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भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

६०८ सूर्य, चन्द्र, मंगल, शुक्र (३) सूर्य, चन्द्र, मंगल और शुक्र की युति हो तो जातक विद्वान्, धनवान्, वाक्पटु, शास्त्रज्ञ, नीतिज्ञ, स्त्री-पुत्र के सुख से सम्पन्न तथा वाणी से सम्बन्धित कार्यों (वकालत आदि) से जीविका अर्जित करने वाला होता है। परन्तु कुछ विद्वानों के मतानुसार ऐसा व्यक्ति निर्लज्ज, परस्त्री-गामी, खोटे स्वभाव का, चोर तथा धनहीन होता है। सूर्य, चन्द्र, मंगल, शनि (४) सूर्य, चन्द्र, मंगल और शनि की युति हो तो जातक धनहीन, मूर्ख, दरिद्र, दुर्बल शरीर वाला, बौना अथवा विषम कद का तथा भिक्षा द्वारा आजीविका उपार्जित करने वाला होता है। सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु (५) सूर्य, चन्द्र, बुध और गुरु की युति हो तो जातक तेजस्वी, नीतिज्ञ, शिल्पज्ञ, शोक- रहित, अत्यन्त धनी, रोग-रहित, गौर-वर्ण तथा सुन्दर नेत्रों वाला होता है। सूर्य, चन्द्र, बुध, शुक्र (६) सूर्य, चन्द्र, बुध और शुक्र की युति हो तो जातक सुन्दर, कान्तिमान्, सुवक्ता, राज्य द्वारा सम्मान-प्राप्त, छोटे कद वाला परन्तु मन में व्याकुल रहने वाला होता है।

६०६ सूर्य, चन्द्र, बुध, शनि (७) सूर्य, चन्द्र, बुध और शनि की युति हो तो जातक निर्धन, दरिद्र, कुटुम्ब-हीन, विकलांग, नेत्र-रोगी, माता-पिता से हीन तथा भिक्षुक होता है। सूर्य, चन्द्र, गुरु, शुक्र (८) सूर्य, चन्द्र, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक सुखी, गुणी, राजाओं द्वारा सम्मानित तथा जल, गुरु एवं वन में प्रीति रखने वाला होता है। सूर्य, चन्द्र, गुरु, शनि (९) सूर्य, चन्द्र, बुध और शनि की युति हो तो जातक यशस्वी, धनी, प्रतापी, सर्वत्र सम्मानित, सुन्दर नेत्रों वाला, पतले शरीर वाला, स्त्रियों का प्रिय तथा बहुत पुत्रों वाला होता है। सूर्य, चन्द्र, शुक्र, शनि (१०) सूर्य, चन्द्र, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक डरपोक, अत्यन्त दुर्बल शरीर वाला, स्त्रियों-जैसा आचरण करने वाला, परन्तु अन्य लोगों का अगुआ (नेता) होता है।

६१० सूर्य, मंगल, बुध, बुध (११) सूर्य, मंगल, बुध और गुरु की युति हो तो जातक विजयी, शूरवीर, चक्रधारी, देवता- ब्राह्मणों का सेवक, पर-स्त्रीगामी तथा कुशल बुध- निर्माता या गुरु का व्यवसायी होता है । १४६० सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र (१२) सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र की युति हो तो जातक चोर, दुर्जन, निलंज्ज, पर- स्त्रीगामी, विषम अंगों वाला परन्तु देवता और ब्राह्मणों का पूजक तथा सदैव विजय पाने वाला होता है । १४६१ सूर्य, मंगल, बुध, शनि (१३) सूर्य, मंगल, बुध और शनि की युति हो तो जातक प्रतापी, धनि, योद्धा, मन्त्री अथवा राजा, अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञाता, नीच पुरुषों की संगति में रहने वाला तथा नीच आचरण करने वाला होता है । १४६२ सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र (१४) सूर्य, मंगल, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक अत्यन्त धनी, यशस्वी, नीतिज्ञ, मनुष्यों का पालक, सुन्दर शरीर वाला तथा राजा द्वारा सम्मानित होता है । १४६३

