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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

लाखनका विवाह । ३७७ ११- हमें न भाई यह आली है तुमते साँच दीन बतलाय १०४ बयस बराबरीकी मालिनि हौ अब गाढ़े माँ होउ सहाय ॥ राति अँधेरिया की बिरिया है खन्दक मोहिंदेइ दिखराय १०५ मोरे कारण महराजा सुत कैदी भये यहांपर आय ॥ उत्तम शय्या केरि स्ववैया खन्दकदीन बाप डरवाय १०६ मोहिं दिखावै त्यहि क्षत्री को जियरा धीरधरा ना जाय ॥ इतना सुनिकै मालिनि दौरी पलकीलाई तुरतलिआय १०७ बैठि पालकी मा दूनो फिरि खन्दक पास गई नियराय ॥ दीन अशर्फी तहँ चकरन का तिनफिरतहाँदीनपहुँचाय १०८ कुसुमा बोली तहँ लाखनि ते स्वामी बार बार बलिजायँ ॥ मोहिं अभागिनि के कारणसों तुमपरबिपतिपरीअधिकाय१०६ अब तुम निकरो यहि खन्दकते रस्ता देउँ कन्त लटकाय ॥ इतना सुनिकै ऊदन बोले तुमते साँचदेयँ बतलाय ११० जो तुम चाहौ लखराना को फौजन खबरि देउ पहुँचाय ॥ चहै सहारा जो नारी को तौ सब क्षत्रीधर्म नशाय १११ शंका लावो मन अन्तर ना महलन जाउ तड़ाका धाय ॥ खबरि पायकै आल्हा ठाकुर हमरीबिपतिविदरिहैंआय११२ कुसुमा बोली फिरि ऊदन ते क्षत्री भोजन देउँ पठाय ॥ ऊदन बोले तब कुसुमा ते यहनहिंउचितयहाँपरआय११३ चोरी चोरा कछु दैहै ना शाहंशाह कनौजीराय ॥ भोर भवरहरे मुरगा बोलत फौजन खबरिदेउ पठवाय ११४ और न चाहें कछु तुमते ये साँचे हाल दीन बतलाय ॥ इतना सुनिकै कुसुमा बेटी महलनफेरिपहुँची आय ११५ सोचत सोचत राति पारभे प्रातःकाल गयो नगणाय ॥

१२ आल्हखण्ड । ३७८ कहि समुझावा तब मालिनिको फौजन तुरतदीन पठवाय ११६ नाइनि बारिनि तेलि तँबोलिनि मालिनिधोबिनि के समुदाय ॥ साँची दूती रस ग्रन्थन में भाषा चतुरन खूब बनाय ११७ सोई मालिनि चलि बूँदी ते फौजन अटी तड़ाका धाय ॥ पता लगायो तहँ आल्हा को चँकरन तम्बूदीन बताय ११८ बेला चमेलिन के हरवा को मालिनि तुरत दीन पहिराय ॥ कह्यो सँदेशा तहँ ऊदन का मालिनि वारवार सब गाय ११९ जो सुधि पावैं बूँदी वाले हमरो पेट देयँ फरवाय ॥ भुसा भरावैं ते पेटेमा तुमकासाँच दीन बतलाय १२० इतना सुनिकै आल्हा ठाकुर मुहरें सात दीन पकराय ॥ मालिनि चलिभै तब फौजनते बेटी पास पहुँची आय १२१ खबरिसुनाई सब जयचँद को आल्हा वार वार समुझाय ॥ तब महराजा कनउज वाला डंका तुरतदीन बजवाय १२२ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न मे असवार ॥ झीलमबख्तर पहिरि सिपाहिन हाथम लई ढाल तलवार १२३ तोपैं चढ़ि गईं सब चर्खन मा गोला तुरत दीन छुटवाय ॥ चढ़े जवाहर औ मोती दोउ तोपनआगिदीनलगवाय १२४ तोपैं छूटीं दुहुँ तरफा ते धुवना रहा सरग में छाय ॥ बड़ी दुर्दशा भै तोपन मा तबफिरिमारुवन्द है जाय १२५ गोली ओला सम वर्षत भइँ सननन सन्न सन्न सन्नाय ॥ दुनो गोल आगे का बढ़िगे सम्मुख भये समरमें आय १२६ भाला बलछी तलवारिन की लागी होन भड़ाभड़ मार ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार १२७ ना मुहँ फेरैं बूँदी वाले ना ई कनउज के सरदार ॥

