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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

आल्हाका विवाह । १२३ ७ इतना कहिकै दूनों चलि भे महलन भये मंगलाचार ॥ बांदी आंगन लीपन लागी पंडित साइति रहे बिचार ५८ एक कुमारी तेल चढ़ावै गावनलगीं सखी त्यहिकाल ॥ माय मंतरा भे पाछे सों नेगिननेग दीन परिमाल ५६ लैकै महाउर नाइनि आई नहखुर होनलाग त्यहिबार ॥ नाइनि मांग्यो तहँ पुरवाको दीन्ह्यो मल्हना परम उदार ६० उबटन करिकै तन केसरसों निर्मलजलसों फिरिअन्हवाय ॥ कंकण बांधागा आल्हा के दूलह बने बनाफरराय ६१ सजी पालकी तहँ ठाढ़ीथी तापर बैठि शम्भु को ध्याय ॥ कुँवा वियाहन आल्हा पहुंचे मल्हना पैर दीन लटकाय ६२ पहिली भाँवरि के फिरतैखन आल्हा गहा चरणको धाय ॥ बाग लगावों तेरे नाम की माता लेवो चरण उठाय ६३ ऐसो कहिकै सातों भाँवरि घूमा तुरत बनाफरराय ॥ मल्हनाबोली फिरि आल्हा सों सेयों तुमको दूध पियाय ६४ तासों द्यावलि सों अधिकी मैं तासों पैर दीन लटकाय ॥ पंजा फेर्यो फिरि पीढ़ी माँ तुम्हरो बार न बाँको जाय ६५ पाँय लागिकै फिरि द्यावलिके पलकी चढ़े बनाफरराय ॥ हुकुम लगायो बघऊदन ने डंका वजनलाग घहराय ६६ घोड़ करिलिया आल्हा वाला कोतल चला पालकी साथ ॥ मलखे पपिहापर बैठत भे नायकै रामचन्द्र को माथ ६७ घोड़ा मनोहरा की पीठी माँ देवा तुरत भयो असवार ॥ सय्यद सिरगा पर बैठत भे नाहर बनरस के सरदार ६८ अली अल्लामत औ दरियाखां बेटा जानबेग सुल्तान ॥ तेग बहादुर अलीबहादुर बैठे घोड़ आपने ज्वान ६६

८ आल्हखण्ड । १२४ मीराताल्हन के लरिका ये नाहर समरधनी तलवार ॥ मन्नागूजर मोहबे वालो सोऊ वेगि भयो असवार ७० सातलाख लग फौजैं सजिकै नैनागढ़ को भई तयार ॥ डंका बाजैं अहलंका के ऊदन बेंबुलपर असवार ७१ सजे बराती सब मोहबे के जल्दी कूच दीन करवाय ॥ सातरोज की मैजलि करिकै फौजैं अठीं धुरा पर आय ७२ आठ कोस नैनागढ़ रहिगा तहँपर डेरादीन डराय ॥ तम्बू गड़िगा तहँ आल्हा का बैठे सबै शूरमा आय ७३ ऊंचे ऊंचे तम्बू गड़िगे नीचे लागीं खूब बजार ॥ कम्भर छोरे राजपूतन ने हाथिन हौदा धरे उतार ७४ तंग बछेड़न की छोरी गईं क्षत्रिन धरा ढाल तलवार ॥ बनी रसोई राजपूतन की सबहिनजेंयलीन ज्यँवनार ७५ गा हरकारा तब तहँनाते जहँना भरीलाग दरबार ॥ बैठक बैठे सब क्षत्री हैं एकते एक शूर सरदार ७६ गम् गम् गम् गम् तबला गमकैं किन् किन् परी मँजीरन मार ॥ को गतिबरणै सारंगी कै होवै नाच पेतुरियन क्यार ७७ खये अफीमनके गोला कोउ पलकैं मूंदैं औ रहिजायँ ॥ कोऊ जमाये हैं भांगनको मनमाँ रहे रामयश गाय ७८ उड़ै तमाखू बुटवल वाली धुँवना रहा तहांपर छाय ॥ हाथ जोरि औ बिनती करिकै धावन बोल्यो शीशनवाय ७९ अईं बरातें क्यहु राजाकी धूरे परीं आजही आय ॥ आठकोस केहैं दूरीपर सांची खबरि दीन बतलाय ८० सुनिकै बातें नयपाली ने तीनों लड़का लये बुलाय ॥ जोगा भोगा औ बिजियाते राजा बोल्यो बचन सुनाय ८१

