श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
[ आचार्येर-एइ श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत आचार्येर दोष नाहि 6/180 आचार्येर श्रद्धा-भक्ति 3/203 आछे दुइ-चारि जन 13/156 आजन्म करिनु मुञि 10/175 आजि कृष्णप्राप्ति-योग्य 6/234 आजि तुमि निष्कपटे 6/232 आजि मुञि अनायासे 6/230 आजि मोर श्लाघ्य 7/125 आजि से खण्डिल 6/233 आजि हैते दुँहार नाम 1/208 आज्ञा নহে, तबु करिह 11/122 आत्मनिन्दा करि' लैल 6/201 आत्मसुख-सङ्ग हैते 8/212 “आत्मा वै जायते पुत्रः” 12/56 आत्मारामश्च-श्लोके 6/194 आत्माराम' पर्यन्त करे 6/185 आत्मीय-ज्ञाने मोरे 10/57 आनन्दचिन्मयरूप रसेर 8/158 आनन्दांशे 'ह्लादिनी' 6/159, 8/154 आनुषङ्गे प्रेममय कैले 8/279 आपन-इच्छाय चले करिते 13/13 आपन-इच्छाय बुलुन, याहाँ 1/170 आपन वासार चाले 1/61 आपन-हृदय येन धरिल 12/106 आपणार दुःख-सुख ताँहा 3/185 आपनि आचरि' जीवे 1/22 आपने अयोग्य देखि' 1/204 आपने वैराग्य-दुःख 7/30 आमा उद्धारिते बली 1/199 आमा उद्धारिया यदि 1/200 आमा उद्धारिले तुमि 6/213 आमा द्रवाइले तुमि 6/214 आमा निस्तारिते तोमार 8/38 आमार आज्ञाय गुरु 7/128 आमार ठाकुर कृष्ण 9/112 आमार वचने ताँरे 7/63 आमार ब्राह्मण तुमि 9/229 आमार भाग्ये नाहि, तुमि 13/97 आमा लञा पुनः 13/131 आमि अकुलीन आर 5/22 आमि-एक वातुल 8/290 आमि कभु लोकापेक्षा 7/27 आमि कि करिब, मन 11/38 आमि कोन् क्षुद्रजीव 12/27 आमि जीव,-क्षुद्रबुद्धि 9/125 आमि त' गृहस्थ-ब्राह्मण 12/191 आमि बालक-संन्यासी 6/59 आमि वृद्ध जरातुर 2/90 आमिह तोमार स्पर्शे 8/45 आमिह संन्यासी देख 9/230 आर विप्र-युवा, ताँर 5/16 आर्य सरल विप्रेर 9/227 आलालनाथे गेला प्रभु 11/63 इ इतस्ततः भ्रमि' काँहा 8/114 इष्ट ना पाइले निज 12/31 इहलोक, परलोक तार 7/111 इँहाके चन्दन दिले 4/160 इहा आस्वादिते आर 4/195 इँहार मध्ये राधार 8/97 इँहा लोकारण्य, हाती 13/128 इँहा-सबार वश प्रभु 7/29 इहाँ हैते चल, प्रभु 1/222 इँहो केने दण्ड भाङ्गे 5/157 इँहो त' साक्षात् कृष्ण 6/200 इँहो दामोदर-स्वरूप 14/217 ई ईश्वर-इच्छाय चले, ना 13/28 ईश्वर-तत्त्वे भेद मानिले 9/155 ईश्वरपुरीर भृत्य, — 'गोविन्द' 10/132 ईश्वर-प्रेयसी सीता 9/192 ईश्वर-मन्दिरे मोर पद 12/126 ईश्वरेर कृपा जाति-कुल 10/138 ईश्वरेर कृपा নহে वेद 10/137 ईश्वरेर कृपा-लेश हयत' 6/83 ईश्वरेर कृपा-लेश नाहिक 6/86 ईश्वरेर परोक्ष आज्ञा-क्षौर 11/113 ईश्वरेर लीला-कोटिसमुद्र 9/125 ईश्वरेर श्रीविग्रह सच्चिदानन्द 6/166 उ उच्छलित करे यबे तार 14/85 उठह गोपाल' बलि' उच्चैः 12/148 उठह पूजारी, कर द्वार 4/127 उठाञा सेइ कीड़ा राखे 7/137 उठि' महाप्रभु ताँरे चापड़ 1/68 उत्तम हञा राजा करे 13/17 उद्घूर्णा-प्रलाप तैछे प्रभुर 1/87 उदय करये यदि, तबे 1/82 उन्मादे करिल तँह संन्यास 10/107 उपनिषद्-शब्दे येइ मुख्य 6/133 उपास्येर मध्ये कोन् 8/255 उलटिया आमा ना करिह 5/98 ऊ ऊषर-भूमिते येन बीजेर 6/105 ए एइ इच्छाय लज्जा पाञा 4/121 एइ कलिकाले विष्णुर् 6/94 एइ कलिकाले आर 9/362 568 ।
पद्य सूची एइ-किवा ] एइ गुणे कृष्ण ११/२७ । एक रामानन्द राय बहु ९/३५७ । कहिबार कथा नय, कहिले २/८३ एइ तिने हरे सिद्ध ६/१९७ । एकसेर अन्न रान्धि' करिह ५/१०० । कहेन यदि, पुनरपि योग ६/७६ एइ तीर्थे शङ्करारण्येर ९/३०० । एकाकी याइब, केहो सङ्गे ७/११ । काकेरे गरुड़ करे, —ऐछे १२/१८२ एइ दुइ श्लोक-भक्त ६/२५६ । एतदिन नाहि जानि ८/९६ । काङ्गालेर भोजन-रङ्ग १४/४५ एइ देख, चैतन्येर कृपा १४/१६ । एथा नित्यानन्दप्रभु कैल ५/१४२ । काणाकड़ि-छिद्र सम २/३१ एइ देख तोमार गौड़ीया'र १२/१२५ । एथाय रहिब आमि, ना ५/१०७ । काणे मुद्रा लइ' मुञि १२/२० एइ धुया-गाने नाचेन १/५६ । एबार ना याबेन प्रभु १/१६१ । कान्दिया बलेन प्रभु, —शुन ३/१४५ एइ पट्टडोरीते हय शेष' १४/२५१ । एबे अहङ्कार मोर जन्मिबे ७/१४६ । कानाइर नाटशाला' पर्यन्त १/१५९ एइ प्रेमार वश कृष्ण ८/८८ । एबे आमार बड़ भाइ ११/१४८ । कानाञिर नाटशाला' हैते १/१६२ एइ प्रेमे'र अनुरूप ना ८/९१ । एबे आमि इँहा आनि' १०/६५ । कानुप्रेमविषे मोर तनु ३/१२४ एइ भिक्षा मागौं, —मोरे ३/१८९ । एबे कपट कर, —तोमार ८/२८० । कान्त-वक्षःस्थिता ९/१११ एइ राजवेश, सङ्गे सब १३/१२९ । एबे जानिलुँ साध्य-साधन ८/११७ । कामक्रीड़ा-साम्ये तार ८/२१४ एइमत गौर-श्यामे, दों'हे १३/११९ । एबे तोमा देखि मुञि ८/२६७ । कामगायत्री, कामबीजे ८/१३७ एइमत दुँहे स्तुति करे ८/४७ । ए-सब वैष्णव-एइ क्षेत्रेर १०/४७ । कायमनोवाक्ये व्यवहारे १२/५० एइमत परम्पराय देश ७/११८ । एसब सिद्धान्त तबे तुमिह ६/१०६ । कारुण्यामृत-धाराय स्नान ८/१६६ एइमत 'वैष्णव' कैल ७/१०१ । ऐ । काठनारी-स्पर्शे यैछे ११/१० एइमत 'वैष्णव' हैल ७/१०४ । ऐछे अचिन्त्य भगवानेर ६/१८५ । काँहा करौं, काँहा पाङ २/१५ एइमत लोके चैतन्य १/३० । ऐछे बात पुनरपि मुखे ११/१२ । काँहा तुमि-साक्षात् ईश्वर ८/३५ एइमते कल्पित भाष्ये ६/१७६ । ऐछे शक्ति कार हय ९/३१५ । काँहा तुमि सेइ कृष्ण ९/१५८ एइ-महाभागवत, याँहार १२/६१ । ऐश्वर्यज्ञाने नाहि कोन ९/१३० । काँहा बहिर्मुख तार्किक १२/१८४ एइ मोर मनेर कथा १/२१३ । ऐश्वर्य ना जाने इँहो १४/२१७ । काँहा मोर प्राणनाथ २/१५ एइ रागमार्गे आछे सूक्ष्म ११/११२ । क । काँहार स्मरण जीव करिबे ८/२५१ एइरूपे नृत्य आगे हबे ७/८२ । कपोतेश्वर देखिते गेला ५/१४२ । काहारे कहिब, केबा जाने २/१६ एइ लागि' गीता-पाठ ९/१०१ । कभु एक मूर्ति, कभु १३/६४ । कि कहिब रे सखि ३/११४ एइ लागि' सुखभोग छाड़ि' ९/११३ । कभु ना बाधिबे तोमार ७/२९ । कि कहिये भाल ८/१२२, १९७ एइ श्लोकेर अर्थ जाने १/५९ । कर्मनिन्दा, कर्मत्याग ९/२६३ । किन्तु अनुरागी लोकेर १२/३१ एइ हय कृष्णभक्तेर श्रेष्ठ ९/२५६ । कर्म हैते प्रेमभक्ति कृष्णे ९/२६३ । किन्तु आछिलाङ भाल ७/१४६ एकइ विग्रहे करे ९/१५४, १५६ । कलिकाले धर्म—कृष्णनाम ११/९८ । किन्तु तुमि अर्थ कैले ६/१९२ एक ईश्वर-भक्तेर ध्यान ९/१५६ । कलिकाले लीलावतार ना ६/९९ । किन्तु याँर येइ रस ८/८३ एक-दुइ गणने पञ्च ८/८५ । कलियुगे अवतार नाहि ६/९५ । किवा आमि आगे याइ ५/१५४ एक वस्तु बिना सेइ १२/१९४ । कल्पनाथें तुमि ताहा ६/१३२ । किवा गौरचन्द्र इहा करे ४/१९५ एक बहिर्वास यदि देह' १२/३४ । कल्पवृक्ष-लतार-याँहा १४/२२२ । किवा विप्र, किबा न्यासी ८/१२७ एक महाधनी क्षत्रिय ४/१०१ । कह यदि, तबे आमाय ११/१२ । किवा मार' ब्रजवासी १३/१४५ । 569
