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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

माड़ोका युद्ध । ११५ ६७ दान दक्षिणा बाँटन लागी तुरतै महलनबिप्रबुलाय १३८ जितनी माया रहै माड़ो की सो सब ऊदन तुरत मँगाय ॥ जहाँ खजाना परिमालिक को तामें दीन सबै भरवाय १३६ बड़ी खुशहाली भै मोहबेमाँ घर घर होयँ मङ्गलाचार ॥ उजरिगो माड़ो त्यहिसमयामाँ जहँ तहँ घूमें श्वानासियार १४० मैं पदबन्दौं पितु अपने के फिरि फिरि बारबार शिरनाय ॥ करी सहायि यहि समया में ताते गयौं कथा सबगाय १४१ आशिर्वाद देउँ मुंशी सुत जीवो प्रागनरायण भाय ॥ हुकुम तुम्हारो जो होतो ना ललितेकहतकथाकसगाय १४२ रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द्र औ सूर ॥ मालिक ललिते के तबलों तुम यशसों रहौ सदाभरपूर १४३ माथ नवावौं रामचन्द्र को करिकै कृष्णचन्द्र को ध्यान ॥ दोउपद् बन्दों शिवशंकर के गणपतिगणाधीशबलवान १४४ दोउपद् ध्यावौं महरानी के जिनअभिमानी डरे नशाय ॥ पूरी तरंग यहाँ सों द्वैगै तव पद् सुमिरिदुर्गामाय १४५ इति श्रीलखनऊनिवासि (सी,आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजवाबूप्रयागनारायण जीकी आज्ञानुसार उत्तरामप्रदेशान्तर्गत पँड़रीकलांनिवासि मिश्रवंशोद्भवबुध कृपाशंकरसूनु पं०ललिताप्रसादकृतआल्हाविजयवर्णननामपञ्चमस्तरङ्गः ५॥ माड़ोका युद्ध समाप्त ॥ इति ॥

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अथ आल्हखण्ड ॥ नैनागढ़की लड़ाई अथवा आल्हाका विवाह ॥ सवैया ॥ दीनसहायक नाम तुम्हार सुना बहु ग्रन्थन में महराजा । है शबरी गजगीध अजामिल ते अजहूं जिहिकोयशछाजा॥ जो करणी सुमिरों इनकी तबहीं मन धैर्य्य लहै रघुराजा । दीन पुकारकरै ललिते प्रभु बेगि द्रवो हे गरीब नेवाजा १॥ सुमिरन ॥ गया न कीन्ही जिन कलियुगमाँ काशिम घोड़ दान नहिंदीन ॥ जन्मत बैरी जिन मारा ना नाहक जन्म जगत में लीन १ पूजा कीन्ही नहिं शम्भू की अक्षत चन्दन फूल चढ़ाय ॥ फिरि गलभँदरी जिनबाजी ना मुख ना बम्ब बम्ब गा छाय २ भसमरमायो नहिं देही माँ कवहूंन लीन सुमिरनी हाथ ॥ सोचन लायक ते आय हैं जिन नहिं कबौं नवायोमाथ ३ को अस देवता रहै शम्भूसम जिनको पूज्यो रामउदार ॥ वेद उपनिषदके ज्ञाता रहें जिनबल भयो रावणाद्धार ४

३ आल्हखण्ड । ११८ झूटि सुमिरनी गे देवन के शाखा सुनो शूरमनक्यार ॥ ब्याह बखानों मैं आल्हाका होई तहाँ भयानक मार ५ अथ कथाप्रसंग ॥ नैनागढ़ का जो महराजा साजा सबै भांति कर्त्तार ॥ राजा इन्दर का बरदानी औ नैपाली नाम उदार १ तिन घर कन्या इक पैदा भै सबविधि रूप शीलगुणखान ॥ पढ़िकै विद्या सब जादूकी कछुदिनबाद भई फिरिज्वान २ संगसहेलिन के खेलति भय सुनवाँ कही तासुका नाम ॥ खेल लरिकई को जाहिर है लरिका खेलैं चारिहूयाम ३ खेलत खेलत फुलबगिया गईं सब मिलि करैं फूलनकी मार ॥ कटहर बड़हर त्यहि बगिया में कहुँ कहुँ फूलिरही कचनार ४ उठै सुगन्धे कहुँ चन्दन की कतहूँ कदलिन खड़ी कतार ॥ गुम्मज सोहैं मोमशिरिन के कहुँ कहुँ फुलीं चमेलीडार ५ बेला फूले अलबेला कहुँ खिन्निन लता गई बहुछाय ॥ हर्र बहेरा साँखो बिरवा सीधे चले उपर को जायँ ६ बरगद फैले हैं नीचे को फैले भूमि रहे नियराय ॥ जैसे सम्पति सज्जन पावैं नीचे शीश झुकावत जायँ ७ शीशम जानो तुम नीचनको आधे सरग फरहरा खायँ ॥ चलै कुल्हाड़ा जब नीचेते गिरिकै टूक टूक हैजाएँ ८ को गति वरणै तहँ अधमनकै सोहैं करिल रूपते भाय ॥ ताल तमालन कै गिनतीना कदमन गई सघनता छाय ६ फुली नेवारी अब अगस्त्य हैं आमनडार कैलिया बोल ॥ सोहैं अशोकन के बिरवा भल तीनों तहाँ बयारी डोल १० गूलर जामुन पाकर पीपर कोनन खड़े वृक्ष सरदार ॥