आल्हाका विवाह । १२५ ६ जावो जल्दी तुम धूरेपर हमको खबरि सुनावो आय ॥ सुनिकै बातें तीनों चलिभे धूरे तुरत पहुंचे जाय ८२ ऊंचे टिकुरी तीनों चढ़िकै दूरिते लखैं तमाशा भाय ॥ देखिकै फौजें मलखाने की तीनों गये तहाँ सन्नाय ८३ तीनों लौटे त्यहि टिकुरीते अपने महल पहुंचे आय ॥ भोजन केरी फिरि बिरियामाँ राजै खबरि दीन बतलाय ८४ लगी कचहरी हाँ आल्हाकी भारी लाग तहाँ दरबार ॥ बैठक बैठे सब क्षत्री हैं एकते एक शूर सरदार ८५ मीराताल्हन बनरसवाले आली खानदान के ज्वान ॥ बड़े पियारे ते क्षत्रिनके अपने धर्म कर्म अनुमान ८६ सच्चे साथी रहें चारों के यारों मानों कही हमार ॥ ऐसे होते जो सय्यद ना कैसे बने रहत सरदार ८७ अली अलामत औ दरियाखाँ बेटा जानबेग सुल्तान ॥ औरो लड़का रहें सय्यदके एकते एक रूप गुणखान ८८ मन्नागूजर मोहबे वाला बैठा बड़ा सजीला ज्वान ॥ रुपनाबारी ते त्यहि समया बोले तहाँ बीर मलखान ८९ ऐपनावारी बारी लै कै राजैद्वार पहुंचो जाय ॥ सुनिकै बातें मलखाने की रुपना बोला शीशनवाय ६० औरो नेगी मोहबे वाले आये साथ बनाफरराय ॥ ऐपनावारी बारी लै कै द्वारे मूड़ कटावै जाय ६१ सुनिकै बातें ये रुपना की बोले तुरत उदयसिंहराय ॥ तुमको नेगी हम मानैं ना जानें सदा आपनो भाय ६२ दादा बियाहन को रहि हैं ना बतियाँ कहिबे को रहिजायँ ॥ यश नहिंजावै नर मरिजावै परहित देवै मूड़क़टाय ६३

१० आल्हखण्ड । १२६ स्वारथ देही तब नरकेही नेही मरे न पावै चाम ॥ सन्मुख जूझै समरभूमि में जावै तुरत हरी के धाम ९४ बड़े प्रतापी जग में जाहिर मनियाँदेव मोहोबे केर ॥ तिनके सेवक तेई रक्षक रूपन काह लगावो देर ९५ रूपन बोला तब मलखे ते दादा मानो कही हमार ॥ घोड़ करिलिया आल्हा वाला अपने हाथ देउ तलवार ९६ सुनिकै बातें ये रुपना की मलखे घोड़ दीन सजवाय ॥ ढाल खड्ग रुपना को दैके बैठे तुरत बनाफरराय ९७ बैठिकै रुपना फिरि घोड़े पर ऐपनावारी लीन उठाय ॥ चारिघरी को अरसा गुजरो नैनागढ़ै पहुँचो जाय ९८ देखिकै बारी दरवानी ने भारी हाँक दीन ललकार ॥ कहां ते आयो औ कहँ जैहौ बोलो घोड़े के असवार ६६ सुनिकै बातें द्वारपाल की रूपन बोला बचन उदार ॥ आल्हा ब्याहन को हम आये नामी मोहबे के सरदार १०० खबरि सुनावो नैपाली को फिरि तुम हमैं सुनावो आय ॥ ऐपनावारी बारी लायो ताको नेग देव पठवाय १०१ सुनिकै बोलो द्वारपाल फिरि तुम्हरो नेग काह है भाय ॥ सोऊ सुनावों महराजा को लादे लिहे घोड़ पर जाय १०२ सुनिकै बातें द्वारपाल की रूपन बोला बचन उदार ॥ चारिघरीभर चलै सिरोही द्वारे बहै रक्त की धार १०३ नेग हमारो यहु प्यारो है देवो पठै स्वईं सरदार ॥ जाहि पियारो तन होवै ना आवै स्वईं शूर अब द्वार १०४ सुनिकै बातें ये बारी की आरी द्वारपाल हैजाय ॥ मनमें सोचै मनै विचारै मनमें बार बार पछिताय १०५

आल्हाका विवाह । १२७ ११ कैसो बारी यहु आयो है नाहर घोड़ेका असवार ॥ जालिम राजा नैपाली है तासों कीन चहै तलवार १०६ यहै सोचिकै द्वारपालने औ रूपन ते कहा सुनाय ॥ गरमी तुम्हरी जो उतरी हो बोलो ठीक ठीक तुम भाय १०७ सुनिकै बातें दरवानी की रूपन गरु दीन ललकार ॥ नगर महोबा जगमें जाहिर नामी मोहबे के सरदार १०८ तिनको नेगी मैं द्वारेपर लीन्हे खड़ा ढाल तलवार ॥ जौन शूरमा हो नैनागढ़ आवै देय नेग सो द्वार १०९ इतनी सुनिकै दरवानी ने राजै खबरि सुनाई जाय ॥ ऐपनवारी बारी लावा भारी बात कहै सो गाय ११० चारिघरीभर चलै सिरोही द्वारे बहै रक्तकी धार ॥ जौन शूरमाहो राजाघर आवै देय नेग सो द्वार १११ इतना सुनतै महाराजाके नैना अग्नि बरण द्वैजायँ ॥ पूरण राजा पटनावाला बोला राजै बचन सुनाय ११२ हम चलिजावैं अब द्वारेपर बारी नेग देयँ चुकवाय ॥ इतना कहिकै चलि ठाढ़ो भो साथै औरो चले रिसाय ११३ सवैया ॥ द्वार चले तलवार लिये रट मारहि मार कुमारन पेखा । लाल गुपाल गहे करबाल खेलैं जसफाग भयउ तस भेखा ॥ मार अपार जुझार किये औ गिरे रणखेत रहे नहिं शेखा । बारीकरै कब रारी नृपै ललिते मलखान कि है यह लेखा ११४ पूरन राजा पटना वाला लीन्हे नांगि हाथ तलवार ॥ सो धरि धमका त्यहि रूपनके रूपन लीन ढालपर वार ११५

