भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
( ६ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| उत्पलषट्क, उत्पलाद्यचूर्णं | २१८ | पथ्यादिचूर्णं | २८३- |
| व्योषाद्यचूर्णं, कलिङ्गादिगुटिका | २१९ | द्वन्द्वजातीसार-चिकित्सा | ” |
| कुटजावलेह | २२० | वातपित्तातिसार-चिकित्सा । | |
| द्वितीय कुटजावलेह | २२१ | कलिङ्गादि | ” |
| सिद्धप्राणेश्वर रस, कनकसुन्दररस | २२२ | पित्तश्लेष्मातिसार-चिकित्सा | ” |
| बृहत्कनकसुन्दररस, गगनसुन्दररस | २२३ | मुस्तादि, समङ्गादि | ” |
| कनकप्रभावटी | ” | कुटजादि | २३९ |
| मृतसंजीवनी वटी, आनन्द-भैरवरस | २२४ | वातश्लेष्मातिसार-चिकित्सा | ” |
| अमृतार्णवरस, कारुण्यसागररस | २२५ | चित्रकादि | ” |
| मृतसंजीवनरस | २२६ | त्रिदोषातिसार-चिकित्सा | ” |
| प्राणेश्वररस | २२७ | समङ्गादि-कषाय | ” |
| अभ्रवटिका | २२८ | पञ्चमूली-बलादि | २४० |
| अतिसार-चिकित्सा । | पुटपक्वौषधप्रयोगविधि, कुटज-पुटपाक | ” | |
| आम और पक्वके लक्षण | २२९ | श्योनाकपुटपाक, दाडिमपुटपाक... | २४१ |
| आम और पक्वके अन्य लक्षण | २३० | कुटज-लेह | ” |
| आम और पक्वातिसारकी चिकित्सा | ” | कुटजाष्टकावलेह | २४२ |
| आमातिसार-चिकित्सा | ” | दुग्ध-पानविधि | २४३ |
| धान्यपञ्चक और धान्यचतुष्क | २३३ | शोथातीसार-चिकित्सा | ” |
| स्वल्प शालपर्ण्यादि, बृहच्छाल-पर्ण्यादि | ” | भय-शोकज अतीसार चिकित्सा | ” |
| वत्सकादि, पथ्यादि | ” | पृश्निपर्ण्यादि | ” |
| यमान्यादि, कलिङ्गादि, कञ्चटादि | २३४ | रक्तातीसार-चिकित्सा | २४४ |
| कुटजादि | ” | रलाञ्जनादिचूर्णं, नारायणचूर्णं | २४७ |
| त्र्यूषणादिचूर्णं, शुण्ठ्यादिचूर्णं | २३५ | गुड़पाकमें विधि | २४८ |
| वातातीसार-चिकित्सा | ” | साधारणातिसार-चिकित्सा | ” |
| पूतकादि | ” | बिल्वादि, पटोलादि, प्रियंग्वादि... | ” |
| पथ्यादि, वचादि | २३६ | जम्ब्वादि | ” |
| पित्तातीसार-चिकित्सा | ” | वत्सकादि, नाभिप्रलेप | २४९ |
| मधुकादि, बिल्वादि | ” | प्रवाहिका-चिकित्सा | ” |
| कट्फलादि, किराततिक्तकादि | ” | अहिफेनयोग, अहिफेनवदिका | २५० |
| अतिविषादि | २३७ | जातीफलादिवटी, पूर्णचन्द्रोदयरस | २५१ |
| श्लेष्मातीसार-चिकित्सा | ” | बृहद्गगनसुन्दररस, लोकनाथरस... | २५२ |
| पथ्यादि, चव्यादि | ” | बृहच्चिन्तामणिरस, भुवनेश्वररस | २५३ |
| पाठादिचूर्णं, हिंङ्ग्वादिचूर्णं | ” |
विषयानुक्रमणिका । ( ७ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| जातीफलरस | ... २५४ | बृहद्ग्रहणीवज्रकपाट | ... २९० |
| अभयनृसिंहरस, आनन्दभैरवरस... | २५५ | संग्रहग्रहणीकपाटरस | ... २९१ |
| कर्पूररस, बब्बूलारिष्ट, कुटजारिष्ट | २५६ | ग्रहणीगजेन्द्रवटिका | ... २९२ |
| अहिफेनासव | ... २५७ | जातीफलाद्यवटिका | ... २९३ |
| अतीसारमें वर्जनीय, अतीसारमें पथ्य | ... २५८ | बृहज्जातीफलाद्यवटिका | ... " |
| अतीसारमें अपथ्य | ... २५९ | वडवामुख रस | ... २९४ |
| ग्रहणीरोगकी चिकित्सा । | ग्रहणीशार्दूलरस | ... २९५ | |
| नागराद्यचूर्ण, पाठाद्यचूर्ण | ... २६१ | महागन्धक और सर्वाङ्गतुन्दररस | ... २९६ |
| कपित्थाष्टकचूर्ण, स्वल्प-गङ्गाधर-चूर्ण | ... २६२ | वैद्यनाथवटी | ... २९७ |
| मध्यम-गङ्गाधरचूर्ण, बृहद्गङ्गाधर-चूर्ण | ... २६३ | खसर्पणवटी | ... २९८ |
| वृद्धगङ्गाधरचूर्ण | ... २६४ | रसाभ्रवटी, महाअभ्रवटी | ... २९९ |
| स्वल्पलवङ्गाद्यचूर्ण, बृहल्लवङ्गाद्यचूर्ण | २६५ | पीयूषवल्लीरस | ... ३०१ |
| महालवंगाद्यचूर्ण | ... २६७ | पानीयभक्तवटी | ... ३०२ |
| स्वल्पनायिकाचूर्ण, मध्य मनायिकाचूर्ण | २६८ | श्रीनृपतिवल्लभरस | ... ३०४ |
| बृहन्नायिकाचूर्ण | ... २६९ | बृहन्नृपवल्लभ | ... ३०५ |
| ग्रहणीशार्दूलचूर्ण | ... २७० | महाराजनृपतिवल्लभ | ... ३०६ |
| जातीफलाद्यचूर्ण, जीरकाद्यचूर्ण | ... २७१ | महाराजनृपवल्लभ | ... ३०७ |
| मार्कण्डेयचूर्ण | ... २७२ | रसपर्पटी | ३०८ |
| कम्बोटावलेह, दशमुलगुड | ... २७३ | लौहपर्पटी | ... ३१५ |
| कल्याणगुड | ... २७४ | स्वर्णपर्पटी | ... ३१६ |
| कूष्माण्डगुडकल्याण | ... २७५ | पञ्चामृतपर्पटी | ... ३१७ |
| कामेश्वग्मादक | ... २७७ | विजयपर्पटी | ... ३१८ |
| मदनमोदक | ... २७८ | दूसरी विजयपर्पटी | ... ३२१ |
| मेथीमोदक | ... २७९ | हिरण्यगर्भपोट्टली रस | ... ३२२ |
| बृहन्मेथीमोदक | ... २८० | स्वल्पचुक्र, बृहच्चुक्र | ... ३२३ |
| मुस्तकादिमोदक | ... २८१ | आयामकाञ्जिक | .... ३२४ |
| जीरकादिमोदक | ... २८२ | अष्टपलघृत | ... ३२५ |
| बृहज्जीरकादिमोदक | ... २८३ | बिल्वांदिघृत, बिल्वगर्भघृत | ... ३२६ |
| अग्निकुमारमोदक | ... २८५ | शुण्ठीघृत, नागरघृत, चित्रक घृत | .. " |
| हंसपोट्टली, ग्रहणीकपर्द्दपोट्टली | ... २८६ | चाङ्गेरीघृत, मरिचाद्यघृत | ... ३२७ |
| अग्निकुमाररस | ... २८७ | महाषट्पलकघृत, विल्वतैल | ... ३२८ |
| स्वल्पग्रहणीकपाटरस १-५ | ... " | ग्रहणीमिहिरतैल | ... ३३० |
| ग्रहणीवज्रकपाटरस | ... २९० | बृहद्ग्रहणीमिहिरतैल | ... ३३१ |
( ८ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| तक्रारिष्ट, पिप्पल्याद्यासव | ... ३३२ | अर्शोरोगमें पथ्य, अर्शोरोगमें अपथ्य | ३६७ |
| अर्शोरोगचिकित्सा | ३३३ | अग्निमान्द्यचिकित्सा। | |
| रक्तार्शाश्चिकित्सा | ३३३ | तीक्ष्णाग्निकित्सा | ३६९ |
| लवणोत्तमादि चूर्ण, समशर्कर चूर्ण | ... ३३९ | आमाजीर्णचिकित्सा | ३७० |
| व्योषादिचूर्ण | ... ” | चित्रकगुटिका | ... ” |
| विजयचूर्ण, शूरणपिण्डी | ... ३४० | विदग्धाजीर्णचिकित्सा | ३७१ |
| भल्लातकादिमोदक, नागरादिमोदक | ... ३४१ | विष्टब्धरसशेषाजीर्णचिकित्सा | ” |
| स्वल्पशूरणमोदक | ... ” | पथ्यादिक | ... ३७२ |
| बृहच्छूरणमोदक | ... ३४२ | विशिष्टद्रव्याजीर्णकी विधि | ... ” |