लाखनिका विवाह। ३७५ १३ शूर सिपाही सम्मुख रहिगे कायरछोड़िभागि हथियार १२८ कटि कटि मूड़ गिरैं धरणीमा उठि उठि रुण्ड करें तलवार ॥ मूड़न केरे मुड़चौरा भे औरुरुडूनके लाग पहार १२६ सात कोस के तहँ गिर्दा मा कौवा गीध रहे मड़राय ॥ घैहा करहैं समरभूमि मा दैया बापू रहे मचाय १३० हाय रुपैया बैरी द्वैगे हमरे गई प्राणपर आय ॥ सात रुपैया के कारण ते छूटे लोग कुटुम औभाय १३१ तहिले बिरिया मै संध्या कै तब फिरि मारु बन्द है जाय ॥ जीबे लायक जितने घैहा तिनकीलोथिल्रीनउठवाय १३२ दईलाख दल कनउज वाला बूँदी डेढ़लाख सरदार ॥ इतने जूझे दुहुँ तरफा ते करिकरि मारुतहाँपरयार १३३ आल्हा आये जब तम्बू मा आसनअगलगीनबिछवाय ॥ श्वास चढ़ाई फिरि ऊपर का शारदसुमिरिबनाफरराय १३४ बिनती कीन्ही भल शारद की आल्हा बार बार शिरनाय ॥ तव अवलम्बा जगदम्बा है दूसर करिहै कौन सहाय १३५ बिनती करिकै आल्हा ठाकुर सोये सेज आपनी जाय ॥ देबी शारदा महिरवाली निशिमास्वप्न दिखायो आय १३६ मलखे ब्रह्मा को बुलगाओ द्वैहै जीति बनाफरराय ॥ स्वपन देखिकै आल्हा ठाकुर प्रातःकाल उठे हर्षाय १३७ लिखिकै चिट्ठी मलखाने को धावन हाथ दीन पठवाय ॥ चढ़ा साँड़िया मा धावन तब सिरसागढ़ै पहुँवाजाय १३८ चिट्ठी दीन्ही मलखाने को धावन बार बार शिरनाय ॥ पढ़िकै चिट्ठी मलखेठाकुर औ यहबोले वचनसुनाय १३९ हम समुझावा भल ऊदन का सिरसा बसो बनाफरराय ॥

१४ आल्हाखण्ड । ३८० कहा न माना आल्हा ऊदन खन्दकपरे लहुरवाभाय १४० मनते हमरे यह आवति है की बूँदी का जाय वलाय ॥ जैसो कीन्हेोनि तस फलपायनि दूनोभाय बनाफरराय १४१ करैं तयारी नहिं बूँदी की तवहूं ठीक नहीं ठहराय ॥ इतना कहिकै मलखेठाकुर फौजनहुकुमदीनकरवाय १४२ करो तयारी सब बूँदी की खन्दक परा लहुरवाभाय ॥ इतना कहिकै मलखेठाकुर अपने महल पहुँचेजाय १४३ पढ़िकै चिट्ठी गजमोतिनि को मलखे हाल दीन समुझाय ॥ हम ना जैबै अब बूँदी का प्यारी साँच दीन बतलाय १४४ इतना सुनिकै प्यारी बोली दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥ आजु साँकरा बघऊदन का स्वामीगाढ़े होउ सहाय १४५ बिना सहायक अब दादा को स्वामीदुःख होय अधिकाय ॥ आजु साँकरा है दादापर यहुदिनपरीरोज ना आय १४६ ब्याना सहिबे घबरानिन का होई पीर रोज अधिकार ॥ धर्म विहीनी हीनी ह्वैकै जीनो जन्मजनमधिकार १४७ धर्म न रहै जब देही मा करि है कौन्दकाहि उपकार ॥ धर्म निशाना मर्दाना है अर्जुनसकदीनोकसरदार १४८ सारथि कीन्ह्यो नारायण जे ध्रुव कृष्ण कहि दीन्ह्यो महराज ॥ बुद्धीद्वारा करि दिखलावा ताकी राखि लई सबके काज १४६ करौं किहानी जो पूरी मैं ताको सिन्ध बड़ा विस्तार ॥ सुनी किहानी जो विप्रन ते सोई कहौ सत्य भतार १५० ह्रवै दवाई दुखदाई यह नींवी हरै अनेकन रोग ॥ जो कोउ पीवै चंगा होवै याको कैस नीक संयोग १५१ धर्म दवाइन के पीने मा स्वामिन सत्य सत्य आरोग ॥

लाखनिका विवाह । ३८१ १५ ताते जावो तुम बूँदी को होवै पूर हमारो भोग १५२ बातैं सुनिकै गजमोतिनि की मलखे धरा पीठिपर हाथ ॥ होय पियारी अस नारी जो तवहीं रहे धर्म की पाथ १५३ बड़ी पियारी निज नारी को मलखे बार बार समुझाय ॥ गये दुवारा फिरि माता घर चलिभेचरणकमलशिरनाय १५४ घोड़ी कबूतरीपर चढ़ि बैठे डंका तुरत दीन बजवाय ॥ लैके लश्कर मोहबे आये जहँ पर रहें चँदेलेराय १५५ आय सिंहासन के लगभग में ठाढ़े भये शीश को नाय ॥ आल्हा ऊदन की गाथा को मलखे गये तहाँ परगाय १५६ भयो बुलौवा हम ब्रह्माका आयसु कहामिलै महराज ॥ परम दयालू चित तुम्हरो है स्वामीपूँछि करौं मैं काज १५७ गुरु पितु भ्राता अरु त्राता तुम हमरे सदा चँदेलेराय ॥ आज्ञापावों महराजा कै तौ ऊदनका लवों छुड़ाय १५८ सुनिकै बातैं मलखाने की आयसु दीन रजापरिमाल ॥ लैके ब्रह्माको जावो तुम दूनों बहू हमारेबाल १५६ माथनाइ कै महराजा को मल्हना महल पहुँचे जाय ॥ चिट्ठी पढ़ि तँह आल्हा की मलखेदीनसकलसमुझाय १६० विपदा सुनिकै बघऊदन कै मल्हना रोयदीन त्यहिबार ॥ हाथ पकरिकै फिरि ब्रह्माको बोली लेउ पूत तलवार १६१ क्षत्री द्वैकै समर सकावै जावै तुरत नरक के द्वार ॥ परम पियारे सुतजावो तुम हमरो पूरहोय उपकार १६२ इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर अपनी लीन ढाल तलवार ॥ बिदा मांगिकै पितु मातासों दोऊ चलत भये सरदार १६३ सजिगा घोड़ा हरनागर जो तापर ब्रह्मा भये सवार ॥

