स्वदेशी उत्पाद विधि (भाग 3)
Swadeshi Utpad Vidhi (Bhag 3)
रोबिन बसराना / राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Swadeshi Utpad Series Part 3 (Best Out of Waste) · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
अपने डेरी फार्म में भी कर सकते हैं. अगर आप भी कम पैसें में परमानेंट बिजली का स्रोत ढूँढ़ रहे हैं तो बायोगैस आपके लिए एक अच्छा उदाहरण है.
ये हैं गोबर गैस (Gobar Gas) के प्रमुख फ़ायदे
- • खाना पकाने के लिए: अक्सर हम लोग अपने घरों में खाना बनाने के लिए LPG गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करते हैं. मगर लगातार बढ़ रही महंगाई के कारण इस गैस की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है. मगर अगर आप इसकी जगह गोबर गैस (Gobar Gas) का उपयोग करें तो ये आपके पैसें की बचत में आपका साथ देगी. इसके इलावा आपको हम बता दें कि यदि आप बायोगैस (Gobar gas) का इस्तेमाल खाना पकाने के लिए करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको एक बर्नर अलग से खरीदना होगा.
- • घर की बिजली के लिए: बायोगैस का इस्तेमाल हम घर में साधारण बिजली की तरह कर सकते हैं इसके इलावा ये गैस mantle lamps में भी आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है.
- • वाहनों के लिए है उपयोगी: बायोगैस की सहायता से हम आसानी से ट्रक और डीजल कार जैसे वाहन चला सकते हैं. इसके इलावा ये गैस (Gobar gas) रिक्शा चलाने के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो सकती है.
गोबर से बिजली बनाने की विधि
गोबर से बिजली बनाने की विधि बेहद आसान है. इस गैस को आप चाहे तो मार्किट से खरीद सकते हैं और घर पर भी तैयार कर सकते हैं. गोबर गैस (Gobar Gas) से बिजली पैदा करने के उपकरण को बायोगैस प्लांट (Biogas Plant) कहा जाता है. तो चलिए जानते हैं आखिर बायोगैस प्लांट कैसे काम करता है और इसको बनाने के लिए हमें किन चीजों की जरूरत पड़ेगी.
बायोगैस प्लांट(Biogas Plant)का साइज
| Plant Size | Daily Feedstock | Daily Water |
|---|---|---|
| 4 m3 | 24 kg | 24 ltr |
| 6 m3 | 36 kg | 36 ltr |
| 8 m3 | 48 kg | 48 ltr |
| 10 m3 | 60 kg | 60 ltr |
| 15 m3 | 90 kg | 90 ltr |
| 20 m3 | 120 kg | 120 ltr |
अगर आप बायोगैस उचित मात्रा में प्राप्त करना चाहते हैं तो इसके लिए इसका आकार सही निर्माण विधि से बनाया जाना आवश्यक है. अधिकतर बायोगैस प्लांट 4 से लेकर 20 क्यूबिक मीटर की कैपेसिटी के होते हैं. हर प्लांट की कैपेसिटी के आधार पर ही उसकी उत्पादन क्षमता तय की जा सकती है. इसके इलावा इसका एक खास साइज होता है जिस को अंग्रेजी भाषा में फीड स्टॉक कैपेसिटी कहा जाता है.
बायोगैस प्लांट बनाने की कुल लागत
अगर आप बायोगैस प्लांट घर पर बनाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कम से कम 35 दिन लगेंगे। आप अपनी जरूरत के हिसाब से इसका साइज तय कर सकते हैं। छोटे साइज वाले बायोगैस प्लांट छोटे परिवार के लिए खाना बनाने और घर को रोशन करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं जबकि बड़े आकार के बायोगैस प्लांट बड़े उद्योगों एवं कारखानों में इस्तेमाल किए जाते हैं। आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि 1m3 प्लांट का मूल्य ₹17000 है। यह एक से 5 kg की कैपेसिटी के साथ आता है और यह गैस (Gobar gas) हम 2 घंटे तक इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे-जैसे प्लांट का मूल्य बढ़ता जाता है वैसे वैसे ही इस की कैपेसिटी और इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ती जाती है।
आखिर यह प्लांट कैसे काम करता है?
हर प्लांट के पांच मुख्य सेक्शन होते हैं इन्हीं 5 सेक्शन पर पूरा प्लांट निर्भर करता है।
- • इनलेट टैंक (Inlet Tank)
- • डाइजेस्टर वेसल (Digester Vessel)
- • डोम (Dome)
- • आउटलेट चैंबर (Outlet Chamber)
- • कम्पोस्ट पिट्स (Compost Pits)
गोबर से बिजली बनाने की विधि
सबसे पहले बायोगैस प्लांट में गोमूत्र, गोबर और पानी को इनलेट टैंक में मिलाया जाता है। यह मिश्रित तैयार होने के बाद फीड स्टॉक डाइजेस्टर वेसल में जाता है। इसी डाइजेस्टर में मीथेन गैस द्वारा उत्पन्न गुब्बंद में जमा कर लिया जाता है और फिर इसी गुब्बंद में लगे पाइप के माध्यम से गैस (Gobar gas) की निकासी करके उसको इस्तेमाल करने लायक बनाया जाता है। अब डाइजेस्टर में बचा हुआ घोल मैनहोल से आउटलेट चैंबर में जमा हो जाता है और अधिक बहाव के चलते कम्पोस्ट पिट्स में पहुंच जाता है। जिसको आप निकाल कर खेतों में खाद के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
प्लांट बनाने के लिए उपयोगी सामग्री
| Material | Unit | 4 m3 | 6 m3 | 8 m3 | 10 m3 | 15 m3 | 20 m3 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Bricks | Pieces | 1200 | 1400 | 1700 | 2000 | 2400 | 2800 |
| Sand | Bag | 60 | 70 | 80 | 90 | 110 | 120 |
| Gravel | Bag | 30 | 35 | 40 | 50 | 60 | 70 |
| Cement | Bag | 11 | 13 | 16 | 19 | 27 | 34 |
| Rod | Meter | 50 | 60 | 70 | 70 | 90 | 100 |
किसी भी प्लांट की कालिटी मजबूत करने के लिए उसकी सामग्री अहम भूमिका निभाती है। इसलिए बायोगैस (Gobar gas) के निर्माण के समय आप उसकी सामग्री की कालिटी का खास ध्यान रखें। इसके लिए आप उत्तम कालिटी से बनी ईंटें, सीमेंट, मिट्टी, सरिये आदि का इस्तेमाल करें।
बायोगैस प्लांट के फायदे
- 1. बायोगैस (Gobar gas) एक ऐसी ऊर्जा देता है जो कि किसी प्रकार का कोई प्रदूषण नहीं फैलाती। इसके इलावा यह ऊर्जा का renewable स्रोत है.