[ किम्वा-गुण श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत किम्वा नवम पदार्थ 6/272 कृष्णप्राप्तिर उपाय बहुविध 8/82 कृष्णेर विलासमूर्त्ति 9/142 कीर्त्तनीयार परिश्रम जानि' 14/38 कृष्णप्रीत्ये करि तोमार 5/23 कृष्णेर विशुद्धप्रेम-रत्नेर 8/180 कीर्त्तिगण-मध्ये जीवेर 8/245 कृष्णप्रेम याँर, सेइ मुक्त 8/248 कृष्णेर मधुर वाणी 2/31 कु-विषय-विष्ठा-गर्त्ते 1/198 कृष्णप्रेमसेवा-फलेर परम 9/258 कृष्णेर-स्वरूप' कह राधार 8/118 कुलिया नगर हैते पथ 1/156 कृष्ण-प्रेमामृत पान करे 8/258 केमने संन्यास-धर्म हबेक 6/74 कृतघ्नता हय, तोमाय ना 5/20 कृष्णप्रेमा सुनिर्मल, येन 2/48 केशे धरि' विप्रे लञा 9/233 कृतमालाय स्नान करि' 9/181 कृष्ण-प्रेमे प्रतिष्ठा चले 4/147 केह ज्ञानी, केह कर्मी 9/9 कृपा करि' कह, यदि 8/95 कृष्ण-वंशी करे याँहा 14/226 केह हय तत्त्ववादी', केह 9/11 कृपा करि' कह, राय 8/196 कृष्णभक्ति बलिया याँहार 8/245 केह ताँरे पुत्र-ज्ञाने 9/129 कृपा-पाश गलाय बान्धि' 10/125 कृष्णभक्त-विरह बिना 8/247 केह सखा-ज्ञाने जिनि' 9/129 कृपा बिना ईश्वरेरे কেহ 6/82 कृष्णभक्त-सङ्ग बिना श्रेयः 8/250 कैशोर-वयस सफल कैल 8/188 कृपा बिना ब्रह्मादिक 13/59 कृष्णमूर्ति देखि' प्रभु 9/249 कोटि जन्मे तोमार ऋण 3/146 कृष्ण आजि निष्कपटे 6/232 कृष्ण याँहा धनी, ताँहा 14/220 कोन् अर्थ जानि' तोमार 9/97 कृष्ण उपदेशि' कर जीवेरे 7/148 कृष्णरस-तत्त्ववेत्ता, देह 10/111 कोन-जन्मे मोरे अवश्य 11/24 कृष्ण-कर-पदतल 2/34 कृष्ण लञा व्रजे याइ 1/56 कौतुके पुरी ताँरे पुछिल 9/294 कृष्ण कहे, - प्रतिमा चले 5/95 कृष्ण लागि' पति-आगे 12/32 कौतुके लक्ष्मी चाहेन 9/116 कृष्ण' कृष्ण' कहि करे 12/112 कृष्णलीला-मनोवृत्ति-सखी 8/176 क्रोध करि' रास छाड़ि' 8/111 कृष्णके आह्लादे, तांते 8/156 कृष्णलीलामृत यदि लताके 8/209 क्ष कृष्णके कराय श्यामरस 8/179 कृष्णसङ्गे पतिव्रता-धर्म 9/118 क्षणे क्षणे कर तुमि 11/190 कृष्णचैतन्य-निकटे याइ' 10/133 कृष्ण-सह निजलीलाय 8/206 क्षीर एक राखियाछि 4/127 कृष्णोते अधिक लीला 9/115 कृष्णसह राधिकार लीला 8/207 क्षीर लह एइ, यार 4/133 कृष्णदास'-नामे एइ सरल 7/39 कृष्णसुख-तात्पर्य गोपीभाव 8/216 ख कृष्णनाम, कृष्णकथा, कृष्ण 3/190 कृष्णस्फूर्त्त्ये ताँर मन 9/105 खण्ड खण्ड हैल भट्टारि 9/232 कृष्ण-नाम-गुण छाड़ि 1/270 कृष्णाश्रय हय, छाड़े वेद 11/117 ग कृष्ण-नाम-गुण-लीला 8/251 कृष्णे मति रहु' बलि' 6/48 गङ्गातीरे लञा गेला 'यमुना' 1/93 कृष्णनाम लोकमुखे शुनि' 7/117 कृष्णे सुख दिते करे 8/217 गङ्गाय यमुना बहे हञा 3/36 कृष्णनाम स्फुरे मुखे 10/176 कृष्णेर अधरामृत, कृष्ण 2/32 गन्ध बाड़े, तैछे एइ 4/192 कृष्णनाम स्फुरे, रामनाम 9/27 कृष्णेर अनन्त-शक्ति, ताते 8/150 गरुड़ेर पाशे राहि' दर्शन 6/63 कृष्णनाम हइल सङ्केत 12/113 कृष्णेर-उज्ज्वल रस 8/170 गान-मध्ये कोन् गान 8/249 कृष्णनामामृत-वन्याय देश 7/118 कृष्णेर दर्शन पाञा 13/124 गिरिधातु-शिखिपिच्छ-गुञ्जा 14/204 कृष्ण-नारायण, यैछे 9/153 कृष्णेर प्रतिज्ञा दृढ़ सर्व 8/90 गीताशास्त्रे जीवरूप शक्ति' 6/163 कृष्णनिषेवण करि निभृते 3/9 कृष्णेर विग्रह येइ सत्य 6/264 गुण-दोषोद्गार-छले सबा 7/32 कृष्णप्राप्ति-तारतम्य 8/82 कृष्णेर विरहलीला प्रभुर 1/51 570 ।
पद्य सूची गुण–जय ] गुणाधिक्ये स्वादाधिक्य ८/८६ गुरु–आज्ञा दियाछेन, कि १०/१४३ गुरु–आज्ञा ना लङ्घिये १०/१४४ गुरुकर्णे कह कृष्णनाम ९/५९ गुरु–कर्णे कहे सबे ९/६१ गुरुबुद्धये छोटविप्र बहु ५/३४ गुरुर किङ्कर हय मान्य १०/१४२ गृह–सहित आत्मा ताँरे १०/३२ गृहे रहि' कृष्णनाम ७/१२७ गोपजाति कृष्ण, गोपी ९/१३५ गोप–बालक सब प्रभुरे ३/१३ गोपालचम्पू–नामे ग्रन्थ १/४४ गोपाल–चरणे मागे,—चल ५/१२२ गोपाल यदि साक्षी देन ५/७७ गोपालेर आगे कह ए ५/३१ गोपालेर आगे पड़े ५/१११ गोपालेर सहजे प्रीति ४/९५ गोपिकार प्रेमे नाहि १४/१५७ गोपिकार मन हरिते ९/१४७ गोपी–आनुगत्य बिना ८/२२९ गोपीगण बिना कृष्णेरे १४/१२३ गोपीगणेर रास–नृत्य ८/१०४ गोपीचन्दन–तले आछिल ९/२४७ गोपीद्वारे लक्ष्मी करे ९/१५५ गोपीनाथ आमार से ४/१६० गोपीभावे विरहे प्रभु ११/६३ गोपी–रागाणुगा हञा ९/१३६ गोपी–लक्ष्मी–भेद ९/१५३,१५४ गोपेन्द्रसुत बिना तेंहो ८/२८६ गोविन्द–विरुदावली, ताहार १/४० गो–ब्राह्मण–द्रोहि–सङ्गे १/१९७ गोसाञिर सङ्गे रहे ९/२२६ गौड़–निकट आसिते नाहि १/२१२ गौड़ हइते आइला दुइ ४/१०३ गौर अङ्ग नहे मोर ८/२८६ गौर आगे चले, श्याम १३/११८ गौर यदि पाछे चले १३/११८ ग्राम्यवार्त्ता–भये द्वितीय ४/१७९ घ घरे आनि' प्रभुर कैल ७/१२२ घरे कृष्ण भजि' मोरे ७/६९ घरे याञा कर सदा ३/१९० घषिते घषिते यैछे मलयज ४/१९२ च चण्डीदास, विद्यापति, रायेर २/७७ चतुर्भुज–मूर्ति' देखाय ९/१४९ चतुर्भुज–रूप प्रभु हइला ६/२०२ चन्दनेश्वर' निजपुत्र दिल ६/३३ चब्बिश বৎসর शेष १/१६, ३/३ चर्म्माम्बर–परिधाने संसार १०/१५९ चातुर्मास्य महाप्रभु १/११० चापड़ खाञा कृ चापड़ मारिया तारे कैल १३/९५ चाले गोंजा तालपत्रे १/६६ 'चिच्छक्ति', 'मायाशक्ति' ८/१५० चित्त काढ़ि तोमा हैते १३/१४० चिदंशे 'सम्वित्' ६/१५९, ८/१५४ चिन्तामणिगण–दासी १४/२२१ चिन्तामणिमय भूमि रत्नेर १४/२२१ चिरदिने माधव मन्दिरे ३/११४ चुरि करि' राधाके निल ८/१०१ चैतन्य–गोसाञि याँरे बले १/२७ चैतन्यचन्द्रेर लीला–अगाध ९/३६३ चैतन्य–चरण बिना नाहि ६/२३७ चैतन्यचरित शुन श्रद्धा ९/३६१ चैतन्यचरित श्रद्धाय शुने ९/३६४ चैतन्य–प्रसादे मनेर ६/२२४ चैतन्यलीला–रत्न–सार २/८४ चैतन्यलीलार व्यास–दास १/१३ चैतन्य' सेव, चैतन्य' गाओ १/२९ चैतन्यें' ये भक्ति करे १/२९ चैतन्येर प्रिय येहाँ १/२६ चैतन्येर भक्तवात्सल्य ७/३० चैतन्येर सृष्टि–एइ प्रेम ११/९७ चौद्दभुवने वैसे यत जीव १/२६७ छ छि, छि, विषयीर स्पर्श १३/१८२ छोटविप्र बले,—ठाकुर ५/३३ छोट हञा मुकुन्द एबे ११/१४० ज जगत् निस्तारिले तुमि ६/२१३ जगत् ये मिथ्या नहे ६/१७३ जगतेर माता सीता ९/२०२ जगदानन्द चाहे आमा ७/२१ जगद्रूप हय ईश्वर ६/१७१ जगन्नाथ–अचल, तुमि १०/१६३ जगन्नाथ–दर्शने विचार ११/३८ जगन्नाथ'–नाम, पदवी ६/५१ जगन्नाथ–मग्न प्रभुर १३/११७ जगन्नाथ–मन्दिरे ना १/६३ जगन्नाथ मिश्र–पूर्वाश्रमे ९/३०१ जगन्नाथेर ब्राह्मणी, तँह ९/२९७ जगन्माता महालक्ष्मी ९/१८९ जगाइ माधाइ करियाछेन ११/४५ जगाइ–माधाइ हैते कोटी १/१९६ 'जज गग' 'जज गग' १३/१०४ जन्मकुलशीलाचार ना १२/१९२ जन्मे जन्मे तुमि दुइ १/२१५ जय जय महाप्रभु १/२७३ । 571
[ जल-ताहाते श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत जलपात्र-वस्त्र बहि' ७/४० | तबे जानि,-राधाय कृष्णे ८/१०२ | ताँरे प्रश्न कैल प्रभु ९/२५४ जानि' वा ना जानि' ३/१४७ | तबे प्रभु ब्रजे पाठाइल १/३१ | ताँ-सबार प्रसादे मिले १२/९ जीव-व्याप्य, ब्रह्म १०/१६८ | तबे महाप्रभु ताँर बुके १२/१४८ | ताँहा उपवास, याँहा नाहि ११/११४ जीवे ना सम्भवे एइ ८/४३ | तबे मायासीता अग्न्ये ९/२०७ | ताँहा गोपवेश, सङ्गे मुरली १३/१२९ जीवेर अस्थि-विष्ठा दुइ ६/१३६ | तबे सेइ कृष्णदासे गौड़े १०/७४ | ताँहा पुष्पारण्य, भृङ्ग १३/१२८ जीवेर जीवन चञ्चल २/२४ | तबे हासि' ताँरे प्रभु ८/२८१ | ताँहा बिना रासलीला ८/११३ जीवेर देहे आत्मबुद्धि ६/१७३ | तर्कनिष्ठ हृदय तोमार ६/१०० | ताँहार सन्तोषे भक्ति ५/२४ जीवेर निस्तार लागि' ६/१६९ | तर्क-प्रधान बौद्धशास्त्र ९/४९ | ताँहारे मलिन कैल एक १२/५४ जीयाओ आमार गुरु ९/५८ | तर्क-शास्त्रे जड़ आमि ६/२१४ | ता'ते सुगन्धि देह ८/१६५ ज्ञ | तर्केइ खण्डिल प्रभु, ना ९/४९ | तावत् तोमार सङ्ग ८/२३९ ज्ञान-कर्मपाश हैते हय ६/२८४ | तर्जनीते भूमे लिखे १३/१६५ | तावत् स्पर्शमणि केह ६/२७९ ठ | ताँर आज्ञाय करौं ताँर १/१३ | तामा, काँसा, रूपा, सोना ८/२९३ ठाकुरेर नासाते