भारतकोश
संग्रह पर लौटें

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ

२६ | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां ---|---|--- खलेन वनमत्तेन (सु ३३९) ५६।८५ | गणिकागणकौ समान ४४।२ | गन्ध सुवर्णे (चा.नी ९ ३) १७३।८५३ खलेषु मत्सु निर्याता (सु ३४५) ५६।८८ | गणेश स्तौति १६०।३०९ | गन्धमुद्धत (किरात ९ ३१) ३००।४६ खलो न साधुता याति ५४।२९ | गणेश्वरकवेर्वचोविरच ३५।८ | गन्धर्वनगरा (शा प ४१२३) ३७२।१५२ खलोल्लापा सोटा (सु ३२६१) ७७।४३ | गण्डभित्तिषु (शिशु १० ३) ३१५।३४ | गन्धवाह गहनानि २१४।६ खल्वाटो दिवसेश्व (सु ३१४१) ९४।११४ | गण्डस्थलील (आसी प्र) २।२१ | गन्धाप्यसौ (पद्म सू १९) ३८३।२६६ खाटीच्छाशिपलेह १९३।९२ | गण्डस्थले हि मद २३१।७२ | गन्वाढ्या नवमल्लि (भ्रमराष्टक २) ७५।१८ ख्याति कूर्गति(का प्र १० १०३) ३१७।३ | घण्टाभोगे विहरति(कुव १४४) ११७।४४ | गन्धैराढ्या जगति २२३।९१ खिन्नं चापि सुभाष ३९।२१ | गण्डे पाण्डौ २७६।४३ | गभीरनाभिहद (लक्ष्मीधर) २६७।३५३ खिन्नालसनयनान्त ३२१।३ | गण्डौ पाण्डिमसा १०७।१८६ | गमनमलस शून्या(मालती १ २०) २७४।४ खिन्नोऽसि मुञ्च (कुव ९०) २२१।१० | गतक्लेशायासा २०३।१०२ | गम्भीरनाभि (शा प ३३४८) २६७।३५३ खेलत्खञ्जननेत्रया २७४।३० | गतं तत्ताराध्यं तरु (भर्तृ स ४७८) ७६।४१ | गम्यतामुपगते (किरात ९ ४) २९६।४ ख्यातः शक्रो (पद्यस ६३) १८०।१०५५ | गत तद्गाम्भीर्य (सु ७०७) २२१।२५ | गम्यते यदि (चा नी ७ १७) २३०।२३ ख्यातस्त्व फलवृष्टि १८३।५१ | गत कामक (काव्या २ २४८) ३६७।१४ | गरलद्रुम कन्दमिन्दु २८४।१० ख्याता नराविपतय (सु १६०) ३३।३८ | गत कालो (शान्ति ४.१५) ३६८।५१ | गरीय सौर (सूक्ति ३३ ३३) २४०।१३३ ख्याता वय (शा प ३६९६) ३००।६८ | गत कालो (शान्ति ४ १३) ३६८।५० | गरीयस प्रचुर (शिशु १७ ५४) १२७।३ ख्यातिं गमयति (सु १५४) ३०।१५ | गतप्राया रात्रि (सु १६१२) ३०६।४२ | गर्जति वारिदपटले ३४०।१२ ख्याति यत्र गुणा (सु २८४) ५३।२७२ | गत्या पुर (शिशु ९ २) २९४।३१ | गर्जद्भीमभुजङ्गभीषण ७।८७ | गतवति दिननाथे २९५।५६ | गर्जन्नम्बु ददाति २१३।६८ गगनविपिनसिंह ३०१।७४ | गतवलयराजत (शिशु ९ ८) २९४।३६ | गर्जन्हरि (भट्टि २ ९) २०७।१ गङ्गा च धारयति ६५।१३ | गतश्रीर्गणका (शा प १३१८) १५५।९३ | गर्ज वा वर्ष (मृच्छ ५ ३१) २९८।४ गङ्गातरगकणशीकर (भर्तृ ३ २५) ९७।८ | गतसारेऽत्र संसारे ३६७।२० | गर्जसि मेघ न (चातका ४) २१२।३२ गङ्गातीरे हिम (भर्तृ ३.९२) २६९।६५ | गताः केचित्प्रबोधाय ३६४।११ | गर्जितबधिरी (शा प ८६०) २१२।३१ गङ्गादीना सकल २३५।१५९ | गतागतकुतूहलं ३५१।३४ | गर्जितमाकर्ण्य २३०।२० गङ्गा पाप शशी ता (भर्तृ स ४७६) ४५।६ | गता गीता नाश ९९।२४ | गर्जित्वा मेघ (शा प ५९६) २०७।१५ गङ्गाम्भसि सुरत्राण १२६।२९ | गतानुगतिको (हि १ १०) १६३।४३५ | गर्दभ पटहो १६५।५६४ गङ्गावारिभिरुक्षिता ९।१२२ | गता सा कि स्थानं १९१।८२ | गर्भग्रन्थिषु वी (सूक्ति ५०.५) ३३३।१०१ गङ्गासागरसङ्गमे १३७।६१ | गतास्तातभ्रातृ (राघवदेव) ३६८।४१ | गर्वं नोद्वहते न (भर्तृ स ४८२) ५३।२६८ गङ्गीयत्यसिताषगा १०९।२२३ | गतास्ते दिवसा यत्र २४८।८४ | गर्वं मा कुरु २४०।१२७ गङ्गीयत्यसिताषगा १३६।५४ | गते तस्मिन्थानौ (मल्लट १२) २०९।१२ | गर्वग्रन्थिथलगुर्ज्जर ११२।२७८ गङ्गेवाघविनाशिनी ८७।३४ | गतेनापि न (शा प ४१२६) ३७२।१५३ | गर्वायसे विक्रञ्चक्रोर २३८।७४ गङ्गोत्तुङ्गतारङ्गरि ३७१।११० | गतेऽपि वयसि (सु २६४५) १५३।६ | गर्वाविशविशाल १२०।१३९ गच्छ गच्छसि (काव्या २ १४१) ३३०।१ | गते प्रेमानन्धे (अमरु ४३) ३८७।७ | गलत्स्नेहा (शा प ३४७७) २८९।५८ गच्छति न तृप्तिमेतत् २७३।४ | गते मुखच्छद (शिशु १७ ६७) १२७।१६ | गलिता (शा प ४११७) ३७२।१४७ गच्छन्ति काजि (शा प ५५१) १९८।४१ | गतेर्भङ्ग खरो हीनो ७३।९ | गले पाशस्ती (शा प ९३१) २३२।७६ गच्छामीति मयो ३२१।२२ | गते शोको न(चा नी १३ २) १५९।२७७ | गवादीना पयोऽन्ये (सु ८५४) ४५।५ गच्छाम्यच्युत (कुव १५५) २४१।५४ | गते सुहृदि शत्रुता (सु ३२०३) ६७।५३ | गवार्थे ब्राह्मणा ३८३।२६७ गजकदम्बक (शिशु ६ २६) ३४१।३२ | गतै सहावै (किरात ८ २९) ३३८।७४ | गवाशनाना स शृणोति ८७।२३ गजपतिद्वयसीर (शिशु ६ ५५) ३४६।१६ | गतोऽस्मि तीर (नीतिप्र ७) २१७।४५ | गवीशपत्रो नगजार्र्ति १३।५ गजभुजंगमयोरपि (भर्तृ २ ८७) ९२।६८ | गत्वा द्वारवती (सूक्ति ८९ २) ३६५।४८ | गाङ्गमम्बु (काव्यप १० १३८) २२१।१२ गजव्रजाक्रमण (शिशु १७ ६५) १२७।१४ | गत्वा नूनं (शिशु १८ ६३) १३०।९३ | गाङ्गयामुनयोगेन तुत्य १३।२ गजस्य पङ्कमग्नस्य २३१।५५ | गदोदन्ता दन्ता ७६।४० | गाजीजह्नालुद्दीन ११३।४ गजाननाय महसे २।३ | गन्तव्या राजसभा १५१।३६४ | गाढ गुणवती १५७।२०७ गणयति (सु २३०२) ४४।१, ३६४।२४ | गन्तु प्रिये वदति ३२९।१० | गाढं प्रौढाङ्गनाभि २९५।७२ गणयन्ति नापशब्द (सु १५२) ३७।१० | गन्तु सत्वर (सु १७१२) ३३९।१२० | गाढकान्तदशन (सा द ४ ९) १०४।८५ | गन्तुर्विवक्षुदये (व्यक्ति.३७ ३) ३२९।८ | गाढालिङ्गन (अमरु ४०) ३१६।७५

सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः

२७


श्लोकांश / विषयसंदर्भश्लोकांश / विषयसंदर्भश्लोकांश / विषयसंदर्भ
गाढालिङ्गन (शृङ्गारति २१)३१।१३९गुणवद्भि सह सगम६२।१२गुरुतरकल नूपू (शिशु ७ १८)२६९।४२५
गाढाश्लेषनिपीडना (सु २०८२)३२९।४३गुणवन्त (शा प ३०३)८२।३४गुरुतामुपयाति यन्मृ(शा प ३९८)७३।२६
गाढाश्लेषविशीर्ण (अमरु ७४)३२९।२२गुणवानपि नोप१७५।९३४गुरुत्रासादासादितभ३२८।२
गात्रं कण्टक (शा प १०४२)२४२।१६१गुणवान्सुचिरस्थायी (दृ श ६५)८२।३०गुरुपत्न्या निशावी (कथाणंव)१५०।१७५
गात्रं ते (शा प ८८०)२२८।२१४गुणा कुर्वन्ति (शा प २९०)८१।१गुरुभिर्द्विजाती (वृ चा ११ ८)१६९।७१५
गात्रं सकुचितं (शा प ४१६१)९६।१६गुणा सर्वत्र (चा नी १६ ७)८१।५गुरुरपि लघूपनीतो८७।२२
गानान्धैस्तु परं पारं८४।२गुणागारे गौरे यशसि१३९।७गुरुरेक कविरेक सदसि१०१।६
गान्धर्वं गन्ध (भर्तृ स ४८५)१५९।२६६गुणा गुणज्ञेषु (गुणरत्न ५)८२।४०गुरुनयं भार (शा प ९६६)२३४।१४४
गान्धारा गुप्तदारा१२६।२१गुणानर्चन्ति जन्तूना (दृ.श ८४)८२।२८गुरुशुश्रूषया वि (विक्रम १२८)१५९।१५७
गाम्भीर्येण (काव्या २ ८५)१२०।१४७गुणाना सा (सु ४५१)६०।२५३गुरुषु मिलितेषु२४७।६८
गायति गीते शसति२८८।११गुणानामज्ञाता प्रचुरधन८२।४५गुरुसमीरसमीरितभू१२९।५१
गायति हसति (शा प ५७९)२०८।३०गुणानामज्ञानादनु२४६।३३गुरुस्कुर्वन्ति ते (किरात ११ ६४)७९।१३
गायन्तीना गोपसीम२२।१२३गुणानामन्तर (दृ श २२)१६८।६७२गुरो सुता मि (पच २ ११४)१६५।५३०
गायन्तु (सु २४१४)११८।१९९गुणानामेव (स क ४ १२५)२३४।१४०गुरोरधीताखिलवैद्यविद्या४३।१
गावो गन्धेन (विक्रम ११७)३८३।२६८गुणान्भूषयते रूप१५९।२५९गुरोरप्यवलिप्त(भा १ ५५९५)१६७।६३४
गाहन्ता महिषा (अ शा २ ६)१४।१९गुणापवादेन (किरात १४ १२)५९।२२३गुरोगिर पञ्च दिना (लटक २ १४)४३।२
गिरयो गुरवस्तेभ्यो४७।१०५गुणायन्ते (गुणरत्न ६)५१।२३६गुह्यमैथुनध (चा नी ६.१९)१६२।४०२
गिरयोऽप्यनुन्नति१०३।७६गुणालयोऽप्य (पच १ ४१५)१४९।३०२गूढालिङ्गनगण्डचुम्बन२९२।३१
गिरा देवी वीणागुण३५।१५गुणाश्रयं (हि २ ११७)३४९।६२गृध्राकारोऽपि (पच १ ३२५)१५०।३४३
गिरिगहरेषु गुरुगर्व२३१।६७गुणिगणगण (हि १ १०८)४०।२६गृहमध्यस्य खा (पच २ १५४)७१।२७
गिरिर्महानिगिरेरब्धि (कुव १०८)७६।१३गुणिने समीपवर्ती (सु २४७)४८।१४५गृहिणी सचिव (रघु.८ ६७)३६२।१५
गिरौ मयूरा (नीतिसार १)१७३।८६६गुणिन जनमा (शा प २९६)६२।२गृहीत ताम्बूल (शा प.३४७५)३८९।५७
गीतं कोकिल ते९४।१०५गुणिना गुणेषु५६।१२१गृहीता पाणिभि(कुमार १६ १४)१२७।६
गीतशास्त्रविनो (शा प २०२)१५३।२३गुणिना निर्गुणाना१५६।१६०गृहे जानुचर कल्या८९।२
गीतान्तरेषु (कुमार ३ ३८)३३१।३३गुणिनामपि निरूप (वासव ८)४८।११८गृहेश्वरी (स्कान्द मा कौ १४)३८९।४८१
गीत्वा किमपि (शा प ५२२)१८५।३०गुणिनेि गुणज्ञो रमते (सु २५३)८१।३५गृहन्तु सर्वे यदि वा (कुव ७३)३८।१९
गीयन्ते यदि पन्न१३७।६५गुणिनोऽपि हि८१।२४गेह दुर्गतबन्धुभि५३।२७५
गीर्भिर्गुरुणा परु (रसगगाधर)१७३।८६०गुणी गुण वेत्ति (गुणरत्न ४)१७५।९२७गेहादङ्गणमङ्ग (शा प ३४७८)२८९।६७
गीर्वाणा प्रतियन्ति३६५।८गुणेन स्पृहणीय (गुणरत्न १३)८१।१८गेहे गेहे सुभग११९।१२७
गुजति मञ्जु मिलिन्दे (रसगगाधर)२३९।८१गुणेषु क्रियता (शा प २९८)८१।१२गैरिकमन शिलादि१९६।१३
गुञ्जन्ति प्रतिकुञ्ज२८५।३९गुणेषु यत्न (मृच्छ ४ २३)८२।४१गोकर्णं गाहमाना३४२।८०
गुणं पृच्छख मा१६७।६४५गुणेष्वेव हि (मृच्छ ४ ०२)८१।१०गोकर्णराडाभरणं य१९०।६५
गुण आकर्षणयोग्यो८२।३२गुणे पूजा (दृ श ७१)८१।२६गोगजवाहनभोजन१९०।६३
गुणग्रामाभिसंवादि(प्र राघव १ ५)४५।११गुणे सर्वज्ञक (चा नी १६ १०)८१।११गोत्रस्थिति न मुञ्च (शा प २४१)४६।४८
गुणदोषावनिधि(हि २ १४३)१६४।४८९गुणैस्तुङ्गता (चा नी १६ ६)८१।१६गोत्राचारविचारपा११६।६०
गुणदोषावशास्त्रज्ञ (सु ३४९)५६।९१गुणैर्गौरवमायाति (शा प २९९)८१।१३गोत्रे साक्षादज(सूक्ति ७४ १२)३१३।५९
गुणदोषौ बुधो (कुव ६)३८।१०गुणो गुणान्तरा (चा नी ५ ६९)८१।२५गोनासाय नियोजिता (विद्ध १ ३)१२।३३
गुणभेदविदग्रिम१०४।९१गुणो दूषणता या (शा प.३०४)८१।१५गोपायन्ती विर(शा प ३४२१)२८६।१५
गुणमधिगतमपि१६९।७३१गुणोऽपि दोषता याति९१।२५गोपालेन प्रजा(पच १ २४१)१४९।२९१
गुणयुक्तोऽपि पूर्णोऽपि८१।२०गुणोऽपि नून दोषाय४६।५१गोपालो नैव गोपा (शा.प ५१६)१८४।३
गुणयुक्तोऽप्यधो (शा प ३४४)८१।२३गुणो भूष्यते (चा नी ८ १४)१७७।६४६गोभि क्रीडितवान्कृष्ण६२।४
गुणराणिमहाभार (सु २१६)४६।७३गुम्फ पङ्कजकुञ्जलयुति३१।४७गोभिर्विप्रैश्च वेदैश्च८३।३
गुणवज्जनसंपर्कार्याति (सु २१८)८१।२गुरु प्रयोजनोद्देशा१६९।७१४गोवर्धनोद्धरणहृष्ट (सु ३४)२२।१२८
गुणवतस्तव हार न२४६।२५गुरुणा स्तनभारे(सूक्ति.५४.९४)२७०।३गोष्ठेषु तिष्ठति पतिर्व३५२।३१
गुणवद्गुणवद्वा (भर्तृ २.९७)९३।८२गौरमुग्धवनिताव२६८।३६७
