आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
उदयसिंहकाहरण । ५१६ ३ बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्द गा छाय ११ आठ रोजकी मैजलि करिकै पहुँचा तहाँ बनांफरराय ॥ तम्बू गड़िगा तहँ ऊदन का भारी ध्वजा रहा फहराय १२ सुभिया बेड़िनि झुन्रागढ़ ते पहुँची सबऊ बिठूरै जाय ॥ करै तमाशा सो तम्बुन में पावै द्रव्य तहाँ अधिकाय १३ जहँपर तम्बू था ऊदन का - सुभिया तहाँ पहुँची आय ॥ रूप देखिकै बघऊदन का दीन्ह्यो नाच रंग बिसराय १४ कछु नहिं भावै सुभिया मनमा ठगिनी भई तहाँपर आय ॥ औरी नटिनी सँग जे आईं तिनका नाच दीनकरवाय १५ अपना बैठे तहँ सोचति है कैसे मिलैं बनाफरराय ॥ जादू डारौं जो ऊदन पर तबहुँन काजसिद्धदिखलाय १६ जाहिर जादू मा सुनवाँ है हमरे जाय प्राण पर आय ॥ मनमा सोचै मनै बिसूरै मनमा बार बार पछिताय १७ डारि मोहनी दी लश्कर मा जेवर डिब्बा लीन उठाय ॥ दीन रुपैया ऊदन ठाकुर नटिनिन कूचदीन करवाय १८ चढ़ीं पालकी सुनवाँ फुलवा गंगा उपर पहुँचीं जाय ॥ मज्जन कीन्ह्यो उदयसिंह तहँ विप्रनदानदीन अधिकाय १९ मज्जन कीन्ह्यो जगनायक जी प्रातःकृत्य कीन हर्षाय ॥ दान मान दै सब विप्रन को सबहिन कूचदीनकरवाय २० लखा तमाशा औ मेला खुब तम्बुन फेरि पहुँचे आय ॥ उखरि ग तम्बू फिरि ऊदन का लश्कर कूच दीन करवाय २१ बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्द गे छाय ॥ अस्त दिवाकर जब पश्चिम भे तम्बूदीन तहाँ गड़वाय २२ उत्तम नदिया हैं यमुनाजी उतरे जहाँ बनाफरराय ॥
१ आल्हखण्ड । ५२० डिब्बा दीख्यो नहिं जेवर को सुनवाँ गई सनाकाखाय २३ तुरत बनाँफर उदयसिंह को अपने पास लीन बुलवाय ॥ कहि समुझावा तहँ ऊदन ते डिब्बा नहीं परै दिखलाय २४ एक लाख का सब गहना है कैसी करैं बनाफरराय ॥ डिब्बा भूलाहै बिठूर मा मोको याद भयो यहँ आय २५ काह बतावों मैं देवर ते करिये कैसो कौन उपाय ॥ धीरज राखो अपने मनमा बोले वचन ल्हुरवाभाय २६ तुरत बुलायो जगनायक को औ सब हाल कह्यो समुझाय ॥ हम तो जावत हैं बिठूर को तुम अब कूचजाउ करवाय २७ यह मन भायगई जगना के ऊदन गये बिठूरै आय ॥ कैयो दिनका धावा करिकै जगना अटा मोहोबे जाय २८ रहा न मेला कछु लौटेमा सिरकी पाल परे दिखराय ॥ तिनमा नटिनी औ नट ठहरे गे तिन पास बनाफरराय २६ सुभिया दीख्यो जब ऊदन का भै मन खुशी तबै अधिकाय ॥ कहाँते आयो औ कहँ जैहौ ठाकुर हाल देउ बतलाय ३० सुनिकै बातें ये सुभिया की बोले फेरि बनाफरराय ॥ नगर मोहोबा के हम ठाकुर आयन आजु बिठूर नहाय ३१ जब तुम नाचन गइ तम्बूमा गहनो गयो हमार हिराय ॥ पतालगावन त्यहि आयन है तुमते साँच दीन बतलाय ३२ इतना सुनिकै सुभिया बोली मानो साँच बनाफरराय ॥ पँसासारी हमते खेलो हम फिरि पतादेवलगवाय ३३ खेल पसारा सुभिया बेड़िनि बैठे तहाँ ल्हुरवाभाय ॥ जुआँ युद्धसों साँचे क्षत्री कबहूँ न धरैं पछारी पाँय ३४ नल औ पुष्कल आगे खेल्यो झेल्योदुःख नृपति अधिकाय ॥
उदयसिंहकाहरण । ५२१ ५ भारी गाथा नलराजा की देखो महाभारत में जाय ३५ द्वापर शकुनी के सँग खेल्यो कुन्ती पुत्र युधिष्ठिरराय ॥ हारि द्रौपदी महाराजा गे खैंचा चीर दुशासन आय ३६ मानिकै शासन दुर्योधन का पहुँचे बनोवास फिरिजाय ॥ काटिकै संकट महाराज सब कीन्हेनि महाभारत फिरि आय ३७ यहु दुखदाई पंसासारी खेलन लागि बनाफरराय ॥ जादू डारी सुभिया बेड़िनि भे तब सुवा लहुरवा भाय ३८ डारिकै पिंजरा मा ऊदन का सुभिया कूच दीन करवाय ॥ जायकै पहुँची फिरि दिल्ली मा जहँ पर बसैं पिथौरा राय ३६ जहाँ कचहरी दिल्लीपतिकी सुभिया गई यतन सों धाय ॥ करी बन्दगी महाराजा को दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ४० सुभिया बोली फिरि पिरथी ते राजन साँच देयँ बतलाय ॥ डारिकै जादू हम ऊदन पर औ मेला ते लई चुराय ४१ पै डर हमरे है आल्हा का स्वामी जगा देउ बतलाय ॥ डारिकै सिरकी हम दिल्ली मा निर्भय बसी पिथौरा राय ४२ इतना सुनिकै पिरथी बोले सुभिया कूच देउ करवाय ॥ जो सुनिपै हैं आल्हा ठाकुर हम ते रारि मचै हैं आय ४३ इतना सुनिकै सुभिया चलिभै डेरन फेरि पहुँची आय ॥ कूच करावा फिरि दिल्ली ते सब दरबार भँझावा जाय ४४ कहूँ ठिकाना जब लाग्योना सुन्नागढ़ै गयी तब धाय ॥ जहाँ कचहरी गजराजा की सुभिया तहाँ पहुँची जाय ४५ हाथ जोरिकै महाराजा के आपन हाल दीन बतलाय ॥ जगा चाहती हम सुन्नागढ़ यह इककाज हमारो आय ४६ इतना सुनिकै राजा बोले सुभिया कूच जाउ करवाय ॥
६ , आल्हखण्ड । ५२२ जो सुनि पै हैं आल्हा ठाकुर हमते रारि मचै हैं आय ४७ सुनिकै बातें गजराजा की सुभिया कूच दीन करवाय ॥ झारखण्ड के फिरि जंगल मा डेराजाय दीन गड़वाय ४८ चौकी पहरा करि जादू के निर्भय बसी तहाँ सुखपाय ॥ सुनवाँ सोचै ह्याँ महलन मा आये नहीं लहुरा भाय ४६ पता लगावों मैं ऊदन का जावों देश देश को धाय ॥ यहै सोचिकै रानी सुनवाँ चिल्हियाबनीसरगमड़राय ५० पहिले ढूँढ़ा त्यहि बिठूर का पाछे गयी कामरू धाय ॥ सिलहट बिजहट मौरँग भुन्ता दिल्लीशहरलखा फिरिजाय ५१ पता न पायो जब ऊदन का पहुँची झारखण्ड में आय ॥ तहाँ पै डेराहैंड बेड़िनि के सुनवाँ बैठि बरगदे जाय ५२ पेड़ बरगदा के नीचे मा सुभिया पलँग लीन बिछवाय ॥ लैकै पिंजरा फिरि सुवना का मानुष तुरतै दीन बनाय ५३ खेलै चौपरि सँग ऊदन के सुभिया बोली बचन सुनाय ॥ व्याह हमारे सँगमा करिये मानो कही बनाफरराय ५४ भजिये अल्ला बिसमिल्ला को ऊदन रटो खुदाय खुदाय ॥ तब सुख पैहौ तुम देहीं का नाहीं खाल लेउँ खिचवाय ५५ खुदा खैरियत तुम्हरी करि हैं बिसमिल भलाकरी सबकाल ॥ बाबा आदम संकट टारी मेटी अली भली जंजाल ५६ बातें सुनिकै ये बेड़िनि की बोला देशराज का लाल ॥ खुदा खुदाई चहु दिखलावैं बिसमिलआयजायँततकाल५७ ऊदन व्याहैं नहिं बेड़िनि को कबहूँ राम नाम बिसराय ॥ देश आरिया के क्षत्री हम कैसे मुसलमान ह्वैजायँ ५८ जब छुइजावैं मुसलमान को तबहीं तुरत करें अस्नान ॥
उदयसिंहकाहरण । ५२३ ७ बेवश हैकै पिंजरा आयन ताते छूटिगयो सब मान ५६ पढ़ै फारसी हम बिद्या ना अपनौ धर्म करैं प्रतिपाल ॥ नित प्रति ध्यावैं रघुनन्दन को पूरणब्रह्म सुरासुर पाल ६० खाल न रहै जो देहीमा केवल प्राण करैं विश्राम ॥ तबहूँ मुख सों ऊदन ठाकुर कवहूँ न लेयँ खुदाको नाम ६१ निर्भय बातें सुनि ऊदन की बरगद डार दीन टँगवाय ॥ बहुतक बाँसन हनि हनि मारा ऊदन जपो खुदाय खुदाय ६२ सुनिकै बातें ये सुमिया की बोला फेरि बनाफरराय ॥ ऊदन ब्याहैं नहिं बेड़िनि को कवहूँ राम नाम बिसराय ६३ बात न दूसरि हम अब कहिबे चहु तन धजीधजीउड़िजाय ॥ ऊदन ब्याहैं नहिं बेड़िनि को कवहूँ राम नाम बिसराय ६४ सुनिकै बातें उदयसिंह की तुरतै सुवना लीन बनाय ॥ डारिकै पिंजरामा ऊदन का टाँगा फेरि बरगदा आय ६५ देखि दुर्दशा यह ऊदन की सुनवाँ बार बार पछिताय ॥ डारि मशान दियो सुनवाँ ने पाछे पिंजरा लीन उठाय ६६ लैकै पिंजरा कछु दूरी मा सुनवाँ गई तड़ाका धाय ॥ सुवना लैकै फिरि पिंजरा ते मानुष तुरतै दीन बनाय ६७ सुनवाँ बोली फिरि ऊदन ते क्यों नहिं देवर जपो खुदाय ॥ काहे बिज्में तुम बेड़िनि में नित प्रति सहौ बाँसके घाय ६८ चलिये देवर अब मोहबे को तुम्हरी बार बार बलिजायँ ॥ सुनिकै बातें ये सुनवाँ की बोले फेरि बनाफर राय ६९ चोरी चोरा ना हम जैहैं तुमते साँच देयँ बतलाय ॥ लैकै फौजैं दादा आवैं हमरी कैद लेयँ छुड़वाय ७० ऐसे ऊदन अब जैहैं ना नित प्रति सहैं बाँसके घाय ॥