| श्रौड्डायनमोदक, माणिभद्रमोदक | ३४३ | विषूचिकाकी चिकित्सा | ३७४ |
| प्राणदा गुटिका | ... ३४४ | अलसकचिकित्सा | ३७५ |
| नागार्जुनयोग | ... ३४५ | उदगकी पीडाकी चिकित्सा | ” |
| कुटजलेह | ... ३४७ | सैन्धवाद्यचूर्ण १-२ | ... ३७६ |
| कुटजरसक्रिया | ... ३४८ | हिंग्वष्टकचूर्ण, वडवामुखचूर्ण | ... ३७७ |
| दशमूल-गुड, बाहुशाल गुड | ... ३४९ | स्वल्पाग्निमुखचूर्ण | ... ” |
| गुडभल्लातक | ... ३५१ | बृहदग्निमुखचूर्ण | ... ३७८ |
| अन्य-गुडभल्लातक, माणशूरणादिलोह | ... ३५२ | अग्निमुखलवण | ... ३७९ |
| अग्निमुखलोह | ... ३५३ | भास्करलवण | ... ३८० |
| चन्द्रप्रभावटिका | ... ३५४ | श्रीरामबाणरस, अग्नितुण्डीरस | ... ३८२ |
| रसगुटिका, तीक्ष्णमुखरस | ... ३५६ | अमृतकल्पवटी, अमृतवटी | ... ३८२ |
| अर्शकुठाररस, चक्राख्यरस | ... ३५७ | सुधासागर रस | ... ” |
| कञ्चुकुठाररस | ... ” | लवङ्गाद्यवटी, बृहल्लवङ्गादिवटी | ... ३८३ |
| चक्रेश्वररस, शिलागन्धकवटी | ... ३५८ | अजीर्णकण्टकरस, महोदधिवटी | ३८४ |
| जातीफलादिवटी, पञ्चाननवटी | ... ३५९ | बृहन्महोदधिवटी | ... ” |
| नित्यंदित रस, अष्टाङ्गरस | ... ३६० | अग्निकुमाररस, बृहदग्निकुमाररस | ३८५ |
| उदकषट्पलकघृत | ... ” | हुताशनरस, बृहद्रुताशन रस | ... ३८६ |
| व्योषाद्यघृत, चव्याद्यघृत | ... ३६१ | जातीफलादिवटी, भास्कररस | ... ३८७ |
| कुटजाद्यघृत, सिद्धामृतघृत | ... ” | अग्निसन्दीपन रस | ... ३८८ |
| सुनिषण्णक-चांगेरीघृत | ... ३६२ | त्रिफलालोह, प्रदीपनरस, विजयरस | ... ३८९ |
| कासीसाद्यतैल, वृहत्कासीसाद्यतैल | ३६३ | अग्निरस, टङ्कणादि वटी, रस-राक्षस | ... ३९० |
| पिप्पल्याद्यतैल, दन्त्यरिष्ट | ... ३६४ | पञ्चामृतवटी, ज्वालानाल रस | ... ३९१ |
| क्षार | ... ३६५ | भक्तविपाकवटी, बृहद्भक्तपाकवटी... | ३९२ |
| क्षारपाकविधि | ... ३६६ |
विषयानुक्रमणिका । ( ९ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| पाशुपतरस | ... ३९३ | कृमिरोगमें पथ्य | ... ४२३ |
| अजीर्णवलकालानलरस | ... ३९५ | कृमिरोगमें अपथ्य | ... ४२४ |
| शंखवटी | ... ३९६ | पाण्डु-कामला हलीमककी चिकित्सा । | |
| द्वितीय-शंखवटी | ... ३९७ | कामला-चिकित्सा | ४२६ |
| तृतीय बृहच्छंखवटी | ... ,, | कुम्भकामलाकी चिकित्सा | ... ४२७ |
| चतुर्थ-शंखवटी और महाशंखवटी | ३९८ | हलीमककी-चिकित्सा | ,, |
| पंचम-महाशंखवटी, षष्ठ-महाशंखवटी | ... ३९९ | फलत्रिकादि-कषाय, वासादि-कषाय | ... ४२८ |
| वज्रक्षार | ... ४०० | नवायसलौह | ... ,, |
| क्रव्यादरस | ... ४०१ | निशालौह, धात्रीलौह, विडंगादि-लौह | ... ४२९ |
| विश्वोद्दीप्तकाथ | ... ४०२ | दाव्यादिलौह, त्रिकत्रयाद्यलौह | ... ४३० |
| वीरभद्राभ्रक | ... ४०३ | कामलान्तकलौह | ... ४३१ |
| लवङ्गाद्य मोदक, सुकुमारमोदक | ... ४०४ | पञ्चामृतलौह-मंडूर | ... ४३२ |
| त्रिवृदादिमोदक, हरीतकीप्रयोग | ... ४०५ | वज्रवटक मण्डूर, पुनर्नवादिमण्डूर | ४३३ |
| अमृता-हरीतकी, शार्दूलकाशिक | ... ४०६ | त्र्यूषणादिमण्डूर | ... ४३४ |
| मुस्तकारिष्ट | ... ४०७ | चन्द्रसूर्यात्मकरस | ... ४३५ |
| चित्रकगुड, क्षारगुड | ... ४०८ | प्राणवल्लभरस | ... ४३६ |
| मस्तुषट्पलघृत, अग्निघृत | ... ४०९ | पञ्चाननवटी, पाण्डुसुदनरस | ... ४३७ |
| बृहदग्निघृत | ... ४१० | आनन्दोदय रस, त्रैलोक्यसुन्दररस | ४३८ |
| अग्निमान्द्यरोगमें पथ्य | ... ४११ | योगराज | ... ४३९ |
| अग्निमान्द्यरोगमें अपथ्य | ... ४१२ | धात्र्यरिष्ट, हरिद्रातघृत | ... ४४० |
| कृमिरोग-चिकित्सा । | द्राक्षाघृत, मूर्वाद्यघृत, व्योषाद्यघृत | ४४१ | |
| पारसीयादिचूर्ण | ... ४१५ | पाण्डुरोगमें पथ्य, पाण्डुरोग-में अपथ्य | ... ४४२ |
| कृमिकालानल रस | ... ४१६ | रक्तपित्त-चिकित्सा | ४४३ |
| कृमिधूलिजलप्लव रस | ... ,, | ह्रीबेरादि, वासकादि | ... ४४८ |
| कृमिकोष्ठानल रस, लाक्षादिवटी | ... ४१७ | धान्यकादि, अटरूषकादि | ... ४४९ |
| कृमिमुद्गर रस, कीटारिरस | ... ४१८ | उशीरादिचूर्ण, एलादिगुटिका | ... ,, |
| कीटमर्दरस | ... ,, | अर्केश्वररस, रक्तपित्तान्तकरस | ... ४५० |
| कृमिघातिनी गुटिका, कृमि-विनाशनरस | ... ४१९ | रसामृतरस, सुधानिधिरस | ... ४५१ |
| कृमिहररस, कृमिरोगारिरस | ... ४२० | कपर्दरस, समशर्कर लौह | ... ४५२ |
| कृमिघ्नरस | ... ,, | शतमूल्यादिलौह, शर्कराद्यलौह | ... ४५३ |
| विडंगलौह, हरिद्राखण्ड | ... ४२१ | रक्तपित्तान्तकलौह | ... ,, |
| त्रिफलाद्यघृत, विडंगघृत | ... ४२२ | ||
| विडंगतैल, धुस्तूरतैल | ... ४२३ |
( १० ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| खण्डकाद्यलौह | ४५४ | हेमगर्भपोट्टलीरस, रत्नगर्भ-पोट्टलीरस | ४९१ |
| कूष्माण्डखण्ड | ४५५ | कनकसुन्दररस | ४९२ |
| वासाकूष्माण्डखण्ड | ४५६ | सर्वाङ्गसुन्दररस | ४९३ |
| वासाखण्ड | ४५७ | सर्पिर्गुड | ४९४ |
| वृहत्कूष्माण्डावलेह | ४५८ | एलादिमन्थ | ४९५ |
| त्रिवृतादिमोदक | ४५९ | पिप्पलीघृत, निर्गुण्डीघृत | ४९६ |
| वासाद्यघृत, दूर्वाद्यघृत | ४६० | बलाद्यघृत १-२, नागबलाद्यघृत | ४९७ |
| सप्तप्रस्थघृत, शतावरीघृत | ४६१ | बलागर्भघृत, पाराशरघृत | ४९८ |
| वृहच्छतावरीघृत | ४६२ | अजापञ्चक घृत, छागलाद्यघृत १-२ | ४९९ |
| कामदेवघृत | ४६३ | जीवन्त्याद्यघृत | ५०० |
| उशीरासव | ४६४ | अमृतप्राशघृत १-२ | ५०१ |
| रक्तपित्तमें पथ्य | ४६५ | महाचन्दनादितैल | ५०३ |
| रक्तपित्तमें अपथ्य | ४६७ | यक्ष्मारोगमें पथ्य | ५०५ |
| यक्ष्मरोग-चिकित्सा । | यक्ष्मारोगमें अपथ्य | ५०६ | |
| दशमूलक्वाथ, अश्वगन्धादिक्वाथ | ४७० | कासरोगकी चिकित्सा | ५०७ |
| त्रयोदशाङ्गक्वाथ | ,, | पञ्चमूलीक्वाथ | ५०९ |
| बलादिचूर्ण, लवंगाद्यचूर्ण | ४७१ | पिप्पल्यादिक्वाथ | ५१० |