१६ आल्हखण्ड । ३८२ घोड़ी कबूतरी की पीठोपर मलखे सिरसाका सरदार १६४ बाजे डंका अहलंका के बंका चले शूर त्यहि बार ॥ शङ्का फंका करि डंका तहँ बाजे घोर शोर ललकार १६५ रहा कलङ्का नहिं देही माँ ऐसे कहत चलैं सब यार ॥ पंद्रादिनका धावा करिकै बूँदी निकट गये सरदार १६६ झील देखिकै मलखाने ने तम्बू तहाँ दीन गड़वाय ॥ लाले पीले नीले काले सबरँग ध्वजा रहे फहराय १६७ खेत छूटिगा दिननायक सों झंडा गड़ा निशाको आय ॥ तारागण कछु चमकन लागे पक्षी चले बसेरन धाय १६८ परे आलसी खटिया तकि तकि संतन धुनी दीन परचाय ॥ भस्म लगायो सब अंगन में ध्यायो चरित पुरातन गाय १६६ शिवा रमा ब्रह्माणी पति के मनमें चरित रहे सुलगाय ॥ बड़े यशस्वी पितु अपने के दोऊचरणकमलकोध्याय १७० करों तरंग यहां सों पूरण दोऊ गणपतिचरण मनाय ॥ राम रमा मिलि दर्शन देवैं लेवैं आपन मोहिं बनाय १७१ इति श्रीलखनऊनिवसि (सी,आई,ई) मुंशी नवलकिशोरात्मजवाबू प्रयाग नारायणजीकीआज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गत पँड़रीकलां निवासि मिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनु पं० ललिताप्रसादकृत मलखान बड़ाईवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥ सवैया ॥ सत्यहैं वेद पुराण सबै मति एक असत्य यहै लखिपावा । मतिही के असत्य असत्य सबै यह सत्यहि २ सत्य बतावा ॥ बेद पुराण भूलनहीं यह भूल असत्य मती ठहरावा । ललिते मति सत्यासत्य निवारण वेद पुराणन ने दर्शावा १

लाखनिका विवाह । ३८३ :१७ सुमिरन ॥ बेदन ध्यावों सामबेद को बिप्रन परशुराम महराज ॥ क्षत्रिन ध्यावों रामकृष्ण को बैश्यन नन्दभये शिरताज १ शूद्रन ध्यावों मैं निषाद को कीशन पवनतनय बलवान ॥ ईशन ध्यावों शिवशङ्कर को शीशनबढ़ा दशानन ज्वान २ ध्याय नदीशनमें बड़वानल पक्षिन बैनतेय महराज ॥ ध्याय गिरीशन में हिमपर्वत नारिन जनकसुता शिरताज ३ कुँवारिन ध्यावैं हम राधाको राखैं सदा हमारी लाज ॥ परम पियारी यदुनन्दन की हमरी माननीय शिरताज ४ सबै पुस्तकन में दुर्गा जी अबहूं बिप्रन की रखवार ॥ खूटि सुमिरनी गै ह्याँते अब बूँदी हाल सुनो यहिबार ५ अथ कथाप्रसंग ॥ देखिकै फौजै मलखाने की बोला तुरत कनौजीराय ॥ फौजै आई हैं बूँदी ते आल्हा देखु भीर अधिकाय १ चिट्ठी पठई तुम सिरसा को आये नहीं वीर मलखान ॥ कैसी करिहौ यहि समया में आल्हा समरभूमि मैदान २ सुनिकै बातैं महराजा की आल्हा बोले शीश नवाय ॥ मुर्चा बन्दी अब करवावो चर्खन तोप देउ चढ़वाय ३ तर्बलंग धावन सिरसावाला आल्हा फौज पहुंचा आय ॥ शीश नाय कै सो आल्हा को मलखे आवन दीन बताय ४ दीन इनामै त्यहि धावन को ब्रह्मा मलखे लीन बुलाय ॥ खबरि पाय कै सो आल्हा की दूनों गये तहाँ पर आय ५ बड़ी खातिरी जैचँद कीन्ह्यो अपने पास लीन बैठाय ॥ खबरि बताई सब बूँदी की जयचँद बार बार पछिताय ६

