भारतकोश
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सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ

१६ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां


| | | | | | | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | | ऊर्ध्वीकृतग्रीवमहो | २२६।१५६ | एकस्थं जीवि (सु. ६०) | १६।४२ | एकेनाक्षणा प्रविप्त (शा.प.३५९६) | २९६।८ | | ऊषरेषु विवरेषु वा | २१२।२४ | एकस्त्वं गहने | २२५।१२८ | एकेनापि सुपुत्रेण जाय | ९०।९ | | | | एकस्त्वं मरुभूतूहे | २३७।२८ | एकेनापि सुपुत्रेण विद्या | ९०।४ | | ऋक्षाणां भूरिधान्ना(सूक्ति.२.१६) | २१।९१ | एकस्मिन्जनिरावयोः | २४४।२३८ | एकेनापि सुपुत्रेण सिंही | ९०।८ | | ऋणकर्ता पिता (चा.नी.४५) | १५९।२८५ | एकस्मिन्शयने (अमरु.२३) | ३११।२२ | एकेनापि हि शूरेण | ७८।१ | | ऋणशेषश्चाग्नि (पंच.३.२४०) | १५४।५७ | एकस्मिन्शयने विप (अमरु.२२) | ३५८।६५ | एके सत्पुरुषाः (शा.प.४६५) | ६१।२६६ | | ऋणीकृता किं (नैषध.७.३३) | २५९।८६ | एकस्मिन्शयने सरो | ३११।३० | एकैकातिशयालयः (सु.४९२) | ७२।५९ | | ऋतेन | ३८४।२९८ | एकस्मिन्नयने भृशं (सूक्ति.२.५७) | २७।१० | एकैव सामृतमयी(सूक्ति.११.७) | २१०।२४ | | ऋषेरस्याश्रमे पुण्ये | १८।१६ | एकस्मिन्मल्याचले | २३८।६१ | एकैश्वर्यस्थितोऽपि | ७।१०० | | | | एकस्य कर्म सं (पंच.१.२७२) | १५७।१७३ | एको देवः केश (भर्तृ.३.३०) | १७१।१८४ | | एकं काञ्चनभूधरं | १११।१३५ | एकस्य तस्य मन्ये(शा.प.७६५) | २११।१२ | एकोना विंशतिः स्त्री | १८७।१९ | | एकं दन्तच्छदस्य (सु. ७०) | ८।११९ | एकस्य दुःखं (पंच.२.१८७) | १७२।८४३ | एकोऽन्ते द्विसमखिलो | ६।६१ | | एकं ध्याननिमी (सा.द.७.२०) | ९।१४१ | एकस्यायमुदेति (शा.प.१०७०) | २१५।१२ | एकोऽपि गुणवान्पुत्रो (सु.२७३०) | ९०।१ | | एकं भूमिपतिः | १५२।४१८ | एकाकिना (चा.नी. ५६) | ३९३।६५४ | एकोऽभूत्पुलिनात्तत | ३७।५९ | | एकं भूमिपतिः करोति (पंच.१.२२३) | | एकाकिनि वन (शा.प.९०५) | २२९।१४ | एको विश्वसतां हरा (रसगंगाधर) | २४६।४४ | | एकं वस्तु द्विधा कर्तुं | २५।१२ | एकाकिनी यद (शा.प.३७७३) | ३५४।७५ | एकोऽहमसहायो (सु.५८२) | २२९।१ | | एकं वस्तु यदस्ति | १०९।२१७ | एकाकी निःस्पृ (भर्तृ.३.९०) | ३८३।२५२ | एको हि खञ्जन (शृंगारति.४) | ३१३।५० | | एकं हन्यान्न (भा.५.१०।१३) | १४६।१४६ | एकास्रः स्या | ३९३।६४४ | एको हि दोषो गुण (घट.नी.१७) | ६६।४३ | | एकः कर्णमहीपतिं | २४९।१०४ | एकादशरुद्राणामे | ११८।१९६ | एणः क्रीडति (शा.प.९१४) | २३०।४३ | | एकः खलोऽपि यदि | ६०।२३२ | एकान्त | ३८९।४८३ | एणाक्षीस्पृहयालु (शा.श.४) | ३७१।१०५ | | एकः शतं योधयते (हि.३.५०) | १४४।६७ | एकान्तसुन्दरवि(शा.प.२७७३) | २५३।१८ | एणाद्याः पशवः किं | २३८।६३ | | एकः स एव जीवति (शा.प.२५८) | ९६।३ | एकान्ते (साधन.५) | ३९३।६४८ | एणीगणेषु गुरुग | २३३।१०७ | | एकः स एव तेजस्वी(शा.प.२८५) | ७८।२ | एकान्ते द्विसमखिलोच | ५।६१ | एणीदृशः पाणिपु | २५७।१२ | | एकः स्तनस्तुङ्गतरा परस्य | १०।१६२ | एकान्ते बत नो (शा.प.३७७५) | २५८।६२ | एणीदृशः श्रवणसी | २२३।८२ | | एकः स्वादु (भा.५.१०।१६) | ३८३।२५० | एकाभिश्र (प्र.१०) | ३९३।६५१ | एणीदृशो विजयते वे | २५७।५ | | एक एव खगो (भर्तृ.सं.४३३) | २२६।१४८ | एका भार्या प्रकृ(घट.नीति.१४) | ३६५।४७ | एतत्काम (भर्तृ.१.२९) | ३८३।२५८ | | एक एव पदार्थ | १५७।१७९ | एकाभूत्कुसुमायु (कुव.१७१) | ११०।२३० | एतर्तिकं प्रणयिन्यपि | ३५६।८ | | एक एव महान्दो | १०२।१८ | एका भूरुभयोरैक्यं (धर्मवि.९) | २४८।८६ | एतत्कीर्तिवि (नैषध.१२.१०४) | १३७।५७ | | एकचक्रो रथो (स.क.४.१६९) | ७९।११ | एकाभिलाभिलाषो | १६८।६६५ | एतत्कुचस्पर्धि (नैषध.७.७५) | २६५।२७७ | | एकचक्षुर्न काकोऽयं | १८५।११ | एकावलीकलि(शा.प.३३४२) | २६६।३०९ | एतत्कोककुटुम्बि | ३०२।१०० | | एकतश्चतुरो वेदा ब्रह्म | १००।२ | एकासनस्था जलवापु | ४४।३ | एतत्तर्कय कैर (शा.प.३६३९) | ३०२।१३० | | एकतामिव गत (किरात.९.१२) | २९७।८ | एकीभावं गतयोर्ज (सु.४२०) | ५८।१९१ | एतत्तर्कय चक्रवाक | ३२४।५३ | | एकत्रासनसंस्थितिः(अमरु.१८) | ३५८।५९ | एकीभूय (शान्ति. ३.१८) | ३८७।३९३ | एतत्तर्कय चक्रवाय | ३२७।२१ | | एकदन्तद्युतिसित (शा.प.८८) | २।७ | एके केचित्यतिकरग | ८७।३२ | एतदत्र पथिकै (शा.प.७८३) | २१२।२३ | | एकदिप्रभृति क्रमेण | ३२५।५७ | एके तुम्बा व्रतिकर | २४३।२०१ | एतदर्थं कुली (पंच.१.३२०) | १५०।३३४ | | एकदैः किमभावि | ३७०।८३ | एकेऽद्य प्रात (शा.प.४१३७) | ३७२।१४५ | एतदुच्छ्वसितपी (कुमार.८.७०) | ३००।३२ | | एकमेव गुणं प्राप्य | १०२।३१ | एकेन चुलुकेन (शा.प.३९०५) | ३४४।५ | एतद्वन्धगजस्तु (नैषध.१२.८५) | १२३।३ | | एकमेव बलिं (शा.प.३३४७) | २६७।३२८ | एकेन चेत्परिहृतो | २३९।९४ | एतद्वतासिघात (नैषध.१२.७३) | १२५।१९ | | एकमेवाक्षि वामाक्षि | २५९।६४ | एकेन तिष्ठताध्वस्ता (शा.प.२७१) | ७३।१८ | एतद्विन्तबलैर्वि (नैषध.१२.२०) | ११६।६४ | | एकरद द्वैमातुर | २।११ | एकेन राजहंसेन या | २२१।५ | एतद्वीतारिनारी (नैषध.१२.२८) | १३३।४६ | | एकशक्तिप्रहारेण | १४३।४० | एकेन शुष्कवृक्षेण दह्य | ९०।३ | एतद्यशः क्षीर (नैषध.१२.९) | १०४।१०४ | | एकसार्थप्रया (शा.प.४१३६) | ३७२।१५९ | एकेन स्मितपा (पंच.१०१५२) | ३५०।७७ | एतद्विभाति (सा.द.१०.३८) | ३०१।७१ | | एकस्तपो द्विरध्या | १५८।२११ | एकेन हि सुपुत्रेण (चा.नी.१३) | ९०।२ | एतद्व्योमवनीवराह | २९८।३५ | | एकस्त्रिया वस (का.प्र.४७७) | १०५।१३६ | | | एतन्मन्दविप (का.प्र.७.१४२) | २४७।५४ |

संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः१७
एतललब्धमिदं च ३९४।६७५एष क्षुञ्चाति पङ्के दल १४१।५औषसातपभयाद (किरात ९ ६१) २९७।७
एतस्मादमृत (शा प १०८५) २१६।२७एष ते (कुव १६७) ३८७।३९१
एतस्मादिरमे (भर्तृ ३ ६४) ३८२।२५९एष बक सह (शा प ८९०) २२९।२२६क पृच्छाम सुराः ३८६।३६९
एतस्मिन्दक्षि(शा प ३८१९) ३३५।१४७एष वन्ध्यासुतो याति ३६३।५कं योजयेत् ३८४।३०४
एतस्मिन्मरुमण्डले(शा प ११२९)२१९।९एष वृक्षशिखरे (कुमार ८ ३६) २९४।१५क संजघान कृष्णः १९६।१५
एतस्मिन्मलया (शा प ८६७) २२७।१७५एष षट्पदयुवा २४३।२०३कंस ध्वंसयते मुर २४१।६७
एतस्मिन्वन (शा प १०२०) २४०।१२५एष स्वभावो (र २ ३९) ३८७।४०३कंसारातेर्वद गमनं २०९।७३
एतस्मिन्विजने वने १३२।३७एष सूर्याशुसत (शा प ३८३६)३३६।३३कसारिचरणोद्भूत (शा प ७९६) २२१।३
एतस्मिन्सहसा वसन्त २३०।५एष स्वर्गतर (शा प ३६३०) ३०१।९४क क कुत्र (का प्र ७ २२४) २३१।४८
एतस्या रतिवल्लभ ७५६।४९एषा का मुक्तमुक्ता ३२८।८क कगोरिपिता २०४।११७
एतस्या करिकु (सूक्ति १) ३३९।११६एषा ते हर का सुगा ७२।३क कान्तारमगा १९७।३४
एतस्या स्तनपद्म २७०।६१एषा धर्मपताकिनी (शा प १०७) ९।१३०क कुर्याद्भुवन सर्व १९६।७
एतस्योन्नतसर्वक १११।२४८एषा पुष्करिणी मरा २२२।३६क कौ कं कौं कान् १९६।१६
एता नवाम्बुधरका ७५।२१एषा फुल्लकद (मृच्छ.५ ३५) ३५७।३१क खे चरति (सूक्ति ९८.०८) १९६।१२
एता करोपी (रघु १६ ६६) ३३८।६७एषा भविष्यति विनि २५३।२६क खे भाति हुतो २०४।११५
एता संप्रति गर्भ ११५।५२एषैव योषिता धन्या ३५१।२क पूज्य सुजन २०४।११९
एता स्खलद्दल यस २५३।०५एष्यति मा पुनरय ३५२।१९क प्रार्थयते मदन(शा प ५५५) १९७।३१
एता स्वार्थपरा (पच ५ ६३) ३४९।३४एष्यन्ति या (नैषध ७ १०५) २६९।४१८क श्रद्धायति (मृच्छ ५ ३८) ३८०।४१४
एता गुरुश्रोणि (रघु १६ ६०) ३३७।६१एष्यन्त्यवश्यमद्य ३४३।१००क. स्यादम्बुदया २०४।११२
एतादृशे कलियुगेऽपि ९९।११एहि गच्छ पततोत्तिष्ठ (ध्वन्या ३) ६५।५क स्वभाव (राग त १ २३०)३८७।३८८
एतानि नि सह (शा प ३४१०) २८४।१९एहि स्वागतमा १८०।१०४३क स्वभावगभी (सु.३१५९) ६६।१८
एतानि बालधव (शा प ९६९)२३४।१४३एहि हे रमणि (शा प ५३७) १९४।२८ककुभा मुखानि (शिशु ९ ४२) ३००।६७
एता या प्रेक्ष(शा प ४१९९)३७२।१४४कचकुचचुचुकाग्रे १५।२१
एतावज्जन्मसाफ (हि २ ४७) १६३।४७०ऐन्दवादचिं (काव्या ३ १८३)३८७।४०८कञ्चिदेव समय समा ७२।११३
एतावत्सरसिजकु २०९।७ऐन्द्र वनु (काव्या सू ५ १ २७)३४४।१७कटाक्षेणापीष (सा द १० ९८) २८०।७७
एतासु केतकि (शा प १०१३) २३९।९३ऐश्वर्य नहुषस्य ११२।२७१कटी मुष्टिग्राह्या (सु २३६०) २६५।४६
एता हसन्ति च रु (मृच्छ ४ १४)३५५।८ऐश्वर्यमद (भा ५ १।१४७) ३८०।३९८कटुकं वा मधुरं १६९।७२१
एते केतकबू (सूक्ति ६१ ३०) ३२४।५०ऐश्वर्यस्य विभूषण (भर्तृ स ४१) ८४।२०कटु कृणन्तो मल ४९।१७४
एते ते गिरिकूटसद्म १४०।५ऐश्वर्यात्संह (चा नी ३ ३३) ३८७।४००कटुतीक्ष्णोष्णलव ३७१।१३९
एते ते दुरति (शा प ३८८२) ३४२।७८ऐश्वर्यादनपेत (मुद्रारा १ १४) १५२।४१९कटुभिरपि कठोरचक्र २७।५
एतेनोत्कृत कण्ठप्र ११२।२८२कठिनतरदामवेष्टनत्ले २२।१०९
एते पाटीरवाटीनव ३२६।३६ॐकारो मदनद्वि(शा प ३६२९)३०१।०२कठिनहृदये मुच (अमरु ५३) ३०७।५१
एते वारिकणा किर ३५४।६३ओजसापि ख (किरात.९ ३३) ३००।४८कण्ठस्य तस्या (कुमार १ ४२) २६३।२१५
एतेषु हा तरुण मा (भोज २०४)२१२।३९ओजोभाजा (शिशु १८ ७५) १३०।१०४कण्ठस्य विद्धे(शा प ३३२७) २६३।२११
एते सत्पु (भर्तृ २ ६६) ३८३।२६२ॐनम परमार्थैक (सु १२) ४।८कण्ठालंकारघण्टाघण १०।१४९
एते समुल्लस द्वासो रा ३४७।३ओषामासे मत्स(शिशु १८ ३५)१२९।७४कण्ठालिङ्गनमङ्गलं २४।१६३
एते स्निग्धतमा (सूक्ति ८ १५) ५६।१२०ओष्ठपल्लवविदश (किरात ९ ५७)३१५।४९कण्ठाश्लेषिणमुञ्चत ३१८।१७
एते हि गुणा (भोज ६७) २४३।२१३कण्ठे गद्गदता खेदो (सु ३१७२) ६६।२८
एतैर्दीक्षगन्ध (शा प ९९४) २३८।५५औत्सुक्यमात्रमवसा १३९।२कण्ठे मौक्तिकमालि २७७।६५
एतौ द्वौ दशकण्ठक २१।८६औत्सुक्येन कृत (रत्ना १ ०) १२।२६कण्ठे वसन्ती (नैषध ७ ५०) २६३।२२३
एवमेव कुले जाता ३८०।११०औदार्य भुवनत्रये २३७।३५कण्ठोच्छित्तोऽपि हुंकृ ९९।११
एवमेव नहि (सु ४२८) ५९।२१६औरस कृतसम्बन्धं ८८।७कतरपुरहर पहर्षं हा ७३।२३
एवमेव मनु ३७७।३२और्वी इवातिलुब्धा(शा प ४३१) ७२।४०कति कति न (शा प.९३८) २३३।१०२
एष क्रीडान्सताम्य ३२६।३७औषधार्थसुमंत्रा १४४।५११कति कति न लताः २२२।६१
३ सुभा०अनु०कति कति न (सूक्ति २६ ४) २४०।१९६