| शृङ्गयर्जुनाद्य चूर्ण | ,, | कण्टकार्यादिक्वाथ, मरिचाद्यचूर्ण... | ,, |
| सितोपलादिलेह, वासावलेह | ४७२ | समशर्कर चूर्ण | ५११ |
| बृहद्द्वाक्षावलेह १-२ | ४७३ | तालीशाद्यचूर्ण और मोदक | ,, |
| च्यवनप्राश | ४७५ | कासान्तक, कासान्तकरस | ५१२ |
| द्राक्षारिष्ट, विन्ध्यवासियोग | ४७७ | कासकुठार, पित्तकासान्तकरस | ,, |
| यक्ष्मारि लौह, यक्ष्मान्तकलौह | ४७८ | पुरन्दरवटी, पञ्चामृतरस | ५१३ |
| शिलाजत्वादि लौह | ,, | अमृतार्णवरस, श्रीचन्द्रामृतरस | ५१४ |
| रजतादिलौह, क्षयकेसरी १-२ | ४७९ | श्रीडामरानन्दाभ्रक | ५१५ |
| रसेन्द्रगुटिका, वृहद्रसेन्द्रगुटिका | ४८१ | महाकालेश्वररस | ५१६ |
| कल्याणसुन्दराभ्ररस | ४८३ | विजयभैरवरस | ५१७ |
| वृहच्चन्द्रामृतरस, कुमुदेश्वररस | ४८४ | काससंहारभैरव रस | ५१८ |
| कांचनाभ्ररस, वृहत्काञ्चनाभ्ररस... | ४८५ | वृहद्रसेन्द्रगुटिका | ५१९ |
| स्वल्पमृगांकरस मृगांकरस | ४८६ | महोदधि रस, तरुणीनन्दरस | ५२० |
| राजमृगांकरस | ४८७ | समशर्करलौह | ५२२ |
| महामृगांकरस | ४८८ | श्रीचन्द्रामृतलौह, भागोत्तरगुटिका | ५२३ |
| लोकेश्वरपोट्टलीरस | ४८९ | लक्ष्मीविलासरस | ५२५ |
विषयानुक्रमणिका । ( ११ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| शृङ्गाराम्र | ५२५ | श्वासरोगमें पथ्य, श्वासरोगमें अपथ्य | ५५६ |
| सार्वभौमरस | ५२६ | स्वरभंगकी चिकित्सा | ५५७ |
| बृहच्छृङ्गाराम्र | ५२७ | चव्यादिचूर्ण, त्र्यम्बकाभ्र | ५५८ |
| नित्योदय रस | ५२८ | भैरवरस, किन्नरकण्ठरस | ५५९ |
| वसन्ततिलक रस, व्याघ्रीहरीतकी | ५२९ | निदिग्धिकावलेह | ५६० |
| वासावलेह | ५३० | व्याघ्रीघृत, सारस्वतघृत (ब्राह्मीघृत) | ५६१ |
| कण्टकार्यावलेह, कण्टकारीघृत | ५३१ | भृंगराजाद्यघृत, स्वरभंगमें पथ्य | ५६२ |
| दशमूलषट्पलक घृत | ,, | स्वरभंगमें अपथ्य | ५६३ |
| छागलाद्यघृत | ५३२ | अरोचकचिकित्सा । | |
| कुंकुमाद्यघृत | ५३३ | यमानीषाडव, कलहंस कांजी | ५६५ |
| चन्दनाद्यतैल, वासा-चन्दनाद्यतैल | ५३४ | तिन्तिडीपानक, रसाला | ५६६ |
| कासरोगमें पथ्य | ५३५ | रसकेसरी, सुधानिधि रस | ५६७ |
| कासरोगमें अपथ्य | ५३६ | सुलोचनाभ्रक | ५६८ |
| हिक्का-श्वासरोगकी चि० | ५३७ | अरोचकमें पथ्य | ५६९ |
| दशमूलादि, शठ्यादि, वासादि क्वाथ | ५४० | अरोचकमें अपथ्य | ५७० |
| शुण्ठीभार्ङ्गी क्वाथ, हरिद्रादिचूर्ण... | ,, | छर्दि ( वमन ) चिकित्सा । | |
| शृङ्ग्यादिचूर्ण, विजयवटी | ५४१ | एलादिचूर्ण | ५७२ |
| डामरेश्वररस | ,, | रसेन्द्र, वृषध्वजरस, पद्मकाद्यघृत | ५७३ |
| महाश्वासहरिलौह | ५४२ | छर्दिरोगमें पथ्य | ५७४ |
| पिप्पल्याद्यलौह, श्वासकुठाररस... | ५४३ | छर्दिरोगमें अपथ्य | ५७५ |
| महाश्वासकुठार रस | ,, | तृषाकी चिकित्सा । | |
| श्वासभैरवरस, श्वासचिन्तामणि... | ५४४ | रसादिचूर्ण, महोदधिरस | ५७९ |
| श्वासकासचिन्तामणि, बृहन्मृगाङ्कवटी | ५४५ | तृष्णारोगमें पथ्य | ,, |
| कनकासव | ५४६ | तृष्णारोगमें अपथ्य | ५८० |
| शृङ्गीगुडघृत | ५४७ | मूर्च्छारोगकी चिकित्सा | ५८१ |
| भार्ङ्गीशर्करा | ५४८ | मूर्च्छान्तकरस, अश्वगन्धारिष्ट | ५८३ |
| भार्ङ्गीगुड | ५४९ | मूर्च्छारोगमें पथ्य | ५८४ |
| कुलत्थगुड | ५५० | मूर्च्छारोगमें अपथ्य | ५८५ |
| अगस्त्यहरीतकी, हिंस्त्राद्यघृत | ५५१ | मदात्ययरोग-चिकित्सा । | |
| तेजोवत्याद्यघृत, चन्दनाद्यतैल | ५५२ | फलत्रिकाद्यचूर्ण, एलाद्यमोदक | ५८७ |
| बृहच्चन्दनाद्यतैल | ५५३ | महाकल्याणवटी, पुनर्नवाद्यघृत | ५८८ |
| हिक्कारोगमें पथ्य | ५५४ | मदात्ययरोगमें पथ्य | ,, |
| हिक्कारोगमें अपथ्य | ५५५ | मदात्ययरोगमें अपथ्य | ५८९ |
( १२ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| दाहकी चिकित्सा। | आमाशयगत-वातकी चिकित्सा | ६१६ | |
| चन्दनादि क्वाथ, पर्पटादि क्वाथ | ५९० | पक्वाशयगत-वातकी चिकित्सा | ,, |
| दाहान्तकरस | ,, | बस्त्यादिगत-वातकी चि० | ,, |
| सुधाकररस | ५९१ | स्नायुसन्ध्यस्थिगत-वातकी चि० | ,, |
| कुशाद्यतैल और घृत, दाहरोगमें पथ्य | ,, | त्वग्गत वातकी चि० | ६१७ |
| दाहरोगमें अपथ्य | ५९३ | रक्तगत-वातकी चि० | ,, |
| उन्मादरोगकी चिकित्सा। | मांसमेदोगत वातकी चि० | ,, | |
| अञ्जन | ५९५ | अस्थिमज्जागत-वातकी चि० | ,, |
| निम्बधूप, महाधूप, सारस्वत चूर्ण | ५९६ | शुक्रगत-वातकी चि० | ,, |
| उन्मादपर्पटीरस, उन्मादभञ्जिनी | ५९७ | शुष्कगर्भकी चि० | ,, |
| उन्मादगजकेसरी, उन्मादगजांकुश | ५९८ | शिरोगत-वातकी चि० | ६१८ |
| उन्मादभञ्जनरस, भूतांकुश रस | ५९९ | व्यादितकी चि० | ,, |
| चतुर्भुजरस | ६०० | अर्दितकी चि० | ,, |
| हिंग्वाद्यघृत, लशुनाद्यघृत | ६०१ | मन्यास्तम्भकी चि० | ,, |
| पानीयकल्याणघृतं | ६०२ | ग्रीवास्तम्भकी चि० | ६१९ |
| क्षीरकल्याणघृत, महाकल्याणघृत | ६०३ | जिह्वास्तम्भकी चि० | ,, |
| स्वल्पचैतसघृत | ,, | कुब्जकी चि० | ,, |
| महापैशाचिकघृत, शिवाघृत | ६०४ | आध्मानकी चि० | ,, |
| शिवातैल | ६०६ | अष्ठीला और प्रत्यष्ठीलाकी चि० | ,, |
| उन्मादरोगमें पथ्य | ६०७ | गृध्रसीकी चि० | ६२० |
| उन्मादरोगमें अपथ्य | ६०८ | वातकण्टककी चि० | ,, |
| अपस्माररोगकी चिकित्सा। | खल्वकी चि० | ,, | |
| सूतभस्मप्रयोग, इन्द्रब्रह्मवटी | ६१० | शिराग्रहकी चि० | ,, |
| भूतभैरव रस, वातकुलान्तक | ६११ | अपतानककी चि० | ६२१ |
| कूष्माण्डघृत, ब्राह्मीघृत | ६१२ | पक्षाघातकी चि० | ,, |
| स्वल्पपञ्चगव्य घृत | ,, | अपतन्त्रककी चि० | ,, |
| बृहत्पञ्चगव्य घृत | ,, | खञ्ज और पंगुताकी चि० | ६२२ |
| महाचैतसघृत | ६१३ | क्रोष्टुशीर्षकी चि० | ,, |
| पलंकषाद्यतैल | ६१४ | कलायखञ्जकी चि० | ,, |
| अपस्माररोगमें पथ्यापथ्यविधि | ६१५ | वाह्यान्तरायामककी चि० | ,, |
| वातव्याधिकी चिकित्सा। | त्रिकशूलकी चि० | ,, | |
| कोष्ठगत-वातकी चिकित्सा | ६१६ | पाददाहकी चि० | ६२३ |