६११ सूर्य, मंगल, गुरु, शनि (१५) सूर्य, मंगल, बुध और शनि की युति हो तो जातक दयालु, धनी, मनुष्यों में श्रेष्ठ, सुप्रसिद्ध सेनापति, मन्त्री, अन्न का संचय करने वाला, राजा द्वारा पूजित तथा सब कामों में सफलता पाने वाला होता है। १४६४ सूर्य, मंगल, शुक्र, शनि (१६) सूर्य, मंगल, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक दुराचारी, मूर्ख, कटुभाषी, नीच कर्म करनेवाला, जन-द्रोही, मांसाहारी तथा नीच जाति के मनुष्यों तो साथ रखने वाला होता है। १४६५ सूर्य, बुध, बुध, शुक्र (१७) सूर्य, बुध, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक बुद्धिमान्, धनवान्, सुखी, प्रसन्न, विनयी, मानी, स्त्री-पुत्रादि के सुख से युक्त तथा सब कामों में सफलता पाने वाला होता है। १४६६ सूर्य, बुध, गुरु, शनि (१८) सूर्य, बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक झगड़ालू, उद्योगहीन, निन्दित कर्म करने वाला, नपुंसक-जैसा तथा बहुत-से भाइयों वाला होता है। १४६७

६१२ सूर्य, बुध, शुक्र, शनि (१६) सूर्य, बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक पवित्र हृदय वाला, सुन्दर, विद्वान्, पण्डित, सुवक्ता, उच्च विचारों वाला, भाग्यशाली, सुखी, भाइयों द्वारा सम्मानित, मित्रों वाला तथा स्त्री-पुत्रादि के सुख से युक्त होता है। १४९८ सूर्य, गुरु, शुक्र, शनि (२०) सूर्य, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक सुखी, कवि, शिल्पज्ञ, करुणा से पूरित हृदय वाला, राजा का प्रिय, परन्तु लोभी और परम कृपण होता है। १४९९ चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु (२१) चन्द्र, मंगल, गुरु और गुरु की युति हो तो जातक परम विद्वान्, बुद्धिमान्, सत्यवादी, शास्त्रज्ञ, लोक से पूजित, सुखी जीवन व्यतीत करने वाला, मनुष्यों में श्रेष्ठ तथा राजा का कृपापात्र होता है। १५०१ चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र (२२) चन्द्र, मंगल, बुध और शुक्र की युति हो तो जातक झगड़ालू, नीच प्रकृति का, बन्धु-विरोधी, भ्रातृ द्रोही, वेद-शास्त्र-निन्दक, नींद में समय बिताने वाला तथा नीच मनुष्यों से प्रेम रखने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति की स्त्री कुलटा होती है। १५०२

६१३ चन्द्र, मंगल, बुध, शनि (२३) चन्द्र, मंगल, बुध और शनि की युति हो तो जातक सुखी, साहसी, स्त्री, पुत्र तथा मित्रादि से युक्त, दो माताओं वाला तथा वीर-वंश में जन्म लेने वाला होता है। चन्द्र, मंगल, गुरु, शुक्र (२४) चन्द्र, मंगल, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक धनी, मानी, पण्डित, साहसी, नीतिज्ञ, पुत्रवान्, अंगहीन तथा व्याकुल रहने वाला होता है। चन्द्र, मंगल, गुरु, शनि (२५) चन्द्र, मंगल, बुध और शनि की युति हो तो जातक धनवान्, शूर-वीर, पण्डित, सत्यवादी, दयालु, उन्मादी, वचन का पालक, राजा द्वारा सम्मानित परन्तु नीच मनुष्यों के साथ रहने वाला होता है। चन्द्र, मंगल, शुक्र, शनि (२६) चन्द्र, मंगल, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक कुल-कलंक, महा ढीठ, सब का शत्रु, दरिद्री, उद्वेगी, जुआरी, मलिन, सर्प-जैसी आँखों वाला, मद्य-मांस आदि का सेवी तथा वीर- वंश में जन्म लेकर भी कायर स्वभाव का होता है। उसकी स्त्री कुलटा होती है।