- 2. घर में इस्तेमाल की जाने वाली LPG गैस, कोयला और लकड़ी आदि बच्चों और महिलाओं के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती हैं परंतु बायोगैस से किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है.
- 3. बायोगैस (Gobar gas) के इस्तेमाल से हमारा वातावरण स्वस्थ रहता है और हमें लंबा जीवन दान देता है.
रसोई के कचरे से खाद कैसे बनायें?
आज के दिन में रसोई के कचरे से खाद (compost) बनाना भी एक बहुत ही बेहतरीन तरीका है। इससे एक तो कचरा को इधर-उधर फैंक कर गंदगी नहीं फैलता है दूसरा तो इससे आपके पेड़ पौधों के लिए प्राकृतिक खाद मिलता है जो बिलकुल भी शरीर के लिए हानिकर नहीं होता हो।
भारत में प्रतिदिन शहरी क्षेत्रों में एक व्यक्ति 700-800 ग्राम ठोस कचरा फैंक देता है यानि की एक साल में लगभग 250-300 किलो। अगर आपके घर में 5 सदस्य रहते हैं तो सोचिये आपका परिवार एक वर्ष में लगभग 1500 किलो ठोस कचरा फैंक देते हैं। क्या आप जानते हैं आप घरपर ही उस कचरे से प्राकृतिक खाद बना सकते हैं।
खाद बनाना – समिश्रण – कम्पोस्टिंग क्या है? What is Composting?
कम्पोस्टिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आर्गेनिक या कार्बनिक पदार्थ या खाद्य कूड़े को पानी, वायु की मदद से सूक्ष्मजीव खाद के रूप में परिवर्तित कर देते हैं। यह खाद घर में या खेतों में उगाने वाले पौधों के लिए ही अच्छा होता है और क्योंकि इसमें किसी भी प्रकार का रासायनिक पदार्थ नहीं होता है यह हमारे मिटटी के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।
सूक्ष्मजीव कम्पोस्टिंग के लिए 4 चीजों का होना बहुत आवश्यक होता है
- 1. सुखी पत्तियाँ, धूल-मिटटी, कागज़ की मदद से – कार्बोन
- 2. बचे खुचे फल और सब्जियों के कचरा से – नाइट्रोजन
- 3. हमारे वायुमंडल से – ऑक्सीजन
- 4. पानी की सही मात्रा जिससे की ऊपर के तीन चीजों को मिलाकर बना कचरा सड़ सके।
8 आसान स्टेप्स जिनकी मदद से आप अपने रसोई के कचरे से कम्पोस्ट बना सकते हैं Best 8 Steps to Make Compost at Home from Kitchen Waste
- 1. अपने रसोई घर के गीले कचरे जैसे बची खुची सब्जियाँ, खाना का बचा हुआ कचरे को अलग कूड़ेदान में रखें।
गीली हरी चीजें – इनमें नाइट्रोजन की भरी मात्रा होती है
- • बचा खुचा खाना
- • सब्जियों और फलों का बचा हुआ कचरा
- • चाये बचा हुआ
- • फूल
- • छोटे घांस के टुकड़े
- • अंडे का छिलका
- 2. सूखे पत्ते, और ठोस छोटे-मोटे कचरे को एक छोटे से एनी कूड़ेदान में रखें।
सुखी भूरी चीजें – इनमें कार्बन की अधिक मात्र होती है
- • सुखी पत्तियाँ
- • लकड़ी का पाउडर
- • हल्का धूल मिटटी
- • भूसा या धन का छिलका
3. एक बड़ा सा मिटटी का मटका या एक बाल्टी(Compost Bin) ले लीजिये। आप चाहें तो घर के पीछे एक छोटा गड्ढा भी खोद सकते हैं जिसे Compost Pit कहा जाता है। उसके बाद कम्पोस्ट बिन के चरों भाग में 4-5 छेद कर दें जिससे की उसमें रखने वाले कूड़े में हवा लग सके।
5. उस पात्र(Compost Bin) के नीचले भाग में थोड़ा सा मिटटी बिछा दें। उसके बाद गीले कचरे और सूखे कचरे को एक के ऊपर एक थोड़े-थोड़े परतों में उस पात्र में डालते जाऐं।
6. जब वह पात्र दोनों प्रकार सूखे और गीले कचरे के परतों से भर जाये तो उसे एक प्लास्टिक या लकड़ी के फट्टे से ढक दें। ढकने से पात्र के अंदर नमी या गीलापन बना रहता है।
7. कुछ-कुछ दिनों में देखते रहें। अगर पात्र के अन्दर मिश्रण ज्यादा सुखा हुआ है हांथों से हल्का-हल्का पानी का छिड़काव करें और दोबारा प्लास्टिक को ढक दें।
8. 2-3 महीने के बाद सुखा खाद बन्ना अपने आप शुरू हो जायेगा। जो दिखने में गाढ़ा भूरा और काला सा होता है और मिटटी की खुशबु उसमें होती है।
कम्पोस्ट बनाने के लिए कूड़ेदान में क्या ना डालें? What not to Add in Compost Mixture?