आल्हाका बियाह । ११६ ३ तार अपारन के बिरवा बहु कहूँ कहूँ खड़े वृक्ष कहार ११ टेसू फूले कहूँ सोहत हैं जैसे सोहैं लड़ैता ज्वान ॥ रूप गुलाबन को देखत खन फूलनछांड़िदीनअभिमान १२ कौन कनै रन को वर्णन कर चाँदनि चाँद सरिस गै छाय ॥ फूल दुपहरी के भल सोहैं मोहैं मुनिन मनै अधिकाय १३ गेंदन केरे बहु बिरवा हैं अर्जुन वृक्ष परै दिखराय ॥ मेला लाग्यो नौरङ्गिन का हेला निंबुन का दर्शाय १४ ठेला भरि भरि अमरुतन का माली राजभवन को जाय ॥ केवँड़ा केरी उठै सुगन्धी कहुँकहुँ नागबेलिगै छाय १५ ताही बगिया सुनवाँ खेलै मेलै गले सखिन के हाथ ॥ सखियाँ बोलीं तहँ सुनवाँते तुम नित खेलोहमारेसाथ १६ पैर महावर पै तुम्हरे ना -टिकुली नहीं बिराजै भाल ॥ द्रव्य तुम्हारे का घर नाहीं जो नहिं ब्याहकरें नरपाल १७ इतना कहिकै सब आलिनने औ करताली दीन बजाय ॥ समय दुपहरी को जान्यो जब तब फिरि खेलबन्द द्वैजाय १८ कीरति गावैं सब आल्हा की माड़ो लिहेनि बापका दायँ ॥ धन्य बनाफर उदयसिंह हैं आल्हा केर लहुरवा भाय १६ ऐसी बातें सखियाँ करतै अपने भवन पहूँचीं आय ॥ ताही क्षणमें सुनवाँ मन में अपने ठीक लीन ठहराय २० ब्याही जैबे आल्हा सँग में की मरिजाब जहरको खाय ॥ छाय उदासी गै चिहरा में पूँछै बार बार तब माय २१ कौन रोगहै त्वरि देहीमाँ बेटी हाल देउ बतलाय ॥ पीली ह्वैगै सब देही है औतनकाँपिकाँपि रहिजाय २२ को हितकारी है मातासम नाता बड़ा जगत केहिभाय ॥

४ आल्हखण्ड । १२० अब तो बाबा कलियुग आये माता सहैं लात के घाय २३ सुनिकै बातें ये माता की सुनवाँ चरण शीश नवाय ॥ जो कछु भाषारहै सखियनने सुनवाँ मातै गई सुनाय २४ सुनिकै बातें सब कन्या की माता रही समय को देखि ॥ यकदिन ऐसा आनपहूँचा राजा रहा कन्यका पेखि २५ रानी बोली तब राजाते हमरे बचन करो परमान ॥ ब्याहन लायक यह कन्या भै सोतुमजानो नृपतिसुजान २६ सुनिकै बातें ये रानी की बिजिया बेटा लीन बुलाय ॥ नाई बारी को बुलवायो तिनते कह्योहालसमुझाय २७ जयो मोहोबे ना टीका लै सब कहुँ जाउ तुरतही धाये ॥ नाई बारी तुरतै चलिभे पहुँचे नगर नगर में जाय २८ काहू टीका को लीन्ह्यो ना. नैनागढ़ै पहुँचे आय ॥ खबरि सुनाई सब राजा को नेगिनचरणशीशनवाय २६ जालिम राजा नैनागढ़ का राजन यही विचारा जीय ॥ मारे डरके छाती धड़कै कैसेहोयँ तहांपर पीय ३० थोरी थोरी फौजें लैके नैनागढ़ै पहुँचे आय । नजरी दीन्ह्यो नेपाली को राजाचरण शीशनवाय ३१ सरवरि तुम्हरी का नाहीं हैं टीका लेयँ कहौ कस भाय । कुमक तुम्हारी को आयन है राजन सत्यदीन बतलाय ३२ त्यही समैया त्यहि औसरमाँ औ सुनवाँ को सुनो हवाल ॥ हीरामणि सुवनाको लैके सुनवाँ भई रोवासिनिबाल ३३ चूम्यो चाट्यो त्यहि सुवनाको औफिरिकह्योबचन यहगाय ॥ मेवा खायो भल पिंजरन में अब गाढ़े में होउ सहाय ३४ लैके पाती जाउ मोहोबे देवो उदयसिंह को जाय ॥