यदि ५/१२७ | ताँर एक योग्य पुत्र ९/२९९ | तार अनुसन्धान बिना १४/१६ ठेलितेइ चलिल रथ १३/१९० | ताँर ऐछे वाक्य स्फुरे ६/२७८ | तार अस्त्र तार अङ्गे ९/२३२ त | भट्ट कहे,-ताँर कृपालेश ११/१०२ | तार एक प्रेम-लेश ११/२५ तटस्थ हञा विचारिले ८/८३ | ताँर गुण गणिबे केमने ८/१८४ | तार पाछे पाछे गोपाल ५/१०१ तत्तत्पद-प्राधान्ये 'आत्माराम' ६/१९५ | ताँर गौरकान्त्ये तोमार ८/२६८ | तार प्रतिफल मोरे देह ३/१६५ तत्त्ववादिगण प्रभुके ९/२५० | ताँर ठाञि गोपालेर लुकान ४/७८ | तार मध्ये एक-मूर्त्तये ८/१०८ तत्त्ववादी-आचार्य-सब ९/२५४ | ताँर नव अर्थ-मध्ये ६/१९३ | तार मध्ये छय वत्सर १/१९, २३ तत्त्वमसि'-जीव-हेतु ६/१७५ | ताँ'र निन्दा हय यदि ३/१८१ | तार मुक्ति फल नह ६/२६५ तथापि आपन-गणे १३/१८५ | ताँर प्रतिज्ञा-मोरे ना ११/४८ | तार शुक्लपक्षे प्रभु करिला १/१६ तथापि आमार मन १३/१२७ | ताँर भक्तिवशे गोपाल ५/१२३ | तार शेष येइ रहे १/५१ तथापि चैतन्येर करे १/२८ | ताँर भ्रातृपुत्र नाम-श्रीजीव १/४२ | ताँरा दुइजन जानाइला १/१८४ तथापि तोमार गुणे १/२०४ | ताँर मन कृष्णमाया नारे ८/१२९ | तारुण्यामृत-धाराय स्नान ८/१६६ तथापि ना पाइल ब्रजे ८/२३० | ताँर येइ सुख, ताहा ३/१८५ | तारे ध्यान शिक्षा कराह १३/१४० तथापि बाहिरे कहे निष्ठुर १२/२२ | ताँर सङ्गे बहु आइला ८/१५ | तार्किक-मीमांसक, यत ९/४२ तथापि यवन जाति, ना १/२२३ | ताँर स्पर्श नाहि याय ९/११६ | तार्किक-शृगाल-सङ्गे १२/१८३ तथापि राधिका यत्ने ८/२११ | ताँर हस्त-स्पर्शं पुनः ४/७७ | ताहा खाञा तोमार सङ्गे ५/१०० तथापि लौकिकलीला, लोक १/२२५ | ताँरे ईश्वर करि' नाहि ९/१२८ | ताहातेइ अनुमानि ८/११५ तप करि' कैछे कृष्ण ९/१२२ | ताँरे देखि' महाप्रभुर कृष्ण १२/६० | ताहाते दृष्टान्त-उपनिषद् ८/२२२ तबे आमार मनोवाञ्छा १३/१३१ | ताँरे देखि' हय मोर ९/१०० | ताहाते दृष्टान्त-लक्ष्मी ८/२३० तबे केने पण्डित सब ११/१०१ | ताँरे ना देखिया व्याकुल ८/१११ | ताहाते प्रकट देखि स-वंशी ८/२६९ | ताँरे निराकार करि' करह ६/१४० | ताहाते विख्यात इँहो परम ६/७९ 572 |
पद्य सूची ताहा-दुइ ]
ताहा देखि' महाप्रभुर मने 12/123 | तोमाके तद्रूप देखि' 10/176 | तोमार मने येइ उठे 8/132 ताहा ना करिया केने 11/111 | तोमाके ये प्रीति करे 11/26 | तोमार ये अन्यवेश, अन्य 13/146 ताहा पाञा प्राण राखे 12/34 | तोमाते ईश्वर-कृपा इथे 6/88 | तोमार ये शिष्य कहे 6/107 ताहा बिना अन्यत्र नाहि 9/289 | तोमाते ये एत प्रीति 11/27 | तोमार लागि' जगन्नाथे 3/197 ताहार महिमा तबे हृदय 9/36 | तोमा छाड़ि' अन्यत्र गेनु 10/123 | तोमार शरीर एइ, मोर 3/145 ताहा सहि, तोमार विच्छेद 7/48 | तोमा-दुँहा देखिते मोर 1/212 | तोमार शिक्षाय पड़ि येन 8/121 तेंहो जीव नहेन, हन 10/13 | तोमा देखि' कृष्णनाम 9/26 | तोमार सङ्ग लागि' मोर 6/60 तेंह-प्रेमाधीन, तोमार 11/52 | तोमा देखि' कृष्ण' हैल 10/175 | तोमार सङ्गेर योग्य 7/64 तेंहो कहे, –हङ मुञि 8/21 | तोमा बिना अन्य नाहि 8/236 | तोमार सम्प्रदाये देखि 9/276 तेंहो कहे, मोर प्रभु 1/27 | तोमा-बिना केह ইহা 8/119 | तोमार सन्मुखे देखि 8/268 तेंहो गौड़देश भासाइल 1/24 | तोमा-सङ्गे आमा-सबार 12/185 | तोमार स्पर्शयोग नहे 11/156 तेंहो यदि इँहा रहे 3/181 | तोमा-सबा जानि 7/8 | तोमा लागि' गोपीनाथ 4/133 तिन अंश चिच्छक्ति हय 6/158 | तोमा-सह तेरछे 5/149 | तोमा-सब ना छाड़िब 3/176 तिन खण्ड करि' दण्ड 5/143 | तोमार अग्रेते प्रभु कहिते 1/189 | तोमा-सबार आज्ञा बिना 3/174 तीरे वन देखि' स्मृति 8/11 | तोमार आगे एत कथार 6/105 | तोमा-सम वैष्णव ना 9/356 तीर्थ पवित्र करिते करे 10/11 | तोमार आज्ञाते शुभे 7/45 | त्र तीर्थयात्राय एत संघट्ट 1/223 | तोमार आश्रय निलुँ, गुरु 6/59 | त्रिजगते राधा-प्रेमेर 8/103 तुमि कह, –कलिते नाहि 6/98 | तोमार उपरे ताँर कृपा 6/106 | त्रिभुवन-मध्ये ऐछे 8/198 तुमि-गौरवर्ण, तेंह 10/164 | तोमार 'गौड़ीया' करे 12/127 | त्रिमल्ल भट्टेर घरे कैल 1/108 तुमि त' ईश्वर साक्षात् 9/58 | तोमार चरण पाइल सेइ 11/139 | द तुमि नराधिप हओ, विष्णु 1/178 | तोमार चरण मोर व्रज 1/82 | दण्डभङ्ग-लीला एइ 5/158 तुमि भाल करियाछ 12/117 | तोमार चरणे मोर नाहि 10/124 | दर्शन-लोभेते करि' 12/210 तुमि याँहा कह, आमि 3/148 | तोमार ठाञि आमार किछु 8/288 | दर्शने वैष्णव' हैल, बले 7/116 तुमि येइ अर्थ कर 6/127 | तोमार दर्शन-बिने, अधन्य 2/59 | दशम-टिप्पणी, आर 1/35 तुमि येइ कह, सेइ 9/159 | तोमार दर्शने यबे कृष्ण 9/36 | दश दिनेर का-कथा 8/239 तुमि येइ कहाओ, सेइ 8/120 | तोमार देशे, तोमार भाग्ये 1/176 | दानकेलिकौमुदी, आर 1/39 तुमि शुनि' शुनि' रह 6/129 | तोमार दैन्य देखि' मोर 11/157 | दामोदर-सम आर नाहि 10/116 तुमि-सब आगे याह 5/154 | तोमार नाम लञा तोमार 1/195 | दार्शनिक पण्डित सबाइ 9/51 तुमि-सब लोक-मोर 3/189 | तोमार पवित्र धर्म नाहिक 11/189 | दास्य-वात्सल्यादि-भावे 8/200 तुमि साक्षात् सेइ कृष्ण 9/126 | तोमार पालित देह, जन्म 3/146 | दुइ-एक सङ्गे चलुक 7/16 तुमि से जानह एइ 9/102 | तोमार प्रसादे मोर ए 12/181 | दुइजनार भरे दण्ड खण्ड 5/150 तृषित चातक यैछे करे 10/40 | तोमार व्याख्या शुनि' 6/130 | दुइ-तिन-गणने बाड़े 8/87 तेरछे पड़िल थालि 9/56 | तोमार मङ्गल वाञ्छे 1/177 |
। 573
[ दुइ-नूपुरेरे श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत
दुइ पुस्तक आनियाछि 11/141 | नवद्वीप येइ शक्ति ना 7/109 | निज-लज्जा-श्याम 8/167 दुइ पुस्तक लञा आइला 1/120 | नवविध अर्थ कैल शास्त्र 6/190 | निज-सुख हैते ताते 8/207 दुइविप्र-मध्ये एक विप्र 5/16 | 'नमो नारायणाय' बलि' 6/48 | निज-सुख हैते पलवाघेर 8/209 दुइ ब्रह्म कैल सब 10/164 | 'नरक' वाञ्छये, तबु 6/268 | निजेन्द्रिय-सुखवाञ्छा नाहि 8/217 दुइ मास राहि' ताँरे 1/244 | नर्त्तक गोपाल देखे परम 9/246 | निजेन्द्रिय-सुखहेतु कामेर 8/216 दुँहे दुँहार दर्शने आनन्दित 8/47 | नहे गोपी योगेश्वर 13/141 | नित्यलीला स्थापन याहे 1/44 दुःख-मध्ये कोन् दुःख 8/247 | ना कहिला तेजि साध्य 9/272 | नित्यानन्द-गोसाञिरे 1/24 दुग्ध आउण्टि दधि मथे 14/214 | ना जानि, तोमार सङ्गे 12/195 | नित्यानन्द दूरे देखि' 14/235 दुग्धमात्र देन, केह ना 14/223 | नाना-छले कृष्णे प्रेरि' 8/212 | नित्यानन्द देखिया प्रभुर 14/236 देख, जगन्नाथ कैछे 12/174 | नाना-भक्तेर रसामृत 8/140 | नित्यानन्द प्रभु महाप्रभु 1/93 देखाइल ताँरे आगे 6/203 | नाना-भावे चञ्चल ताहे 8/269 | नित्यानन्द-सङ्गे युक्ति 1/262 देखिब से मुखचन्द्र नयन 12/21 | नाना शास्त्र आनि' कैला 1/33 | नित्यानन्दे कहे प्रभु 5/148 देखिया त' छद्म कैल 10/155 | "नात्रदोषेण मस्करी"-एइ 12/191 | निन्दा-स्तुति-हास्ये शिक्षा 6/112 देखिले ना देखे तारे 6/92 | नाम-प्रेमदान-आदि वर्णन 6/205 | निवृन्त पुष्पशय्या उपरे 1/156 देवी वा अन्य स्त्री 9/135 | नामेर महिमा-शास्त्र करिये 9/28 | निरन्तर इँहाके वेदान्त 6/75 देह-स्मृति नाहि यार 13/142 | नारद-प्रकृति श्रीवास करे 14/215 | निरन्तर कर तुमि 6/121, 11/191 दैवे आसि' प्रभु यबे 1/66 | नारायण हैते कृष्णेर 9/144 | निरन्तर कह तुमि 'कृष्ण' 7/147 दैवे सार्वभौम ताँहाके करे 6/5 | नारायणेरका कथा, श्रीकृष्ण 9/148 | निरन्तर कामक्रीड़ा-याँहार 8/186 दैवे से বৎসর ताँहा 1/59 | नारीर यौवन-धन, यारे 2/25 | निरन्तर पूर्ण करे कृष्णेर 8/179 दोषरूप-छले करे गुण 7/29 | ना सो रमण, ना 8/193 | निरन्तर रात्रि-दिन विरह 1/52 द्वादश-वन देखि' शेषे 5/12 | नाहि काँहा सविरोध, नाहि 2/86 | निर्विरोध' ताँरे कहे येइ 6/141 द्वारका-वैकुण्ठ-सम्पत् 14/219 | निःशक्तिक' करि' ताँरे 6/153 | निश्चय करिया कहे,-शुन 1/161 द्विज-न्यासी हैते तुम 11/191 | निकटे ना आइसे, रहे 14/236 | निश्चिन्त हञा भज चैतन्येर 11/22 ध | निज कार्य नाहि तबु 8/39 | निश्चिन्ते कृष्ण भजिब' 10/107 धरिब से पादपद्म हृदये 12/21 | निज-गूढ़कार्य तोमार 8/279 | नीच-जाति, नीच-सङ्गी 1/189 धर्मसंस्थापन लागि' बाहिरे 12/124 | निज-गृह-वित्त-भृत्य 10/55 | नीचे कन्या दिले कुल 5/39 धीराधीरात्मक' गुण-अङ्गे 8/171 | निज जन्मस्थाने रहे 3/177 | नीलाचल आसिते, पथे 7/20 धोयापाखला' नाम कैल 12/203 | निज-दुःख-विघ्नादिर ना 4/186 | नीलाचल-गौड़-सेतुबन्ध 1/19 ध्येय-मध्ये जीवेर कर्तव्य 8/252 | निज-धन दिते निषेधिबे 5/29 | नीलाचले तुमि-आमि 8/240 न | निज-निज-मत छाड़ि' 9/10 | नीलाचले-नवद्वीपे येन 3/183 नदीया-निवासी, विशारदेर 6/18 | निज-निज-शास्त्रोद्ग्राहे 9/43 | नीलाम्बर चक्रवर्त्तीर हयेन 6/52 नदीया-सम्बन्धे सार्वभौम 6/55 | निजरस आस्वादिते 8/278 | नूतन एकशत घट, शत 12/78 नवद्वीपे छिला तँह प्रभुर 10/103 | निज-रूप प्रभु ताँरे 6/202 | नूपुरेरे ध्वनिमात्र आमार 5/99
574 ।
पद्य सूची पञ्च-प्रभु ] प पञ्चपाण्डव तोमार पञ्चपुत्र 10/53 पञ्चविध मुक्ति त्याग 9/267 पञ्चविध मुक्ति' पाञा 9/257 पट्टडोरी लञा आइसे 14/253 पड़िछा मारिते तैं हो 6/5 पतिव्रता-शिरोमणि जनक 9/202 पथबान्धा ना याय 1/160 पथ साजाइल मने करिया 1/155 परम ईश्वर कृष्ण-स्वयं 8/133 परम पुरुषोत्तम स्वयं 14/220 परम-विरक्त, मौनी, सर्वत्र 4/179 परमार्थ थाकुक्, लोके 12/24 पराइल मुक्ता नासाय 5/132 परात्मनिष्ठा-मात्र वेष 3/8 परिणाम-वाद'-व्याससूत्रे 6/170 परिपूर्ण-कृष्णप्राप्ति एइ 8/88 परिहास करियाछि ताँरे 7/66 परीक्षा करिया शेषे हैल 4/189 पहिले देखिलुँ तोमार 8/267 “पहिलेहि राग नयनभङ्गे 8/193 पाछे आमि करिब अर्थ 6/188 पाछे श्याम-वंशीमुख 6/203 पाण्डित्य आर भक्तिरस 7/65 पाण्डित्याद्ये ईश्वरतत्त्व-ज्ञान 6/87 पापराशि दहे नामाभासेइ 1/194 पापी-नीच उद्धारिते ताँर 11/45 पिठा-पाना, अमृत-गुटिका 12/167 पुँथि पाञा प्रभुर हैल 9/238 पुत्रसम स्नेह करेन 9/298 पुनः कहे, - शीघ्र चल 6/150 पुनरपि एइ ठाञि पाबे 7/129 पुराण-वाक्ये सेइ अर्थ 6/148 पुरी-गोसाञिर आज्ञाय 10/132 पुरीर वात्सल्य मुख्य 2/78 पुरुष, योषित्, किबा 8/138 पुरुषोत्तम आचार्य ताँर 10/103 पुष्प-सम कोमल, कठिन 7/72 पूर्व-पूर्व-रसेर गुण 8/85 पूर्वे आसियाछिला तैं हो 9/295 पूर्वे उद्धव-द्वारे, एबे 13/139 पूर्वे प्रभु मोरे प्रसाद 11/116 पूर्वे विद्यानगररे दुइ त' 5/10 पूर्वे माधव-पुरीर लागि' 4/20 पूर्वे यैछे कुरुक्षेत्रे सब 13/124 पृथिवीते रसिक भक्त नाहि 7/64 प्रगाढ़-प्रेमेर एइ स्वभाव 4/186 प्रणव' ये महावाक्य 6/174 प्रणव हैते सर्ववेद 6/174 प्रणय-मान-कञ्चुलिकाय 8/168 प्रतापरुद्र छाड़ि' करिबे 11/46 प्रतिवर्षे आइसे, सङ्गे रहे 1/256 प्रतिमा चलिञा आइला 5/110 प्रतिमा नह तुमि 5/96 प्रतियुगे करेन कृष्ण 6/100 प्रतिष्ठार भये पुरी रहे 4/147 प्रतिष्ठार स्वभाव एइ 4/146 प्रथम वत्सरे अद्वैतादि 1/46 प्रथमे मिलिला नित्यानन्द 1/183 प्रवेश करिते नारि,-स्पर्शि 9/363 प्रभावे वैष्णव' कैल सब 9/68 प्रभु-आज्ञा-प्रसाद-त्यागे 11/114 प्रभु-आज्ञाय कैल याहाँ 1/25 प्रभु-अज्ञाय भक्तगण 1/49 प्रभु कहे, - आमि मनुष्य 12/50 प्रभु कहे, - “एत तीर्थ 9/356 प्रभु कहे, - एथा मोर 9/332 प्रभु कहे, - एहो उत्तम 8/76 प्रभु कहे, - एहो बाह्य 8/59 प्रभु कहे, - एहो हय 8/71 प्रभु कहे, - कभु तोमार 7/147 प्रभु कहे, - कर्मी, ज्ञानी 9/276 प्रभु कहे, - कृष्णे तोमार 10/179 प्रभु कहे, - कृष्णेर एक 9/127 प्रभु कहे, - कोन् विद्या 8/244 प्रभु कहे, - गीता-पाठे 9/102 प्रभु कहे, - “तथापि राजा 11/10 प्रभु कहे, - तुमि कि 6/188 प्रभु कहे, - तुमि कृष्णभक्त 11/26 प्रभु कहे, - तुमि महाभागवत 8/44 प्रभु कहे, - तोमा स्पर्शि 11/189 प्रभु कहे, - पूर्ण यैछे 12/53 प्रभु कहे, - पूर्वाश्रमे तैं हो 9/301 प्रभु कहे, - भट्ट, तोमार 9/111 प्रभु कहे, - भट्टाचार्य, ना 6/184 प्रभु कहे, - मायावादी आमि 8/123 प्रभु कहे, - 'मुक्तिपदे'-इहा 6/262 प्रभु कहे, - मूर्ख आमि 6/126 प्रभु कहे, - मोरे देह' 12/167 प्रभु कहे, - विष्णु' विष्णु' 10/182 प्रभु कहे, - शास्त्रे कहे 9/258 प्रभु कहे, - साधु एइ 3/7 प्रभु कहे, - सूत्रेर अर्थ 6/130 प्रभुकृपा बिना मोर 12/9 प्रभुके कृष्ण जानि' कर 6/199 प्रभुके जानिल, - साक्षात् 6/280 प्रभुके ये भजे, तारे 7/110 प्रभु चतुर्भुज-मूर्त्ति ताँरे 10/33 । 575
[ प्रभु-भारती श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत प्रभु ताँरे देखि' जानिल ८/१६ प्रभु ना खाइले, কেহ १४/४० प्रभुभक्तगण-मध्ये हैला १२/६८ प्रभु भिक्षा कैल दिनेर ९/१८६ प्रभुर अत्यन्त मर्ममी, रसेर १०/१०२ प्रभुर कृपाय ताँर स्फुरिल ६/२०५ प्रभुर कृपाय हय ७/१०७ प्रभुर चरण-युगे दिल १२/१२२ प्रभुर निकटे आछे यत १२/७ प्रभुर भावानुरूप स्वरूपेर १३/१६७ प्रभुर साक्षात् आज्ञा ११/११३ प्रभुर सिद्धान्त কেহ ना ९/४४ प्रभुर संन्यास देखि' उन्मत्त १०/१०४ प्रभुरूप करि' करे वस्त्रेर १२/३८ प्रभुरे आसन दिया आपने ६/११९ प्रमाणेर मध्ये श्रुति-प्रमाण ६/१३५ प्रह्लादेश जय पद्मामुख ८/५ प्राकृत-इन्द्रियेर ताँरे देखिते ९/१९२ 'प्राकृत' निषेधि करे ६/१४१ प्राकृत-शक्तितो तखन ६/१४५ प्राण छाड़ा याय, तोमा ७/८ प्राणनाथ, शून मोर निवेदन १३/१३८ प्राते शय्याय बसि' आमि ११/११६ प्रेमा-प्रयोजन', वेदे तिन ६/१७८ प्रेम बिना कभु নহে १०/१८१ प्रेमभक्ति प्रवर्त्ताइला नृत्य १/२३ प्रेममय-वपु कृष्ण-भक्त १४/१५६ प्रेमावेशे तिन दिन आछे ३/३८ प्रेमावेशे पड़िला तुमि ५/१४९ प्रेमावेशे पथे तुमि हवे ७/३८ प्रेमे मत्त, -नाहि ताँर ४/२२ प्रेमेर परम-सार 'महाभाव' ८/१५९ प्रेमेर 'स्वरूप'-'देह' ८/१६१ फ फल्गु करि' मुक्ति' देखे ९/२६७ फाल्गुने आसिया कैल ७/४ फाल्गुनेर शेषे दोलयात्रा ७/५ ब बलगण्डि 'भोगे'र प्रसाद १४/२५ बसियाछेन ताते-येन ९/९९ बहिरङ्गा-माया, -तिने ६/१६० बहुजन्मेर पुण्यफले पाइ ७/४७ बाल्यकाल हैते तोमार ३/१६५ बाल्यकाल हैते मोर ९/२८ बाल्यकाले माता मोर ५/१२९ बाल्यावधि रामनाम-ग्रहण ९/२६ बाहिरे ना कहे, वस्तु ८/२६४ बाहिरे नागरराज, भितरे २/१९ बाहिरे वामता-क्रोध १४/१९६ बाहिरे विषज्वाला हय २/५० बाह्यान्तरे गोपीदेह व्रजे ९/१३४ बिना दाने एत लोक १/१६९ बिल्वमङ्गल कैल यैछे १०/१७७ बुझ, कि