हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
१२४ हम्मीररासो आचारं भार फबंत । दोउ पच्छ सुद्ध सुभंत ॥ ७०७ ॥ बहु बंदि बिरदत जाय । बढ़ि द्वंद हर्ष सु आय१ ॥ असमॉँन लगि२ सु सीस । झलहलैं तेज सु दीस ॥ ७०८ ॥ सँग चढ्यव३ बंस छत्तीस । संग्राँम अचल सु दीस ॥ ७०९ ॥ दोहरा छंद स्वामि धर्म्म धारैं४ सदा, माया मोह बिरक्त ॥ दाँन कृपानँ उदारमति, अचल अद्रि हरभक्त ॥ ७१० ॥ साजत साज सुबाजि सजि, कीन५ बनाव सु ऐन ॥ चंचल चपल बिचित्र गति, राग बाग लखि सैन ॥ ७११ ॥ छंद हनूफाल तब६ साहनी नृप बोलि । हय सहस सोलह खोलि ॥ सब वंस उच्च सु बाज७ । लखि८ रूप मोहत राज९ ॥ ७१२ ॥ मनु 'उच्चस्त्रव कै बंधु । आबर्त्त चक्र सु कंधु ॥ तुरकी हजार स पाँच । मग चलत करत सु नाच१० ॥ ७१३ ॥ ताजी हजार सु रुद्र । गुन सील रूप समुद्र ॥ सब वीर ताजि११ कुलीन । नृप बंटि१२ बाजि सु दीन ॥७१४॥ बनि जीन जटिल जराव । नग हीर पन्न सुहाव ॥ सिर बनिय कलँगिय ऐन । मनु सजे बाजि सु मैन ॥ ७१५ ॥ गजगाह बाह अथाह । जो करैं१३ जल पर राह ॥ नग मुक्त माल सुयाल । गुम्फी१४ सु रुचि१५ बहु काल ॥ ७१६ ॥ मखमलीय सिगरे साज । मनु१६ सबै रबि को१७ बाजि ॥ जिन परिय पखरि अंग । लख भ्रमत दिट्ठि१८ अभंग ॥ ७१७ ॥ १ जाहिं आहिं, अंत्यानुप्रास । २ लग्यिय । ३ चढ़े । ४ धारहिं । ५ किन्न । ६ तब साह लिय नृप बुल्लि । ७ बाजि । ८ लख । ९ राजि । १० पच्च, नव्च अंत्यानुप्रास । ११ धीर । १२ बाँटि । १३ करहिं । १४ गूँथी । १५ सरचि । १६ सब्ब । १७ कै । १८ दीठि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो १२५ बहु सिरी सीसन सोहि । उड़ि चलैं भरि जो कोहि १ ॥ गति चलैं २ चंचल एमि । जिनि पवन पहुँचे केमि ॥ ७१८ ॥ धर धरत सुम यों मानि । मनु जरत अगि ३ सुजानि ॥ जल चलैं थल जिमि बट्ट ४ । लखि उड़ें ओघट घट्ट ५ ॥ ७१९ ॥ मृग गहत डार कमाँन । नहिं पच्छि पावहिं ६ जाँन ॥ गति पवन देखि लजात । जनु मुकुर क्रांति सगात ७ ॥ ७२० ॥ दोउ बंस सुद्ध प्रकास । बढ़ि डील पील सु जास ॥ यहिं बिधि सु लिन्ने ८ मौलि । नग हेम सर भर तौलि ॥ ७२१ ॥ कोड बने कच्छिय ऐन । सब ९ उड़ै पच्छिय गैन १० ॥ ऐराक बंस सुसील । गुन भरे झलकत डील ॥ ७२२ ॥ कंधार उपजि स सुद्ध । जनु लखत रूप सु उद्ध ॥ काबलिय डील अनूप । तिहिँ देखि ११ मोहत भूप ॥ ७२३ ॥ अरु चीन कै जु नवीन । ताजी सगुन गन लीन ॥ बर १२ बीर अनक जु डील । जो लिये साटैँ १३ पील ॥ ७२४ ॥ रँग रंग अंग बनाव । सो लिये पंक्ति १४ दाव ॥ सिरगा सुरंग समंद । संजाफ सुरख अमंद ॥ ७२५ ॥ कुम्मैत कुमद कल्याँन । मोती सु मगसी आँन ॥ सबजारु १५ सब रँग भौर । चंपा सु चीनिय चौर ॥ ७२६ ॥ अबलख सु गरड़ा रंग । लक्खी जु अतिहि १६ इमंग ॥ हंसा हरई बाजि । तीतुरिय ताँबी साजि ॥ ७२७ ॥ भिन भिन्न टुकड़ी साजि । चढ़ि चलिय रावत गाजि ॥ चहुवाँन राव हमीर । रँग रंग रचन सुधीर १७ ॥७२८॥ १ सोह, कोह अंत्यानुप्रास । २ चलहिं । ३ अग्नि । ४ बाट । ५ घाट । ६ पावैं । ७ सतात । ८ लीने । ६ सँग । १० औन, गौन, अंत्यानुप्रास । ११ दिक्ख, पिक्ख । १२ अञ्चिय (अरबिय) अनोखे डील । १३ सहैं । १४ लगे पंकज । १५ सु । १६ ऐरि । १७ रण रंग रचनं धीर । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