आल्हाका बिबाह । १२१ ५ लिखी हकीकत सब आल्हाको सुनवाँ बारबार समुझाय ३५ नामी ठाकुर तुम मोहबे में हमरो ब्याह करो अब आय ॥ नहिं मरिजयो जहर खायकै दूनों भाइ बनाफरराय ३६ लिखिकै पाती गल सुवनाके सुनवाँ तुरत दीन लटकाय ॥ मूठी दीन्ह्यो फिरि कोठे ते सुवना चला मोहोबे जाय ३७ चन्दन बगिया सुवना पहुँँच्यो तहँ पर रहें उदयसिंहराय ॥ चन्दन ऊपर सुवना बैठो परिगा दृष्टि तुरतही आय ३८ भल चुचकारयो उदयसिंहने आपन नाम दीन बतलाय ॥ सुवना बैठ्यो तब हाथेपर पाती छोरि लीन हर्षाय ३६ बाँचिकै पाती तब ऊदन ने औ सय्यद को दीन सुनाय ॥ सय्यद आल्हासों बतलायो मलखे देबै दीन बताय ४० लैके पाती औ सुवना को गे परिमाल कचहरी धाय ॥ कही हकीकति सब राजा सों पाती दीन उदयसिंहराय ४१ पढ़िकै पाती को परिमालिक मनमाँ गये सनाकाखाय ॥ होश उड़ान्यौ परिमालिक का मुहँकाबिरगयो कुम्हिलाय ४२ बोलि न आवा परिमालिक सों औ द्वाढ़ालों लार सुखाय ॥ थर थर थर थर देही काँपी शिरसों मुकुट गिरा भहराय ४३ रोम रोम सब ठाढ़े व्हैगे नैनन बही आँसु की धार ॥ धीरजधरिकै परिमालिक फिरि औ मलखे तन रहे निहारि ४४ मलखे बोले तब राजा ते साँचे बचन सुनो नरपाल ॥ टीका पठयो है बेटी ने सोनहिंलौटिसकैक्यहुकाल ४५ सुनिकै बातें मलखाने की बोले तुरत रजापरिमाल ॥ ब्याधि नशायो गढ़माड़ो की दूसरि ब्याधिभयोफिरिहाल ४६ टीका फेरो नयनागढ़ को मलखे मानो कही हमार ॥

६ | आल्हखण्ड | १२५


जालिम राजा नयपाली है ज्यहिघर अमरढोल सरदार ३७ कौन बियाहन त्यहि घर जैहै ऐहै लौटि कौन बलवान ॥ टीका फेरो सब राजन ने मानो कही वीर मलखान ४८ सवैया ॥ शान चढ़ी मलखान के ऊपर आन नहीं कछूहू नृप राखी। मोहिं पियार न प्राण भुवार कहौं मैं सत्य सदाशिव साखी ॥ कीरतिही प्रिय बीरनको हम शान कि आन सदा मनमाखी। आनरहै नहिं शान कि जो मरि जान भलो ललिते हम भाखी ४६ इतना कहिकै मलखाने ने डंका तुरत दीन बजवाय ॥ लिखिकै उत्तर उदयसिंहने सुवना गरे दीन लटकाय ५० उड़िकै सुवना फिरि मोहबे ते सुनवाँ पास पहुंचा आय ॥ रानी मल्हना के महलन में राजा तुरत पहुंचे जाय ५१ हाल बतायो सब मल्हना को सुनतै गई सनाकाखाय ॥ मलखे देवा को बुलवायो सुनतै गये महल में आय ५२ मल्हना बोली तब मलखे ते बेटा हाल देउ बतलाय ॥ काहे डंका तुम्हरे बाजे कहँ चढ़िजाउ बनाफरराय ५३ हाथ जोरिकै मलखे बोले मल्हना चरणन शीश नवाय ॥ पाती आई नैनागढ़ की आल्हा तहाँ बियाहन जायें ५४ सुनिकै बातें मलखाने की मल्हनै देवै कहा सुनाय ॥ शकुन तुम्हारे सों मलखाने माड़ो लीन बाप का दायँ ५५ कैसी गुजरी नैनागढ़ में सो सब हाल देव बतलाय ॥ सुनिकै बातें ये मल्हना बुझि देवा पोथी लीन मँगवाय ५६ लैके पोथी ज्योतिष वानी औ सब हाल दीन बतलाय ॥ जीति तुम्हारी द्वैहै सांची बात कहैं हम माय ५७