- 1. बदबूदार एक-दो दिन पुराना खाना का कचरा
- 2. मांस और हड्डियां
- 3. जानवरों का मल
- 4. रसायन पदार्थ
- 5. बैटरी
- 6. बीमार लगे पौधे
- 7. दवाईयां
- 8. प्लास्टिक बैग या पॉलिथीन
गुलाब जामुन बनाने की विधि
सामग्री:
1/2 कप मैदा 1 कप कढ़कस किया हुआ खोया (मावा) 1/8 टीस्पून बेकिंग सोडा घी या तेल, तलने के लिए 3-4 हरी इलायची या 1/4 टीस्पून हरी इलायची का पाउडर 8-10 केसर की किस्में 1 1/2 कप चीनी 2 1/2 कप पानी
विधि (Khoya Me Se Gulab Jamun Banane Ki Vidhi Hindi Me): इस स्वादिष्ट मिठाई बनाने के लिए 3 मुख्य चीज बनानी होंगी – खोया, चाशनी और जामुन। निचे दी गई रेसिपी में हर एक को घर पर आसानी से कैसे बनाना है ये बताया गया है।
खोया (मावा) बनाने के लिए
घर पर खोया बनाने के लिए नीचे दिए गए स्टेप का पालन करें या इस लिंक “खोया बनाने की रेसिपी स्टेप बाय स्टेप फोटो के साथ” का पालन करें।
एक नॉन स्टिक पैन या भारी तले वाले पैन में 1 लीटर दूध (फूल क्रीम भैंस का दूध) को कम आँच पर तब तक उबाले जब तक कि यह गाढ़े मिश्रण में बदल जाये और पानी का भाग न रहे, इसमें लगभग 1 1/2 घंटे का समय लगेगा। जलने से रोकने के लिए इसे अक्सर बीच बीच में चम्मच से चलाते रहे। 1 लीटर फूल फेद दूध में से लगभग 1 कप खोया तैयार होगा।
नॉथ: यदि आप घर पर खोया बनाना नहीं चाहते हैं, तो आप किसी भी भारतीय ग्रीसरी स्टोर/किराने की दुकान (अगर आप भारत के बाहर रहते हैं) से या डेयरी की दुकान से (यदि आप भारत में रहते हैं) खरीद सकते हैं।
कैसर के स्वाद वाली चाशनी (चीनी का सिरप) तैयार करने के लिए
- 1. एक गहरे बर्तन में 1 1/2 कप चीनी, 3-4 हरी इलायची (या 1/4 टीस्पून इलायची का पाउडर) और 8-10 कैसर की किस्में डालें।
- 2. इसमें 2 1/2 कप पानी डालें और तेज आंच पर उबालने रखें। जब यह उबलने लगे तब आंच को मध्यम कर दें और तब तक उबालें जब तक की चाशनी थोड़ी चिपचिपी लगने लगे, बीच में कभी-कभी कलछी से हिलाते रहें। इसमें करीब 10-12 मिनट का समय लगेगा। गैस बंद कर दें और इसे एक तरफ रख दें। जब जामुन तलने के बाद तैयार हो जायें तब 4-5 मिनट के लिए चाशनी को फिर से गरम कर लें।
जामुन बनाने के लिए
- 1. ऊपर दी गई विधि का पालन करके 1 कप खोया बनाइये या रेडीमेड खोया का उपयोग करें। खोया को कट्टकस कर लें। 1/8 टीस्पून बेकिंग सोडा और 1/2 कप मैदा छानकर डालें।
- 2. एक चम्मच से उन्हें अच्छे से मिलाएं।
- 3. आप देख सकते हैं की खोये में नमी की वजह से आटा आसानी से खोया के साथ मिल रहा है।
- 4. उन सभी को एक साथ मिलाकर नरम आटा गूंध लें। अगर जरूरत लगी तो कुछ टीस्पून दूध डाल सकते हैं (दूध थोड़ा थोड़ा ही डालिये, एक समय में एक टीस्पून दूध डालें)।
- 5. आटे को 16 बराबर भागों में बाँट लें। अपनी हथेलियां तेल या घी लगाकर चिकनी कर लें और आटे में से गोले बना लें। ध्यान रहे की गोले में दरारें नहीं होनी चाहिए वरना यह तलने के समय पर खुलने लगेगा। अगर दरारें हैं तो आटे को नरम बनाने की जरूरत है, आटे में थोड़ा दूध मिलाकर उसे नरम बनाइये आर बाद में उसमें से गोले बनाइये। बहुत ज्यादा बड़े गोले मत बनाइये क्योंकि यह चाशनी में डुबोने के बाद फूलकर और भी बड़े हो जायेंगे।
- 6. एक कड़ाही में मध्यम आंच पर घी या तेल (या आधा घी और आधा तेल) गरम करने रखें। जब घी मध्यम गरम हो जायें तब उसमें मिश्रण में से एक छोटा सा भाग तोड़कर घी में डालें और देखें कि अगर वह रंग बदलें बिना ही तुरंत ऊपर आ जाता है तो घी तलने के लिए तैयार है। अगर वह तुरंत ही भूरा हो जाता है तो घी ज्यादा गरम है। मध्यम गरम घी में धीरे से 4-6 गोले (या कड़ाही की साइज के अनुसार) डालें और धीमी-मध्यम आंच पर तलें। आप देख सकते हैं कि 1-मिनट में वे फूलने लगे हैं और हल्के सुनहरे रंग के होने लगे हैं।
- 7. 3-4 मिनट के बाद, गोले हल्के सुनहरे भूरे रंग के होने लगेगा।
- 8. उन्हें सुनहरे भूरे रंग के होने तक तल लें, इसमें लगभग 6-7 मिनट का समय लगेगा। नरम जामुन बनाने के लिए उन्हें एक समान तापमान पे तलना जरूरी है और इसके लिए आवश्यकता अनुसार आप आंच को कम या तेज कर सकते हैं।
- 9. उन्हें एक प्लेट में पेपर नैपकिन के ऊपर निकाल दें और 5 मिनट के लिए ठंडे होने दें। आप देख सकते हैं कि तलने के बाद गोले बड़े हो गए हैं। उन्हें सीधे गर्म चाशनी में मत डालें।
- 10. तले हुए गोलों को हल्की गर्म (ज्यादा गर्म नहीं) चाशनी में डालें। अगर आप उन्हें ज्यादा गर्म चाशनी में डालेंगे तो वे सिकुड़ (आकार में छोटा) जायेंगे।
- 11. परोसने से पहले कम से कम 1-2 घंटे के लिए उन्हें चाशनी में डुबोकर रखें। आप फोटो में देख सकते हैं कि जामुन का आकार लगभग दोगुना हो गया है। गुलाब जामुन परोसने लिए तैयार हैं। उन्हें गर्म या ठंडा परोसें।
सुझाव और विविधता:
- • अगर आप उच्च आंच पर जामुन को तलेंगे तो वे बाहर से तुरंत ही भूरे हो जायेंगे लेकिन अंदर से कच्चे रहेंगे, उन्हें धीमी-मध्यम आंच पर तलें।
- • आटे में से बहुत बड़े जामुन मत बनायें क्योंकि वह तलने और चाशनी में भिगोने के बाद लगभग दोगुने हो जायेंगे।
- • तले हुए जामुन को सीधे गर्म चाशनी में मत डालें और ध्यान रहे कि चाशनी भी ज्यादा गर्म न हो अन्यथा वे सिकुड़ (आकार में छोटा) जायेंगे।
- • चाशनी में गुलाब का स्वाद पाने के लिए आप कैसर के बदले थोड़ा गुलाब जल और गुलाब की पंखुड़िया डाल सकते हैं।
- • आकर्षक बनाने के लिए उसे पिस्ता पाउडर या कट्टकस किये हुए नारियल के साथ सजायें।
स्वाद: मीठा और नरम
परोसने के तरीके:
उन्हें आप वनीला आइसक्रीम के साथ डेज़र्ट के रूप में या खाने के साथ मिठाई के रूप में परोस सकते हैं। इसे दिवाली और दशहरा जैसे भारतीय त्योहारों में भी मिठाई के रूप में परोस सकते हैं।
मूँगफली और गुड़ की चिककी
A close-up photograph of a rectangular piece of Indian sweet, known as chicki, served on a white plate with a decorative floral pattern. The chicki is made from moong dal (split yellow peas) and ghee, resulting in a golden-brown, textured appearance with visible seeds and a slightly glossy surface. The plate is set against a light-colored wooden background.
