संग्रह पर लौटें

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छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
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❦ ꕥ ❦
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श्रीहरिः
मन्त्राणां वर्णानुक्रमणिका
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| अग्निहिंङ्कारो वायुः | २ | २० | १ | २०२ |
| अग्निष्टे पादं वक्तेति | ४ | ६ | १ | ३८९ |
| अजा हिङ्कारोऽवयः | २ | १८ | १ | १९९ |
| अतो यान्यन्यानि | १ | ३ | ५ | ६९ |
| अत्र यजमानः परस्तादायुषः | २ | २४ | ६ | २३७ |
| ,, ,, | २ | २४ | १० | २३९ |
| अत्स्यन्नं पश्यसि प्रियम् | ५ | १२ | २ | ५४७ |
| ,, ,, | ५ | १४ | २ | ५५२ |
| ,, ,, | ५ | १५ | २ | ५५३ |
| ,, ,, | ५ | १६ | २ | ५५५ |
| ,, ,, | ५ | १७ | २ | ५५७ |
| अथ खलु य उद्गीथः | १ | ५ | १ | ८३ |
| ,, ,, | १ | ५ | ५ | ८७ |
| अथ खलु व्यानमेवोद्गीथम् | १ | ३ | ३ | ६७ |
| अथ खलूद्गीथाक्षराणि | १ | ३ | ६ | ७० |
| अथ खल्वमुमादित्यम् | २ | ९ | १ | १७३ |
| अथ खल्वात्मसंमितमति० | २ | १० | १ | १८१ |
| अथ खल्वाशीः | १ | ३ | ८ | ७३ |
| अथ खल्वेतयर्चा पच्छः | ५ | २ | ७ | ४९८ |
| अथ जुहोति नमः | २ | २४ | १४ | २४० |
| अथ जुहोति नमो वायवे | २ | २४ | ९ | २३८ |
| अथ जुहोति नमोऽग्नये | २ | २४ | ५ | २३६ |
| अथ तत ऊर्ध्वः | ३ | ११ | १ | २७२ |
| अथ प्रतिसृप्याञ्जलौ | ५ | २ | ६ | ४६७ |
| अथ य आत्मा स सेतुः | ८ | ४ | १ | ८३६ |
| अथ य इमे ग्रामे | ५ | १० | ३ | ५०९ |
पृष्ठ 954स्थायी लिंक
( ९५० )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| अथ य एतदेवम् | ५ | २४ | २ | ५७० |
| अथ य एतदेवं विद्वान् | १ | ७ | ७ | १०३ |
| अथ य एष सम्प्रसादः | ८ | ३ | ४ | ८३१ |
| अथ य एषोऽन्तराक्षिणि | १ | ७ | ५ | १०० |
| अथ यच्चतुर्थममृतम् | ३ | ९ | १ | २६८ |
| अथ यत्तदजायत | ३ | १९ | ३ | ३४८ |
| अथ यत्तपो दानम् | ३ | १७ | ४ | ३३१ |
| अथ यत्तृतीयममृतम् | ३ | ८ | १ | २६४ |
| अथ यत्पञ्चमममृतम् | ३ | १० | १ | २७० |
| अथ यत्प्रथमास्तमिते | २ | ९ | ८ | १७९ |
| अथ यत्प्रथमोदिते | २ | ९ | ३ | १७५ |
| अथ यत्रैतत्पुरुषः | ६ | ८ | ५ | ६५४ |
| अथ यत्रैतदबलिमानम् | ८ | ६ | ४ | ८६० |
| अथ यत्रैतदस्माच्छरीराद् | ८ | ६ | ५ | ८६१ |
| अथ यत्रैतदाकाशम् | ८ | १२ | ४ | ९३१ |
| अथ यत्रोपाकृते | ४ | १६ | ४ | ४३२ |
| अथ यत्सङ्गववेलायाम् | २ | ९ | ४ | १७६ |
| अथ यत्सम्प्रति मध्यन्दिने | २ | ९ | ५ | १७७ |
| अथ यत्सत्त्रायणमित्याचक्षते | ८ | ५ | २ | ८४३ |
| अथ यदतः परो दिवः | ३ | १३ | ७ | २९८ |
| अथ यदनाशकायनमित्याचक्षते | ८ | ५ | ३ | ८४४ |
| अथ यदवोचं भुवः | ३ | १५ | ६ | ३२१ |
| अथ यदवोचं भूः | ३ | १५ | ५ | ३२० |
| अथ यदवोचं स्वः | ३ | १५ | ७ | ३२१ |
| अथ यदश्नाति | ३ | १७ | २ | ३३० |
| अथ यदास्य वाङ्मनसि | ६ | १५ | २ | ६९५ |
| अथ यदि गन्धमाल्यलोककामः | ८ | २ | ६ | ८२३ |
| अथ यदि गीतवादित्रलोककामः | ८ | २ | ८ | ८२३ |
| अथ यदि तस्याकर्ता | ६ | १६ | २ | ७०० |
| अथ यदिदमस्मिन्ब्रह्मपुरे | ८ | १ | १ | ८०५ |
| अथ यदि भ्रातृलोककामः | ८ | २ | ३ | ८२२ |
| अथ यदि महज्जिगमिषेद् | ५ | २ | ४ | ४६४ |
पृष्ठ 955स्थायी लिंक
( ९५१ )
| मंत्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठं | |
|---|---|---|---|---|---|
| अथ यदि मातृलोककामः | .... | ८ | २ | २ | ८२२ |
| अथ यदि यजुष्टो रिष्येत् | .... | ४ | १७ | ५ | ४३६ |
| अथ यदि सखिलोककामः | .... | ८ | २ | ५ | ८२३ |
| अथ यदि सामतो रिष्येत् | .... | ४ | १७ | ६ | ४३७ |
| अथ यदि स्त्रीलोककामः | .... | ८ | २ | ९ | ८२४ |
| अथ यदि स्वसृलोककामः | ... | ८ | २ | ४ | ८२२ |
| अथ यदु चैवाहिश्चोल्ब्यम् | ... | ४ | १५ | ५ | ४२३ |
| अथ यदूर्ध्वं मध्यन्दिनात् | ... | २ | ९ | ६ | १७८ |
| अथ यदूर्ध्वमपराह्नात् | ... | २ | ९ | ७ | १७९ |
| अथ यदेतदक्षणः शुक्लम् | ... | १ | ७ | ४ | ९९ |
| अथ यदेतदादित्यस्य | ... | १ | ६ | ५ | ९२ |
| अथ यदेवैतदादित्यस्य | .... | १ | ६ | ६ | ९३ |
| अथ यद्द्वितीयममृतम् | .... | ३ | ७ | १ | २६२ |
| अथ यद्धसति | ... | ३ | १७ | ३ | ३३१ |