९२ आल्हाखण्ड । १२८ सांगि उठाई फिरि रूपन ने राजै बार बार ललकार ॥ लटुवा लाग्यो पूरन शिर में औ बहिचली रक्तकी धार ११६ अगल बगल के फिरि मारतभा दाँयें बाँयें दीन हटाय ॥ ऐंड़ा मसके फिरि घोड़ा के फाटक तुरत पार है जाय ११७ गली गली में फिरि मारत भो औ वहिचली रक्तकी धार ॥ घरी चारके फिरि अरसा में लश्कर आयगयो असवार ११८ लाले रंग सों भीजे दीख्यो फागुन टेसू के अनुहार ॥ पूँछी हकीकति तब मलखेने नाहर मोहबे के सरदार ११९ कैसी गुजरी नैनागढ़ में रूपन हाल देउ बतलाय ॥ सुनिकै बातें मलखाने की रूपन यथातथ्य गा गाय १२० हल्ला हैगा नैनागढ़माँ जहँतहँ कहन लागि सब कोय ॥ ऐस बहादुर जहँके परजा तहँकेनृपतिकहौ कसहोयँ १२१ देखि तमाशा यहु बारी का राजा बार बार पछिताय ॥ बड़ी हीनता हमरी हैगै बारी जियत निकरिगा हाय १२२ जोगा भोगा दोऊ लरिका बोले हाथ जोरि शिरनाय ॥ हुकुम जो पावैं महराजा का सबकी कटा देयँ करवाय १२३ जितनी रौढ़ें चढ़ि आई हैं सो विनघाव एक ना जायँ ॥ खेदिकै मारैं हम मोहबे लग टेंटुवा टायर लैँ छिनाय १२४ सुनिकै बातें ये लरिकन की राजै हुकुम दीन फरमाय ॥ तुरत नगड़ची को बुलवायो तासों बोल्यो हुकुम सुनाय १२५ बजै नगाड़ा नैनागढ़ में सबियाँ फौज होय तय्यार ॥ भोर सुरेरे पहफाटत खन मारों मुहवेके सरदार १२६ इतना कहिकै दूनों चलिभे अपने महल पहुँचे जाय ॥ रैन खटिगा दिननायक सों झण्डागड़ानिशाको आय १२७

आल्हाका विवाह । १२६ ९३ तारागण सब चमकन लागे सन्तन धुनी दीन परचाय ॥ परे आलसी निजनिज खटिया घों घों कंठ रहे घराँय १२८ माथ नवावों पितु अपने को जो नित मेरी करैं सहाय ॥ करों तरंग यहाँ सों पूरण पूरण ब्रह्म रामको ध्याय १२६ आगे फौजें दूनों सजिहैं मचि हैं घोर शोर घमसान ॥ जोगा भोगा के मुर्चापर लड़ि हैं खूब बीरमलखान १३० इति श्रीलखनऊनिवासि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मज बाबू प्रयागना- रायणजीकी आज्ञानुसारउन्नावप्रदेशान्तर्गतपँडरीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भवबुध कृपाशंकरसूनुपं० ललिताप्रसादकृतबरातआगमनवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥ कवित्त ॥ अंजली दिहेते रोग देहसों हटाय देत ध्यान के धरेते दुख दारिद दिखातना । ज्ञानसों विचारे मान राजैसों कराय देत नामके उचारे मुक्ति पदवी बिलातना ॥ धारे उर व्रत काम क्रोधहू नशाय देत दीनहैं पुकार करे खीन कुम्हिलातना । बोरिदेत विघ्नन मिरोरि देत शत्रुमुख ललित करजोरे पाप रंचहू लखातना १ सुमिरन ॥ मारतण्ड मैं तुमको सुमिरों धरिकै चरणकमल में माथ ॥ सूर्य्य भास्कर सविता रवि औ औरो नाम बहुत दिननाथ १ कथा पुराणन में पढ़िकै मैं जानों काश्यपेय महराज ॥ जो कोउ आयो तव शरणागत गई न तासु कबों जगलाज २ तुम्हरे कुलमाँ रघुनन्दन भे बन्दनकरैं ललित तिनक्यार ॥ अक्षत चन्दन औ फूलन सों मानस पूजन सदा हमार ३ तुम्ही सहाई हौ दीनन के गाई सबै पुराणन गाथ ॥ स्वई भरोसा धरि जियरेमाँ जावाचहौं नांघि भवपाथ ४ छूटि सुमिरनी गै देवन कै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥ जोगा भोगा दोऊ लड़िहैं लड़िहैं उदयसिंह सरदार ५

१४ आल्हखण्ड । १३० अथ कथाप्रसंग ॥ उदय दिवाकर भे पूरबमाँ किरणन कीन जगत उजियार ॥ डंका बाज्यो नैनागढ़माँ सबियाँ फौज भई तय्यार १ बसैं बघेले औ चन्देले पाँवर सूरबंश सरदार ॥ माड़वाड़ के क्षत्री साजे औ परिहार गुटैयाचार २ हाड़ा वाले बूंदी वाले औ राठौर लीन सजाय ॥ तुरत निकुम्भन को सजवायो औ गौरन को लीन बुलाय ३ सजि गुहलौता औ कछवाये बहुतक चन्द्रबंश के ज्वान ॥ तोमर ठाकुर तुमरवार के सजिगे मैनपुरी चवहान ४ सजे भदावर वाले क्षत्री सजिगे गहिलवार सरदार ॥ बैस डौंडियाखेरे वाले जिनके बांट परी तलवार ५ हबशी साजे औ दुर्रानी जे मनइन के करें अहार ॥ कुरी छतीसों सब सजवाई ठाकुर सबै भये तय्यार ६ पूरन राजा पटनावाला सोऊ लीन ढाल तलवार ॥ जोगा भोगा दोनों ठाकुर अपने घोड़न भे असवार ७ रणकी मौहरि बाजन लागी रणकौ होनलाग व्यवहार ॥ दाढ़ी करखा बोलन लागे विप्रन कीन वेद उच्चार ८ मारु मारुकै मौहरि बाजी बाजी हाव हाव करनाल को गति वरणै तहँ क्षत्रिनकै एक ते एक दई के लाल ६ हतु हुंकारनि तोपैं सजि गईँ जिनसों होय घोर घमसान ॥ मारू डंका बाजन लागे घूमन लागे लाल निशान १० खर खर खर खरकै रथ दौरे ख्बा चले पवन की चाल ॥ खट पट खट पट तेगा बोलैं मर मर होयँ गैंड़की ढाल ११ धक धक धक धक करै महावत हाथी धकापेल चलिजायें ॥