चन्द्र, गुरु, शुक्र, बुध [कुंडली १४७६ : लग्न (१) में चन्द्र, गुरु, शुक्र, बुध] (२७) चन्द्र, गुरु, शुक्र और गुरु की युति हो तो जातक सुन्दर शरीर वाला, दयालु, दानी, चतुर, पण्डित, शास्त्रज्ञ, धनी, शत्रु-विहीन तथा माता-पिता से रहित होता है। चन्द्र, गुरु, शनि, बुध [कुंडली १४७७ : लग्न (१) में चन्द्र, गुरु, शनि, बुध] (२८) चन्द्र, गुरु, शनि और बुध की युति हो तो जातक कवि, ज्ञानी, यशस्वी, धर्मात्मा, इन्द्रियजित्, बन्धु-प्रिय, तेजस्वी राज्य-मन्त्री तथा सर्वप्रिय होता है। चन्द्र, बुध, शुक्र, शनि [कुंडली १४७८ : लग्न (१) में बुध, चन्द्र, शुक्र, शनि] (२९) चन्द्र, बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक धनी, गाँव का स्वामी, राजा द्वारा सम्मानित, अनेक पत्नियों वाला तथा नेत्र- रोगी होता है। चन्द्र, गुरु, शुक्र, शनि [कुंडली १४७९ : लग्न (१) में गुरु, चन्द्र, शुक्र, शनि] (३०) चन्द्र, बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक पण्डित, परोपकारी, पुरुष-श्रेष्ठ, पर-स्त्रीगामी तथा धनहीन होता है। उसकी दानी मोटे शरीर वाली होती है। कुछ विद्वानों के मतानुसार ऐसा व्यक्ति स्थूल शरीरवाला, धर्मात्मा तथा चतुर होता है।

६१५ मंगल, बुध, गुरु, शुक्र [कुण्डली १४१० : लग्न में मं. १, बु., गु., शु.] (३१) मंगल, बुध, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक सुशील, धनी, दयालु, राज-मान्य, स्वस्थ, लोकप्रिय, परन्तु अपनी स्त्री से कलह करने वाला होता है। मंगल, बुध, गुरु, शनि [कुण्डली १४११ : लग्न में मं. १, बु., गु., श.] (३२) मंगल, बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक सत्यवादी, पवित्र-हृदय, विनम्र, धैर्यवान्, विद्वान् सुवक्ता, शूर-वीर परन्तु धनहीन होता है। मंगल, बुध, शुक्र, शनि [कुण्डली १४१२ : लग्न में मं. १, बु., शु., श.] (३३) मंगल, बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक मधुरभाषी, मल्ल-विद्या में निपुण, लोक-प्रसिद्ध, पुष्ट शरीर वाला तथा कुत्तों को पालने वाला होता है। मंगल, गुरु, शुक्र, शनि [कुण्डली १४१३ : लग्न में मं. १, गु., शु., श.] (३४) मंगल, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक धूर्त, विषयी, मानी, विनम्र, साहसी विद्वान्, धनी, पर-स्त्रीगामी तथा श्रेष्ठ मनुष्यों को प्रिय होता है।

६१६ बुध, गुरु, शुक्र, शनि (३५) बुध, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक मेधावी, वेद-वेदांग का ज्ञाता, शस्त्र- विद्या का प्रेमी परन्तु विषय-वासना में लीन रहने वाला कामी होता है। पाँच ग्रहों की युति का फलादेश सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बुध (१) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध और गुरु की युति हो तो जातक दुष्ट, क्रोधी, छली तथा सदैव दुःखी रहने वाला होता है। उसकी पत्नी दुष्ट स्वभाव वाली होती है, जिसके कारण वह सदैव उद्विग्न बना रहता है। ऐसा व्यक्ति स्त्री-हीन भी हो सकता है। सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र (२) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध और शुक्र की युति हो तो जातक मिथ्यावादी, दयालु स्वभाव का, बुद्धि-हीन, दूसरों का काम करने वाला तथा हिजड़ों- जैसी आकृति का होता है। सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, शनि (३) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध और शनि की युति हो तो जातक चोर, सदैव दुःखी, स्त्री-पुत्रादि से रहित, बन्धन (जेल या कैद) प्राप्त करने वाला तथा प्रायः अल्पायु होता है।