१८ आल्हाखण्ड । ३८४ मलखे बोले तब राजा ते साँची सुनो कनौजीराय ॥ उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम चारो दिशा लेउ घ्यग्वाय ७ तुमतो लड़ियो उत्तर दिशिको दक्षिण समर करब हम आय ॥ कछुदल पठवो पूरब पश्चिम बूँदी शहर लेउ घिराय ८ इतना कहिकै मलखे ब्रह्मा फोजन फेरि पहूँचे आय ॥ बाजे डंका कनौजिया के हाहाकार शब्दगा छाय ६ बिनही डंका के मलखाने दक्षिण दिशा पहूँचे जाय ॥ म्वती जबाहिर उत्तर दिशिमाँ लै कै फौजगयो फिरिआय १० तोपैं धरिगइँ फिरि चर्खेन में तिनमें बत्तीदई लगाय ॥ छूटे गोला हाहाकारी धुवनारहा सरगमें छाय ११ लागे गोला ज्यहि क्षत्री के मानो गिरह कबूतरखाय ॥ गोला लागै ज्यहि घोड़ाके आधे सरगलिहे मड़राय १२ लागै गोला ज्यहि हाथी के झुप्पे देवै भूमि बिछाय ॥ जौने ऊंटके गोला लागै सो मुहभरा तुरतगिरिजाय १३ अरर अरर गोला छूटैं जैसे प्रलय मेघ घहराय ॥ जौने रथमाँ गोला लागै पहियाधुरीसहितउड़िजाय १४ बड़ी दुईशा भै तोपन में तब फिरि मारुबन्द द्वैजाय ॥ दुनो गोल आगे का बढ़िगे मुर्चा परा बरोबरि आय १५ कल्ला भिड़िगे असवारन के घोड़न भिड़ी रानमें रान ॥ सूंडि लपेटा हाथी भिड़िगे लाग्यो होन घोर घमसान १६ कउँधालपकनिविजुलीचमकनि रणमाँ चमाचम्म तलवार ॥ झल् झल् झल् झल् छुरी झलकैं भारी ढालनकी ठनकार १७ धम् धम् धम् धम् बजैं नगारा मारा मारा परै सुनाय ॥ न् सन् सन् सन् गोली सनकैं तेगा मन्न मन्न मन्नाय १८

लाखनिका विवाह। ३८५ मारु मारु करि मौहरि बाजै बाजै हाव हाव करनाल ॥ बड़ी लड़ाई भै बूँदीमाँ जूझे बड़े बड़े नरपाल १६ पैदल पैदल कै बरणी मै औ असवार साथ असवार ॥ कोताखानी चलैं कटारी ऊनाचलै बिलाइति क्यार २० कटिकटि कल्ला गिरैं खेतमाँ उठि उठि फेरि करैं तलवार ॥ ना मुहँ फेरैं कनउज वाले ना ई बूँदी के सरदार २१ ब्रह्मा मलखे दक्षिण दिशिसों पहुँचे बीच शहरमें आय ॥ बड़ा कुलाहल भा बूँदी माँ काहू धीर धरा ना जाय २२ लीन्हे फौजै मलखाने फिरि फाटक उपर पहुँवा जाय ॥ औ कहि पठवा गंगाधर को सबकी कैद देउ छुटवाय २३ नाहीं बचिहौ ना महलन माँ बूँदी शहर देउँ फुँकवाय ॥ सुना सँदेशा महराजा जब मनमाँ बार बार पछिताय २४ पै जब सूझी कछु मनमाँ ना सबकी कैद दीन छुटवाय ॥ घायल करहति ऊदन लाखनि मलखे पास पहुँचे आय २५ मिला भेंट करि सब आपस में उत्तर दिशा चले हर्षाय ॥ एक तरफ सों जयचंद राजा दूसरी तरफ बनाफरराय २६ मोती जवाहरि परे बीचमाँ सबके गयी प्राणपर आय ॥ बड़ी लड़ाई भै बूँदी मा अद्भुत समर कहा ना जाय २७ मारे मारे तलवारिन के नदिया वही रक्तकी धार ॥ मुण्डन केरे मुड़चौड़ा भै औ रुण्डन के लगे पहार २८ घोड़मनोहर की पीठी सों देवा गरू देय ललकार ॥ चढ़ा कबूतरी पर मलखाने ऊदन बेंदुलपर असवार २९ भयो जवाहरि फिरि सम्मुख माँ लीन्हे तीनिलाख असवार ॥ का गति बरणों मैं मोती कै दूनों हाथ करै तलवार ३०