| अथ यद्यज्ञ इत्याचक्षते | .... | ८ | ५ | १ | ८४२ |
| अथ यद्यन्नपानलोककामः | .... | ८ | २ | ७ | ८२३ |
| अथ यद्यप्येनानुत्क्रान्त० | .... | ७ | १५ | ३ | ७७१ |
| अथ यद्येनमूष्मसूपाल्भेत | ... | २ | २२ | ४ | २१२ |
| अथ या एता हृदयस्य | .... | ८ | ६ | १ | ८५४ |
| अथ यां चतुर्थीम् | ... | ५ | २२ | १ | ५६७ |
| अथ यां तृतीयाम् | .... | ५ | २१ | १ | ५६६ |
| अथ यां द्वितीयाम् | .... | ५ | २० | १ | ५६५ |
| अथ यां पञ्चमीम् | .... | ५ | २३ | १ | ५६८ |
| अथ यानि चतुश्चत्वारिँशत् | ... | ३ | १६ | ३ | ३२६ |
| अथ यान्यष्टाचत्वारिँशत् | ... | ३ | १६ | ५ | ३२७ |
| अथ ये चास्येह | .... | ८ | ३ | २ | ८२७ |
| अथ येऽस्य दक्षिणा रश्मयः | ... | ३ | २ | १ | २४९ |
| अथ येऽस्य प्रत्यञ्चः | ... | ३ | ३ | १ | २५१ |
| अथ येऽस्योदञ्चः | .... | ३ | ४ | १ | २५२ |
| अथ येऽस्योर्ध्वा रश्मयः | .... | ३ | ५ | १ | २५५ |
| अथ यो वेदेदं मन्वानीति | .... | ८ | १२ | ५ | ९३३ |
| अथ योऽस्य दक्षिणः | .... | ३ | १३ | २ | २९१ |
पृष्ठ 956स्थायी लिंक
( १५२ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | पृष्ठ | ||
|---|---|---|---|---|---|
| अथ योऽस्य प्रत्यङ् सुषिः | ... | ३ | १३ | ३ | २९३ |
| अथ योऽस्योदङ् सुषिः | ... | ३ | १३ | ४ | २९४ |
| अथ योऽस्योर्ध्वः सुषिः | .... | ३ | १३ | ५ | २९५ |
| अथ सप्तविधस्य वाचि | ... | २ | ८ | १ | १७० |
| अथ ह हँसा निशायाम् | .... | ४ | १ | २ | ३५४ |
| अथ ह चक्षुरुद्गीथम् | .... | १ | २ | ४ | ५२ |
| अथ ह प्राण उच्चिक्रमिषन् | .... | ५ | १ | १२ | ४५१ |
| अथ ह प्राणा अहँश्रेयसि | .... | ५ | १ | ६ | ४४६ |
| अथ ह मन उद्गीथम् | .... | १ | २ | ६ | ५३ |
| अथ ह य एतानेवम् | ... | ५ | १० | १० | ५३५ |
| अथ ह य एवायं मुख्यः | .... | १ | २ | ७ | ५४ |
| अथ ह वाचमुद्गीथम् | .... | १ | २ | ३ | ५२ |
| अथ ह शौनकं च | ... | ४ | ३ | ५ | ३७२ |
| अथ ह श्रोत्रमुद्गीथम् | .... | १ | २ | ५ | ५३ |
| अथ हाग्नयः समूदिरे | ... | ४ | १० | ४ | ४०३ |
| अथ हेन्द्रोऽप्राप्यैव | .... | ८ | ९ | १ | ८८७ |
| अथ हैनँ गार्हपत्यः | .... | ४ | ११ | १ | ४०९ |
| अथ हैनँ प्रतिहर्तोपससाद | .... | १ | ११ | ८ | १३६ |
| अथ हैनँ प्रस्तोतोपससाद | .... | १ | ११ | ४ | १३३ |
| अथ हैनँ यजमान उवाच | .... | १ | ११ | १ | १३१ |
| अथ हैनँ वागुवाच | ... | ५ | १ | १३ | ४५२ |
| अथ हैनँ श्रोत्रमुवाच | ... | ५ | १ | १४ | ४५२ |
| अथ हैनमन्वाहार्यपचनः | .... | ४ | १२ | १ | ४१२ |
| अथ हैनमाहवनीयः | ... | ४ | १३ | १ | ४१४ |
| अथ हैनमुद्गातोपससाद | .... | १ | ११ | ६ | १३५ |
| अथ हैनमृषभोऽभ्युवाद | ... | ४ | ५ | १ | ३८६ |
| अथ होवाच जनशाँर्कराक्ष्य | .... | ५ | १५ | १ | ५५३ |
| अथ होवाच बुडिलमाश्वतराश्विम् | .... | ५ | १६ | १ | ५५५ |
| अथ होवाच सत्ययज्ञम् | ... | ५ | १३ | १ | ५४९ |
| अथ होवाचेन्द्रद्युम्नम् | ... | ५ | १४ | १ | ५५१ |
| अथ होवाचोद्दालकम् | ... | ५ | १७ | १ | ५५७ |
| अथात आत्मादेश एव | .... | ७ | २५ | २ | ७९४ |
पृष्ठ 957स्थायी लिंक
( ९५३ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ | |
|---|---|---|---|---|---|
| अथातः शौव उद्गीथः | ... | १ | १२ | १ | १३८ |
| अथाधिदैवतं य एवासौ | ... | १ | ३ | १ | ६४ |
| अथाध्यात्मं प्राणो वाव | .... | ४ | ३ | ३ | ३७१ |
| अथाध्यात्मं य एवायम् | .... | १ | ५ | ३ | ८५ |
| अथाध्यात्मं वागेवक्प्राणः | .... | १ | ७ | १ | ९८ |
| अथानु किमनुशिष्टः | .... | ५ | ३ | ४ | ४७५ |
| अथानेनैव ये चैतस्मात् | .... | १ | ७ | ८ | १०४ |
| अथावृत्तेषु यौर्हिङ्कारः | ... | २ | २ | २ | १५७ |
| अथैतयोः पथोर्न कतरेण | .... | ५ | १० | ८ | ५३१ |
| अथोताप्याहुः | .... | २ | १ | ३ | १५२ |
| अधीहि भगव इति | .... | ७ | १ | १ | ७१२ |
| अनिरुक्तस्त्रयोदशः | ... | १ | १३ | ३ | १४७ |
| अन्तरिक्षमेवग्वायुः | .... | १ | ६ | २ | ९१ |
| अन्तरिक्षोदरः कोशः | .... | ३ | १५ | १ | ३१७ |
| अन्नं वाव बलाद्भूयः | .... | ७ | ९ | १ | ७४९ |
| अन्नमयँ॒ हि सोम्य | ... | ६ | ५ | ४ | ६२६ |
| ,, ,, | ... | ६ | ६ | ५ | ६३१ |