१८ | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां | --- | :---: | ---

पद्यपृष्ठ/संख्यापद्यपृष्ठ/संख्यापद्यपृष्ठ/संख्या
कतिचिदुद्धतनिर्भरम४०।४८कपोलपत्रान्तम् (नैषध ७.६०)२६२।१८६करिष्यति कलानाथ२९३।५
कति ते कबरीभार१८८।४४कपोलपाली तव२६१।१३५करेण करिणा वीर१२८।१८
कति न सन्ति जना२८४।१६कपोलफलकाव (सा द १० ४३)२७५।३करे वेणीमेणीसद२७१।४६
कति न सन्ति मही२३७।४७कपोले जान (महा ना ३ ५०)३६०।३१करे श्लाघ्यस्त्याग (भर्तृ स ७०)५२।२४०
कति नो विषया१०५।१३३कपोले पत्राली कर (सु १६२७)३०६।४७करोति योऽ (किरात ३ ५१)१७४।८८९
कतिपयदिनपर (शा प ६९७)५८।१५९कपोले पत्राली पुल२३।१३७करोति निर्मलाधार (शा प प्र १५)८६।८
कतिपयदिवासस्था (भोज ३९)२१।८२कपोले पाण्डुत्वं किम२७६।३३करोति पूज्यमानो (सु ३६५)५६।९७
कतिपयदिनेषु च (कुव ३९)१२२।१७१कपोले मार्जार (शा प १७९)३०१।७९करोति शोभामलके (भाव ४३)१९७।२५
कतिपयनिमेषव (शा प १५५)३२।१८कमठकुलाचल (भर्तृ २ १०९)४८।१२१करोति नाभ नीति (हि २ १४)९१।९
कतिपयसह (किरात १० ३०)३४६।१५कमण्डलूपमोऽमा (हि २.९१)१४२।२३करौ नुनाना (किरात ८.४८)३३८।९१
कति पल्लवि (शा प १०१८)२३९।१०६कमनीयतानिवास२६०।१२५करौ नुनाना नव (किरात ८ ७)३४५।५२
कति सन्ति लवङ्ग२३९।८४कमलभूतनया व१०४।१९२कर्कशतर्कविचारव्यय४३।३
कथं नाम न सेव्य(हि २ २८)१४६।१७३कमलमनम्भसि (सु १५१६)३६३।१०कर्णत्विग्गुणोत्कर्षारुत्या७०।६
कथमपि कृतप्रत्या (अमरु ७५)२७६।४९कमलाकुचकुनकांचल१४।१२कर्णस्त्वच शिबिर्मा (भर्तृ २ ३४)७०।११
कथमपि सखि क्री (अमरु १५)३०९।८कमलाक्ष विलम्ब्य३१२।३३कर्णाक्सिदन्त (नैषध ७ १०३)२७०।२५
कथमवनिप (काव्य प्र ५ १३४)१२६।३६कमलासनकमलेक्षण१६।६कर्णाट देहि कर्णावि११३।३
कथमिव तव (किरात १० ३६)३३६।१३कमलिनि म (शा प ३७९३)२४४।२२२कर्णामृत सूक्तिर (शा प १४४)३७।१७
कथमिह मनुष्य (शा प १४०)२९।१२कमलिनी मालिनी (सु ७३०)३३२।७०कर्णारुतुदमन्तरे (रसगङ्गाधर)२०७।२२८
कथमुपरि कला(सा द १० ४७)३६३।१६कमले कमला शेते३६४।१३कर्णारुतुदमेव कोकि२७२।५६
कथयत कथमेषामेनया५।४२कमले कमले नित्यं१९५।४०कणिकादिष्विव खणे (सु १४)१।४
कथय निपुणे (शा प ३५८२)२९२।३कमले कमलोत्पत्ति३१२।१२कर्ण चामरचारु (शा प ९१९)२३८।८२
कदर्यितस्यापि हि (हि २ ६७)७७।८कमले निधाय कम२७५।१०कर्णेजपाना वचनप्र४९।१७७
कदली कद (प्र राघव १ ३७)२६९।२९८कमलेव मतिर्मे (सा द १० २७)१०४।८३कर्णे तत्कथयन्ति (सु ४६२)६२।२७८
कदा कान्तागारं (शृङ्गारश०)२७९।७४कम्पन्ते गिरय (शा प १०७४)२१७।४६कर्णोत्पलेनापि (नैषध ७ ३०)२५९।८३
कदाचित्पाञ्चालीवि१८४।४५कम्बुकण्ठि चरण३१२।३२कर्णोत्तङ्गविसर्पिणी२७२।६३
कदा भिक्षामक्तै (शान्ति ४)३६८।५६करकम्पितखड्गस्य१२२।१७०कर्तव्यमेव कर्तं (वृ चा ५ ३)१६०।२१७
कदा वाराण (सा द ३ ०५०)३६९।५९करकिंमलय (अमरु ९०)३२१।१७कर्तव्यो हृदि वर्त२१४।७४
कदा वा साकेते वि३६९।५८करजालमपूर्वचे (सु ७२)२७।१७कर्पूर इव दग्धो (का प्र १५८)२५०।५
कदा वृन्दावन्ये न३६८।५५करतलयुगपरीण२६५।२७१कर्पूरधूलि (का.प्र ७ ३२५)२७३।१०
कदा वृन्दावन्ये वि३६८।५७करनररविदीर्घध्या३२७।११कर्पूरधूलिरचिता२४३।१९३
कनककलशस्य (स क ३ ११०)२२।१३१करप्रचेयासु (शिशु २ ८९)१४७।१९१कर्पूरन्ति सुधाद्रव१३६।४९
कनककमुकायित२६७।२८६करवदरसदृशमखिल (शा प ५९)३।६कर्पूरपूरच्छविवाद१८२।२९
कनकनिकषभासा२१।७९करभदयिते य (शा प ९६०)२३४।१३२कर्पूरप्रतिपन्थिनो१०७।१८६
कनकभङ्गपिशङ्ग (शिशु ६ ४७)२४४।२५करभदयिते योऽ (सु ६६७)२३४।१३१कर्पूरादपि केत(प्र राघव ७.६८)१३७।४३
कनकभूषण (पञ्च १ ८२)१७५।३९करमुदयमही (सा द ३ १३१)२९९।२०कर्पूराम्बुनिषेक (सूक्ति ४२ ८)२७७।६०
कनकमृगं हत्वा३६२।२१करयुगमपद्म (शिशु १३ ३७)१२६।४२कर्पूरेण स्थलविर२५४।४०
कन्दर्पज्वरस्य (गीत ४ ९ १२)२५०।८५कररुदनीवि दयि (शिशु ९ ७५)३१०।७कर्मण फलनिर्वृत्ति३८६।३६८
कन्बरा समपहाय क९६।४करवारिरुहेण सधु१९८।१११कर्मणा बाध्यते (महा ना ?)९१।२४
कन्या कामयदुद्वाहं१००।३३करवालकरालवारि१३५।१७कर्मणा मन (शा प १३९४)१४६।१६६
कन्या निष्कासि१६६।५७१करस्फोटोडम्बरत्या२०९।५कर्मब्रह्मविचारणा विज४३।७
कन्याप्रसूतस्य धनु३४६।११कराग्रजागच्छ (नैषध ७.७९)२६५।२८०कर्मभूमिरिमा प्रा(र २ १०९)३९३।६४५
कन्या वर (नैषध [?]१०.१)३८७।४०१करानप्रसार्य रविणा(शा प.७४०)७३।१७कर्मानुमेया (काम नी ४ ४०)३८४।२७२
कपटवचनभाजा के३५८।७२करालवाचालमु१२९।४९कर्मियत फल (भर्तृ २ ६०)१६१।३७५
कपिरापे च कापि(कुव.१४५)२३५।१५१कराविव शरीरस्य नेत्र८८।१कर्षाङ्क सिञ्च (शा प १२७७)१३२।३२
कलकण्ठ यथा (भोज २८७)२२५।१२४

मस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः १९


कलकणितगमे (काव्या.२.१०) २०८।२२
कलङ्कदाशो गगना २२२।१
कलभ तवान्तिक २२१।००
कलमा पाकविन (भोज ७४,२४) १९।६
कलमाग्रनिर्ग (शा प ४०/१) ८५।६ = = ८८।२७
कलयति कुव (सा द १० ७०) २००।१८
कलयति मम चेत २८८।२२
कलय वलय वम्मि ३००।१४
कलया तुषार (शिशु ० ३४) ३००। २
कलशे निजहेतुद २६५।२८८
कलहान्तानि (पच ४ ७२) १८१।५४५
कलाविनाथानय २०१।१२०
कलानिधिरय रवे ३०१।८८
कलारल गीत पग १७७।९७९
कलाववत सेव कला ८१।३
कलासीमा का १००।२१२
कलास्तास्ता सम्य २१०।३२
कलिकालसियं याव १९४।७१
कलितमम्बरमाक ३००।८९
कलुष च तवा (सा द १० ८२) १०४।९०
कल्पक्षोणिदहोड १११।२५५
कल्पतरुका मदोग्धी (कुव १२५) १०३।७१
कल्पद्रुम कल्पितमे ८७।२४
कल्पद्रुमो न जा (शा प १२४२) १०१।५
कल्पद्रुमोऽपि (शा प ९८७) २३७।३१
कल्पयति येन (हि २ ६५) १७०।००१
कल्पस्थायि न जीवि (सु ५२१) ७०।२९
कल्पान्तक्रूरकेलि कतु ८१।०७
कल्पान्तवाससखो १५६।१४९
कल्पान्ते क्रोवन्तस् (शा प ९७) ८।१११
कल्पान्ते शमित (सूक्ति २ २४) ५।५४
कल्याणं व क्रियासु ८।१११
कल्याण वो विधत्ता ३।३३
कल्याणं न किम (शा प.११८४) २२०।४
कल्याणं भगवत्कथा ३४।५४
कल्याणं भवता १११।२६३
कल्याणवाक्त्वमि २०२।३१
कल्याणाङ्कुरचानुक्त ३०७।५९
कल्याणाना निधान (हनु १ २) २१।८८
कल्याणोल्लाससीमा क २१।८९
कल्योत्थानपरा नि ३५०।१२
कल्लोलक्षित (प्र राघव २.३५) २०२।१९९
कल्लोलवेल्लितदृषत्प २१६।१९


कल्लोलमञ्चलदुगाव २१५।१७
कल्लोल व्यगन प ८ १२५।०२
कवय कालिदासा मा ५४०५- १२
कवय कि न (भोज) १०७।००६
कवय परितुष्यन्ति (शा प १०७) ८८।५
कवयति पण्डितराजे ३५।१३
कवयो वद कुत्र २०९।६३
कवि करोति कव्या ३२।१६
कवि करोति पद्यानि ८२।१३
कवि पिना पोषयति ३२।१७
कवित्वगानप्रि (नैषध ७ ६७) २६५।२१६
कविभिर्नपसेवासु (शा प १५१) ३०।२
कविर्गुणहरति श्लाघ्या ३०।१२
कविरमर कविरुच (शा प १७८) ३४।६
कविवाक्यामृतती (शा प ४६९) ३२।१९
कविहृदयोचनसूया १७१।७८४
कवीना महता सूक्ते (सु १८८) ४०।२४
कवीना मानस नोमि (भोज १२) ३२।६
कवीना सतापो (प्रदीप) १०६।१५१
कवीनामगलहूर्षा (सूक्ति ० ७४) ३७।६२
कवीन्द्र नोमि वा (शा प ७२) ३६।४८
कवीन्द्राणामास (कुव ४३) १२२।१०२
कवीश्वराणा वचसा ३५।८०
कवेरभिप्रायमगन्द (सु २५८) ३२।३५
कश्चिच्छला (शिशु १८ ६४) १३०।९४
कश्चित्कम्यचिदव (ह स १७, १६८।६०८
कश्चित्तरति (मा १० ४९७) २४३।६३३
कश्चि पान्यस्नुषा १८८।७२
कश्चिदास्रवर्ण छि (र २ ६३) ३८०।४१०
कश्चिद्द्विपस्तङ्ग (रघु ७ ७७) ३६०।२०
कश्चिञ्चव पञ्चवमा २२६।२१
कश्चिन्मूर्च्छामि (शिशु १८ ७८) १३०।८८
कषायेरुपवांस्थ कृता ४४।४
कष्टं च खलु मूर्खत्व (चा ना २ ८) ९६।२
कष्ट जीवति गणिका ३५०।५
कष्टा वृत्ति परा (चा ना ५९) १५२।३९०
कस्तूरिका हरिण २४४।१०८
कस्तूरिका तुणभु २०५ ६०
कस्तूरिकामृगनाम (कुव १२६) ५८।१६४
कस्तूरी जायते कस्मा १९६।१
कस्तूरीतिलक ललाट (सु २७) २५१।१८४
कस्तूरीतिलकं ललाट १८३।५५
कस्तूरीतिलकन्ति भा १०१।४५
कस्तूरीतिलक (शा प ३३९४) २५८।४३


कस्तूरीयान्ति भाले १०१।४६
कस्तूरी सितिमानमा १३७।७३
कस्तूरीयमदौ योद्धु (कुव ७०) १०२।३३
कस्त्वं कुष्णमवेहि २३१।५०
कस्त्वं ब्रद्यक्षप्रवे (सूक्ति ० ८३) २०।६८
कस्त्व भद्र खले (कविना २०) ६१।२७०
कस्त्वं भो क (शा प १०४६) २/२।१७१
कम्त्व भो कधिर २८७।८९
कस्त्व लोहितलोच (सु ७६३) २२१।३०
कस्त्व शूली मृगय (शा प ९५) ५।४५
कस्मान्नोऽह किमपि ३६९।७३
कस्मात्त्व दुर्बलासी १९५।५३
कस्मादिन्दुरसौ विनो ५३।२६६
कस्मिञ्छेते मुरारि १९८।३९
कस्मिन्वसन्ति वद १९७।२९
कस्मिन्स्वपिति कमा २००।३४
कस्मै कि कथनीयं कस्य ३६३।६
कस्मै चिन्कपटाय कैट ६३।३३
कस्मै यच्छति स २०४।१११
कस्मै हन्त फलाय (रसगगाधर) २४९।१०२
कस्यचित्किमपि नो १७१।८०८
कस्यचिन्समद (शिशु २० १०) ३१४।१३
कस्य तृष न क्षपय (भोज ७३) २१९।३
कस्य मरो दुरवि (शा प ५५६) १९६।१३
कस्यारयाय (प्र राघव ६ ४४) २९२।२८
कस्यादेशात्क्षपयति ५१।२३१
कस्यापि कोऽप्य १७६।९५८
कस्याचिद्वाचि कश्चि ३४।६८
कस्याश्चिन्मुग्व (शिशु ८ ५६) ३३१।११३
कस्यैयं तरणि प्रपा ३३९।१२२
कहमस्सि गुहावक्ति १८७।२७
काश्चित्कत्तपशत ३७४।२०१
कावित्नुच्छद्यति ९४।१११
काक कृष्ण पि (नीति १३) २२५।१२०
काक पक्षबलेन भू २३१।५०
काक पक्षिक्षु चा १५८।२१२
काक पञ्चवने रति ८४।२१
काक आह्वयते काकान् ७३।१४
काकतालीययोगेन १५२।१२
काकतालीयवत्त्रासं (हि प्र ३६) ८३।१४
काक स्व फल (सूक्ति १७ ४) २२८।२१८
काकस्य गात्रं यदि (नीति र ८) २२८।१०
काका कि कि न (भोज १९२) २२७।१८४
का कान्ता कालिया २००।४०

२० सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां

का काबला निधुवन २२३।१८कान्तारभूमिरुहमौलि ८७।३१कामेघादुपजाति २०४।१९३
काकाल्लौल्यं यमा (सूक्ति ८९ ३५) ४५।१कान्ता रुचिं मुनि १९०।७७कामेन कामं प्रहि ३४०।१९
काकुत्स्थस्य दशाननो ७८।१३कान्तावियोग (चा नी २ १४)३८०।४७९कामेनाक्रुध्य चापं २६।२०८
काकुत्स्थेन (शा प ४०१८) ३६३।२१कान्तारे जलवृक्षवै १३०।२३कामो वामदशा १२२।१६५
का कृता विष्णुना १९८।१०कान्ते कञ्चलिकाम २१८।१८काय सनिहिता (हि.२.६५) १६३।४६६
काके कार्ण्यम् (सूक्ति १५ ११) २२७।३८कान्ते कद्यपि (अमरु.१३) ३५७।३७काय कष्ट (शा प १०३९) २४१।१५४
काके शौचं (विक्रम ४१) १७७।८१३कान्ते कथंचिद्र (अमरु.१५८) ३२९।६कायस्थेनोदरस्थेन (शा प.४०४३) ४५।२
काकै सह विवृद्ध (शा प ८३८) ४५।३५कान्ते कलितचोलान्ते ३१८।३कारञ्जी कुञ्ज (शा प ३८५१) ३३९।१२५
काकोलं कलक (शा प ३६०२) २९७।३०कान्ते घोरकृतान्त ३११।३९कारणान्मित्रता(पञ्च १ ३१७) १६५।५२५
का खलेन सह (वृ चा ४ ३५) ५६।१०४कान्ते जग्मुषि ताम्र ३२४।४७कारणोत्पन्नकोऽ (शा प ३९३८) ३४७।२
काच काञ्चनसंस (हि प्र ४२) ८६।१२कान्ते तथा (शृङ्गारति १ ३९) ३१९।२८कारण्वं सवि (पञ्च २ २७) १४९।३०६
का चक्रे हरिणा २०३।१०९कान्ते तल्पमु (अमरु १०१) ३२९।२१कारुण्यामृतनीरमाध्रि २१।८४
काचा काञ्चनभूषि २१८।६३कान्तेत्युत्पललो (भर्तृ.१ ७२) २५०।१९कार्कश्यं स्तनयो (पञ्च १ २०२)३५०।७८
काचित्कीर्णा (शिशु १५ ९६) १२६।२२कान्ते वावय मे पा १८८।३०कार्त्स्येन निर्वर्णयि २७०।२७
काचिद्दाला रमणव १९१।८४कान्तो यास्यति दूरदे ३३०।२कार्पण्याेन यश (नव.५ ) १७९।१०३३
काचिद्वियोगानलतप्त १९०।६७कान्तोऽसि नित्य(भोज २३५)२४२।१७८कार्पासकृतकूर्पास २५१।१५
काचिद्विलोलोकनयना १९०।७६कान्पृच्छाम सुरा (शा प १४७) ३०।१कार्यकार्ये किम (सु २८६१) ३६९।७२
काचिन्निवासितब (शा प.३५२३) २७३।३का पाण्डुपत्नीगृहभू १९७।२४कार्यपेक्षी जन (दृ श.४५) १६८।६९०
काचिन्मृगाक्षी (शा प ५१९) १८५।२१कापिशायनसुग (शिशु १० ४) ३१४।७कार्येणापि विलम्बन ३५४।६१
काचे मणिर्मणौ (पञ्च १ ८३) १४९।२७३कापुरुष कुकुरश्च ५५।२७कार्ये दासी रतौ वेश्या ३५०।९
काचो मणिर्मणि (भट्ट.३) ४६।७१का प्रियेण रहिता २००।५५कार्येषु मन्त्री करणे ३५१।२७
काचिद्दिनावैससये १८२।४०का प्रीति सह १६७।६४८कार्ये सत्यपि जातु ३५३।५२
काञ्चीगुणैरिव (शा.प.३३४५)२६६।३१९कामं कामदुघ धु (शा प.४९५) १८१।२कार्य्यं चेत्प्रतिप (हनु.६ ४०) २९०।८५
काञ्ची काञ्चो न ११८।१०९कामं कामसमस्तव १०८।२०४कालक्रमकमनीयक्री २३९।९९
काठिन्य कुचकुम्भ ११५।५१काम जीर्णपलाशसह ७४।४७कालक्रमेण परिणा १७६।९७०
काठिन्य कुचयो ह्य (कुव १३४) १३१।४काम नृपा सन्ति (कुव ५२) १०४।१९०कालागुरौ सुरभि २३७।४९
काठिन्यमङ्गैर् (शा प ३३४१)२६५।२७७काम प्रियानपि (सु ५१३) ७९।१कालातिक्रमणं (पञ्च १ २६०) १४९।२८४
काणा कुब्जा (शा प १३३९) १४४।७३कामं भवन्तु (शा प ११४४)२४०।४२४कालातिक्रमण (शा प ७८६) २१३।६६
का तव का (मोहमुद्गर ) ३८७।४०५काम वनेषु हरि (शान्ति ४ ४) ८०।२८कालिदासकवि (पद्यस १५) ३८४।२९०
का त्व पुत्र पुत्री नरेन्द्र(भोज १८२)१३३।३८काम वाच कतिचिद ६९।२७कालिन्दि ब्रूहि कु (कुव ६६) ११४।२३
कानने सरिदुर्गै (सा द १० ७४)१०३।६४कामकर्मुकतया कथ २५८।५६कालिन्दीनर्मदाम्भ १३८।९०
कान्त ना (शा प ३८२८) २३६।३०कामनाम्ना किरातेन ३४८।८कालिन्दीतुलिनोदरेषु (सु ३८) २५१।८४
कान्त कुन्तचरि २८७।५कामपि श्रियमासाद्य ८२।१२कालिन्द्या पुलिनेषु (वेणी.१.२) २४१।६६
कान्तं वक्ति कपोति (धर्म.५ ) ९५।१२४कामबाणप्रहारेण २६३।२०७काले देशे यथासु १९९।१६
कान्त विना नदीती १९३।१०कामारिरहितामिच्छ २०२।७७कालेन शिति (शा प ४१६७) ३७४।२०२
कान्त वीक्ष्य विपक्ष ३५६।२१कामसागरविधौ मृगी ३२१।६कालेन शी (भा १२ ७३९) ३९४।७०४
कान्तादूत्य इव (किरात ९.६) २९४।२५कामान्दुग्धे विप्र (उत्तर.५ ३०) ८५।१२काले नीलवला (शा प ३८७६) ३४२।६४
कान्तं निरीक्ष्य बल ३५६।१५कामाय स्पृहय (दृ श २४) १६९।७१८काले पयोधराणामय १८६।४
कान्तया कान्तसयोगे १९३।७कामेन कृत (शिशु १०.६१) ३१७७२२काले मृदु (भा १२ ५३१४) ३९०।६९८
कान्तया सपदि (शिशु.१० ७३)३१९।१६कामिनामसक (शिशु.१० ५७) ३१७।१८काले सहि(काम नी ८०.३६) २८७।४०७
कान्तसगमप (किरात ९ ५२) ३१९।४४कामिनीनयनकज्जल २५९।९५का लोकमाता किमु १९७।१८
कान्ता कामपि कामय ७८।३कामिनो हन्त हेमन्त ३०५।६कालो दैव कर्म ३८४।२९६
कान्ताकटाक्षविशि (भर्तृ २ ७६) ७८।१२कामिन्या स्तनभा २०३।१०७कालो मधु कुपित २८७७४
कान्ताकेलि क (शा प ९९१) २३७।५१कामुका स्यु कया १९९।१३कालो हेतुं (भा १२ ५०६८)३९४।६८७
कान्तामुखं सु (अमरु.१६२) २७८।३८कामुजहार ह (सूक्ति.९८.३४) २०२।८९का विधा कवि १७९।१०३८

सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः २१

कावेरीतीरभू (भर्तृ स ४५०)२३५।१३६किं कोकिलस्य वि१७६।९६६किं तेन हेमगिरिणा (भर्तृ २.७८)२१५।७
कावेरीवारिवे (सूक्ति ५९ ३३)३२७।३८किं कोमलै कल२८०।१३४किं ते निसर्गदन्धि३०६।२९
काव्यं करोषि किमु(सूक्ति ५ ४)३८।२२किं कौमुदी (शा प.३२६९)२७३।१५किं त्राणं जगता२०४।१९६
काव्यप्रपञ्चचू रच३२।२०किं कमिष्यति (शिशु १४ ७५)३६३।१४किं त्व न वेन्सि (शा.प.४४०)९१।३८
काव्यमय्यो गिरो (शा प.१७१)३२।११किं क्रूरं फणिह१७०।७५२किं त्वं निगूहसे (शा.प.३५१०)२९३।३
काव्यास्याक्षरमैत्रीभा३१।२४किं क्रूर स्त्री (वृ चा २.६६)१७१।७२१किं त्वा भणामि विच्छे३०५।२
काव्यास्याग्रफलस्यापि३०।८किं कापि प्रल (शा प ८२७)२२४।१०१किं दूरेण पयो (शा प ८७२)२२७।१७७
काव्यामृतं दुर्जनराहु (सु १७२)४०।४०किं खलु रत्नैरेतै किं२१६।८किं देवकार्याणि(विक्रम ११९)३८६।३७३
काव्ये भव्यतमेऽपि विज्ञ(पदस २)४१।७०किं गजेन३८४।२७३किं दोर्भ्यां किमु (शा प.१२८)२०।७०
का शंभुकान्ता किमु१९७।१७किं गतेन यदि सा (सु.१७४८)३४४।८३किं धनेन कुबेर१६०।३१५
काशा धीरानि (शा प ३९०६)३४४।११किं गोत्रं किमु जीवन६।७९किं न द्रुमा (नैषध ११ १२५)२२७।३३
का शृङ्गारकथा (हनु ६ ४१)१२०।१५१किं चन्दनै (शृङ्गारति २ २)३८४।२७४किं न पश्यति महे२२३।६६
का शैलपुत्री किमु१९७।१९किं चन्द्रमाः प्रत्यु४९।१८६किं नर्भेदाया मम२६५।२७२
काश्मर्या कृतमाल३३७।४९किं चान्यै सुकुला (हि.२.९३)६६।१४किं नु ध्वान्त(सूक्ति ७२ २५)२०३।१३५
काश्मीरगौरव (शा.प ३६०९)२९७।२३किं चारुचारित्रविला३३।३३किं नु मे स्या (भोज.२३)१६१।३५७
काश्मीरद्रवगौरि३१४।७७किंचित्कम्पितपा (शा प ३५३०)३०५।३किं पद्मस्य रुचिं न (कुव २०)३१४।७३
काश्मीरेण दिहा३०४।१६४किंचित्कुञ्चितहारयष्टि२७३।६किं पुष्पे किं (शा प १०४९)२४२।१७४
का श्लाघ्या गुणि१७९।१०२१किंचित्कोपफला (हनु १४ ८७)३६५।६किं पृष्टेन द्रुत (शा.प.२४९३)२८९।४९
काष्ठानुषङ्गात्परिव११४।१७किं चित्रे भुवनानि१३६।५०किं पौरुषं रक्षति (भोज.१५३)१७२।८३०
का सबुद्धि सुभ२०३।१०१किं चित्रे यदि (सु १५३७)१७९।१०२९किं बान्धवेन रवि२४४।२३१
कासारेषु सरित्सु (चा त ४)१८४।७९किंचित्सविभ्रमोदधि२५८।५५किं ब्रूमो हरिं (शा प.४०२५)३६३।२२
कासि त्वं वद चौ२३१।४७किंचिदाश्रयसंयोगाद्व८६।२किं भक्तेनास (हि २.७६)१४५।१४०
किं कण्ठे शिथि (वेणी २ ९)३०७।५७किंचिद्विश्लथकेशवा३२५।६३किं भूमौ परि (शा.प ३६०६)२९७।३१
किं कंदर्प करं (शा प ४०९६)३६९।७४किंचिन्निर्मुच्यमाने गगन (सु.४५)१६।४१किं भूषणं (सा द.१०.८२)१७६।९४८
किं कन्दा कन्दरे (भर्तृ ३ २६)९७।१४किंचिन्मुद्रित (अमरु.११८)३४२।६३किं भूषणं सुन्दर१९७।२६
किं करिष्यति (चा नी २.१०)३९४।६९३किं चैतद्गुरुसेवने कि३१७।६किं मधुना कि वि४८।१३५
किं करिष्यन्ति (सु २७९०)१६२।४२६किं छत्रं कि तु र (सूक्ति २ ८५)२७।१५किं मध्याह्नेदिवाक११५।५०
किं करोति नरः प्रा (शा प.४५२)९०।६किं जन्मना च मह५०।२०२किं मालतीकुसु (शा.प.१००६)२३९।८६
किं करोति (विक्रम १२ २६४)९१।३१किञ्जल्कराजिरिव नील१८।७किं मुग्धमासनम३०६।२६
किं करोमि क गच्छा६६।१२किं जातैर्बहुभि पुत्रै (शुक.२२)९०।१०किं मुञ्चन्ति पयो१९९।२६
किं कवेस्तस्य काव्येन (शा प १५९)३७।६किं जातोऽसि (भट्ट.३८)२३६।१८किं मृष्ट सुतवचनं८९।९
किं कवेस्तस्य काव्येन (सु.१३४)३७।५किं जीवितेन३८५।३१४किं मे सद्गुरुसेवनै.२८०।९५
किं कारणं सुकवि१०५।१३८किं तया क्रियते (हनु १३ १५)९०।२किं युक्तं बत माम२५।८८
किं किं वक्त्रमुपेत्य३०९।८किं तया क्रि (शा प प २.१४१)६९।२२किं रुद्ध प्रि (शृङ्गारति.१.७५)२८९।८४
किं कि सिंहस्वतः किं१९।५५किं तारुण्यत (सा.द १०.३६)२७२।७३किं रे विधो मृगदृ२८२।१४६
किं कुप्यसि क (भोज ६९)२४४।२१५किं तावत्सरसि (शिशु ८.२९)३३९।१०१किं वर्ण्यता कुचद्व१०२।२०
किं कुर्वन्त्युपसि१९७।३६किं तिष्ठामि किमु२८१।१००किं वाच्यं सूर्यशशि६६।१५
किं कुलेन विशालिन३८।३किं तीर्थे हरिणा (रसगगाधर)१७८।१०१८किं वाच्यो२१६।३१
किं कुलेन वि(शा प १४८५)३९४।६८१किं तृष्णाकारि कीदृ१९८।४३किं वापरेण बहुना८७।२८
किं कुलेनोपदिष्टेन शी (मृच्छ.९ ७)८३।२किं ते धनैर्बन्धु३७५।२३९किं वाससा तत्र१७४।८८८
किं कूर्मस्य भर (भर्तृ २ ६९)५३।२६९किं ते धनै (मा १२.६५६०)३८६।३७६किं विद्यया कि१५७।२००
किं कृतेन न (शा प १२२०)१०१।१२किं तेन काव्यमधुना३२।२किं विश्राम्यति (गीत.६ १२.३)२५।१७३
किं केकीव शि (शा.प ८८७)२२८।२२३किं तेन किल (शा प.१५१)३२।१किं वीरूधो भुवि२४३।१९८
किं केतकीपरिमलो२२३।४८किं तेन जातु जाते (पच १.२७)९०।१किं वृत्तान्ते परगृ (रसगंगाधर)१३६।३३
किं ते नम्रतया (नीतिप्र.९)२३८।७७किं शीकरैः कृ (अ शा.२.१८)३०५।२३

२२ | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां

किं शीतांशुम (प्रं.राघव ३ २३) १३६।४५किरति मिहिरे वि ३३६।४०कुञ्चिताधरपुटेन पूर २२१।१२१
किंशुककलिका (शां.प ३७९४) ३३१।११किसलयमिव मुग्ध(उत्तर ३ ५) २७५।२४कुटिला लक्ष्मीर्यत्र प्रभ ६२।१०
किंशुक किं शु २४२।१६७किसलयानि कुत (भोज.२०६) २१२।३४कुटुम्बचिन्ताकुलि ३६७।२५
किंशुकक्षितिरुहा ३३२।७२कीटगृहं कुटि (शा प १११५) ०१८।७६कुठत्वमायाति गुण. (सूक्ति. १) ३३१२१
किंशुके किं शुक (शा प.१३७०) ७१।१२कीटोऽपि सुमन (हि प्र ४६) ८६।११कुत कुवलयं कर्णे (कुव १) ३१२।५
किंशुके शुक मा २२७।१८२कीटैकिं स्यान्न मत्स्या १९८।७कुत प्रेमलवोऽप्य २७७।१७
किं स्याद्राखान् २७।२०९कीदृक्तोय दुस्तर २०१।७०कुत सेवाविही (हि २ २९) १४९।२७६
किं स्याद्विशेषानि २००।४८कीदृक्प्रतार्दींपर्वतं २०१।७१कुत आगल घटते ६४।५
किं स्वप्न किमु २८७।१०कीदृक्षं समिति बल २०१-६कुत्र विधेयो यत्नो १७०।७६४
किं हारै किमु क (राजेन्द्र ७४) २९।२०कीदृक्ष सक्लजनो २०१।७४कुत्र विधेयो वास १७०।७६५
कितव प्रपञ्चिता सा २८८।१८कीदृक्षा गिरिशतनु १९७।२७कुत्र श्री स्थिरता २०४।११४
कितवा यं प्र (शा प १३३३) १४५।१३४कीदृक्सेना भवति र २०१।७२कुत्रायासी किमिद ३५४।८०
किमकरवमहं हरि २०१।६७कीदृग्गृहं याम्यगृहं २००।५०कुत्रायोध्या क रा (हनु ६ ३७) १५।१३१
किमकारि न कार्पण्यं ९६।२कीदृग्वन स्यान्न भ २००।५१कुत्रोदयोदयाचलस्य १९८।३८
किमकारि मन्दमति २९१।६कीदृग्दत्तमत्तंगज १९७।३५कुदेश च कुत्र (चा नी ३०) १६१।३७७
किमञ्जारवद्रां खुरै १२४।६कीदृश वद महन्थ २००।५४कुदेशमासाद्य (चा नी.९५) १७५।९१५
किमत्र चित्रं यदि (विक्रम १३८) ४५।३४कीदृश हृदयहारि २०१।५६कुप्तेनसुप्रीनयनाश्र १९०।७४
किमधिकमस्य (सां.द.१०.७२) २१६।१०कीदृशी निरयभूरने २०१।५७कुन्दकुसुममुं पश्य १८७।१६
किमनन्ततया ख्यातं १९९।२६कीर नीरसकरीरण २२७।१८५कुन्दकुड्मलमुपास्य २२३।७०
किमपि कान्तभु (शा प ३७४९) ३२८।९कीर्णा रेजे सा(शिशु.१८.७९) ३०१।१०८कुन्द दन्तैर्मुख निग २७९।६६
किमपि किमपि(मालती.८.१३) ३०६।३१कीर्ति प्रवरसेनस्य (सूक्ति ४ ६२) ३५।२४कुन्दे कदम्बे कुमु २३९।१०३
किमपेक्ष्य फलं (किरात २ २१) ४८।१५१कीर्ति श्रीनरसिंह १९६।५४कुपात्रदानाच्च भ १७३।८५०
किमप्यसा (शा प १४००) १४२।१७०कीर्ति श्रीरघुवंश १९९।१,४कुपितापि मनः पति ३३३।८३
किमप्यस्ति स्व (हि २ ५३) १६३।४७७कीर्ति श्रीरघुवंश रत्न १९९।२९कुपितासि यदा (सा.द १० ६४) ३००।२
किमलम्बताम्ब (शिशु ९.२०) २९७।१६कीर्ति स्वर्गतरङ्गिणी १३९।८कुपुत्रे ना (भा १२ ५२२७) ३९३।६३७
किमव्यतयता ख्यात १९९।२१कीर्ति स्वर्गतरङ्गिणी (पद्यस ४) ११४।१४कुप्यताशुभच (किरात ९ ५३) ३१५।४५
किमशक्यं बु(पञ्चत १ १९३) २८३।२५५कीर्तिस्तव क्षितिप ५३।५२१कुप्यल्लोकेशबाहुप्रक ३२६।३४
किमसि विमला (शा प १९५४) २२०।५कीर्तिस्ते दयिता १२२।१८३कुप्वोः क्रप्वौ च शेषो ४२।३
किमस्ति यमुनानद्या २००।३९कीति मृणालकम १७६।९६१कुबेरगुप्ता दिशमुष्ण ३३१।२२
किमस्य रोम्णा क (नैषध १ २१) २५२।२कीर्तिर्नृत्यति नर्तकीव ८७।३५कुब्जस्य कीटखातस्य (सु ३१६६)६६।२३
किमहं वदामि खल (रसगगाधर) २४८।७७कीतौ व्याप्तिमवेल्य १९९।१३०कुभार्या च (भा १२ ५२२६) ३९४।६८०
किमान्द्यत्वगुरुत्वा (शा प ४७९) ८१।७कीर्त्यास्य चन्द्रकरको १३९।५कुभोज्येन दिनं (शा प १४९२) १५४।५८
किमाराध्यं (सा द १० ८१) १६८।६६४कीलालै कुङ्कुमाना(सुधा ल ८) ३२८।२५कुमारसंभवं दृष्ट्वा १८८।३२
किमासेव्यं (का प्र १०.५२१) १७७।९८४कुक्कुटे कुर्वति क्राण ३२३।२कुमुदकमनी (का प्र १० ४६१) ३१३।४६
किमिच्छति नर २००।३५कुक्षे पूल्यै यवनवित ९९।१६कुमुदवनमप (शिशु ११ ६४) ३२३।३२
किमिति कृशासि कृ (रसगगाधर) ३५४।७१कुग्रामवास कुल (पद्यस १०) १७३।८७६कुमुदशबलै (शा प ९५१) २३४।१३०
किमिति सखे परदेशे ३३०।१कुङ्कुमपङ्केनाङ्कित (भर्तृ स ११७) २५३।१३कुमुदान्येव श(अ शा ५ २८) ३९३।६३४
किमिन्दु किं पद्म २५४।३७कुचफलश्लेषव्वलाना (रसगगाधर) १३५।८कुमुदेष्वधिक भा (शा प ३६४३) २९७।२
किमिवाखिल (शिशु १६ ३१) ४९।१५४कुचकुम्भौ स (शा प ३३५१) २६७।३२५कुम्भ परिमितमम्भ ९०।११
किमिष्टमन्न खरसू १७३।८६१कुचदुर्गराजधान्यो २६७।३४६कुम्भो सदम्भो २६४।२५९
किमिह बहुभिरु (सु ३४५३) २५२।५२कुचद्वये चकोराक्षी २६४।२५५कुरङ्गा. कल्या (शान्ति.२.१८) ३६८।४९
किमुत्तीर्णा पन्था ३५६।२५कुचाभ्या भाखन्ती २५४।३५कुरङ्गाक्ष्या वेणी सुभ १२४।८
कियती पञ्चसहस्त्री ७०।२३कुचावस्या काम २६५।२९१कुरङ्गीणा यूथं नि २३०।३४
कियन्मात्रं जलं वि (भोज.१८५) २०५।२कुचेलिनं (चा नी १५ ४) ३८५।३१९कुरङ्गीवाङ्गानि स्ति(सूक्ति ५१.१५) ३१०।३
किरति प्रकरं गवा २१०।१४कुचौ तु परिचर्चि ३७८।२१६

संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः २३

कुरबक कुचा (शा प १०९९) १३२।१७कूजितानि कलयन्व ३३२।७४कृतोपकार प्रियब (सु १९००) २९३।८
कुह गम्भीराशयता (सूक्ति ३० १) २१८.४कूटसाक्षी मृषावा (शा प ७०७) १५४।४९कृत्यं किमस्य ३८४।३०५
कुर्मे किल्विष (रागत ४ ६२६) ३९३।६६३कूपाम्भासि पिबन्तु २१४।७३कृत्वा कार्णाटक्रान्ता ३२६।३५
कुर्यान्न परदारेच्छा १५४।६३कूपे पानमथोसु (शा प ८५९) २१३।६३कृत्वा दीनेनि (सा द ३ १८४) ३६९।८७
कुर्यान्नीचजना (शा प १५१४) १५७।६९कूपोदकं वटच्छा (चा नी ९६) १६२।४२१कृत्वापि कोशपान (सु ७०५) २२२।५१
कुर्वेड्योत्लावि (शिशु १८ ४४) १३०।८०कूर्म पातालगङ्गाप (भोज २२७) ११७।९८कृत्वापि येन लज्जा (सु ४०१) ५८।१८५
कुर्वता मुकुलि (शिशु १० ३०) ३१५।३३कूर्म पादो (सूक्ति ९७ ४७) १२२।१६२कृत्वा प्रवृद्ध (प्र राघव २ ३०) २०५।५१
कुर्वते स्वमुखेनैव बहु ५५।५५कूर्मो मूलवदालवालव (हनु ६ ३) २१।८५कृत्वा मेरमुलूख (हनु १४ ८५) १३६।५२
कुर्वन्ति तावत्प्र (पञ्च १ २५७) ३४९।६८कूष्माण्डीफलव २४०।१२६कृत्वा विग्रहशत्रु (सु २१९०) ३११।२३
कुर्वन्तु नाम (सूक्ति ३३ ३७) २४१।१४४कृच्छ्रानुवृत्तयोऽपि ७६।२कृत्वा शस्त्रवि (शान्ति १ १०) ३७५।२२८
कुर्वन्नपि व्यलीका (हि २ १३२) १६४।४८५कृच्छ्रेण कापि (सूक्ति ४९ २५) २७३।८कृत्वोपकार यस्तस्मा (सु ७७७) ७१।३०
कुर्वेनानुमपुष्टे सुख ३२५।६७कृच्छ्रेणामेव्यमध्ये (भर्तृ ३ ३८) ८९।६कृपण स्ववधूमग्न ७१।१६
कुल वृत्त च (काम नी ५ ६०) ३८४।२८६कृत च गर्वाभिमु १०५।११२कृपणसमृद्धीनामपि (सु ४८४) ७२।३६
कुलगुरुरबलाना (शा प ३०७७) २५०।१६कृत पुरुषशब्दे (किरात. १८ ७२) ७७।३कृपणेन शवेनेव (शा प ३८८) ७१।८
कुलपतनं जनगर्हा (पञ्च १ १८७) ३५२।९कृत वपुषि भूषण (कुव ५२) ३५९।९०कृपणेन समो दाता (कविता २९) ७१।१
कुलशीलगुणो (चा नी १०२) १४२।१९कृतककृतकैर्मायाशा (सु १६८८) १०९।५कृपाणकिरणानलं १३१।११२
कुलशैलदल पूर्णसुवर्ण (सु १३) १७।२कृतकान्तकेलिकुतुक १७।३कृपाणीय काण १२४।९
कुलाचला यस्य महीं २०।६९कृतकृत्यस्य नृत्य (हि ४ ११) १४८।२४६कृमयो भस्म (शा प ४१४१) ३७१।११६
कुलीना रूपवत्यश्च ३४९।४२कृतकोवे यस्मिन्भ्रमर २१।९५कृमिकुलचित्तं (भर्तृ २ ९) १७७।९९७
कुलीने सह सप (चा नी ५८) १६२।३८९कृतघ्नस्य शिशुघ्न (सु २९८९) १६५।५५९कृमिभिः क्षत ३७२।१३८
कुले कलङ्क कत्र १७५।२२३कृतचङ्क्रमणे गणेपु ८९।११कृश काण (सु ३३९०) ३७१।१३२
कुलोद्भूत (काम नी १० ३८) ३८७।३९९कृतदुरितनिराकरण ४२।३कृशा केनासि त्वं (सु १३२६) ३०५।१
कुल्याम्भोभि पवनच १४१।५कृतवलिभ्रमे (शिशु ११ १४) ३२३।२८कृशाङ्ग्या कुच २६४।२४१
कुविन्दस्त्वं ताव (क प्र ७ १७३) १३५।३०कृतनिश्चयिनो (पञ्च १ १८७) १६५।५२२कृशासीत्यालीना (सु १३२५) ३०५।२
कुशल तस्या जीवति (कुव १४९) २८८।२०कृतमद निगद (शिशु ६ ५०) ३४५।३८कृषिका रूप ३८६।३८२
कुशला शब्दवार्ताया ९८।५कृतमनुमत दृ (नधी ३ २४) ३६६।८कृष्टा केशेषु (वेणी ५ ३०) ३६१।५१
कुसुम कार्मुकका २३२।६७कृतमन्दपदन्न्यासा ३०।१६कृष्ण वपुर्वह्रतु (सु ७६६) २२८।२१३
कुसुम कोशा (शा प ११३५) २४३।२११कृतमपि महोपकार (रसगङ्गाधर) ५६।११८कृष्णत्वं (शा प १२३९) १०८।१९९
कुसुम पतदेत्य ना २०१।६३कृतवानन (किरात १० २६) १६१।३६९कृष्णं त्वं नव (शा प १३०) २३१।४९
कुसुमजन्म ततो ३३१।३६कृतविद्योऽपि (काम नी ४ ४६) २८७।४२५कृष्णं त्वं (बिल्वमङ्गल) २३१।४८
कुसुमनगवना (किरात १० ३१) ३३२।३६कृतवैरे न विश्वास ३८७।४१९कृष्णमुखी न १८४।२५
कुसुमपरिमलेनामो ३२६।१९कृतशतमसत्सु (हि २ १६६) १७०।७७३कृष्णवर्णहृदयं ३०४।१४४
कुसुममेव न केवल ३३२।४१कृतस्य करणं (नीतिसार १८) १६०।३००कृष्णवर्त्मनि गुणा ९५।१२
कुसुमयनफलिनीर २४७।७कृतान्तपाशव (पञ्च २ ७) १५७।१९१कृष्णश्टिङ्गवकनीनिके ३१०।५
कुसुमशयन न प्रत्य २७९।७२कृतान्तस्य दूती जरा ९५।१३कृष्णा ते कच २९१।७
कुसुमशयनेऽप्य (शा प ३४७६) २८९।६३कृतापचारोऽपि (शिशु २ ८४) १४७।१८६कृष्णांर्जुनातुर (शा प ३६५५) ३१२।२
कुसुमशरविलास भङ्गु ५।४१कृतार्थं स्वामि (वृ चा २ ३६) १५६।१४०कृष्णेनाम्ब गतेन (औचित्य १६) २४।१६४
कुसुमसुकुमार (शा प ३७९७) ३३३।१०२कृतावधान जि (किरात ४ ३३) ३४४।२५कृष्णो गोरसचौर्य २३१।४५
कुसुमस्तवकस्येव द्वयी (हि १ १३२) ७९।४कृतिनामकृती कथं १७५।२३०केका कर्णा (शा प ८२८) २२७।१७८
कुसुमस्तवकान् (शा प १००९) २३८।७९कृतिनोऽपि प्रती (कविता ३४) ३८६।२७२केकाभि कल ३०९।१६
कुसुमादपि स्मितह २८८।३१कृते च रेणुका कृत्या ९८।७केविचित्तस्य २६०।११७
कुसुमायुधकोदण्डे २६४।२३०कृतेऽप्याज्ञाभङ्गे कथ ३०६।४६केचिदज्ञानतो (सु २७८४) १५३।१४
कुसुमितलता (का प्र १० ४७३) २७५।१३कृते प्रतिकृतिं (पञ्च ५ ८०) १६५।५४६केचिद्भग्ना १२८।३३
कुस्थानस्य प्रवेशेव गुग् ८६।३कृतो दूरादेव स्मि (अमरु १४) ३०६।४१केचिद्बद्धा १९३।२८८
कूजन्ति कोकिला (सु. १६८६) १९६।१५केचिद्दन्दन्ति ३७५।२४२
केचिल्लोचन २३७।५३

२४ | सुभाषीतरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां


केतकीकुसुमं भृङ्ग (सु ७२४) ८१।८कैलासीयेति १३७।७०कोल केलिमलं २३०।३६
केतक्य कटु २२४।१११कैलासीयेति कैरवी १३६।५३कोलाकृतिरपा १८८।३५
केदारभाजा (नैषध ७ ३५) २५९।८८कैवर्तकर्कशकर ९२।७५को लानो १८०।१०४५
केदारे कीटशो २००।४१कोक स्तोक ३२०।५०कोलाहले काककुलस्य ८६।४
केनचिन्मधुर (शिशु १० ५४) ३१७।१६कोकानाकुलयं ३०२।१०७को वीरस्य मन (हि १ १७५) ७८।११
केनाजितानि नय ५०।१९९कोकानुद्ग्रीवयन्तः ३२५।६८कोशमूलो हि(का नी १३ ३३)३९४।७०३
केनात्र चम्प (शा प १००३) २३८।६७कोकिल कल (शा प ८४१) २२५।१२५कोशद्वद्धमियं (कुव. ६७) ३९३।६४२
केनादिष्टौ कमल ५५।२३०कोकिलश्रूतशि (सु १६४३) ३८४।२७८कोषः स्फीत (सु १५२३) २६३।२०२
केनाप्यर्थं (शान्ति २ २) ३७५।२४४कोकिलाना (चा नी ३.९) १६३।३८०कोऽहं कौ (शा प १४०४) १५३।४२३
के नाम न विन (पच ४ ५४) ३४९।२६कोकिलो (सा द १० ५९) २२५।१२२कोऽहं ब्रूहि (महा ना २) ३६२।३५
केनासीन (शा प १११०) २१८।७०कोटरान्त स्थितो(सु. १६९७) ९०।४को हि तुला (शा प ११९६) २४८।७१
केऽपि स्वभाव ७२।३९कोदिद्वयस्य २४८।७५कौटिल्यं कच(का.प्र १०.५२३)३१२।२४
के प्रवीणा १९९।१८कोऽतिभार (चा नी ७३) १६३।४०४कौन्तेयस्य सहा २३१।४२
के भूषयन्ति १९७।१९कोऽत्र भूमि (सा द.१० ५१) २९४।२१कौप वारि (शा प ९३३) २३२।८८
केयं भाग्यवती २४१।६०कोऽत्रेत्यह (का नी २२) १४५।१३७कौपीनं धृतवान्ह ९८।३
केयं मूर्त्यन्धकारे (सूक्ति ९९ २) ८१।०४कोदण्डं न १०८।२०९कौपीन शत ३७१।१११
केयं श्यामोपल (प्र.राघव.२ ७) २७३।१९कोदण्डस्तव १०८।२०६कौपे पयसि (शा प ९३२) २३१।६१
केयूरं न करे २५८।५१कोदण्डो २९०।७८कौमुदीव तुहिना (कुव ९१) ११५।४३
केयूरा न विभूष (भर्तृ २ १६) ८५।१४को दुःखी सर्व १९९।१४कौर्म संकोच (हि ३ ४८) १५०।३१६
केयूरीकृतकङ्कणीकृत(सूक्ति ५४.१०)७।८२को दुराव्यस्य १९८।२कौ विख्याता १९९।२२
केलिः प्रदहति (पच १ १८६) ३५२।१४को देश कानि ३६।१७कौ शंकरस्य वल २०२।८८
केलिं कुरुष्व परि (सु ६२३) २३१।६८को वन्द्यो (हि प्र २१) ९०।५कौशेयं कृमिजं (पच १ १०३) ८२।४८
केलिचलाङ्गुलिल १४।१०को धर्मो (हि २ १४९) १७०।७६९कौस्तुभमुरसि (शा प १२०३) २४८।८७
केलीकौतुक २५६।५४को नयति जग २००।४७क्रतौ विवाहे (हि ३ १२४) १५२।३९९
केवल व्यमन(पच २ १५५) १६५।५३९को न याति (भर्तृ २.१०५) १५६।५५६क्रमसरलित २७९।६०
के वा न सन्ति (चात ३) ३८५।३३७को नाम नानुवर्तेत ६५।७क्रमोद्गता (नैषध ७ ९७) २६९।४०२
केश. काश (सा द १० ५) ३७१।१२७को निर्दग्धत्रिपुर ९९।३३क्रयविक्रय (शा प ४०३५) ३६४।२१
केशः कुन्द ३५५।१०कोऽन्धो योऽ १७०।७६३क्रव्यात्पूगे (शिशु १८ ७८) ५३०।१०७
केशालुञ्चनसाम्ये ३६४।६कोप चम्पक २३८।७०क्रान्तकान्तवदन (शिशु १० ३) ३१४।६
केशव पतितं (शा प ५२७) १८६।१कोऽपवाद (किरात ११ २५)१६१।३६८क्रामन्त्य अत्त (ध्वन्या ३) १३२।२९
केशाः सयमिन (भर्तृ १ १२) ३१४।६९कोपप्रसाद (पच.१ ३७) १४८।२४७क्रियते धवल (शिशु १६ ४६)१७५।९२९
केशानाकुलय (सु १८४८) ३४८।१८कोपवलयुन (शिशु १० ३९) ३१५।३२क्रीडन्मन्दरकन्दरो ७।८६
केशान्धकारा (नैषध ७ २३) २५८।४०कोपस्त्वया (अमरु.११३) ३१३।५१क्रीडन्माणव (प्र.राघव ७ ८०) १४२।१३
केशान्बामकरा २५८।३७कोपात्किंचिदु (शृङ्गारति १ २७) ३१०।५क्रीडाकारि तडाग २३१।२९१
केशौ कोमल (शा प ३४५८) २७७।५६कोपातकोमललोल (अमरु ९) ३१०।८क्रीडामिन्नहिरण्य ९६।११
केषांचिद्वदला २३५।१४७कोपो यत्र भुकुटि (अमरु. ३८) ३०९।६क्रीडासु च (शा प १५६८) १४३।४१
केषांचिद्रावि शुक (सु १४३) ३९।२२कोऽध्यन्य (शा प १२२२) १०२।१४क्रुद्धस्य दन्तिन १२८।१६
केषांचिन्निजवेश्म ९५।१२६कोऽप्येष (शा प ३९७६) ३६०।२४क्रुद्धोलूकनखप्र (सु ७१७) २२२।३९
केसरदुमतलेषु २०१।५८को मायति मक्र २००।४५क्रुद्धार स्मर (का प्र.७.२२५) २६।२०२
के स्थिरा. के १९८।९को मोहाय २०३।१०६क्रोडं तातस्य ३।३१
कैलासस्य प्रथ (का प्र ५.१०१७) १३६।३४कोऽयं कोप ३०७।५३क्रोधैर्हृदैष्टिपातै ८।१०२
कैलासाद्रावुदस्ते ७।१०१कोऽयं द्वारि हरि. (सु १०४) २४१।५६क्रोधो मूलम् (वृ.चा २ १३) १६०।३१३
कैलासायितमद्रि (सु २००२) २०६।९६कोऽयं भ्रान्ति (मङ्कट ९९) २१५।१३क्रोधो हि शत्रुः १७३।८८०
कैलासालयभाल (का प्र ४.६४) १२।३९कोऽर्थान्निद्रा (पच १ १५७) १७८।१०११क्रोशान्त. शिशाव ८९।३

सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः २५

क्रौञ्च क्रीडतु (शा प ११२७) २९९।८क्षणमयमपुवि (शिशु ११ ४८) ३२७।१७क्षुद्राः सन्त्रास (सु २२८३) ३६१।४९
केशत्यागकृते ३७६।२५६क्षणाहप्रबोवमायाति ९।५२क्षुद्रो द्रवैस्य कटुना ५७।१४९
क गन्तासि भ्रा (शान्तिश १ १७)७४।३४क्षतातकिल (रघु २ ५३) १५१।३७७क्षुद्रोऽपि तनुते तात ८७।१८
क च ननु जनका ९२।६४क्षते प्रहारा (पञ्च ४ ६३) १७३।८४४क्षुम्पत्प्रत्यर्थिनृपुथ्वी १२२।१६९
क्वचिच्चारुचा १०१।१२क्षत्रियस्यो (सूक्ति ९० ३७) १५०।३२१क्षेत्रग्राम (प्र ३५) ३७९।८२
क्वचिज्झिल्ल्रीनाद (सु ७२३) २२५।१४०क्षन्तव्यो मन्द १६६।५६६क्षोणी क सहते २०४।१२०
क्वचित्कन्था (शा प ४०९८) ३६८।३९क्षपा क्षामी (सूक्ति ६१ १८) ३४१।५५क्षोणीकाम निजा ११५।३६
क्वचित्कार्यञ्चाञ्ची ५५।७२क्षमातुल्यं तपो १६६।६००क्षोणीक्राम निजाम् ११५।३७
क्वचित्कृष्णार्जुन २६०।९८क्षमा बलमशक्ताना (वृ चा १३ २२)८२।३क्षोणी यस्य हिरण्मयी २१५।४
क्वचित्क्वचिदयं २२३।४४क्षमा क्षत्रौ च (हि २ १८०) १६४।४९५क्षोणीपर्यटनं ३७५।२२९
क्वचित्ताम्बू (अमरु १०७) ३२८।१४क्षमाशास्त्रं करे यस्य (वृ चा ३ ३०)८३।१क्षोणीपाल त्वदरि १३२।२५
क्वचित्पाणिप्राप्तं ९३।८७क्षययुक्तमपि (किरात ० ११) १५१।३८९क्षोणीगाश्रयि(भर्तृ स ४७०)१८०।१०४९
क्वचित्पोषोऽपि मित्र ५४।९क्षान्त न (भर्तृ स २३६) ३७४।२१९क्षोमं वत्ते (शा प ३२८३) २५६।४०
क्वचित्पुत्रभ्रष्टै (भर्तृ म ८९) २५३।२९क्षान्तिश्चेद (भर्तृ २ १८) १७८।१०१९क्ष्वेदाभि क(महावीर ६ ७७) १३१।१९९
क्वचिद्भूमौ शय्या (सु २९४०) ८०।३५क्षामक्षामकपोल २७७।५९क्ष्वेलातर्जितसिंह १४१।४
क्वचिद्दुष्ट क्वचि (नीतिसार ९) १५७।१७४क्षाम गात्रमतीव २८६।२७
क्वचिद्दिद्रोही (भर्तृ २.५१) ८९।५क्षार जलं वारि ४९।१७५खचितमपि मायावी (सु ३३८) ५६।८४
क्वचिल्लसद्ग (शिशु १७ ५६) १२७।५क्षार वारि न २३५।१खड्गा नितान्त (सु २३५६) ३६४।४२
क तिष्ठतस्ते पितरौ ४।३०क्षारो वारिनिधि ५३।२६५खड्गनिर्लूनम् (कुमार १६ २६) १२८।११
क दोषोऽत्र मया (सु १४१) ३९।२०क्षितिप किमपि १३९।६खड्गमूलं भवेद्राज्य १५९।२८४
क नु कुलमकलङ्क (भोज ३०४) ९२।६५क्षिपसि (सा द १० ५१) ३७३।१७१खड्गवारि भवत १२४।२
क पिशुनस्य गति (सु ४३२) ५९।२१९क्षिपेदाक्य (शा प १५१२) १५४।६७खड्गहस्तोऽरिमा २०८।३४
क प्रस्थितासि (अमरु ७१) २९८।१४क्षितो हस्तावलम्ब (अमरु २) ८।१०९खड्गा शोणितस (कुमार १६ १५) १२७।७
क यासि (शा प ७४) २३।३४०क्षिप्रमायमना (हि.२ ९५) १६६।१४४खड्गा रुधिरसलिता(कुमार १६ ७) १२७।५
क रुजा हृदय २८२।१२७क्षीण क्षीण समी (सु ५४६) २०९।५खड्गालक्ष्मीस्तथा (नकुल) १४३।५८
क वन तरु (सा द १० ७०) ९२।६६क्षीण (सु १६११) ३०५।११खड्गास्तिष्ठन्तु (सु ०२५२) ३६०।४
क वसति लघु १९७।३२क्षीणयाव (किरात ९ ६२) ३१६।५४खङ्गेन शितधारेण १२८।२२
क वाम्भोद्यौ २१८।७९क्षीणांशु (शा प ३७१४) ३०७।५६खङ्गेनामूलतो (कुमार १६ ३९) १२८।१७
क स दशरथ (पञ्च ३ २५३)३८४।२७९क्षीणो रवि (पञ्च ५ ९०) ३९४।६७९खण्डितानेत्ररुञ्जालि २७।१
क्वाकार्यं (विक्रमोर्व ४ ३४) २८१।११३क्षीबतासुप (शिशु २० ३४) ३१५।३७खद्योतास्तरला भवन्ति २४५।२४१
क्वापि गत २२९।२३६क्षीरक्षालितपाश्च ११४।२१खद्योतो द्योतते (शा प ७३८) २०९।२
केदानी दर्पितास्ते (सु ५८) १९।४०क्षीरसागर (शा प ३५१५) २७३।२खनन्नाखुबिलं (पञ्च.३ १६) २२९।५
केन्दोर्मण्डलमम्बुधि ८८।२क्षीरान्व्हेर्लहरीषु ३०२।१०१खर श्वानं गजं मत्तं १५५।९९
कैतद्कारविन्दं ३७२।१३७क्षीरिण्य स (मृच्छ १० ६०)३९४।७०६खरनखरविमुक्ता (सु ६०५) २४८।९४
कैतनमार्तण्ड ३०३।१२१क्षीरेणारमगतो (भर्तृ २ ६७) ८८।२०खर्वग्रन्थिविमुक्तसंधि २०१।६२
क्षणं सरलवीक्षणं २५६।३९क्षीरोदन्व (नैषध १२.७४) ११०।२४१खल करोति दुर्यु (हनु १३ ११) ५५।५४
क्षणं कान्ता (सूक्ति अनु ३३) १३२।२०क्षीरोदीयन्ति १३८।७५खल सज्जनकार्पास ५५।६०
क्षणं बालो भूत्वा (सु ३१३९) ३६८।३८क्षुत्क्षामा शिशव ६७।६६खल सर्षपमात्राणि (शा १ ३०६९) ५४।१
क्षण मूच्छमिति २८९।६२क्षुत्क्षामाभर्कसञ्च १०१।१खल सत्क्रिय (शा प ३७६) ५४।२६
क्षणक्षयिणि साप (सु २९९) ४६।६३क्षुत्क्षामोऽपि (सु ६१४) २३०।४०खल सुजनपैशून्ये (सु ३३५) ५६।८१
क्षणदासाव (का प ४.८२) १०३।७४क्षुत्तृडाशा कुद्र ७६।१४खलसख्य प्राज्ञात्तुर ४८।१३१
क्षणदृष्टनष्ट (शा प ७६७) २११।१४क्षुद्रा सन्ति (शा प ७७३) २३०।३७खलाना कण्टकाना (चा नी १५.३) ५४।६
क्षणमपि विरह. (शा प ३४८२) २८८।३५क्षुद्रा सन्ति (सु. २८५) ५२।२५७खलाना धनुषा (वृ चा १४ ८५) ५४।१२
क्षणमप्यनु (भोज २४२) १०२।४७खलास्तु कुशला (रसगगाधर) ५४।३६