| पादहर्षकी चि० | ,, |
विषयानुक्रमणिका । ( १३ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| दशमूलादिक्वाथ, बलादिक्वाथ | ६२३ | नारायणतैल | ६५५ |
| एरण्डादिक्वाथ | ,, | मध्यमनारायणतैल | ६५६ |
| सिंहास्यादिक्वाथ, रास्नासप्तकक्वाथ | ६२४ | महानारायणतैल | ६५७ |
| माषादिक्वाथ, गोक्षुरादिक्वाथ | ,, | पुष्पराजप्रसारिणीतैल | ६६० |
| माषबलादिक्वाथ | ,, | हिमसागरतैल | ६६१ |
| कल्याणलेह, शाल्वणस्वेद | ६२५ | सिद्धार्थकतैल | ६६२ |
| वातगजांकुश | ६२६ | नकुलतैल | ६६३ |
| बृहद्वातगजांकुश, महावातगजांकुश | ६२७ | महाकुक्कुटमांसतैल | ६६५ |
| लघुत्रानन्दरस | ,, | माषतैल १-२, लघुमाषतैल | ६६६ |
| गगन दिवटी, कुब्जविनोद रस | ६२८ | बृहन्माषतैल | ६६७ |
| सर्वाङ्गकम्पारिरस, चिन्तामणिरस | ६२९ | सप्तप्रस्थमहामाषतैल | ६६८ |
| चिन्तामणिचतुर्मुख, बृहद्वात-चिन्तामणि | ६३० | महामाषतैल | ६६९ |
| निरामिषमहामाषतैल | ६७० | ||
| चतुर्मुखरस | ६३१ | माषबलादितैल | ६७१ |
| लक्ष्मीविलासरस, योगेन्द्ररस | ६३२ | कुब्जप्रसारिणीतैल | ६७२ |
| वातारिरस | ६३३ | त्रिशतीप्रसारणीतैल | ,, |
| अनिलारिरस | ६३४ | सप्तशतिकप्रसारणी | ६७५ |
| सर्वाङ्गीसुन्दररस, शीतारिरस | ६३५ | एकादशशतिकप्रसारणीतैल | ६७६ |
| तालकेश्वररस, वातविध्वंसनरस | ६३६ | अष्टादशशतिकप्रसारणीतैल | ६७८ |
| वातनाशनरस, वातकण्टकरस | ६३७ | महाराजप्रसारिणीतैल | ६८० |
| त्रैलोक्यचिन्तामणिरस | ६३८ | महासुगन्धितैल और लक्ष्मी-विलासतैल | ६८४ |
| स्वल्पलशोनपिण्ड, त्रयोदशांगगुग्गल | ६४० | वातव्याधिमें पथ्य | ६८५ |
| दशमूलाद्यघृत, अश्वगन्धाद्यघृत | ६४१ | वातव्याधिमें अपथ्य | ६८७ |
| नकुलाद्यघृत | ,, | पित्तरोगकी चिकित्सा | ६८८ |
| छागलाद्यघृत | ६४२ | धात्रीलौह | ६८९ |
| बृहच्छागलद्यघृत | ६४३ | पित्तान्तकरस, महापित्तान्तकरस | ६९० |
| हंसाद्यघृत | ६४६ | गुडूचीतैल, पित्तरोगमें पथ्य | ६९१ |
| रसोनाद्य तैल, मूलकाद्यतैल | ६४७ | पित्तरोगमें अपथ्य | ,, |
| वायुच्छायासुरेन्द्रतैल | ,, | कफरोगकी चिकित्सा | ६९२ |
| महाबलातैल | ६४९ | कफचिन्तामणिरस, बृहत्कफ-केतुरस | ६९३ |
| अश्वगंधातैल | ६५० | महाश्लेष्मकालानलरस | ६९४ |
| श्रीगोपालतैल | ६५१ | श्लेष्मशैलेन्द्ररस (रसेन्द्रगुटिका) | ,, |
| विष्णुतैल | ६५३ | महालक्ष्मीविलास | ६९६ |
| बृहद्विष्णुतैल | ६५४ |
( १४ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| धुस्तूरतैल | ६९७ | ऊरुस्तम्भमें अपथ्य | ७२८ |
| कनकतैल | ६९८ | आमवातकी चिकित्सा । | |
| तम्रराजतैल | ६९९ | एरण्डादि, शठ्यादि | ७३० |
| कफरोगमें पथ्य, कफरोगमें अपथ्य | ७०० | रसॊनादि, रास्नापञ्चक, रास्नासप्तक | ७३१ |
| वातरक्तरोगकी चिकित्सा | ७०१ | रास्नादशमूलक, मध्यमरास्नादि | " |
| अमृतादि, सिंहास्यादि पटोलादि | ७०३ | महारास्नादि | ७३२ |
| मञ्जिष्ठादि, त्रिवृतादि, नवकार्षिक | ७०४ | शतपुष्पाद्यचूर्णं, हिंग्वाद्यचूर्णं | ७३३ |
| निम्बादिचूर्णं | " | अलम्बुषाद्यचूर्णं १-२ | " |
| वातरक्तान्तकरस | ७०५ | वैश्वानरचूर्णं, शंकरस्वेद | ७३४ |
| अन्य प्रकार वातरक्त चिकित्सा | ७०६ | प्रसारणीसंधान, आमवातारिवटिका | ७३५ |
| विश्वेश्वररस | " | आमवातारिरस, आमवातेश्वररस | ७३६ |
| द्वादशायस | ७०७ | वातगजेन्द्रसिंह | ७३८ |
| गुडूच्यादिलौह, पित्तान्तकलौह | ७०८ | आमप्रमाथिनी वटिका | ७३९ |
| लांगलाद्यलौह | " | आमवाताद्रिवज्ररस | " |
| योगसारामृत | ७०९ | त्रिफलादिलौह, विडङ्गादिलौह | ७४० |
| तालभस्म | ७१० | पञ्चाननरसलौह | ७४१ |
| महातालेश्वर रस, अमृतागुग्गुल... | ७११ | अजमोदादिवटक | ७४२ |
| रसाभ्रगुग्गुल | ७१२ | आमवातगजसिंह मोदक | ७४४ |
| कैशोरकगुग्गुल | ७१३ | रसोनपिण्ड | ७४५ |
| पुनर्नवा-गुग्गुल | ७१४ | महारसोनपिण्ड | ७४६ |
| गुडूचीघृत, शतावरी घृत | ७१५ | वातारिगुग्गुल | ७४७ |
| अमृता घृत | ७१६ | योगराजगुग्गुल | ७४८ |
| मध्यमगुडूचीतैल, बृहद्गुडूचीतैल | ७१७ | बृहद्योगराजगुग्गुल | ७४९ |
| महारुद्रगुडूचीतैल | ७१८ | व्याधिशार्दूलगुग्गुल | ७५० |
| महापिण्डतैल | ७१९ | बृहत्सिंहनाद-गुग्गुल | ७५१ |
| विषतिन्दुकतैल | ७२० | शुण्ठीघृत | ७५२ |
| रुद्रतैल | ७२१ | शृङ्गवेराद्यघृत, प्रसारणीतैल | ७५३ |
| महारुद्रतैल | ७२२ | सैन्धवाद्यतैल | " |
| वातरक्तमें पथ्य, वातरक्तमें अपथ्य | ७२३ | बृहत्सैन्धवाद्यतैल | ७५४ |
| ऊरुस्तम्भकी चिकित्सा | ७२४ | विजयभैरवतैल | ७५५ |
| भल्लातकादि, पिप्पल्यादि | ७२५ | महाविजय भैरवतैल, आमवात-में पथ्य | ७५६ |
| गुञ्जाभद्ररस, अष्टकटूवरतैल कुष्ठाद्यतैल | ७२६ | आमवातमें अपथ्य | ७५७ |
| महासैन्धवाद्यतैल, ऊरुस्तम्भ-में पथ्य | ७२७ |
विषयानुक्रमणिका । ( १५ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| शूलरोगकी चिकित्सा । | नारिकेलामृत | ७८८ | |
| वातिक-शूलचिकित्सा | ७५७ | गुडपिप्पलीघृत | ७८९ |
| पैत्तिक-शूलचिकित्सा | ७६० | पिप्पलीघृत, बीजपूराद्यघृत | ७९० |
| श्लैष्मिक-शूलचिकित्सा | ७६१ | शूलगजेन्द्रतैल, शूलरोगमें पथ्य | ७९१ |
| आम-शूलचि० | ७६२ | शूलरोगमें अपथ्य | ७९२ |
| वातपैत्तिक-शूलचि० | ” | उदावर्त्त, आनाहकी चिकित्सा । | |
| पित्तश्लैष्मिक-शूलचि० | ” | नाराचचूर्ण | ७९६ |
| त्रिदोषज-शूलचि० | ७६३ | फलवर्ति, त्रिकद्वादिवर्ति | ७९७ |
| परिणाम-शूलचि० | ” | नाराचरस | ” |
| नारिकेलक्षार, शंखादिचूर्ण, सामुद्राद्यचूर्ण | ७६५ | वैद्यनाथवटी, बृहदिच्छाभेदीरस... | ७९८ |
| शम्बूकादिगुडिका, शंखरसगुटिका | ७६६ | गुडाष्टक, शुष्कमूलाद्यघृत | ७९९ |
| शूलहरणयोग | ७६७ | स्थिराद्यघृत | ” |
| शूलगजकेसरी, शूलवज्रिणीवटी | ७६८ | उदावर्त्तमें पथ्य, उदावर्त्तमें अपथ्य | ८०० |
| शूलान्तकरस | ७६९ | आनाहमें पथ्य और अपथ्य | ” |