| अन्नमशितं त्रेधा विधीयते | .... | ६ | ५ | १ | ६२३ |
| अन्नमिति होवाच | .... | १ | ११ | ९ | १३६ |
| अन्यतरामेव वर्तनीम् | .... | ४ | १६ | ३ | ४३० |
| अपां का गतिरित्यसौ | .... | १ | ८ | ५ | १११ |
| अपाँ॒ सोम्य पीयमानानाम् | .... | ६ | ६ | ३ | ६३० |
| अपाने तृप्यति वाक्तृप्यति | .... | ५ | २१ | २ | ५६६ |
| अभिमन्थति स हिङ्कारः | ... | २ | १२ | १ | १८९ |
| अभ्रं भूत्वा मेघो भवति | ... | ५ | १० | ६ | ५२१ |
| अभ्राणि संप्लवन्ते | .... | २ | १५ | १ | १९४ |
| अमृतत्वं देवेभ्यः | .... | २ | २२ | २ | २१० |
| अयं वाव लोकः | .... | १ | १३ | १ | १४४ |
| अयं वाव स योऽयमन्तः | .... | ३ | १२ | ८ | २८५ |
| अयं वाव स योऽयमन्तर्हृदये | .... | ३ | १२ | ९ | २८५ |
| अरिष्टं कोशम् | .... | ३ | १५ | ३ | ३२० |
| अशनापिपासे मे सोम्य | .... | ६ | ८ | ३ | ६४८ |
पृष्ठ 958स्थायी लिंक
( ९५४ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| अशरीरो वायुरभ्रं विद्युत् | ८ | १२ | २ | ९२२ |
| असौ वा आदित्यः | ३ | १ | १ | २४३ |
| असौ वाव लोकः | ५ | ४ | १ | ४८३ |
| अस्य यदेकाँ शाखां | ६ | ११ | २ | ६७२ |
| अस्य लोकस्य का गतिः | १ | ९ | १ | ११७ |
| अस्य सोम्य महतो वृक्षस्य | ६ | ११ | १ | ६७१ |
| आकाशो वाव तेजसः | ७ | १२ | १ | ७५८ |
| आकाशो वै नाम | ८ | १४ | १ | ९३९ |
| आगाता ह वै कामानाम् | १ | २ | १४ | ६३ |
| आत्मानमन्तत उपसृत्य | १ | ३ | १२ | ७६ |
| आदिप्रत्नस्य रेतसः | ३ | १७ | ७ | ३३५ |
| आदित्य इति होवाच | १ | ११ | ७ | १३५ |
| आदित्य ऊकारः | १ | १३ | २ | १४५ |
| आदित्यमथ वैश्वदेवम् | २ | २४ | १३ | २४० |
| आदित्यो ब्रह्मेत्यादेशः | ३ | १९ | १ | ३४४ |
| आदिरिति द्व्यक्षरम् | २ | १० | २ | १८३ |
| आपः पीतास्त्रेधा विधीयन्ते | ६ | ५ | २ | ६२४ |
| आपयिता ह वै कामानाम् | १ | १ | ७ | ४० |
| आपो वावान्नाद्भूयस्यः | ७ | १० | १ | ७५२ |
| आप्नोति हादित्यस्य | २ | १० | ६ | १८६ |
| आशा वाव स्मराद्भूयसी | ७ | १४ | १ | ७६४ |
| इति तु पञ्चमायामाहुतावापः | ५ | ९ | १ | ४९६ |
| इदं वाव तज्ज्येष्ठाय | ३ | ११ | ५ | २७६ |
| इदमिति ह प्रतिजज्ञे | ४ | १४ | ३ | ४१७ |
| इमाः सोम्य नद्यः | ६ | १० | १ | ६६८ |
| इयमेवर्गग्निः | १ | ६ | १ | ८९ |
| उदशराव आत्मानमवेक्ष्य | ८ | ८ | १ | ८७६ |
| उदाने तृप्यति त्वक्तृप्यति | ५ | २३ | २ | ५६८ |
| उद्गीथ इति त्र्यक्षरम् | २ | १० | ३ | १८३ |
| उद्गच्छति तन्निधनम् | २ | ३ | २ | १६० |
| उद्दालको हारुणिः | ६ | ८ | १ | ६४१ |
| उच्चन्निङ्कार उदितः | २ | १४ | १ | १९२ |
पृष्ठ 959स्थायी लिंक
( ५५५ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| उपकोसलो ह वै | ४ | १० | १ | ४०० |
| उपमन्त्रयते स हिङ्कारः | २ | १३ | १ | १९१ |
| ऋग्वेदं भगवोऽध्येमि | ७ | १ | २ | ७१३ |
| ऋतुषु पञ्चविधम् | २ | ५ | १ | १६३ |
| एकविँशत्यादित्यम् | २ | १० | ५ | १८५ |
| एतँ संयद्वाम इत्याचक्षते | ४ | १५ | २ | ४२२ |
| एतद्ध स्म वै तद्विद्वाँसः | ६ | ४ | ५ | ६१९ |
| एतद्ध स्म वै तद्विद्वानाह | ३ | १६ | ७ | ३२८ |
| एतमु एवाहमभ्यगासिषम् | १ | ५ | २ | ८४ |
| ,, ,, | १ | ५ | ४ | ८६ |
| एतमृग्वेद मभ्यतपँस्तस्याभि० | ३ | १ | ३ | २४४ |
| एतेषां मे देहीति | १ | १० | ३ | १२४ |
| एवं यथाश्मानमाखणमृत्वा | १ | २ | ८ | ५६ |
| एवँ सोम्य ते षोडशानाम् | ६ | ७ | ६ | ६३७ |
| एवमेव खलु सोम्य | ६ | ६ | २ | ६२९ |
| ,, ,, | ६ | ११ | ३ | ६७४ |
| एवमेव खलु सोम्येमाः | ६ | १० | २ | ६६९ |
| एवमेव प्रतिहर्तारमुवाच | १ | १० | ११ | १३० |
| एवमैवैष मघवन्निति | ८ | ९ | ३ | ८९२ |
| ,, ,, | ८ | ११ | ३ | ९०३ |
| एवमैवैष सम्प्रसादः | ८ | १२ | ३ | ९२४ |
| एवमेवोद्गातारमुवाच | १ | १० | १० | १३० |
| एवमेषां लोकानामासाम् | ४ | १७ | ८ | ४३८ |
| एष उ एव भामनीरेष हि | ४ | १५ | ४ | ४२३ |
| एष उ एव वामनीरेष हि | ४ | १५ | ३ | ४२२ |
| एष तु वा अतिवदति | ७ | १६ | १ | ७७४ |
| एष म आत्मान्तर्हृदये | ३ | १४ | ३ | ३११ |
| एष वै यजमानस्य | २ | २४ | १५ | २४० |
| एष ह वा उदक्प्रवणः | ४ | १७ | ९ | ४३९ |
| एष ह वै यज्ञो योऽयम् | ४ | १६ | १ | ४२८ |
| एषां भूतानां पृथिवी रसः | १ | १ | २ | ३३ |