ना बुझ ६/१२५ बौद्धगणेर उपरे अन्न ९/५५ बौद्धाचार्य नव प्रश्न' सब ९/५० बौद्धाचार्येर माथाय थालि ९/५५ ब्रह्मण्यदेव! तुमि-बड़ ५/८८ ब्रह्म-शब्दे कहे पूर्ण ६/१४७ ब्रह्मसंहिता, कर्णामृत, दुइ १/१२० ब्रह्म-सायुज्य हैते ईश्वर ६/२६९ ब्रह्म हैते जन्मे विश्व ६/१४३ ब्रह्माके वेद येन पड़ाइल ८/२६३ ब्रह्माण्ड-भितरे हय १/२६७ ब्रह्मे, ईश्वरे सायुज्य दुइ ६/२६९ ब्राह्मण-समाज सब ९/३०५ ब्राह्मण-सेवा कृष्णरे ५/२४ ब्राह्मणेरे कहे, - तुमि ५/१०७ भ भक्तगण 'कृष्ण' कहे १२/८५ भक्तगणे सुख दिते 'ह्लादिनी' ८/१५७ भक्त ठाञि हार' तुमि १०/१७४ भक्ति बिना शास्त्रेर अन्य ६/२३७ भक्ति-शब्द कहिते मने ६/२७६ भक्तिसिद्धान्त ताते लिखियाछेन १/४३ भक्तिसिद्धान्त-विरुद्ध, आर १०/११३ भगवत्ता-लक्षणेर इँहातेइ ६/७८ भगवद्भक्तिविमुखेर हय दण्ड ६/२६३ भगवान् अनेक हैते यबे ६/१४५ भगवान्-'सम्बन्ध', भक्ति ६/१७८ भगवानेर सविशेषे एइ तिन ६/१४४ भजिलेह नाहि पाय ८/२२९ भट्ट कहे,-गुरुर आज्ञा १०/१४४ भट्ट कहे, -तुमि येइ ११/११२ भट्ट कहे,-महान्तेर एइ १०/१० भट्टथारि हैते इँहारे १०/६४ भट्टसङ्गे गोड़ाइल सुखे ९/८६ भट्टाचार्य कहे,-तेँहो १०/१५ भट्टाचार्य कहे,- 'भक्ति' ६/२६३ भट्टाचार्य, तुमि इँहार ६/७८ भट्टाचार्य प्रेमावेशे हैल ६/२०७ भट्टाचार्येर प्रार्थनाते प्रभु ६/१९३ भट्टाचार्येर वैष्णवता देखि' ६/२८० भागवत-भारत, दुइ ६/९७ भाग्यवान् तुमि-इँहार १३/९७ भावयोग्य देह पाञा ८/२२१ भारती-गोसाञि केनेन १०/१५७ भारती-सम्प्रदाय एइ ६/७२ 576 ।
पद्य सूची भाल-याँहा ] भालकर्म देखि' तारे १२/११६ भालमते शोधन करह १२/९३ भाष्य कह तुमि-सूत्रेर् ६/१३१ भोगेर् समय लोकेर १३/२०१ भोजन करिलुँ, ना १२/१८९ म मणि यैछे अविकृते ६/१७१ मण्डली छाड़िया गेला ८/११३ मत्तगज भावगण, प्रभुर २/६४ मध्वाचार्य-ठाञि कृष्ण ९/२४७ मध्वाचार्य-स्थाने आइला ९/२४५ मनुष्येर वेश धरि' १/२६८ मने ना मिलिले करे १२/११६ मने भावेन, कुरुक्षेत्रे १/५३ मन्दिरेर चक्र देखि' ११/१९५ मन्दिर-निकटे याइते ११/१६५ मर्यादा हैते कोटि १०/१४० महा-अपराध कैनु गर्वित ६/२०० महाकुलीन तुमि-विद्या ५/२२ महानुभावेर चित्तेर स्वभाव ७/७२ महान्त-स्वभाव एइ ८/३९ महाप्रभु बिना केह नाहि १२/१८२ महाप्रभुर गुण गाञा १/२६९ महाप्रभुर भक्त, सब ११/६७ महाप्रभुर भक्त तैं हो ६/१८ महाभागवत देखे स्थावर ८/२७२ महाभाव-चिन्तामणि' ८/१६४ मात्सर्य छाड़िया मुखे ९/३६१ मातारे तावत् आमि ३/१७६ माने केह हय 'धीरा' १४/१४३ 'मायाधीश'-'मायावश' ६/१६२ मायावादि-भाष्य शुनिले ६/१६९ मायासीता' दिया अग्नि ९/२०५ मायासीता' रावण निल ९/२०४ माला-प्रसाद लञा याय ११/७४ मुकुन्द सेवन-व्रत कैल ३/७ मुकुन्द-सेवाय हय संसार ३/८ मुक्त-मध्ये कोन् जीव ८/२४८ मुक्ति, कर्म-दुइ वस्तु ९/२७१ मुक्तिपद-शब्दे साक्षात् ६/२७१ मुक्ति पदे याँर, सेइ ६/२७२ मुक्ति, भुक्ति वाञ्छे येइ ८/२५६ मुक्ति-शब्द कहिते मने ६/२७६ मुखे ना निःसरे वाणी ६/१८३ मुख्य' छाड़ि' लक्षणा'ते ६/१५१ मुख्यार्थ छाड़िया कर ६/१३४ मुञि तोमा छाड़िल १०/१२५ मुञि-नीच, अस्पृश्य ११/१८८ मूर्च्छित हञा आचार्य ९/५६ मूर्च्छित हञा सबे ७/९२ मूढ़ अधमजनेरे तैं हो १/३३ मो-बिनु दयार पात्र १/२०१ मोर अपराधे तोमार दण्ड ५/१५१ मोर आगे निजरूप ना ८/२७७ मोर कर्म, मोर हाते १/१९८ मोर गृहे 'प्रभुपदेर' हवे १०/२३ मोर जिह्वा-वीणायन्त्र ८/१३२ मोर प्रतिज्ञा-ताँहा बिना ११/४८ मोर मनेर कथा तुञि १/६९ मोर मनेर कथा रूप १/७१ मोर मुखे वक्ता तुमि ८/१९९ मोर लागि' प्रभुपदे करिबे १२/८ मोर श्लोकेर अभिप्राय ना १/६९ मोरे दया करि' कर १/२०२ मोरे ना धुँइह प्रभु ११/१५६ मोरे पूर्ण कृपा कैल ९/१६० म्लेच्छजाति, म्लेच्छसङ्गी १/१९७ म्लेच्छ-भये सेवक मोर ४/४२ य यत नद नदी यैछे १०/१८७ यत पिये, तत तृष्णा १२/२१५ यतेक विचारे, तत पाय ९/३६४ यदि मोरे कृपा ना १२/१० यदि सेइ महाप्रभुर ना ११/४९ यद्यपि असम्भाष्य बौद्ध ९/४८ यद्यपि आपनि हुये १/२८ यद्यपि आपने पूर्ण, सर्वैश्वर्य ११/१३५ यद्यपि ईश्वर तुमि परम १२/२९ यद्यपि गोपाल सब अन्न ४/७७ यद्यपि गोसाञि तारे हञाछे १२/१२४ यद्यपि जगद्गुरु तुमि ६/८५ यद्यपि वस्तुतः प्रभुर किछु १/२२५ यद्यपि मुक्ति हय एइ ६/२६६ यद्यपि राजारे देखि' हाड़िर १३/१८४ यद्यपि राय-प्रेमी ८/१२९ यद्यपि शुनिया प्रभुर १२/२२ यद्यपि सखीर कृष्ण ८/२११ यद्यपि सहसा आमि ३/१७५ यद्यपि सौन्दर्य कृष्ण ८/९३ यबे येइ रस, ताहा १३/१६७ याइते नारिल, विघ्न ३/१७४ याँर ठाञि कलाविलास ८/१८२ याँर पतिव्रता-धर्म ८/१८३ याँर मुखे कैल प्रभु ८/३१० याँर सद्गुण-गणने ८/१८४ याँर सौन्दर्यादि-गुण ८/१८३ याँरे कृपा करि' करेन ११/११७ याँहा ताँहा राधाकृष्ण ८/२७६ याँहा नेत्र पड़े, ताँहा १०/१७९ । 577
[ यहाँ-लक्ष्मी श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत याहाँ याहाँ प्रभुर चरण 1/165 याँहार सर्वस्व, ताँरे मिले 8/309 याँर सौभाग्य-गुण वाञ्छे 8/182 याँहा लञा याय, ताँहा 11/37 याहाँ सङ्गे चले एइ 1/224 याज्ञिक-ब्राह्मणी सब 12/32 यादवेर विपक्ष, यत 13/156 यावत् पड़ौं, तावत् पाङ 9/101 यारे जानाह, सेइ जाने 9/126 याँरे ताँर कृपा, सेइ 13/59 यारे देखे, तारे कह 7/101 याँहा इच्छा, याह, आमा 10/65 याँहार महिमा सर्वशास्त्रेते 8/97 याहा लागि' मदनदहने 1/55 याहा हैते हय कृष्णे 9/307 येइ कृष्णतत्त्ववेत्ता, सेइ 8/127 येइ ग्रामे रहि' भिक्षा 7/106 येइ भट्टाचार्य पड़े पड़ाय 6/278 येइ मतनाचाओ, सेइ 8/131 येइ येइ कहे, सेइ 12/113 ये इहा एकबार पिये 8/305 ये-काले करेन जगन्नाथ 1/53 ये-काले निमाञि पड़े 3/166 ये काले वा स्वप्ने 2/37 ये तोमार माया-नाटे 8/198 ये तोमारे राज्य दिल 1/176 ये ना वाञ्छे, तार 4/146 ये मदन तनुहीन, परद्रोहे 2/22 ये यैछे भजे, कृष्ण 8/90 योगपट्ट ना निल, नाम 10/108 योग्यपात्र हय गूढरस 1/74 र रत्नगण-मध्ये यैछे 4/193 रथयात्रा देखि' ताँहा 1/47 रथयात्राय आगे यबे 1/54 रन्धने निपुणा ताँ-सम 9/298 'रस'-कोन् तत्त्व, 'प्रेम' 8/118 रसज्ञ कोकिल खाय 8/257 'रसराज', 'महाभाव'-दुइ 8/281 रसामृतसिन्धु, आर विदग्ध 1/38 राक्षसे स्पर्शिल ताँरे 9/189 रागमार्गे भजि' पाइल 8/222 रागानुग-मार्गे ताँरे भजे 8/220 राजवेश, हाती, घोड़ा 1/79 राजा कहे,-उपवास 11/111 राजा कहे,-शास्त्र-प्रमाणे 11/101 राजा कहे,-शुन, मोर 1/180 राज्य छाड़ि' योगी हइ' 12/10 राज्यभोग নহে चित्ते बिना 12/20 रात्रि-दिन कुञ्जे क्रीड़ा 8/188 रात्रि-दिन चिन्ते 8/227 राधाकृष्ण-कुञ्जसेवा साध्य 8/204 राधाकृष्णपदाम्बुज-ध्यान 8/252 राधाकृष्ण-प्रेमकैलि कर्ण 8/254 राधाकृष्णे तोमार महाप्रेम 8/276 राधाकृष्णे प्रेम याँर, सेइ 8/246 राधाकृष्णेर प्रेमकैलि-येइ 8/249 राधाकृष्णेर लीला एइ अति 8/200 राधा चाहि' वने फिरे 8/104 राधा-प्रति कृष्ण-स्नेह 8/165 राधा-प्रेमावेशे प्रभु हैला 14/235 राधार कुटिल-प्रेम हइल 8/109 राधार स्वरूप-कृष्णप्रेम 8/208 राधा लागि' गोपीरे यदि 8/102 राधिका-उन्माद यैछे 1/87 राधिकार भावकान्ति करि' 8/278 रामानन्द आइला अपूर्व 8/17 रामानन्द-चरित्र ताहे 8/303 रामानन्द-मिलन-लीला 8/311 'रामानन्द राय' आछे 7/62 रामानन्द राये मोर कोटी 8/310 राय कहे,-आमि-नट 8/131 राय कहे,-आमि शुद्र 10/54 राय कहे,-इहा आमि 8/120 राय कहे,-इहार आगे 8/96 राय कहे,-इहा वइ बुद्धि 8/190 राय कहे,-कान्तभाव प्रेम 8/79 राय कहे,-कृष्ण-कर्मार्पण 8/59 राय कहे,-कृष्णभक्ति-बिना 8/244 राय कहे,-'कृष्ण हय 8/186 राय कहे,-चरण-रथ 11/37 राय कहे,-ज्ञानमिश्रा भक्ति 8/64 राय कहे,-ज्ञानशून्या भक्ति 8/66 राय कहे,-दास्य-प्रेम 8/71 राय कहे,-प्रभु तुमि 8/277 राय कहे,-प्रेमभक्ति-सर्व 8/68 राय कहे,-येइ कहाओ 8/197 राय कहे,-स्वधर्माचरणे 8/57 रावण आसितेइ सीता 9/194 रावण देखिया सीता लैल 9/203 रावण हैते अग्नि कैल 9/203 रावणेर आगे माया-सीता 9/194 रास ना पाइल लक्ष्मी 9/120 रासलीला-वासनाते राधिका 8/112 ल लक्षणा' करिते स्वतः 6/137 लक्ष्मी-आदि नारीगणेर 8/144 लक्ष्मीकान्तादि अवतारेर 8/144 लक्ष्मी केने ना पाइल 9/122 578 ।