आल्हाका विवाह । १२३ ७ इतना कहिकै दूनों चलि भे महलन भये मंगलाचार ॥ बांदी आंगन लीपन लागी पंडित साइति रहे बिचार ५८ एक कुमारी तेल चढ़ावै गावनलगीं सखी त्यहिकाल ॥ माय मंतरा भे पाछे सों नेगिननेग दीन परिमाल ५६ लैकै महाउर नाइनि आई नहखुर होनलाग त्यहिबार ॥ नाइनि मांग्यो तहँ पुरवाको दीन्ह्यो मल्हना परम उदार ६० उबटन करिकै तन केसरसों निर्मलजलसों फिरिअन्हवाय ॥ कंकण बांधागा आल्हा के दूलह बने बनाफरराय ६१ सजी पालकी तहँ ठाढ़ीथी तापर बैठि शम्भु को ध्याय ॥ कुँवा वियाहन आल्हा पहुंचे मल्हना पैर दीन लटकाय ६२ पहिली भाँवरि के फिरतैखन आल्हा गहा चरणको धाय ॥ बाग लगावों तेरे नाम की माता लेवो चरण उठाय ६३ ऐसो कहिकै सातों भाँवरि घूमा तुरत बनाफरराय ॥ मल्हनाबोली फिरि आल्हा सों सेयों तुमको दूध पियाय ६४ तासों द्यावलि सों अधिकी मैं तासों पैर दीन लटकाय ॥ पंजा फेर्यो फिरि पीढ़ी माँ तुम्हरो बार न बाँको जाय ६५ पाँय लागिकै फिरि द्यावलिके पलकी चढ़े बनाफरराय ॥ हुकुम लगायो बघऊदन ने डंका वजनलाग घहराय ६६ घोड़ करिलिया आल्हा वाला कोतल चला पालकी साथ ॥ मलखे पपिहापर बैठत भे नायकै रामचन्द्र को माथ ६७ घोड़ा मनोहरा की पीठी माँ देवा तुरत भयो असवार ॥ सय्यद सिरगा पर बैठत भे नाहर बनरस के सरदार ६८ अली अल्लामत औ दरियाखां बेटा जानबेग सुल्तान ॥ तेग बहादुर अलीबहादुर बैठे घोड़ आपने ज्वान ६६

८ आल्हखण्ड । १२४ मीराताल्हन के लरिका ये नाहर समरधनी तलवार ॥ मन्नागूजर मोहबे वालो सोऊ वेगि भयो असवार ७० सातलाख लग फौजैं सजिकै नैनागढ़ को भई तयार ॥ डंका बाजैं अहलंका के ऊदन बेंबुलपर असवार ७१ सजे बराती सब मोहबे के जल्दी कूच दीन करवाय ॥ सातरोज की मैजलि करिकै फौजैं अठीं धुरा पर आय ७२ आठ कोस नैनागढ़ रहिगा तहँपर डेरादीन डराय ॥ तम्बू गड़िगा तहँ आल्हा का बैठे सबै शूरमा आय ७३ ऊंचे ऊंचे तम्बू गड़िगे नीचे लागीं खूब बजार ॥ कम्भर छोरे राजपूतन ने हाथिन हौदा धरे उतार ७४ तंग बछेड़न की छोरी गईं क्षत्रिन धरा ढाल तलवार ॥ बनी रसोई राजपूतन की सबहिनजेंयलीन ज्यँवनार ७५ गा हरकारा तब तहँनाते जहँना भरीलाग दरबार ॥ बैठक बैठे सब क्षत्री हैं एकते एक शूर सरदार ७६ गम् गम् गम् गम् तबला गमकैं किन् किन् परी मँजीरन मार ॥ को गतिबरणै सारंगी कै होवै नाच पेतुरियन क्यार ७७ खये अफीमनके गोला कोउ पलकैं मूंदैं औ रहिजायँ ॥ कोऊ जमाये हैं भांगनको मनमाँ रहे रामयश गाय ७८ उड़ै तमाखू बुटवल वाली धुँवना रहा तहांपर छाय ॥ हाथ जोरि औ बिनती करिकै धावन बोल्यो शीशनवाय ७९ अईं बरातें क्यहु राजाकी धूरे परीं आजही आय ॥ आठकोस केहैं दूरीपर सांची खबरि दीन बतलाय ८० सुनिकै बातें नयपाली ने तीनों लड़का लये बुलाय ॥ जोगा भोगा औ बिजियाते राजा बोल्यो बचन सुनाय ८१

आल्हाका विवाह । १२५ ६ जावो जल्दी तुम धूरेपर हमको खबरि सुनावो आय ॥ सुनिकै बातें तीनों चलिभे धूरे तुरत पहुंचे जाय ८२ ऊंचे टिकुरी तीनों चढ़िकै दूरिते लखैं तमाशा भाय ॥ देखिकै फौजें मलखाने की तीनों गये तहाँ सन्नाय ८३ तीनों लौटे त्यहि टिकुरीते अपने महल पहुंचे आय ॥ भोजन केरी फिरि बिरियामाँ राजै खबरि दीन बतलाय ८४ लगी कचहरी हाँ आल्हाकी भारी लाग तहाँ दरबार ॥ बैठक बैठे सब क्षत्री हैं एकते एक शूर सरदार ८५ मीराताल्हन बनरसवाले आली खानदान के ज्वान ॥ बड़े पियारे ते क्षत्रिनके अपने धर्म कर्म अनुमान ८६ सच्चे साथी रहें चारों के यारों मानों कही हमार ॥ ऐसे होते जो सय्यद ना कैसे बने रहत सरदार ८७ अली अलामत औ दरियाखाँ बेटा जानबेग सुल्तान ॥ औरो लड़का रहें सय्यदके एकते एक रूप गुणखान ८८ मन्नागूजर मोहबे वाला बैठा बड़ा सजीला ज्वान ॥ रुपनाबारी ते त्यहि समया बोले तहाँ बीर मलखान ८९ ऐपनावारी बारी लै कै राजैद्वार पहुंचो जाय ॥ सुनिकै बातें मलखाने की रुपना बोला शीशनवाय ६० औरो नेगी मोहबे वाले आये साथ बनाफरराय ॥ ऐपनावारी बारी लै कै द्वारे मूड़ कटावै जाय ६१ सुनिकै बातें ये रुपना की बोले तुरत उदयसिंहराय ॥ तुमको नेगी हम मानैं ना जानें सदा आपनो भाय ६२ दादा बियाहन को रहि हैं ना बतियाँ कहिबे को रहिजायँ ॥ यश नहिंजावै नर मरिजावै परहित देवै मूड़क़टाय ६३

