वान, यशस्वी, प्रज्वलित होना, स्तोता १-१२ सेवा करना, अग्नि में जल का होना, रक्षायुक्त होना, आह्वान, अग्नि की उत्पत्ति, देवों का चारों ओर बैठना, धारण करना १३-१९ लकड़ियां धारण, काठ, बढ़ाना २०-२२ ९२. अग्नि व मरुद्गण की स्तुति १-१४ स्तुतियों का जाना, स्वर्ग में रहना, कांपना, वीरपुत्र मिलना, शत्रु का अन्न नष्ट करना, पात्र मिलना, दर्शनीय, दाताश्रेष्ठ, यशदाता १-९ अतिप्रिय, धन न लाना, स्तुत, स्तुति, सोमपान हेतु प्रार्थना १०-१४ नवम मंडल सूक्त विषय मंत्र सं. १. सोम की स्तुति १-१० सोम निचोड़ना, बैठना, अतिशय दाता, बल व अन्न मांगना, सेवा करना, दशापवित्र दस उंगलियां, तीन जगह, रहना, शुद्धि, धन प्राप्ति १-१० ebook converter DEMO Watermarks*