| ओ ३ मदा ३ मो ३ पिबा० | १ | १२ | ५ | १४२ |
पृष्ठ 960स्थायी लिंक
( ९५६ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| ओमित्येतदक्षरमुद्गीथमुपासीत | १ | ४ | १ | १७७ |
| ,, ,, | १ | १ | १ | ३१ |
| औपमन्यव कं त्वम् | ५ | १२ | १ | ५४५ |
| कं ते काममागायानीत्येषः | १ | ७ | ९ | १५४ |
| कतमा कतमर्क्कतमत् | १ | १ | ४ | ३५ |
| कल्पन्ते हास्मा ऋतवः | २ | ५ | २ | १६४ |
| कल्पन्ते हास्मै | २ | २ | ३ | १५८ |
| का साम्नो गतिरिति | १ | ८ | ४ | १०९ |
| कुतस्तु खलु | ६ | २ | २ | ५८८ |
| क्व तर्हि यजमानस्य | २ | २४ | २ | २३४ |
| गायत्री वा इदँ सर्वम् | ३ | १२ | १ | २७९ |
| गोअश्वमिह महिमेत्याचक्षते | ७ | २४ | २ | ७९१ |
| चक्षुरेव ब्रह्मणश्चतुर्थः | ३ | १८ | ५ | ३४२ |
| चक्षुरेवर्गात्मा | १ | ७ | २ | ९८ |
| चक्षुर्होवाचकाम | ५ | १ | ९ | ४४९ |
| चित्तं वाव सङ्कल्पाद्भूयः | ७ | ५ | १ | ७३४ |
| जानश्रुतिर्ह पौत्रायणः | ४ | १ | १ | ३५२ |
| तं चेदेतस्मिन्वयसि | ३ | १६ | २ | ३२५ |
| ,, ,, | ३ | १६ | ४ | ३२६ |
| ,, ,, | ३ | १६ | ६ | ३२७ |
| तं चेद्ब्रूयुरस्मिंश्चेदिदम् | ८ | १ | ४ | ८११ |
| त चेद्ब्रूयुर्यदिदमस्मिन् | ८ | १ | २ | ८०७ |
| तं जायोवाच ततः | ४ | १० | २ | ४०१ |
| तं जायोवाच हन्त | १ | १० | ७ | १२७ |
| तं मद्गुरुपनिपत्याभ्युवाद | ४ | ८ | २ | ३९४ |
| तँ हँ स उपनिपत्याभ्युवाद | ४ | ७ | २ | ३९२ |
| तँ ह चिरं वसेत्याशा० | ५ | ३ | ७ | ४७९ |
| तँ ह प्रवाहणः | १ | ८ | ८ | ११५ |
| तँ ह शिलकः | १ | ८ | ६ | ११२ |
| तँ हाङ्गिरा उद्गीथम् | १ | २ | १० | ५९ |
| तँ हाभ्युवाद रैक्वेदम | ४ | २ | ४ | ३६६ |
| तँ हैतमतिधन्वा | १ | ९ | ३ | ११९ |
| तँ होवाच नैतदब्राह्मणः | ४ | ४ | ५ | ३८४ |
पृष्ठ 961स्थायी लिंक
( १५७ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| तँ होवाच किंगोत्रः | ४ | ४ | ४ | ३८२ |
| तँ होवाच नैतदब्राह्मणः | ४ | ४ | ५ | ३८४ |
| तँ होवाच यं वै | ६ | १२ | २ | ६७७ |
| तँ होवाच यथा सोम्य | ६ | ७ | ५ | ६३६ |
| तँ होवाच यथा सोम्य | ६ | ७ | ३ | ६३५ |
| त इमे सत्याः कामाः | ८ | ३ | १ | ८२६ |
| त इह व्याघ्रो वा सिँहो वा | ६ | ९ | ३ | ६६५ |
| त एतदेव रूपमभि० | ३ | ६ | २ | २५९ |
| ,, ,, | ३ | ७ | २ | २६२ |
| ,, ,, | ३ | ८ | २ | २६४ |
| ,, ,, | ३ | ९ | २ | २६८ |
| ,, ,, | ३ | १० | २ | २७० |
| तत्रोद्गातृनास्तावे | १ | १० | ८ | १२८ |
| तथाऽमुष्मिल्लोके | १ | ९ | ४ | १२० |
| तथेति ह समुपविविशुः | १ | ८ | २ | १०८ |
| तद्दुताप्याहुः साम्नैनामुपा० | २ | १ | २ | १५१ |
| तदु ह जानश्रुतिः | ४ | १ | ५ | ३५९ |
| ,, ,, | ४ | २ | १ | ३६३ |
| तदु ह शौनकः कापेयः | ४ | ३ | ७ | ३७४ |
| तदेतच्चतुष्पादब्रह्म | ३ | १८ | २ | ३३९ |
| तदेतन्मिथुनमोमिति | १ | १ | ६ | ३९ |
| तदेष श्लोकः | ८ | ६ | ६ | ८६३ |
| तदेष श्लोको न पश्यः | ७ | २६ | २ | ७९९ |
| तदेष श्लोको यदा | ५ | २ | ८ | ४७० |
| तदेष श्लोको यानि | २ | २१ | ३ | २०६ |
| तदैक्षत बहु स्याम् | ६ | २ | ३ | ५९५ |
| तद्वैतत्सत्यकामः | ५ | २ | ३ | ४६३ |
| तद्वैतद्घोर आङ्गिरसः | ३ | १७ | ६ | ३३३ |
| तद्वैतद्ब्रह्मा प्रजापतये | ३ | ११ | ४ | २७५ |
| ,, ,, | ८ | १५ | १ | ९४३ |
| तद्धोभये देवासुराः | ८ | ७ | २ | ८६८ |
| तद्य इत्थं विदुः | ५ | १० | १ | ५०० |
पृष्ठ 962स्थायी लिंक
( ९५८ )
| मन्त्र प्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| तद्य इह रमणीयचरणाः | ५ | १० | ७ | ५२९ |
| तद्य एवैतं ब्रह्मलोकम् | ८ | ४ | ३ | ८४० |
| तद्य एवैतावरं च | ८ | ५ | ४ | ८४७ |
| तद्यत्प्रथमममृतम् | ३ | ६ | १ | २५७ |
| तद्यत्रैतत्सुप्तः | ८ | ६ | ३ | ८५७ |
| ,, ,, | ८ | ११ | १ | ९०१ |
| तद्यथा महापथ आततः | ८ | ६ | २ | ८५६ |
| तद्यथा लवणेन | ४ | १७ | ७ | ४३८ |
| तद्यथेषीकातूलमग्नौ | ५ | २४ | ३ | ५७० |
| तद्यथेह कर्मजितो लोकः | ८ | १ | ६ | ८१९ |
| तद्यदृक्तो रिष्येद् भूः | ४ | १७ | ४ | ४३५ |
| तद्यन्दक प्रथममागच्छेत् | ५ | १९ | १ | ५६३ |
| तद्यद्रजतं सेयं पृथिवी | ३ | १९ | २ | ३४७ |
| तथा एतदनुज्ञाक्षरं यद्धि | १ | २ | ८ | ४१ |
| तद्यध्यक्षरतदादित्यम् | ३ | १ | ४ | २४७ |