२० आलहखण्ड । ३८६ मीराताल्हन बनरस वाला सिर्गा घोड़े पर असवार ॥ अल्ला अल्ला औ बिसमिल्ला करिकै खूब मचाई रार ३१ झुके सिपाही बूँदी वाले दोऊ हाथ करैं तलवार ॥ बड़े लड़ैया मुहबेवाले एकते एक शूर सरदार ३२ येऊ मारैं औ ललकारैं हारैं नहीं तहाँ पर ज्वान ॥ छोड़ि आसरा जिंदगानी का क्षत्रिन खून कीन मैदान ३३ दूनों दिशि की तहँ मारुन माँ क्षत्री बूँदी के हैरान ॥ तीनि लाख बूँदीके ठाकुर ह्वैगै समर भूमि वैरान ३४ मती जवाहर त्यहिसमया माँ दूनों भाय गये घबड़ाय ॥ मलखे ठाकुर त्यहि औसर माँ तिनका कैदलीन करवाय ३५ भागि सिपाही अरझ्वारातब अपने अपने लिहे परान ॥ जीति के डंका तब बजवाये नाहर समरधनी मलखान ३६ राजा जयचँद के तम्बू माँ पहुँचे सबै शूर सरदार ॥ को गति बरणै त्यहि समयाकै भारी लाग राजदरबार ३७ जितने घायल अपनी दिशिके सबको तुरतलीन उठवाय ॥ मलहम पट्टी तिन क्षत्रिन के घायन ऊपर दीन कराय ३८ सुनी हकीकति जब गंगाधर मनमाँ बारबार पछिताय ॥ मेलछाँड़िकै त्यहि औसर माँ और न कछू ठीक ठहराय ३६ लिखिकै चिट्ठी त्यहि समयामाँ जयचँद पास दीनपठवाय ॥ कैदी छोड़ो दोउ पुत्रनको भाँवरि तुरत लेउ करवाय ४० जहँना तम्बू महराजा का धावन तहाँ पहुँचा आय ॥ चिट्ठी दीन्ह्यो महराजाको दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ४१ पढ़िकै चिट्ठी जयचँदराजा तुरतै सबका दीनसुननाय ॥ सम्मत सबके तब याही भै कैदी देउ पुत्र छुड़वाय ४२

लाखनिका विवाह । ३८७ २१ म्वती जवाहर दोउ पुत्रन को राजा तुरत लीन बुलवाय ॥ लिखी हकीकति जो गंगाधर तिनको तुरतदीन बतलाय ४३ गंगा कैलेउ तुम तम्बुन माँ तुम्हरी कैद देइँ छुड़वाय ॥ सुनिकै बातें ये जयचंदकी दोऊ गंगा लीन उठाय ४४ तब छुड़वायो जयचंद राजा पहुँचे धाम आपने जाय ॥ सम्मत कीन्ह्यो फिरि गंगाधर मड़ये मूड़ लेब कटवाय ४५ अकसर लड़काको लै आवो जावो पूत जवाहरलाल ॥ सुनिकै तुरतै सो गमनत भा आयो जहाँ बैठ नरपाल ४६ कहि समुझायो सब राजा को दोऊ चरणन शीश नवाय ॥ अकसर लड़का को पठवावो सबियाँ शंका देउ भुलाय ४७ इतना सुनिकै मलखे बोले राजन हुकुम देउ फरमाय ॥ पांच सात मिलि हमअब जैबे भौंरी तुरत देब करवाय ४८ सुनिकै बातें मलखाने की आयसु दीन कनौजीराय ॥ बैठि पालकी में लखराना देबी फूलमती को ध्याय ४६ आल्हा ऊदन मलखे ब्रह्मा देवा बनरस का सरदार ॥ गंगा मामा लखराना का सोऊ बांधि लीन हथियार ५० सवैया ॥ ते सरदार सबै चलिकै फिरि भीतर भौन के जाय सिधाये । सुन्दर आसन डारितहाँ नृप आदर भाव किये अधिकाये ॥ पण्डित आयकै बैठि गयो गठिबन्धन हेतु सुता बुलवाये । सातसुहागिल आय तहाँ ललिते मन मोदन गीत सुनाये ५१ पहिली भाँवरिके परतै खन क्षत्री आये आध हजार ॥ आल्हा ऊदन मलखे ब्रह्मा इनहुन खैंचि लीन तलवार ५२

२२ आल्हखण्ड । ३८८ आधे आँगन भाँवरि होवैं आधे होय भड़ाभड़ मार ॥ मारे मारे तलवारिन के आँगन वही रक्त की धार ५३° काटिकै कल्ला दुइ पल्ला करि लल्ला बच्छराज के लाल ॥ लड़ै इकल्ला अति हल्लाकरि अल्हो खैर करैं त्यहिकाल ५४ भा खलभल्ला औ हल्ला अति बल्लन क्यार मनो त्यवहार ॥ काटि बजुल्ला सोने छल्ला लल्ला उदयसिंह सरदार ५५ हनि हनि मारै औ ललकारै देवा मैनपुरी चौहान ॥ म्वती जवाहर दूनों भाई लीन्हे तहाँ अनेकन ज्वान ५६ बड़ी लड़ाई करिहारे तहँ पै नहिं विजय परी दिखराय ॥ तब पछितान्यो फिरि गंगाधर दीन्ह्यो मारु बन्द करवाय ५७ कन्या दान दीन आनँद सों नेगिन नेग दीन हर्षाय ॥ सातो भाँवरि पूरी करिकै पूरा ब्याह दीन करवाय ५८ बिदा न करिबे हम ब्याहे में लीन्ह्यो गवन सालमें आय ॥ इतना कहिकै गंगाधर जी दायज खूबदीन अधिकाय ५६ बात मानिकै चन्देले फिरि तहँ ते कूच दीन करवाय ॥ विदा मांगिकै मलखे ब्रह्मा पहुँचे नगर मोहोबे आय ६० बाजत डंका अह्तंका के कनउज गये कनौजी आय ॥ अनँद बधैया घर घर बाजीं मंगल गीतरही सब गाय ६१ रानी तिलका त्यहिअवसर में बिप्रन दान दीन अधिकाय ॥ ध्रुबी शारदा के बरदानी दूनों भाय बनाफरराय ६२ सवैया ॥ गावत गीत सबै तिनको जिनको कछु ज्ञान बलै अधिकाई । १-( अल्हा ) देवी का नाम है ॥