| त्रैगुणाख्यरस, श्रीविद्याधररस | ७७० | गुल्मरोगकी चिकित्सा | ८०१ |
| बृहद्विद्याधररस | ७७१ | वातगुल्मचिकित्सा | ८०३ |
| त्रिफलालौह, शर्कराद्यलौह | ७७२ | पित्तगुल्मचि० | ८०४ |
| सप्तामृतलौह | ” | कफगुल्मचि० | ८०५ |
| शूलराजलौह, वैश्वानरलौह | ७७३ | द्वन्द्वजगुल्म-चि० | ८०६ |
| चतुःसमलौह | ७७४ | सान्निपातिकगुल्म-चि० | ” |
| धात्रीलौह | ७७५ | रक्तगुल्म-चि० | ८०७ |
| बृहद्धात्रीलौह | ७७६ | हिंग्वादिचूर्ण १-२ | ८०८ |
| क्षीरमण्डूर, रसमण्डूर | ७७७ | वचादिचूर्ण, लवंगादिचूर्ण | ८०९ |
| कोलादिमण्डूर, चतुःसममण्डूर... | ७७८ | कांकायनगुडिका | ८१० |
| भीमवटक मण्डूर, तारामंडूरगुड... | ७७९ | पञ्चाननरस, शिखिवाडवरस | ८११ |
| शतावरीमण्डूर | ७८० | नागेश्वररस, गुल्मकालानलरस | ८१२ |
| बृहच्छतावरीमण्डूर १-२ | ७८१ | बृहद्गुल्मकालानलरस | ८१३ |
| हरीतकीखण्ड | ७८२ | महागुल्मकालानलरस | ” |
| पूगखण्ड १-२ | ७८३ | गुल्मशार्दूलरस, सर्वेश्वररस | ८१४ |
| खण्डामलकी | ७८५ | गुल्मवज्रिणीवटिका, रसायनामृतलौह | ८१५ |
| नारिकेलखण्ड | ७८६ | दन्तीहरीतकी | ८१६ |
| बृहन्नारिकेलखण्ड | ७८७ | पञ्चपलघृत, भल्लातकाद्यघृत | ८१७ |
( १६ )
भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| त्रायमाणाद्यघृत | ८१७ | शुंठादि, एलादि | ८४३ |
| नाराचघृत | ८१८ | वारतर्वादिगण, आनन्दयोग | ८४४ |
| हबुषाद्यघृत, क्षीरषट्पलकघृत | ८१९ | बृहद्गोक्षुराद्यवलेह | ८४५ |
| धात्रीषट्पलकघृत | ,, | पाषाणभिन्न | ८४६ |
| द्राक्षाद्यघृत, गुल्मरोगमें पथ्य | ८२० | पाषाणवज्ररस, वरुणाद्यलौह | ८४७ |
| गुल्मरोगमें अपथ्य | ८२१ | कुलत्थाद्यघृत, वरुणघृत | ८४८ |
| हृद्रोगकी चिकित्सा । | पाषाणाद्यघृत | ८४९ | |
| रसायन, नागार्जुनारुन | ८२५ | भद्रावह्नघृत, विदारीघृत | ८५० |
| हृदयार्णवरस, पञ्चाननरस | ८२६ | दुरुगाद्य तैल, शिलोद्भिदादितैल | ८५२ |
| प्रभाकरवटी | ,, | उशीराद्य तैल | ,, |
| चिन्तामणिरस, विश्वेश्वररस | ८२७ | अश्मरीरोगमें पथ्य | ८५३ |
| शङ्करवटा | ८२८ | अश्मरीरोगमें अपथ्य | ८५४ |
| कल्याणसुन्दररस, वल्लभघृत | ८२९ | प्रमेहकी चिकित्सा । | |
| श्वदंष्ट्राद्यघृत | ,, | फलत्रिकादि | ८५६ |
| बलाद्यघृत, अर्जुनघृत | ८३० | विड़ङ्गादि, मुस्तादि, शिलाजतुप्रयोग | ८५७ |
| हृदयरोगमें पथ्य | ,, | कुशावलेह | ८५८ |
| हृदयरोगमें अपथ्य | ८३१ | शालसागरादिलेह, वङ्गावलेह | ८५९ |
| मूत्रकृच्छ्रकी चिकित्सा । | विडङ्गादिलौह, मेहकालानलरस... | ८५९ | |
| तृणपञ्चमूल, पञ्चतृणक्षीर, त्रिकण्टकादि | ८३४ | पञ्चाननरस, चन्द्रकला, मेहमुद्गरवटिका | ८६० |
| धान्यादि, बृहद्धान्यादि | ८३५ | शुक्रमातृकावटी | ८६१ |
| अमृतादि, शतावर्यादि | ,, | वेदविद्यवटी | ८६२ |
| हरीतक्यादि, तारकेश्वररस | ८३६ | वङ्गाष्टक, मेहवज्र | ८६३ |
| त्रिनेत्राख्यरस | ,, | चन्द्रप्रभागुडिका, चन्द्रप्रभावटी | ८६४ |
| मूत्रकृच्छ्रान्तकरस १-२ | ८३७ | स्वर्णवंग, मेहकेशरी | ८६६ |
| शतावरीघृत और क्षीर | ८३८ | मेहान्तकरस, सर्वेश्वररस | ८६७ |
| त्रिकण्टकाद्य घृत, मूत्रकृच्छ्रमें पथ्य | ,, | वंगेश्वररम १-२ | ८६८ |
| मूत्रकृच्छ्रमें अपथ्य | ८३९ | बृहद्वङ्गेश्वररस १-२ | ,, |
| मूत्राघातकी चिकित्सा । | हरिशङ्कररस | ८६९ | |
| धान्यगोक्षुरकघृत मूत्राघातमें पथ्य | ८४१ | बृहद्धरिशङ्कररस, मेहकुञ्जरकेशरीरस | ८७० |
| मूत्राघातमें अपथ्य | ८४२ | अपूर्व मालिनीवसन्त | ८७१ |
| अश्मरीकी चिकित्सा । | बृहत्कामचूड़ामणिरस | ,, | |
| वरुणादि, बृहद्वरुणादि | ८४३ | प्रमेहचिन्तामणि | ८७३ |
| शारमलीघृत, दाडिमाद्यघृत | ,, |
विषयानुक्रमणिका । ( १७ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| बृहद्दाडिमाद्यघृत | ... ८७४ | दस्तको बन्द करनेके उपाय, वह्निरस | ९०६ |
| महादाडिमाद्यघृत | ... ८७५ | चुलिकावटी, श्रीवैद्यनाथादेशवटिका | ९०७ |
| मेहमिहिरतैल | ... ८७६ | अभयावटी | ... ९०८ |
| प्रमेहमिहिरतैल | ... ८७७ | शोथोदरारिलौह | ... ९०९ |
| देवदार्वाद्यरिष्ट | ... ८७८ | वज्रक्षार | ... ९१० |
| चन्दनासव | ... ८७९ | विन्दुघृत, महाबिन्दुघृत, | ... ९११ |
| प्रमेहमें पथ्य | ... ८८० | नाराचघृत | ... ९१२ |
| प्रमेहमें अपथ्य | ... ८८१ | बृहन्नाराचघृत उदररोगमें पथ्य | ... ९१३ |
| उदररोगमें अपथ्य | ... ९१४ | ||
| सोमरोगकी चिकित्सा । | |||
| तारकेश्वररस | ... ८८३ | प्लीहा और यकृत्की चिकित्सा । | |
| गननादिलौह, सोमनाथरस | ... ८८४ | यमानिकादि चूर्ण | ... ९१५ |
| बृहत्सोमनाथरस | ... ८८५ | गुडूच्यादिचूर्ण, रोहितकाद्यचूर्ण | ... ९१६ |
| सोमेश्वररस | ... ८८६ | मानकादिगुटिका | ... ,, |
| बहुमूत्रान्तकरस १-२ | ... ८८७ | बृहन्मानकादिगुटिका | ... ९१७ |
| हमेनाथरस, मालतीकुसुमाकर | ... ८८८ | अर्कलवण, अभयालवण | ... ९१८ |
| वसन्तकुसुमाकररस | ... ८८९ | वर्द्धमानपिप्पली | ... ९१९ |
| कस्तूरीमोदक | ... ८९० | गुडपिप्पली | ... ९२० |
| धात्रीघृत, बृहद्धात्रीघृत | ... ८९१ | बृहद्गुडपिप्पली | ... ९२१ |
| कदल्यादिघृत | ... ८९२ | रसराज, प्लीहान्तकरस | ... ९२२ |
| वासुकिभूषणरस, विद्याधररस | ... ९२३ | ||
| मेदरोगकी चिकित्सा ८९३ | लोकनाथरस १-२ | ... ,, | |
| व्योषाद्य सक्तुप्रयोग | ... ८९५ | बृहल्लोकनाथरस, प्लीहारिरस | ... ९२५ |
| विडङ्गाद्यलौह | ... ८९६ | लौहमृत्युञ्जयरस | ... ९२६ |
| त्र्यूषणादिलौह, लौहरसायन | ... ८९७ | रोहीतकलौह, चित्रकादिलौह | ... ९२७ |
| नवकगुग्गुलु, अमृताद्यगुग्गुलु | ... ८९९ | यकृत्प्लीहारिलौह, यकृदरिलौह | ... ९२८ |
| त्रिफलाद्यतैल | ... ,, | महामृत्युञ्जयलौह | ... ९२९ |
| मेदरोगमें पथ्य | ... ९०० | सर्वेश्वरकौह | ... ९३० |
| मेदरोगमें अपथ्य | ... ९०१ | यकृत्प्लीहोदरहरलौह | ... ९३१ |