सामग्री:
1 कप मूंगफली के दाने 3/4 कप गुड़, कसा हुआ या बारीक कटा हुआ 1 टेबलस्पून घी
गुड़ का उपयोग करके चिककी बनाने की विधि (Peanut Chikki Banane Ki Vidhi Hindi Me):
- 1. मूंगफली को एक भारी तले वाली कड़ाही में मध्यम आंच पर 5-6 मिनट के लिए भुनें। जलने से रोकने के लिए और अच्छे से भुनने के लिए लगातार चमचे से हिलाते रहें।
- 2. भुने हुए मूंगफली के दाने को 3-4 मिनट के लिए ठंडा होने दें। जब वे थोड़े गर्म हों तभी उन्हें रगड़ के छिलके हटा दें और हिस्सों में तोड़ें।
- 3. एक बड़ी थाली की पीछे की सतह और बेलन को तेल/घी लगाकर चिकना कर लें। आप चिककी को बेलने के लिए थाली के बदले किचन के काउंटर टॉप पे भी तेल लगा सकते हैं।
- 4. एक भारी तले वाली कड़ाही में मध्यम आंच पर घी गरम करें। उसमें गुड़ डालें और लगातार चमचे से हिलाते रहें।
- 5. जब गुड़ घुल जाये, उसके बाद उसे धीमी आंच पर लगातार चमचे से हिलाते हुए 4-5 मिनट के लिए पकाइये।
- 6. गुड़ पक गया है या नहीं उसकी जांच करने के लिए एक छोटी पानी से भरी कटोरी में गुड़ की छोटी सी बूंद डालें। अगर गुड़ पानी में तुरंत ही पिघलता नहीं है तो वे पक गया है अन्यथा कुछ और समय के लिए इसे पकाइये।
- 7. गैस बंद करें और मूंगफली डालें। जब तक सभी मूंगफली गुड़ से अच्छे से लपेट जाती है तब तक पकाइये।
- 8. पहले से चिकनी की हुई सतह पर मिश्रण डालें।
- 9. जल्दी से बेलन का उपयोग करके मिश्रण को फैला दें और लगभग 1/3-इंच मोटाई रखें।
- 10. तुरंत ही चाकू से लगभग 2 इंच के चौकोर टुकड़ों में काट लें।
- 11. जब ठंडा हो जाये तब उसे टुकड़ों में तोड़ें और कंटेनर में भर दें। मूंगफली और गुड़ की चिककी तैयार है।
चीनी का उपयोग करके चिककी बनाने के लिए नीचे दिए गए स्टेप का पालन करें।
- 1. स्टेप-1 से स्टेप -3 का पालन करें।
- 2. स्टेप-4 में गुड़ के बदले 1 कप चीनी डालें।
- 3. जब चीनी घुलना शुरू हो जाती है और हल्के भूरे रंग की होने लगती है तब गैस बंद कर दें और उसमें भूनी हुई मूंगफली डालें।
- 4. स्टेप-7 से स्टेप-11 का पालन करें।
सुझाव और विविधता:
- • मूंगफली चिककी का रंग गुड़ के रंग पर निर्भर करता है। अगर आप सुनहरे भूरे रंग के गुड़ का उपयोग करेंगे तो यह गहरे भूरे रंग की होगी। यदि आप हल्के भूरे रंग की चिककी बनाना चाहते हैं तो हल्के पीले रंग के गुड़ का उपयोग करें।
- • अगर बहुत ज्यादा समय तक गुड़/चीनी को पकायेंगे तो चिककी सख्त बनेगी।
- • जब मिश्रण गर्म हो तभी चिकनी की हुई थाली पे फैला दें क्योंकि मिश्रण ठंडा होने के बाद आसानी से फैलाना मुश्किल हो जायेगा।
- • आप मूंगफली के बदले तिल या भूनी हुई चना दाल (दालिया दाल) या सूखे मेवे का उपयोग करके भी चिककी बना सकते हैं।
स्वाद: मीठा
परोसने के तरीके: मूंगफली की चिककी बच्चों और वयस्कों सभी के लिए एक बढ़िया मिठाई है क्योंकि यह प्रोटीन और आयर्न से भरपूर होती है।
चुकंदर का हलवा
सामग्री:
2 कप चुकंदर कसा हुआ (2 बड़े चुकंदर/बीटरूट/बीट) 1 कप फूल फैट दूध (अधिक मलाईदार हलवा बनाने के लिए 1 1/2 कप डालें) 3 टेबलस्पून चीनी (कम या ज्यादा स्वाद अनुसार) 1/8 टीस्पून इलायची पाउडर 2 टेबलस्पून कटा हुआ काजू, वैकल्पिक 2 टेबलस्पून घी
विधि (Beetroot Halwa Banane Ki Vidhi Hindi Me):
- 1. चुकंदर को पानी से धो लें। उन्हें छीलें और नीचे से पतला भाग काट दें।
- 2. उन्हें कट्टकस कर लें।
- 3. एक भारी तले वाली कड़ाही या प्रेशर कुकर में 1/2 टेबलस्पून घी गर्म करें। उसमें कटे हुए काजू डालें और वे जब तक हल्के भूरे रंग के हो जाते हैं तब तक भूनें।
- 4. उन्हें एक थाली में निकालें।
- 5. उसी कड़ाही में कसा हुआ चुकंदर डालें।
- 6. उसे मध्यम आंच पर 7-8 मिनट के लिए भूनें।
- 7. उसमें दूध डालें।
- 8. अच्छी तरह से मिलाएं। इसे मध्यम आंच पर थोड़ा गाढ़ा होने लगे तब तक पकाईये। कभी कभी बीच में चमचे से हिलाते रहें।
- 9. जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे उसके बाद चिपकने से रोकने के लिए लगातार चमचे से हिलाते रहें।
- 10. जब मिश्रण गाढ़ा हो जाता है तब उसमें चीनी डालें। चीनी पिघल जाये और मिश्रण गाढ़ा हो जाये तब तक पकाईये।
- 11. बाकी बचा घी, इलायची पाउडर और भुना हुआ काजू डालें।
- 12. अच्छी तरह से मिलाएं। चमचे से लगातार हिलाते हुए 2 मिनट तक पकाईये। गैस बंद कर दें। चुकंदर का हलवा तैयार है। इसे अपनी पसंद के अनुसार गर्म या ठंडा परोसें।
सुझाव और विविधता:
- • अपने स्वाद के अनुसार हलवे को कम या अधिक मीठा बनाने के लिये चीनी की मात्रा कम या ज्यादा करें।