८ आल्हखण्ड । ५२४ सुवा बनावो अब मानुष ते टाँगो फेरि बरगदा जाय ७१ इतना सुनिकै रानी सुनवाँ टाँगा फेरि बरगदा आय ॥ चील्ह रूप ह्वै उड़ि तहँनाते पहुँची फेरि मोहोबे जाय ७२ मानुष ह्वैकै फिरि महलनमा इन्दल पूत लीन बुलवाय ॥ कहि समुझावा सब इन्दल ते बप्पै खबरि जनावो जाय ७३ सुनिकै बातें ये माता की इन्दल पूत चला शिरनाय ॥ जहाँ कचहरी है आल्हा कै इन्दल पूत पहुँचा आय ७४ बड़े प्यार सों आल्हाठाकुर अपने पास लीन बैठाय ॥ फिरि शिर सूंघ्यो आल्हाठाकुर बोल्यो मधुरवचनमुसुकाय ७५ काह लालसा है बचुवा कै सो अब बेगि देउ बतलाय ॥ इतना सुनिकै इन्दलठाकुर कहिगा यथातथ्य सब गाय ७६ सुनिकै आल्हा बोलन लागे है यहु दुष्ट लहुरवा भाय ॥ करकति छाती दुख सुनिकै अब त्यहिते कैद छुड़ावब जाय ७७ इतना कहिकै आल्हा ठाकुर डंका तुरत दीन बजवाय ॥ सजिगालश्करफिरिआल्हाका तुरतै कूच दीन करवाय ७८ बनिकै चिल्हिया सुनवाँ रानी आधे सरग रही मड़राय ॥ जाय बरगदा के फिरि पहुँची चुप्पे बैठि डारपै जाय ७६ डारि मशान दयो सुभियादल तुरतै पिंजरा लीन उठाय ॥ कछु दूरिचलि झारखण्ड ते फूँका मन्त्र तहाँपर जाय ८० मानुष ह्वैकै फिरि बघऊदन ठाढ़े भये शीश को नाय ॥ तब समुझावा रानी सुनवाँ लश्करगयो तुम्हारो आय ८१ चील्हरूप ह्वै रानी सुनवाँ बैठी एकडार पै जाय ॥ तहँने चलिकै ऊदन ठाकुर आगे मिले फौजमें आय ८२ लादू चौंरी सुभिया वाली सबियाँ हाल कहा समुझाय ॥
उदयसिंहकाहरण । ५२५ ६ इतना सुनिकै सुभिया बेड़िनि तुरतै उठी तड़ाका धाय ८३ सहुवा बीरन को बुलवावा औ सब हाल दीन बतलाय ॥ करो तयारी समरभूमि की आये लड़न बनाफरराय ८४ खबरि फैलिगै यह बेड़ियन-मा हैंगे डेढ़ सहस तय्यार ॥ झीलम बखतर सबहिन पहिरा सबहिन बाँधिलीन हथियार ८५ कोउकोउबेड़ियाचढ़िहाथिनमा कोउ कोउ घोड़भये असवार ॥ बहुतक बेड़िया हैं पैदल मा लीन्हे हाथ ढाल तलवार ८६ गड़िगा तम्बू ह्वाँ आल्हा का भारी ध्वजा रहा फहराय ॥ बाजै डंका अहर्तंका का हाहाकार शब्दका छाय ८७ देवा ऊदन इन्द्दल ठाकुर तीनों भये बेगि तय्यार ॥ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार ८८ दुहुँ दल तुरतै इकठौरी भे लागी चलन तहाँ तलवार ॥ कहुँ कहुँ भाला कहुँ कहुँ बरछी कहुँ कहुँ मारैं ज्वान् कटार ८६ कटि भुजदण्डै गिरैं खेत में उठि उठि रुण्ड करें तलवार ॥ मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ६० मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ॥ ना मुहँ फेरैं मोहबे वाले नादल बेड़ियनकात्यहिबार ६१ बड़े लड़ैया ई बेड़िया हैं इनते हारिगयी तलवार ॥ को गति वरणै तहँ इन्द्दल कै सबदिशिकरै भड़ाभड़मार ६२ सुनवाँ सुभिया कै वरणी में जादुन दऊ बड़ी हुशियार ॥ आगी पानी अरु आँधी की पुरियन होय तहाँपर मार ६३ चलै सिरोही रणमण्डल मा क्षत्री गरु करैं ललकार ॥ कहुँ ज्वालपकनि बिजली चमकनि तड़पै चहूँदिशा तलवार ६४ क्षत्री गाजैं डंका बाजैं बाजैं तहाँ शूर सरदार ॥