१२६ हम्मीररासो छंद त्रोटक गजराज सबै सत पंच सजे । गिरगात¹ मनो घन भट्ट गजे ॥ सु महावत जंत्रन मंत्र रजे । करि बंधन² पीर सुधीर कजे ॥७२९॥ परि पांय सजाय निकट्ठ खरे । पग³ खोलि जंजीर सुबीर अरे⁴ ॥ बिरझाय भले मन हत्थ कियं । असनाँन कराय सँगार लियं ॥७३०॥ तन तेल सिँदूरन चित्र कियं । सिर चंद अमंद सुरंग दियं ॥ जनु कज्जल बह्वल पावसयं । तड़िता घन⁵ चंद कि मावसयं ॥७३१॥ सजि डंबर अंबर सो लगियं । घन घोर घटा सु पटा गिजियं⁶ ॥ कसियं हवदा ध्वज धार बली । मनु पंगति पन्नग की जु चली ॥७३२॥ बर्षा घन घोर सु जानि परै । कबि रूप स्वरूप समाँन करै ॥ बहु बह्वल बारन बृंद बढ़े⁷ । ध्वज बैरख लाल निसाँन कढ़े ॥७३३॥ तड़ितां घन मैं दमकंत मनो । बगपंति सुई गजदंत भनो ॥ गरजै बहु गाज सु गाज मनं । १ गिररात । २ बंदन । ३ पदपाय सुजाय ४ खुल्हि । ५ धनु । ६ गजिय । ७ चढ़े । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो १२७ मिलियौ ससि सूरज गोन भनं ॥७३४॥ बर्षै हृद मह सुभद्द सदा । सु बहैं बहु भाँति सुभद्द¹ मुढ़ा ॥ सिर ढाल ढलक्कत एमि लसैं । ससि जीव धरासुत एक बसैं ॥७३५॥ अधधुंध चलै मग उम्मगयं । मनु काल कराल उठे जगयं ॥ चरखी बहु बाँन जु नेज लियं । धरि सेन सुअग्र² सुभाय क्रियं ॥७३६॥ पढ़ लंगद ओर जँजीर³ जुटे । नहिं खुल्लत आदुव न्याय लुटे⁴ ॥ बल रासि अमाँन⁵ सुक्रोहभरे । नन चालत⁶ मग्ग अमग्ग अरे ॥७३७॥ बहु दुंदुभि घोर सुनैं श्रम्रनं⁷ । बिरदाय सुनंत करैं गमनं ॥ सिर चौर दुरंत इसे दरसैं । तम दाबि⁸ दिनेस मरीचि लसैं ॥७३८॥ चतुरंगनि राव हमीर तनी । सब भाँतिन सोभ अनंत बनी ॥ सब रावत आय जुहार क्रियं । चहुवाँन सबै सिर भार दियं ॥७३९॥ धरि अग्र⁹ सु पिल्लन¹⁰ डिल्ल¹¹ पिले । बहु चंचल बाजिन लाज¹² खिले ॥ १ नद्द । २ अग्रग । ३ जंजिर जोर जटे । ४ छुटे । ५ अमावन । ६ चल्लत । ७ स्रवनं । ८ दब्बि । ९ अग्रग । १० पीलन । ११ डील । १२ साज । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
१२८ हम्मीररासो बहु दुंदभि बाजत¹ घोर घनं । पट गोमुख भेरि सु चंग मनं² ॥७४०॥ सहनाइय सिंधुर राग ररं । बिरदावत बंदि कबिंद भरं ॥ उमगे चहुवाँन बिकट्ट दलं । अप अप्प सु बीर कराय हलं ॥७४१॥ चहुँ ओर कितेक सु पुंगल कै । करिहा³ सजि संग चले बलकै ॥ तिनकी सज मानव चित्र रचे । धरि दूर नजदीक करै सु रचै ॥७४२॥ असवारिय सज्ज बनी तिनतैं । खबरैं बहु लेत घने बन तैँ ॥ बहु तोप जलेबिन⁴ अग्र बनी । सब सिंदुर लेप करी जु घनी ॥७४३॥ तिन ऊपर बैरख बूंद सजी । जम की मनु जीभ अनेक गजी ॥ बलि देत चलै अरिबृंद भखै । मद चक्कर मक्खर⁵ कोप धखै ॥७४४॥ हथनारि जँबूर सु म्वद्दरयं । लुटिया तुबकै बहु अहरियं ॥ धरि अग्र सबै चहुवाँन चढ़े । बहु बंदि कबिंद सुछंद पढ़े ॥७४५॥ इहिं भाँति उभै दल कोप कियं । हरखे बर बीर सुधीर हियं ॥७४६॥ १ बजत । २ हनं । ३ करहा ( ऊँट ) । ४ जलेवय, अग्ग । ५ मक्खत । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो १२९ दोहरा छंद श्रवण सुनै बर बीर रस, सिंधव राग अपार । हरखि उठे दोउ तिहिं समैं, मिलन बीर सिंगार ॥७४७॥ छंद हनूफाल मिलनै सुबीर सिंगार । दुहु हरष हिये अपार ॥ बर बीर हरखेउ अंग । उत अच्छरी¹ सु उमंग ॥७४८॥ तन उभै मज्जन कीन । भये दाँन माँनस लीन ॥ तहाँ कौच वीर नवीन । रचि बाल बसन प्रबीन ॥७४९॥ इत टोप बीरन सीस । कसि कंचुकी तिय रीस ॥ बहु अस्त्र बंधि सु बीर । अच्छरि सु भूषण हीर ॥७५०॥ इत सूर खङ्ग सु लीन । उत बाल अंजन दीन ॥ इत ढाल बीरन बंधि । ताटंक श्रवणनि संधि ॥७५१॥ सामंत बंधि कटार । अच्छरी तिलक सुधार ॥ मुख पाँन ज्वॉन सुभाव । तिय चंप दंत जराव ॥७५२॥ इत कसी सूर कमाँन । दृग बाम चमक निदाँन ॥ धरि बीर कर दस्ताँन । अच्छरिय महँदी पाँन ॥७५३॥ बरच्छी सु लीनिय सूर । बर माल कीनिय हूर ॥ सिरपेच सूर जराव । तिय सीस फूल सुहाव ॥७५४॥ इत तबल तौरा नेत । तिय हाव भाव समेत ॥ रचि सूर सेलिय अंग । अच्छरिय हार उमंग ॥७५५॥ कसि तून बीर स जंग । अच्छरिय नैन अपंग ॥ कर केहरी नख सूर । उत पानि पानि सहूर ॥७५६॥ लिय बीर तुलसिय माल । बर माल लीन स बाल ॥ कसि सूर मोजा पाँय । नूपूर सु बाल सुहाय ॥७५७॥ कसि सूर बाजि सु तंग । बिम्माँन बाल उमंग ॥ इहि भाँति सूर सबाल । उतकंठ मिलन तिकाल ॥७५८॥ १ अपछरी । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
१३० हम्मीररासो दोहरा छंद उमगि उमगि हम्मीर भट, चले सकल करि चाव । च्यारि अनी चतुरंग की, चढ़े संभरी राव ॥७५९॥ उतै साह कै मीर भर, खाँन ओर उमराव । रणतमँवर छिक्किय १ हरषि, नाना करिव बनाव ॥७६०॥ च्यारि दरा घाटी जिती, कीने घाटारोह । कालं रूप कोपे २ तुरक, बाँन बिकट जंसोह ॥७६१॥ भुजंगप्रयात छंद चढ़े बीर कोपे दुहूँ ओर धाए । मनो काल कै दूत अद्भुत्त आए ॥ इतै राव हम्मीर कै बीर छुट्टे । उतै मीर धीरं गहीरं सु जुट्टे ॥७६२॥ उड़ी रैन सैनं न दीखंत भाँनं । दुहूँ ओर घोरं सु बज्जे निसाँनं ॥ छुटै२ तोप बाँनं दुहूँ ओर जोरं । धरा अंबरं बीच मच्चे सु सोरं ॥७६३॥ उठी ज्वाल माला धरा पै उपट्टे । धुवाँ घोर घोरं सु जोरं प्रगट्टे ॥ मनो दोय सिंधू तजैं आय वेला । प्रलेकाल कै काल कीनो समेला ॥७६४॥ 'दुहूँ ओर घोरं सु गोलं बरक्खैं । मनो मोघ ३ बोला अतोलं ४ करक्खैं ॥ उड़ै अग्रपब्बय ढहैं गढ्ढ फोटं । परैं गज्ज बाजं धरा धूरि लोटं ॥७६५॥ प्रलै पावकं जानि उट्ठी लपटैं । १ छेकिय, छिक्यउ । २ कुप्पिय । ३ मेघ । ४ अतुल्लं । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो १३१ जरं उज्झरं सूझरं१ यौं झपहैं ॥ लगे गोल मैं गोल गोला सु गज्जैं । भए वार पारं उपम्मा सु रज्जै ॥७६६॥ मनो स्याम कै त्रास है वारपारं२ । चहूँ ओर राजंत है चारु बारं ॥ रहे गिद्ध तामैं घने बैठि अद्रं । करैं ध्याँन बैठे गुफा मैं मुनिंद्रं ॥७६७॥ उड़ै साथि गोलाँन कै बीर ऐसैं । मनो फाटिका३ तैं उड़ै जट्ट जैसेँ ॥ चलै तोप जोरं करैं सोर भारी । दरै बिज्जुरी सी घने४ एक बारी ॥७६८॥ छुटै एक बारैं५ घनी चादरं६ यौं । मनो सार भूजै बनै यों घनै यौं ॥ बँदूकैं हजारं चलैं एम्नि राजैं । मनो मेघ गोला परैं भूमि गाजैं ॥७६९॥ चलैं बाँन बेगं मचै सोर भारी । मनो आतसंबाज खेलंन कारी ॥ छुटैं बाँन कम्माँन ज्यौं मेघ धारा७ । लगैं बाज गज्जं हुवै वारपारा ॥७७०॥ मनो नाग छोना उड़ैं होड मंडी । डसैं अंग अंग करैं८ सेन खंडी ॥ बहैं तोमरं सेल ओ सक्ति ऐनं । करैं वार पारं बहैं९ उच्च वैनं ॥७७१॥ वहैं खङ्ग१० बेहद्द देखंत सूरं । १ सुज्झरं । २ आरपारं । ३ फाटिकं । ४ घनी । ५ बारं । ६ चद्दरै । ७ धारं, पारं अंत्यानुप्रास। ८ अंरी सेन । ९ बकैं । १० खग्ग । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
१३२ हम्मीररासो करैं दोय टूकं समुक्कै१ समूरं ॥ बहैं तेग कंधं परैं गज्जराजं । लगे आयुधं यों झरं सर्व साजं ॥७७२। कटैं कंगालं अंग ओ जीन वाजी । तबै सूर२ रीझैं करैं मालसाजी ॥ कटारी बहैं वारपारं निहारैं३ । मनो स्याम उर माँझ कौस्तुभ सम्हारैं ॥७७३॥ कहूँ बंजरं पिंजरं बेगि फारं । मनो हाथ वाला अहारी निकारं ॥ छुरी हथ्थ जोरं करैं सूर हाँकैं । कहूँ मल्ल युद्धं करैं बीर खाँकैं ॥७७४॥ परैं सीस भूमैँ४ उठैं रुंढ५ घोरं । दुँहू सेन देखंत कौतुक्क जोरं ॥ किती अंत उरझंत लटकंत६ भूमैँ । किते घायलं घाव लग्गे सु भूमैँ७ ॥७७५॥ भरे योगनी८ पत्र पीवंत पूरं । परैं ज्यों मलेच्छं बरैं आय हूरं ॥ किलक्कैं जु काली हँसैं बार बारं । करैं भैरवं घोर सोरं अपारं ॥७७६॥ भगी साह की सेन देखंत दोई । कहै बैन कोपं बकं सीस सोई ॥ किते भागि जैहो अरे मूढ़ आजं । जिते९ बीर चहुवाँन हम्मीर गाजं ॥७७७॥ १ टूकैं सु भूकैं, दुक्कं सु झुक्कं । २ शंभु रीझैं । ३ बिहारैं । ४ भुम्मी । ५ सीस । ६ लरझंत । ७ घूमैं । ८ जुग्गनी । ६ जितैं चाहुवाँनं हमीरं सुगाजं । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो १३३ भ्रम्यौ साह संगं तज्यौ जंग भारी । कहै साह उज्जीर सौं जो हँकारी ॥७७८॥ दोहरा छंद कहा राव हम्मीर कै, सूर वीर बलवाँन । सबै १ सु खाय हमारिये, जग समै प्रिय प्राँन ॥७७९॥ छप्पय छंद कहै साह उज्जीर सुनो आपन २ मन लाई । जिते राव कै बीर सबै ३ छत्री प्रन ४ पाई ॥ लरत भिरत नहिं टरत करत अद्भुत रस सीतो ५ । करत जंग अनभंग अंग छिन भंग है नीतो ६ ॥ नहिं सहत सार आपण ७ संपन ८ सबै मीर उमराव मर । किज्जे सु कौन मत तंत अब कहो बुद्धि आपन २ समर ॥७८०॥ कहै उजीर १० कर जोरि सुनो हजरत यह किज्जे । च्यारि सेन चतुरंग संग नामी कर ११ दिज्जे ॥ एक १२ सेन दिवान्नि १३ एक बकसी भड़ वंके । एक १४ गोल मोहिं जानि आप १५ एकन कर हंके ॥ यह भाँति सेन चतुरंग कै अनी च्यारि करि जुट्टिए । हम्मीर राव चहुवाँन १६ तैं फते आप लहिं हट्टिए १७ ॥७८१॥ दोहरा छंद करि करि मंत्र उजीर १८ तब, चढ़े संग लै मीर । च्यारि अनी करि साहि दल, जुरे जंग सब १९ बीर ॥७८२॥
१ सर्वसु । २ अप्पन । ३ धर्म । ४ पन । ५ जीते, जित्ते, सीत्तो । ६ नित्ते, जित्तो । ७ अप्पन । ८ सयन । ६ अप्पन । १० कह वजीर । ११ नर । १२ इक्का । १३ दीवाण, दिब्वाँन । १४ इक । १५ अप्पन इकन करि हंक्के । १६ के । १७ खुट्टिए । १८ वजीर । १६ फिरि ।