| ,, ,, | ३ | २ | ३ | २५० |
| ,, ,, | ३ | ३ | ३ | २५१ |
| ,, ,, | ३ | ४ | ३ | २५२ |
| ,, ,, | ३ | ५ | ३ | २५४ |
| तमग्निरभ्युवाद सत्यकाम | ४ | ६ | २ | ३८९ |
| तमु ह परः प्रत्युवाच | ४ | १ | ३ | ३५६ |
| ` तमु ह परः प्रत्युवाचाह | ४ | २ | ३ | ३६४ |
| तयोरन्यतरां मनसा | ४ | १६ | २ | ४३० |
| तस्मा आदित्याश्च | २ | २४ | १६ | २४१ |
| तस्मा उ ह ददुस्ते | ४ | ३ | ८ | ३७६ |
| तस्मादप्यद्येहाददान० | ८ | ८ | ५ | ८८५ |
| तस्मादाहुः सोष्यति | ३ | १७ | ५ | ३३२ |
| तस्मादु हैवंविद्यद्यपि | ५ | २४ | ४ | ५७१ |
| तस्माद्वा एतं सेतुम् | ८ | ४ | २ | ८३९ |
| तस्मिन्निमानि सर्वाणि | २ | ९ | २ | १७४ |
| तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ | ५ | ४ | २ | ४८४ |
| ,, ,, | ५ | ५ | २ | ४८८ |
पृष्ठ 963स्थायी लिंक
( ९५९ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ | ५ | ६ | २ | ४९० |
| ,, ,, | ५ | ७ | २ | ४९१ |
| ,, ,, | ५ | ८ | २ | ४९४ |
| तस्मिन्यावत्सम्पातम् | ५ | १० | ५ | ५१४ |
| तस्मै श्वा श्वेतः | १ | १२ | २ | १४० |
| तस्य क्व मूलँ स्याद् | ६ | ८ | ४ | ६५१ |
| ,, ,, | ६ | ८ | ६ | ६५६ |
| तस्य प्राची दिग्जुहूर्नाम | ३ | १५ | २ | ३१८ |
| तस्य यथा कप्यासम् | १ | ६ | ७ | ९४ |
| तस्य यथाभिनहनम् | ६ | १४ | २ | ६८६ |
| तस्य ये प्राञ्चो रश्मयः | ३ | १ | २ | २४४ |
| तस्यर्क् च साम च गेष्णौ | १ | ६ | ८ | ९६ |
| तस्य ह वा एतस्य | ३ | १३ | १ | २८९ |
| तस्य ह वा एतस्यात्मनः | ५ | १८ | २ | ५६१ |
| तस्य ह वा एतस्यैवम् | ७ | २६ | १ | ७९८ |
| तस्या ह मुखमुपोद्गृह्णन् | ४ | २ | ५ | ३६६ |
| तस्यैषा दृष्टिर्यत्रैतत् | ३ | १३ | ८ | ३०० |
| त्रयी विद्या हिङ्कारस्त्रयः | २ | २१ | १ | २०४ |
| त्रयो धर्मस्कन्धा यज्ञः | २ | २३ | १ | २१४ |
| त्रयो होद्गीथे | १ | ८ | १ | १०६ |
| ता आप ऐक्षन्त | ६ | २ | ४ | ५९९ |
| तानि वा एतानि यजूं ष्येतम् | ३ | २ | २ | २४९ |
| तानि वा एतानि सामानि | ३ | ३ | २ | २५१ |
| तानि ह वा एतानि | ७ | ४ | २ | ७२९ |
| ,, ,, | ७ | ५ | २ | ७३५ |
| ,, ,, | ८ | ३ | ५ | ८३४ |
| तानु तत्र मृत्युरंया | १ | ४ | ३ | ७९ |
| तान्यभ्यतपत्तेभ्यः | २ | २३ | ३ | २३१ |
| तान्होवाच प्रातर्वः | ५ | ११ | ७ | ५४३ |
| तान्होवाचाश्वपतिर्वे | ५ | ११ | ४ | ५४० |
| तान्होवाचोहैव | १ | १२ | ३ | १४० |
| तान्होवाचैते वै खलु | ५ | १८ | १ | ५५९ |
पृष्ठ 964स्थायी लिंक
( ९६० )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| तावानस्य महिमा | ३ | १२ | ६ | २८४ |
| तासां त्रिवृतं त्रिवृतमेकैकाम् | ६ | ३ | ३ | ६१० |
| ,, ,, | ६ | ३ | ४ | ६१२ |
| तेजसः सोम्याश्यमानस्य | ६ | ६ | ४ | ६३० |
| तेजो वावाद्भ्यो भूयः | ७ | ११ | १ | ७५५ |
| तेजोऽशितं त्रेधा विधीयते | ६ | ५ | ३ | ६२५ |
| तेभ्यो ह प्राप्तेभ्यः | ५ | ११ | ५ | ५४० |
| तेन तँ ह बकः | १ | २ | १३ | ६२ |
| तेन तँ ह बृहस्पतिः | १ | २ | ११ | ६१ |
| तेन तँ हायास्य | १ | २ | १२ | ६१ |
| तेनेयं त्रयी विद्या | १ | १ | ९ | ४२ |
| तेनोभौ कुरुतो यश्चैतत् | १ | १ | १० | ४४ |
| ते यथा तत्र न विवेकम् | ६ | ९ | २ | ६६४ |
| ते वा एते गुह्याः | ३ | ५ | २ | २५४ |
| ते वा एतेऽथर्वाङ्गिरसः | ३ | ४ | २ | २५२ |
| ते वा एते पञ्च | ३ | १३ | ६ | २९६ |
| ते वा एते रसानाँ रसाः | ३ | ५ | ४ | २५५ |
| तेषां खल्वेषां भूतानाम् | ६ | ३ | १ | ६०४ |
| ते ह प्राणाः प्रजापतिम् | ५ | १ | ७ | ४४७ |
| ते ह नासिक्यम् | १ | २ | २ | ५० |
| ते ह यथैवेह | १ | १२ | ४ | १४१ |
| ते ह सम्पादयाञ्चक्रुरुद्दालकः | ५ | ११ | २ | ५३८ |
| ते होचुरूपकोसलेषा | ४ | १४ | १ | ४१६ |
| ते होचुर्येन हैवार्थेन | ५ | १३ | ६ | ५४२ |
| तौ वा एतौ द्वौ | ४ | ३ | ४ | ३२७ |
| तौ ह द्वात्रिँ शतं वर्षाणि | ८ | ७ | ३ | ८७० |
| तौ ह प्रजापतिरुवाच | ८ | ७ | ४ | ८७१ |
| ,, ,, | ८ | ८ | २ | ८७८ |
| तौ हान्वीक्ष्य प्रजापतिः | ८ | ८ | ४ | ८८३ |
| तौ होचतुर्यथैववेद० | ८ | ८ | ३ | ८८१ |
| दध्नः सोम्य मथ्यमानस्य | ६ | ६ | १ | ६२९ |
| दुग्धेऽस्मै वाग्दोहम् | १ | १३ | ४ | १४७ |
| ,, ,, | २ | ८ | ३ | १७२ |
पृष्ठ 965स्थायी लिंक