| शंखद्रावरस | ... ९३२ | ||
| उदररोगकी चिकित्सा । | शंखद्रावक, महाशंखद्रावक | ... ९३४ | |
| मानमण्ड | ९०३ | महाद्रावक १-३ | ... ९३६ |
| सामुद्राद्यचूर्ण, इच्छाभेदीरस १-३ | ९०४ | चित्रकघृत, पिप्पलीघृत | ... ९४० |
| भेदिनीवटी, नाराचरस | ... ९०५ | चित्रकपिप्पलीघृत, रोहीतकर्घृत | ... ९४१ |
| जलोदरारिरस | ... ९०६ |
२
( १८ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| महारोहीतकघृत | ... ९४१ | रास्त्रादि, त्रिकट्त्वादि | ... ९७२ |
| रोहितकारिष्ट | ... ९४२ | विल्वादिचूर्ण, भक्तोत्तरीयचूर्ण | ... ९७३ |
| शोथकी चिकित्सा | ९४३ | शशिशेखररस, वातारिरस | ... ९७४ |
| सिंहास्यादि, पटोलादि, त्रिफलादि | ९४५ | वृद्धिबाधिकावटी, रसराजेन्द्र | ... ९७५ |
| पथ्यादि, पुनर्नवाष्टक | ... " | शतपुष्पाद्यघृत | ... ९७६ |
| शुण्ठी-पुनर्नवादि | ... " | त्रिवृतादिघृत, वह्नदंतीघृत | ... ९७७ |
| पुनर्नवा-दशक, पुनर्नवापुटस्वेद | ... ९४६ | गन्धर्वहस्तकतैल | ... ९७८ |
| पुनर्नवादिचूर्ण | ... " | वृद्धिरोगमें पथ्य, वृद्धिरोगमेंअपथ्य | ९७९ |
| शोथारिचूर्ण, पुनर्नवादिलेह | ... ९४७ | गलगण्डादिकी चिकित्सा । | |
| त्रिनेत्राख्यरस | ... " | गण्डमालाकी चिकित्सा | ९८१ |
| त्रिकट्वादिलौह, शोथारिलौह | ... ९४८ | अपचीकी चिकित्सा | ९८३ |
| शोथांकुशरस | ... " | ग्रन्थिकी चिकित्सा | ९८४ |
| पञ्चामृतरस, शोथकालानलरस | ... ९४९ | अर्बुदकी चिकित्सा | ९८५ |
| क्षेत्रपालरस | ... ९५० | रौद्ररस, काञ्चनारगुटिका | ... ९८८ |
| कल्पलतावटी, दुग्धवटी १-३ | ... ९५१ | काञ्चनारगुग्गुलु, सिन्दूरादितैल | ... ९८९ |
| तक्रवटी, दधिवटी | ... ९५३ | तुम्बीतैल, अमृतातैल, छुछुंदरीतैल | ९९० |
| शोथभस्मलौह | ... ९५४ | शाखोटकतैल, बिम्बादितैल, निर्गुण्डीतैल | " |
| सुधानिधि | ... ९५५ | व्योषाद्यतैल, चन्दनाद्यतैल, गुञ्जाद्यतैल | ९९१ |
| अग्निमुखमण्डूर, शोथारिमण्डूर | ... ९५६ | गलगण्डादिरोगोंपर पथ्य | ... " |
| तक्रमण्डूर, रसाभ्रमण्डूर | ... ९५७ | गलगण्डादिरोगोंपर अपथ्य | ... ९९२ |
| पुनर्नवादि गुग्गुलु, दशमूलहरीतकी | ९५९ | श्लीपदरोगकी चिकित्सा । | |
| शुण्ठीघृत, स्वल्प पुनर्नवाद्यघृत | ... ९६० | वृद्धदारकचूर्ण पिप्पल्यादिचूर्ण | ... ९९५ |
| पुनर्नवाद्यघृत१-२, माणकघृत | ... " | श्लीपदारि, श्लीपदगजकेशरी | ... ९९६ |
| चित्रकाद्यघृत, शुष्कमूलकाद्यतैल | ९६१ | नित्यानन्दरस | ... " |
| बृहच्छुष्कमूलकाद्यतैल १-२ | ... " | कृष्णाद्यमोदक | ... ९९७ |
| शोथशार्दूल तैल | ... ९६३ | सौरेश्वरघृत | ... ९९८ |
| पुनर्नवाद्यतैल | ... ९६४ | विडङ्गादितैल, श्लीपदरोगमेंपथ्य | ... ९९९ |
| शैलेयाद्यतैल, समुद्रशोषाद्यतैल | ... ९६५ | श्लीपदरोगमें अपथ्य | ... " |
| पुनर्नवाद्यरिष्ट | ... ९६६ | विद्रधिकी चिकित्सा | १००० |
| शोथमें पथ्य | ... ९६७ | वरुणादिघृत, विद्रधिरोगमें पथ्य | १००२ |
| शोथमें अपथ्य | ... ९६८ | विद्रधिरोगमें अपथ्य | १००३ |
| वृद्धिरोगकी चिकित्सा । | |||
| वध्न लक्षण | ... ९७० |
विषयानुक्रमणिका । ( १३ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| व्रणशोथकी चिकित्सा | १००३ | करवीराद्यतैल, निशाद्यतैल | १०३३ |
| त्रिफला-गुग्गुलु, तिलाष्टक | १००७ | सैन्धवाद्यतैल, भगन्दररोगमें पथ्य | ,, |
| सप्ताङ्ग-गुग्गुलु | १००८ | भगन्दररोगमें अपथ्य | १०३४ |
| जात्याद्यघृत और तैल | ,, | उपदंशकी चिकित्सा । | |
| बृहज्जात्याद्यतैल | १००९ | धूप, धूम | १०३६ |
| गौराद्यघृत और तैल | ,, | लेप | १०३७ |
| विपरीतभल्लतैल | १०१० | भैरवरस | १०३८ |
| व्रणराक्षसतैल बृहद्व्रणराक्षसतैल | १०११ | रसगुग्गुलु | १०४० |
| विडङ्गारिष्ट | १०१२ | सारिवाद्यवलेह | १०४१ |
| व्रणरोगमें पथ्य | १०१३ | रसशेखर | १०४२ |
| व्रणरोगमें अपथ्य | १०१४ | करञ्जाद्यघृत, भूनिम्बाद्यघृत | १०४३ |
| सद्योव्रणकी चिकित्सा | १०१५ | अनन्ताद्यघृत, आगारधूमाद्यतैल | १०४४ |
| अग्निदग्धव्रणकी चिकित्सा | ,, | उपदंशरोगमें पथ्य | ,, |
| जीरकघृत, पाटलीतैल | १०१७ | उपदंशरोगमें अपथ्य | १०४५ |
| मंजिष्ठाद्यतैल | ,, | शूकदोषकी चिकित्सा । | |
| भग्नकी चिकित्सा | १०१८ | दार्बीतैल, शूकदोषमें पथ्य | १०४७ |
| लाक्षागुग्गुलु, आभागुग्गुलु | १०२० | शूकदोषमें अपथ्य | १०४८ |
| गन्धतैल | ,, | कुष्ठरोगकी चिकित्सा । | |
| भग्नरोगमें पथ्य, भग्नरोगमें अपथ्य | १०२२ | आरग्वधादि, लघुमञ्जिष्ठादि | १०५६ |
| नाडीव्रणकी चिकित्सा | १०२३ | मध्यममञ्जिष्ठादि, बृहन्मञ्जिष्ठादि... | १०५७ |
| गुणवतीवर्त्ति | १०२५ | पञ्चनिम्ब १-२ | १०५८ |
| सप्तांगगुग्गुलु, श्यामाघृत | १०२६ | श्वेतारि, तालकेश्वररस | १०६० |
| स्वर्जिकाद्यतैल, कुम्भीकाद्यतैल | ,, | तालकेश्वर | १०६१ |
| भल्लातकाद्यतैल, निर्गुण्डीतैल | १०२७ | महातालकेश्वर | १०६२ |
| हंसपदीतैल, नरास्थितैल | ,, | उदयभास्कर, अमृतांकुरलौह | १०६३ |
| भगन्दरकी चिकित्सा | १०२८ | पाकलक्षण, रसमाणिक्य | १०६५ |
| नारायणरस | १०२९ | अमृतभल्लातक | १०६६ |
| चित्रविभाण्डक रस, ताम्रप्रयोग... | १०३० | महाभल्लातकगुड | १०६८ |
| नवकार्षिक गुग्गुलु | १०३१ | अमृतागुग्गुलु | १०७० |
| सप्तविंशतिकगुग्गुलु | ,, | वज्रकघृत | १०७१ |
| विष्यन्दनतैल | १०३२ | तिक्तकघृत, महातिक्तकघृत | १०७२ |
| सोमराजीघृत | १०७३ |
( २० ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| पञ्चतिक्तघृत | १०७४ | अम्लपित्तान्तकमोदक | ११०५ |
| पञ्चतिक्तघृतगुग्गुलु | १०७५ | सौभाग्यशुण्ठीमोदक | ११०६ |
| महाखदिरकघृत | १०७६ | सितामण्डूर | ११०७ |
| श्वेतकरवीराद्यतैल | ,, | शुण्ठी खण्ड, पिप्पलीखण्ड | ११०९ |
| कृष्णसर्पतैल, कुष्ठराक्षसतैल | १०७७ | बृहत्पिप्पलीखण्ड | १११० |
| कुष्ठराक्षसतैल | ,, | जीरकाद्यघृत, शतावरीघृत | ११११ |