२८सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
गौरव प्राप्यते दा (सूक्ति.१८६.३) ६९।७घनैर्विलोक्य (कुमार १४ ३५) १२८।३९चण्डीजङ्घाकाण्ड ११।८
गौराङ्ग्या भुजला २६४।२३६घनोद्यमे गाढतमेऽ ३४०।१८चण्डीशचूडाम(सा द ७ १२) २८२।१४४
गौरीक्षण भूवरजा १९०।६९घनोऽय चेदभ्रेदुपरि २७६।३५चतुर सृजत (शा प १४९३) ३४८।१०
गौरी चम्पककलि(शा प ८१६) २२३।४८घर्मार्ति न तथा सु (हि १.९७) ५३।२६१चतुरङ्गबलो राजा ४४।१
गौरीचुम्बनचञ्चल (लटक १ १) ७।८८घासग्रास गृहाण (शा प ९२८) २३३।९७चतुर्थैऽहि ह्ला (शा प ३७५८) ३५१।३३
गौरीतनुर्नयनमायत ३६५।४४घूर्णन्ते तूर्णमेतत्कु १२६।२४चतुर्मुखो न च ब्रह्मा १८५।२४
गौरीनखरसादृश्य(शा प ५३५) १९४।१८घृतकुम्भसमा (पञ्च सू ५४) १६२।४०८चतुर्ष्वपि समुद्रे (शा प ४०२४) ३६२।३
गौरीपतेर्गरीयो गरल ४७।१५घृत न श्रूयते कर्णे १८१।१४चत्वार प्रथयन्तु (प्र राघव १ १)१५।३२
गौरीव पत्या सु(नैषध ७ ८३)२६५।३४९घृतलवणतेलतण्डुल (सु ३१८८) ६६।३९चत्वारो धनदा(भर्तृ स ४९०)१५६।१६४
गौर्गौ कामदुघा १६६।६०८घृष्टं घृष्टं पुनरपि पु ५१।२२९चत्वारो वयम् (वेणी १.२५) ३६१।४४
ग्रन्थिमुद्ग्रथयि (शिशु १० ६३) ३१५।२४घ्रात तालफला(सूक्ति ९७ ७२)१३२।३५चत्वार्याहु (भा २ २२७०) ३८०।१४५
ग्रसति कोऽपि विमो २७८।३५घ्रात्वा श्रोणीम (शा प ५८६) २०७।१८चन्दन शीतलं लोके ८६।६
ग्रसमानमिवौजसा (किरात ११ ५३) ७७।४चन्दन स्तनतटे (शा प ३७३९) ३२८।७
ग्रामतरुण तरु (काव्याल ७ ३९)३५१।२०चकितहरिणलो(का प्र १० ८७)३५०।४२चन्दने विषधरा (भल्लट ३२) २४२।१६५
ग्रामाणासुपशल्य (शा प ९१३) २३०।४२चकोरनेत्रेण दृगु (नैषध ७ ३२) २५९।८६चन्द्र समाश्रयति २१०।२९
ग्रामेऽस्मिन्पथि (अमरु १३१) ३७३।९२चकोराणा चन्द्र १०६।१५५चन्द्र चन्दनकर्द (सूक्ति.४४ ९) २९०।८२
ग्रामेस्मिन्प्रस्तर (कुव.१४९) ३५४।६७चक्रे सेव्यं नृ (शा प १३७८) १४६।१६१चन्द्रं चन्द्रार्धचूड ११४।२८
ग्रावाणो मणयो (भल्लट ५०) २१६।२६चक्र पप्रच्छ पा (शा प १२६१)११४।२६चन्द्रं कलङ्करहित २६२।१८६
ग्रासादर्थमपि ग्रास (पञ्च २.७३) ६९।६चक्रवरोऽपि सुरत्व ७६।३२चन्द्र क्षयी प्रकृति(विक्रम ९३) ५०।१९४
ग्रासाद्गलितसि (शा प १२०८) २३१।५७चक्र ब्रूहि विभो गदे १५।३८चन्द्रकान्तगलदम्बुना ३२३।७
ग्रीवाद्धतैर्वावड(नैषध ७ ६६) २६६।३०६चक्राङ्गो विरही (शा.प ३५९५) २९६।१०चन्द्रपादजनित (कुमार ८ ६७) २९९।३०
ग्रीवाभङ्गाभिराम (अ शा १ ७) २०७।७चक्रीकृतभुजलता २६९।४२६चन्द्रबिम्बरविविम्ब ३४०।३
ग्रीवास्तम्भभृत (शा प २०७) ४१।६५चक्री चकारपङ्क्तिं (सूर्यशतक.७१)२७।१४चन्द्रखण्डकरायते (शृङ्गारति १६) २७४।८
ग्रीष्मादित्यकरप्र (शा प ५८८) २०८।२७चक्री त्रिशूली न हरो १८५।३५चन्द्रश्चन्दनमिन्दुरि १३७।५९
ग्रीष्मे ग्रीष्मतरै २९१।४२चकुरेव लल (शिशु १० ६६) ३१७।२७चन्द्रादित्योरिनेत्र १७।१३
ग्रीष्मोष्मप्लोष(श प ३८५५) ३४०।१२९चक्रे चण्डरुचा समं ३४६।३२चन्द्राद्भूत्यकमण्डलो १३७।६०
ग्लानिच्छेदि क्षुत्प्र १३०।१०६चक्रेण विश्व यु(नैषध ७ ८९) २६८।३७८चन्द्राधिकैतन्मु(नैषध ७ ४४)२६१।१५६
चक्षु पूत न्य (शा प ४५५१)१५६।१४१चन्द्राननार्यदेहाय ३।४
घट भिन्यात्पट(शा प १४६८) १५४।५०चक्षु प्रीत्या (सूक्ति ७५ १०) २९५।१२२चन्द्रायते शुक्(काव्याल ८ २८)३४४।१६
घटन विघटनमयवा (सु २३९७)७०।२८चक्षुर्जाड्यमपैतु ३०७।५८चन्द्रे शीतलवल्यली ३४६।२०
घटमानकोककुचमाम् ३२७।६चक्षुर्मेचकसम्बुज २७२।५७चन्द्रो जड कदलि २५३।२२
घटितमिवाञ्जन (सा द १० ४५) २९७।६चक्षुर्लुप्तमपीकणं (सूक्ति ५८.७) ३११।२५चन्द्रोदये चन्दनमङ्ग २९८।११
घटीयन्त्रायते हारी २६६।३००चञ्चच्चन्दनखाग्रभेदवि १९।५०चन्द्रो द्वादश भास्कर २९२।३५
घटो जन्मस्थानं (शा प ५०५) ५२।२५४चञ्चच्चन्द्रिकचन्द्रचारु ६।७४चन्द्रोऽनेन कलङ्कि १२२।१७४
घण्टानादो नि (शिशु १८ १०) १२९।५७चञ्च्चेलाव्रला (शा प ३९२६) ३४७।४२चपलतस्तरङ्गै (शा प १०९२) २१६।२१
घण्टारवै रौद्रत(कुमार १४ ४७)१२९।४८चञ्चत्कर्पूरचौरा(शा प.३८१२) ३२७।३९चपलबृदये कि (अमरु ५६) ३०८।११
घनघनमपि दृष्ट्वा (शा.प ३५७३)३०९।१चञ्चत्काञ्चनशैलाव २६५।२७०चरणकमलदासस्त्वे ३०६।३४
घनघनाघनकान्ति १९५।०४चञ्चद्देवेन्द्रकुञ्जरथलि १०।१६०चरणकमल तदीय २६९।४०९
घनतरघनवृन्दच्छादिते ३४१।५०चञ्चद्रादशमील (शा प ५३२) १९१।८६चरणपतनप्रत्याख्या(अमरु ५०) ३५०।५०
घनतरघनवृन्दच्छा ३४१।५१चञ्चद्धुजभ्रमितच (वेणी १ २१) ३६७।३चरमगिरिकुरङ्गी (सूक्ति ८२ २५) ३२२।७
घनतरतिमिरघुणो(सूक्ति ६१ १३) २९९।१चञ्चरीक चतुरोऽसि २२३।६७चरमगिरिनिकुञ्जमु २९७।२२
घनसन्तमसमली (भल्लट. १८) २२९।२३५चञ्चल वसु (किरात १३ ५३) १५१।३९३चराचरजगत्स्फार (रसगङ्गाधर) १।८
घनसमयमहीभृत्प ३४१।४९चटचटिति चर्म (शा प.१२६) १९।४८चरेद्धीमानकण्टको १५०।३३८
घनसमये शिखिषु २००।४२चण्डचाणूरदोर्द (सु ३३) २२।१०५चर्मखण्ड द्विधा(भर्तृ.३ १७) ३७१।१२३

संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः

चलं वित्तं चलं चित्त ९८।५चित्रं नर्तनमम्बरे १८४।७०चेतोभुवश्चापवति २५०।१०
चल चेत पुमा ३५७।५५चित्र महानेत्र बना (रसगङ्गाधर) ३६३।१२चेतोहरा (शा प ४१३०) ३७३।१७४
चलत्कर्णानिलोद्भूत (शा प ५७) २।६चित्राभिरस्योपरि (शिशु ३ ४) १२३।३चेत्पोरादपि शङ्कसे ३५३।५०
चलत्कामिनमोनी (शा प ३२९०) २५७।४चित्राय त्वयि चिन्ति २९१।९२चेलाञ्चलेन (शा प ३९१०) ३४५।५३
चलत्तरङ्गरङ्गाया गङ्गा १८१।११चित्रास्वातीगता १६६।२८५चोलं नीलनिचोल ३५९।९३
चलत्येकेन पादे (शा प १४६३) १५४।३५चित्राखादक (पंच १ ४१६) १४९।३०३चोलाङ्गनाकुचनि ३२५।११
चलद्दूलोत्कादशनाक्षि ३४०।१चित्रोत्कीर्णाद (शा प ३४९४) २८९।५०चोली चोली न तु कल १२५।९
चलद्भङ्गीमिवा (रसगङ्गाधर) २६२।१६१चिन्तनीया हि (शा प १४४०) १५३।१७च्युता दन्ता (शा प ४२३) ७६।६
चलन्ति गिरय कामं ७७।२चिन्ता मुञ्च गृ (शा प ०५४) २३४।१३४च्युतामिन्दोर्लेखा (शा प ९६) ५।४८
चलन्ति येषा (शा प १५७१) १४३।४३चिन्तागम्भीरकू ११२।२७९च्युतोऽप्युद्गच्छति (सु ०२३) ४६।७६
चलापाङ्गा दृ (अ शा १ २०) २८३।१६०चिन्ताचक्रिणि हन्त ७९।७
चलेषु स्वामिचित्तेषु ९७।२चिन्ता जरा म (चा नी १२ ५) १५५।८२छत्रवारी न राजासौ १८४।१२
चाञ्चल्य चरणौ विहा २५७।५९चिन्ताभि (सा द ३ २०८) २८६।२८छत्र सैन्युरजोभरेण ११७।९१
चाञ्चल्यमुच्चै श्रवसस्तु ६३।२३चिन्तामोहविनिश्च (अमरु ८७) ३२९।२३छन्न कार्यमुपक्षि (मृच्छ ९ ३) १३९।५
चाटतस्क (याज्ञ स्मृ १ ३३६) १४९।२९९चिन्तासक्तनिम (मृच्छ ९ १४) १०१।१४छादयित्वात्मभावं (प्र भ १६) ३८६।३६४
चाण्डाल पक्षिणा १५९।२८०चिन्तासहस्रे (शौन नी ११५) ३८९।४७८छादित कथ (शिशु १० १९) ३१५।२२
चाण्डालश्च दरिद्रश्च ६५।६चिन्त्यते नय ए (दृ श ७) १५०।३५५छाया प्रकुर्व्वन्ति (शा प ११२३) २१९।७
चातकः खलुमा (शा.प ७७०) २११।२चिन्वच्चोरचिक्की (शा प ३६०८) २९७।३३छायाफलाने (शा प १०२०) २२०।५
चातक धूमसमू (शा प ८५७) २२६।१५१चिर ध्याता रामा ३७४।२१५छायाभि प्रथम २३६।२५
चातकश्चिचतुरा (पूर्वचातका २) ४९।१६०चिरमपि क (किरात १०.४८) २८८।३७छायामन्यस्य कुर्वन्ति (विक्रम.६५) २३६।४
चातकस्य खलु (शा प ८५४) २१२।२५चिरमाविष्कृतप्रीतिभी ११।७छायावन्तो गत (शा प ९७८) ४५।७
चातुर्य्यैककचिह्न २६३।२०६चिररतिपरिखेद (शिशु ११ १३) ३२२।३छाया वियोगिवनि ३३६।१७
चादय इति यत्र २००।४३चिरविरहिणो रत्यु (अमरु.४४) ३१९।३५छाया संश्रयते तलं (कुव ५८) ३३७।५१
चान्द्री लेखा (प्र राघव ६ ३) १९८।१००६चिरशान्तो दूरादह २३०।१२०छायासुसमृग (पंच २ २) २३६।१९
चापाचार्य्यस्त्रिपुर (बालरामायण) ३६०।३४चिरादक्ष्णोर्जा ११५।२९छित्त्वा पाशम (पच २ ८८) ९४।१०६
चामरे श्रीक (शा प १४१३) १४५।१०७चिराद्यत्कौतुकाविष्टं १०१।२छिद्रान्वेषण (शा प ३६१९) ३५७।३३
चारुता परदारार्थं ५६।९५चिराय सत्सगमङ्गु (सु ०६२) ४९।१८५छिन्न सुनिश्चितै २४२।२०२
चारुता वपुर (शिशु १०.३३) ३१५।३६चिरेण मित्र संधी १६६।५८२छिन्नेऽपि (शा प ३९८९) ३६०।१६
चारूनू पुरसणत्कृ (शा प ३६८९) ३१८।८चीत्कारैरनाश्यन्त १४३।४७छिन्नोऽपि रोहति (भर्तृ सं २४६) ४७।९३
चिकीर्षितं वि (भा ५ १०८९) ३९४।६९९चीराणि कि पथि (भर्तृ म ४९७) ७५।१५छेत्ति ब्रह्माशिरो (शा प ११६१) २७५।६
चिकुरप्रकरा जय (नैषध २ २०) २५७।१९चुम्बनेषु परिव (रघु १९ २७) ३१८।६छेदश्चन्दनचूत (नीतिसार ६) १७८।१०१६
चिता प्रज्वलिता दृष्ट्वा ४४।३चुम्बन्तो गण्ड (शा प ३९४५) ३४८।१९
चिता दहति निर्जी (प्र म.१७) ३९४।६७०चुलुकयसि चन्द्रदी २८३।१६३जगति जयि (मालती १ ३९) २७९।६९
चित्तनिर्वृतिनिधायि ३१६।६३चुलीसीमनि (शा प ३९४१) ३४८।१५जयति नैशमशी (शिशु ६ ४३) ३४४।३१
चित्तभूवित्तभूमत्त ३७४।२१३चूडापीडकपालसङ्क (मालती.१.१) ९।१२१जगति विदितमेत २४८।८३
चित्तायत्तं धातुब १७१।८१५चूडापीडाभिराम १२५।१८जगतप्रसूति (किरात ४ ३२) ३४४।२४
चित्ते निवेश्य परि (अ शा २.९) २५३।२१चूडारत्नमपानिधि २९१।९७जगतिसुक्ष्माप्रलय (सु ४) ४।३२
चित्ते भ्रान्तिर्जायते १००।६चूडारत्नै स्फुरद्भिर्वि २९८।४०जगदिव बहुलातपा २९४।४७
चित्रं कनकलताया ३६३।७चूडाशीतकरस्तनवय ९।१२५जगद्द्द्मूमू (नैषध ७ १००) २६९।४१४
चित्र कनकलताया ३६३।११चूतश्रेणीपरि (शा प ३८१२) ३२६।२७जगन्नेत्रानन्दं वद २६३।१९६
चित्रं चि (का.प्र १०.५३६) १७१।१५८चूताङ्कुरास्वादक (कुमार ३ ३२) ३३१।२९जगौ विवाहावसरे ३३१।१९
चित्रं तपति राजेन्द्र (कुव ७९) १३३।१चूताना चिर (अ शा ६ ४) ३३३।९४जग्ध्वा माषमयान ३६५।५४
चित्रं न तयदय (शा प.११४५) २२०।७चेत कर्षन्ति (शा प ३९१०) ३४५।४७जघान बाणैर्दश ३१३।४२
चेत प्रसादनजनन (सु १६१) ४०।५१जङ्घाकाण्डोरु (का प्र. ७ १५०) १३१।५०
३०सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
स्तम्भ १स्तम्भ २स्तम्भ ३
जङ्गे तदीये (शा प ३३५८) २६९।३९९जयश्रिय कृपाणीय ११५।३२जाता शुद्धकुले १८४।३९
जटा नेयं वेणीकृत (कुव २९) २८५।४४जयश्री (गीत ११ ०० ४) २३।१३८जातिमात्रेण किं (हि १ ५८) १६३।४४३
जटाभाभि (का प्र १०.१४०) ३०१।८१जये च लभते (हि.२ १७२) १४७।२२०जातियांतु रसातल (भर्तृ स २५) ६४।१५
जठरज्वलनज्वलता २२९।१८जये वरीया (शा प ३०८५) २५१।३४जातिस्तस्य न २२८।२३०
जडास्त (शा प ४१७५) ३७५।२३८जरठ इव मरालो ३२।२६जाते जगति ३५।१९
जडे प्रभवति (सु २९२) १८८।६॥३जरःशृग (म क ७ ६२) ७०।१४जातेति कन्या महती ९०।१
जडेषु जानप्रतिभाभि ४०।३१जरा हरु हर (भा प १३४१) १७५।१३३जातोऽह ३७१।१०६
जन जनपदा नित्य (हि २ ७८) १४५।१४१जरीज़म्भन्न्रौद्रद्य ३४६।२७जायन्त्याय च दुर्भु(भर्तृ स १०९) ३५५।९
जनक सानुविशेषा २३७।४५जर्जरनॄणा (आ प ८९६) २२९।२३४जात्युत्कृष्टस्य हि ८१।२२
जननी जन्म १५७।७०जलद ममुद्रसेवा २१२।१९जानन्ति (शा प १४४८) १५३।२४
जनयन्त्यर्जने दुख (हि १ १८४) ६८।८जलदपङ्क्ति (शिशु ६ ३१) ३४१।३७जानन्ति हि गुणा १५५।१२२
जनस्थाने भ्रान्त (हनु १० २४) ७३।३३जलवर जल (शा प ७६९) २११।१५जानन्नपि (पच ४.३७) १६०।३३५
जनि सरोऽङ्गादपि २४४।२२०जलवर निर्ल (मृच्छ ५ २८) २९८।७जानाति वि (भा प १०७५) ३९३।६४३
जनिता चोपने(चा नी ५ १२) १६५।५४२जलनिधौ जनन २७५।७७जानामि नागेन्द्र तव ८६।१२
जनो दुर्लक्ष्यो (शा प ३६१८) ३५६।२६जलविन्दुनि (चा नी १२ १०) १५६।५५३जानीमस्तव गौरि २८६।३०
जन्तोर्निरुपभोगस्य (दृ श ३४) १६८।६८७जलग्नोत्पत्तित्कृते २८५।१७जानीमहे (सा द १० ६३) २७३।५
जन्म क्षीरनिधौ २११।४६जलमसिषिंप श(हि १ १६५) १५३।४५७जानीमो वदन २७२।७४
जन्म क्षीरमहार्णवे २११।३८जलरेखा खल(वृ.चा १७ ९) ३९३।६६६जानीमो वयमासनस्य २७२।७५
जन्मनि केशबहु (हि १.१८६) १६३।४६३जलबिललितवस्त्र ३३९।११५जानीयात्सगरे (चा नी १ ११) १५५।९८
जन्म ब्रह्मकुलेऽप्रजो ९४।११९जलसेकेन वर्धन्ते ८०।२५जानुभ्यामुपविश्य ५८।३३२
जन्मस्थान न (शा प १२०२) २४७।६१जलाद्रीं शष्पा । ३३६।२३जानुस्थापितदर्पणं २५८।३६
जन्मान्तरीण (सा द १०.०६) ११।५जलाहुती(कथा मा १२ ४२) ३८७।३९५जाने कोप (शा प ३४५४) २८०।८९
जन्माभूदुदधौ २३७।३७जले तैल खले (चा नी १४ ५) १५६।१३८जानेऽति (नैषध ७ ३९) २६१।१५१
जन्मिनोऽस्य(किरात ११ ३०) १६१।३७३जलाकयो (काशीखण्ड३८ ८५) ३८८।२८४जाने युष्मत्प्रयाणे १२६।२३
जन्मेन्दोरमले (वेणी. ६ ७) ३६१।३६जलौका के(काशीखण्ड३६ ८६) ३८४।२८५जाने रात्रिशु २६७।३४५
जन्मैव मास्तु यदि ३५२।३०जत्पन्ति मार्य (चा ना १६ २) ३४८।५जाने खन्न्र (म क ५ १६९) २८१।१९९
जन्मैव (शा प ४१४९) ३७४।२०५जद्यो हि ससे (वानराष्टक ८) १७४।८९७जामाता जठर १५७।१६९
जम्बीर वा कमल २६५।२९२जहाति सहसासन ७२।५७जामाता पुरुषोत्तमो ९४।१०२
जम्बीरश्रियमति (रसगङ्गाधर) २६५।२८९जहीहि कोप (किरात ८ ८) ३०८।९जायन्ते नव सौ १९३।९४
जम्बुद्वीपगृह १२२।१८६जहीहि गुरुगर्जिन २३२।७९जालान्तरप्रेषित (रघु ७ ९) १२६।३५
जम्बूफलानि पक्वानि १८१।२२जाग्रत (शा प ३३६१) २६९।४०४जाल्मो गुरु २३४।१४१
जम्भारातीभ (सूर्यशतक १ २) २७।११जाड्य धियो हरति (भर्तृ स ४२) ८७।२९जाह्नवी मूर्ध्नि पादे वा १३।१
जम्भारिरेव (शा पू ११६९) २८५।१०जाड्य हीमति (भर्तृ स २४) ६१।२६३जिप्रत्याननमिन्दु २७१।५६
जयति जटाकिजल्कं ४।२२जात कूर्म स (भर्तृ स २४८) ९८।११जितरोषतया (शिशु १६ २६) ४९।१५६
जयति परिमुषित ९।१३५जात केलिकलावती २३८।६०जितेन्दुपुद्गलावण्य २६२।१६०
जयति प्रियापदान्ते ४।१८जात सूर्यकुले पिता(धर्मवि १०) ९३।१०१जितेन्द्रियत (का प्र १० १३९) १०३।६१
जयति मनसिज २५०।१जात स्तम न २२०।१०जितेन्द्रिय (किरात ?) १७३।८६९
जयति ललाटस्फाल ९।१३८जानमात्र न (पच १ २५६) १७७।१९६जिते लक्ष्मीमृते १५०।३५१
जयति स नाभि (वेणि [पा १] १०) १७।६जानश्च नाम न विन ७०।३५जिह्वो लोके कथ ६१।२५८
जयति स भग (वेणी [पा] १.२) १४।४जास्तस्ते निशि ३५६।१६जिह्वादूषितसत्पात्र ५५।७९
जयत्युपेन्द्र स चकार १७।१७जाता पक्क (मुरारि) ३२५।५५जिहायाश्छेदन (शा प ४०३१) ३६३।१
जयन्ति जगता मातु १६९।१जाता प्रासादपत्री २९८।२१जिहे लोचन (शातिश ४ १२) २७४।१००
जयन्ति जितमत्सरा ५२।२५५जाता नोक्त (अमरु ८८) ३११।३२जिह्वारलोल्यप्रस (पच २ ३) १६४।५२०
जयन्ति ते पञ्चमनाद ३२।३०जाता लता हि शाले (कुव ८२) ३६३।९जिह्वैकव सतामुखे ८३।४
जयन्ति ते सुकृ (शा.प.१६६) ३२।१जाता शिखण्डिनी ३५।२७

सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः३१


जीयादम्बुवितनयावर(कुव १२१) १४।१३तद्वितथमवा (शिशु ११.३३) ३०९।२
जीयासु शकुलाकृते (शाप ८१) १७।७झगिति जग (प्र राघव १ ११) ११९।१२५तदाखण्डलाशा २५१।८०
जीर्णमन्त्रं प्रशं (मा ५ १०५०) १६२।८१०झञ्झानिलोऽपि ३२५।१३तदा तदङ्गस्य (शाप ३३७९) २७०।२९
जीर्णा तरि सरि २८६।४१झग्झर्णितकङ्कण १३१।११३तदात्वप्रोन्मीलन्म २५५।३२
जीर्णेऽप्युत्कटकालकूट (हनु ९ ३६) ६।७८तदात्वज्ञाताना (शा प.३८३४) ३३६।२२
जीर्णोऽपि क्रमही २२९।६टिड्डाण्डद्वयसङ्क्रुद्धोऽसि ७२।१तदा मुग्धं वक्रं २७९।७६
जीवञ्जीवयति हि यो ७०।२५तदा रम्या (किरात.११ २८) १६०।३७१
जीवति (शाप ३७५५) ३६०।१९ढक्कामाहत्य मद ३५१।२४तदीयजघनाभोग २६८।३८४
जीवनग्रहणे नम्रा (कुव २५) ५५।५१तदीयत्रिवलीमार्ग २६७।३३०
जीवन्त मृत (वृचा १३ ९) ३९२।६६७त वन्दे पद्मद्मद्मान (शाप ८५) १६।१तदेवाजिह्माक्ष (शाप ३५३८) ३१०।१५
जीवन्तोऽपि (पच १२८९) १५५।१२३त एव पदविन्यासास्ता २०।६तदेवास्य पर मित्र यत्र ८८।९
जीवन्त्यर्थक्षये ६६।३१त एवामी वाणान्तदपि ०३।९३तदोजसस्तद्यशस (नैषध १.१४) १३९।४
जीवन्नेव (शाप ३१६७) ३६०।१४तक्षकस्य विषं (वानी १७८) ५४।३८तद्वृह यत्र वमति १६६।५७४
जीवन्नपि न तत्कर्तुं ५६।११०तटमुपगतं पद्मे ३४८।१९९तद्दिव्यमव्यय वाम ३।३
जीवाकृतिं स चक्रे १३९।१२४तटस्थै ख्यापिता (वृश ६२) १६८।६९६तद्भोजन (वृ चा १५८) ३८७।३८६
जीवामीति (शाप ३४४२) २८७।७तटिनि चिराय विचा २१८।१तद्गेदोऽन्तरक्षत २९५।६५
जीवितं तदपि १७१।८१०तडिन्मालालोलं (शातिश ६२) २६८।८७तद्व प्रमाष्टुं विपद प्र ११।१४
जीवित इव कण्ठगते ४।२९तल्लेखेखा नेय (प्रराघव १३५) २७३।१६तद्वक्ता सदसि ब्रवीतु ८६।१५
जीवेति प्रब्रुव (पच १५४) १४८।२६१तत कुमुद (भा द्रोण ८४०८) २९९।१तद्वक्त्र नेत्रपद्मं २६९।४२१
जीवेन तुलितं प्रेम २७५।२तत कोकवधू (शाप ३७३३) ३२७।१तद्वक्तं यदि(बालरामा २ १७८) २७१।५१
जुम्भाबर्जरडिम्ब (मालती ९ १६) १४०।४तत परामर्शविरुद्ध ३६५।२तद्वकाभिमुख (अमरु ११) ३०९।१२
जुम्भा निष्ठीवन १५०।३२९ततश्चामिज्ञाय (अमरू ५२) ३५७।५४तद्विच्छेदकृशस्य २८२।१४२
जुम्भारम्भप्रवित (वेणी २ ८) ३२४।४४ततोऽरुणपरि (वाल्मीकि) ३२३।१तद्वियोगसमुत्थेन २७७।७
जुम्भाविस्तृतवक्त्रपङ्कज १७।१०तत्कार्क त्वयि २२८।२०८तनुता तनुता नीता २०५।३
जेतुं यस्त्रिपुरं हरेण २।२५तत्कालारभटीविजृम्भण ६।७३तनुत्यजा वर्मभृ (रघु ७ ४८) १२८।३१
ज्ञातं ज्ञाति (शाप ३६१६) ३६३।५४तर्किं कामपि (गीत ७ १४ १) ३५८।७५तनुत्राण तनुत्राण (दश ४ २८) १२७।१
ज्ञाता मैत्री सहज ३५३।४०तर्किं काव्यमनल्पपीत ३२।४तनुह्हाणि (शिशु ६.४५) ३४४।३३
ज्ञातिभिर्विन्ध्यते (गुणारत्नावली १२) २९।५तर्किं स्मरसि न २२५।१२६तनुग्ना इव ककुभ २९७।४
ज्ञातु वपु परि ३७९।८५तत्कुचौ चरत २९४।२६१तनुस्पर्शादस्या २५४।३८
ज्ञानं सतां (भर्तृ ३८३) ३८६।३८५तत्कृत यन्न (शाप १२४९) १२२।१७८तनोतु ते यस्य फणी १९६।९
ज्ञानविद्याविहीनस्य ३९।१२तत्तद्दिग्जैत्रयात्रोद्धुर १२६।२०तन्त्रावाप (शिशु २ ८८) १४७।११०
ज्ञानाब्धिश्चिरचण ४२।४तत्तद्ददत्यपि (शाप ३५३६) ३५७।४७तन्त्रातुन्दिलशोण ३२२।३०
ज्याकृष्टिबद्वखटका (अमरु १) ११।१९तत्तस्या कमनीय २५६।५३तन्नास्ति (शाप ३६९४) ३२०।१२
ज्याघात का(प राघव ३ १०) ११४।२७तत्तादृक्तृणपुलकोप १४।१८तन्नितम्बस्य (शाप ३३५२) २६८।३७१
ज्यायासम (मा १३ २६१०, १६०।३३९तत्तेजस्तरपेर्निदाघ २७१।१४९तन्मङ्गलं ३८५।३१५
ज्योति शास्त्रमहोदधौ ४४।६तत्त्वं किमपि (रसगङ्गाधर) ३२।१६तन्मूलं गुरुताया (शाप ३२०) ७५।१३
ज्योतिस्तमोहरमलोचन ३।१०तत्र मित्र न (हि १ १०६) १६७।६३१तन्वङ्गया (शाप ३३४०) २६४।२४८
ज्योत्स्नाचय पय (साद ७८) २९९।७तत्पादनखरखाना २६९।४२०तन्वङ्गया गुरु (अमरू.९६) २७६।५०
ज्योत्स्नाभस्मच्छुरणध (कुव ५४) २९६।६तथा न पूर्वं (किरात ८ ४१) ३३८।८४तन्वन्ती तिमिरद्युति ११६।६१
ज्योत्स्ना (काप्र १०४७२) २९१।९४तथा पौरस्त्याया ३०१।८२तन्वि त्वद्वदन(प्र राघव ७ ६५) ३१३।७८
ज्योत्स्नी श्यामलि २८०।९९तयारिभिर्न व्यथते ५९।२२२तन्वी चारुपयोधरा १८६।१४
ज्योत्स्नेव (काप्र १०४११) २५१।१८४तथ्य पथ्य सहेतु ८५।१७तन्वीमुज्झित (शाप १२७२) १३२।३०
ज्वलति चलिते १७०।७४८तदङ्गमपि नाम २८०।८८तन्वी शरत्त्रिपथ (अमरु १३५) २७१।३८
ज्वलतु (मालती २२) २८४।२४तदपकृत विधि ४८।१९६तन्वी श्यामा २७१।४९
ज्वलितं न (किरात २२०) ८०।३२तन्वी सा यदि २८०।९६