( ९६१ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| देवा वै मृत्योर्बिभ्यतः | १ | ४ | २ | ७८ |
| देवासुरा ह वै यत्र | १ | २ | १ | ४७ |
| द्यौरेवर्गादित्यः | १ | ६ | ३ | ९१ |
| द्यौरेवोदन्तरिक्ष गीः | १ | ३ | ७ | ७२ |
| ध्यानं वाव चित्ताद्भूयः | ७ | ६ | १ | ७३८ |
| नक्षत्राण्येवर्क्चन्द्रमाः | १ | ६ | ४ | ९१ |
| न वधेनास्य हन्यते | ८ | १० | २ | ८९५ |
| ” ” | ८ | १० | ४ | ८९६ |
| न वै तत्र न निम्लोच | ३ | ११ | २ | २७३ |
| न वै नूनं भगवन्तस्ते | ६ | १ | ७ | ५८० |
| न वै वाचो न चक्षूंषि | ५ | १ | १५ | ४५३ |
| न स्विदेतेऽप्युच्छिष्टा इति | १ | १० | ४ | १२४ |
| न ह वा अस्मा उदेति | ३ | ११ | ३ | २७४ |
| न हाप्सु प्रैत्यप्सुमान् | २ | ४ | २ | १६२ |
| नान्यस्मै कस्मैचन | ३ | ११ | ६ | २७६ |
| नाम वा ऋग्वेदो यजुर्वेदः | ७ | १ | ४ | ७१८ |
| नाहमत्र भोग्यं पश्यामीति | ८ | ९ | २ | ८८९ |
| निधनमिति त्र्यक्षरम् | २ | १० | ४ | १८४ |
| नैवैतेन सुरभि न | १ | २ | ९ | ५८ |
| न्यग्रोधफलमत आहरेतीदम् | ६ | १२ | १ | ६७६ |
| पञ्च मा राजन्यबन्धुः | ५ | ३ | ५ | ४७६ |
| परोवरीयो हास्य भवति | २ | ७ | २ | १६८ |
| पर्जन्यो वाव गौतमाग्निः | ५ | ५ | १ | ४८७ |
| पशुषु पञ्चविधम् | २ | ६ | १ | १६५ |
| पुरा तृतीयसवनस्योपा० | २ | २४ | ११ | २३९ |
| पुरा प्रातरनुवाकस्योपा० | २ | २४ | ३ | २३५ |
| पुरा माध्यन्दिनस्य | २ | २४ | ७ | २३८ |
| पुरुषँ सोम्योत | ६ | १६ | १ | ६९८ |
| पुरुषँ सोम्योतोपतापिनम् | ६ | १५ | १ | ६९४ |
| पुरुषो वाव गौतमाग्निः | ५ | ७ | १ | ४९१ |
| पुरुषो वाव यज्ञस्तस्य | ३ | १६ | १ | ३२३ |
| पृथिवी वाव गौतमाग्निः | ५ | ६ | १ | ४८९ |
पृष्ठ 966स्थायी लिंक
( १६३ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | ख० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| पृथिवी हिङ्कारोऽन्तरिक्षम् | २ | १७ | १ | १९४ |
| प्रजापतिर्लोकानभ्यतपत् | २ | २३ | २ | २३० |
| ” ” | ४ | १७ | १ | ४३४ |
| प्रवृत्तोऽश्वतरीरथः | ५ | १३ | २ | ५५० |
| प्रस्तोतर्या देवता | १ | १० | १ | १२८ |
| प्राचीनशाल औपमन्यवः | ५ | ११ | १ | ५३६ |
| प्राण इति होवाच | १ | ११ | ५ | १३३ |
| प्राण एव ब्रह्मणश्चतुर्थः | ३ | १८ | ४ | ३४२ |
| प्राणे तृप्यति चक्षुस्तृप्यति | ५ | १९ | २ | ५६४ |
| प्राणेषु पञ्चविधं परोवरीयः | २ | ७ | १ | १५७ |
| प्राणो वा आशायाः | ७ | १५ | १ | ७६७ |
| प्राणो ह्येवैतानि सर्वाणि | ७ | १५ | ४ | ७७२ |
| प्राप ह्याचार्यकुलम् | ४ | ९ | १ | ३९७ |
| बलं वाव विज्ञानाद्भूयः | ७ | ८ | १ | ७४५ |
| ब्रह्मणः सोम्य ते पादम् | ४ | ६ | ३ | ३९० |
| ” ” | ४ | ७ | ३ | ३९२ |
| ” ” | ४ | ८ | ३ | ३९५ |
| ब्रह्मणश्च ते पादं ब्रवाणीति | ४ | ५ | २ | ३८७ |
| ब्रह्मवादिनो वदन्ति | २ | २४ | १ | २३३ |
| ब्रह्मविदिव वै सोम्य | ४ | ९ | २ | ३९७ |
| भगव इति ह प्रतिशुश्राव | ४ | १४ | २ | ४१७ |
| भगवाँस्त्वेव मे | १ | ११ | ३ | १३२ |
| भवन्ति हास्य पशवः | २ | ६ | २ | १६६ |
| मघवन्मर्त्यं वा इदम् | ८ | १२ | ९०६ | |
| मटचीहतेषु कुरुष्वाटिक्या | १ | १० | १ | १२२ |
| मद्गुष्टे पादं वक्तेति | ४ | ८ | १ | ३९४ |
| मनो ब्रह्मेत्युपासीत | ३ | १८ | १ | ३३८ |
| मनोमयः प्राणशरीरः | ३ | १४ | २ | ३०६ |
| मनो वाव वाचो भूयः | ७ | ३ | १ | ७२४ |
| मनो हिङ्कारो वाक् | २ | ११ | १ | १८७ |
| मनो होच्चक्राम | ५ | १ | ११ | ४५० |
| मानवो ब्रह्मैवैक ऋत्विक् | ४ | १७ | १० | ४४० |
पृष्ठ 967स्थायी लिंक
( ११३ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| मासेभ्यः पितृलोकम् .... | ५ | १० | ४ | ५११ |
| मासेभ्यः संवत्सरम् .... | ४ | १० | २ | ५०० |
| यं यमन्तमभिकामः .... | ८ | २ | १० | ८२४ |
| य आत्मापहतपाप्मा .... | ८ | ७ | १ | ८६६ |
| य एते ब्रह्मलोके .... | ८ | १२ | ६ | ९३५ |
| य एष स्वप्ने महीयमानः .... | ८ | १० | १ | ८९४ |
| य एषोऽक्षिणि पुरुषः .... | ४ | १५ | १ | ४२० |
| यच्चन्द्रमसो रोहितँ रूपम् .... | ६ | ४ | ३ | ६१५ |
| यत्र नान्यत्पश्यति .... | ७ | २४ | १ | ७८६ |
| यथा कृतायविजितायाधरेयाः .... | ४ | १ | ४ | ३५७ |
| „ „ .... | ४ | १ | ६ | ३५९ |