१० | आल्हाखण्ड | ५२६ को गति बरणै तहँ बेड़ियन कै उनतो भली मचाई रार ६५ इनहुन दुर्गति तिनकी कीन्ही कायर छोड़ि भागि मैदान ॥ कटि कटि कल्ला गिरैं बलेड़ा घैहा होयँ अनेकन ज्वान ६६ पाँचसै बेड़िया घायल हैगे सब दल रहिगा एकहजार ॥ तीनसै क्षत्रिय मोहबेवाले जूझे समर तहाँ त्यहिवार ६७ रानी सुनवाँ सुमिया बेड़िनि जादुन करैं तहाँपर रार ॥ कोऊ काहूते कमती ना दोऊ जादुन में हुशियार ६८ बीरमहम्मद की पुरिया को सुमिया छाँड़ि दीन त्यहिवार ॥ नारसिंह की जादू लैके सुनवाँ तजा तुरतललकार ९९ चिल्हिया हैकै सुनवाँ सुमिया दूनन खूब कीन मैदान ॥ लड़ते लड़ते दूनों चिल्हिया पहुँचींजायतुरतअसमान १०० लड़ते लड़ते द्वउ ऊपर ते नीचे गिरीं तड़ाका आय ॥ बड़ी लड़ाई भै पंजन ते अद्भुत समर कहानाजाय १०१ जहाँ लड़ाई द्वउ चिल्हियनकी इन्दल तहाँ पहुँचा आय ॥ सुनवाँ बोली तहँ इन्दल ते बेटा मूड़ देउ बगदाय १०२ इन्दल बोले तब सुनवाँ ते कैसे देवैं मूड़ गिराय ॥ जो हम मारैं यहि तिरिया को तौ रजपूती धर्मनशाय १०३ हाथ मेहरियन पर छाँड़ैं ना कबहूँ बीर समर में माय ॥ कैसे मारैं हम तिरिया को माता सोचो और उपाय १०४ इतना सुनिकै सुनवाँ बोली बेटा जूरा लेउ उड़ाय ॥ वातैं सुनिकै ये सुनवाँ की जूरा काटि लीन त्यहिठायाँ १०५ जीवन दान दीन सुमियाको सोऊ भागि तड़ाकाधाय ॥ जादू झूठी भई सुमिया की तबसोलागितहाँपछिताय १०६ ऊदन देबाकी मारुन मा बेड़िया भागे खेत बराय ॥
उदयसिंहकाहरण । ५२७ ११ जो कोउ भागतहै सम्मुख ते त्यहिना हनैं बनाफरराय १०७ मारे मारे तलवारिन ते बिड़िया चिरियाकरें निदान ॥ खेत छूटिगा सब बिड़ियन ते जीता उदयसिंह मैदान १०८ बाजे डंका अहंतंका के हैगा घोर शोर घमसान ॥ जितने क्षत्री मोहबेवाले डेरन आयगये ते ज्वान १०६ चील्ह रूप है सुनवाँ रानी महलन आयगयी तत्काल ॥ कूच करायो फिरि लश्कर को बेटा देशराज के लाल ११० आल्हा ठाकुर पचशब्दा पर इन्द्ल पपिहापर असवार ॥ घोड़ बेंदुला पर ऊदन हैं कम्मरपरी नाँगि तलवार १११ यहु अलबेला भीषमवाला देवा मैनपुरी चौहान ॥ घोड़ मनोहर पर सोहतहै रणमा बड़ालड़ैयाज्वान ११२ कैयो दिनकी मैजलि करिकै झुन्नागढ़ै पहुँचे आय ॥ गड़िगा तम्बू तहँ आल्हा का भारी ध्वजारहा फहराय ११३ ढोल नगारा तुरही बाजीं हाहाकार शब्दगा छाय ॥ गा हरिकारा तब झुन्नागढ़ राजै खबरिजिनावा जाय ११४ आल्हा ऊदन मोहबे वाले धूरे परे हमारे आय ॥ आवैं फौजें झारखण्ड ते अबतो नगर मोहोबे जायँ ११५ सुनिकै बातें हरिकारा की पलकी तुरत लीन मँगवाय ॥ इशरत मुहरें इक हीरा लै पलकी चढ़ा तड़ाकाधाय ११६ जहाँ बनाफर आल्हा ठाकुर राजा तहाँ पहुँचा आय ॥ आदर करिकै आल्हा ठाकुर अपने पास लीन बैठाय ११७ द्वरि अशर्फी दी सम्मुखमा हीरा हाथ दीन पकराय ॥ सखियाँ गाया तब ऊदन की आल्हा यथातथ्यगे गाय ११८ बड़े प्रेम सों दोऊ ठाकुर बोलैं प्रीति रीति के भाय ॥
१२ आल्हखण्ड । ५२८ बिदा मांगिकै फिरि आल्हासों राजा चढ़ा पालकी जाय ११६ गा महराजा मुन्नागढ़ मा तम्बुन स्वये बनाफरराय ॥ राति बसेरा करि मुन्नागढ़ भुरहीं कूच दीन करवाय १२० कैयो दिनकी मैजलि करिकै मोहबे गये बनाफरराय ॥ सौसौ तोपैं दर्गी सलामी जबघरगयेउदयसिंहराय १२१ को गति वरणै त्यहि समयाकै हमरे बून कही ना जाय ॥ ऊदनहरण पूर अब ह्रैगा ध्यावैं तुम्हें शारदा माय १२२ कण्ठ में बैठो तुम महरानी भूले अक्षर देउ बताय ॥ आशिर्वाद देउँ मुंशीसुत जीवो प्रागनरायण भाय १२३ रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥ मालिक ललिते के तबलौं तुम यशसों रहौ सदा भरपूर १२४ माथ नवावों पितु माता को जिनबल पूर कीन यह गाथ ॥ नहीं भरोसा निज भुजबल का स्वामी रामचन्द्र रघुनाथ १२५ पूर तरंग यहाँ सों ह्रैगा सुमिरों तुम्हें भवानीकन्त ॥ राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छा यही मोरि भगवन्त १२६ इति श्रीलखनऊनवासि (सी,आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजबावूप्रागना- रायणजीकीआज्ञानुसारउनामप्रदेशान्तर्गतपँड़रीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनु पं० ललिताप्रसादकृतऊदनहरण वर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥ उदयसिंहकाहरणसमाप्त ॥ इति ॥