लाखनिका विवाह। ३८६ २३ ते मनमाँझ विचारकरै औ धरै मनमें प्रभुकी प्रभुताई ॥ त्यागत झूठ प्रपञ्च सबै औ जबै मन भासत हैं रघुराई । नाशत पाप सबै ललिते फलिते जगधर्म कि बेलि सदाई ६३ सोई मन्तर मन अन्तर धरि यन्तर धर्म बनाफरराय ॥ बड़ी बड़ाई कनउज पायो कीरति रही आजलों छाय ६४ बिपदा सहिकै यहि दुनियामा त्यागा धर्म नहीं कहुँभाय ॥ तासों बेली यह फैली अति सुन्दर धर्म रूप जलपाय ६५ अधरम बेली दुरयोधन की छैलिकै लीन जगतकोछाय ॥ तैसे - रावण कंसासुरहू बाढ़यो धनै बलै अधिकाय ६६ रीछ बँदरवा ग्वालन बालन दूनन दीन्यो तुरत नशाय ॥ तासों चाहिये यहि दुनियामाँ नितप्रतिनवत नवन नैजाय६७ धन बल बाढ़ै त्यहि दुनियामाँ कीरति जाय धरामें छाय ॥ खेत छूटिगा दिननायक सों झंडागड़ा निशाकोआय ६८ तारागण सब चमकन लागे संतन धुनी दीन परचाय ॥ परे आलसी खटिया तकितकि घोंघों करठ रहे घरांय ६६ आशिर्वाद देउँ मुंशीसुत जीवो प्रागनरायण भाय ॥ हुकुम तुम्हारो जो पावत ना ललिते कहतकथाकस गाय७० रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥ मालिक ललिते के तबलों तुम यशसों रहौ सदा भरपूर ७१ माथ नवावों पितु अपने को जिनबल गाथ भई यह पार ॥ जैसे सेयो बालापन में तैसे सदा होउ रखवार ७२ जल थल जन्मों चहु पहाड़ में स्वामी होयँ राम भगवान ॥ यह बर पावैं ललिते पण्डित खण्डित होय न हमरी बान ७३

२४ आल्हखण्ड । ३६० पूर विवाह भयो लाखनि को हँाते करों. तरंगको अन्त ॥ राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छा यही भवानी कन्त ७४ इति श्रीलखनऊनवासि (सी, आई, ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजवाबूप्रयागनारायण जीकी आज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गत पँड़रीकलांनिवासि मिश्र वंशोद्भवबुध कृपाशङ्करसूनु पण्डितललिताप्रसादकृत लाखनि पाणिग्रहणवर्णनोनामद्वितीयस्तरंगः २ ॥ लाखनिरानाजीका विवाह सम्पूर्ण ॥ इति ॥

अथ आल्हखण्ड ॥ गाँजर की लड़ाईका प्रारम्भ ॥ सवैया ॥ दानिन में बलि औ हरिचन्द शिबी दधि कर्ण इन्ही यश पाये । बीरन में गिनती रघुबीर औ धीरन कृष्ण युधिष्ठिर गाये ॥ पापिन औ परितापिन में जग कंस दशानन बीर सुनाये । जापिन योग उदार अपार सदाशिवही ललिते मन आये १ सुमिरन ॥ प्रथमै ध्यावों श्री गणेश को लीन्हे सुभग पुस्तकी हाथ ॥ करों बन्दना शिवशंकर की दूनों धरों चरणपर माथ १ देवि दुर्गा को ध्यावों फिरि लैके रामचन्द्र को नाम ॥ कीरति गावों मैं ऊदन कै पूरणकरो हमारो काम २ देवि शारदा मइहरवाली मनियादेव महोबे केर ॥ ध्यावों ललिता नैमिषार की माता मोरि दीनता हेर ३ नहीं बीरता कछु मोमें है तव बल धरी धीरता हीय ॥