| षड्बिन्दुतैल, उन्मत्ततैल | १०७८ | नारायणघृत | ,, |
| मरिचाद्यतैल, बृहन्मरिचाद्यतैल | १०७९ | अम्लपित्तरोगमें पथ्य | १११२ |
| सोमराजीतैल | १०८० | अम्लपित्तरोगमें अपथ्य | ,, |
| बृहत्सोमराजीतैल | १०८१ | विसर्पकी चिकित्सा । | |
| विषतैल, श्वित्रपञ्चाननतैल | १०८२ | अमृतादि | १११३ |
| आरग्वधाद्यतैल, वासाऽमृतैल | १०८३ | नवकषाय गुग्गुलु, कालानिलरुद्ररस | १११४ |
| कन्दर्पसारतैल | १०८४ | वृषाद्यघृत करञ्जतैल | १११५ |
| खदिरारिष्ट | १०८६ | विसर्परोगमें पथ्य, विसर्परोगमें अपथ्य | ,, |
| कुष्ठरोगमें पथ्य | १०८७ | विस्फोट-चिकित्सा | १११६ |
| कुष्ठरोगमें अपथ्य | १०८८ | व्रणारिगुग्गुलु, पञ्चतिक्तकघृत | १११७ |
| शीतपित्त उदर्द और कोठरोगकी चिकित्सा | १०८९ | विस्फोटरोगमें पथ्य | ,, |
| हरिद्राखण्ड | १०९० | विस्फोटरोगमें अपथ्य | १११८ |
| बृहद्धरिद्राखण्ड | १०९१ | मसूरिकाकी चिकित्सा । | |
| शीतपित्तोदर्दकोठरोगोंमें पथ्य | ,, | पटोलादि, अमृतादि | ११२३ |
| शीतपित्त, उदर्द और कोठरोगोंमें अपथ्य | १०९२ | इन्दुकलावटिका | ,, |
| अम्लपित्तकी चिकित्सा । | मसूरिकारोगमें पथ्य | ,, | |
| दशांग, पञ्चनिम्बादिचूर्ण | १०९५ | मसूरिकारोगमें अपथ्य | ११२४ |
| अविपत्तिकरचूर्ण, लीलाविलास | १०९६ | क्षुद्ररोगोंकी चिकित्सा । | |
| अम्लपित्तान्तकरस, भास्करामृताभ्र | १०९७ | अजगल्लिका-चिकित्सा | ११२५ |
| सर्वतोभद्रलौह | १०९८ | अनुशयी विवृतेन्द्रविद्धादि रोगोंकी चिकित्सा | ,, |
| पानीयभक्तवटिका | १०९९ | विदारिका पनसिकादि क्षुद्ररोगोंकी चिकित्सा | ११२६ |
| पञ्चाननगुटिका | ११०० | पाषाणगर्दभकी चिकित्सा | ,, |
| लघुक्षुधावतीगुटिका १--२ | ११०१ | वल्मीकरोगकी चिकित्सा | ,, |
| बृहत्क्षुधावतीगुटिका | ११०३ | ||
| खण्डकूष्माण्डकावलेह | ११०५ |
विषयानुक्रमणिका । ( २१ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| पाददारी ( बिबाई ) की चि० | ११२७ | कण्ठगत-मुखरोगकी० | ११५२ |
| उपोदिकाक्षारतैल | ... ११२८ | सर्वसरमुखरोगकी चिकित्सा | ११५४ |
| अलसकी चिकित्सा | ... ,, | सप्तच्छदादि | ... ११५६ |
| कदरकी चिकित्सा | ,, | पटोलादि, कालकचूर्ण, पीतकचूर्ण | ११५७ |
| चिप्पकी चिकित्सा | ११२९ | दशनसंस्कारचूर्ण | ... ,, |
| अंगुलीवेष्टककी चिकित्सा | ,, | दन्तरोगारशनिचूर्ण, क्षारगुटिका | ... ११५८ |
| पद्मिनीकण्टककी चिकित्सा | ,, | स्वल्पखदिरवटिका, बृहत्खदिरवटिका | ... ११५९ |
| जालगर्दभकी चिकित्सा | ,, | मुखरोगहररस | ... ११६० |
| अहिपूतनककी चिकित्सा | ११३० | महासहचरतैल, बकुलाद्यतैल | ... ११६१ |
| गुदभ्रंशकी चिकित्सा | ,, | मुखरोगमें पथ्य | ... ,, |
| चाङ्गेरीघृत, मूषिकाद्यतैल | ... ११३१ | मुखरोगमें अपथ्य | ... ११६२ |
| वर्णकघृत, द्विरिद्राद्यतैल | ... ११३४ | कर्णरोगकी चिकित्सा । | |
| कुंकुमाद्यतैल | ... ११३५ | दीपिकातैल, स्वर्जिकाद्यतैल | .... ११६७ |
| अरूंषिकाकी चिकित्सा | ११३६ | लशुनाद्य तैल, शम्बूकतैल | ... ११६८ |
| त्रिफलाद्यतैल | ... ,, | कुष्ठाद्यतैल, क्षारतैल | ... ,, |
| दारुणककी चिकित्सा | ,, | कर्णरोगमें पथ्य | ... ११६९ |
| इन्द्रलुप्तकी चिकित्सा | ११३७ | कर्णरोगमें अपथ्य | ... ११७० |
| केशरंजकयोग | ... ११३८ | नासारोगकी चिकित्सा । | |
| भृङ्गराजघृत, महाभृङ्गराजतैल | ... ११४१ | चित्रक-हरीतकी | ... ११७३ |
| आदित्यपाकगूडूचीतैल | ... ११४२ | पाठाद्यतैल, व्याघ्राद्यतैल | ... ११७४ |
| चन्दनाद्यतैल, महानीलतैल | ... ,, | त्रिकट्वाद्यतैल, चित्रकतैल | ... ,, |
| कच्छू और अहिपूतनकी चिकित्सा | ११४४ | नासारोगमें पथ्य, नासारोगमें अपथ्य | ... ११७५ |
| शूकरदंष्ट्रकी चिकित्सा | ,, | नेत्ररोगकी चिकित्सा | ११७६ |
| शय्यामूत्रकी चिकित्सा | ,, | वासकादि | ... ११७७ |
| मुखरोगकी चिकित्सा । | बृहद्वासकादि, कज्जल | ... ११७८ | |
| ओष्ठगत-मुखरोगकी चि० | ११४५ | श्रीनागार्जुनआञ्जन | ... ,, |
| दन्तगत-मुखरोगकी चि० | ११४६ | व्योषाद्यञ्जन, त्रिकट्वाद्यञ्जन | ... ११७९ |
| जिह्वागत-मुखरोगकी० | ११५० | व्रणशुक्रहरीवर्त्ति, दन्तवर्त्ति | ... १२०० |
| तालुगत-मुखरोगकी० | ११५२ | सुखावतीवर्त्ति | ... ,, |
| चन्द्रोदयवर्त्ति, कुमारिकावर्त्ति | ... १२०१ | ||
| दृष्टिप्रदावर्त्ति | ... ,, | ||
| नयनसुखावर्त्ति, चन्द्रप्रभावर्त्ति | ... १२०२ |
( २२ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| पञ्चशतिकावर्त्ति | ... १२०२ | प्रदरान्तकरस | ... १२३३ |
| सप्तामृतलौह | ... १२०३ | प्रदरारिलौह, सर्वाङ्गसुन्दररस | ... १२३४ |
| नयनामृतलौह, नेत्राशनिरस | ... १२०४ | रत्नप्रभावटिका | ... १२३५ |
| पटोलाद्यघृत | ... १२०५ | सितकल्याणाद्यघृत | ... १२३६ |
| शशकाद्यघृत, त्रिफलाद्यघृत १--२ | १२-६ | न्यग्रोधाद्यघृत | ... १२३७ |
| महात्रिफलाद्यघृत | ... १२०७ | विश्ववल्लभघृत, अशोकघृत | ... १२३८ |
| नृपवल्लभतैल और घृत | ... १२०९ | अशोकारिष्ट | ... १२३९ |
| भृङ्गराजतैल, नेत्ररोगमें पथ्य | ... १२१० | प्रदरमें पथ्यापथ्यविधि | ... १२४० |
| नेत्ररोगमें अपथ्य | ... १२११ | योनिव्यापदकी चिकित्सा । | |
| शिरोरोगकी चिकित्सा । | रजःप्रवर्त्तक योग | ... १२४० | |
| सूर्यावर्त्तकी चिकित्सा | १२१२ | रजःप्रवर्त्तिनीवटी,गर्भजनक-भेषज | १२४५ |
| अर्द्धावभेदककी चिकित्सा | १२१३ | नष्टपुष्पान्तकरस | ... १२४६ |
| अनन्तवातकी चिकित्सा | १२१४ | फलघृत | ... १२४७ |
| शङ्खककी चिकित्सा | " | कफलल्याणघृत | ... १२४८ |
| शिरोबस्ति | ... १२१५ | सोमघृत | ... १२४९ |
| अर्द्धनाडीनाटकेश्र्वर, चन्द्रकान्तरस | १२१६ | कुमारकल्पद्रुमघृत | ... १२५० |
| शिरःशूलादिवज्ररस | ... " | लोमशातनविधि | १२५३ |
| महालक्ष्मीविलास | ... १२१७ | आरग्वधाद्यतैल | ... १२५४ |