पद्य सूची लक्ष्मी-शुद्ध ]
लक्ष्मी चाहे सेइ देहे 9/136 | विश्वम्भर जगन्नाथे के 13/13 | 'वैष्णव' हइल लोक, सबे 7/89 लक्ष्मी जिनि' गुण याँहा 14/226 | विश्वरूप-उद्देशे अवश्य 7/11 | वैष्णवेर हय एइ एक 10/13 लक्ष्मी-सङ्गे दासीगणेर 14/135 | विश्वरूप-सिद्धि-प्राप्ति 7/13 | वैष्णवेर मध्ये राम-उपासक 9/11 लघुभागवतामृतादिके करु 1/41 | विश्वास करि' शुन 8/307 | व्यथा पाञा करे, येन 14/199 ललितादि सखी-ताँर 8/164 | विश्वासे पाइये, तर्के 8/308 | व्यथा येन नाहि लागे 3/166 लावण्यामृत-धाराय तदुपरि 8/167 | विषय छाड़िया तुमि 8/296 | व्याज-स्तुति करे दुँहे 12/196 लीलाय चड़िल ईश्वर रथेर 13/22 | विषाद करेन कामबाणे 8/114 | 'व्याप्य'-'व्यापक'-भावे 10/168 लुकाइले प्रेम-बले जान 8/288 | वृन्दावन-क्रीड़ाते लक्ष्मीर 14/122 | व्यास-भ्रान्त बलि' सेइ 6/172 लोकापेक्षा नाहि इँहार 7/27 | वृन्दावन, गोवर्धन, यमुना 13/143 | व्यास-सूत्रेर अर्थ-यैछे 6/138 लोके कहे, -ए संन्यासी 9/314 | वृन्दावन याइबार ए 1/224 | व्रजदेवीरे सङ्गे ताँर 8/93 लोकेरे कहिब गिया साक्षीर 5/104 | वृन्दावन याबेन प्रभु शुनि' 1/155 | व्रजवासी लोकेर कृष्णे 4/95 लोहाके यावत् स्पर्शि' 6/279 | वृन्दावन-लीलाय कृष्णेर 14/123 | व्रजलोकेर कोन भाव 8/221 व | वृन्दावने अप्राकृत नवीन 8/137 | व्रजलोकेर भावे पाइये 9/128 वंशीगानामृत-धाम, लावण्य 2/29 | वृन्दावने आइला कृष्ण 14/73 | व्रजलोकेर भावे येइ 9/131 वज्रेर स्थापित, आमि इँहा 4/41 | वृन्दावने उदय कराओ 13/127 | व्रजे तोमार सङ्गे येइ 13/130 वस्तुतत्त्व-ज्ञान हय कृपाते 6/89 | वृन्दावने गोविन्द-स्थाने 5/13 | व्रजेन्द्रनन्दन बिना फाटे 2/16 वस्त्र पाञा राजार हैल 12/38 | वृन्दावने साहजिक ये 14/219 | व्रजेन्द्रनन्दन' बलि' ताँर 9/130 वाणीनाथ-पट्टनायके निकटे 10/61 | वृन्दावनेर सम्पद् देख 14/204 | व्रजेन्द्रनन्दन-स्मृति हय 12/61 वात्सल्ये हयेन तँह येन 9/297 | वेद-आज्ञा यैछे, माता 3/186 | व्रजेश्वरीसुत भजे गोपीभाव 9/133 वामन हञा चाँद धरिते 1/205 | वेदधर्म त्यजि' से कृष्णके 8/219 | श विजातीय लोक देखि' 8/28 | वेद-धर्म लङ्घि' कैले 6/234 | शङ्करारण्य' नाम ताँर 9/299 वितण्डा, छल, निग्रहादि 6/177 | वेद ना मानिया बौद्ध 6/168 | शतकोटि-गोपीते नहे 8/115 विदुरेर घरे कृष्ण 10/138 | वेद-पुराणेते एइ कहे 9/195 | शतकोटि गोपी-सङ्गे 8/108 विधिमते कैल तँहो 8/15 | वेद-पुराणे कहे ब्रह्म 6/139 | शत श्लोक कैल 6/206 विधिमार्गे ना पाइये व्रजे 8/225 | वेदान्त पड़ाइते तबे 6/120 | शतेक संन्यासी यदि 3/100 विनोदिनी लक्ष्मीर हय 9/119 | वेदान्त-श्रवण, -एइ 6/121 | शान्त-दास्य-सख्य 8/86 विप्र कहे, -तुमि साक्षात् 9/214 | वेदाश्रय नास्तिक्यवाद 6/168 | शास्त्रव्याख्या करिते ऐछे 6/191 विप्र कहे, -मूर्ख आमि 9/98 | वेदेर निगूढ़ अर्थ बुझन 6/148 | शिरे वज्र पड़े यदि 7/48 विप्र बोले, -प्रतिमा हञा 5/95 | वैराग्य-अद्वैत-मार्गे प्रवेश 6/75 | शिष्य पड़िछा-द्वारा निल 6/8 विप्र लागि' कर तुमि 5/96 | वैशाखेर प्रथमे दक्षिण 7/6 | शीतल, निर्मल कैल 12/133 'विवर्त्तवाद' स्थापियाछे 6/172 | वैष्णव-ज्ञाने बहुत 9/251 | शुक्लवस्त्रे मसि-बिन्दु 12/51 विरक्त संन्यासी आमार 11/7 | वैष्णव सकल पड़े 9/305 | शुद्ध हय यदि, प्रभुरे 10/114 विशारदेर समाध्यायी,-एइ 6/53 | वैष्णव-संन्यासी इँहो 6/49 | शुद्धाशुद्ध गीता पड़ि 9/98
। 579
[ शुनितेइ-साक्षाते श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत
स्तम्भ १
शुनितेइ गोपालेर हइल १२/१४९ शुनि' प्रभु कहे किछु ६/१९० शुनिले ना हय प्रभुर १०/११३ शुष्कतर्क-खलि खाइते १४/८७ शैल-उपरि हैते आमा ४/४२ श्लोक करि' एक तालपत्रेते १/६१
श्र
श्रद्धाय चैतन्यलीला शुने ६/२८५ श्रवण-मध्ये जीवेर कोन् ८/२५४ श्रीगोपाल' नाम मोर ४/४१ श्रीचैतन्य-नित्यानन्द-अद्वैत ८/३०९ श्रीनृसिंह, जय नृसिंह ८/५ श्रीपाद, धर मोर गोसाञिर ९/२८९ श्रीविग्रह ये ना माने ६/१६७ श्रीवृन्दावन-भूमि-याँहा ८/२५३ श्री-वैष्णव एक, —व्येङ्कट ९/८२ श्रीभागवतसन्दर्भ-नाम ग्रन्थ १/४३ श्रीमाधवपुरीर सङ्गे श्रीरङ्ग ९/२९५ श्रुतिगण गोपीगणेर अनुगत ९/१३३ श्रुति-वाक्ये सेइ दुइ ६/१३६ श्रुति ये मुख्यार्थ कहे, सेइ ६/१३५ श्रेयो-मध्ये कोन् श्रेयः ८/२५० श्रेष्ठ-उपास्य-युगल ८/२५५ शृङ्गार-रसराजमय-मूर्त्तिधर ८/१४२
ष
षड्विध ऐश्वर्य—प्रभुर ६/१६१ षडैश्वर्यपूर्णानन्द-विग्रह ६/१५२
स
सङ्कीर्त्तन-यज्ञे ताँरे करे ११/९९ संस्कार करिये उत्तम ६/७६ सकल-वैष्णवशास्त्र-मध्ये ९/२४० सकल लोकेर आगे ५/११२
स्तम्भ २
सखीगण हय तार पल्लव ८/२०८ सखी बिना एइ लीला ८/२०२ सखी बिना एइ लीलाय ८/२०३ सखीभावे पाय राधाकृष्णेर ८/२२८ सखीभावे ये ताँरे करे ८/२०३ सखीर स्वभाव एक ८/२०६ सखी लीला विस्तारिया ८/२०२ सखी हैते हय एइ ८/२०१ सङ्गीत-गन्धर्व-सम, शास्त्रे १०/११६ सच्चिदानन्द-तनु, व्रजेन्द्र ८/१३५ सच्चिदानन्दमय कृष्णेर स्वरूप ८/१५३ सच्चिदानन्दमय हय ईश्वर ६/१५८ सत्य एक बात कहौँ १/२०१ सत्यविग्रह ईश्वरे', करह ९/२७७ सत्य-सीता आनि' दिल ९/२०७ सनकादि-शुकदेव ताहाते ६/१९८ संन्यास करि' विश्वरूप ७/४४ संन्यास करिला शिखा १०/१०८ संन्यास ग्रहण कैल १०/१०४ संन्यासी देखिया मोरे ९/२७२ संन्यासी' बलिया मोरे ना ८/१२८ संन्यासीर अल्प छिद्र १२/५१ संन्यासीर धर्म नहे ३/७४ संन्यासीर धर्म नहे—संन्यास ३/१७७ संन्यासीर धर्म लागि' श्रवण ६/१२७ संन्यासीर वेष देखि' ८/२८३ संन्यासीर वेषे मोरे दिला ९/२१४ 'सप्तताल-वृक्ष' देखे कानन ९/३१२ सप्तदिन पर्यन्त ऐछे करेन ६/१२३ सब खण्डि' प्रभु निज-मत ६/१७७ सब-भक्तेर आज्ञा निल १४/६ सबे, एक गुण देखि ९/२७७ सबे एक दोष तार १/१९४
स्तम्भ ३