२ आल्हाखण्ड । ३६२ कीरति तुम्हरी जो कोउ गावै पावै वहै चहै जो जीय ४ निरभय होवै घर बाहर सों केवल करै तुम्हारी आश ॥ बन्धन छूटैं सब दुनियां के यमकी परै गले नहिं पाश ५ छूटि सुमिरनी गै हाँते अब सुनिये गाँजर केर हवाल ॥ साजिकै फौजै ऊदन चलि हैं लड़ि हैं बड़े बड़े नरपाल ६ अथ कथाप्रसंग ॥ जैचन्द राजा कनउज बाला आला सकलजगत सरनाम ॥ लागि कचहरी त्यहि राजा कै सोहैं सोन सरिस त्यहिधाम १ को गति वरणै त्यहि मन्दिरकै ज्यहिमाँ भरी लाग दर्बार ॥ आस पास माँ राजा सोहैं बीचम कनउज का सरदार २ बनासिंहासन है सोने का हीस पन्ना करै बहार ॥ तामैं बैठे जैचन्द बोले सुनिये सकल शूर सरदार ३ बारह वरसन का अरसा भा पैसा मिला न गाँजर क्यार ॥ कौन शूरमा मोरे दलमाँ नङ्गी काढ़िलेय तलवार ४ करै बन्दगी तलवारी सों औ गाँजर को होय तयार ॥ सुनिकै बातें ये जैचँदकी झुकिगे सकल शूर सरदार ५ झुका डुलरुवानाहिं द्यावलिको औ आल्हाक लहुरवाभाय ॥ सुनिकै बातें ये जैचंद की नैना अग्निवरण ह्वैजायँ ६ सबदिशिताक्यो सबक्षत्रिनको सबहिन लीन्ह्यो मूड़नवाय ॥ उठा डुलरुवा तब द्यावलिको औ आल्हा को शीशनवाय ७ सुमिरि भवानी जगदम्बा को म्यान ते खैंचिलीन तलवार ॥ किह्यो बन्दगी फिर राजा को यहु द्यावलिको राजकुमार ८ हाथ जोरिकै बोलन लाग्यो सुनिये विनय कनौजीराय ॥ लाखनि राना सँगमाँ दीजै लीजै पैसा सकल मँगाय ६

गॉजरकीलड़ाई । ३६३ ३ बिना हकीकी लखराना के पैसा कौन तसीलै जाय ॥ साथ में होवैं लखराना जो तम्बू बैठे लेयें मँगाय १० लड़ै भिड़े को जिम्मा हमरो इन को वार न बाँको जाय ॥ हुकुम जो पावौं महराजा को गाँजर अबै पहुँचों जाय ११ सुनिकै बातें बघऊदन की बोला कनउज को सरदार ॥ सोरह रानिन में इकलौतो मेरो लाखनि राजकुमार १२ सो नहिं जैहै चढ़ि गाँजर को पैसा मिलै चहौ रहिजाय ॥ सुनिकै बातें ये जैचँद की बोला तुरत बनाफरराय १३ क्षत्री राजा यह नहिं सोचैं मानो सत्य बचन महराज ॥ रही न देही रामचन्द्र के रहि ना गये कृष्ण यदुराज १४ यशै इकेलो जग में रहिगो गावैं तीनलोक तिहुँकाल ॥ तासों देवो सँग लाखनि को सोचो कछू नहीं नरपाल १५ सुनिकै बातें ये ऊदन की जैचँद हुकुम दिन फरमाय ॥ हुकुम पायकै महराजा को लाखनि ढिगै पहुँचो जाय १६ कही हकीकति सबजैचँदकी यहु द्यावातिको राजकुमार ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की लाखनि बेगि भयो तय्यार १७ चोबदार को फिर बुलवायो ताको दीनो हुकुम सुनाय ॥ पिटै ढिंढोरा अब कनउज माँ सजिकै फौज आयसबजाय १८ सुनिकै बातें लखराना की दौरत चोबदार चलिजाय ॥ ढोल बजाई गै कनउज माँ सब का खबरि दीन पहुँचाय १६ खबरि पायकै सब क्षत्री दल तुरतै सजन लागि सरदार ॥ हथी महाउत हाथी लैकै तिनका करनलागि तय्यार २० अंगद पंगद मकुना भौंरा हाथी झूमा दीन बिछाय ॥ चुम्बक पत्थर का हौदा धरि जामें सेल बरौंवा खाय २१

रेशम रसन सों कसिकै फिरि साँलों सीढ़ी दीन लगाय ॥ बारह कलशन की अम्बारी तिनपर धरी तुरतही जाय २१ घण्टा बांधे तिन के गर माँ क्षत्री होन लागि असवार ॥ भूरी हथिनी लखराना की सोऊ बेगि भई तय्यार २३ चन्दन सीढ़ी तामें लागी वामें लाखनि भये सवार ॥ हाथी सजिगा जब आल्हा का हाथ म लई ढाल तरवार २४ मनमाँ सुमिरयो जगदम्बा का अम्बा लाज तुम्होरे हाथ ॥ बैठ्यो हाथी पर आल्हा जब नायो रामचन्द्र को माथ २५ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे घोड़न होन लागि असवार ॥ घोड़ बेंदुला की पीढ़ी पर चढ़िगो द्यावलिकेर कुमार २६ घोड़ पपीहा मोहबे वालो तापर जोगा भयो सवार ॥ हंसामनि घोड़ा के ऊपर इन्दल आल्हा केर कुमार २७ घोड़ मनोहर पर देबा है भोगा सबजा पर असवार ॥ या बिधि सेना सब इकटौरी बारहलाख भई तय्यार २८ मारू डङ्का बाजन लागे घूमन लागे लाल निशान ॥ कऊ नालकिन कऊ पालकिन कोऊ चढ़े साँड़िया ज्वान २६ आगे हलका है हाथिन का बलका तिनके नाहिं ठिकान ॥ घण्टा बाजैं गल हाथिन के जहँ सुनिपरै बात नहिं कान ३० चिंघरति हाथी आगे चलि भे पाछे घोड़न चली कतार ॥ सरपट घोड़ा कोउ दउरावै कावा देवै कोऊ सवार ३१ कोउ मन पावै असवारे का तौ असमान पहुँचै जाय ॥ कोउ कोउ घोड़ा हंस चालपर कोउकोउमोरचालपरजाय ३२ खुर खुर खर खर कै रथ दौरैं चह चह रहीं धुरी चिल्लाय ॥ छाय अँधेरिया गै दशहू दिशि आपनपरै न हाथ दिखाय ३३