- • खुशबूदार और पारंपरिक स्वाद के लिए इस रेसिपी में घी का उपयोग हुआ है। आप हलवे की कैलरी कम करने के लिये बीना घी का हलवा भी बना सकते हैं।
- • इसे कमरे के तापमान पर एक दिन के लिए और फ्रिज में 2-3 दिनों के लिए रख सकते हैं।
- • बदलाव के लिए, इस मिश्रण में से चुकंदर गुलाब जामुन भी बना सकते हैं - इसके लिए हलवा को बहुत गाढ़ा हो जाने तक पकाइये और फिर मिश्रण को ठंडा होने दें। फिर उसमें से छोटे-छोटे गोले बना लें और उसको कसे हुए नारियल से लपेट कर लड्डू/जामुन बना दें।
नारियल की बर्फी
सामग्री:
1 कप पीसा हुआ/कट्टकस किया हुआ ताजा नारियल (भूरी छाल के बिना) 1/2 कप चीनी 2 टेबलस्पून कन्डेन्स्ड मिलक 2 टेबलस्पून दूध 1/4 टीस्पून इलायची पाउडर 3 टेबलस्पून काजू, कटे हुए 1/2 टेबलस्पून + 1/2 टेबलस्पून घी
विधि:
- 1. एक प्लेट या मोल्ड को 1/2 टेबलस्पून घी लगाकर चिकना कर लें और आवश्यकता होने तक बाजू में रख दें। यह प्लेट का उपयोग जब स्टेप-6 में मिश्रण बन जाएगा तब उसे सेट करने के लिए किया जाएगा। एक नोन-स्टीक या मोटी सतह वाले पेन/कडाही में कट्टकस किया हुआ या पीसा हुआ ताजा नारियल, 1/2 टेबलस्पून घी और चीनी डालें और उसे मध्यम आंच पर गरम करें।
- 2. मिश्रण को चम्मच से लगातार चलाते हुए मिलाएं और उसे हल्का सुनहरा होने तक पकाएं; इसमें लगभग 10 मिनट का समय लगेगा।
- 3. उसमें कन्डेन्स्ड मिलक और दूध डालें।
- 4. चम्मच से लगातार चलाते हुए मिलाएं और मिश्रण को गाढ़ा होने तक पकाएं (फोटो में दिखाया गया है वैसे); इसमें लगभग 4-5 मिनट का समय लगेगा। उसमें काजू और इलायची पाउडर डालें।
- 5. अच्छे से मिलाएं और गैस बंध कर दें।
- 6. पके हुए मिश्रण को चिकनी की हुई प्लेट में निकाल लें।
- 7. उसे चम्मच से एक समान फैला दें और कमरे के तापमान पर 8-10 मिनट के लिए ठंडा होने दें।
- 8. एक चाकू या चपटे चम्मच से नारियल की बर्फी को डायमंड के आकर में या चौकोर टुकड़ों में काट लें। जब यह पूरी तरह से ठंडा हो जाए, तब प्लेट में से टुकड़ों को निकाल लें और मजे से खाएं।
सुझाव और विविधता:
- • अगर ताजा नारियल उपलब्ध नहीं हैं तो उसके बदले कट्टकस किया हुआ सूखा नारियल का पाउडर का उपयोग कर सकते हैं। अगर आप सूखा नारियल का पाउडर का उपयोग कर रहे हैं तो स्टेप-1 में चीनी को भूरी होने से रोकने के लिए 3 टेबलस्पून पानी डालें।
- • अगर आप बारीस के मौसम में नारियल की बर्फी बना रहे हैं (जब हवा में ज्यादा नमी होगी) तो ध्यान रहे की मिश्रण अच्छी तरह से गाढ़ा पका हुआ होना चाहिए अन्यथा वह सेट नहीं होगा और ठंडा होने पर चिपचिपा हो जाएगा।
- • उसे अपनी पसंद के अनुसार बनाने के लिए उसमें भिगोया हुआ केसर या अनानास का एसेंस या आपके पसंद का कोई भी एसेंस डालें।
- • चीनी का नाप मत बदलें (आप उसे ज्यादा मीठा बनाने के लिए उसमें ज्यादा चीनी डाल सकते हैं लेकिन उसकी मात्रा कम मत करें) अन्यथा बर्फी अच्छी तरह सेट नहीं होगी और आप उसमें से चौकोर टुकड़े बना नहीं पाएंगे।
- • आप उसे एक हवाबंध डिब्बे में भर कर फ्रिज में रख सकते हैं और उसका 1 हफ्ते के भीतर उपयोग करें।
नारियल बिस्कुट
सामग्री:
1 कप मैदा
1/4 टीस्पून बेकिंग सोडा
1/2 कप चीनी का पाउडर / पीसी हुई चीनी
1/2 कप मक्खन (सोल्टेड / अनसोल्टेड) कमरे के तापमान पर
2-3 बूंद वेनिला एसेंस
3/4 कप दरदरा सूखा नारियल पाउडर
1 टेबलस्पून दूध
विधि:
- 1. ओवन को 350F (180C) पर 10-12 मिनट तक पहले से गरम कर लें (प्री हिट कर लें)। एक बड़ा कटोरा ले और सखी सामग्री (1 कप मैदा और 1/4 टीस्पून बेकिंग सोडा) छानने के लिए उसके ऊपर बड़ी छलनी रखें। अगर आप बिना नमक का मक्खन इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसमें चुटकीभर नमक डालें।
- 2. सभी सूखी सामग्री साथ में छान लें।
- 3. अगर चीनी पाउडर उपलब्ध नहीं है तो चीनी को मिक्सी के छोटे जार में बारीक पाउडर जैसा पीस लें (1/2 कप-2½ टेबलस्पून चीनी = 1/2 कप चीनी पाउडर)।
- 4. दूसरे कटोरे में 1/2 कप कमरे के तापमान पर रखा हुआ मक्खन और 1/2 कप चीनी पाउडर लें।
- 5. मक्खन और चीनी के मिश्रण को बिटर से क्रिमी और चिकना मुलायम होने तक फेंट लें। ध्यान रखें कि उसमें कोई गट्टे ना रह जाये।
- 6. वेनिला एसेंस की 2-3 बूंदें डालें।
- 7. 3/4 कप सूखा नारियल पाउडर डालें।
- 8. अच्छे से मिला लें।
- 9. छानी हुई सूखी सामग्री डालें।
- 10. मिश्रण को चपटे चम्मच से अच्छी तरह मिला लें। अगर मिश्रण ज्यादा सूखा लगे तो 1 टेबलस्पून दूध डालें। दूध जरूरत अनुसार कम या ज्यादा डालें।