[Header] आल्हाका विवाह । १३१ १५

कोउ कोउ घोड़ा मोर चालपर कोउ कोउ सरपट रहे भगाय १२ कोउ कोउ घोड़ा हंस चालपर कोउ कोउ चले कदमपर जायँ ॥ कोउ कोउ घोड़ा ऐसे जावैं जिनके टाप न परै सुनाय १३ कोउ कोउ घोड़ा कावा देवैं कोउ कोउ गर्जि रहे असवार ॥ कउँधालपकनिबिजुलीचमकनि चमचम चमाचम्म तलवार १४ घन घन घन घन घंटा बाजैं घूमत चलैं मत्त गजराज ॥ बल बल बल बल करैं साँड़िया भागत चलैं समर के काज १५ हिनहिन हिन हिन घोड़ा हींसैं खीसैं कायर देखि परान ॥ छाय अँधरिया गै पृथ्विी में गर्दा छाय गई असमान १६ देवता सकुचे आसमान में जंगल जीव गये थर्राय ॥ घरी चार के फिरि अर्सा में सेना अटी समर में आय १७ धूली दीख्यो आसमान में मलखे बोल्यो बचन सुनाय ॥ सजो बेन्दुला के चढ़वैया फौजै गई ऊपर अब आय १८ सुनिकै बातें मलखाने की ऊदन गरु दीन ललकार ॥ सजो सिपाही मोहबे वाले सबियाँ फौज होय तैयार १६ झीलम बख्तर पहिरिसिपाहिन हाथ म लीन ढाल तलवार ॥ सिरगा घोड़े की पीठिमाँ सय्यद तुरत भये असवार २० चढ़ो कबूतरी में मलखाने अपनी लिये ढाल तलवार ॥ घोड़ मनोहर की पीठी माँ देवा चढ़त न लागी बार २१ बड़ी बड़ी तोपैं अष्टधातु की सो चरखिन में दीन चढ़ाय ॥ लै लै थैली बारूदन की सो तोपन में दई चलाय २२ बत्ती दइ दइ फिरि तोपन में रंजक तुरत दीन धरवाय ॥ बम्बके गोला छूटन लागे परलय जनो गई नगच्याय २३ गोली ओला सम वर्षत भई भनभन भन्नभन्न भन्नाय ॥

१६ आल्हखण्ड । १३२ सर सर सर सर कै शर छूटैं मन मन मन्त्र मन्त्र मन्त्राय २४ खट खट खट खट तेगा बोलैं हट हट करैं लड़ैता ज्वान ॥ बड़ी लड़ाई भै नैनागढ़ जोगा भोगा के मैदान २५ सूंदि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतनकेर ॥ हौदा हौदा यकमिल हैगे मारैं एक एकको हेर २६ सात लाख दल मलखे लीन्हे भोगा पांच लाख परमान ॥ मीराताल्हन औ जोगाका परिगा समर बरोबरि आन २७ भोगा बोला तब ऊदनते ओ परदेशी बात बनाय ॥ कहाँते आयो औ का करिहौ आपन हाल देव बतलाय २८ ऊदन बोले तब भोगाते तुमते सत्य देयँ बतलाय ॥ देश हमारो नगर मोहोबा जहाँपर बसै चंदेलाराय २६ छोटे भैया हम आल्हाके औ ऊदनहै नाम हमार ॥ सुनवाँ व्याहन आल्हा आये मानौ सत्य वचन सरदार ३० बाँधिकै मुशकें त्वरे बप्पाकी भँवरी फिरी बड़कवा भाय ॥ नीके ब्याहौ घर फिरिजावो अपने बाप देउ समुझाय ३१ सुनिकै बानै ये ऊदन की भोगा कालरूप हैजाय ॥ धोखे माड़ो के भूल्यो ना जहँ लै लियो बापका दायँ ३२ जाति बनाफर की ओछी है औ सब क्षत्रिन केर उतार ॥ कठिन बिसाने जग में जाहिर मोहबे लौटि जाउ सरदार ३३ बातै सुनिकै ये भोगा की बोला बिहँसि लहुरवा भाय ॥ नदिया भागै तौ गंगाजायँ गंगा भागि समुन्दर जायँ ३४ महादेव अर्घाते भागैं धरती लौटि रसातल जाय ॥ ऊदन भागैं समरभूमिते तौ फिरिभागिकहाँकोजायँ ३५ इतना कहिकै बघऊदनने सुमिरि हृदय शारदा माय ॥