| मयूराद्यघृत, षड्बिन्दुतैल | ... १२१८ | क्षारतैल | ... १२५५ |
| दशमूलतैल १-२ | ... १२१९ | वन्ध्याकी चिकित्सा | १२५६ |
| मध्यमदशमूलतैल | ... १२२० | गर्भिणीरोगकी चिकित्सा | १२५८ |
| बृहद्दशमूलतैल १-२ | ... " | उभयपंचदशक, उभयविंशक कोष्ठ | १२६६ |
| महादशमूलतैल | ... १२२२ | प्रसवमंत्र | ... " |
| महाकनकतैल, रुद्रतैल | ... १२२३ | एरण्डादि, मधूकादि | ... १२६८ |
| तप्तराजतैल | ... १२२४ | लवङ्गादिचूर्ण, गर्भबिलासरस | .. १२६९ |
| कुमारीतैल | ... १२२५ | गर्भबिनोदरस | ... " |
| शिरोरोगमें पथ्य | ... १२२६ | गर्भचिन्तामणि | ... १२७० |
| शिरोरोगमें अपथ्य | ... १२२७ | गर्भचिन्तामणिरस | ... " |
| प्रदररोगकी चिकित्सा । | बृहद्गर्भेचिन्तामणिरस, इन्दुशेखररस | १२७१ | |
| दाग्र्यादि, चंदनादिचूर्ण | ... १२३० | गर्भिणीरोगमें पथ्य | ... १२७२ |
| पुष्यानुगचूर्ण | ... १२३१ | गर्भिणीरोगमें अपथ्य | ... " |
| उत्पन्नादि, मधूकाद्यवलेह | ... १२३२ | सूतिका रोगकी चिकित्सा | १२७३ |
विषयानुक्रमणिका । ( २३ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| दशमूलक्वाथ, अमृत्वादि | ... १२७४ | पञ्चमूलादि | ... १३०२ |
| सहचरादि १-२ | ... " | बिल्वादि | ... " |
| सूतिकादशमूल, बृहद्द्दीबेरादि | ... १२७५ | शृङ्ग्यादि | ... " |
| देवदार्वादि | ... " | रजन्यादि | ... " |
| वज्रकाञ्जिक, भद्रोत्कटाद्यवलेह | ... १२७६ | कर्कटादि | ... १३०३ |
| सौभाग्यशुण्ठी १-२ | ... १२७७ | बालचतुर्भद्रिका | ... " |
| बृहत्सौभाग्यशुण्ठी | ... १२७९ | धातक्यादि | ... " |
| पञ्चजीरकगुड | ... १२८१ | पुष्करादि | ... " |
| जीरकाद्यमोदक | ... १२८२ | बालरोगान्तकरस | ... १३०४ |
| सूतिकाविनोदरस | ... " | कुमारकल्याणरस | ... १३०५ |
| बृहत्सूतिकाविनोदरस | ... १२८३ | अश्वगन्धाघृत | ... " |
| सूतकारिरस | ... " | बालचाङ्गेरीघृत | ... " |
| सूतिकाघ्नरस | ... " | अष्टमङ्गलघृत | ... १३०६ |
| सूतिकाहाररस | ... १२८४ | कुमारकल्याणघृत | ... " |
| रसशार्दूल | ... " | लाक्षादितैल | ... १३०७ |
| महारसशार्दूल | ... १२८५ | विषकी चिकित्सा | १३०७ |
| महाभ्रवटी | ... " | रसायनाधिकारः | १३१४ |
| सूतकारिरस | ... १२८६ | ऋतुहरीतकी | ... १३१८ |
| भद्रोत्कटाद्य घृत | ... " | भृङ्गराजादिचूर्ण | ... " |
| सूतिकादशमूलतैल | ... १२८७ | अमृतवर्तिका | ... १३१९ |
| स्तनरोगचिकित्सा | १२८८ | श्रीसिद्धमोदक | ... १३२१ |
| काशीशाद्यतैल | ... १२८९ | निर्गुण्डीकल्प | ... १३२२ |
| श्रीपर्णीतैल | ... १२९० | कार्श्यहरलौह | ... १३२३ |
| बालरोगकी चिकित्सा । | अमृतार्णवरस | ... १३२४ | |
| सारिवादि | ... १३०० | नीलकण्ठरस | ... " |
| मुस्तकादि | ... " | महानीलकण्ठरस | ... १३२५ |
| हरिद्रादि | ... १३०१ | मकरध्वजरसायन | ... १३२६ |
| भद्रमुस्तादि | ... " | बृहत्पूर्णचन्द्ररस | ... १३२७ |
| समङ्गादि | ... " | महालक्ष्मीविलासरस | ... १३२८ |
| नागरादि | ... " | वसन्तकुसुमाकररस | ... १३३० |
| बिल्वादि | ... " | वाजीकरणाधिकारः | १३३१ |
| पटोलादि | ... १३०२ | गोक्षुराद्यचूर्ण | ... १३३१ |
( २४ ) भैषज्यरत्नावली-विषयानुक्रमणिका ।
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| नरसिंह चूर्ण | ... १३३६ | स्वल्पचन्द्रोदयमकरध्वज | ... १३०७ |
| कामदीपक | ... १३३८ | बृहच्चन्द्रोदयमकरध्वज | ... १३५१ |
| कामधेनु | ... ” | खण्डाभ्रक | ... १३५२ |
| हरशशांक | ... ” | गुडकूष्माण्ड | ... १३५४ |
| लक्ष्मणालौह | ... १३३९ | कामेश्वरमोदक | ... १३५५ |
| सिद्धशाल्मलीकल्प | ... ” | अन्य कामेश्वरमोदक | ... १३५६ |
| पञ्चशर | ... १३४० | रतिवल्लभमोदक | ... १३५७ |
| कामिनीमदभञ्जन | ... ” | कामाग्निसन्दीपनमोदक | ... १३५९ |
| कामिनीदर्पघ्न | ... १३४१ | बृहच्छतावरीमोदक | ... १३६० |
| पुष्पधन्वा | ... ” | महाकामेश्वरमोदक | ... १३६२ |
| पूर्णचन्द्ररस | ... ” | श्रीमदनानन्दमोदक | ... १३६४ |
| अनङ्गकुसुमाकर | ... १३४२ | अभिमन्त्रणमन्त्र | ... १३६६ |
| हेमसुन्दररस | ... ” | मृत्युसञ्जीवनी सुरा | ... १३६७ |
| अनङ्गसुन्दररस | ... १३४३ | दशमूलारिष्ट | ... १३६९ |
| गन्धामृतरस | ... ” | गोधूमाद्यघृत | ... १३७१ |
| सिद्धसूत | ... ” | बृहदश्वगन्धाद्यघृत | ... १३७२ |
| मकरध्वजवटी | ... ” | अमृतप्राशघृत | ... १३७३ |
| श्रीमन्मन्मथरस | ... १३४५ | बृहच्छागलाद्यघृत | ... १३७५ |
| श्रीकामदेवरस | ... १३४६ | भल्लातकाद्यतैल | ... १३७८ |
| मकरध्वजरस | ... १३४७ | अश्वगन्धातैल | ... ” |
| महेश्वररस | ... १३४९ | वीर्यस्तम्भनाधिकारः | ” |
| स्वर्णसिन्दूर | ... १३५० |
इति विषयानुक्रमणिका समाप्ता ।
॥ श्रीः ॥
भैषज्यरत्नावली
भाषाटीकासहिता ।
मंगलाचरणम् ।
भक्त्या नतत्रिदशराजकिरीटकोटि-
रत्नावलीकिरणराजिविराजमानम् ।
श्रीमत्करीन्द्रवदनस्य पदारविन्द-
द्वन्द्वं सदा जयति सिद्धिकरं क्रियाणाम् ॥ १ ॥
टीकाकारोक्त-मंगलाचरण ।
नमः श्रीपूर्ववैद्याय भवरोगनिवृत्तये ।
भैषज्यरत्नावल्याश्च भाषाटीका विरच्यते ॥
भक्तिके साथ नम्र हुए देवराज इन्द्रके किरीटमें सुशोभित रत्नावलीकी किरणोंसे शोभायमान, सम्पूर्ण कार्योंके सिद्धिदाता ऐसे श्रीगणेशजीके चरणकमल निर्विघ्नतापूर्वक इस ग्रन्थकी समाप्ति करें ॥ १ ॥
वन्देऽम्बिकाचन्द्रचूडौ जननीजनकावुभौ ।
निपत्य धरणौ भक्त्या प्रत्यूहव्यूहशान्तये ॥ २ ॥
सकल विघ्नोंकी शान्तिके लिये भक्तिसहित जगत्के माता और पिता जो पार्वती शिव उनको मैं ( ग्रन्थकार ) साष्टाङ्ग प्रणाम करता हूं ॥ २ ॥
श्रीगोविन्दपदारविन्दयुगलं वन्दारुवृन्दारक-
श्रेणीनम्रशिरःकिरीटवलिभिर्नीलोत्पलेन्दिन्दिरम् ।
नत्वा सद्भिषजां मुदे वितनुते गोविन्ददासोऽधुना
नानाग्रन्थमहार्णवल्लब्धसगुणां भैषज्यरत्नावलीम् ॥ ३ ॥