- 11. मिश्रण को अच्छी तरह मिला लें और हाथ से आटे जैसा गूंध लें। अगर आटा ज्यादा नरम हो जाये तो बटर पेपर में लपेटकर 20-30 मिनट के लिये फ्रिज में रखें।
- 12. बेकिंग ट्रे के ऊपर बटर पेपर या एल्युमीनियम फॉयल लगा दें। आटे में से 20-22 एक समान गोलाकार गोले बना लें। गोले को हथेली से दबाकर पेडे जैसा बना लें। पेडे को बेकिंग ट्रे में थोड़ी दूरी पर रखें। ट्रे को पहले से गरम किये हुए ओवन में बीच के रेक में रखें और 350F(180C) के तापमान पर 15-18 मिनट या कुकीज किनारों से हल्की सुनहरी होने तक सेक लें।
- 13. बेकिंग ट्रे को ओवन में से निकाल लें। इस समय कुकीज नरम होंगी।
- 14. ध्यान से चपटे चम्मच से कुकीज को कुलींग ट्रे में रखें और कमरे के तापमान तक ठंडे होने दें। ठंडे होने पर कुकीज खस्ती और कुरकुरी हो जायेंगी। कुकीज तैयार है। उन्हें हवाबंध डिब्बे में भर लें।
सुझाव और विविधता:
- • मक्खन कमरे के तापमान पर होना चाहिये। नरम लेकिन पिघला हुआ नहीं।
- • अगर आपको थोड़ी नरम कुकीज पसंद है तो उन्हें 15-18 मिनट के बदले 12-15 मिनट तक सेकें।
- • आप 1 कप मैदा के बदले 1/2 कप गेहूँ का आटा और 1/2 कप मैदा ले सकते हैं।
- • सेकनें पर कुकीज फुलेंगी इसलिये उन्हें थोड़ी थोड़ी दूरी पर रखें।
चॉकलेट केक
केक के लिए सामग्री:
3/4 कप मैदा
1/2 कप शक्कर (या 1/3 कप)
2 टेबलस्पून कोको पाउडर (मीठा नहीं)
1/2 टीस्पून बेकिंग सोडा
एक चुटकी नमक
1/2 कप ब्लैक कॉफी (1/2 कप गर्म पानी में 3/4 टीस्पून ईस्टेट कॉफी पाउडर या एस्प्रेसो पाउडर मिला दें)
3 टेबलस्पून तेल
1½ टीस्पून नींबू का रस या सिरका
वेनिला एसेंस की 3-4 बूँदें या (1/4 टीस्पून वेनिला का अर्क)
गनाश फ्रोस्टिंग के लिए सामग्री:
55 ग्राम चॉकलेट चिप्स (या चॉकलेट)
1 टेबलस्पून मक्खन
2½ टेबलस्पून फूल फैट दूध (पूर्ण वसा दूध)
विधि (Eggless Chocolate Cake Banane Ki Vidhi Hindi Me):
- 1. ओवन को 350 F (180 C) पर कम से कम 10 मिनट के लिए प्रीहीट कर लें। ब्लैक कोफी बनाने के लिए 1/2 कप गर्म पानी में 3/4 टीस्पून इन्स्टेंट कॉफी पाउडर मिला दें। एक कटोरे में ब्लैक कोफी, तेल, नींबू का रस (या सिरका) और वेनिला एसेंस डालें और अच्छी तरह से मिला लें।
- 2. मैदा, कोको पाउडर, बेकिंग सोडा और नमक को एक कटोरे में छान लें। उसमें चीनी डालें। अगर चीनी के दाने बड़े हैं तो उसे मिसली में दरदरा पीस लें।
- 3. अच्छी तरह से मिलाएं।
- 4. आटे के मिश्रण में गीला मिश्रण डालें।
- 5. उन्हें अच्छे से मिला लें। बहुत ज्यादा मत मिलाईये।
- 6. मिश्रण थोड़ा पतला होना चाहिए (पकोड़े के घोल की तरह), वे बहुत गाढ़ा नहीं होना चाहिए।
- 7. एक केक पकाने के बर्तन (6.5 इंच का चौकोर या गोल पेन) की अंदर की सतह तेल या बटर लगाकर चिकनी कर लें। उसमें तैयार घोल डालें।
- 8. उसे पहले से गर्म किये हुए ओवन में (बेक करने के लिए) सेकने के लिए रखें और 30 मिनट के लिए सेकने (बेक होने दें) दें। ओवन में से पेन निकालें। केक पक गया है या नहीं उसकी जाँच करने के लिये उसमें टूथपिक या चाकू डालें और अगर वे साफ बाहर आता है तो केक पक गया है। अन्यथा, इसे और 5 मिनट के लिए पकने दें।
- 9. केक को कमरे के तापमान पर अच्छे से ठंडा होने दें। पेन के किनारों पर चाकू घुमाकर केक को पेन से अलग कर दें। केक के ऊपर रैक या एक थाली रखें।
- 10. पेन और रैक, दोनों साथ में प्लेटें इससे केक रैक के ऊपर निकल जायें। अगर केक आसानी से बाहर नहीं आता है तो पेन को धीरे से ठोके।
- 11. अब केक को सजाने के लिए फ़्रॉस्टिंग बनाते हैं। एक कटोरी में चॉकलेट चिप्स या (कटा हुआ चॉकलेट) लें।
- 12. एक छोटे पेन में मध्यम आंच पर दूध और बटर गर्म करें।
- 13. जब मिश्रण उबलना शुरू हो जाये उसके बाद उसे एक मिनट के लिए पकने दें।
- 14. गैस बंद कर दें। चॉकलेट पर गर्म मिश्रण डालें और इसे 2 मिनट के लिए रहने दें। क्योंकि मिश्रण गर्म है, चॉकलेट पिघल जाएगा।
- 15. मिश्रण को व्हिस्क (whisk) या चम्मच का उपयोग करके नरम और चमकदार होने तक अच्छे से फेंट लें। शुरूआत में मिश्रण अच्छा नहीं दिखेगा लेकिन बाद में यह चमकदार होने लगेगा। गनाश फ़्रॉस्टिंग तैयार है।
- 16. रैक के नीचे एल्यूमीनियम फॉयल बिछा दें या केक थाली में रख दें। इससे जब अगले चरण में केक के ऊपर फ़्रॉस्टिंग डालेंगे तो अधिक गनाश उसमें पड़े।
- 17. केक पर गनाश डालें और उसे समान रूप से फैला दें।
- 18. अगर आपको ठीक लगे तो उसके ऊपर कुछ कटा हुआ बादाम छिड़के। इसे 1-2 घंटे के लिए सेट होने दें। एगलेस चॉकलेट केक तैयार है। इसे अपने मनपसंद आकर के टुकड़ों में काटे और परोसे।
सुझाव और विविधता:
- • आप जो खाना पकाने का तेल का इस्तेमाल केक बनाने में करते हैं वो बहुत महक वाला नहीं होना चाहिए वरना केक में उसकी महक आएगी।
- • केक को 8 सर्विंग के लिए बनाने के लिए सभी सामग्री की मात्रा को दोगुना कर दें और केक बनाने के लिए, 8 इंच का चौकोर पेन या 9 इंच के गोल पेन का उपयोग करें। केक को 30 मिनट के बजाय 35-40 मिनट लिए बेक करें।
- • यदि आप चॉकलेट गनाश बनाना नहीं चाहते हैं तो पिप्सी हुई चीनी से केक को सजायें।
- • नींबू के रस की मात्रा को कम मत करें।
- • इस रेसिपी में आप बेकिंग सोडा के बदले बेकिंग पाउडर का उपयोग नहीं कर सकते हैं।
टॉप 20 कुटीर उद्योग के उपाय
क्या आप बेरोजगार हैं ? क्या आप गृहिणी हैं? या आप स्वयं का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं? यदि हाँ तो आज हम ऐसे ही कुटीर उद्योगों या cottage industry businesses के बारे में जानकारी देने वाले हैं। यह बिज़नेस आप घर बैठे कम पूंजी में, मशीनरी का कम से कम उपयोग करते हुए, अपने परिवार के साथ शुरू कर सकते हो। इस प्रकार के उद्योगों में 10,000 से 1.50 लाख तक निवेश हो सकता है। जबकी मशीनरी का उपयोग कर अधिक लागत वाले व्यवसाय को लघु उद्योग कहते। कोटेज इंडस्ट्रीज (कुटीर उद्योग) में परिश्रम पर आधारित इस व्यवसाय से आप रोजाना 500 से 1000 रुपये तक
घर बैठे कमा सकते हैं। तो आइए जानें ऐसे ही 20 कुटीर उद्योगों के बारे में जिन्हें आप शुरू करके अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं :-
1. टिफिन बनाने का कुटीर व्यवसाय
शहरी जीवन में विद्यार्थियों एवं नौकरी करने वालों के परिवार से दूर रहने के कारण टिफिन बनाने का उद्योग जोर पकड़ रहा है। ऐसे विद्यार्थी जो अपने परिवार से दूर रहते हैं या परिवार से दूर नौकरी करते हैं वे टिफिन मंगवा कर भोजन लेते हैं। घर में तैयार कर खाना डब्बे में बंद कर पहुंचाया जाता है। यह बहुत ही आसानी से किये जानें वाला व लोकप्रिय व्यवसाय है।
2. अगरबत्ती बनाने का काम
अगरबत्ती बनाने का उद्योग कम लागत में अधिक लाभदायक उद्योग है। 50,000 से 60,000 रुपये की लागत में मशीन को खरीदकर आप अच्छी आमदनी कर सकते हैं। चारकोल पाउडर, बुड पाउडर रोल, धूप एवं अन्य सुगन्धित सामग्री का मिश्रण तैयार करके से बनाई जा सकती है। इसका इस्तेमाल पूजा-अर्चना करने के लिए किया जाता है।
3. नमकीन बनाने का उद्योग
नमकीन खाना सबको पसंद होता है। कुशल महिलाएं नमकीन बनाकर बाजार में उचित मूल्य पर बेच सकती हैं। नमकीन बनाने के लिए बेसन के साथ विभिन्न प्रकार की दालें जैसे उड़द, मूंग, चना आदि का उपयोग किया जाता है। नमकीन बनाने का कारोबार तेजी से विकसित हो रहा है इससे आप अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
4. बर्तन बनाने का उद्योग
ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी के बर्तन बनाने का उद्योग प्राचीन काल से चला आ रहा है। मिट्टी के बर्तन का उपयोग आज भी किया जाता है। छोटे व्यवसाय से कम निवेश में इसे शुरू किया जा सकता है। मिट्टी का घड़ा, सुराई, मिट्टी के खिलौने, मूर्तियां आदि तैयार कर बाजार में उचित मूल्य में बेचा जा सकता है।
5. साड़ी व कपड़ों का कुटीर व्यवसाय
आजकल यह व्यापार बड़ा ट्रेंड में चल रहा है। महिलाएं कपड़ा बनाने वाली कंपनियों से सस्ते दामों में कपड़ा खरीदकर, बाजार के दामों में कपड़ा व साड़ियां बेचकर अपनी आजीविका चला सकती हैं। ये कपड़ा सूरत एवं अहमदाबाद में सस्ती दर पर मिल जायेगा। इसके अलावा, बनारस की साड़ियां बहुत प्रसिद्ध हैं। आप नई-नई डिज़ाइन सलेक्ट करके कम निवेश में अच्छा कमीशन कमा सकते हैं। इसी तरह का बिज़नेस आप ऑनलाइन भी कर सकते हैं जैसे अमेज़न या फ़्लिपकार्ट पर सेलर बन कर। यहाँ पर आप अपना अकाउंट बनाकर कंपनियों को माल बेचकर कमीशन बना सकते हो।
6. रेस्टोरेंट व बेकरी कार्नर
आजकल शहरों के भीड़भाड़ वाले इलाकों में छोटी सी जगह में रेस्टोरेंट व बेकरी कॉनर लगाने का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। इन इलाकों में रेस्टोरेंट व बेकरी कॉनर लगाकर आप अच्छी आमदनी कर सकते हैं। इसके लिए छोटी सी जगह व खाद्य सामग्री की आवश्यकता होती है। पापडी चाट, समोसा, भेल, पिज्जा, बर्गर आदि आइटम को शामिल कर सकते हैं। इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 60,000 से 70,000 रुपये की आवश्यकता होती है।
7. मसाला बनाने का उद्योग