६१७ सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र (४) सूर्य, चन्द्र, मंगल गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक दुःखी, नेत्र-रोगी अथवा जन्मान्ध, माता-पिता के सुख से रहित, संगीतज्ञ तथा हाथी से प्रेम रखनेवाला होता है। सूर्य. चन्द्र, मंगल, गुरु, शनि (५) सूर्य, चन्द्र, मंगल, गुरु और शनि की युति हो तो जातक व्यसनी, दुष्ट, झगड़ालू, डरपोक, दूसरों को दुःख देनेवाला, परधनपहारी, सज्जनों का शत्रु तथा वृक्ष-जैसी आकृति वाला होता है। सूर्य, चन्द्र, मंगल, शुक्र, शनि (६) सूर्य, चन्द्र, मंगल, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक धनहीन, अधर्मी, सब का द्वेषी, परस्त्रीगामी तथा आचार-विचार से हीन होता है। सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र (७) सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक धनी, यशस्वी, चतुर, राजा द्वारा सम्मानित, न्यायाधीश, राज्य-मंत्री तथा सर्वत्र प्रशंसित होता है।

६१८ सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु, शनि (८) सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक ऋणग्रस्त, कायर, उन्मादी, उग्र- स्वभावी, वेश्यागामी, दुष्ट कर्म करने वाला, परान्न पर निर्वाह करने वाला, धूर्त तथा अपने मित्रों से कारण दुःख पाने वाला होता है । १४२२ सूर्य, चन्द्र, बुध, शुक्र, शनि (९) सूर्य, चन्द्र, बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक उत्साही एवं धन, सन्तान, मित्र एवं सुखों से हीन, रोगी शरीर वाला होता है । उसके शरीर पर रोयें अधिक होते हैं तथा कद लम्बा होता है । १४२३ सूर्य, चन्द्र, गुरु, शुक्र, शनि (१०) सूर्य, चन्द्र, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक पण्डित, समर्थ, निर्भय, चंचल, ऐन्द्रजालिक, सुवक्ता, पापी, वाक्छल में प्रवीण, स्त्रियों का प्रिय तथा शत्रुओं द्वारा पीड़ित होता है । १४२४ सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र (११) सूर्य, -मंगल, बुध, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक धीर, समर्थ, सुन्दर, स्वच्छ, यशस्वी, धन-धान्य तथा सेवकों से युक्त, बहुत घोड़े रखने वाला, सेनापति तथा राजा का प्रिय होता है । १४२५

सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शनि (१२) सूर्य, मंगल, बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक भिक्षुक, अल्पधनी, जर्जर, मलिन, रोगी, अङ्क, पुत्रवान् तथा उद्विग्न चित्त वाला होता है। सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र, शनि (१३) सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक दुःखी, स्थान-भ्रष्ट, कुत्सित, दरिद्री, रोगी तथा शत्रुओं से त्रस्त होता है। सूर्य, मंगल, गुरु, शुक्र, शनि (१४) सूर्य, मंगल, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक विद्वान्, विचारवान्, तपस्वी, धनी भाई-बन्धुओं से युक्त तथा धातु, यंत्र अथवा रसायन के काम में प्रवीण होता है। वह प्रसिद्धि भी प्राप्त करता है। सूर्य, बुध, गुरु, शुक्र, शनि (१५) सूर्य, बुध, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक दयालु, धर्मात्मा, धनी, शास्त्रज्ञ, सुवक्ता, सेनापति, मित्रों का प्रिय तथा माता-पिता और गुरु का भक्त होता है।