१० आल्हखण्ड । १२६ स्वारथ देही तब नरकेही नेही मरे न पावै चाम ॥ सन्मुख जूझै समरभूमि में जावै तुरत हरी के धाम ९४ बड़े प्रतापी जग में जाहिर मनियाँदेव मोहोबे केर ॥ तिनके सेवक तेई रक्षक रूपन काह लगावो देर ९५ रूपन बोला तब मलखे ते दादा मानो कही हमार ॥ घोड़ करिलिया आल्हा वाला अपने हाथ देउ तलवार ९६ सुनिकै बातें ये रुपना की मलखे घोड़ दीन सजवाय ॥ ढाल खड्ग रुपना को दैके बैठे तुरत बनाफरराय ९७ बैठिकै रुपना फिरि घोड़े पर ऐपनावारी लीन उठाय ॥ चारिघरी को अरसा गुजरो नैनागढ़ै पहुँचो जाय ९८ देखिकै बारी दरवानी ने भारी हाँक दीन ललकार ॥ कहां ते आयो औ कहँ जैहौ बोलो घोड़े के असवार ६६ सुनिकै बातें द्वारपाल की रूपन बोला बचन उदार ॥ आल्हा ब्याहन को हम आये नामी मोहबे के सरदार १०० खबरि सुनावो नैपाली को फिरि तुम हमैं सुनावो आय ॥ ऐपनावारी बारी लायो ताको नेग देव पठवाय १०१ सुनिकै बोलो द्वारपाल फिरि तुम्हरो नेग काह है भाय ॥ सोऊ सुनावों महराजा को लादे लिहे घोड़ पर जाय १०२ सुनिकै बातें द्वारपाल की रूपन बोला बचन उदार ॥ चारिघरीभर चलै सिरोही द्वारे बहै रक्त की धार १०३ नेग हमारो यहु प्यारो है देवो पठै स्वईं सरदार ॥ जाहि पियारो तन होवै ना आवै स्वईं शूर अब द्वार १०४ सुनिकै बातें ये बारी की आरी द्वारपाल हैजाय ॥ मनमें सोचै मनै विचारै मनमें बार बार पछिताय १०५

आल्हाका विवाह । १२७ ११ कैसो बारी यहु आयो है नाहर घोड़ेका असवार ॥ जालिम राजा नैपाली है तासों कीन चहै तलवार १०६ यहै सोचिकै द्वारपालने औ रूपन ते कहा सुनाय ॥ गरमी तुम्हरी जो उतरी हो बोलो ठीक ठीक तुम भाय १०७ सुनिकै बातें दरवानी की रूपन गरु दीन ललकार ॥ नगर महोबा जगमें जाहिर नामी मोहबे के सरदार १०८ तिनको नेगी मैं द्वारेपर लीन्हे खड़ा ढाल तलवार ॥ जौन शूरमा हो नैनागढ़ आवै देय नेग सो द्वार १०९ इतनी सुनिकै दरवानी ने राजै खबरि सुनाई जाय ॥ ऐपनवारी बारी लावा भारी बात कहै सो गाय ११० चारिघरीभर चलै सिरोही द्वारे बहै रक्तकी धार ॥ जौन शूरमाहो राजाघर आवै देय नेग सो द्वार १११ इतना सुनतै महाराजाके नैना अग्नि बरण द्वैजायँ ॥ पूरण राजा पटनावाला बोला राजै बचन सुनाय ११२ हम चलिजावैं अब द्वारेपर बारी नेग देयँ चुकवाय ॥ इतना कहिकै चलि ठाढ़ो भो साथै औरो चले रिसाय ११३ सवैया ॥ द्वार चले तलवार लिये रट मारहि मार कुमारन पेखा । लाल गुपाल गहे करबाल खेलैं जसफाग भयउ तस भेखा ॥ मार अपार जुझार किये औ गिरे रणखेत रहे नहिं शेखा । बारीकरै कब रारी नृपै ललिते मलखान कि है यह लेखा ११४ पूरन राजा पटना वाला लीन्हे नांगि हाथ तलवार ॥ सो धरि धमका त्यहि रूपनके रूपन लीन ढालपर वार ११५