[Header] आल्हाका बिवाह । १३३ १७

देवी शारदा महहरवाली मानों गई भुजापर आय ३६ बाहू फरके बघऊदन के फौजन घुसा बनाफरराय ॥ जैसे भेड़िन भेड़हा पैठै जैसे अहिर बिडारै गाय ३७ तैसे क्षत्री ऊदन देखैं भागैं तुरतै पीठि दिखाय ॥ बड़ी लड़ाई मलखे कीन्हों अद्भुतसमर कहा ना जाय ३८ घोड़ मनोहर की पीठीपर देबा गरु करै ललकार ॥ हनि हनि मारै रजपूतन को बहुतक जूझिगये सरदार ३९ अली अलामत औ दरियाखाँ बेटा जानबेग सुल्तान ॥ ये सब लड़का सय्यदवाले तहँपर करैं घोर घमसान ४० मन्ना गूजर मोहबेवाला दोऊ हाथ करै तलवार ॥ जोगा भोगा पूरन राजा येऊ करैं तहां पर मार ४१ जूझे सिपाही नैनागढ़ के लगभग एक लाखके ज्वान ॥ पांच सहस मोहबे के जूझे करिकै समर भूमि मैदान ४२ जोगा बोला तब भोगा ते मानो कही हमारी बात ॥ खबरि सुनावो महाराजाको जैसी देखि परै कुशलात ४३ सुनिकै बातें भोगा चलिभा नैनागढ़ै पहूंचा जाय ॥ हाथ जोरिकै महाराजा के भोगा यथातथ्य गा गाय ४४ सुनिकै बातें महाराजा ने लायो अमरढोल को जाय ॥ सो दै दीन्ह्यो कर भोगा के भोगाचलिभाशीशनवाय ४५ आयकै पहुंच्यो समर भूमि में भोगा दीन्ह्यो ढोल बजाय ॥ मुर्दा उठिकै जिन्दा हैंगे घैहा उठे तुरत हरषाय ४६ उठे सिपाही नैनागढ़ के मारैं खैंचि खैंचि तलवार ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ४७ ढारे मुर्दा हैं लोहुन में मानों कच्छ मच्छ उतरायँ ॥

१८८ आल्हखण्ड । १३४ पगड़ी गिरि गईँ त्यहि लोहू में फूले कमल सरिस दर्शायँ ४८ परीं बंदूकें कहुँ लोहू में काली नागिनिसी मन्नायँ ॥ पांच कोसलों चली सिरोही लोथिन उपरलोथि दिखरायँ ४६ बड़ी लड़ाई मै नैनागढ़ मारा मारा परै सुनाय ॥ कोऊ हारा नहिं काहू सों दोउरण परा बरोबरि आय ५० जोगा ठाकुर नैनागढ़ का सय्यद बनरस का सरदार ॥ भोगा देवाके मुर्चा माँ दोउ दिशिहोय बरोबरि मार ५१ 'मन्नागूजर पूरन राजा दोऊ करें खूब तलवार ॥ बड़े लड़ैया रणमाँ राहिगे कायर छांड़ि भागि हथियार ५२ अमरढोल कहुँ रणमाँ बाजै गिरि उठि लड़ैं लड़ैताज्वान ॥ देखि तमाशा ऊदन बोले दादा सुनो बीर मलखान ५३ मरिमरि जीवैं नैनागढ़ के मैना दीख कबों असभाय ॥ कावा दै कै ऊदन चलिभे नैनागढ़ै पहुंचे आय ५४ संध्या द्वैगै ह्वाँ लश्कर में तब फिरि मारु बंद द्वैजाय ॥ ऊदन पहुंचे ह्वाँ मालिन घर तुरतै मोहर दीन थँभाय ५५ खबरि सुनावो म्वारि भौजीका आयो मिलन उदयसिंहराय ॥ सुनिकै वातैं मालिनि चलिभै सुनवैं खबरि सुनाई जाय ५६ सुनवाँ चलिभै तब महलन ते आई जहाँ लहुरवा भाय ॥ पाग बैंजनी शिरपर बाँधे ऊदन कह्यो बचन मुसुकाय ५७ याही कारण चिठिया पठई जल्दी अवो लहुरवा भाय ॥ जियत मोहोबे कोउ जाई ना डरिहौ बंश नाश करवाय ५८ मरे सिपाही क्यों जीवत हैं भौजी हाल देउ बतलाय ॥ सुनिकै वातें सुनवाँ बोली तुम सुनिलेउ लहुरवा भाय ५६ बरा बर्षलों मेरे वापने कीन्ह्यो कठिन तपस्या जाय ॥