सबे एक सखीगणेर इँहा ८/२०१ सबे दण्डधन छिल, ताहा ५/१५३ सबे बले, केने आइला १/२१३ 'समाः'-शब्दे कहे श्रुतिर ८/२२४ सम्पत्तिर मध्ये जीवेर ८/२४६ सम्भाषिले जानिबे तुमि ७/६५ सम्भाषिले जानिबे ताँर ७/६७ सम्यक् वासना कृष्णेर ८/११२ सर्व-अवतारी, सर्वकारण ८/१३३ सर्व-चित्ताकर्षक, साक्षात् ८/१३८ सर्व त्यजि' जीवेर कर्त्तव्य ८/२५३ सर्वत्र जल-याँहा अमृत १४/२२५ सर्वत्र स्थापय प्रभु वैष्णव ९/४४ सर्वत्र हय ताँर इष्टदेव ८/२७३ सर्वदेश वैष्णव' हैल प्रभुर ७/१०८ सर्व मत दुषि' प्रभु ९/४३ सर्वैश्वर्यपरिपूर्ण स्वयं ६/१४० सर्वैश्वर्य-सर्वशक्ति-सर्वरस ८/१३५ सशरीरे सप्तताल अन्तर्धान ९/३१३ ससागर-शैल मही करे १३/८३ सहज गमन करे, —यैछे १४/२२४ सहज गोपीर प्रेम, —नहे ८/२१४ सहज लोकेर कथा-याँहा १४/२२४ सहजेइ नित्यानन्द-कृष्णप्रेम १/२ सहजेइ पूज्य तुमि, आरे ६/५६ सहजे विचित्र मधुर चैतन्य ४/५ साक्षात् ईश्वर इँह, नाहिक १/१८० साक्षात् ईश्वर तुमि, के ८/१२१ साक्षात् पाण्डु तुमि, तोमार १०/५३ साक्षात् महाप्रभुर द्वितीय १०/१११ साक्षात् श्रीकृष्ण, तैं हो १०/१५ साक्षाते ना देखिले मने ५/१०५ साक्षाते ना देय देखा १३/६१
580 ।
पद्य सूची साक्षि-हरि ] 'साक्षिगोपाल' बलि' ताँर ५/११८ | सेइ जल वंश-सहित ७/१२२ | सेइ सुखसमुद्रेर इँहा नाहि १३/१३० सातदिन कर तुमि वेदान्त ६/१२४ | सेइ जल लञा आपने १२/१२३ | सेइ से ए-सब लीला ७/११० साधारण-प्रेमे देखि' सर्वत्र ८/१०९ | सेइ त' ईश्वर-तत्त्व ६/८३ | सेइ से कर्त्तव्य, तुमि ६/१२२ साध्यवस्तु' साधन'-बिना ८/१९६ | सेइत' पराण-नाथ १/५५, १३/११३ | सेइ से ताँहारे कृष्ण' ११/१०२ साध्य-साधन आमि ना ९/२५५ | सेइ त' सुमेधा, आर ११/९९ | सेइ हैते कृष्णनाम ९/२७ साध्य-साधन-श्रेष्ठ जानाह ९/२५५ | सेइ दण्ड काँहा पड़िल ५/१५० | सेइ हैते भट्टाचार्येर ६/२३६ साध्वी हञा केने चाहे ९/११२ | सेइ दिन ताँर घरे ९/२० | सेइ हैते भाग्यवान् १२/६८ साम्प्रतिक दुइ ब्रह्म' इहाँ १०/१६३ | सेइ दुइर दण्ड हय ६/२६५ | सेकाले दक्षिण हैते १०/९१ सायुज्य' शुनिते भक्तेर हय ६/२६८ | सेइ दुइ स्थाप' तुमि ९/२७१ | से काले नाहि जन्मे ६/१४६ सार्वभौम कहे, - नीलाम्बर ६/५३ | सेइ देहे कृष्णसङ्गे ९/१३४ | से-मन्दिरे गोपालेर ५/१३ सार्वभौम परिवेशान करेन ६/४३ | सेइ नाम हइल तार १/१९५ | से मृत्तिका लय लोक १/१६५ सार्वभौम-सङ्गे मोर मन ८/१२४ | सेइ पञ्चम पुरुषार्थ ९/२६१ | से-विग्रहे कह सत्त्वगुणे ६/१६६ सार्वभौम हैला प्रभुर भक्त ६/२५७ | सेइ फेन लञा शुभानन्द १३/११० | सौभाग्य-तिलक चारु ८/१७५ सार्वभौमेर हैल महाप्रसादे ६/२३१ | सेइ बहिर्वास सार्वभौम १२/३७ | स्त्री-दरशन-सम विषेर ११/७ सिद्धदेहे चिन्ति' करे ८/२२८ | सेइ बुझे, दुँहार पदे ५/१५८ | स्त्रीधन देखाञा तारे लोभ ९/२२७ सिद्धान्त-शास्त्र नाहि ९/२३९ | सेइ ब्रह्म-बृहद्वस्तु ६/१३९ | स्थावर-जङ्गम देखे, ना ८/२७३ सिद्धिप्राप्तिकाले गोसाञि १०/१३३ | सेइ ब्रह्मे पुनरपि हये ६/१४३ | स्थावरदेह, देवदेह यैछे ८/२५६ सीतार आकृति-माया ९/१९३ | सेइ भाव, सेइ कृष्ण १/८० | स्नान करिबारे आइला ८/१४ सीता लञा राखिलेन ९/२०५ | सेइ महाभाव हय चिन्तामणि ८/१६३ | स्नेहवश हञा करे १०/१३९ सुखरूप कृष्ण करे सुख ८/१५७ | सेइ महाभावरूपा राधा ८/१५९ | स्नेह-भक्ति करि' किछु ६/१२० सुभद्रा-सहित देखे, वंशी १/८५ | सेइ याइ' अन्य ग्रामे ७/१०४ | स्नेह-सेवापेक्षा मात्र १०/१३९ सुराबिन्दु-पाते केह ना १२/५३ | सेइ वेष कैल, एबे ३/९ | स्वकल्पित भाष्य-मेघे करे ६/१३८ सूक्ष्म धूलि, तृण, काँकर १२/९३ | सेइ व्रजे पाये शुद्ध ९/१३१ | स्वतःप्रमाण वेद-वाक्ये ६/१७९ सूत्रेर अर्थ-भाष्य कहे ६/१३१ | सेइ शक्ति-द्वारे सुख ८/१५६ | स्वतःप्रमाण वेद सत्य ६/१३७ सूत्रेर मुख्य अर्थ ना ६/१३२ | सेइ शक्ति प्रकाशि' ७/१०९ | स्वमाधुर्ये सर्व चित्त ९/१२७ सूर्य येन उदय करि' १/२८० | सेइ शब्दे आमार गमन ५/९९ | 'स्वयं भगवान्' कृष्ण ९/१४१, ६/१४७, ९/१४७ सेइ अर्थ मुख्य, -व्याससूत्रे ६/१३३ | सेइ सती-प्रेमवती १३/१५३ | स्वरूप कहे, -याते जानिल १/७२ सेइ कृष्णे' गोपिकार नहे ९/१४९ | सेइसब आचार्य हञा ७/१०७ | स्वरूपेर इन्द्रिये प्रभुर १३/१६४ सेइ गोपीभावामृते याँर ८/२१९ | सेइ सब तत्त्ववस्तु हैल ८/११६ | स्वाद जानि' तैछे क्षीर ४/१२० सेइ छले निस्तारये सांसारिक १०/११ | सेइ सब तीर्थ स्पर्शि' ९/४ | स्वाभाविक तिन शक्ति ६/१५३ सेइ छले सेइ देशेर ९/४ | सेइ सब दयालु मोरे १२/८ | सेइ छिद्र अद्यापिह आछये ५/१३० | सेइ सब रसामृतेर 'विषय' ८/१४० | ह सेइ जन पाय व्रजे ८/२२० | सेइ साध्य पाइते आर ८/२०४ | हरिदास कहे, - आमि ११/१६५ । 581
[ हरि-ह्लादिनीर श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत हरिदास ठाकुर, श्रीरूप 1/63 | हासिञा गोपालदेव तथाय 5/106 | हेन-जीवे ईश्वर-सह 6/162 हरिदास' बलि' प्रभु डाके 12/160 | हृदये प्रेरण कर, जिह्वाय 8/122 | हेन तोमार सङ्गे मोर 12/195 हरिबोल' बलि' काङ्गाल 14/46 | हेनकाले गोविन्देर हैल 10/131 | हेन-भगवाने तुमि कह 6/152 हरिबोल' बलि' तारे 14/45 | हेनकाले गौड़ीय एक 12/122 | हेन-मोरे स्पर्श' तुमि 7/145 हरिभक्तिविलास, आर 1/35 | हेनकाले दोलाय चड़ि' 8/14 | हेन शक्ति नाहि मान 6/161 हस्ते ताँरे स्पर्श कहे 13/93 | हेनकाले महाकाय एक 9/54 | हेन-सङ्ग विधि मोर 7/47 हरि' हरि' प्रभुमते करेन 9/45 | हेन-जीवे भेद' कर 6/163 | ह्लादिनीर सार अंश, तार 8/158 582 ।
शब्दकोश
अ अक्षजज्ञान—इन्द्रियोंके द्वारा प्राप्त ज्ञान अघटन-घटन-पटीयसी—असम्भवको भी सम्भव तथा इसके विपरीत करनेवाली अचिद्वस्तु—जो वस्तु चित् नहीं हो अच्छेद्य—अविभाज्य, जिसका छेदन ना हो सके अच्युत—जो च्युत नहीं हो अज—अजन्मा अजागलस्तन—बकरीके गलेमें लटकनेवाली स्तनके जैसी चीज अज्ञ—ज्ञानरहित अणिमा—योगकी आठ सिद्धियोंमेंसे एक, जिसमें योगी अणुके समान सूक्ष्म हो जाता है अतिक्रम—मर्यादा, कर्त्तव्य, अधिकार आदिका उल्लङ्घन अतिक्रान्त—अतीत, क्रमका उल्लङ्घन किया हुआ अतिशय—अत्यधिक अतिशयोक्ति—किसी बातका बढ़ा-चढ़ाकर कहना अत्याज्य—नहीं त्यागने योग्य अत्युत्तम—अति उत्तम अदृष्ट—न देखा हुआ, अज्ञात अधिदैव—आराध्य देवता अधिरूढ़—बढ़ा हुआ अधिष्ठान—आधार, आश्रय अनभिज्ञ—न जाननेवाला अनवरत—निरन्तर अनायास—बिना कष्टके अनिर्वचनीय—वचनसे ना वर्णन करने योग्य
अनुक्षण—निरन्तर अनुगत—अनुगामी, अधीन अनुवर्त्तन—अनुसरण, अनुगमन अनुष्ठान—आरम्भ करना, कोई धार्मिक कृत्य अनुसन्धान—खोज, प्रयत्न अन्तर्भुक्त—किसीके अन्तर्गत होना अन्तर्भूत—अन्तर्गत अन्त्य—अन्तका, आखिरी अन्यतम—बहुतोंमें से एक, सर्वश्रेष्ठ अन्वय—वाक्यमें शब्दोंका परस्पर सम्बन्ध, मेल अन्वेषण—खोज, ढूँढना अपकार—अहित अपटुता—अकुशलता अपरा—जो श्रेष्ठ ना हो अपरिमित—अगणित, अनगिनत अपवर्ग—मोक्ष, निर्वाण अपूर्व—जो पहले ना हुआ हो, अनूठा अप्राकट्य—अप्रकट होना अप्राकृत—अलौकिक अप्रारब्ध—वैसा फल जो वर्तमान शरीरमें न भोगा जा रहा हो अप्रासङ्गिक—प्रस्तुत विषयसे असम्बद्ध, प्रसङ्गके विरुद्ध अबाध—बाधारहित अभयत्व—अभयता अभिज्ञ—जाननेवाला अभिधा—नाम, वाच्यार्थ प्रकट करनेवाली शब्द शक्ति अभिधान—शब्दकोष अभिधेय—अर्थ या उपाय, कथनीय, विषय
। 583