९२ आल्हाखण्ड । १२८ सांगि उठाई फिरि रूपन ने राजै बार बार ललकार ॥ लटुवा लाग्यो पूरन शिर में औ बहिचली रक्तकी धार ११६ अगल बगल के फिरि मारतभा दाँयें बाँयें दीन हटाय ॥ ऐंड़ा मसके फिरि घोड़ा के फाटक तुरत पार है जाय ११७ गली गली में फिरि मारत भो औ वहिचली रक्तकी धार ॥ घरी चारके फिरि अरसा में लश्कर आयगयो असवार ११८ लाले रंग सों भीजे दीख्यो फागुन टेसू के अनुहार ॥ पूँछी हकीकति तब मलखेने नाहर मोहबे के सरदार ११९ कैसी गुजरी नैनागढ़ में रूपन हाल देउ बतलाय ॥ सुनिकै बातें मलखाने की रूपन यथातथ्य गा गाय १२० हल्ला हैगा नैनागढ़माँ जहँतहँ कहन लागि सब कोय ॥ ऐस बहादुर जहँके परजा तहँकेनृपतिकहौ कसहोयँ १२१ देखि तमाशा यहु बारी का राजा बार बार पछिताय ॥ बड़ी हीनता हमरी हैगै बारी जियत निकरिगा हाय १२२ जोगा भोगा दोऊ लरिका बोले हाथ जोरि शिरनाय ॥ हुकुम जो पावैं महराजा का सबकी कटा देयँ करवाय १२३ जितनी रौढ़ें चढ़ि आई हैं सो विनघाव एक ना जायँ ॥ खेदिकै मारैं हम मोहबे लग टेंटुवा टायर लैँ छिनाय १२४ सुनिकै बातें ये लरिकन की राजै हुकुम दीन फरमाय ॥ तुरत नगड़ची को बुलवायो तासों बोल्यो हुकुम सुनाय १२५ बजै नगाड़ा नैनागढ़ में सबियाँ फौज होय तय्यार ॥ भोर सुरेरे पहफाटत खन मारों मुहवेके सरदार १२६ इतना कहिकै दूनों चलिभे अपने महल पहुँचे जाय ॥ रैन खटिगा दिननायक सों झण्डागड़ानिशाको आय १२७

आल्हाका विवाह । १२६ ९३ तारागण सब चमकन लागे सन्तन धुनी दीन परचाय ॥ परे आलसी निजनिज खटिया घों घों कंठ रहे घराँय १२८ माथ नवावों पितु अपने को जो नित मेरी करैं सहाय ॥ करों तरंग यहाँ सों पूरण पूरण ब्रह्म रामको ध्याय १२६ आगे फौजें दूनों सजिहैं मचि हैं घोर शोर घमसान ॥ जोगा भोगा के मुर्चापर लड़ि हैं खूब बीरमलखान १३० इति श्रीलखनऊनिवासि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मज बाबू प्रयागना- रायणजीकी आज्ञानुसारउन्नावप्रदेशान्तर्गतपँडरीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भवबुध कृपाशंकरसूनुपं० ललिताप्रसादकृतबरातआगमनवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥ कवित्त ॥ अंजली दिहेते रोग देहसों हटाय देत ध्यान के धरेते दुख दारिद दिखातना । ज्ञानसों विचारे मान राजैसों कराय देत नामके उचारे मुक्ति पदवी बिलातना ॥ धारे उर व्रत काम क्रोधहू नशाय देत दीनहैं पुकार करे खीन कुम्हिलातना । बोरिदेत विघ्नन मिरोरि देत शत्रुमुख ललित करजोरे पाप रंचहू लखातना १ सुमिरन ॥ मारतण्ड मैं तुमको सुमिरों धरिकै चरणकमल में माथ ॥ सूर्य्य भास्कर सविता रवि औ औरो नाम बहुत दिननाथ १ कथा पुराणन में पढ़िकै मैं जानों काश्यपेय महराज ॥ जो कोउ आयो तव शरणागत गई न तासु कबों जगलाज २ तुम्हरे कुलमाँ रघुनन्दन भे बन्दनकरैं ललित तिनक्यार ॥ अक्षत चन्दन औ फूलन सों मानस पूजन सदा हमार ३ तुम्ही सहाई हौ दीनन के गाई सबै पुराणन गाथ ॥ स्वई भरोसा धरि जियरेमाँ जावाचहौं नांघि भवपाथ ४ छूटि सुमिरनी गै देवन कै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥ जोगा भोगा दोऊ लड़िहैं लड़िहैं उदयसिंह सरदार ५