आल्हाका विवाह । १३५ १६ मांगु मांगु तब इन्दर बोले बप्पा बोले माथ नवाय ६० अमरढोल जो हमको देवो तौ सब काम सिद्ध हैजाएँ ॥ एवमस्तु तब इन्दर बोले बप्पा भवन पहुंचे आय ६१ जबहीं क्षत्री गिरैं खेतमें अम्मरढोल देयं बजवाय ॥ कान भनक क्षत्रिन के परतै जीवैं तुरत बनाफरराय ६२ धोखे माड़ोके रहियो ना जहँ लैलियो बापका दायँ ॥ लड़े न जितिहौ मेरे बापसों तुमको भेद देउँ बतलाय ६३ देवी पूजन कल मैं जैहौं लेहौं अमरढोल मँगवाय ॥ माली बनिकै तहँ तुम आयो लीन्ह्यो अम्मर ढोल चुराय ६४ इतना कहिकै सुनवाँ चलिभै अपने महल पहुंची आय ॥ ऊदन आये फिरि तम्बूको बैठे जहाँ बनाफरराय ६५ हाल बतायो मलखाने ते सोयो सबै शतिको पाय ॥ भोर भुरहरे मुर्गा बोलत माली बने उदयसिंहराय ६६ जायकै पहुंचे तेहि मठियामाँ जहँपर सुनवाँ गई बताय ॥ घोड़ बेंदुला तहँ बांधा है मालिन बीच बनाफरराय ६७ फूल डिलैया माँ सोहैं भल सुन्दर हरवा रहे बनाय ॥ सुनवाँ जागी ह्याँ महलन में बोली मातै बचन सुनाय ६८ राति सुपनवाँ यक मैं देखा माता तुम्हें देउँ बतलाय ॥ संग सहेलिन देवी पूजैं तहँपर अमरढोल अरराय ६९ त्यहिते मनमाँ यह आई है पूजन करों भवानी जाय ॥ तुमसों माता यह बिनवतिहौं देवो अमरढोल मँगवाय ७० सुनिकै बातें रानी चलिभै पहुंची तुरत सेजपर जाय ॥ हाल बतायो महराजा को लीन्ह्यो अमरढोल मँगवाय ७१ सो दै दीन्ह्यो लै बेटी को बेटी सखियन लीन बुलाय ॥

२० आल्हखण्ड । १३६ चली भवानी फिरि पूजनको सुन्दरि गीतरहीं सब गाय ७२ जायकै पहुंचीं त्यहि मंदिरमाँ ज्यहिमाँ बसै दुर्गा माय ॥ अक्षत चन्दन सों पूजन करि लौंगनहार दीन पहिराय ७३ शीश नवायो जगदम्बाका सुनवाँ फूलनहार चढ़ाय ॥ भोग लगायो फिरि मेवा का सेवा अधिक कीन हरषाय ७४ किह्यो इशारा फिरि ऊदनको तुरतै लीन्ह्यो ढोल उठाय ॥ कूदि बेंदुलापर चढ़ि बैठ्यो लशकर तुरतपहुंच्योआय ७५ कहाँ कहाँ कहि माली दौरे रहिगे जहाँ तहाँ शिरनाय ॥ खबरि सुनाई नयपाली को सुनतै गयो सनाकाखाय ७६ जायकै पहुंच्यो तेहि मंदिर में जेहि में रहैं दुर्गा माय ! तुरत पंडितन को बुलवायो जानैं तंत्रशास्त्र अधिकाय ७७ इन्द्र यज्ञ नृपने तहँ ठानी स्वाहा स्वाहा परै सुनाय ॥ एकसहसमन होम करायो गायो वेदमंत्र तहँ भाय ७८ हाथ जोरिकै विनय सुनायो मानो सत्यवचन सुरराज ॥ बारह बरसै जब तप कीन्हों तबमोहिंढोल दियोमहराज ७६ जाति बनाफर की ओछी है तिनने चोरी लई कराय ॥ सुनिकै बातें ये राजा की भइ नभवाणि समयसुखदाय ८० तुम्हरे उनके नहिं काहूघर रहि है ढोल सुनो नृपराय ॥ इन्दर बोले फिरि देवन ते मानो बचन हमारे भाय ८१ आल्हा अम्मर हैं दुनिया में ते कस मरैं यहांपर आय ॥ देवी शारदा का वरदानी आल्हा केर लहुरवा भाय ८२ लै कै ढोलक तुम तम्बू ते पटको तुरत डांड़पर जाय ॥ सुनिकै बातें ये इन्दर की देवता तुरत चले शिरनाय ८३ लै कै ढोलक ते पटकत भे अपने धाम पहुंचे आय ॥

आल्हाका विवाह । १३७ २१ गा नैपाली निज मंदिर को लश्कर खुशी बनाफरराय ८४ ऊदन बोले फिर मलखे ते दादा मोहबेके सरदार ॥ कूच करावो अब लश्कर को चलिकै लड़ैं तासुके द्वार ८५ यह मन भाई मलखाने के तुरतै कूच दीन करवाय ॥ कोउ कोउ घोड़ा हंसचाल पर कोउकोउ मोरचालपरजायँ ८६ चित्रचालपर चतुरचालपर कोईकोईचलैं तितुरकी चाल ॥ मारु मारु कै मौहरि बाजैं बाजैं हाव हाव करनाल ८७ बाजैं डंका अहतंका के घूमत जावैं लाल निशान ॥ छाय अँधेरिया गै दशहू दिशि छिपिगे अंधकार में भान ८८ मारु मारु करि क्षत्री बोलैं रणमें बड़े लड़ैता ज्वान ॥ घोड़ी कबुतरी के ऊपर माँ आगे चला बीर मलखान ८६ तीनकोस जब फाटक रहिगा तब पुरबासी उठे डेराय ॥ यक हरिकारा दौरति आवै राजै खबरि सुनाई आय ६० सुनिकै बातें हरिकाराकी राजा मनै उठा अकुलाय ॥ जोगा भोगा तहँ बैठेथे बोले राजै शीश नवाय ६१ हुकुम जो पावैं महाराजा को डंका अबै देयँ बजवाय ॥ जाय न पावैं मोहबे वाले सबकी कटा लेयँ करवाय ६२ सुनिकै बातें ये लरिकन की राजै हुकुम दीन फर्माय ॥ जोगा भोगा दोऊ चलिभे लश्कर तुरत पहुंचे आय ६३ बाजे डंका अहतंका के शङ्का करे कोऊ नहिं काल ॥ घोड़ आपनेपर चढ़िबैट्ठ्यो पूरन पटना को नरपाल ६४ जोगा भोगा घोड़े बैठे लश्कर कूच दीन करवाय ॥ बाजे डंका अहतंका के पहुँचे समरभूमि में आय ६५ आगे घोड़ाहै जोगा का पाछे सकल शूर मरदार ॥