अथ आल्हखण्ड ॥ बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्धवर्णन ॥ सवैया ॥ ब्याकुल गंध्रब नागसबै नरदेव अदेव लहे दुखभारा। गोतनु धारि गयी पिरथी अरथी सँग देवन लै त्यहिबारा ॥ वाणि भई तबहीं नभते ललिते अवधेशके होब कुमारा । ध्यावत ब्रह्म सुरासुर जाहि स्वई प्रभु राम लियो अवतारा १ सुमिरन ॥ दोउ पद बन्दौं रामचन्द्र के जिनबल चलाजाउँ भवपार ॥ राम न होते जो दुनियामा बेड़ा कौन लगावत पार १ कौन समुन्दर को मथिडारत चौदारतन लेत निकराय ॥ कोथों मारत दशकन्धर को धारत कौन धर्मपथ आय २ कोथों तारत इनपापिन को जिनकीदशाकही ना जाय ॥ मारा मारा कहि तरिगे जो पापी बालमीकि असभाय ३ गीधअजामिलगतिगणिकाकी सबकोविदितभलीविधिआय ॥ १४
५. पञ्चम भाग: आल्हा का संन्यास, अमरत्व वरदान व महाकाव्य उपसंहार
२ आल्हाखण्ड । ५३० ये सब पापी हैं प्रथमै के तरिगे रामचरण को ध्याय ४ स्वई भरोसा धरि जियरेमा नितप्रति धरों चरणपरमाथ ॥ पारलगायो भवसागर ते स्वामी रामचन्द्र रघुनाथ ५ छोड़ि सुमिरनी अब रघुबर कै बेला गौन कहौं सब गाय ॥ ब्रह्मा ठाकुर दिल्ली जैहैं पैहैं विजय पिथौराराय ६ अथ कथाप्रसंग ॥ एक समैया इक औसर मा बैठे सभा रजा परिमाल ॥ आल्हा ऊदन इन्द्दल देवा लाखनि साथ और नरपाल १ को गति बरणै त्यहि समयाकै भारी लाग राजदरवार ॥ त्यही समैया त्यहि औसरमा आवा उरई का सरदार २ आवो आवो बैठो बैठो राजै कीन बहुत सतकार ॥ बैठिग ठाकुर उरई वाला आला चुगुलन मा सरदार ३ बिना बुलाये ते बोला फिरि तुम सुनिलेउ रजापरिमाल ॥ औसर ऐसो फिरि पैहौ ना ब्रह्मा गौनलेउ यहिकाल ४ बैठि कनौजी लाखनिराना बैठे देशराज के 'लाल ॥ लैकै वीरा यहि औसर मा तुम धरिदेउ रजापरिमाल ५ कौन बहादुर यहि समया मा बेला गौन चबावै पान ॥ स्यावासि स्यावासि माहिलठाकुर तुम्हरे बचन ठीक परमान ६ इतना कहिकै परिमालिक जी तुरतै धरा तहाँपर पान ॥ है कोउ क्षत्री तेहेवाला लेवै पान आन सो ज्वान ७ सुनिकै बातें परिमालिक की सब कोउ गये सनाकाखाय ॥ बोलि न आवा क्यहु ठाकुरते आनन गये तुरत मुरझाय ८ चारि घरीदिन यहिविधि बीता कोउ न पान पास समुहान ॥ तवै बहादुर द्यावलि वाला पहुँचा उदयसिंह तहँ ज्वान ६
बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३१ ३ माहिल बोले तब ब्रह्मा ते ठाकुर काह धरावो नाम ॥ पान चबावो तुम दिल्ली का नाहीं उदयसिंह का काम १० जाति कुलीने नहिं ऊदन हैं नहिं विश्वासयोग यहिकाल ॥ इन्हें निकारयो परिमालिक है खोटे देशराज के लाल ११ मतलब इन ते जो रहिहैं ना पिरथी करी बहुत सनमान ॥ अगुवाकारी होयँ बनाफर तौ सब लड़ैं बीर चौहान १२ पान चबावों तुम जल्दी सों देबे बिदा तुरत करवाय ॥ इतना सुनिकै ब्रह्मा चलिभे पहुँचे पाननिकट फिरिआय १३ लै कै बीरा तहँ ऊदनते ब्रह्मा गये तड़ाकाखाय ॥ आल्हा-मनमा कायल द्वैगे ऊदन बहुत गये शरमाय १४ दूनों भाई चले तड़ाका दशहरि पुरै पहुँचे आय ॥ आल्हा बोले तहँ ऊदन ते यह गति भई लछुरवा भाय १५ बड़ बड़ राजन के सम्मुख मा ब्रह्मा लीन्ह्यो पान छिनाय ॥ घटिहा राजा मोहबे वाला कैसी हँसी दीन करवाय १६ तुम नहिं मोहवे ऊदन जावो हट्का रहे लछुरवाभाय ॥ कहा हमारा तुम माना ना ताका पायगयो फलआय १७ इतना कहिकै आल्हा ठाकुर सोये बिकट नींद को पाय ॥ कछू दिनौना के बीते मा गौना समय पहुँचा आय १८ मल्हना निश्चय तब ठहरायो जैहैं नहीं बनाफरराय ॥ बिना बनाफर उदयसिंह के लैहै कौन बिदा करवाय १६ यहै सोचिकै मल्हना रानी लाखनिराना लीन बुलाय ॥ आल्हा ऊदन दुउ रूठे हैं जान्ने आप कन्नौजीराय २० हूँ दिन बाकी नहिं गौना के याकी कौन करी तदबीर ॥ जब सुधि आवै इन बातन की तबहीं होय करेजे पीर २१