विभिन्न प्रकार के मसालों को तैयार कर बाजार में बेचा जा सकता है जैसे मिर्ची, हल्दी व धनिया आदि। यह उद्योग रसोई में होने वाली लागत व रोजमर्रा की आपूर्ति के लिए सक्षम है। इस व्यवसाय के लिए आपको मसाला पीसने के लिए छोटी चक्की की आवश्यकता पड़ती है। मसाला बनाने के कुटीर व्यवसाय में जितनी अधिक मार्केटिंग करेंगे उतना ही अधिक मुनाफा होगा।
8. फर्नीचर बनाने का उद्योग
घर में काम आने वाला सामान जैसे कुर्सी, टेबल, पलंग एवं अन्य छोटे मोटे लकड़ी के फर्नीचर को तैयार कर उचित मूल्य में बेचा जा सकता है। कलात्मकता से निपुण इस छोटे व्यवसाय में लाभांश की भरमारता है। इसमें आप पर निर्भर करता है कि लकड़ी खरीदने के लिए आप कितना निवेश करते हैं।
9. पापड़ बनाने का कुटीर उद्योग
अपने घर पर ही पापड़ तैयार कर कुशल व्यवसायी के रूप में अच्छे दामों पे बाजार में बेचा जा सकता है। पापड़ का उपयोग सब्जी बनाने एवं खाने में किया जाता हैं। यह मूंग दाल, उड़द दाल के द्वारा तैयार किया जाता हैं। पापड़ की बाजार में बिक्री करके इस उद्योग को अच्छा व्यवसाय बनाया जा सकता है। 20000 से 25000 की लागत में शुरू कर, पापड़ की बाजार में बिक्री करके इस उद्योग को अच्छा व्यवसाय बनाया जा। इस व्यवसाय से अच्छा लाभ भी मिल सकता है।
10. साबुन बनाने का उद्योग
साबुन बनाने के कुटीर उद्योग के लिए कास्टिक सोडा, तेल, एसेंस आटा आदि सामग्री की जरूरत होती है। इनको मिलाकर व साबुन तैयार कर बाजार में बिक्री की जा सकती है। इनके लिये कुशलता हेतु जिला उद्योग केंद्र द्वारा 3 से 6 महीने की ट्रेनिंग दी जाती है।
11. कपड़ों की छपाई का कार्य
कपड़ों को रंगकर व उन पर छपाई करके छोटे व्यवसाय का रूप दिया जा सकता है। फैक्टरियां, तैयार साथे कपड़े को रंगने के लिए देती हैं ताकि उसी कपड़े को आकर्षक बनाया जा सके। इस कार्य को शुरू करने के लिए आप कपड़े बनाने वाली फैक्टरी से सम्पर्क कर सकते हो। कम लागत का यह व्यवसाय निरन्तर गतिशील होता रहा है।
12. चूड़ी बनाने का कुटीर उद्योग
चूड़ी बनाने का व्यवसाय आप घर बैठकर परिवार के सहयोग से कर सकते हैं। इनके लिए आपको एक मशीन की आवश्यकता रहेगी जिसकी कीमत 50 से 70 हजार होती है। इसके अलावा आपको कच्चा माल भी खरीदना होगा। आप महिलाओं के हाथों में पहनने वाली प्लास्टिक की चूड़ियां बनाकर प्रतिदिन एक हजार रुपये तक धन कमा सकते हैं। इनकी मार्केटिंग व पैकिंग आपको ही करनी पड़ती है।
13. सिलाई करने का स्माल बिज़नेस
आप घर बैठे कपड़ों की सिलाई करके अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। इनके लिए आपको एक मशीन की आवश्यकता होगी। यह मशीन आपको मार्केट में 3 से 4 हजार रुपये में आसानी से मिल जायेगी। इस मशीन पर सिलाई करके प्रतिदिन 700 से 1000 रुपये तक कमाया जा सकता है। सिलाई कार्य सिखाने के लिए सरकार की ओर से स्किल डेवलपमेंट के तहत इसमें ट्रेनिंग भी दी जाती है। इसके अलावा कुछ NGOs की तरफ से भी सिलाई की ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग की अवधि 3 से 6 महीने की होती है।
14 मेंहदी लगाने का व्यवसाय
भारतीय संस्कृति में विवाह एवं अन्य सभी मंगलकारी कार्यक्रमों में मेंहदी लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस व्यवसाय के लिए किसी मशीन को खरीदने की आवश्यकता नहीं है। बस अपने हुनर को उभारने की जरूरत है। हाथों की मेंहदी डिजाइन बनाने के लिए 200 से 300 रुपये मिलते हैं। शादियों में मेंहदी लगाने के लिए 10,000 रुपये तक दिया जा सकता है। इस व्यवसाय की मांग दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। मेंहदी के डिजाइन सिखाने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत प्रशिक्षण भी दिया जाता है। कम लागत का यह कारोबार अधिक मुनाफा प्रदान करता है व घर पर रहने वाली गृहिणियों के लिए बहुत ही अच्छा है।
15. सौंदर्य एवं श्रृंगार प्रसाधन उद्योग
शरीर की सुंदरता बढ़ाने के काम आने वाले प्रोडक्ट्स को सौंदर्य प्रसाधन या कॉस्मेटिक कहते हैं। इनका सम्बंध शरीर के किसी अंग के मेकअप से है। कास्मेटिक प्रोडक्ट्स प्राकृतिक (natural) एवं कृत्रिम (artificial) दो प्रकार के होते हैं। आजकल पश्चिमी सभ्यता के चलते इसकी डिमांड दिन ब दिन बढ़ रही है। इस उद्योग से जुड़कर आप अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। सरकार के द्वारा निशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इस प्रशिक्षण की अवधि चार माह की होती है। इसके लिए 10वीं पास होना आवश्यक है।
16. दोना पत्तल बनाने का छोटा उद्योग
यह उद्योग शुरू करने के लिए आपको सबसे पहले मशीन खरीदनी होगी। डबल डार्ड फुल ओटोमेटिक नाम से इस मशीन की कीमत पचास हजार से