२२ आल्हखण्ड । १३८ घोड़ बेंदुला पर ऊदनहैं लीन्हे हाथ ढाल तलवार ९६ जोगा बोला तब घोड़ेते कौने डांड़ दबायो आय ॥ जितने आये हैं मोहवे के सबके मूड़ लेउँ कटवाय ९७ बातें सुनिकै ये जोगा की ऊदन तहां पहुंचे आय ॥ हमहैं क्षत्री मुहवे वाले हमरो मूडलेउ कटवाय ९८ सुनिकै बातें जोगा ठाकुर तुरतै खैंचिलीन तलवार ॥ ऐंचिकै मारा बघऊदन को सोऊ लीन ढालपर वार ९६ भोगा चलिभा तब ऊदनपर मलखे तुरत पहुंचे आय ॥ मलखेठाकुर के मूर्चा में कोउ राजपूत न रोकै पायँ १०० मन्नागूजर मोहवे वाला पूरन पटना का सरदार ॥ लड़ें बहादुर दोउ रणखेतन दोऊहाथ करैं तलवार १०१ घोड़ पपीहा की पीठिपर रूपन गरुदेय ललकार ॥ भाला छूटे असवारन के पैदलचलनलागितलवार १०२ गजके हौदा ते शर वर्षे नीचे करैं महावत मार ॥ कझा भिड़िगे तहँ घोड़न के अंकुशभिड़ेमहौतनक्यार १०३ पैदर के सँग पैदर भिड़िगे घोड़न साथ घोड़ असवार ॥ सूंदि लपेटा हाथी भिड़िगे हौदन होय तीर की मार १०४ चलैं कटारी कोनाखानी ऊना चलैं विलाइति केर ॥ लीन्हे भाला नागदवनि को मारैं एक एक को हेर १०५ झुके सिपाही नैनागढ़ के ऐंड़ा बेंड हनैं तलवार ॥ जोगा भोगा दोनों ठाकुर गरूई हाँक दीनललकार १०६ सदा न फूलै यह बन तोरई यारों सदा न सावन होय ॥ अम्मर देही नहिं मानुष कै मरिहै एकदिना सबकोय १०७ है मरदाना ज्यहि को बाना सो लड़ि मरै समर मैदान ॥

आल्हाका बियाह । १३६ २३ जीवत बचिहै जो मुर्च्चा ते पाई खान पान सनमान १०८ जो भगिजाई अब मुर्च्चा ते तेहिको हनों कठिन तलवार ॥ जोगा भोगा की बातें सुनि झूमनलागि शूर सरदार १०९ कटि कटि कल्ला गिरैं बखेड़ा मरि मरि होनलागखरिहान ॥ धरि धरि धमकैं रण खेतन में क्षत्री बड़े लड़ैता ज्वान ११० मूड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार १११ सवैया ॥ कौन शुमार करै ललिते अतिमार भई सो कहाँ लगगाई । खून कि धार बहे नदि नार किनार परैं गज ऊंट दिखाई ॥ नाच पिशाच करैं तहँ साँच लिये करखप्पर योगिनि आई ॥ गावत भूत बजावत ताल तहाँ करतालनकी धुनिछाई ११२ ऊदन बोले मलखाने ते दादा मोहबे के सरदार ॥ कठिन मवासी है नैनागढ़ ह्वाँपर बहुत रहौ हुशियार ११३ मन्नागूजर मोहबे वाले ज़ावो एक तरफ यहिबार ॥ चाचा मालिक सब तुम्हीं हौ राजा बनरस के सरदार ११४ तुम चलिजावो एक तरफको मारो ढूंढि ढूंढि कै ज्वान ॥ हाथिन केरे तुम हौदापर दादा हनो बीर मलखान ११५ इतना कहिकै बघऊदन ने हौदा उपर नचावा घोड़ ॥ काहू मारा तलवारी सों काहू हना तड़ाका गोड़ ११६ बाइस हौदा खाली ह्वैगै अकसर ऊदन के मैदान ॥ घोड़ी कबुतरी के ऊपरते बहुतन हना बीरमलखान ११७ जैसी जावै बनरसवाला आल्हा समर धनी तलवार ॥