| यथा विलीनमेवाङ्ग .... | ६ | १३ | २ | ६८१ |
| यथा सोम्य पुरुषम् .... | ६ | १४ | १ | ६८५ |
| यथा सोम्य मधु मधुकृतः .... | ६ | ९ | १ | ६६३ |
| यथा सोम्यैकेन .... | ६ | १ | ४ | ५७७ |
| यथा सोम्यैकेन नख० .... | ६ | १ | ६ | ५७९ |
| यथा सोम्यैकेन लोह० .... | ६ | १ | ५ | ५७९ |
| यथेह क्षुधिता बाला मातरम् .... | ५ | २४ | ५ | ५७२ |
| यदग्ने रोहितँ रूपम् .... | ६ | ४ | १ | ६१३ |
| यदादित्यस्य रोहितम् .... | ६ | ४ | २ | ६१५ |
| यदप उच्छुष्यन्ति .... | ४ | ३ | २ | ३७० |
| यदा वा ऋचमाप्नोति .... | १ | ४ | ४ | ८० |
| तदा वै करोत्यथ .... | ७ | २१ | १ | ७८२ |
| यदा वै निस्तिष्ठत्यथ .... | ७ | २० | १ | ७८१ |
| यदा वै मनुतेऽथ .... | ७ | १८ | १ | ७७९ |
| यदा वै विजानात्यथ .... | ७ | १७ | १ | ७७६ |
| यदा वै श्रद्दधात्यथ .... | ७ | १९ | १ | ७८० |
| यदा वै सुखं लभतेऽथ .... | ७ | २२ | १ | ७८३ |
| यदुदिति स उद्गीथः .... | २ | ८ | २ | १७१ |
| यदु रोहितमिवाभूदिति .... | ६ | ४ | ६ | ६२१ |
| यद्विज्ञातमिवाभूत् .... | ६ | ४ | ७ | ६२१ |
| यद्विद्युतो रोहितँ रूपम् .... | ६ | ४ | ४ | ६१६ |
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( २६४ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| यद्वै तत्पुरुषे शरीरमिदम् | ३ | १२ | ४ | २८२ |
| यद्वै तद्ब्रह्मे तीदम् | ३ | १२ | ७ | २८५ |
| यस्तद्वेद स वेद | २ | २१ | ४ | २०६ |
| यस्यामृचि तामृचम् | १ | ३ | ९ | ७४ |
| यां दिशमभिष्ठोष्यन् | १ | ३ | ११ | ७५ |
| या वाक्सर्त्तस्मात् | १ | ३ | ४ | ६९ |
| यावान्वा अयमाकाशः | ८ | १ | ३ | ८०९ |
| या वै सा गायत्रीयम् | ३ | १२ | २ | २८० |
| या वै सा पृथिवीयम् | ३ | १२ | ३ | २८१ |
| येनच्छन्दसा | १ | ३ | १० | ७५ |
| येनाश्रुतँ॒ श्रुतम् | ६ | १ | ३ | ५७६ |
| यो वै भूमा तत्सुखम् | ७ | २३ | १ | ७८५ |
| योषा वाव गौतमाग्निः | ५ | ८ | १ | ४९३ |
| यो ह वा आयतनम् | ५ | १ | ५ | ४४५ |
| यो ह वै ज्येष्ठं च श्रेष्ठं च | ५ | १ | १ | ४४३ |
| यो ह वै प्रतिष्ठां वेद | ५ | १ | ३ | ४४४ |
| यो ह वै वसिष्ठं वेद | ५ | १ | २ | ४४४ |
| यो ह वै सम्पदं वेद | ५ | १ | ४ | ४४५ |
| रैक्वेमानि षट्शतानि | ४ | २ | २ | ३६३ |
| लवणमेतदुदकेऽवधायाथ | ६ | १३ | १ | ६८० |
| लो ३ कद्दारमपावा ३ र्णू | २ | २४ | ४ | २३६ |
| ,, ,, | २ | २४ | ८ | २३८ |
| ,, ,, | २ | २४ | १२ | २४० |
| लोकेषु पञ्चविधँ॒ सामोपासीत | २ | २ | १ | १५४ |
| लोम हिङ्कारस्त्वक्प्रस्तावः | २ | १९ | १ | २०० |
| वसन्तो हिङ्कारः | २ | १६ | १ | १९६ |
| वसिष्ठाय स्वाहेत्यग्नावाज्यस्य | ५ | २ | ५ | ४६६ |
| वागेव ब्रह्मणश्चतुर्थः | ३ | १८ | ३ | ३४० |
| वागेवर्क् प्राणः | १ | १ | ५ | ३७ |
| वाग्वाव नाम्नो भूयसी | ७ | २ | १ | ७२१ |
| वायुर्वाव संवर्गो यदा | ४ | ३ | १ | ३६९ |
| विज्ञानं वाव ध्यानाद्भूयः | ७ | ७ | १ | ७४१ |
पृष्ठ 969स्थायी लिंक
( १६५ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| विनर्दि साम्नो वृणे | २ | २२ | १ | २०८ |
| वृष्टौ पञ्चविधम् | २ | ३ | १ | १५९ |
| वेत्थ यथासौ लोको न | ५ | ३ | ३ | ४७४ |
| वेत्थ यदि॒तोऽधि प्रजाः | ५ | ३ | २ | ४७३ |
| व्याने तृप्यति श्रोत्रं तृप्यति | ५ | २० | २ | ५६५ |
| श्यामाच्छबलं प्रपद्ये | ८ | १३ | १ | ९३७ |
| श्रुतँ ह्येव मे भगवद्दृशेभ्यः | ४ | ९ | ३ | ३९८ |
| श्रोत्रँ॒ होच्चक्राम | ५ | १ | १० | ४४९ |
| श्रोत्रमेव ब्रह्मणश्चतुर्थः | ३ | १८ | ६ | ३४२ |
| श्रोत्रमेवङ्मर्नः | १ | ७ | ३ | ९९ |
| श्वेतकेतुर्हारुणेयः | ५ | ३ | १ | ४७२ |
| ” ” | ६ | १ | १ | ५७४ |
| षोडशकलः सोम्य | ६ | ७ | १ | ६३३ |
| संकल्पो वाव मनसः | ७ | ४ | १ | ७२७ |
| स एतां त्रयीं विद्याम् | ४ | १७ | ३ | ४३५ |
| स एतास्तिस्रो देवताः | ४ | १७ | २ | ४३५ |
| स एवाधस्तात्स उपरि० | ७ | २५ | १ | ७९३ |
| स एष परोवरीयानुद्गीथः | १ | ९ | २ | ११८ |
| स एष ये चैतस्मात् | १ | ७ | ६ | १०३ |
| स एष रसानाँ॒ रसतमः | १ | १ | ३ | ३४ |
| स जातो यावदायुषम् | . | ९ | २ | ४९८ |
| सत्यकामो ह जाबालः | ४ | ४ | १ | ३८० |
| सदेव सोम्येदमग्रे | ६ | २ | १ | ५८२ |
| स ब्रूयान्नास्य जरयैतत् | ८ | १ | ५ | ८१३ |