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आश हमारी अब तुमहीं लग साँची सुनो कनौजीराय ।. तुम जो जावो ब्रह्मा सँग मा तौ सबकाम सिद्धिहैजाय २२ सुनिकै बातें ये मल्हना की बोले फेरि कनौजीराय ॥ हम चलिजैबे ब्रह्मा सँग मा लैबे विदा मातु करवाय २३ इतना कहिकै लाखनि चलिभे अपनी फौज पहुँचे आय ॥ बाजा डङ्का इत ब्रह्मा का हाहाकार शब्द गा छाय २४ उतै कनौजी लाखनिराना अपनी फौज लीन सजवाय ॥ यह सुधि पाई उदयसिंह जब आये तबै तड़ाकाधाय २५ औ यह बोले लखराना ते मानो कही कनौजीराय ॥ साथी हमरे की ब्रह्मा के जोतुमफौजलीनसजवाय २६ पहिले लड़िकै हमरे सँगमा पाछे धरयो अगारी पाँय ॥ इतना सुनिकै सय्यद् बोले तुम सुनिलेउ कनौजीराय २७ संग न जावो तुम ब्रह्मा के सम्मन यहै ठीक ठहराय ॥ करो लड़ाई तुम ऊदन ते तौ सब जैहैं काज नशाय २८ हितू तुम्हारे नहिं ब्रह्मा हैं जैसे हितू बनाफरराय ॥ कहा मानिकै यह सय्यद् का लाखनि फेंटदीनखुलवाय २६ भई अठारह उरई वाले मोहबे अये तड़ाकाधाय ॥ बड़ बड़ शूरन को सँग लैके ब्रह्मा कूच दीन करवाय ३० सात दिनौना के अरसा माँ दिल्ली गये बँदेलेराय ॥ दिल्ली केरे फिरि ढाँड़े गा लश्कर ब्रह्मा दीन डराय ३१ गड़िगा तम्बू तहँ ब्रह्मा का भारी ध्वजा रहा फहराय ॥ माहिल पहुँचे फिरि दिल्ली मा जहँ पर बैठ पिथौरा राय ३२ बड़ी खातिरी पिरथी कीन्ही अपने पास लीन बैठाय ॥ काहे आये उरई वाले आपन हाल देउ बतलाय ३३
[Header] बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ४३१
इतना सुनिकै माहिल बोले मानो साँच पिथौराराय ॥ ब्रह्मा आये हैं गौने को फौजैं परीं डाँड़ पर आय ३४ पहिले बीरा ऊदन लीन्ह्यो सो ब्रह्मा ने लीन छिनाय ॥ अब मन तुम्हरे जैसी आवै तैसी कहो पिथौराराय ३५ इतना सुनिकै पिरथी बोले माहिल साँच देयँ बतलाय ॥ बिना लड़ाई के गौना कहु कैसे देयँ पिथौरा राय ३६ करें लड़ाई अब सैंभराभरि पाछे बिदा लेयँ करवाय ॥ यह कहि दीजो तुम ब्रह्मा ते माहिल बार बार समुझाय ३७ इतना सुनिकै ब्रह्मानँद ते माहिल खबरि जनाई आय ॥ बिना लड़ाई के मनिहैं ना यहु महराज पिथौराराय ३८ इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर कागज कलमदान मँगवाय ॥ लिखिकै चिट्ठी दी धावन को धावन चला तड़ाका धाय ३६ जहाँ कचहरी पृथीराज की धावन अटा तड़ाका आय ॥ हाथ जोरिकै धावन तुरतै चिट्ठी तहाँ दीन पकराय ४० बाँचत चिट्ठी ब्रह्मानँद की पिरथी क्रोध कीन अधिकाय ॥ शूर चौंड़िया को बुलवायो औ सबहालकह्योसमुझाय ४१ तुरतै डंका को बजवावो सबियाँ फौज लेउ सजवाय ॥ बाँधि जँजीरन तुम ब्रह्मा का हमका बेगि दिखावो आय ४२ हुकुम पिथौरा का पावनखन डंका तुरत दीन बजवाय ॥ बाजे डंका अहतंका के हाहाकार शब्द गा छाय ४३ सजिसजितोपें खेतन चलिभईं हाथिन होन लागि असवार ॥ झीलमबखतरपहिरी सिपाहिन हाथ म लई ढाल तलवार ४४ दुइ दुइ भाला इक इक बरछी कोउ कोउ बाँधी तीनकटार ॥ वीर तमंचा कड़ाबीन औ गदकागुर्ज लीन त्याहिवार ४५