[Header] गॉजरकीलड़ाई । ३६५ ५

डगमग डगमग धरती हाली थर थर शेष गये थर्राय ॥ देव सकाने बहु डरमाने पर्वत खोह छिपाने जाय ३४ को गति बरणै बघऊदन कै आगे घोड़ नचावत जाय ॥ धीरे धीरे छत्तीस दिन में गोरख पुरै पहुँचे आय ३५ पाँच कोस जब बिरिया रहिगइ डेरा तहाँ दीन डराय ॥ ऊँची टिकुरिन तम्बू गड़िगे नीचे लगीं बाजारें आय ३६ कम्मर छोरयो राजपूतन ने झीलम बखतर डरे उतार ॥ तंग बछेड़न के छोरेंगे हाथिन उतरिपरे असवार ३७ झण्डा गड़िगे तम्बुन ढिग में ते सब आसमान फहरायँ ॥ लागि कचहरी गै लाखनि कै बीच म बैठ बनाफरराय ३८ कलम दवाइत को मँगवायो कागज तुरतै लीन उठाय ॥ लिखी हकीकत सब हिरासिंहको अब तुम खबरदार है जाय ३६ बारह बरसै पूरी हुइगईं पैसा दिह्यो न कनउज जाय ॥ अब चढ़ि आये उदयसिंह हैं साथै लिहे कनउजीराय ४० धरम छत्तिरिन के नाहीं ये धोखे डाँड़ दवावैं आय ॥ लै कै पैसा बारह बरस का ह्याँपै बेगि देउ चुकवाय ४१ नहिं भोर भवरहरे पहके फाटत सबियाँ बिरिया लेउँ लुटाय ॥ बाँधिकै मुशकें मैं हिरासिंह की कनउज तुरत देंव पहुँचाय ४२ लिखि परवाना दै धावन को ऊदन करन लाग बिश्राम ॥ लै परवाना धावन चलिभो हिरासिंह बैठरहै निजधाम ४३ लै परवाना अटि धावन गो जायकै द्वारपाल को दीन ॥ लै परवाना द्वारपाल गो हिरासिंहबाम हाथ लैलीन ४४ खोलि लिफाफा सों कागजको आँकुइ आँकु बांचिसबलीन ॥ उत्तरलिखिकै हिरासिंह राजा तुरतै द्वारपालको दीन ४५

३ आल्हखण्ड । ३६६ उत्तर लैके द्वारपाल ने दीन्ह्यो धावन हाथ गहाय ॥ चलिकै धावन तब बिरिया ते पहुँचो उदयसिंहढिग आय ४६ शीश नवायो त्यहि ऊदन को कागज दिह्यो हाथ में जाय ॥ पढ़िकै कागज को बघऊदन औ लाखनिकोदीनसुनाय ४७ सुनिकै कागज को लखराना नैना अग्निवरण हैजायँ ॥ हुकुम लगायो निज फौजन में तोपन बिरिया देव उड़ाय ४८ हुकुम पायकै लखराना को झिलमैपहिरि सिपाहिनलीन॥ धरिकै कुंडी लोहेवाली पाछे ढाल गैंड़ की कीन ४६ यक यक भाला दुइ दुइ बरछी कम्मर कसी तीन तलवारि ॥ जोड़ी तमंचा औ पिस्तौलैं बांधी छूरी और कटारि ५० धरि बंदूकन को कांधे पर क्षत्री भये बेगि तय्यार ॥ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बांके घोड़न भे असवार ५१ रणकी मौहरि बाजन लागी रणके होन लाग व्यवहार ॥ ढाढ़ी करखा बोलन लागे विप्रन कीन वेद उच्चार ५२ हिंया हकीकति ऐसी गुजरी अब बिरिया का सुनौहवाल ॥ तुरत नगड़ची को बुलवायो हिरसिंहबिरियाकोनरपाल ५३ हुकुम पायकै सो ठाकुर को तुरतै अटा भौन में जाय ॥ धर्यो नगाड़ा को सँड़ियापर डंका तुरत बजायो धाय ५४ पहिल नगाड़ा में जिनबन्दी दुसरे बांधि लीन हथियार ॥ तिसर नगाड़ा के बाजत खन क्षत्री भये सबै तय्यार ५५ हिरसिंह विरसिंह दूनों भाई हाथिन ऊपर भये सवार ॥ तोपें सजिकै आगे चलि भइँ पाछे हाथिन केर कतार ५६ चला रिसाला घोड़नवाला पाछे ऊँटन के असवार ॥ चले सिपाही त्यहिके पाछे खच्चर चलिभे डेढ़ हजार ५७