६२० चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र (१६) चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु और शुक्र की की युति हो तो जातक विद्वान्, धनवान्, सज्जन, निष्पाप, श्रेष्ठ स्वभाव वाला, बहुत पुत्रों वाला, मित्र- वान् तथा सुखी जीवन बिताने वाला होता है। चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शनि (१७) चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक मलिन, पराई सेवा करने वाला तथा अन्न की याचना करने वाला होता है। उसे रतौंधी रोग भी होता है। चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र, शनि (१८) चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक कुरूप, मलिन, निर्धन, मूर्ख, दुष्ट कर्म करने वाला, पर-निन्दक, कठोर-हृदय, नपुंसक तथा अपने मित्रों से ही शत्रुता रखने वाला होता है। चन्द्र, मंगल, गुरु, शुक्र, शनि (१९) चन्द्र, मंगल, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक मलिन, पराई सेवा करने वाला, दूसरों को कष्ट देने वाला, दुष्ट स्वभाव वाला, परन्तु विद्वान् होता है। उसके अनेक मित्र तथा अनेक शत्रु होते हैं।

६२१ चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र, शनि (२०) चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक धनी, सुखी, अत्यन्त गुणवान्, विद्वान्, यशस्वी, गणाधीश, लोकपूजित तथा राजा का मंत्री होता है। १५३४ मंगल, बुध गुरु, शुक्र, शनि (२१) मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक चंचल, आलसी, धनी, सुखी, लोकप्रिय, पवित्र वक्ता, दीर्घायु, अधिक सोने वाला तथा तामसी स्वभाव का होता है। १५३५ छः ग्रहों की युति का फलादेश सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र (१) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक यशस्वी, भाग्यवान्, भोगी, धन- धान्य तथा विद्या से युक्त, धर्मात्मा, अल्पभाषी तथा सुखी जीवन बिताने वाला होता है। १५३६ सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शनि (२) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक दयालु, परोपकारी, मंगल चिह्न शुद्ध अन्तःकरण वाला, विवाद में विजय पानेवाला तथा वनों में विचरण करनेवाला होता है। १५३७

६२२ सूर्य, चन्द्र, मंगल बुध, शुक्र, शनि (३) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक चिन्तित, प्रत्येक बात में संशय करने वाला, संग्राम अथवा विवाद में विजय पाने वाला, वन-पर्वतों में विचरण करने वाला तथा जातक स्वभाव का होता है। १४३८ सूर्य, चन्द्र, मंगल, गुरु, शुक्र, शनि (४) सूर्य, चन्द्र, मंगल, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक क्रोधी, कृपण, धनी, सुखी, लोभी, सुन्दर, स्त्रियों को प्रिय, भ्रान्त-बुद्धि, राजाओं का कृपापात्र तथा युद्ध करने के लिए तैयार रहने वाला होता है। १४३९ सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र, शनि (५) सूर्य, चन्द्र बुध, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक धर्मज्ञ, वेदज्ञ, दयालु, क्षमाशील, स्त्री-विहीन, राज-मन्त्री, राजा द्वारा सम्मानित तथा लोक में प्रसिद्ध होता है। १४४० सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि (६) सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक क्षमाशील, ब्रह्म-विद्या का वेत्ता, भिक्षुक, वनवासी, तीर्थयात्री तथा धन, स्त्री एवं पुत्र से विहीन होता है। १४४१

६२३ चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि (६) चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक धनी, गुणी, यशस्वी, पवित्र हृदय वाला, आलसी, अनेक पत्नियों वाला, गुणवान्, राजमान्य अथवा राजमंत्री होता है। सात ग्रहों की युति का फलादेश सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि यदि सातों ग्रह—सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि एक ही भाव में बैठे हों तो जातक सूर्य के समान तेजस्वी, धनी, दानी, राजाओं द्वारा सम्मानित तथा शिवजी का परम भक्त होता है। स्त्री-जातक सामान्यतः पुरुष अथवा स्त्री की जन्म-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित ग्रहों का फलादेश एक-जैसा ही होता है, परन्तु कुछ ग्रहों की विभिन्न भावों में स्थिति के फलस्वरूप स्त्रियों के सम्बन्ध में उनके फलादेश में अन्तर भी आ जाता है। ऐसे अन्तर वाले फलादेश के विषय में आगे लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए। स्त्रियों के सम्बन्ध में विशिष्ट फलादेश की विस्तृत जानकारी के लिए हमारी लिखी पुस्तक 'स्त्री-जातक' का अध्ययन करना चाहिए। (१) जिस स्त्री के जन्म-काल में लग्न तथा चन्द्रमा सम-राशि पर हो (चित्र १५४४), यह स्त्री स्वाभाविक आकार वाली होती है।