६ आल्हखण्ड । ५३४ कच्छी मच्छी नकुला सब्जा हरियल मुश्की घोड़ अपार ॥ ताजी तुर्की पँचकल्यानी इनपर होन लागि असवार ४६ अंगद पंगद मकुना भौंरा सजिगे श्वेतवरण गजराज ॥ सोहैं अँवारी तिन हाथिन पर बहुतन हौदा रहे विराज ४७ को गति बरणै त्यहि समया कै मानो कोप कीन सुरराज ॥ बाजैं डंका अह्तंका के मानों गिरैं उपर ते गाज ४८ पहिल नगाड़ा में जिनबन्दी दुसरे फाँदि भये असवार ॥ तिसर नगाड़ा के बाजत खन चलिभे सबै शूर सरदार ४९ खर ,खर खर खर कै रथदौरे रवन्ना चले पवन की चाल ॥ हाथी चिंघेरै घोड़ा हींसे कीन्हेनिशब्दबहुतनरपाल ५० गुस्ती धावन तहँ ब्रह्मा का. तम्बुन अटा तड़ाका आय । खबरि सुनाई यह ब्रह्मा को की दल अवै चँदेलेराय ५१ इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर फौजैं तुरत लीन सजवाय ॥ बाजे डंका अह्तंका के बंकन शंक दीन बिसराय ५२ ई निरशंका मोहबे वाले , बाँधेनि तुरत ढाल तलवार ॥ साजा ठाढ़ा हरनागर था ब्रह्मा फाँदि भये असवार ५३ पहिली लड़ाई भै तोपन कै पाछे चलन लागि तलवार ॥ कहुँ कहुँ भाला कहुँ कहुँ बरछी मारन लागि शूर सरदार ५४ तीर तमंचन की मारुइ भई कोताखानी चलीं कटार ॥ तेगा चमकै बर्दवान का ऊना चलै बिलाइति क्यार ५५ को गति बरणै त्यहि समयामा बाजै छपक छपक तलवारे ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ५६ ना मुहँ फेरैं दिल्ली वाले ना ई मोहबे के सरदार ॥ मुण्डन केरे मुड़ चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ५७
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को गति बरनै जगनायक कै मारे घूमि घूमि तलवार ॥ ब्रह्मा ठाकुर के मुर्चा मा कोउ न ठाढ़ होय सरदार ५८ लरिका मरिगे पृथीराज के क्षत्रिन छाँड़ि दीन मैदान ॥ धाँधू चौंड़ा त्यहि समया मा भारी कीन घोर घमसान ५६ भा खलभल्ला औ हल्लाअति लल्ला डारि भागि हथियार ॥ ना मुहँ फेरैं दिल्ली वाले ना ई मोहबे के सरदार ६० कीरति प्यारी के भूखे हैं दोऊ दिशिमा परम जुझार ॥ फिरि फिरि मारैं औ ललकारै यहु मल्हना को राजकुमार ६१ घोड़ा मारै भल टापन ते ऊपर आप करै तलवार ॥ ब्रह्माठाकुर के मुर्चा मा क्षत्री डारि भागि हथियार ६२ देखि तमाशा चौंड़ा धाँधू रहिगे चुप्प साधि त्यहि बार ॥ यहु निरशंकी परिमालिक का बहुतन पठै दीन यमद्वार ६३ रण अभिलाषा नहिं काहू के सब कउ गये मनैमन हार ॥ ठाकुर बेढब जगनायक है मैने जौनु चँदेले क्यार ६४ धाँधू ठाकुर के मुर्चा मा दूनों हाथ करै तलवार ॥ चौंड़ा ब्राह्मण इकवन्ता से बीरन रहा तहाँ ललकार ६५ रोज केतकी कहुँ फूलै ना चंपा रोज न लागै डार ॥ गई जवानी फिरि मिलिहै ना ना फिरि रोजचलै तलवार ६६ कीरति जैहै सब दुनिया मा जो कउ लड़ै शूर सरदार ॥ आखिर देही यह रहि है ना जोरी जोरन जोर हजार ६७ सदा न फूलै यह बन त्वरई यारो सदा न सावन होय ॥ सदा न पैहौ यह नर देही यारो सदा न जीवै कोय ६८ ऐसा बोल चौंड़ा कहि कहि क्षत्रिन दीन्हे खूब जुझाय ॥ ब्रह्मा ठाकुर त्यहि समया मा भारी हाँक कहा गुहराय ६६
८ आल्हाखण्ड । ५३६ पावैं पिछाड़ी का डाखो ना यारो राख्यो धर्म हमार ॥ मारो मारो ओ रजपूतो देहैं विजय अवश्य करतार ७० इतना कहिकै ब्रह्मा ठाकुर लाग्यो करन आप तलवार ॥ ब्रह्माठाकुर के मुर्चा मा कोउ न ठाढ़ होय सरदार ७१ जैसे भेड़िन भेड़हा पैठै जैसे अहिर बिडारै गाय ॥ तैसे मारे ब्रह्मा ठाकुर रणमा कोउ न रोकै पायँ ७२ ब्रह्माठाकुर के मारुन मा कोऊ शूर नहीं समुहाय ॥ लश्कर भाग्यो पृथीराज का पायो विजय चंदेलेराय ७३ त्यही समैया त्यहि औसर मा माहिल उरई का सरदार ॥ लिल्ली घोड़ी पर चढ़ि बैठ्यो तिकतिककरनलागत्यहिवार७४ जहाँ कचहरी पृथीराज की भारी लाग राज दरबार ॥ उतरिकै घोड़ीते भुइँ आवा पहुँचा उरई का सरदार ७५ आवत दीख्यो जब माहिल को राजा कीन बड़ा सत्कार ॥ आवो आवो उरई वाले माहिल राजा हितू हमार ७६ इतना कहिकै महराजा ने अपने पास लीन बैठाय ॥ 'माहिल बोले त्यहि समया मा मानो कही पिथौराराय ७७ लड़िकै जिनिहौ ना ब्रह्माते चहुवल देयँ तुम्हें करतार ॥ धाँधू चौंड़ा सब कोउ हारे जीता पूतु चंदेले क्यार ७८ बड़े लड़ैया मोहबेवाले उनके बांट परी तलवार ॥ उड़न बछेड़ा जिनके घर मा तिनते लड़ै कौन सरदार ७९ पिस्थी बोले तब माहिल ते ठाकुर उरई के सरदार ॥ कौन उपाय करैं यहि औसर ज्यहिमा विजयदेयँकरतार ८० इतना सुनिकै माहिल बोले ओ महराज पिथौराराय ॥ रूप जनाना करि ताहर का डोला आपु देउ पठवाय ८१
बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध। ५३७ ६ गाफिल देखें जब ब्रह्मा का तबहीं कैदलेयँ करवाय ॥ इतना सुनि कै ताहर बोले सम्मत नीक नहीं यह भाय ८२ रूप जनाना हम करिबे ना चहु तन धजीधजी उड़िजाय ॥ कीरति जैहै सब दुनिया ते औ रजपूती धर्म नशाय ८३ इतना सुनिकै चौंड़ा बोला हम बनिजाब जनानाभाय ॥ बिना बयारी जूना टूटै औ बिन औषध बहै वलाय ८४ साम दाम औ दण्ड भेद सों नितप्रति चतुरकरतहैं काम ॥ मोहिं पियारी यह कीरति है जीतैं शत्रु होय जगनाम ८५ सुनिकै बातें ये चौंड़ा की बोला पृथीराज चौहान ॥ स्याबासिस्याबासि चौंड़ा बकशी तुम्हरे बचन मोहिं परमान ८६ सुनी पिथौरा की बातें ये चौंड़ा चला तड़ाका धाय ॥ जायकै पहुँच्यो रंगमहल में सबियाँ जेवर लीन मँग़ाय ८७ अनवट बिछिया पाँयन पहिरे पहिरे कड़ा छड़ा त्यहिबार ॥ धरि परुपान दऊ पैरन मा त्यहिपर पायजेब झनकार ८८ किंकिणि पहिरी करिहाँयें मा कण्ठम पहिरि मोतियनहार ॥ बाजू जोसन बाँधि बजुल्ला दोऊ भुजन कीन श्रृंगार ८६ बनी पछेला पहुँची ककना दूनों हाथन करें बहार ॥ आठ अँगुरियन छल्ला पहिरे अँगुठा लीन आरसीधार ६० चुरियाँ पहिरी दउ हाथन मा तिनबिच लीन पनेरियाडार ॥ नथुनी लटकन बेसरि पहिरी कानन करनफूल शृङ्गार ६१ बेंदा धारयो फिरि माथे मा बँदियाँ शिरपर करें बहार ॥ मिस्सी रगरी सब दाँतन मा चौंड़ा बना जनाना यार ६२ सिया ओधि धरि छाती मा चोलीबन्द लीन कसवाय ॥ चीरी सारी काशमीर की शोभा कही बूत ना जाय ६३
१० आल्हाखण्ड । ५३८ दुलाहिनि बनिकै चौंड़ा बकशी तुरतै चढ़ा पालकी जाय ॥ जहरबुझाई लीन कटारी सो सारी में धरी चुराय ६४ ताहर बैठे दल गंजन पर धाँधू हाथी पर असवार ॥ झीलमबखतर पहिरिसिपाहिन हाथ म लई ढाल तलवार ६५ चली पालकी फिरि चौंड़ा की लश्कर कूच दीन करवाय ॥ इक हरकारा ताहर पठयो औ सवहाल दीनबतलाय ६६ खबरि जनावो तुम ब्रह्मा को बेला बिदा लेयँ करवाय ॥ आवत डोला है वेलाका इकले अत्रो चँदेलेराय ६७ इतना सुनिकै धावन चलिभा तम्बुन फेरि पहुंचा आय ॥ खवरि जनाई सब ब्रह्मा को जो कछु ताहर दीन बताय ६८ सुनिकै बातें हरकारा की हरनागर पर भयो सवार ॥ घरी अढ़ाई के अरसा मा पहुँचा मोहबे का सरदार ६६ आवत दीख्यो जब ब्रह्मा का ताहर बोले बचन उदार ॥ आवो आवो ब्रह्मा ठाकुर तुमते हारिगयी तलवार १०० डोला लाये हम बहिनी का ठाकुर बिदालेउ करवाय ॥ कौन डसरिहा हाँ तुम्हरो है जो अब रारि मचावैआय १०१ लड़ि भिड़ि तुमने हम हारे सब तब यह ठीक लीन ठहराय ॥ रंडा बैठै जो बहिनी मम तौ सब जैहैं काम नशाय १०२ यहै सोचिकै गहराजा ने डोला यहाँ दीन पठवाय ॥ बड़ी खुशहाली भै राजा के संग न आये बनाफरराय १०३ जो कहुँ औते ऊदन ठाकुर तौ हाँ होत युद्ध अविकाय ॥ बड़ी खुशहाली भै राजा के जोतुमलीन्ह्योपानछिनाथ १०४ अब यह डोला है बहिनी का मोहबे आपु देउ पठवाय ॥ मुनि मुनि बातें ये ताहर की ब्रह्मा तुरत गये पतियाय १०५