[ अभिप्राय-ईशिता श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत अभिप्राय-मूल अर्थ, तात्पर्य अभिप्रेत-उद्दिष्ट, अभिलाषित, स्वीकृत अभिवृद्धि-अभ्युदय, बढ़ना अभिव्यक्ति-प्रकट करना अभिसन्धि-जोड़, समझौता अभिसार-आगे बढ़ना, प्रियसे मिलने जाना अभिहित-कहा हुआ अभीष्ट-प्रिय, रुचिकर अभ्यस्त-बार बार अभ्यास किया गया अभ्युदय-उदय अमित-अत्यधिक अरण्य-वन अवगत-जाना हुआ अर्वाचीन-नया, बादमें उत्पन्न हुआ अवतारणा-नीचे लाना, इन्द्रियगोचर करना अवतीर्ण-अवतारके रूपमें प्रकट अवधारण-शब्दके अर्थकी सीमा बाँधना, निश्चय करना अवयव-अङ्ग, अंश अवरुद्ध-रुका हुआ अवलम्बन-आश्रय लेना, सहारा लेना अवलोकन-देखना अवशिष्ट-बचा हुआ, शेष अवस्थान-रहना, अवस्थिति अविचिन्त्य-अचिन्त्य अविच्छिन्न-अविभक्त, लगातार अविच्छिन्न तैलधारावत्-तेलकी धाराके समान अटूट अव्यय-अविकारी अव्याकृत-अव्यक्त अशेष-सम्पूर्ण अष्टसिद्धि-आठ प्रकारकी सिद्धियाँ असङ्ग-आसक्तिहीन असङ्गत-प्रसङ्गविरुद्ध, अनुचित असङ्गति-मेलका ना होना असंस्कृत-संस्कारहीन असमोध्र्द्ध-जिससे बड़ा और जिसके बराबर कोई नहीं हो असार-सारहीन असूया-ईर्ष्या, दूसरेके गुणमें दोष निकालना आ आख्यायिका-कहानी आच्छन्न-ढका हुआ आत्मविषयणी-आत्म-सम्बन्धी आत्मसात्-अपने अधिकारमें आत्यन्तिक-असीम आदित्य-सूर्य आधान-स्थापन, कोई वस्तु रखनेका स्थान रखना आधिदैविक-देवताओंके द्वारा कृत आधिभौतिक-अन्य प्राणियों द्वारा प्रदत्त आध्यात्मिक-मानसिक, आत्म-सम्बन्धी आपाततः-अचानक, अन्तमें आप्त-पूर्ण, कुशल आम्नाय-वेद, श्रुत, परम्पराप्राप्त उपदेश आयुध-अस्त्र आरूढ़-आसीन आरोहण-चढ़ना, ऊपरकी ओर जाना आर्त्ति-क्लेश, पीड़ा आर्ष-ऋषियोंका आलोचना-गुण-दोष निरूपण आलोच्य-आलोचना योग्य आह्लादित-आनन्दित इ इति-इस प्रकार, समाप्ति इहलोक-यह लोक ई ईक्षण-दृष्टिपात ईशिता-ईश्वरत्व 584 |
शब्दकोश उच्छिष्ट-छन्दविद्या ] उ उच्छिष्ट—खाकर छोड़ा हुआ, परित्यक्त उत्कृष्ट—उन्नत, श्रेष्ठ उद्बुद्ध—जगा या जगाया हुआ, विकसित उद्भासित—व्यक्त, चमकता हुआ उद्यत—तैयार उद्रेक—प्रचुरता, बढ़ती उद्वेग—क्षोभ, चित्तकी अस्थिरता उपक्रम—योजना, आरम्भ, प्रयास उपशम—विराग, विरक्ति उपलक्षित—इशारेसे बताया हुआ उपाङ्ग—छोटा या सहायक अंग उपार्जित—कमाया हुआ उपादान—साधन-सामग्री उपादेय—ग्रहण करने योग्य, उपयोगी उपेयत्व—उपाय-योग्य होनेका भाव उरु—विस्तृत, महान उरुक्रम—विष्णु उरुगाय—उत्तम व्यक्तियोंके द्वारा जिसका स्तुतिगान किया गया हो ए एकरस—जो सदा एक रूपमें रहे, एकीभूत—जो मिलकर एक हो गया हो ऐ ऐहिक—सांसारिक औ औत्सुक्य—उत्सुकता औद्धत्य—उद्धतता, अखड़पन औपाधिक—उपाधियुक्त क कर्त्तृत्व—कर्ताका धर्म, कार्य कलुषित—गंदा, कलुषयुक्त कल्प—वेदका एक अङ्ग, ब्रह्माका एक दिन कल्पवृक्ष—इच्छा पूरी करनेवाला वृक्ष काम्यकर्म—फलकी कामनासे किया जानेवाला कर्म कैतव—छल, धोखा केवला भक्ति—शुद्धा भक्ति कैङ्कर्य—दासत्व कैवल्य मुक्ति—निर्वाण मुक्ति कौतूहलवश—उत्सुकतावश क्रोड़ीभूत—अन्तर्भूत क्लान्त—थका हुआ, क्षीण क्ष क्षिति—पृथ्वी क्षेत्र—शरीर क्षेत्रज्ञ—शरीरका ज्ञाता, आत्मा तथा परमात्मा क्षोभ—असन्तोष, व्याकुलता ग ग्रथित—गूँथा हुआ ग्रन्थि—गाँठ ग्रास—आहार ग्रीवा—गर्दन घ घ्राण—गन्ध, सूँघनेकी शक्ति च चित्तगुहा—हृदयरूपी कन्दरा चित्-शक्ति—भगवानकी एक प्रकारकी शक्ति चिदालोचना—चित्-वस्तुकी आलोचना चिन्तामल—चिन्तारूपी मल चिन्मयत्व—चिन्मयता चैतन्यत्व—चेतनता चैतन्यनिष्ठ—चित्-वस्तुमें जिसकी निष्ठा है चैतन्यहीन—चेतनारहित छ छन्दविद्या—अठारह विद्याओंमें एक | 585
[ जर्जरित-नैतिक श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत ज जर्जरित-जो जर्जर हो गया हो त तत्त्वज्ञान-तत्त्ववस्तुका ज्ञान तत्त्वतः-यथार्थतः तत्त्वविद्-तत्त्वको जाननेवाला तदीय-भगवत्-सम्बन्धी तनय-पुत्र तन्मय-तल्लीन तादात्म्य-दो वस्तुओंके परस्पर अभिन्न होनेका स्वभाव तारतम्य-दो वस्तुओंके घट-बढ़कर होनेका भाव तिर्यग्-पशु-पक्षी तैलधारावत्-तैलकी भाँति धारावाला त्रिगुणातीत-तीनों गुणोंसे अतीत त्रिवर्ग-धर्म, अर्थ और काम द दिक्पाल-दश दिशाओंके रक्षक देवता दुर्ज्ञेय, दुर्बोध-कठिनाईसे जानने योग्य दुर्निगृहीत-कठिनाईसे वशमें लाया हुआ दुर्निवारित-कठिनाईसे निवारण किया हुआ दुरूह-कठिन दुस्त्याज्य-नहीं त्यागने योग्य देदीप्यमान-चकमता-दमकता हुआ देहाध्यास-देहमें मिथ्या अभिमान द्रव्यमययज्ञ-द्रव्य द्वारा किया गया यज्ञ द्विजवर-ब्राह्मणश्रेष्ठ द्वैतभाव-दो होनेका भाव ध धूसरित-धूलसे भरा हुआ ध्वनित होना-पता चलना न नराकृति-मनुष्यके समान आकृति नामाभास-नामका आभास निःशक्तिक-शक्तिरहित निःश्वास-प्राणवायु या साँसका बाहर निकलना निःसृत-निकला हुआ निकृष्ट-तुच्छ निकेतन-घर निक्षेप करना-फेंकना निगृहीत-निग्रह किया हुआ निग्रह-संयम निन्तान्त-अत्यन्त, एकदम निमज्जित-डूबा हुआ, स्नात नियमाग्रह-नियम-पालनमें आलस्य निरञ्जन-निर्दोष, अज्ञानसे रहित निरपेक्ष-किसी औरकी अपेक्षा नहीं निर्गत-बाहर निकला हुआ निर्गुण-सत्त्व, रज और तमोगुणसे अतीत निर्दिष्ट-निर्देशित निर्वाण-मोक्ष निर्विकल्प-विकल्पसे रहित निर्विवाद-बिना विवादका निरुद्ध-विशेषरूपसे रोका हुआ निरूपक-निरूपण करनेवाला निरूपण-किसी विषयको ठीक-ठीक समझा देना निशा-रात्रि निष्काम कर्म-कामनासे रहित कर्म निष्पन्न-जिसकी उत्पत्ति हुई है निसर्गवाद-प्रकृतिवाद (प्रकृति ही जगत्की सृष्टि करनेवाली है, ऐसा मतवाद) निस्तारक-निस्तार करनेवाला निस्त्रैगुण्य-तीनों गुणोंसे अतीत निहत-मारा हुआ नीलमणि-नीलम नैतिक-नीति-सम्बन्धी 586 |
शब्दकोश नैमित्तिक-प्राकृत ] नैमित्तिक-निमित्तसे उत्पन्न नैरन्तर्य-निरन्तर होनेका भाव नैर्घृण्य-निर्ममता, क्रूरता प पक्षान्तर-दूसरी ओर पन्था-पथ परिज्ञात-अच्छे प्रकारसे ज्ञात परनिष्ठित-दूसरेमें निष्ठावाला परदार-दूसरेकी स्त्री परवर्ती-बादमें पराक्रान्त-शक्तिशाली परिग्रह-ग्रहण पराभक्ति-श्रेष्ठा, शुद्धा भक्ति पराभूत-पराजित परिचर्या-सेवा परिचालक-चलानेवाला परिदृष्ट-दृष्ट परिनिष्ठित-पूर्णतया निपुण परिमित-सीमित परिलक्षित-अच्छी तरह देखाभाला हुआ परिव्राजक-संन्यासी परिवेष्टित-घिरा हुआ पर्यन्त-तक पर्यवसित-समाप्त पाण्डित्य-विद्वता पारत्रिक-परलोक-सम्बन्धी पारलौकिक-परलोक-सम्बन्धी पार्षद-परिकर पाषण्डी-पाखण्डी पूर्वपक्ष-संशयके सम्बन्धमें उठाया गया प्रश्न पूर्वराग-मिलनसे पहलेका राग प्रकरण-निर्माण, प्रसङ्ग प्रकृत-यथार्थ प्रकृष्ट-उत्तम प्रक्षिप्त-बादमें जोड़ा या घुसाया हुआ प्रच्छन्न-ढका हुआ प्रजल्प-इधर-उधरकी बात प्रज्ञा-बुद्धि प्रणयन-रचना, निर्माण प्रणत-शरणागत प्रणतपाल-शरणागतकी रक्षा करनेवाले प्रणति-प्रणाम, शरणागति प्रताड़ित-सताया गया प्रतिपादित-प्रमाणित प्रतिपाद्य-जिसे प्रमाणित किया जाय प्रतिभात-प्रभायुक्त, ज्ञात प्रतीयमान-जान पड़ता हुआ, जिसकी प्रतीति हो रही हो प्रत्यगात्मा-जीवात्मा प्रत्यवाय-दोष प्रत्याहार-निरोध, रोकना प्रत्युपकार-भलाईके बदलेमें की हुई भलाई प्रदत्त-दिया हुआ प्रधान-मायाकी एक वृत्ति प्रधानतः-मुख्यरूपसे प्रपत्ति-शरणागति प्रभूत-अत्यधिक प्रभृति-जैसा प्रयोजनीयता-आवश्यकता प्रयोजक-प्रयुक्त करनेवाला प्रयोजकत्व-प्रयोजक होनेका भाव प्रवर-श्रेष्ठ प्रवर्त्तक-किसी काममें लगानेवाला, आरम्भ करनेवाला प्रवृत्ति-मनका किसी विषयकी ओर झुकाव, प्रभाव प्रशस्त-प्रशंसाके योग्य प्रशान्तात्मा-शुद्ध या शान्त आत्मा प्रशामक-शान्त करनेवाला प्राकृत-प्रकृति-सम्बन्धी । 587