६२४ (२) जिस स्त्री के जन्म-काल में लग्न तथा चन्द्रमा विषम राशि पर हों (चित्र १५४५), वह पुरुष-जैसे आकार वाली होती है। (३) जिस स्त्री के लग्न तथा चन्द्रमा सम-राशि पर हों और उन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो (चित्र १५४६), वह श्रेष्ठ शीलवती तथा सुन्दर वस्त्राभूषणों को धारण करने वाली होती है। (४) जिस स्त्री के लग्न तथा चन्द्रमा विषम-राशि पर हों और उन पर पाप-ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो (चित्र १५४७), वह पापिष्ठ तथा बुरे कर्म करने वाली होती है। (५) जिस स्त्री के लग्न तथा चन्द्रमा विषम-राशि पर हों और उन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो (चित्र १५४८), तो उसे मध्यम स्वभाव वाली समझना चाहिए।

६२५ (६) जिस स्त्री के लग्न तथा चन्द्रमा सम-राशि पर हों और उस पर पाप-ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो (चित्र १५४६), तो उसे भी मध्यम स्वभाव वाली समझना चाहिए । टिप्पणी : जो ग्रह अधिक बली हो, उसी के अनुसार स्त्री का स्वभाव समझना चाहिए । (७) जिस स्त्री की कुण्डली में जन्म-लग्न अथवा चन्द्रमा से सातवें घर में कोई भी ग्रह न बैठा हो, अथवा निर्बल ग्रह बैठा ही (चित्र १५५०), उसका पति निरुद्यमी होता है । (८) जिस स्त्री की कुण्डली में जन्म-लग्न अथवा सातवें घर पर शत्रु-ग्रहों की दृष्टि न हो (चित्र १५५१), उसका पति भी निरुद्यमी होता है । (६) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सातवें घर में बुध तथा शनि बैठे हों (चित्र १५५२), उसका पति नपुंसक होता है ।

६२६ (१०) जिस स्त्री के सातवें घर में स्थिर राशि हो (चित्र १५५३), उसका पति सदैव घर में रहता है। (११) जिस स्त्री के सातवें घर में चर राशि हो (चित्र १५५४), उसका पति सदैव परदेश में रहता है। (१२) जिस स्त्री के सातवें घर में द्वि- स्वभाव राशि हो (चित्र १५५५), उसका पति घर तथा परदेश में दोनों जगह रहता है। (१३) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सप्तमभाव में 'सूर्य' की स्थिति हो (चित्र १५५६), वह अपने पति द्वारा त्याग दी जाती है।

६२७ (१४) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सप्तमभाव में 'मंगल' की स्थिति हो (चित्र १५५७), वह बाल-विधवा होती है। (१५) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सप्तम भाव में 'शनि' की स्थिति हो तथा सभी पाप-ग्रहों की उस पर दृष्टि हो (चित्र १५५८), वह अनब्याही ही रह जाती है। यदि विवाह हो भी तो उसके पति की मृत्यु शीघ्र हो जाती है। (१६) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सप्तम भाव में सभी पाप-ग्रह एकत्र हो गए हों (चित्र १५५६), वह अवश्य विधवा होती है। (१७) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सप्तमभाव में शुभग्रह बलहीन हों तथा पाप-ग्रह भी हों (चित्र १५६०°), वह अपने पति को छोड़कर दूसरा पति करती है।