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१३४ हम्मीररासो त्रिभंगी छंद करि मंत्र असेसं सूर सु देसं, बंके बैसं सज्जायं । हय गय १ चढ़ि बीरं फिरे सुमीरं, धरि धरि धीरं लज्जायं ॥ गजराजन संज्जे अग्गौ रज्जैं, बीर गज्जे लखि लज्जैं । नीसाँन २ फरकैकैं धीर धरक्कैं, हर हर वक्कैं गलगज्जैं ॥७८३॥ दोउ ३ओर उमग्गै ४ समर सु रड्डु ५, बढ़ि बढ़ि तडैं नख ६ खडैं । बहु तोपन छुट्टैं बीर अहुट्टैं, फिरि फिरि जुट्टैं वल चंडैं ॥ बाजे बहु बज्जैं जनु घनु गज्जैं, सूर समज्जैं वल रज्जैं । पद रुत्थ ७ पतालं अरि उर सालं, उट्टत ८ भालं रण सज्जैं ॥७८४॥ छुट्टैं बहु बाँनं संधि ९ कमाँनं, अरि उर प्राँनं बहु कडढैं । लग्गैं उर सेलं अरि दल पेलं, बिग्रह भेलं बल ठड्ढैं ॥ किरवाँन दुधारं हय गय पारं, सूर सँहारं उर फारं । करि जोर कुठारं बहुत १० करारं, भिरत जुझार रनभार ॥७८५॥ गिद्धिय ११पल भक्खैं रत १२बहु चक्खैं, जंबू अक्खैं हिय हर्षै । ... ... ... ... बहु पत्र भरावैं मिलि मिलि गावैं, धरि धरि धावैं मन भावैं । पत्नअस्ति चचोरैं बसन निचोरैं, लुब्धि टटोरैं गुन गावैं ॥७८६॥ दोहरा छंद यहिं बिधि दुहुँ दल आहरे, भिरे १३ दोउ दल ऐन । रहे अहल चहुवाँन हू, खाँन सकल हठि सैन ॥७८७॥ अबदल मीर जु साहि कै, परे खेत मैं १४ धाय । पफरै राव हमीर कौ, पंकरै १५ अस पति पाय ॥७८८॥ ल्याऊँ गहि हम्मीर कौ, रीझ दिजिए मोहिं । १ गज । २ निस्साँन । ३ दुहुँ । ४ उमड्डुँ । ५ डट्टै । ६ तंडैंतन खंडैं । ७ रुथ, रुप्पि । ८ उद्धत । ६ संगि । १० बहुत । ११ गिद्धनि । १२ रत्तहु । १३ मिरंग, मिरिउ । १४ पै । १५ परसै । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो १३५ जितनो हिंदू को वतन, पाऊँ अब कर जोहिं ॥७८६॥ बीस सहस अबदल पिले, इत हमीर - कै - वीर । आप¹आप जय स्वामि की, चाहत मंगल धीर ॥७९०॥ छंद रसवाल मीर पिल्ले तवै, वीर अबदुल जबै। कहै बैन वाहं, सुनो आप साहं ॥७९१॥ गहूँ राव ल्याऊँ, रणत्थंभ पाऊँ। कमाँनस्सुग्रीवं, गरै डारि जीवं ॥७९२॥ लगूँ साह पगैं, उठै कोपि जग्गैं। हजारं सु बीसं, नमाए सु सीसं ॥७९३॥ गजं साज² तीसं, करै जीव रीसं। उतैं राव कोपे,³ पिले बीर ओपे ७९४॥ उठी बंक मुच्छं, लगी जाय चच्छं। मनो बीर मग्गै, अकासं सु लग्गै ॥७९५॥ मिले बीर दोऊ, करै जोर सोऊ। भिरै गब्ज गब्जं, बजे बीर बज्बं ॥७९६॥ तुरंगं तुरंगं, मचे जोर जंगं। पयहं पयहं, बकै कोप चहं ॥७९७॥ भभक्कंत बाँनं, उड़ै लग्गि ज्वानं। लगै तेग सीसं, उभै फाँक दीसं ॥७९८॥ लगै जम्म दड्ढं, करै पाँन गढ्ढं४। परी लुत्थि जुत्थं, करी जो अकत्थं ॥७९९॥ करी जूह लोटैं, पबै जानि कोटैं५। तुरंगं धरन्नी, सु लड्ढै बरन्नी ॥८००॥ १ अप्प अप्प । २ सज । ३ कुप्पे । ४ दाढं, गाढं अंत्यानुप्रास । ५ लुट्टैं, कुट्टैं । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