१४ आल्हखण्ड । १३० अथ कथाप्रसंग ॥ उदय दिवाकर भे पूरबमाँ किरणन कीन जगत उजियार ॥ डंका बाज्यो नैनागढ़माँ सबियाँ फौज भई तय्यार १ बसैं बघेले औ चन्देले पाँवर सूरबंश सरदार ॥ माड़वाड़ के क्षत्री साजे औ परिहार गुटैयाचार २ हाड़ा वाले बूंदी वाले औ राठौर लीन सजाय ॥ तुरत निकुम्भन को सजवायो औ गौरन को लीन बुलाय ३ सजि गुहलौता औ कछवाये बहुतक चन्द्रबंश के ज्वान ॥ तोमर ठाकुर तुमरवार के सजिगे मैनपुरी चवहान ४ सजे भदावर वाले क्षत्री सजिगे गहिलवार सरदार ॥ बैस डौंडियाखेरे वाले जिनके बांट परी तलवार ५ हबशी साजे औ दुर्रानी जे मनइन के करें अहार ॥ कुरी छतीसों सब सजवाई ठाकुर सबै भये तय्यार ६ पूरन राजा पटनावाला सोऊ लीन ढाल तलवार ॥ जोगा भोगा दोनों ठाकुर अपने घोड़न भे असवार ७ रणकी मौहरि बाजन लागी रणकौ होनलाग व्यवहार ॥ दाढ़ी करखा बोलन लागे विप्रन कीन वेद उच्चार ८ मारु मारुकै मौहरि बाजी बाजी हाव हाव करनाल को गति वरणै तहँ क्षत्रिनकै एक ते एक दई के लाल ६ हतु हुंकारनि तोपैं सजि गईँ जिनसों होय घोर घमसान ॥ मारू डंका बाजन लागे घूमन लागे लाल निशान १० खर खर खर खरकै रथ दौरे ख्बा चले पवन की चाल ॥ खट पट खट पट तेगा बोलैं मर मर होयँ गैंड़की ढाल ११ धक धक धक धक करै महावत हाथी धकापेल चलिजायें ॥

[Header] आल्हाका विवाह । १३१ १५

कोउ कोउ घोड़ा मोर चालपर कोउ कोउ सरपट रहे भगाय १२ कोउ कोउ घोड़ा हंस चालपर कोउ कोउ चले कदमपर जायँ ॥ कोउ कोउ घोड़ा ऐसे जावैं जिनके टाप न परै सुनाय १३ कोउ कोउ घोड़ा कावा देवैं कोउ कोउ गर्जि रहे असवार ॥ कउँधालपकनिबिजुलीचमकनि चमचम चमाचम्म तलवार १४ घन घन घन घन घंटा बाजैं घूमत चलैं मत्त गजराज ॥ बल बल बल बल करैं साँड़िया भागत चलैं समर के काज १५ हिनहिन हिन हिन घोड़ा हींसैं खीसैं कायर देखि परान ॥ छाय अँधरिया गै पृथ्विी में गर्दा छाय गई असमान १६ देवता सकुचे आसमान में जंगल जीव गये थर्राय ॥ घरी चार के फिरि अर्सा में सेना अटी समर में आय १७ धूली दीख्यो आसमान में मलखे बोल्यो बचन सुनाय ॥ सजो बेन्दुला के चढ़वैया फौजै गई ऊपर अब आय १८ सुनिकै बातें मलखाने की ऊदन गरु दीन ललकार ॥ सजो सिपाही मोहबे वाले सबियाँ फौज होय तैयार १६ झीलम बख्तर पहिरिसिपाहिन हाथ म लीन ढाल तलवार ॥ सिरगा घोड़े की पीठिमाँ सय्यद तुरत भये असवार २० चढ़ो कबूतरी में मलखाने अपनी लिये ढाल तलवार ॥ घोड़ मनोहर की पीठी माँ देवा चढ़त न लागी बार २१ बड़ी बड़ी तोपैं अष्टधातु की सो चरखिन में दीन चढ़ाय ॥ लै लै थैली बारूदन की सो तोपन में दई चलाय २२ बत्ती दइ दइ फिरि तोपन में रंजक तुरत दीन धरवाय ॥ बम्बके गोला छूटन लागे परलय जनो गई नगच्याय २३ गोली ओला सम वर्षत भई भनभन भन्नभन्न भन्नाय ॥

१६ आल्हखण्ड । १३२ सर सर सर सर कै शर छूटैं मन मन मन्त्र मन्त्र मन्त्राय २४ खट खट खट खट तेगा बोलैं हट हट करैं लड़ैता ज्वान ॥ बड़ी लड़ाई भै नैनागढ़ जोगा भोगा के मैदान २५ सूंदि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतनकेर ॥ हौदा हौदा यकमिल हैगे मारैं एक एकको हेर २६ सात लाख दल मलखे लीन्हे भोगा पांच लाख परमान ॥ मीराताल्हन औ जोगाका परिगा समर बरोबरि आन २७ भोगा बोला तब ऊदनते ओ परदेशी बात बनाय ॥ कहाँते आयो औ का करिहौ आपन हाल देव बतलाय २८ ऊदन बोले तब भोगाते तुमते सत्य देयँ बतलाय ॥ देश हमारो नगर मोहोबा जहाँपर बसै चंदेलाराय २६ छोटे भैया हम आल्हाके औ ऊदनहै नाम हमार ॥ सुनवाँ व्याहन आल्हा आये मानौ सत्य वचन सरदार ३० बाँधिकै मुशकें त्वरे बप्पाकी भँवरी फिरी बड़कवा भाय ॥ नीके ब्याहौ घर फिरिजावो अपने बाप देउ समुझाय ३१ सुनिकै बानै ये ऊदन की भोगा कालरूप हैजाय ॥ धोखे माड़ो के भूल्यो ना जहँ लै लियो बापका दायँ ३२ जाति बनाफर की ओछी है औ सब क्षत्रिन केर उतार ॥ कठिन बिसाने जग में जाहिर मोहबे लौटि जाउ सरदार ३३ बातै सुनिकै ये भोगा की बोला बिहँसि लहुरवा भाय ॥ नदिया भागै तौ गंगाजायँ गंगा भागि समुन्दर जायँ ३४ महादेव अर्घाते भागैं धरती लौटि रसातल जाय ॥ ऊदन भागैं समरभूमिते तौ फिरिभागिकहाँकोजायँ ३५ इतना कहिकै बघऊदनने सुमिरि हृदय शारदा माय ॥