४ सुभा०अनु०

२६ | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां ---|---|--- खलेन वनमत्तेन (सु ३३९) ५६।८५ | गणिकागणकौ समान ४४।२ | गन्ध सुवर्णे (चा.नी ९ ३) १७३।८५३ खलेषु मत्सु निर्याता (सु ३४५) ५६।८८ | गणेश स्तौति १६०।३०९ | गन्धमुद्धत (किरात ९ ३१) ३००।४६ खलो न साधुता याति ५४।२९ | गणेश्वरकवेर्वचोविरच ३५।८ | गन्धर्वनगरा (शा प ४१२३) ३७२।१५२ खलोल्लापा सोटा (सु ३२६१) ७७।४३ | गण्डभित्तिषु (शिशु १० ३) ३१५।३४ | गन्धवाह गहनानि २१४।६ खल्वाटो दिवसेश्व (सु ३१४१) ९४।११४ | गण्डस्थलील (आसी प्र) २।२१ | गन्धाप्यसौ (पद्म सू १९) ३८३।२६६ खाटीच्छाशिपलेह १९३।९२ | गण्डस्थले हि मद २३१।७२ | गन्वाढ्या नवमल्लि (भ्रमराष्टक २) ७५।१८ ख्याति कूर्गति(का प्र १० १०३) ३१७।३ | घण्टाभोगे विहरति(कुव १४४) ११७।४४ | गन्धैराढ्या जगति २२३।९१ खिन्नं चापि सुभाष ३९।२१ | गण्डे पाण्डौ २७६।४३ | गभीरनाभिहद (लक्ष्मीधर) २६७।३५३ खिन्नालसनयनान्त ३२१।३ | गण्डौ पाण्डिमसा १०७।१८६ | गमनमलस शून्या(मालती १ २०) २७४।४ खिन्नोऽसि मुञ्च (कुव ९०) २२१।१० | गतक्लेशायासा २०३।१०२ | गम्भीरनाभि (शा प ३३४८) २६७।३५३ खेलत्खञ्जननेत्रया २७४।३० | गतं तत्ताराध्यं तरु (भर्तृ स ४७८) ७६।४१ | गम्यतामुपगते (किरात ९ ४) २९६।४ ख्यातः शक्रो (पद्यस ६३) १८०।१०५५ | गत तद्गाम्भीर्य (सु ७०७) २२१।२५ | गम्यते यदि (चा नी ७ १७) २३०।२३ ख्यातस्त्व फलवृष्टि १८३।५१ | गत कामक (काव्या २ २४८) ३६७।१४ | गरलद्रुम कन्दमिन्दु २८४।१० ख्याता नराविपतय (सु १६०) ३३।३८ | गत कालो (शान्ति ४.१५) ३६८।५१ | गरीय सौर (सूक्ति ३३ ३३) २४०।१३३ ख्याता वय (शा प ३६९६) ३००।६८ | गत कालो (शान्ति ४ १३) ३६८।५० | गरीयस प्रचुर (शिशु १७ ५४) १२७।३ ख्यातिं गमयति (सु १५४) ३०।१५ | गतप्राया रात्रि (सु १६१२) ३०६।४२ | गर्जति वारिदपटले ३४०।१२ ख्याति यत्र गुणा (सु २८४) ५३।२७२ | गत्या पुर (शिशु ९ २) २९४।३१ | गर्जद्भीमभुजङ्गभीषण ७।८७ | गतवति दिननाथे २९५।५६ | गर्जन्नम्बु ददाति २१३।६८ गगनविपिनसिंह ३०१।७४ | गतवलयराजत (शिशु ९ ८) २९४।३६ | गर्जन्हरि (भट्टि २ ९) २०७।१ गङ्गा च धारयति ६५।१३ | गतश्रीर्गणका (शा प १३१८) १५५।९३ | गर्ज वा वर्ष (मृच्छ ५ ३१) २९८।४ गङ्गातरगकणशीकर (भर्तृ ३ २५) ९७।८ | गतसारेऽत्र संसारे ३६७।२० | गर्जसि मेघ न (चातका ४) २१२।३२ गङ्गातीरे हिम (भर्तृ ३.९२) २६९।६५ | गताः केचित्प्रबोधाय ३६४।११ | गर्जितबधिरी (शा प ८६०) २१२।३१ गङ्गादीना सकल २३५।१५९ | गतागतकुतूहलं ३५१।३४ | गर्जितमाकर्ण्य २३०।२० गङ्गा पाप शशी ता (भर्तृ स ४७६) ४५।६ | गता गीता नाश ९९।२४ | गर्जित्वा मेघ (शा प ५९६) २०७।१५ गङ्गाम्भसि सुरत्राण १२६।२९ | गतानुगतिको (हि १ १०) १६३।४३५ | गर्दभ पटहो १६५।५६४ गङ्गावारिभिरुक्षिता ९।१२२ | गता सा कि स्थानं १९१।८२ | गर्भग्रन्थिषु वी (सूक्ति ५०.५) ३३३।१०१ गङ्गासागरसङ्गमे १३७।६१ | गतास्तातभ्रातृ (राघवदेव) ३६८।४१ | गर्वं नोद्वहते न (भर्तृ स ४८२) ५३।२६८ गङ्गीयत्यसिताषगा १०९।२२३ | गतास्ते दिवसा यत्र २४८।८४ | गर्वं मा कुरु २४०।१२७ गङ्गीयत्यसिताषगा १३६।५४ | गते तस्मिन्थानौ (मल्लट १२) २०९।१२ | गर्वग्रन्थिथलगुर्ज्जर ११२।२७८ गङ्गेवाघविनाशिनी ८७।३४ | गतेनापि न (शा प ४१२६) ३७२।१५३ | गर्वायसे विक्रञ्चक्रोर २३८।७४ गङ्गोत्तुङ्गतारङ्गरि ३७१।११० | गतेऽपि वयसि (सु २६४५) १५३।६ | गर्वाविशविशाल १२०।१३९ गच्छ गच्छसि (काव्या २ १४१) ३३०।१ | गते प्रेमानन्धे (अमरु ४३) ३८७।७ | गलत्स्नेहा (शा प ३४७७) २८९।५८ गच्छति न तृप्तिमेतत् २७३।४ | गते मुखच्छद (शिशु १७ ६७) १२७।१६ | गलिता (शा प ४११७) ३७२।१४७ गच्छन्ति काजि (शा प ५५१) १९८।४१ | गतेर्भङ्ग खरो हीनो ७३।९ | गले पाशस्ती (शा प ९३१) २३२।७६ गच्छामीति मयो ३२१।२२ | गते शोको न(चा नी १३ २) १५९।२७७ | गवादीना पयोऽन्ये (सु ८५४) ४५।५ गच्छाम्यच्युत (कुव १५५) २४१।५४ | गते सुहृदि शत्रुता (सु ३२०३) ६७।५३ | गवार्थे ब्राह्मणा ३८३।२६७ गजकदम्बक (शिशु ६ २६) ३४१।३२ | गतै सहावै (किरात ८ २९) ३३८।७४ | गवाशनाना स शृणोति ८७।२३ गजपतिद्वयसीर (शिशु ६ ५५) ३४६।१६ | गतोऽस्मि तीर (नीतिप्र ७) २१७।४५ | गवीशपत्रो नगजार्र्ति १३।५ गजभुजंगमयोरपि (भर्तृ २ ८७) ९२।६८ | गत्वा द्वारवती (सूक्ति ८९ २) ३६५।४८ | गाङ्गमम्बु (काव्यप १० १३८) २२१।१२ गजव्रजाक्रमण (शिशु १७ ६५) १२७।१४ | गत्वा नूनं (शिशु १८ ६३) १३०।९३ | गाङ्गयामुनयोगेन तुत्य १३।२ गजस्य पङ्कमग्नस्य २३१।५५ | गदोदन्ता दन्ता ७६।४० | गाजीजह्नालुद्दीन ११३।४ गजाननाय महसे २।३ | गन्तव्या राजसभा १५१।३६४ | गाढ गुणवती १५७।२०७ गणयति (सु २३०२) ४४।१, ३६४।२४ | गन्तु प्रिये वदति ३२९।१० | गाढं प्रौढाङ्गनाभि २९५।७२ गणयन्ति नापशब्द (सु १५२) ३७।१० | गन्तु सत्वर (सु १७१२) ३३९।१२० | गाढकान्तदशन (सा द ४ ९) १०४।८५ | गन्तुर्विवक्षुदये (व्यक्ति.३७ ३) ३२९।८ | गाढालिङ्गन (अमरु ४०) ३१६।७५

सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः

२७


श्लोकांश / विषयसंदर्भश्लोकांश / विषयसंदर्भश्लोकांश / विषयसंदर्भ
गाढालिङ्गन (शृङ्गारति २१)३१।१३९गुणवद्भि सह सगम६२।१२गुरुतरकल नूपू (शिशु ७ १८)२६९।४२५
गाढाश्लेषनिपीडना (सु २०८२)३२९।४३गुणवन्त (शा प ३०३)८२।३४गुरुतामुपयाति यन्मृ(शा प ३९८)७३।२६
गाढाश्लेषविशीर्ण (अमरु ७४)३२९।२२गुणवानपि नोप१७५।९३४गुरुत्रासादासादितभ३२८।२
गात्रं कण्टक (शा प १०४२)२४२।१६१गुणवान्सुचिरस्थायी (दृ श ६५)८२।३०गुरुपत्न्या निशावी (कथाणंव)१५०।१७५
गात्रं ते (शा प ८८०)२२८।२१४गुणा कुर्वन्ति (शा प २९०)८१।१गुरुभिर्द्विजाती (वृ चा ११ ८)१६९।७१५
गात्रं सकुचितं (शा प ४१६१)९६।१६गुणा सर्वत्र (चा नी १६ ७)८१।५गुरुरपि लघूपनीतो८७।२२
गानान्धैस्तु परं पारं८४।२गुणागारे गौरे यशसि१३९।७गुरुरेक कविरेक सदसि१०१।६
गान्धर्वं गन्ध (भर्तृ स ४८५)१५९।२६६गुणा गुणज्ञेषु (गुणरत्न ५)८२।४०गुरुनयं भार (शा प ९६६)२३४।१४४
गान्धारा गुप्तदारा१२६।२१गुणानर्चन्ति जन्तूना (दृ.श ८४)८२।२८गुरुशुश्रूषया वि (विक्रम १२८)१५९।१५७
गाम्भीर्येण (काव्या २ ८५)१२०।१४७गुणाना सा (सु ४५१)६०।२५३गुरुषु मिलितेषु२४७।६८
गायति गीते शसति२८८।११गुणानामज्ञाता प्रचुरधन८२।४५गुरुसमीरसमीरितभू१२९।५१
गायति हसति (शा प ५७९)२०८।३०गुणानामज्ञानादनु२४६।३३गुरुस्कुर्वन्ति ते (किरात ११ ६४)७९।१३
गायन्तीना गोपसीम२२।१२३गुणानामन्तर (दृ श २२)१६८।६७२गुरो सुता मि (पच २ ११४)१६५।५३०
गायन्तु (सु २४१४)११८।१९९गुणानामेव (स क ४ १२५)२३४।१४०गुरोरधीताखिलवैद्यविद्या४३।१
गावो गन्धेन (विक्रम ११७)३८३।२६८गुणान्भूषयते रूप१५९।२५९गुरोरप्यवलिप्त(भा १ ५५९५)१६७।६३४
गाहन्ता महिषा (अ शा २ ६)१४।१९गुणापवादेन (किरात १४ १२)५९।२२३गुरोगिर पञ्च दिना (लटक २ १४)४३।२
गिरयो गुरवस्तेभ्यो४७।१०५गुणायन्ते (गुणरत्न ६)५१।२३६गुह्यमैथुनध (चा नी ६.१९)१६२।४०२
गिरयोऽप्यनुन्नति१०३।७६गुणालयोऽप्य (पच १ ४१५)१४९।३०२गूढालिङ्गनगण्डचुम्बन२९२।३१
गिरा देवी वीणागुण३५।१५गुणाश्रयं (हि २ ११७)३४९।६२गृध्राकारोऽपि (पच १ ३२५)१५०।३४३
गिरिगहरेषु गुरुगर्व२३१।६७गुणिगणगण (हि १ १०८)४०।२६गृहमध्यस्य खा (पच २ १५४)७१।२७
गिरिर्महानिगिरेरब्धि (कुव १०८)७६।१३गुणिने समीपवर्ती (सु २४७)४८।१४५गृहिणी सचिव (रघु.८ ६७)३६२।१५
गिरौ मयूरा (नीतिसार १)१७३।८६६गुणिन जनमा (शा प २९६)६२।२गृहीत ताम्बूल (शा प.३४७५)३८९।५७
गीतं कोकिल ते९४।१०५गुणिना गुणेषु५६।१२१गृहीता पाणिभि(कुमार १६ १४)१२७।६
गीतशास्त्रविनो (शा प २०२)१५३।२३गुणिना निर्गुणाना१५६।१६०गृहे जानुचर कल्या८९।२
गीतान्तरेषु (कुमार ३ ३८)३३१।३३गुणिनामपि निरूप (वासव ८)४८।११८गृहेश्वरी (स्कान्द मा कौ १४)३८९।४८१
गीत्वा किमपि (शा प ५२२)१८५।३०गुणिनेि गुणज्ञो रमते (सु २५३)८१।३५गृहन्तु सर्वे यदि वा (कुव ७३)३८।१९
गीयन्ते यदि पन्न१३७।६५गुणिनोऽपि हि८१।२४गेह दुर्गतबन्धुभि५३।२७५
गीर्भिर्गुरुणा परु (रसगगाधर)१७३।८६०गुणी गुण वेत्ति (गुणरत्न ४)१७५।९२७गेहादङ्गणमङ्ग (शा प ३४७८)२८९।६७
गीर्वाणा प्रतियन्ति३६५।८गुणेन स्पृहणीय (गुणरत्न १३)८१।१८गेहे गेहे सुभग११९।१२७
गुजति मञ्जु मिलिन्दे (रसगगाधर)२३९।८१गुणेषु क्रियता (शा प २९८)८१।१२गैरिकमन शिलादि१९६।१३
गुञ्जन्ति प्रतिकुञ्ज२८५।३९गुणेषु यत्न (मृच्छ ४ २३)८२।४१गोकर्णं गाहमाना३४२।८०
गुणं पृच्छख मा१६७।६४५गुणेष्वेव हि (मृच्छ ४ ०२)८१।१०गोकर्णराडाभरणं य१९०।६५
गुण आकर्षणयोग्यो८२।३२गुणे पूजा (दृ श ७१)८१।२६गोगजवाहनभोजन१९०।६३
गुणग्रामाभिसंवादि(प्र राघव १ ५)४५।११गुणे सर्वज्ञक (चा नी १६ १०)८१।११गोत्रस्थिति न मुञ्च (शा प २४१)४६।४८
गुणदोषावनिधि(हि २ १४३)१६४।४८९गुणैस्तुङ्गता (चा नी १६ ६)८१।१६गोत्राचारविचारपा११६।६०
गुणदोषावशास्त्रज्ञ (सु ३४९)५६।९१गुणैर्गौरवमायाति (शा प २९९)८१।१३गोत्रे साक्षादज(सूक्ति ७४ १२)३१३।५९
गुणदोषौ बुधो (कुव ६)३८।१०गुणो गुणान्तरा (चा नी ५ ६९)८१।२५गोनासाय नियोजिता (विद्ध १ ३)१२।३३
गुणभेदविदग्रिम१०४।९१गुणो दूषणता या (शा प.३०४)८१।१५गोपायन्ती विर(शा प ३४२१)२८६।१५
गुणमधिगतमपि१६९।७३१गुणोऽपि दोषता याति९१।२५गोपालेन प्रजा(पच १ २४१)१४९।२९१
गुणयुक्तोऽपि पूर्णोऽपि८१।२०गुणोऽपि नून दोषाय४६।५१गोपालो नैव गोपा (शा.प ५१६)१८४।३
गुणयुक्तोऽप्यधो (शा प ३४४)८१।२३गुणो भूष्यते (चा नी ८ १४)१७७।६४६गोभि क्रीडितवान्कृष्ण६२।४
गुणराणिमहाभार (सु २१६)४६।७३गुम्फ पङ्कजकुञ्जलयुति३१।४७गोभिर्विप्रैश्च वेदैश्च८३।३
गुणवज्जनसंपर्कार्याति (सु २१८)८१।२गुरु प्रयोजनोद्देशा१६९।७१४गोवर्धनोद्धरणहृष्ट (सु ३४)२२।१२८
गुणवतस्तव हार न२४६।२५गुरुणा स्तनभारे(सूक्ति.५४.९४)२७०।३गोष्ठेषु तिष्ठति पतिर्व३५२।३१
गुणवद्गुणवद्वा (भर्तृ २.९७)९३।८२गौरमुग्धवनिताव२६८।३६७
२८सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
गौरव प्राप्यते दा (सूक्ति.१८६.३) ६९।७घनैर्विलोक्य (कुमार १४ ३५) १२८।३९चण्डीजङ्घाकाण्ड ११।८
गौराङ्ग्या भुजला २६४।२३६घनोद्यमे गाढतमेऽ ३४०।१८चण्डीशचूडाम(सा द ७ १२) २८२।१४४
गौरीक्षण भूवरजा १९०।६९घनोऽय चेदभ्रेदुपरि २७६।३५चतुर सृजत (शा प १४९३) ३४८।१०
गौरी चम्पककलि(शा प ८१६) २२३।४८घर्मार्ति न तथा सु (हि १.९७) ५३।२६१चतुरङ्गबलो राजा ४४।१
गौरीचुम्बनचञ्चल (लटक १ १) ७।८८घासग्रास गृहाण (शा प ९२८) २३३।९७चतुर्थैऽहि ह्ला (शा प ३७५८) ३५१।३३
गौरीतनुर्नयनमायत ३६५।४४घूर्णन्ते तूर्णमेतत्कु १२६।२४चतुर्मुखो न च ब्रह्मा १८५।२४
गौरीनखरसादृश्य(शा प ५३५) १९४।१८घृतकुम्भसमा (पञ्च सू ५४) १६२।४०८चतुर्ष्वपि समुद्रे (शा प ४०२४) ३६२।३
गौरीपतेर्गरीयो गरल ४७।१५घृत न श्रूयते कर्णे १८१।१४चत्वार प्रथयन्तु (प्र राघव १ १)१५।३२
गौरीव पत्या सु(नैषध ७ ८३)२६५।३४९घृतलवणतेलतण्डुल (सु ३१८८) ६६।३९चत्वारो धनदा(भर्तृ स ४९०)१५६।१६४
गौर्गौ कामदुघा १६६।६०८घृष्टं घृष्टं पुनरपि पु ५१।२२९चत्वारो वयम् (वेणी १.२५) ३६१।४४
ग्रन्थिमुद्ग्रथयि (शिशु १० ६३) ३१५।२४घ्रात तालफला(सूक्ति ९७ ७२)१३२।३५चत्वार्याहु (भा २ २२७०) ३८०।१४५
ग्रसति कोऽपि विमो २७८।३५घ्रात्वा श्रोणीम (शा प ५८६) २०७।१८चन्दन शीतलं लोके ८६।६
ग्रसमानमिवौजसा (किरात ११ ५३) ७७।४चन्दन स्तनतटे (शा प ३७३९) ३२८।७
ग्रामतरुण तरु (काव्याल ७ ३९)३५१।२०चकितहरिणलो(का प्र १० ८७)३५०।४२चन्दने विषधरा (भल्लट ३२) २४२।१६५
ग्रामाणासुपशल्य (शा प ९१३) २३०।४२चकोरनेत्रेण दृगु (नैषध ७ ३२) २५९।८६चन्द्र समाश्रयति २१०।२९
ग्रामेऽस्मिन्पथि (अमरु १३१) ३७३।९२चकोराणा चन्द्र १०६।१५५चन्द्र चन्दनकर्द (सूक्ति.४४ ९) २९०।८२
ग्रामेस्मिन्प्रस्तर (कुव.१४९) ३५४।६७चक्रे सेव्यं नृ (शा प १३७८) १४६।१६१चन्द्रं चन्द्रार्धचूड ११४।२८
ग्रावाणो मणयो (भल्लट ५०) २१६।२६चक्र पप्रच्छ पा (शा प १२६१)११४।२६चन्द्रं कलङ्करहित २६२।१८६
ग्रासादर्थमपि ग्रास (पञ्च २.७३) ६९।६चक्रवरोऽपि सुरत्व ७६।३२चन्द्र क्षयी प्रकृति(विक्रम ९३) ५०।१९४
ग्रासाद्गलितसि (शा प १२०८) २३१।५७चक्र ब्रूहि विभो गदे १५।३८चन्द्रकान्तगलदम्बुना ३२३।७
ग्रीवाद्धतैर्वावड(नैषध ७ ६६) २६६।३०६चक्राङ्गो विरही (शा.प ३५९५) २९६।१०चन्द्रपादजनित (कुमार ८ ६७) २९९।३०
ग्रीवाभङ्गाभिराम (अ शा १ ७) २०७।७चक्रीकृतभुजलता २६९।४२६चन्द्रबिम्बरविविम्ब ३४०।३
ग्रीवास्तम्भभृत (शा प २०७) ४१।६५चक्री चकारपङ्क्तिं (सूर्यशतक.७१)२७।१४चन्द्रखण्डकरायते (शृङ्गारति १६) २७४।८
ग्रीष्मादित्यकरप्र (शा प ५८८) २०८।२७चक्री त्रिशूली न हरो १८५।३५चन्द्रश्चन्दनमिन्दुरि १३७।५९
ग्रीष्मे ग्रीष्मतरै २९१।४२चकुरेव लल (शिशु १० ६६) ३१७।२७चन्द्रादित्योरिनेत्र १७।१३
ग्रीष्मोष्मप्लोष(श प ३८५५) ३४०।१२९चक्रे चण्डरुचा समं ३४६।३२चन्द्राद्भूत्यकमण्डलो १३७।६०
ग्लानिच्छेदि क्षुत्प्र १३०।१०६चक्रेण विश्व यु(नैषध ७ ८९) २६८।३७८चन्द्राधिकैतन्मु(नैषध ७ ४४)२६१।१५६
चक्षु पूत न्य (शा प ४५५१)१५६।१४१चन्द्राननार्यदेहाय ३।४
घट भिन्यात्पट(शा प १४६८) १५४।५०चक्षु प्रीत्या (सूक्ति ७५ १०) २९५।१२२चन्द्रायते शुक्(काव्याल ८ २८)३४४।१६
घटन विघटनमयवा (सु २३९७)७०।२८चक्षुर्जाड्यमपैतु ३०७।५८चन्द्रे शीतलवल्यली ३४६।२०
घटमानकोककुचमाम् ३२७।६चक्षुर्मेचकसम्बुज २७२।५७चन्द्रो जड कदलि २५३।२२
घटितमिवाञ्जन (सा द १० ४५) २९७।६चक्षुर्लुप्तमपीकणं (सूक्ति ५८.७) ३११।२५चन्द्रोदये चन्दनमङ्ग २९८।११
घटीयन्त्रायते हारी २६६।३००चञ्चच्चन्दनखाग्रभेदवि १९।५०चन्द्रो द्वादश भास्कर २९२।३५
घटो जन्मस्थानं (शा प ५०५) ५२।२५४चञ्चच्चन्द्रिकचन्द्रचारु ६।७४चन्द्रोऽनेन कलङ्कि १२२।१७४
घण्टानादो नि (शिशु १८ १०) १२९।५७चञ्च्चेलाव्रला (शा प ३९२६) ३४७।४२चपलतस्तरङ्गै (शा प १०९२) २१६।२१
घण्टारवै रौद्रत(कुमार १४ ४७)१२९।४८चञ्चत्कर्पूरचौरा(शा प.३८१२) ३२७।३९चपलबृदये कि (अमरु ५६) ३०८।११
घनघनमपि दृष्ट्वा (शा.प ३५७३)३०९।१चञ्चत्काञ्चनशैलाव २६५।२७०चरणकमलदासस्त्वे ३०६।३४
घनघनाघनकान्ति १९५।०४चञ्चद्देवेन्द्रकुञ्जरथलि १०।१६०चरणकमल तदीय २६९।४०९
घनतरघनवृन्दच्छादिते ३४१।५०चञ्चद्रादशमील (शा प ५३२) १९१।८६चरणपतनप्रत्याख्या(अमरु ५०) ३५०।५०
घनतरघनवृन्दच्छा ३४१।५१चञ्चद्धुजभ्रमितच (वेणी १ २१) ३६७।३चरमगिरिकुरङ्गी (सूक्ति ८२ २५) ३२२।७
घनतरतिमिरघुणो(सूक्ति ६१ १३) २९९।१चञ्चरीक चतुरोऽसि २२३।६७चरमगिरिनिकुञ्जमु २९७।२२
घनसन्तमसमली (भल्लट. १८) २२९।२३५चञ्चल वसु (किरात १३ ५३) १५१।३९३चराचरजगत्स्फार (रसगङ्गाधर) १।८
घनसमयमहीभृत्प ३४१।४९चटचटिति चर्म (शा प.१२६) १९।४८चरेद्धीमानकण्टको १५०।३३८
घनसमये शिखिषु २००।४२चण्डचाणूरदोर्द (सु ३३) २२।१०५चर्मखण्ड द्विधा(भर्तृ.३ १७) ३७१।१२३

संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः

चलं वित्तं चलं चित्त ९८।५चित्रं नर्तनमम्बरे १८४।७०चेतोभुवश्चापवति २५०।१०
चल चेत पुमा ३५७।५५चित्र महानेत्र बना (रसगङ्गाधर) ३६३।१२चेतोहरा (शा प ४१३०) ३७३।१७४
चलत्कर्णानिलोद्भूत (शा प ५७) २।६चित्राभिरस्योपरि (शिशु ३ ४) १२३।३चेत्पोरादपि शङ्कसे ३५३।५०
चलत्कामिनमोनी (शा प ३२९०) २५७।४चित्राय त्वयि चिन्ति २९१।९२चेलाञ्चलेन (शा प ३९१०) ३४५।५३
चलत्तरङ्गरङ्गाया गङ्गा १८१।११चित्रास्वातीगता १६६।२८५चोलं नीलनिचोल ३५९।९३
चलत्येकेन पादे (शा प १४६३) १५४।३५चित्राखादक (पंच १ ४१६) १४९।३०३चोलाङ्गनाकुचनि ३२५।११
चलद्दूलोत्कादशनाक्षि ३४०।१चित्रोत्कीर्णाद (शा प ३४९४) २८९।५०चोली चोली न तु कल १२५।९
चलद्भङ्गीमिवा (रसगङ्गाधर) २६२।१६१चिन्तनीया हि (शा प १४४०) १५३।१७च्युता दन्ता (शा प ४२३) ७६।६
चलन्ति गिरय कामं ७७।२चिन्ता मुञ्च गृ (शा प ०५४) २३४।१३४च्युतामिन्दोर्लेखा (शा प ९६) ५।४८
चलन्ति येषा (शा प १५७१) १४३।४३चिन्तागम्भीरकू ११२।२७९च्युतोऽप्युद्गच्छति (सु ०२३) ४६।७६
चलापाङ्गा दृ (अ शा १ २०) २८३।१६०चिन्ताचक्रिणि हन्त ७९।७
चलेषु स्वामिचित्तेषु ९७।२चिन्ता जरा म (चा नी १२ ५) १५५।८२छत्रवारी न राजासौ १८४।१२
चाञ्चल्य चरणौ विहा २५७।५९चिन्ताभि (सा द ३ २०८) २८६।२८छत्र सैन्युरजोभरेण ११७।९१
चाञ्चल्यमुच्चै श्रवसस्तु ६३।२३चिन्तामोहविनिश्च (अमरु ८७) ३२९।२३छन्न कार्यमुपक्षि (मृच्छ ९ ३) १३९।५
चाटतस्क (याज्ञ स्मृ १ ३३६) १४९।२९९चिन्तासक्तनिम (मृच्छ ९ १४) १०१।१४छादयित्वात्मभावं (प्र भ १६) ३८६।३६४
चाण्डाल पक्षिणा १५९।२८०चिन्तासहस्रे (शौन नी ११५) ३८९।४७८छादित कथ (शिशु १० १९) ३१५।२२
चाण्डालश्च दरिद्रश्च ६५।६चिन्त्यते नय ए (दृ श ७) १५०।३५५छाया प्रकुर्व्वन्ति (शा प ११२३) २१९।७
चातकः खलुमा (शा.प ७७०) २११।२चिन्वच्चोरचिक्की (शा प ३६०८) २९७।३३छायाफलाने (शा प १०२०) २२०।५
चातक धूमसमू (शा प ८५७) २२६।१५१चिर ध्याता रामा ३७४।२१५छायाभि प्रथम २३६।२५
चातकश्चिचतुरा (पूर्वचातका २) ४९।१६०चिरमपि क (किरात १०.४८) २८८।३७छायामन्यस्य कुर्वन्ति (विक्रम.६५) २३६।४
चातकस्य खलु (शा प ८५४) २१२।२५चिरमाविष्कृतप्रीतिभी ११।७छायावन्तो गत (शा प ९७८) ४५।७
चातुर्य्यैककचिह्न २६३।२०६चिररतिपरिखेद (शिशु ११ १३) ३२२।३छाया वियोगिवनि ३३६।१७
चादय इति यत्र २००।४३चिरविरहिणो रत्यु (अमरु.४४) ३१९।३५छाया संश्रयते तलं (कुव ५८) ३३७।५१
चान्द्री लेखा (प्र राघव ६ ३) १९८।१००६चिरशान्तो दूरादह २३०।१२०छायासुसमृग (पंच २ २) २३६।१९
चापाचार्य्यस्त्रिपुर (बालरामायण) ३६०।३४चिरादक्ष्णोर्जा ११५।२९छित्त्वा पाशम (पच २ ८८) ९४।१०६
चामरे श्रीक (शा प १४१३) १४५।१०७चिराद्यत्कौतुकाविष्टं १०१।२छिद्रान्वेषण (शा प ३६१९) ३५७।३३
चारुता परदारार्थं ५६।९५चिराय सत्सगमङ्गु (सु ०६२) ४९।१८५छिन्न सुनिश्चितै २४२।२०२
चारुता वपुर (शिशु १०.३३) ३१५।३६चिरेण मित्र संधी १६६।५८२छिन्नेऽपि (शा प ३९८९) ३६०।१६
चारूनू पुरसणत्कृ (शा प ३६८९) ३१८।८चीत्कारैरनाश्यन्त १४३।४७छिन्नोऽपि रोहति (भर्तृ सं २४६) ४७।९३
चिकीर्षितं वि (भा ५ १०८९) ३९४।६९९चीराणि कि पथि (भर्तृ म ४९७) ७५।१५छेत्ति ब्रह्माशिरो (शा प ११६१) २७५।६
चिकुरप्रकरा जय (नैषध २ २०) २५७।१९चुम्बनेषु परिव (रघु १९ २७) ३१८।६छेदश्चन्दनचूत (नीतिसार ६) १७८।१०१६
चिता प्रज्वलिता दृष्ट्वा ४४।३चुम्बन्तो गण्ड (शा प ३९४५) ३४८।१९
चिता दहति निर्जी (प्र म.१७) ३९४।६७०चुलुकयसि चन्द्रदी २८३।१६३जगति जयि (मालती १ ३९) २७९।६९
चित्तनिर्वृतिनिधायि ३१६।६३चुलीसीमनि (शा प ३९४१) ३४८।१५जयति नैशमशी (शिशु ६ ४३) ३४४।३१
चित्तभूवित्तभूमत्त ३७४।२१३चूडापीडकपालसङ्क (मालती.१.१) ९।१२१जगति विदितमेत २४८।८३
चित्तायत्तं धातुब १७१।८१५चूडापीडाभिराम १२५।१८जगतप्रसूति (किरात ४ ३२) ३४४।२४
चित्ते निवेश्य परि (अ शा २.९) २५३।२१चूडारत्नमपानिधि २९१।९७जगतिसुक्ष्माप्रलय (सु ४) ४।३२
चित्ते भ्रान्तिर्जायते १००।६चूडारत्नै स्फुरद्भिर्वि २९८।४०जगदिव बहुलातपा २९४।४७
चित्रं कनकलताया ३६३।७चूडाशीतकरस्तनवय ९।१२५जगद्द्द्मूमू (नैषध ७ १००) २६९।४१४
चित्र कनकलताया ३६३।११चूतश्रेणीपरि (शा प ३८१२) ३२६।२७जगन्नेत्रानन्दं वद २६३।१९६
चित्रं चि (का.प्र १०.५३६) १७१।१५८चूताङ्कुरास्वादक (कुमार ३ ३२) ३३१।२९जगौ विवाहावसरे ३३१।१९
चित्रं तपति राजेन्द्र (कुव ७९) १३३।१चूताना चिर (अ शा ६ ४) ३३३।९४जग्ध्वा माषमयान ३६५।५४
चित्रं न तयदय (शा प.११४५) २२०।७चेत कर्षन्ति (शा प ३९१०) ३४५।४७जघान बाणैर्दश ३१३।४२
चेत प्रसादनजनन (सु १६१) ४०।५१जङ्घाकाण्डोरु (का प्र. ७ १५०) १३१।५०
३०सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
स्तम्भ १स्तम्भ २स्तम्भ ३
जङ्गे तदीये (शा प ३३५८) २६९।३९९जयश्रिय कृपाणीय ११५।३२जाता शुद्धकुले १८४।३९
जटा नेयं वेणीकृत (कुव २९) २८५।४४जयश्री (गीत ११ ०० ४) २३।१३८जातिमात्रेण किं (हि १ ५८) १६३।४४३
जटाभाभि (का प्र १०.१४०) ३०१।८१जये च लभते (हि.२ १७२) १४७।२२०जातियांतु रसातल (भर्तृ स २५) ६४।१५
जठरज्वलनज्वलता २२९।१८जये वरीया (शा प ३०८५) २५१।३४जातिस्तस्य न २२८।२३०
जडास्त (शा प ४१७५) ३७५।२३८जरठ इव मरालो ३२।२६जाते जगति ३५।१९
जडे प्रभवति (सु २९२) १८८।६॥३जरःशृग (म क ७ ६२) ७०।१४जातेति कन्या महती ९०।१
जडेषु जानप्रतिभाभि ४०।३१जरा हरु हर (भा प १३४१) १७५।१३३जातोऽह ३७१।१०६
जन जनपदा नित्य (हि २ ७८) १४५।१४१जरीज़म्भन्न्रौद्रद्य ३४६।२७जायन्त्याय च दुर्भु(भर्तृ स १०९) ३५५।९
जनक सानुविशेषा २३७।४५जर्जरनॄणा (आ प ८९६) २२९।२३४जात्युत्कृष्टस्य हि ८१।२२
जननी जन्म १५७।७०जलद ममुद्रसेवा २१२।१९जानन्ति (शा प १४४८) १५३।२४
जनयन्त्यर्जने दुख (हि १ १८४) ६८।८जलदपङ्क्ति (शिशु ६ ३१) ३४१।३७जानन्ति हि गुणा १५५।१२२
जनस्थाने भ्रान्त (हनु १० २४) ७३।३३जलवर जल (शा प ७६९) २११।१५जानन्नपि (पच ४.३७) १६०।३३५
जनि सरोऽङ्गादपि २४४।२२०जलवर निर्ल (मृच्छ ५ २८) २९८।७जानाति वि (भा प १०७५) ३९३।६४३
जनिता चोपने(चा नी ५ १२) १६५।५४२जलनिधौ जनन २७५।७७जानामि नागेन्द्र तव ८६।१२
जनो दुर्लक्ष्यो (शा प ३६१८) ३५६।२६जलविन्दुनि (चा नी १२ १०) १५६।५५३जानीमस्तव गौरि २८६।३०
जन्तोर्निरुपभोगस्य (दृ श ३४) १६८।६८७जलग्नोत्पत्तित्कृते २८५।१७जानीमहे (सा द १० ६३) २७३।५
जन्म क्षीरनिधौ २११।४६जलमसिषिंप श(हि १ १६५) १५३।४५७जानीमो वदन २७२।७४
जन्म क्षीरमहार्णवे २११।३८जलरेखा खल(वृ.चा १७ ९) ३९३।६६६जानीमो वयमासनस्य २७२।७५
जन्मनि केशबहु (हि १.१८६) १६३।४६३जलबिललितवस्त्र ३३९।११५जानीयात्सगरे (चा नी १ ११) १५५।९८
जन्म ब्रह्मकुलेऽप्रजो ९४।११९जलसेकेन वर्धन्ते ८०।२५जानुभ्यामुपविश्य ५८।३३२
जन्मस्थान न (शा प १२०२) २४७।६१जलाद्रीं शष्पा । ३३६।२३जानुस्थापितदर्पणं २५८।३६
जन्मान्तरीण (सा द १०.०६) ११।५जलाहुती(कथा मा १२ ४२) ३८७।३९५जाने कोप (शा प ३४५४) २८०।८९
जन्माभूदुदधौ २३७।३७जले तैल खले (चा नी १४ ५) १५६।१३८जानेऽति (नैषध ७ ३९) २६१।१५१
जन्मिनोऽस्य(किरात ११ ३०) १६१।३७३जलाकयो (काशीखण्ड३८ ८५) ३८८।२८४जाने युष्मत्प्रयाणे १२६।२३
जन्मेन्दोरमले (वेणी. ६ ७) ३६१।३६जलौका के(काशीखण्ड३६ ८६) ३८४।२८५जाने रात्रिशु २६७।३४५
जन्मैव मास्तु यदि ३५२।३०जत्पन्ति मार्य (चा ना १६ २) ३४८।५जाने खन्न्र (म क ५ १६९) २८१।१९९
जन्मैव (शा प ४१४९) ३७४।२०५जद्यो हि ससे (वानराष्टक ८) १७४।८९७जामाता जठर १५७।१६९
जम्बीर वा कमल २६५।२९२जहाति सहसासन ७२।५७जामाता पुरुषोत्तमो ९४।१०२
जम्बीरश्रियमति (रसगङ्गाधर) २६५।२८९जहीहि कोप (किरात ८ ८) ३०८।९जायन्ते नव सौ १९३।९४
जम्बुद्वीपगृह १२२।१८६जहीहि गुरुगर्जिन २३२।७९जालान्तरप्रेषित (रघु ७ ९) १२६।३५
जम्बूफलानि पक्वानि १८१।२२जाग्रत (शा प ३३६१) २६९।४०४जाल्मो गुरु २३४।१४१
जम्भारातीभ (सूर्यशतक १ २) २७।११जाड्य धियो हरति (भर्तृ स ४२) ८७।२९जाह्नवी मूर्ध्नि पादे वा १३।१
जम्भारिरेव (शा पू ११६९) २८५।१०जाड्य हीमति (भर्तृ स २४) ६१।२६३जिप्रत्याननमिन्दु २७१।५६
जयति जटाकिजल्कं ४।२२जात कूर्म स (भर्तृ स २४८) ९८।११जितरोषतया (शिशु १६ २६) ४९।१५६
जयति परिमुषित ९।१३५जात केलिकलावती २३८।६०जितेन्दुपुद्गलावण्य २६२।१६०
जयति प्रियापदान्ते ४।१८जात सूर्यकुले पिता(धर्मवि १०) ९३।१०१जितेन्द्रियत (का प्र १० १३९) १०३।६१
जयति मनसिज २५०।१जात स्तम न २२०।१०जितेन्द्रिय (किरात ?) १७३।८६९
जयति ललाटस्फाल ९।१३८जानमात्र न (पच १ २५६) १७७।१९६जिते लक्ष्मीमृते १५०।३५१
जयति स नाभि (वेणि [पा १] १०) १७।६जानश्च नाम न विन ७०।३५जिह्वो लोके कथ ६१।२५८
जयति स भग (वेणी [पा] १.२) १४।४जास्तस्ते निशि ३५६।१६जिह्वादूषितसत्पात्र ५५।७९
जयत्युपेन्द्र स चकार १७।१७जाता पक्क (मुरारि) ३२५।५५जिहायाश्छेदन (शा प ४०३१) ३६३।१
जयन्ति जगता मातु १६९।१जाता प्रासादपत्री २९८।२१जिहे लोचन (शातिश ४ १२) २७४।१००
जयन्ति जितमत्सरा ५२।२५५जाता नोक्त (अमरु ८८) ३११।३२जिह्वारलोल्यप्रस (पच २ ३) १६४।५२०
जयन्ति ते पञ्चमनाद ३२।३०जाता लता हि शाले (कुव ८२) ३६३।९जिह्वैकव सतामुखे ८३।४
जयन्ति ते सुकृ (शा.प.१६६) ३२।१जाता शिखण्डिनी ३५।२७

सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः३१


जीयादम्बुवितनयावर(कुव १२१) १४।१३तद्वितथमवा (शिशु ११.३३) ३०९।२
जीयासु शकुलाकृते (शाप ८१) १७।७झगिति जग (प्र राघव १ ११) ११९।१२५तदाखण्डलाशा २५१।८०
जीर्णमन्त्रं प्रशं (मा ५ १०५०) १६२।८१०झञ्झानिलोऽपि ३२५।१३तदा तदङ्गस्य (शाप ३३७९) २७०।२९
जीर्णा तरि सरि २८६।४१झग्झर्णितकङ्कण १३१।११३तदात्वप्रोन्मीलन्म २५५।३२
जीर्णेऽप्युत्कटकालकूट (हनु ९ ३६) ६।७८तदात्वज्ञाताना (शा प.३८३४) ३३६।२२
जीर्णोऽपि क्रमही २२९।६टिड्डाण्डद्वयसङ्क्रुद्धोऽसि ७२।१तदा मुग्धं वक्रं २७९।७६
जीवञ्जीवयति हि यो ७०।२५तदा रम्या (किरात.११ २८) १६०।३७१
जीवति (शाप ३७५५) ३६०।१९ढक्कामाहत्य मद ३५१।२४तदीयजघनाभोग २६८।३८४
जीवनग्रहणे नम्रा (कुव २५) ५५।५१तदीयत्रिवलीमार्ग २६७।३३०
जीवन्त मृत (वृचा १३ ९) ३९२।६६७त वन्दे पद्मद्मद्मान (शाप ८५) १६।१तदेवाजिह्माक्ष (शाप ३५३८) ३१०।१५
जीवन्तोऽपि (पच १२८९) १५५।१२३त एव पदविन्यासास्ता २०।६तदेवास्य पर मित्र यत्र ८८।९
जीवन्त्यर्थक्षये ६६।३१त एवामी वाणान्तदपि ०३।९३तदोजसस्तद्यशस (नैषध १.१४) १३९।४
जीवन्नेव (शाप ३१६७) ३६०।१४तक्षकस्य विषं (वानी १७८) ५४।३८तद्वृह यत्र वमति १६६।५७४
जीवन्नपि न तत्कर्तुं ५६।११०तटमुपगतं पद्मे ३४८।१९९तद्दिव्यमव्यय वाम ३।३
जीवाकृतिं स चक्रे १३९।१२४तटस्थै ख्यापिता (वृश ६२) १६८।६९६तद्भोजन (वृ चा १५८) ३८७।३८६
जीवामीति (शाप ३४४२) २८७।७तटिनि चिराय विचा २१८।१तद्गेदोऽन्तरक्षत २९५।६५
जीवितं तदपि १७१।८१०तडिन्मालालोलं (शातिश ६२) २६८।८७तद्व प्रमाष्टुं विपद प्र ११।१४
जीवित इव कण्ठगते ४।२९तल्लेखेखा नेय (प्रराघव १३५) २७३।१६तद्वक्ता सदसि ब्रवीतु ८६।१५
जीवेति प्रब्रुव (पच १५४) १४८।२६१तत कुमुद (भा द्रोण ८४०८) २९९।१तद्वक्त्र नेत्रपद्मं २६९।४२१
जीवेन तुलितं प्रेम २७५।२तत कोकवधू (शाप ३७३३) ३२७।१तद्वक्तं यदि(बालरामा २ १७८) २७१।५१
जुम्भाबर्जरडिम्ब (मालती ९ १६) १४०।४तत परामर्शविरुद्ध ३६५।२तद्वकाभिमुख (अमरु ११) ३०९।१२
जुम्भा निष्ठीवन १५०।३२९ततश्चामिज्ञाय (अमरू ५२) ३५७।५४तद्विच्छेदकृशस्य २८२।१४२
जुम्भारम्भप्रवित (वेणी २ ८) ३२४।४४ततोऽरुणपरि (वाल्मीकि) ३२३।१तद्वियोगसमुत्थेन २७७।७
जुम्भाविस्तृतवक्त्रपङ्कज १७।१०तत्कार्क त्वयि २२८।२०८तनुता तनुता नीता २०५।३
जेतुं यस्त्रिपुरं हरेण २।२५तत्कालारभटीविजृम्भण ६।७३तनुत्यजा वर्मभृ (रघु ७ ४८) १२८।३१
ज्ञातं ज्ञाति (शाप ३६१६) ३६३।५४तर्किं कामपि (गीत ७ १४ १) ३५८।७५तनुत्राण तनुत्राण (दश ४ २८) १२७।१
ज्ञाता मैत्री सहज ३५३।४०तर्किं काव्यमनल्पपीत ३२।४तनुह्हाणि (शिशु ६.४५) ३४४।३३
ज्ञातिभिर्विन्ध्यते (गुणारत्नावली १२) २९।५तर्किं स्मरसि न २२५।१२६तनुग्ना इव ककुभ २९७।४
ज्ञातु वपु परि ३७९।८५तत्कुचौ चरत २९४।२६१तनुस्पर्शादस्या २५४।३८
ज्ञानं सतां (भर्तृ ३८३) ३८६।३८५तत्कृत यन्न (शाप १२४९) १२२।१७८तनोतु ते यस्य फणी १९६।९
ज्ञानविद्याविहीनस्य ३९।१२तत्तद्दिग्जैत्रयात्रोद्धुर १२६।२०तन्त्रावाप (शिशु २ ८८) १४७।११०
ज्ञानाब्धिश्चिरचण ४२।४तत्तद्ददत्यपि (शाप ३५३६) ३५७।४७तन्त्रातुन्दिलशोण ३२२।३०
ज्याकृष्टिबद्वखटका (अमरु १) ११।१९तत्तस्या कमनीय २५६।५३तन्नास्ति (शाप ३६९४) ३२०।१२
ज्याघात का(प राघव ३ १०) ११४।२७तत्तादृक्तृणपुलकोप १४।१८तन्नितम्बस्य (शाप ३३५२) २६८।३७१
ज्यायासम (मा १३ २६१०, १६०।३३९तत्तेजस्तरपेर्निदाघ २७१।१४९तन्मङ्गलं ३८५।३१५
ज्योति शास्त्रमहोदधौ ४४।६तत्त्वं किमपि (रसगङ्गाधर) ३२।१६तन्मूलं गुरुताया (शाप ३२०) ७५।१३
ज्योतिस्तमोहरमलोचन ३।१०तत्र मित्र न (हि १ १०६) १६७।६३१तन्वङ्गया (शाप ३३४०) २६४।२४८
ज्योत्स्नाचय पय (साद ७८) २९९।७तत्पादनखरखाना २६९।४२०तन्वङ्गया गुरु (अमरू.९६) २७६।५०
ज्योत्स्नाभस्मच्छुरणध (कुव ५४) २९६।६तथा न पूर्वं (किरात ८ ४१) ३३८।८४तन्वन्ती तिमिरद्युति ११६।६१
ज्योत्स्ना (काप्र १०४७२) २९१।९४तथा पौरस्त्याया ३०१।८२तन्वि त्वद्वदन(प्र राघव ७ ६५) ३१३।७८
ज्योत्स्नी श्यामलि २८०।९९तयारिभिर्न व्यथते ५९।२२२तन्वी चारुपयोधरा १८६।१४
ज्योत्स्नेव (काप्र १०४११) २५१।१८४तथ्य पथ्य सहेतु ८५।१७तन्वीमुज्झित (शाप १२७२) १३२।३०
ज्वलति चलिते १७०।७४८तदङ्गमपि नाम २८०।८८तन्वी शरत्त्रिपथ (अमरु १३५) २७१।३८
ज्वलतु (मालती २२) २८४।२४तदपकृत विधि ४८।१९६तन्वी श्यामा २७१।४९
ज्वलितं न (किरात २२०) ८०।३२तन्वी सा यदि २८०।९६

३२ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां


तप सीमा मुक्ति (प्र भ १०)३८३।२४२तव तन्वि तरुणपुण्या३१८।५ताडिता अपि (पच ४ ५६)३४९।२८
तपति तनुगात्रि (अ शा ३ १३)२९१।५तव नित्यमुत्सव१०५।१३४ताडितोऽपि (पच १ ९७)१४४।८९
तपनस्तपति स्म३४७।६तव निर्वेणीदृष्टणं१०३।५१तात क्षीर (शा प १११७)२१८।८०
तपखिनोऽप्यन्त२०२।८३तव विरहमसहमाना२८८।१२तात त्वं निजकर्म३६३।४०
तपस्वी का गतोऽवस्था११।६तव विरहे मलय२८८।२५तातं तत्तातात कनय७।९८
तपापाये गोदापरतट१८४।४६तव विरहे विबुवदना२८७।५तातार्थमन्त्रिसुत१५२।४०७
तप्तं केर्न तपोभि२११।२४तव विरहे हरिणाक्षी२८८।२३तातेन कथितं पुत्र१८८।३९
तप्ता गामिव सस्रुषु१२५।११तव सा कथासु (शिशु ० ६४)२८८।२८तादृक्सप्तसमुद्रमुद्रित६।८०
तप्ता मही विरहिणा३३६।१६तवाग्रतो वीर१०४।१०९तादृग्दण्डविवर्ते१३३।४०
तप्ते मङ्गाविरह (अमरु ८६)२७८।३७तवाङ्गने सुन्दर (शा प १२६५)११६।६२तादृग्धीर्धविरित्रि (भाव १ ८)१३४।१८
तम स्तोम (शा प ३५२१)२७१।४३तवानन सुन्दरि फुल्ल३१२।३९तादृशी जायते (चा नी ६ ६)९१।२१
तम स्तोम भृश२५७।६तवारिनारीनयनाम्बु१३३।५तानि तानि कमलानि२१९।४
तम स्तोम सोमं३२०।१५तवाद्ववादिन क्लीबं१५०।३४६तानि प्राब्धि२६३।२०४
तमद्दढे (शिशु ३ ६०)१२२।४तवाहवे (का प्र १० ४५६)१०४।९५तानि स्पर्श (गीत ० ७ १५)२८०।९७
तमसि वर। (शा प ४०४७)३६४।२८तवेद पश्यन्त्या (गीत ८ १८ १)३०९।४तानीन्द्रियाण्य (पच ५ २८)६५।१६
तमांसि ध्वसन्ते५२।२४७तवैतद्वाचि (शा प ८८२)२२५।११६तापं लुम्पसि२१३।७१
तमाखुपत्रं राजेन्द्र१००।१तवैव प्रावीण्यं जलद२१३।५५तापनैरिव तेजो२९३।२
तमृषिं मनुष्यलोक३६।४९तवैष विन्दु (शा प ३३१०)२६१।१३७तापापहे (शा प ११६८)६३।२७
तमोगगविनाशिनी३।१२तवोपकोष्ठस्थित२६५।२८२तापो नापगत (शा प ९२३)२३२।८४
तमोभि पीयन्ते३२४।३८तस्करस्य कुतो (वृ चा ९ ११)१६८।३९१तापोऽम्म प्रसर्र्तं२९०।८३
तया गाढ मुक्तो२७९।७५तस्करेभ्यो (हि २ १०९)७४।२०७तामनङ्गजय (का प्र ७ ३२२)२७३।७
तरङ्गय दृशो (विद्ध ३ २७)३०६।३८तस्मात्सभ्य (शा प १३४६)१४६।१५१तामिन्दुसुन्दर (मालती १ २१)२७८।४७
तरत्तरलतृष्णेन३७४।२०६तस्मात्सर्वप्रयत्नेन (पव ४ ५०)३४८।२५ताम्बूलं (शा प १४१६)३८५।३२५
तरुकुलसुषमापहरां२१५।२तस्मान्महीपतीनाम३६४।३१ताम्बूलरागोऽश्वर३१२।३६
तरुणतरणि (शा प ३८३९)३३६।३९तस्मिन्गताद्र्धाभावे५८।१९७ताम्बूलाक्त दशन३५३।३९
तरुणतमालकोमल३०४।१६१तस्मिन्वन्धुशरे स्मरे२८०।९८ताम्बूलेन विना१०२।४९
तरुणा दिवाकरमयूख३२३।९तस्मिन्युद्धे (शा प ४०१९)३६३।१तारतारतरैरूत्त (शा प ५४४)२०५।२
तरुणिमनि (का प्र ४ ११०)२७०।१७तस्या सुननुमरस्या२७८।२४तारल्य मुखमेलने३५८।६२
तरुणिमनि कृ (का प्र.१० ९०)२५१।३२तस्या कचभरव्याजा२५७।६ताराक्षतान्य्रवि३०१।७०
तरुणिमसमा (नीतिस ७७)३८७।४१६तस्या कि मुख२८२।११७तारागणश्चन्द्रमस२९०।१८
तरुण्यालिङ्गित क(शा प ५२०)१८४।८तस्या पद्म (शा प ३३५५)२६८।३८२ताराधिनाथमभिजित्य१२३।६
तरुमूलयुगेन (नैषध २ ३७)२६९।३९१तस्या (गीत १२ २३ ४)३२८।१७तारानायकशेखरा (रसगगाधर)६।८१
तरुमूलादिषु (शा प९२१)४७।८८तस्या पादनख (बिल्हण)२६९।४१९तारापते कुमुदिनी२८२।१४५
तरौ तीरो दूते (शा प ८०३)२२१।२४तस्या प्रविष्टा (कुमार १ ३८)२२९।२४८ताराविष्णूरणत्वित्१९८।४४
तर्कै तर्केशवक्त्रवाक्य३४।६१तस्या शलाका (कुमार १ ४७)२५८।५७तारुण्य तरुणी१७९।१०३४
तर्केषु कर्कशतरा३३।३७तस्या श्रवणमार्गेण२५९।६७तालं प्रभु स्यादनु२६५।२७६
तर्तु पर्वतसनिभेन१८४।६६तस्या सान्द्र (अमरु २६)३११।२६तालीतरोरसु (शा प १०२५)२४१।१३५
तल्वेक्ष्यते (भा १२.४।४८)३८८।४३४तस्या महा (शा प ३४७९)२८८।४०तालीदलं (शा प ३३०७)२६०।१२५
तल्पीकृताहिरगणित१६।४तस्या मुखस्याति (हर्ष)२६२।१७९तावका कति न१०४।८७
तल्पे प्रभुरिव३५१।२३तस्यास्तुङ्गस्तन२६४।२६३तावच्चकोरचरणा२२५।१३५
तल्पोपान्तमुपेयुषि३५८।६६तस्येवाभ्युदयो (शा प ७३९)२०९।३तावज्जन्माति (पच १ २८८)९७।८
तव करकमलस्था स्फा३।११ता जानीया परिमित३५९।८३तावतकर्णाध्वयाता९।१३४
तव कुवलयाक्षि३१२।३१ता हेमचम्पकरुचिं२७८।५२तावकविविहंगाना (शा प १८७)३६१।३५
तव कुसुम (अ शा २.३)२८२।१३६तादृङ्मस्या (शा प ३३०८)२६१।१३२तावतकुलश्रीमर्यादा३५०।८

सस्थाननिर्देशानुक्रमकोशः ३३

प्रथम स्तम्भद्वितीय स्तम्भतृतीय स्तम्भ
तावत्कोकिल (भामिनी.अ ६) २२५।१२७तुङ्गात्मना तुङ्गतरा (सु २५९) ४९।१६४तृष्णे देवि नम (पच ५.७७) ७६।८
तावत्सप्तसमुद्र (शा.प.१०९७) ७।९६तुङ्गाभोगे स्तन २६६।३२१ते कौपीन (शा प १२२४) १०८।१९४
तावत्सन्ति सहाया (सु ३१८३) ६६।३७तुच्छान्तरराध्यास १०४।१०७ते क्षत्रिया (शा प ३९७९) ३६०।२१
तावत्सर्वगुणालय ७४।४१तुभ्य दासेर (सूक्ति २४ १) २३४।१२६ते चापि (मा १२ १२५४२) ३८०।४०६
तावत्स्यात्सर्वं (पच २ १५०) १६५।५३४तुरगशतसहस्रं गो(पद्मप्रसङ्ग १४) ६९।२६तेज क्षमा (शिशु २.८३) १४७।१८५
तावत्स्यात्सु (पच ५.६२) ३४९।३३तुरङ्गसादिनं श(कुमार १६ ४३)१२८।२०तेजस्विनि (शा प १३३९) ७९।९
तावदाश्रीयते (किरात ११ ६१) ७९।११तुरङ्गी तुरगःरू(कुमार १६ ४१)१२८।१९तेजस्विमध्य (शिशु २ ५१) ७८।६
तावदेव कृतिना (भर्तृ स.७७) २५१।३३तुलाधारो वाता १०६।१६२तेजांसि यस्य प्रथमं २२७।३
तावदेव विदुषा २५१।३१तुलामारुह्य रवेिणा (सु २४०८)१०१।११नेजोजहीने महीपाले ७९।१०
तावद्गर्जन्ति (सु ५८८) २३५।१६१तुल्य परोपतापित्व ४६।६६ते तीक्ष्णदुर्जंन ३६८।३५
तावद्गर्जन्ति (शा प १५७४) १४३।४९तुल्यं भूमृति (शा प १२०४) ९४।११२ते ते चातकपोतका २१३।७०
तावद्गुणा गुरुत्वं च (सु.३२५२) ७६।२६तुल्यरूपमसि (किरात ९ ६१) ३१६।५३ते दह्निमात्र (का प्र ६ १४०) ५९।२३४
तावद्व्याद्धि (हि १ ५७) १६४।५००तुल्यवर्णच्छद (भोज २६९) २२८।२०५ते धन्या पुण्यभाजस्ते ७५।९
तावद्विद्यानवद्या गुणगण ८९।४तुल्यार्थं (पञ्च १ २७१) १४६।१५६ते धन्यास्ते (पच १ २८५) ३२।९
तावन्महता महती ७३।२५तुल्येऽपराधे (शिशु २ ४९) ७८।४तेऽनन्तवाङ्मयमहा (सु १८२) ३३।२९
तावन्महत्त्वं (भर्तृ स २५१) १६६।५९४तुषारधवल स्फूर्ज १९५।२तेनाधीत श्रुत तेन ७६।११
तावन्मौनेन (वृ चा १४ १८) २२५।१२१तुष्यन्ति भोजनै(चा नी.६ ९)१५९।२७२ते पिबन्त. (मा ३ १२८५७)३९३।६५२
तास्तु वाच सभायोग्या (प्र भ ८) ८४।१तुष्यन्तु मे छिद्रम २८७।३ते भूमिपतयो जयन्ति ३४।५५
तिग्मरुचिप्रतापो(का प्र ४ ५५)१०३।७२तूणीरबन्वपरिणद्ध १२७।१८ते मीमांसाशास्त्रलोक ४३।१
तिमिरेऽपि दूरदृश्या ३५२।१८तूणेव मधुमासे १९४।३५ते मूर्खेतरा लोके (सु ४८३) ७२।४५
तिरोहितान्तानि (किरात ८ ४७)३३८।९०तूर्णं चाहं वरं मन्ये नरा ७४।४ते वन्द्यास्ते कृति (भोज १२१) ४८।१३६
तिर्यक्कण्ठ (गीत ३ ७ १६) २५१।७०तूर्णं ब्रह्मविद (चा नी ५ १४)१६७।६३३ते साधवो भुवन (पद्म उ ३७ ७) ५०।२१३
तिर्यक्त्वं भजतु ६३।३५तृणमुखमपि न २३३।१००तै सर्वैज्ञीभवद ३०१।९०
तिलार्धं स्वीय (चाणक्य ६६) ३९४।६८९तृणादपि लघुस्तूल (शा प ४००) ७३।५तोयं निर्मथितं घृताय ४१।६९
तिष्ठता तपसि पु (किरात.१३ ४४) ८३।१तृणानि नोन्मू (पच १ १३३)१७४।९०७तोयानामधिपति २१६।१५
तिष्ठार्जुनार्थ सङ्ग्रामे १८१।५तृणानि भूमि (पच १ १८४) १६३।४४४तोयैरल्पैरपि (भामिनी अ २८) २४७।४७
तीक्ष्णं रविस्त (शा प ३९०७) ३४५।३९तृणैरावेष्ट्यते रज्जु १४४।८४त्यक्त जन्म (सु ६५४) २३३।११८
तीक्ष्णधारेण खड्गेन ७३।१५तृणोल्कया (मा ५ १२३०) ३८८।४३७त्यक्तप्राणं (शिशु १८.६१) १३०।९१
तीक्ष्णाग्रहेतिहतिभिः १४३।५६तृप्तियोग (शिशु २ ३६) १४६।१८३त्यक्तो विन्ध्यगिरि २७०।९३
तीक्ष्णादुद्विजते मृदौ(मुद्रा ३ ५) ६३।३२तृप्त्यर्थं भोजनं १६६।५९८त्यक्त्वापि निज ५६।११७
तीक्ष्णा नारुंतुदा (शिशु २ १०९) ८५।२तृप्त्या नद्य कमल २१३।५८त्यक्त्वा युवा ६४।१४
तीक्ष्णोपायप्रान्तगम्योऽपि ३९४।६८३तृषा धराया (शा प १०८८) २१६।१२त्यक्तवालसान् ३८५।३१७
तीरस्थलीबर्हिभि (रघु १६ ६४) ३३७।६५तृषार्ते सारङ्गे (शा प १२०५)५२।२४४त्यज किंशुक २४२।१६८
तीरात्तीरमुपैति (शा.प ३५९७)२९६।११तृषा शुष्य (शा प ४१४८) ३७१।१३१त्यज चक्रवाकि २२७।१७९
तीर्थसेवनमौ (राजत ६ ३०९)३८०।४२४तृष्णाखनिरगाधे(सूक्ति १२६ २) ७५।२३त्यजत मानम (रघु ९ ४७) ३३२।५७
तीर्थस्थित (राजत ५ ३०४)३९४।६७४तृष्णा चेह परित्यज्य (हि १.१९०)७५।३त्यजति च गुणा ५७।१५०
तीर्थनामवलोकनं परि ९८।६तृष्णा छिन्धि भज(भर्तृ स.४४)५३।२७३त्यजति (शा प १५४५) १६९।७२८
तीव्रे तपसि (शा प.१५१६) १५४।७१तृष्णापहारी विमले १०२।२२त्यज निज (शा प.११०४) २१८।६९
तीव्रो निदाघस (शा प ९७५) २३६।८तृष्णाकोल (रसगगाधर) २६१।१०१त्यजन्ति मित्राणि (वृ चा १५.५) ६४।१०
तीव्रोऽयं नितरा २३७।३०तृष्णा हि चेत्परित्य (हि १.१९०)७६।१८त्यजसि यदपि १३५।२४
तीव्रोष्णदुंविषहवीर्य ७९।१९तृष्णे कृष्णेऽपि ते ७५।२त्यजेत सचयास्त(मा.३ ९४) ३८८।४३२
तुङ्गत्वमितरा (शिशु २ ४८) ७९।१५तृष्णे त्वमपि (शा प ४२४) ७५।७त्यजेल्लघुधातौं १७२।८३८
तुङ्गब्रह्माण्डसिंहासन १३८।८९तृष्णे देवि (शा प ४२०) ७५।१त्यजेत्स्वामिनमप्यु १५७।२०२
५ सुभा०अनु०त्यजेदेकं (चा.नी.२.१०) १५३।३३

| सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां || | :--- | :--- | :--- | | ३४ |||

त्यजेद्धर्मं दया (वृ चा ४.१६) ३८८।४३१त्वत्कीर्तिराजहंस्या १३४।७त्वय्यागते किमिति (कुव २०) १२५।७
त्याग एको गुण श्लाघ्य ६।४त्वत्कीर्तिर्धनिका १२१।१५४त्वा चित्तेन (गीत ११.२२ १) ३०८।१९
त्यागभोगविहीनेन (शा प ३८५) ७१।५त्वत्खङ्गखण्डित (रसगगाधर) ११४।२४त्वा पातु नीलन २२।१२६
त्यागो गुणो गुण(विक्रम १९६)३८३।२६९त्वत्खड्गाघातजात १३४।२८त्वामजनीयति २८८।४४
त्यागो गुणो वित्तवता (सु ५०८) ७०।१८त्वत्तेज प्रतिभाम १३७।५८त्वाम (गीत पा १२ २४ ९) २५१।७७
त्याज्यं न धैर्यं(पच १ २१६)१७२।८४१त्वत्पत्रमुक्तविशि १३०।१०९त्वामयमाबद्धाञ्जलि (दशकु उ २) ३०५।९
त्याज्यं सुखं (प्रव २९) ३८३।२७०त्वत्प्रतापतपनातपतस १३२।६त्वामालिख्य (मेघ २ ४४) २९२।५४
त्रयोऽप्यन्यत्रयो (शा प १७४) २५।२०त्वत्प्रतापानर्घहेम १३३।४त्वामुदर साधु म (शान्ति.१ २४)७६।३०
त्रय्यन्तसिद्धान्जन ३६७।२४त्वत्प्रत्यर्थिवधूंघरे (कुव १७१) १३२।३६
त्रात काकोदरो येन (कुव ६५) २१।९६त्वत्प्रारब्धप्रचण्ड ११२।२८०दंष्ट्रासङ्कटवक्त्र (शा प ४०६६) ९९।५१
त्रातुं लोकानि(सूक्ति १०९ ७)१०७।१७६त्वदङ्गमार्दवे दृष्टे कस्य (कुव ४५)३१२।८दक्ष श्रिय (हि ३ ११३) १७०।७७४
त्रासहेतोर्विनी (हि २ १२३) ३८८।४२८त्वदरिनृपतिकेली १३१।१३दक्षता भद्र (काम नी ५ १५) ३८५।३३१
त्रिजगद्दहनल्लङ्घन १३५।१८त्वदरिनृपतिमाशा १३१।१२दक्षिणाशाप्रवृत्तस्य (शा प ३९७) ७३।३
त्रिनयनचूडारत्न (शा प ५४१) २९९।११त्वदीयमुखपङ्कज २९१।१३दग्धं खाण्डवमर्जुन ६७।६७
त्रिनयनजटा (शा प ३६३०) ३०१।८४त्वद्वाणेषु यमो १०९।२१८दग्धं दग्धं (महा ना २५२) ३८६।३६२
त्रिलोकेश शार्ङ्ग (विक्रम २२९) २३।८९त्वद्वाहोद्भूतधूल्य ११४।२२दग्धा सा (शा प ८३२) २२४।१०३
त्रिविक्रमोऽभूद् (नीतिसार ५) १७३।८७५त्वद्यशोजलधौ (भोज २०९) ११७।८१दग्धो विधिर्वि (शा.प.३२६५) २५३।८
त्रिविधा (शा प १३६६) १४६।१५५त्वद्रूपामृतपान (सूक्ति ४५ ७) २९२।२९दत्तं मया २६७।२५८
त्रैलोक्यत्राण (शा प ४०८४) ३६६।१२त्वद्वक्त्रसाम्यमय (कुव ९०) ३१३।५६दत्तमात्तवदनं (शिशु १०.२३) ३१५।२६
त्रैलोक्यभूषणमणि (सु १८३) ३३।४०त्वद्वर्तुलस्थुलसुवर्ण ३१३।४१दत्तमिष्टतमया (शिशु १० ६) ३१४।९
त्रैलोक्याभयलग्न १११।२५४त्वद्वाजिराजिनिर्धूत १२५।३दत्ते जनोऽसौ खलु ३३१।१८
त्रैलोक्ये नोप १८७।२०त्वद्विरहमसहमाना १८९।५२दत्तोऽस्या (अमरु ६) २९९।९६
त्रोटीपुट करट २२८।२११त्वद्विरहे विस्तारितर २८८।१४दत्त्वा कटाक्ष (सा द १० ८०) २७७।१०
त्वं चेत्कल्पतरुर्वयं १२१।१५२त्वद्वैरिणो वीर (शा.प १२७८) १३१।७दत्त्वा दिशि (शा प.४०३७) ३६४।२३
त्वं चेत्सचरसे(काव्यप्र.१० ४३) २४५।५त्वद्वैरिवनचलि ११८।१९८दत्त्वा धैर्यभुजंग ३५८।७८
त्वं चेज्जीवजनानुराग ८०।४१त्वन्मुखं कम(काव्या २ १९०)३८७।४१२ददत मन्तरिता (शिशु.६.४१) ३४४।२९
त्वं जामदग्न्य जन २४५।७त्वमद्य सिन्धो २१६।१३ददतो युच्य (भोज १०५) १५९।१९२
त्वं तावद्वहुवल्लभ (शा प ३५७१) ३०९।३त्वमिव पथिक (रसगगाधर) ३५४।७०ददाति प्रति (पच २ ५१) १६०।३०६
त्वं दूति निरगा कुञ्ज २९३।४त्वमुचितं नयना २८२।१३४ददृशेऽपि (शिशु ९ २३) २९७।१९
त्व दूरमपि गच्छन्ती २९१।१त्वमेव चातका (शा प ७८२) २११।५ददौ रसात्पङ्कज (कुमार ३.३७)३३१।३२
त्व दित्राणि पदानि (सु २५१६) ११३।८त्वमेव (सर्वस्वटी १६ ७५१) ३९४।७०५दद्यात्साधुर्यदि (पच १ ३९७)१७८।९९९
त्वं नो गोत्रपति १८३।६७त्वमा नीलो (काव्या २ १०६)३८७।४२६दधति कुहर (मालती ९.६) १४।१३
त्वं पीयूष दिवो २६१।१५४त्वया मम समेतस्य २९१।३दधति तावदमी (शान्ति २ ५) ३६८।३७
त्वं भो शंभोर्निंब २१०।३४त्वया वीर गुणाकृष्ट्या १०१।४दधति न जनास्तस्मै (सु ३१९०) ६७।६१
त्वं मुग्धाक्षि (अमरु २७) ३२०।४९त्वयि दृष्ट (का प्र.१०.४५५) २८८।२२दधति स्फुटं (शिशु ९.६६) २८८।३०
त्वं राजा वय (शा प २०४) ८०।४२त्वयि दृष्टे (सा द १०.५०) २८७।२दधत्यधरचुम्बनं ३४७।४४
त्वं विनिर्जितमनो २८८।३४त्वयि निबद्धरते ३०५।१८दधान प्रमाण(भामिनी अ ३१) २३८।७३
त्वं सामान्यतरु २४०।१३१त्वयि प्रचलति प्रभो १२५।८दवि मधुर मधु १७०।७६६
त्वत्क्षांसुरुधिर ३७१।१२२त्वयि लोचनगोचरं (कुव १७१)११५।४२दधौ हरि कं शुचि २००।५२
त्वच समुत्तार्य २५९।८५त्वयि वर्षति (भोज १८७) २११।३दन्तप्रभा (सा.द १०.५६) २७०।७
त्वञ्चित्ते भोज ११७।७४त्वयि सगर (सा द.१० ७७) १०२।४०दन्तस्य निष्कोष (पच १ ७७)१७२।८३७
त्वच्चिन्तापरिकल्पितं २९०।७१त्वयि सति शिवदातर्य (कुव ५४) ७०।३७दन्ता सप्त (शा प ९६४) २३५।१४६
त्वत्कीर्तिं शशिन १३७।६९त्वय्यधर्मासनभाजि ३६१।४१दन्ताग्रनिर्भिन्नाहि (शिशु १२ ४७) २।१८
त्वत्कीर्तिर्मौक्तिक १३५।१९दन्ताश्चलेन धरणीत २।१९

संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः ३५

दन्तानामधर (शिशु ८ ५५) ३३९।११२दहनजा न पृथु (नैषध ४ ४६) २८४।१५दारा परि (शा प ४१४०) ३७१।१२६
दन्तालिदाडिमीबी २६०।११५दहमाना (शा प ३७५) १,४।२५दारार्यजितिप (सु ३२०४) ६८।८६
दन्ता विश्लथदन्ता. ७६।२९दह्यमानेऽपि (शा प ३४०२) २७५।१दारिद्र्यदायादगणा १०४।१९१
दन्तिदन्तसमान हि ४५।३२दाक्षिण्य खजने(सु २९४६) १७९।१०३९दारिद्र्य भोस्त्व परम ६६।४१
दन्वीन्द्रादाना १२८।४४दाक्षिण्यं नाम (मालवि ४ १४) ३०५।४दारिद्र्यशीलोऽपि १००।२
दन्तै. प्रस्थितम ३७५।२२६दाक्षिण्यं मलया २८४।३३दारिद्र्य शोचा (मृच्छ १ ३८०) ६६।४२
दन्तैरुच्चलित धिया ७७।५२दातव्यमिति यद्दानं (हि १ १६) ६९।९दारिद्र्यस्य परा (पञ्च २ १६७) ७६।१७
दन्तैर्हीन शिला १८५।१६दातव्य भोक्तव्य (शा प ४६९) ६९।१७दारिद्र्यात्पुरुषस्य (मृच्छ १ ३६) ६८।७३
दन्तौ कोरकितास्सि तै १६।८दाता क्षमी (हि ३ १४०) १८४।२४४दारिद्र्याद्व्रियमेति (मृच्छ १ १४) ६८।७१
दमेन हीनं (पञ्च सृष्टि अ.१९) ३८४।२९५दाता दानस्य १७२।८१७दारिद्र्यानलसत प (भोज १९३) ७३।१०
दम्पत्योर्निशि (अमरु १६) ३२८।१९दाता न दापयति ५०।१९८दारिद्र्यान्मरगाद्वा (मृच्छ १ ११) ६६।३६
दम्भोलिस्फूर्जद्दम्भो २०७।२१दाता नीचोऽपि (शा प २८१) ७०।१२दारिद्र्येण समीरितोपि ६८।८०
दयिताबाहु (सूक्ति ५३ ४०) २४४।२२४दाता बलि (गरुड अ ११०) ९१।४८दारिद्र्योपहतौ यथा १०९।२२१
दरफुल्लकमलकानन ३२५।४दातारो यदि (स क ४ ७१) ३९३।६४७दारेषु किञ्चि (पञ्च १ १०९) १७२।८३९
दरललितहरिद्रा २७५।२३दाता लघुरपि (पञ्च २ ७१) ३८४।३८७दासे कृता (मा द १० ३२) ३१३।४८
दरविदलित (गीत १३ १०) ३२६।१६दातु परोपकृति ७५।१४दासेरकस्य (शा प १०२७) २४१।१३६
दरिद्रता १७४।१९३दातुश्छत्रत्त्वचि (सूक्ति ११६ ४)१५७।१९५दासेरको रस (शा प ९५९) २३४।१२५
दरिद्रमुदरं ह(सूक्ति ५३ ६३) २६७।३३२दातुत्व प्रिय १५८।२१३दास्येऽहं परिभ्रमणाम्नि ६।६५
दरिद्रस्य परा (शा प.३०९) ७३।११दात्यूहा (शा प ८५०) २५५।१४३दिक्कालातमसमेव यस्य (कुव १०६) ६।७७
दरिद्रानभर कौन्तेय (हि.१.१५) ६९।८दान ददत्यपि (शिशु ५ ३७) २३२।७४दिकालाद्यनवच्छिन्ना (सु ३) १।२
दर्पे कविभुजगाना(सूक्ति ४ ६८) ३६।३६दानं दरिद्रस्य(सूक्ति १३० ९)१७१।८२२दिक्कक्र तृणभस्म (सूक्ति ३४ ६)२२०।८
दर्पणार्पित (शा प ११७) २२१।०२दानं न दत्त न तपश्च ६७।४८दिक्क्षेत्रीमोहतिजग २०९।१०
दर्पेषु परिभोग (रघु ९९ २८) ३२८।८दानं प्रियवाक्स (हि.१ १६३)१७०।७७०दिगन्ते खेलन्ती स ६०।२४९
दर्पान्धगन्ध (शा प.१२३७) १२५।६दान भोग च विना (सु ४७९) ७२।४२दिगन्ते श्रूयन्ते (भामिनी अ १)२३०।३२
दर्पोद्रिक्त कुसुमथ ३०१।८९दानं भोगो (पञ्च २ १५७) ६९।१५दिगम्बरनितम्बिन्या ३।७
दर्शनं नाघमद्वारा १५०।३३१दानं वित्ता (सा द १० ४८) १६७।६६२दिगीशवृन्ददाशिव (नैषध १ ६)१०५।१२२
दर्शनपथ (अ शा ६ २०) २७८।२६दान सत्त्वा (शा प १५०८) १५४।६५दिग्बालाकरकन्दु ३०२।९८
दर्शनाद्भवते चित्त ३४८।९दानपात्रमधर्मणीहैिक ६९।२३दिग्यन्त्रतस्तिमि ३०४।१५६
दर्शने स्पर्शने वापि ८८।११दानाय लक्ष्मी (शा प ४६३) ४९।१७९दिग्वासस गतव्रीड ८९।६
दर्शयन्ति शरन् (सु.१७९२) ३४४।४दानार्थिनो (शा प ९२९) २३१।७०दिङ्नागा प्रति २३१।५४
दर्शितातापोच्छ्रायै ७९।१६दाने कल्पतरुर्नये १०७।१८०दिङ्नारीणा स्पृश १२५।२
दर्शितानि (शा प.१४७१) १५४।५३दाने तपसि (शा प.१४७७) ९०।९दिङ्मण्डलं परिम २३९।१०८
दंलति हृदय (उत्तर ३.३१) २७९।६८दानेन तुल्यो (पञ्च २ १६६) १७२।८४२दिङ्मण्डलीमुकुटम ३२३।१४
दलदमलको (प्र.राघव.२.२७) ३१२।३०दानेन भूतानि ६९।२५दिङ्मूढ त सुरारिं १८।१५
दलविततिभृता ३०३।१२४दानेन भोगी १६६।६०१दिदृक्षमाण क्षणमा(शिशु ३ ३१)३३०।१
दलितकुचनखाङ्कमङ्क ३१३।४५दानेन श्लाघ्यता ६९।१४दिनकरकरामुष्टं ३१४।६७
दलितकोमल (शिशु ६.२३) ३३५।११दानोपभोगरहिता (हि ० ११) ७१।६दिनमवसितं वि (शा.प ११४६) २२०।८
दलितमौक्तिक (शिशु ६ ३५) ३४१।४१दानोपभोगवन्ध्या (भोज ६१) ६९।११दिनमेक शशी पूर्ण ३६७।२१
दवदहनजटाल(भामिनी अ ३४) २१३।५०दामोदरकरा (शा प ४९८) १८१।१०दिनयामिन्यौ साय (मोहमुद्गर) ७६।३४
दवदहनादुत्पन्नो धूमो (कुव ९२) २३०।३दामोदरमुदरा (शा.प ११६२) २२१।१दिनान्ते भ्रान्तीना २६०।१०९
दशकूपसमा (शा प २०८६) १४५।११४दामोदराय पुण्यात्म १९३।८दिवमप्युपया (रुद्रटाल ९ ६) ३३।२५
दशकैरवबान्ध २६९।४११दायादत्वं मनसिज २७१।४७दियस भृशोष्ण (शिशु.९ ३४) ३००।५९
दृष्ट्वातामरसकेसर २९६।२दायादा व्य (राजत ५ १३०)३८४।२७७दिवसGeneric / दिवसरजनीकू (शान्ति ३ २) ३७६।२५३
दृष्टे जगद्वपुषि ३१४।१५५दायादा स्पृहयन्ति ६५।२०दिवसे घटिकास्त्रिंशत् ३५२।७