१३६ हम्मीररासो नच्चैं रुंड' बीर', धरन्नी सरीर' २ । सिर' हक्क³ मारैं, धरैं अत्र धारैं ॥८०१॥ उरब्भंत अंतं, मनो ग्राह तंतं । गह्रैं अंत चिल्ल़ी४, अकासं संमिल्ली ॥८०२॥ मनो बाल मड्डी५, उड़ावंत गुड्डी । उड़ै ६ स्रोण छिच्छं, फुँवारे ७ सु अच्छं ॥८०३॥ बहै स्रोण नद्दं, मनो नीर भद्दं । भरै पग्ग हत्थं, तरब्बूज मत्थं ॥८०४॥ पलक्की चमक्की, उठैं बीर नच्ची । कियौ अट्टहासं, सुकाली प्रकासं ॥८०५॥ जहाँ चेत्रपालं, गुहैं संभु मालं । भखै गिद्ध बोटी, फटै तासु पोटी ॥८०६॥ षट सहस' सूरं, वरे जाय हूरं । गजं तीस पारे, पहारं करारे ॥८०७॥ सतं दोय बाजी, परे खेत साजी । तहाँ पद्म सैनं, रहे देखि८ नैनं ॥८०८॥ तबै सेख सीसं, नवाए सरीसं । हमीरं सुरावं, कहैं बैन चावं ॥८०९॥ दुहुँ सैन मध्ये, महिम्मा सु बध्ये । कहैं उच्च बाचं, सुनो राव साचं ॥८१०॥ लखो हत्थ मेरे, बड़े बैन तेरे । सुनो साहि बैनं, लखो अप्प९ नैनं ॥८११॥ खरो मैं जु खूनी, रहे क्यों ज मुनी । गहो क्यों न अब्बं, कहै बैन तब्बं ॥८१२॥ १ रुद्र । २ सुजीरं । ३ हाका । ४ चिल्हों, मिल्ही-अंत्यानुप्रास । ५ ठड्डी । ६ उडैं । ७ फुहरैं, फुहारैं । ८ दिक्ख, पिक्ख । ९ आप । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो १३७ यहीं सेस सीसं, रह्यौ मैं जु दीसं । करो सत्य वाचं, ततो आप साचं ॥८१३॥ तबै णतसाहं, खुरासाँन नाहं । करे¹ कोप पिल्लं, तहाँ सेख मिल्लं ॥८१४॥ कहै साह बैनं, सुनो सर्व सैनं² । गहै सेख ल्यावै, इतो हस्म पावै ॥८१५॥ जु बारा हजारं, मनं³ सव्व भारं । नोन्नति निसाँनं, अरु तेग माँनं ॥८१६॥ सुने बैन ऐसे, खुरासाँन रेमे । हजारं सतं स, निवाए⁴ सु सीसं ॥८१७॥ सदक्की जवाँनं, पिले सेख प.नं । तबै सेख धाए, राव कौ सीस नाए ॥८१८॥ दोहरा छंद करि सलाँम हम्मीर कौं, सेख लई बड़ बग्ग । दुहूँ⁵ सेन देखत⁶ नयन, रिस करि कढ्ढे⁷ खग्ग ॥८१९॥ चौपाई छंद कहे साहि सुनि सदक़ी बैनं । यह कुट्टन⁸ कौ गहो सु ऐनं ॥ जीवत पकरि याहिं अब लीजै⁹ । मनसव द्वादस सहस करीजै१० ॥८२०॥ सहकि¹¹ संग मीर खुरसानी । तीस सहस चढ़ि चले अमानी ॥ गहन सेख महिमा कै काजै । १ करी कुप्पि । २ एनं । ३ मनो । ४ नमाए । ५ दोउ । ६ दिक्खत, पिक्खत । ७ कड्डिय, कढ्ढे । ८ कुट्टम । ६ लिजिंय । १० करिजिय, झुकिजिय । ११ सदकी । CC0 Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri ९४
१३८ .हम्मीररासो कुप्पिय १ मीर खेत चढ़ि बाजै ॥८२१॥ इतै सुसेख राव पद बंदे । गहै तेग मन माहिं अनंदे ॥ इतै सेख सदको उत आए । आप२ आप जय सद् सुनाए ॥८२२॥ कहै ३ सदकि सुनि साह सुजाँनं । ठठा भखर बसि करिए पाँनं ॥ कहा सेख हम्मीर सु रावं । उठे युद्ध कौं करि जिय चावं ॥८२३॥ छप्पय छंद जुटे बीर दुहुँ जंग अंग अनभंग महाबल । चढ़े जाँन आमाँन बढ़े निस्साँन ४ बरहल ॥ करि कमाँन करि पाँन काँन लौं करिखह रक्खे । धरि नराच गुन राखि धाव करि वेगि बरक्खे ॥ निज संग बीर सत पंचजुत सेख भेखरौ यह धरिव । उत खुरासाँन षट सहस ल सदकी सद हांकी करिव ॥८२४॥ तेग बेग बहु कढ़ी मनो पावकक लपट्यो । करी बाज नर जुद्द ५ कटे सिर पात्र उपट्टा ॥ परै धरनि धर नचै उदर काट अंत भभक्कै । चली रक्त धर धार लुत्थ परि लुत्थ धधक्कै ॥ षट सहस खिसे षुरसाँन दल लिय निसाँन बानै सुबर । किए नजर राव हम्मीर कै फबी फते महिमा समर ॥८२५॥ आइ सेख सिर नाय राव कूं बचन सुनाए । धनि छत्री चहुवाँन सरन पन जग जस छाए ॥ १ कोपे । २ अप्प अप्प । ३ कहै सदक्की साह सुजाँनं । ४ नीसाँन । ५ जुष्टि कट्टि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो १३६ तेज राज धन धाँम तात तिय हठ. नहिं छंडे । राखि १ धर्म्म दृढ़ सत्य कीर्ति जस जुग जुग मंडे ॥ अरि नीर नैन महिमा कहै अब जननी कब जन्म दे । जब मिलों राव हम्मीर तुम बहुरि समै हैंहै कदे ॥८२६॥ कहै राव हम्मीर धीर नहिं हीन उचारो । सुर न करें सनेह देह छिन भंग बिचारो ॥ बिछुरन मिलन संजोग आदि ऐसी चलि आई । ज्यों जीवन २ त्यों मरन सकल ३ वेदन यह ४ गाई ॥ कीजे ५ न भम ६ अनभंग चित मिलैं सूर कै लाक सब । हम तुम जु साह बहुरों ७ तथा होहि एक ८ तन तजि सुअब ॥८२७॥ तज्जथ स्व.रथ लोभ माह काहू नहिं करिये । देह घरे परऑँन ९ स्वामि का १० कारज सरिए ॥ को इतसों ले जात कहा उतसों ले आयौ । रहे अमर कीरत्ति पाप नरदेह सु गायौ ॥ सुनि सेख देख थिर नाहि कछु तन मट्टी मिलि जाइये । का सोच मरन जीवन तना यह लाभ सुजस सों पाइये ॥८२८॥ सुनि हमीर कै बचन साह पर सनमुख धाए । मीर गाभरू बीर आँनि तिन ११ सास नवाए ॥ अलादीन पतिसाह इतै सिर ऊपरि १२ राजै । तुम सिर राव हमीर स्वामि आपन १३ कुल लाजै ॥ नन तजो नोन की सरत दोउ यह तन तिल तिल खंडिये । मिलिये जु भिस्ति १४ मैं जाय अब धर्म न अपना छाडये ॥८२९॥ हँसि अलावदी साह सेख कौ बचन सुनाए १५ । १ रखि । २ ज्यामन, जाँमन । ३ चऊ । ४ मैं, बिधि । ५ किज्जे । ६ भंग । ७ गवरु, गमह । ८ इकक । ६ परमाँन । १० जो । ११ रिस । १२ उप्पर । १३ अप्पनि । १४ बिहस्त । १५ सुणांए । ·CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
१४० हम्मीररासो दिली छाड़ि करि सीस बहुरि मुझकौ नहिं¹ नाए॥ मिलो मुझे तजि रोस हुरम मैं तुमकौ दीनी। अर गौरखपुर देस देहुँ तुम कौ सत चीन्ही²॥ मुसकाय साहि महिमा कहै³ बचन यादि वै किजिये। जननी जनमे फिरि आनि भव जबै मिलन गन लिजिये॥८३०॥ दोहरा छंद जब⁴ जननी जनमै बहुड़ि, धरूँ देह कहुँ आनि । तऊ न तजौं हमीर संग, सत्य बचन मम जानि ॥८३१॥ तब सु राव•हम्मीर सुनि, कीनी⁵ मदति सु सेख। हजगति महिमा साह कौ, बात लगावत देखि । ८३२॥ कहै हमीर यह बचन पर, गही साह सौं तेग⁶ । लोभ न करिये⁷ जीव का, गहो⁸ साह सो बेग ॥८३३॥ चौपाई छंद कहै मीर गभरू ये बातैं । गहे⁹ सार नहिं करिये घातैं ॥ हुकम धनी कै कौ प्रतिपालो । आइ अदङ्गि सीस पर चालो१० ॥८३४॥ सुनि गभरू कै बचन सुभाए । महिमा फूलि खेत मैं आए ॥ सनमुख सार सम्हाय सु बढ़ढ़ै । माया¹¹ मोह त्यागि खग कढ़ढ़ै ॥८३५॥ ———————————————————————————————— १ न नवाए। २ अरु गौरखपुर औधि देस दीनो (दिन्नो) सति चीन्हीं (चिन्हीं) । ३ कही । ४ अब । ५ कीन्ही । ६ टेक। ७ किजिय । ८ तो रहै हमारी टेक । ६ गहौ सार रन कौ रचि घातैं । १० प्रतिपालहु, भालहु अत्यानुप्रास । ११ महिमा । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