[Header] आल्हाका बिवाह । १३३ १७

देवी शारदा महहरवाली मानों गई भुजापर आय ३६ बाहू फरके बघऊदन के फौजन घुसा बनाफरराय ॥ जैसे भेड़िन भेड़हा पैठै जैसे अहिर बिडारै गाय ३७ तैसे क्षत्री ऊदन देखैं भागैं तुरतै पीठि दिखाय ॥ बड़ी लड़ाई मलखे कीन्हों अद्भुतसमर कहा ना जाय ३८ घोड़ मनोहर की पीठीपर देबा गरु करै ललकार ॥ हनि हनि मारै रजपूतन को बहुतक जूझिगये सरदार ३९ अली अलामत औ दरियाखाँ बेटा जानबेग सुल्तान ॥ ये सब लड़का सय्यदवाले तहँपर करैं घोर घमसान ४० मन्ना गूजर मोहबेवाला दोऊ हाथ करै तलवार ॥ जोगा भोगा पूरन राजा येऊ करैं तहां पर मार ४१ जूझे सिपाही नैनागढ़ के लगभग एक लाखके ज्वान ॥ पांच सहस मोहबे के जूझे करिकै समर भूमि मैदान ४२ जोगा बोला तब भोगा ते मानो कही हमारी बात ॥ खबरि सुनावो महाराजाको जैसी देखि परै कुशलात ४३ सुनिकै बातें भोगा चलिभा नैनागढ़ै पहूंचा जाय ॥ हाथ जोरिकै महाराजा के भोगा यथातथ्य गा गाय ४४ सुनिकै बातें महाराजा ने लायो अमरढोल को जाय ॥ सो दै दीन्ह्यो कर भोगा के भोगाचलिभाशीशनवाय ४५ आयकै पहुंच्यो समर भूमि में भोगा दीन्ह्यो ढोल बजाय ॥ मुर्दा उठिकै जिन्दा हैंगे घैहा उठे तुरत हरषाय ४६ उठे सिपाही नैनागढ़ के मारैं खैंचि खैंचि तलवार ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ४७ ढारे मुर्दा हैं लोहुन में मानों कच्छ मच्छ उतरायँ ॥

१८८ आल्हखण्ड । १३४ पगड़ी गिरि गईँ त्यहि लोहू में फूले कमल सरिस दर्शायँ ४८ परीं बंदूकें कहुँ लोहू में काली नागिनिसी मन्नायँ ॥ पांच कोसलों चली सिरोही लोथिन उपरलोथि दिखरायँ ४६ बड़ी लड़ाई मै नैनागढ़ मारा मारा परै सुनाय ॥ कोऊ हारा नहिं काहू सों दोउरण परा बरोबरि आय ५० जोगा ठाकुर नैनागढ़ का सय्यद बनरस का सरदार ॥ भोगा देवाके मुर्चा माँ दोउ दिशिहोय बरोबरि मार ५१ 'मन्नागूजर पूरन राजा दोऊ करें खूब तलवार ॥ बड़े लड़ैया रणमाँ राहिगे कायर छांड़ि भागि हथियार ५२ अमरढोल कहुँ रणमाँ बाजै गिरि उठि लड़ैं लड़ैताज्वान ॥ देखि तमाशा ऊदन बोले दादा सुनो बीर मलखान ५३ मरिमरि जीवैं नैनागढ़ के मैना दीख कबों असभाय ॥ कावा दै कै ऊदन चलिभे नैनागढ़ै पहुंचे आय ५४ संध्या द्वैगै ह्वाँ लश्कर में तब फिरि मारु बंद द्वैजाय ॥ ऊदन पहुंचे ह्वाँ मालिन घर तुरतै मोहर दीन थँभाय ५५ खबरि सुनावो म्वारि भौजीका आयो मिलन उदयसिंहराय ॥ सुनिकै वातैं मालिनि चलिभै सुनवैं खबरि सुनाई जाय ५६ सुनवाँ चलिभै तब महलन ते आई जहाँ लहुरवा भाय ॥ पाग बैंजनी शिरपर बाँधे ऊदन कह्यो बचन मुसुकाय ५७ याही कारण चिठिया पठई जल्दी अवो लहुरवा भाय ॥ जियत मोहोबे कोउ जाई ना डरिहौ बंश नाश करवाय ५८ मरे सिपाही क्यों जीवत हैं भौजी हाल देउ बतलाय ॥ सुनिकै वातें सुनवाँ बोली तुम सुनिलेउ लहुरवा भाय ५६ बरा बर्षलों मेरे वापने कीन्ह्यो कठिन तपस्या जाय ॥