२४ आल्हखण्ड । १४० भगैं सिपाही चौगिर्दा ते भारी होत चलै गलियार ११८ मन्नागूजर ऊजर कीन्हों देवै कठिन कीन तलवार ॥ को गति बरणै तहँ रुपनाकी रणमाँ भली मचाई मार ११९ पूरन राजा पटनावाला भाला लिये हनै दश पांच ॥ को गति बरणै तहँ भोगाकै घोड़ा ऊपर रहा सो नाच १२० हनि हनि मारै चौगिर्दा ते गरुई हाँक देय 'ललकार ॥ इतना सुनिकै मलखे ठाकुर तुरतै खैंचिलीन तलवार १२१ ऊदन बोले तब मलखे ते दादा मोहबे के सरदार ॥ सुनवाँ भौजी का भैया है आई मड़ये के त्यवहार १२२ इतना सुनिकै मलखे ठाकुर फ़ौजन तरफ पहूंचाय ॥ बहुतन मार्यो तलवारी सों बहुतनहन्यो ढालके घाय१२३ इतना कहिकै ऊदन चलिभे जोगा पास पहूंचे जाय ॥ जोगा बोला तब ऊदनते मानो कही बनाफरराय १२४ बड़ी दूरिते चलिआयो है आपनि लोह दिखावो आय ॥ सुनिकै बातें ऊदन बोले ठाकुर सत्य देयँ बतलाय १२५ मोरे मोहोबे में किरिया भै जो करि डरी चँदेलोराय ॥ कोऊ आवै समरभूमि में आपनिलोह दिखावैआय १२६ पहिले ल्वाहै वहिकी देखो पाछे आपनि देवदिखाय ॥ मारो मारो समर भूमि में नहिंशककरोमनैकछुभाय१२७ इतना सुनिकै जोगाठाकुर तुरतै लीन्ह्यो साँ ग उठाय ॥ मनाएक के सो अंदाजन ऊदन ऊपर दयोचलाय १२८ घोड़बेंदुला ऊपर उड़िगा नीचे सांगगिरी अरराय ॥ बचा बेंदुलाका चढ़वैया आल्हाकेर लघुरवाभाय १२६ ऊदन बोले फिरि जोगा ते दूसरि वार करो सरदार ॥

आल्हाका विवाह । १४१ २५ सुनिके बातें ये ऊदनकी तुरतै खैंचिलीन तलवार १३० ऐंचिकै मारा बघऊदनको ऊदन लीन ढाल परवार ॥ ऊदन बोल्यो फिरि जोगाते तिसरि वार करो सरदार १३१ खैंचि तड़ाका धनुही लीन्ह्यो तामें दीन्ह्यो तीर लगाय ॥ ऐंचिकै मारा सो ऊदनके ऊदनलीन्ह्यो वार बचाय १३२ खैंचि झड़ाका तलवारीको तुरतै हना उदयसिंहराय ॥ मूड़ बिसानी सो घोड़ेके बिन शिर परै रुंड दिखराय १३३ कोतल घोड़ा जोगा बैठे सायंकाल पहुंचा आय ॥ मारुबन्दभै दोनों दलमाँ फौजै चलीं थलनको धाय १३४ चरि चरि गौवैं घरका डगरीं उड़ि उड़ि पक्षिन लीन बसेर ॥ तारागण सब चमकनलागे संतन रमा रामको टेर १३५ करों तरंग यहाँ सों पूरण तव पद सुमिरि भवानीकन्त ॥ शमरमा मिलि दर्शन देवो इच्छा यही मोरि भगवन्त १३६ इति श्रीलखनऊनिवासि ( सी, आई, ई ) मुंशी नवलकिशोरात्मजवाबूप्रयागना- रायणजीकीआज्ञानुसारउन्नामप्रदेशान्तर्गतपँड़रीकलांनिवासिमिश्र वंशोद्भवबुधकृपाशङ्करसूनुपण्डितललिताप्रसादकृतऊदनविजय वर्णनोनामद्वितीयस्तरंगः २ ॥

सवैया ॥ शेष महेश गणेश मनाय, सदा वरदान यही हम पावैं । हाथगहे धनुबान सुजान, महान सदा ज्यहि वेद बतावैं ॥ कोटिन जन्म जहां उपजैं, रघुनन्दनके ढिगही तहँ आवैं । वरदान यही ललितेकर जान,सुजान सदा रघुनन्दन भावैं १

२६ - आल्हाखण्ड । १४२ सुमिरन ॥ गोपी घूमैं नहिं गलियनमें नहिंकहुँ नचत फिरतहैं श्याम॥ मानुष देही यह रहिहैना इकलो रही जगत में नाम १ नहीं भरोसा नर देहीको कैसे करै झूठ अभिमान ॥ सदा इकेलो तर बिरवाके मनमें करै रामको ध्यान २ यहै सहाई है दुनिया में गाई बेद पुराणन गाथ ॥ ताते ज्वानो खूब यह समझो गुजरो फेरि न आवै हाथ ३ समय जो पावो कछु दुनियामें ध्यावो सदा राम रघुराज ॥ विगरी सुधरै तुरतै तुम्हरी पूरण होयँ तुम्होरे काज ४ छूटि सुमिरनी गै देवनकै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥ सुन्दरवन को चिट्ठी जाई लड़ि हैं बड़े बड़े सरदार ५ अथ कथाप्रसंग ॥ उदय दिवाकर भे पूरब में किरणनकीन जगतउजियार ॥ जोगा भोगा त्यहि समया में आये तुरत राज दरबार १ हाथ जोरिकै जोगा बोले बप्पा वचन करो परमान ॥ पाँचलाख फौजै हम लैगे रहिगे तीनिलाख सब ज्वान २ सुनिकै बातें ये जोगा की राजै कागज़ लीन उठाय ॥ चिट्ठी लिखिकै अरिनन्दन को सुन्दरवन को दीन पठाय ३ पाती लैके हरिकारा गो सुन्दर वनै पहुंचा जाय ॥ पढ़िकै पाती अरिनन्दन ने गौरीनन्दन चरण मनाय ४ तुरत बुलायो सेनापति को तासों कह्यो हाल समुझाय ॥ जितनी सेना सुन्दरवन की सबियाँ कूच देव करवाय ५ । सुनिकै बातें महराजा की कूचक डङ्का दीन बजाय ॥ कूच कराये सुन्दरवन ते नदी निकट पहुँचे आय ६