· हम्मीररासो १४१ दोहा छंद दोऊ बंधु रिसाइ कै, लई बाग १ इमि संग । उतरि खेत मैं निजि उभै, कीनौ हरष उमंग ॥८३६॥ मीर गाभरू पाँय परि, हुकम माँगि कर जोरि। स्वामि काज तन खंडिये, लगै २ न कबहुँ खोरि ॥८३७॥ हनूफाल छंद मिलि बंधु दोऊ ध्याय । बहु हरष कीन ३ सुभाय । अब स्वामि धर्म सुधारि । दोउ उठे बोर हँकारि ॥८३८॥ असमाँन ४ लग्गिय सीस । मनो उभै काल स दीस ॥ इत कोप महिमा कीन्ह । हम्मीर नौन सु चीन्ह ॥८३९॥ उत मीर गभरू आय । मिलि सेख कै परि पाँय ॥ फर तेग बेग समाहि । रहे दुहूँ सेन सचाहिं ॥८४०॥ कम्माँन लीन सु हत्थ । जनु ५ सार कार सुपत्थ ॥ धरि स्वामि काज ६ समत्थ । दोउ ७ उभै जुद्ध सपत्थ । ८४१॥ दुहुँ द्वंद जुद्ध सुकीन । मनु जुटे मल्ल नवीन ॥ तरवारि बज्जिय ताय । मनु लगी ग्रीषम लाय ॥८४२॥ कटि चरण सीसरु हत्थ । परि लुत्थ जुत्थ सु तत्थ ॥ घमसाँन थाँन सु धीर । घर धरण(नि) खेलत बीर ॥८४३॥ गजराज लुट्टत भुम्मि । बहु तुरँग परत सु झुम्मि ॥ बिव बीर बज्जिय सार । तरवारि बरसहु ८ धार ॥८४४॥ दोउ भ्रात स्वामि सकाँम । जग मै किये अति नाँम ॥ दोहुँ बीर देखत हूर । चढ़ि गए मुख अति नूर ॥
१ बग्ग । २ लषकत कबहुँ खोरि । ३ कियउ । ४ असमाँन सीख ( मत्थ ) सुलग्ग ( लगि ) । मनु उभै काल सुजग्ग । ५ बर खार धार सुपत्थ । ६ कज धर्म । ७ मनु उभ्यो । ८ फरसहु । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
१४२ हम्मीररासो दल दोय दिक्खत बीर । पहुँचे बिहस्त गहीर ॥८४५॥ दोहरा छंद तिल तिल भे १ अँग दोहुँन कै, हने बाजि गजराज । हजरत राव हमीर कै, सबै सँवारे काज ॥ ८४६ ॥ मुसलमाँन हिंदवाँन २ कौ, चले सेख सिर नाय । चढ़ि बिमाँन दोऊ तहाँ, बिहस्त पहुँचे जाय ॥८४७॥ छप्पय छंद कहै साह मुख बचन ३ सुनो हम्मीर महाबल । अब न गहो तुम सार फिरै हम सकल दिली दल ॥ तुम्हैं माफ तकसीर राज रणथंभ करो थिर । हम तुम बीच कुराँन मुहिम नहिं करो दिलीसुर ॥ परगनें पाँच ४ दीन्हें अवर रणतभँवर भुगतो सदा । जब लग सुराज हमरो रहै तुम सु राज राजो तदा ॥ ८४८॥ चौपाई छंद कहै राव हम्मीर सु बानी । सुनि दिल्लीस सत्य जिय जानी ॥ जाकी अदति होय किमि मिट्टै । नर तैं होनहार किमि घट्टै ॥ ८४९ ॥ तुम्हरो दयो राज किन पायौ । तुम्ह कौ राज कहो किन धायौ ॥ बेर बेर कहा मुखै ५ उचारो । कोटि म्याँनपन क्यों न बिचारो ॥८५० ॥ कीरति अमर , अमर नहिं कोई । १ भए अंग । २ हितवाँन । ३ बच्न, बैन । ४ पंच दिन्निय । ५ मुख्ख । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो · १४३ दुर्योधन दसकंध सु जोई¹ ॥ काको गढ़ काकी यह दिल्लो । हरि की दई हमें तुम मिल्ली ॥८५१॥ हम तुम अंस एक उपजाए ॥ आदि पद्म रिषि अंग उपाए ॥ देव दोष उर घर भए न्यारे । हम हिंदु तुम यवन हँकारे ॥८५२॥ तजिये भोग भूमि कै सबहीं । चलिये सुरपुर बसिये अबहीं ॥ सग हमारो पहुँच्यो जाई । हम तुम रहें सबहिं पहुँचाई ॥८५३॥ गहो हथ्यार राज सब इंडो । राखो जस तन खंडि बिहंडो ॥ अबै चालि सुरपुर सुख मंडो मृत्युलोक² कै भोग सु इंडो ॥८५४॥ छंद त्रोटक यह बात³ कही चहुवाँन तबै । सुनि साह सबै भर पेलि जबै ॥ करि साज सबै रण मंडि महा । तिन भारथ पारथ जुद्ध सुहा ॥८५५॥ दल संग चढ़े सब सूर असी । सब तोप सु बाँन कमाँन कसी ॥ गजराज अनेक बनाय घने । मनो पावस बहल मेघ तने ॥८५६॥ हय कंद अमंद सु पोन मनो । १ कोड, जोड अंत्यानुप्रास । २ मर्त्यलोक । ३ बत्त ।