| समस्तस्य खलु | २ | १ | १ | १४९ |
| समान उ एवायं चासौ | १ | ३ | २ | ६६ |
| समाने तृप्यति मनस्तृप्यति | ५ | २२ | २ | ५६७ |
| स य आकाशं ब्रह्मेत्युपास्ते | ७ | १२ | २ | ७६० |
| स य आशां ब्रह्मेत्युपास्ते | ७ | १४ | २ | ७६५ |
| स य इदमविद्वानग्निहोत्रम् | ५ | २४ | १ | ५६९ |
| स य एतदेवं विद्वानक्षरम् | १ | ४ | ५ | ८१ |
| स य एतदेवं विद्वान् | २ | १ | ४ | १५२ |
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( ९६६ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| स य एतदेवममृतं वेद | ३ | ६ | ३ | २५९ |
| ” ” | ३ | ७ | ३ | २६२ |
| ” ” | ३ | ८ | ३ | २६४ |
| ” ” | ३ | ९ | ३ | २६८ |
| ” ” | ३ | १० | ३ | २७० |
| स य एतमेवं विद्वाँश्चतुष्कलम् | ४ | ५ | ३ | ३८८ |
| ” ” | ४ | ६ | ४ | ३९१ |
| ” ” | ४ | ७ | ४ | ३९३ |
| ” ” | ४ | ८ | ४ | ३९५ |
| स य एतमेवं विद्वानादित्यम् | ३ | १९ | ४ | ३५० |
| स य एतमेवं विद्वानुपास्ते | ४ | ११ | २ | ४१० |
| ” ” | ४ | १२ | २ | ४१२ |
| ” ” | ४ | १३ | २ | ४१४ |
| स य एवमेतत्साम | २ | २१ | २ | २०५ |
| स य एवमेतद्वृहदादित्ये | २ | १४ | २ | १९३ |
| स य एवमेतद्यज्ञायज्ञीयमङ्गेषु | २ | १९ | २ | २०० |
| स य एवमेतद्रथन्तरमग्नौ | २ | १२ | २ | १९० |
| स य एवमेतद्गायत्रम् | २ | ११ | २ | १८८ |
| स य एवमेतद्राजनं देवतासु | २ | २० | २ | २०२ |
| स य एवमेतद्वामदेव्यम् | २ | १३ | २ | १९१ |
| स य एवमेतद्वैराजमृतुषु | २ | १६ | २ | १९६ |
| स य एवमेतद्वैरूपम् | २ | १५ | २ | १९५ |
| स य एवमेताः शक्वर्यो लोकेषु | २ | १७ | २ | १९८ |
| स य एवमेता रेवत्यः | २ | १८ | २ | १९९ |
| स य एषोऽणिमैतदात्म्यम् | ६ | ८ | ७ | ६६१ |
| ” ” | ६ | ९ | ४ | ६६६ |
| ” ” | ६ | १० | ३ | ६६९ |
| ” ” | ६ | १२ | ३ | ६७९ |
| ” ” | ६ | १३ | ३ | ६८४ |
| ” ” | ६ | १४ | ३ | ६९३ |
| ” ” | ६ | १५ | ३ | ६९६ |
| स यः संकल्पं ब्रह्मेत्युपास्ते | ७ | ४ | ३ | ७३२ |
पृष्ठ 971स्थायी लिंक
( ९६७ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| स यः स्मरं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | १३ | २ | ७६३ |
| स यथा तत्र | .... ६ | १६ | ३ | ७०१ |
| स यथा शकुनिः सूत्रेण | .... ६ | ८ | २ | ६४६ |
| स यथोभयपाद्व्रजन्नथः | .... ४ | १६ | ५ | ४३२ |
| स यदवोचं प्राणम् | .... ३ | १५ | ४ | ३२० |
| स यदशिशिषति | .... ३ | १७ | १ | ३३० |
| स यदि पितरं वा मातरम् | .... ७ | १५ | २ | ७७० |
| स यदि पितृलोककामः | .... ८ | २ | १ | ८२१ |
| स यश्चित्तं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ५ | ३ | ७३६ |
| स यस्तेजो ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ११ | २ | ७५७ |
| स यावदादित्य उत्तरतः | .... ३ | १० | ४ | २७१ |
| स यावदादित्यः | .... ३ | ६ | ४ | २६० |
| स यावदादित्यः पश्चात् | .... ३ | ९ | ४ | २६९ |
| स यावदादित्यः पुरस्तात् | .... ३ | ७ | ४ | २६३ |
| स यावदादित्यो दक्षिणतः | .... ३ | ८ | ४ | २६४ |
| स यो ध्यानं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ६ | २ | ७४१ |
| स यो नाम ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | १ | ५ | ७१९ |
| स योऽन्नं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ९ | २ | ७५१ |
| स योऽपो ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | १० | २ | ७५३ |
| स यो बलं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ८ | २ | ७४७ |
| स यो मनो ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ३ | २ | ७२६ |
| स यो वाचं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | २ | २ | ७२३ |
| स यो विज्ञानं ब्रह्मेत्युपास्ते | .... ७ | ७ | २ | ७४३ |
| सर्वं खल्विदं ब्रह्म | .... ३ | १४ | १ | ३०३ |
| सर्वकर्मा सर्वकामः | .... ३ | १४ | ४ | ३१२ |
| सर्वास्वप्सु पञ्चविधम् | .... २ | ४ | १ | १६१ |
| सर्वे स्वरा इन्द्रस्यात्मानः | .... २ | २२ | ३ | २१० |
| सर्वे स्वरा घोषवन्तः | .... २ | २२ | ५ | २१२ |
| स वा एष आत्मा हृदि | .... ८ | ३ | ३ | ८२९ |
| स समित्पाणिः पुनरेयाय | .... ८ | १० | ३ | ८९५ |
| ” ” | .... ८ | ११ | २ | ९०३ |