३२ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां


तप सीमा मुक्ति (प्र भ १०)३८३।२४२तव तन्वि तरुणपुण्या३१८।५ताडिता अपि (पच ४ ५६)३४९।२८
तपति तनुगात्रि (अ शा ३ १३)२९१।५तव नित्यमुत्सव१०५।१३४ताडितोऽपि (पच १ ९७)१४४।८९
तपनस्तपति स्म३४७।६तव निर्वेणीदृष्टणं१०३।५१तात क्षीर (शा प १११७)२१८।८०
तपखिनोऽप्यन्त२०२।८३तव विरहमसहमाना२८८।१२तात त्वं निजकर्म३६३।४०
तपस्वी का गतोऽवस्था११।६तव विरहे मलय२८८।२५तातं तत्तातात कनय७।९८
तपापाये गोदापरतट१८४।४६तव विरहे विबुवदना२८७।५तातार्थमन्त्रिसुत१५२।४०७
तप्तं केर्न तपोभि२११।२४तव विरहे हरिणाक्षी२८८।२३तातेन कथितं पुत्र१८८।३९
तप्ता गामिव सस्रुषु१२५।११तव सा कथासु (शिशु ० ६४)२८८।२८तादृक्सप्तसमुद्रमुद्रित६।८०
तप्ता मही विरहिणा३३६।१६तवाग्रतो वीर१०४।१०९तादृग्दण्डविवर्ते१३३।४०
तप्ते मङ्गाविरह (अमरु ८६)२७८।३७तवाङ्गने सुन्दर (शा प १२६५)११६।६२तादृग्धीर्धविरित्रि (भाव १ ८)१३४।१८
तम स्तोम (शा प ३५२१)२७१।४३तवानन सुन्दरि फुल्ल३१२।३९तादृशी जायते (चा नी ६ ६)९१।२१
तम स्तोम भृश२५७।६तवारिनारीनयनाम्बु१३३।५तानि तानि कमलानि२१९।४
तम स्तोम सोमं३२०।१५तवाद्ववादिन क्लीबं१५०।३४६तानि प्राब्धि२६३।२०४
तमद्दढे (शिशु ३ ६०)१२२।४तवाहवे (का प्र १० ४५६)१०४।९५तानि स्पर्श (गीत ० ७ १५)२८०।९७
तमसि वर। (शा प ४०४७)३६४।२८तवेद पश्यन्त्या (गीत ८ १८ १)३०९।४तानीन्द्रियाण्य (पच ५ २८)६५।१६
तमांसि ध्वसन्ते५२।२४७तवैतद्वाचि (शा प ८८२)२२५।११६तापं लुम्पसि२१३।७१
तमाखुपत्रं राजेन्द्र१००।१तवैव प्रावीण्यं जलद२१३।५५तापनैरिव तेजो२९३।२
तमृषिं मनुष्यलोक३६।४९तवैष विन्दु (शा प ३३१०)२६१।१३७तापापहे (शा प ११६८)६३।२७
तमोगगविनाशिनी३।१२तवोपकोष्ठस्थित२६५।२८२तापो नापगत (शा प ९२३)२३२।८४
तमोभि पीयन्ते३२४।३८तस्करस्य कुतो (वृ चा ९ ११)१६८।३९१तापोऽम्म प्रसर्र्तं२९०।८३
तया गाढ मुक्तो२७९।७५तस्करेभ्यो (हि २ १०९)७४।२०७तामनङ्गजय (का प्र ७ ३२२)२७३।७
तरङ्गय दृशो (विद्ध ३ २७)३०६।३८तस्मात्सभ्य (शा प १३४६)१४६।१५१तामिन्दुसुन्दर (मालती १ २१)२७८।४७
तरत्तरलतृष्णेन३७४।२०६तस्मात्सर्वप्रयत्नेन (पव ४ ५०)३४८।२५ताम्बूलं (शा प १४१६)३८५।३२५
तरुकुलसुषमापहरां२१५।२तस्मान्महीपतीनाम३६४।३१ताम्बूलरागोऽश्वर३१२।३६
तरुणतरणि (शा प ३८३९)३३६।३९तस्मिन्गताद्र्धाभावे५८।१९७ताम्बूलाक्त दशन३५३।३९
तरुणतमालकोमल३०४।१६१तस्मिन्वन्धुशरे स्मरे२८०।९८ताम्बूलेन विना१०२।४९
तरुणा दिवाकरमयूख३२३।९तस्मिन्युद्धे (शा प ४०१९)३६३।१तारतारतरैरूत्त (शा प ५४४)२०५।२
तरुणिमनि (का प्र ४ ११०)२७०।१७तस्या सुननुमरस्या२७८।२४तारल्य मुखमेलने३५८।६२
तरुणिमनि कृ (का प्र.१० ९०)२५१।३२तस्या कचभरव्याजा२५७।६ताराक्षतान्य्रवि३०१।७०
तरुणिमसमा (नीतिस ७७)३८७।४१६तस्या कि मुख२८२।११७तारागणश्चन्द्रमस२९०।१८
तरुण्यालिङ्गित क(शा प ५२०)१८४।८तस्या पद्म (शा प ३३५५)२६८।३८२ताराधिनाथमभिजित्य१२३।६
तरुमूलयुगेन (नैषध २ ३७)२६९।३९१तस्या (गीत १२ २३ ४)३२८।१७तारानायकशेखरा (रसगगाधर)६।८१
तरुमूलादिषु (शा प९२१)४७।८८तस्या पादनख (बिल्हण)२६९।४१९तारापते कुमुदिनी२८२।१४५
तरौ तीरो दूते (शा प ८०३)२२१।२४तस्या प्रविष्टा (कुमार १ ३८)२२९।२४८ताराविष्णूरणत्वित्१९८।४४
तर्कै तर्केशवक्त्रवाक्य३४।६१तस्या शलाका (कुमार १ ४७)२५८।५७तारुण्य तरुणी१७९।१०३४
तर्केषु कर्कशतरा३३।३७तस्या श्रवणमार्गेण२५९।६७तालं प्रभु स्यादनु२६५।२७६
तर्तु पर्वतसनिभेन१८४।६६तस्या सान्द्र (अमरु २६)३११।२६तालीतरोरसु (शा प १०२५)२४१।१३५
तल्वेक्ष्यते (भा १२.४।४८)३८८।४३४तस्या महा (शा प ३४७९)२८८।४०तालीदलं (शा प ३३०७)२६०।१२५
तल्पीकृताहिरगणित१६।४तस्या मुखस्याति (हर्ष)२६२।१७९तावका कति न१०४।८७
तल्पे प्रभुरिव३५१।२३तस्यास्तुङ्गस्तन२६४।२६३तावच्चकोरचरणा२२५।१३५
तल्पोपान्तमुपेयुषि३५८।६६तस्येवाभ्युदयो (शा प ७३९)२०९।३तावज्जन्माति (पच १ २८८)९७।८
तव करकमलस्था स्फा३।११ता जानीया परिमित३५९।८३तावतकर्णाध्वयाता९।१३४
तव कुवलयाक्षि३१२।३१ता हेमचम्पकरुचिं२७८।५२तावकविविहंगाना (शा प १८७)३६१।३५
तव कुसुम (अ शा २.३)२८२।१३६तादृङ्मस्या (शा प ३३०८)२६१।१३२तावतकुलश्रीमर्यादा३५०।८

सस्थाननिर्देशानुक्रमकोशः ३३

प्रथम स्तम्भद्वितीय स्तम्भतृतीय स्तम्भ
तावत्कोकिल (भामिनी.अ ६) २२५।१२७तुङ्गात्मना तुङ्गतरा (सु २५९) ४९।१६४तृष्णे देवि नम (पच ५.७७) ७६।८
तावत्सप्तसमुद्र (शा.प.१०९७) ७।९६तुङ्गाभोगे स्तन २६६।३२१ते कौपीन (शा प १२२४) १०८।१९४
तावत्सन्ति सहाया (सु ३१८३) ६६।३७तुच्छान्तरराध्यास १०४।१०७ते क्षत्रिया (शा प ३९७९) ३६०।२१
तावत्सर्वगुणालय ७४।४१तुभ्य दासेर (सूक्ति २४ १) २३४।१२६ते चापि (मा १२ १२५४२) ३८०।४०६
तावत्स्यात्सर्वं (पच २ १५०) १६५।५३४तुरगशतसहस्रं गो(पद्मप्रसङ्ग १४) ६९।२६तेज क्षमा (शिशु २.८३) १४७।१८५
तावत्स्यात्सु (पच ५.६२) ३४९।३३तुरङ्गसादिनं श(कुमार १६ ४३)१२८।२०तेजस्विनि (शा प १३३९) ७९।९
तावदाश्रीयते (किरात ११ ६१) ७९।११तुरङ्गी तुरगःरू(कुमार १६ ४१)१२८।१९तेजस्विमध्य (शिशु २ ५१) ७८।६
तावदेव कृतिना (भर्तृ स.७७) २५१।३३तुलाधारो वाता १०६।१६२तेजांसि यस्य प्रथमं २२७।३
तावदेव विदुषा २५१।३१तुलामारुह्य रवेिणा (सु २४०८)१०१।११नेजोजहीने महीपाले ७९।१०
तावद्गर्जन्ति (सु ५८८) २३५।१६१तुल्य परोपतापित्व ४६।६६ते तीक्ष्णदुर्जंन ३६८।३५
तावद्गर्जन्ति (शा प १५७४) १४३।४९तुल्यं भूमृति (शा प १२०४) ९४।११२ते ते चातकपोतका २१३।७०
तावद्गुणा गुरुत्वं च (सु.३२५२) ७६।२६तुल्यरूपमसि (किरात ९ ६१) ३१६।५३ते दह्निमात्र (का प्र ६ १४०) ५९।२३४
तावद्व्याद्धि (हि १ ५७) १६४।५००तुल्यवर्णच्छद (भोज २६९) २२८।२०५ते धन्या पुण्यभाजस्ते ७५।९
तावद्विद्यानवद्या गुणगण ८९।४तुल्यार्थं (पञ्च १ २७१) १४६।१५६ते धन्यास्ते (पच १ २८५) ३२।९
तावन्महता महती ७३।२५तुल्येऽपराधे (शिशु २ ४९) ७८।४तेऽनन्तवाङ्मयमहा (सु १८२) ३३।२९
तावन्महत्त्वं (भर्तृ स २५१) १६६।५९४तुषारधवल स्फूर्ज १९५।२तेनाधीत श्रुत तेन ७६।११
तावन्मौनेन (वृ चा १४ १८) २२५।१२१तुष्यन्ति भोजनै(चा नी.६ ९)१५९।२७२ते पिबन्त. (मा ३ १२८५७)३९३।६५२
तास्तु वाच सभायोग्या (प्र भ ८) ८४।१तुष्यन्तु मे छिद्रम २८७।३ते भूमिपतयो जयन्ति ३४।५५
तिग्मरुचिप्रतापो(का प्र ४ ५५)१०३।७२तूणीरबन्वपरिणद्ध १२७।१८ते मीमांसाशास्त्रलोक ४३।१
तिमिरेऽपि दूरदृश्या ३५२।१८तूणेव मधुमासे १९४।३५ते मूर्खेतरा लोके (सु ४८३) ७२।४५
तिरोहितान्तानि (किरात ८ ४७)३३८।९०तूर्णं चाहं वरं मन्ये नरा ७४।४ते वन्द्यास्ते कृति (भोज १२१) ४८।१३६
तिर्यक्कण्ठ (गीत ३ ७ १६) २५१।७०तूर्णं ब्रह्मविद (चा नी ५ १४)१६७।६३३ते साधवो भुवन (पद्म उ ३७ ७) ५०।२१३
तिर्यक्त्वं भजतु ६३।३५तृणमुखमपि न २३३।१००तै सर्वैज्ञीभवद ३०१।९०
तिलार्धं स्वीय (चाणक्य ६६) ३९४।६८९तृणादपि लघुस्तूल (शा प ४००) ७३।५तोयं निर्मथितं घृताय ४१।६९
तिष्ठता तपसि पु (किरात.१३ ४४) ८३।१तृणानि नोन्मू (पच १ १३३)१७४।९०७तोयानामधिपति २१६।१५
तिष्ठार्जुनार्थ सङ्ग्रामे १८१।५तृणानि भूमि (पच १ १८४) १६३।४४४तोयैरल्पैरपि (भामिनी अ २८) २४७।४७
तीक्ष्णं रविस्त (शा प ३९०७) ३४५।३९तृणैरावेष्ट्यते रज्जु १४४।८४त्यक्त जन्म (सु ६५४) २३३।११८
तीक्ष्णधारेण खड्गेन ७३।१५तृणोल्कया (मा ५ १२३०) ३८८।४३७त्यक्तप्राणं (शिशु १८.६१) १३०।९१
तीक्ष्णाग्रहेतिहतिभिः १४३।५६तृप्तियोग (शिशु २ ३६) १४६।१८३त्यक्तो विन्ध्यगिरि २७०।९३
तीक्ष्णादुद्विजते मृदौ(मुद्रा ३ ५) ६३।३२तृप्त्यर्थं भोजनं १६६।५९८त्यक्त्वापि निज ५६।११७
तीक्ष्णा नारुंतुदा (शिशु २ १०९) ८५।२तृप्त्या नद्य कमल २१३।५८त्यक्त्वा युवा ६४।१४
तीक्ष्णोपायप्रान्तगम्योऽपि ३९४।६८३तृषा धराया (शा प १०८८) २१६।१२त्यक्तवालसान् ३८५।३१७
तीरस्थलीबर्हिभि (रघु १६ ६४) ३३७।६५तृषार्ते सारङ्गे (शा प १२०५)५२।२४४त्यज किंशुक २४२।१६८
तीरात्तीरमुपैति (शा.प ३५९७)२९६।११तृषा शुष्य (शा प ४१४८) ३७१।१३१त्यज चक्रवाकि २२७।१७९
तीर्थसेवनमौ (राजत ६ ३०९)३८०।४२४तृष्णाखनिरगाधे(सूक्ति १२६ २) ७५।२३त्यजत मानम (रघु ९ ४७) ३३२।५७
तीर्थस्थित (राजत ५ ३०४)३९४।६७४तृष्णा चेह परित्यज्य (हि १.१९०)७५।३त्यजति च गुणा ५७।१५०
तीर्थनामवलोकनं परि ९८।६तृष्णा छिन्धि भज(भर्तृ स.४४)५३।२७३त्यजति (शा प १५४५) १६९।७२८
तीव्रे तपसि (शा प.१५१६) १५४।७१तृष्णापहारी विमले १०२।२२त्यज निज (शा प.११०४) २१८।६९
तीव्रो निदाघस (शा प ९७५) २३६।८तृष्णाकोल (रसगगाधर) २६१।१०१त्यजन्ति मित्राणि (वृ चा १५.५) ६४।१०
तीव्रोऽयं नितरा २३७।३०तृष्णा हि चेत्परित्य (हि १.१९०)७६।१८त्यजसि यदपि १३५।२४
तीव्रोष्णदुंविषहवीर्य ७९।१९तृष्णे कृष्णेऽपि ते ७५।२त्यजेत सचयास्त(मा.३ ९४) ३८८।४३२
तुङ्गत्वमितरा (शिशु २ ४८) ७९।१५तृष्णे त्वमपि (शा प ४२४) ७५।७त्यजेल्लघुधातौं १७२।८३८
तुङ्गब्रह्माण्डसिंहासन १३८।८९तृष्णे देवि (शा प ४२०) ७५।१त्यजेत्स्वामिनमप्यु १५७।२०२
५ सुभा०अनु०त्यजेदेकं (चा.नी.२.१०) १५३।३३

| सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां || | :--- | :--- | :--- | | ३४ |||

त्यजेद्धर्मं दया (वृ चा ४.१६) ३८८।४३१त्वत्कीर्तिराजहंस्या १३४।७त्वय्यागते किमिति (कुव २०) १२५।७
त्याग एको गुण श्लाघ्य ६।४त्वत्कीर्तिर्धनिका १२१।१५४त्वा चित्तेन (गीत ११.२२ १) ३०८।१९
त्यागभोगविहीनेन (शा प ३८५) ७१।५त्वत्खङ्गखण्डित (रसगगाधर) ११४।२४त्वा पातु नीलन २२।१२६
त्यागो गुणो गुण(विक्रम १९६)३८३।२६९त्वत्खड्गाघातजात १३४।२८त्वामजनीयति २८८।४४
त्यागो गुणो वित्तवता (सु ५०८) ७०।१८त्वत्तेज प्रतिभाम १३७।५८त्वाम (गीत पा १२ २४ ९) २५१।७७
त्याज्यं न धैर्यं(पच १ २१६)१७२।८४१त्वत्पत्रमुक्तविशि १३०।१०९त्वामयमाबद्धाञ्जलि (दशकु उ २) ३०५।९
त्याज्यं सुखं (प्रव २९) ३८३।२७०त्वत्प्रतापतपनातपतस १३२।६त्वामालिख्य (मेघ २ ४४) २९२।५४
त्रयोऽप्यन्यत्रयो (शा प १७४) २५।२०त्वत्प्रतापानर्घहेम १३३।४त्वामुदर साधु म (शान्ति.१ २४)७६।३०
त्रय्यन्तसिद्धान्जन ३६७।२४त्वत्प्रत्यर्थिवधूंघरे (कुव १७१) १३२।३६
त्रात काकोदरो येन (कुव ६५) २१।९६त्वत्प्रारब्धप्रचण्ड ११२।२८०दंष्ट्रासङ्कटवक्त्र (शा प ४०६६) ९९।५१
त्रातुं लोकानि(सूक्ति १०९ ७)१०७।१७६त्वदङ्गमार्दवे दृष्टे कस्य (कुव ४५)३१२।८दक्ष श्रिय (हि ३ ११३) १७०।७७४
त्रासहेतोर्विनी (हि २ १२३) ३८८।४२८त्वदरिनृपतिकेली १३१।१३दक्षता भद्र (काम नी ५ १५) ३८५।३३१
त्रिजगद्दहनल्लङ्घन १३५।१८त्वदरिनृपतिमाशा १३१।१२दक्षिणाशाप्रवृत्तस्य (शा प ३९७) ७३।३
त्रिनयनचूडारत्न (शा प ५४१) २९९।११त्वदीयमुखपङ्कज २९१।१३दग्धं खाण्डवमर्जुन ६७।६७
त्रिनयनजटा (शा प ३६३०) ३०१।८४त्वद्वाणेषु यमो १०९।२१८दग्धं दग्धं (महा ना २५२) ३८६।३६२
त्रिलोकेश शार्ङ्ग (विक्रम २२९) २३।८९त्वद्वाहोद्भूतधूल्य ११४।२२दग्धा सा (शा प ८३२) २२४।१०३
त्रिविक्रमोऽभूद् (नीतिसार ५) १७३।८७५त्वद्यशोजलधौ (भोज २०९) ११७।८१दग्धो विधिर्वि (शा.प.३२६५) २५३।८
त्रिविधा (शा प १३६६) १४६।१५५त्वद्रूपामृतपान (सूक्ति ४५ ७) २९२।२९दत्तं मया २६७।२५८
त्रैलोक्यत्राण (शा प ४०८४) ३६६।१२त्वद्वक्त्रसाम्यमय (कुव ९०) ३१३।५६दत्तमात्तवदनं (शिशु १०.२३) ३१५।२६
त्रैलोक्यभूषणमणि (सु १८३) ३३।४०त्वद्वर्तुलस्थुलसुवर्ण ३१३।४१दत्तमिष्टतमया (शिशु १० ६) ३१४।९
त्रैलोक्याभयलग्न १११।२५४त्वद्वाजिराजिनिर्धूत १२५।३दत्ते जनोऽसौ खलु ३३१।१८
त्रैलोक्ये नोप १८७।२०त्वद्विरहमसहमाना १८९।५२दत्तोऽस्या (अमरु ६) २९९।९६
त्रोटीपुट करट २२८।२११त्वद्विरहे विस्तारितर २८८।१४दत्त्वा कटाक्ष (सा द १० ८०) २७७।१०
त्वं चेत्कल्पतरुर्वयं १२१।१५२त्वद्वैरिणो वीर (शा.प १२७८) १३१।७दत्त्वा दिशि (शा प.४०३७) ३६४।२३
त्वं चेत्सचरसे(काव्यप्र.१० ४३) २४५।५त्वद्वैरिवनचलि ११८।१९८दत्त्वा धैर्यभुजंग ३५८।७८
त्वं चेज्जीवजनानुराग ८०।४१त्वन्मुखं कम(काव्या २ १९०)३८७।४१२ददत मन्तरिता (शिशु.६.४१) ३४४।२९
त्वं जामदग्न्य जन २४५।७त्वमद्य सिन्धो २१६।१३ददतो युच्य (भोज १०५) १५९।१९२
त्वं तावद्वहुवल्लभ (शा प ३५७१) ३०९।३त्वमिव पथिक (रसगगाधर) ३५४।७०ददाति प्रति (पच २ ५१) १६०।३०६
त्वं दूति निरगा कुञ्ज २९३।४त्वमुचितं नयना २८२।१३४ददृशेऽपि (शिशु ९ २३) २९७।१९
त्व दूरमपि गच्छन्ती २९१।१त्वमेव चातका (शा प ७८२) २११।५ददौ रसात्पङ्कज (कुमार ३.३७)३३१।३२
त्व दित्राणि पदानि (सु २५१६) ११३।८त्वमेव (सर्वस्वटी १६ ७५१) ३९४।७०५दद्यात्साधुर्यदि (पच १ ३९७)१७८।९९९
त्वं नो गोत्रपति १८३।६७त्वमा नीलो (काव्या २ १०६)३८७।४२६दधति कुहर (मालती ९.६) १४।१३
त्वं पीयूष दिवो २६१।१५४त्वया मम समेतस्य २९१।३दधति तावदमी (शान्ति २ ५) ३६८।३७
त्वं भो शंभोर्निंब २१०।३४त्वया वीर गुणाकृष्ट्या १०१।४दधति न जनास्तस्मै (सु ३१९०) ६७।६१
त्वं मुग्धाक्षि (अमरु २७) ३२०।४९त्वयि दृष्ट (का प्र.१०.४५५) २८८।२२दधति स्फुटं (शिशु ९.६६) २८८।३०
त्वं राजा वय (शा प २०४) ८०।४२त्वयि दृष्टे (सा द १०.५०) २८७।२दधत्यधरचुम्बनं ३४७।४४
त्वं विनिर्जितमनो २८८।३४त्वयि निबद्धरते ३०५।१८दधान प्रमाण(भामिनी अ ३१) २३८।७३
त्वं सामान्यतरु २४०।१३१त्वयि प्रचलति प्रभो १२५।८दवि मधुर मधु १७०।७६६
त्वत्क्षांसुरुधिर ३७१।१२२त्वयि लोचनगोचरं (कुव १७१)११५।४२दधौ हरि कं शुचि २००।५२
त्वच समुत्तार्य २५९।८५त्वयि वर्षति (भोज १८७) २११।३दन्तप्रभा (सा.द १०.५६) २७०।७
त्वञ्चित्ते भोज ११७।७४त्वयि सगर (सा द.१० ७७) १०२।४०दन्तस्य निष्कोष (पच १ ७७)१७२।८३७
त्वच्चिन्तापरिकल्पितं २९०।७१त्वयि सति शिवदातर्य (कुव ५४) ७०।३७दन्ता सप्त (शा प ९६४) २३५।१४६
त्वत्कीर्तिं शशिन १३७।६९त्वय्यधर्मासनभाजि ३६१।४१दन्ताग्रनिर्भिन्नाहि (शिशु १२ ४७) २।१८
त्वत्कीर्तिर्मौक्तिक १३५।१९दन्ताश्चलेन धरणीत २।१९

संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः ३५

दन्तानामधर (शिशु ८ ५५) ३३९।११२दहनजा न पृथु (नैषध ४ ४६) २८४।१५दारा परि (शा प ४१४०) ३७१।१२६
दन्तालिदाडिमीबी २६०।११५दहमाना (शा प ३७५) १,४।२५दारार्यजितिप (सु ३२०४) ६८।८६
दन्ता विश्लथदन्ता. ७६।२९दह्यमानेऽपि (शा प ३४०२) २७५।१दारिद्र्यदायादगणा १०४।१९१
दन्तिदन्तसमान हि ४५।३२दाक्षिण्य खजने(सु २९४६) १७९।१०३९दारिद्र्य भोस्त्व परम ६६।४१
दन्वीन्द्रादाना १२८।४४दाक्षिण्यं नाम (मालवि ४ १४) ३०५।४दारिद्र्यशीलोऽपि १००।२
दन्तै. प्रस्थितम ३७५।२२६दाक्षिण्यं मलया २८४।३३दारिद्र्य शोचा (मृच्छ १ ३८०) ६६।४२
दन्तैरुच्चलित धिया ७७।५२दातव्यमिति यद्दानं (हि १ १६) ६९।९दारिद्र्यस्य परा (पञ्च २ १६७) ७६।१७
दन्तैर्हीन शिला १८५।१६दातव्य भोक्तव्य (शा प ४६९) ६९।१७दारिद्र्यात्पुरुषस्य (मृच्छ १ ३६) ६८।७३
दन्तौ कोरकितास्सि तै १६।८दाता क्षमी (हि ३ १४०) १८४।२४४दारिद्र्याद्व्रियमेति (मृच्छ १ १४) ६८।७१
दमेन हीनं (पञ्च सृष्टि अ.१९) ३८४।२९५दाता दानस्य १७२।८१७दारिद्र्यानलसत प (भोज १९३) ७३।१०
दम्पत्योर्निशि (अमरु १६) ३२८।१९दाता न दापयति ५०।१९८दारिद्र्यान्मरगाद्वा (मृच्छ १ ११) ६६।३६
दम्भोलिस्फूर्जद्दम्भो २०७।२१दाता नीचोऽपि (शा प २८१) ७०।१२दारिद्र्येण समीरितोपि ६८।८०
दयिताबाहु (सूक्ति ५३ ४०) २४४।२२४दाता बलि (गरुड अ ११०) ९१।४८दारिद्र्योपहतौ यथा १०९।२२१
दरफुल्लकमलकानन ३२५।४दातारो यदि (स क ४ ७१) ३९३।६४७दारेषु किञ्चि (पञ्च १ १०९) १७२।८३९
दरललितहरिद्रा २७५।२३दाता लघुरपि (पञ्च २ ७१) ३८४।३८७दासे कृता (मा द १० ३२) ३१३।४८
दरविदलित (गीत १३ १०) ३२६।१६दातु परोपकृति ७५।१४दासेरकस्य (शा प १०२७) २४१।१३६
दरिद्रता १७४।१९३दातुश्छत्रत्त्वचि (सूक्ति ११६ ४)१५७।१९५दासेरको रस (शा प ९५९) २३४।१२५
दरिद्रमुदरं ह(सूक्ति ५३ ६३) २६७।३३२दातुत्व प्रिय १५८।२१३दास्येऽहं परिभ्रमणाम्नि ६।६५
दरिद्रस्य परा (शा प.३०९) ७३।११दात्यूहा (शा प ८५०) २५५।१४३दिक्कालातमसमेव यस्य (कुव १०६) ६।७७
दरिद्रानभर कौन्तेय (हि.१.१५) ६९।८दान ददत्यपि (शिशु ५ ३७) २३२।७४दिकालाद्यनवच्छिन्ना (सु ३) १।२
दर्पे कविभुजगाना(सूक्ति ४ ६८) ३६।३६दानं दरिद्रस्य(सूक्ति १३० ९)१७१।८२२दिक्कक्र तृणभस्म (सूक्ति ३४ ६)२२०।८
दर्पणार्पित (शा प ११७) २२१।०२दानं न दत्त न तपश्च ६७।४८दिक्क्षेत्रीमोहतिजग २०९।१०
दर्पेषु परिभोग (रघु ९९ २८) ३२८।८दानं प्रियवाक्स (हि.१ १६३)१७०।७७०दिगन्ते खेलन्ती स ६०।२४९
दर्पान्धगन्ध (शा प.१२३७) १२५।६दान भोग च विना (सु ४७९) ७२।४२दिगन्ते श्रूयन्ते (भामिनी अ १)२३०।३२
दर्पोद्रिक्त कुसुमथ ३०१।८९दानं भोगो (पञ्च २ १५७) ६९।१५दिगम्बरनितम्बिन्या ३।७
दर्शनं नाघमद्वारा १५०।३३१दानं वित्ता (सा द १० ४८) १६७।६६२दिगीशवृन्ददाशिव (नैषध १ ६)१०५।१२२
दर्शनपथ (अ शा ६ २०) २७८।२६दान सत्त्वा (शा प १५०८) १५४।६५दिग्बालाकरकन्दु ३०२।९८
दर्शनाद्भवते चित्त ३४८।९दानपात्रमधर्मणीहैिक ६९।२३दिग्यन्त्रतस्तिमि ३०४।१५६
दर्शने स्पर्शने वापि ८८।११दानाय लक्ष्मी (शा प ४६३) ४९।१७९दिग्वासस गतव्रीड ८९।६
दर्शयन्ति शरन् (सु.१७९२) ३४४।४दानार्थिनो (शा प ९२९) २३१।७०दिङ्नागा प्रति २३१।५४
दर्शितातापोच्छ्रायै ७९।१६दाने कल्पतरुर्नये १०७।१८०दिङ्नारीणा स्पृश १२५।२
दर्शितानि (शा प.१४७१) १५४।५३दाने तपसि (शा प.१४७७) ९०।९दिङ्मण्डलं परिम २३९।१०८
दंलति हृदय (उत्तर ३.३१) २७९।६८दानेन तुल्यो (पञ्च २ १६६) १७२।८४२दिङ्मण्डलीमुकुटम ३२३।१४
दलदमलको (प्र.राघव.२.२७) ३१२।३०दानेन भूतानि ६९।२५दिङ्मूढ त सुरारिं १८।१५
दलविततिभृता ३०३।१२४दानेन भोगी १६६।६०१दिदृक्षमाण क्षणमा(शिशु ३ ३१)३३०।१
दलितकुचनखाङ्कमङ्क ३१३।४५दानेन श्लाघ्यता ६९।१४दिनकरकरामुष्टं ३१४।६७
दलितकोमल (शिशु ६.२३) ३३५।११दानोपभोगरहिता (हि ० ११) ७१।६दिनमवसितं वि (शा.प ११४६) २२०।८
दलितमौक्तिक (शिशु ६ ३५) ३४१।४१दानोपभोगवन्ध्या (भोज ६१) ६९।११दिनमेक शशी पूर्ण ३६७।२१
दवदहनजटाल(भामिनी अ ३४) २१३।५०दामोदरकरा (शा प ४९८) १८१।१०दिनयामिन्यौ साय (मोहमुद्गर) ७६।३४
दवदहनादुत्पन्नो धूमो (कुव ९२) २३०।३दामोदरमुदरा (शा.प ११६२) २२१।१दिनान्ते भ्रान्तीना २६०।१०९
दशकूपसमा (शा प २०८६) १४५।११४दामोदराय पुण्यात्म १९३।८दिवमप्युपया (रुद्रटाल ९ ६) ३३।२५
दशकैरवबान्ध २६९।४११दायादत्वं मनसिज २७१।४७दियस भृशोष्ण (शिशु.९ ३४) ३००।५९
दृष्ट्वातामरसकेसर २९६।२दायादा व्य (राजत ५ १३०)३८४।२७७दिवसGeneric / दिवसरजनीकू (शान्ति ३ २) ३७६।२५३
दृष्टे जगद्वपुषि ३१४।१५५दायादा स्पृहयन्ति ६५।२०दिवसे घटिकास्त्रिंशत् ३५२।७
३६सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
दिवसे सनिधा ३८६।३६७दुग्धाम्भोधावगाधे १३८।८६दुर्मित्रीणं कमुप (पञ्च १ ५) १७५।९४६
दिवसोऽनुमित्र (शिशु ९ १७) २९६।५दुन्दुभिस्तु सुतरामचे ६४।१३दुर्मैत्री राज्यना १५६।१३७
दिवानिशं वारि (रसगङ्गाधर) २६५।२७३दुर्गंधिगम पर (पच ५ ३४) १७१।७७८दुर्योधन सम(शा प १३५७) १४६।१४८
दिवा पश्यति १५९।२६१दुर्धीता विषं (चाणक्य ९८) १६२।४२३दुर्लभं सस्कृत्त (चाणक्य ९१) १६१।३८६
दिवारजन्यो र(नैषध ७ ५५) २६२।१८३दुरापाध्या श्रि (पच १ ७३) १४८।२७०दुर्लभोऽप्युत्तम (दृ श ३३) १६८।६८६
दिव्यं चूतस (नीतिरत्न ९) २३५।१५८दुरापाध्या हि रा(पच १ ६८) १४८।२६८दुर्लीलकक्षीपतिपुत्र २४७।५९
दिव्यं वारि कथं यत ७।९०दुरारोह (काम नी ११ ३६) १४८।२६९दुर्वारवीर्य सरुषि २०२।९५
दिव्यचक्षुरह जात (सु १२०८) २७०।२दुरासदवनज्या(किरात.११ ६३) ७९।१२दुर्वास्रा स्मर(काव्यप्र १० ३०) २८५।३४
दिशि दिशि (नैषध २२ १५१) २१७।४०दुरासदान (किरात.११ २३) १६१।३६६दुर्वाशरातिवाजीव १३४।२९
दिशि दिशि परिहास २८०।४दुराशेव दरिद्रस्य ३४५।२दुर्वृत्तं वा सुवृत्तं(विक्रम.२८४) ३८६।३५४
दिशि दिशि (शा.प ३७२०) ३२३।१९दुरितसमूहबलाहक २।९दुर्वृत्त क्रियते धूर्तै (हि ३ १७५) ९७।५
दिशा हाराकारा (सु ४७६६) ३४१।५८दुर्गं त्रिकूट (गरुड अ ११३) ३८२।२७१दुर्वृत्तसगतिरनर्थ (महा ना ४०८)८८।१२
दिशो वास ३८२।२४१दुर्गदेशप्रविष्टोऽपि १५०।३५८दुष्करितैरेव निजै(शा.प ११७५) ५८।१६०
दिश्यात्म शीतकिरणा (सु ६४) ४।३९दुर्गाणि राज्ञा (शा प १३६१) १४४।६८दुष्टता दुष्टससर्गाद्दुष्ट ८७।३
दिश्यात्सुखं नरहरि (सु ८५) १९।४६दुर्गा नदी शि (शा प ११८६) २४६।४०दुष्टा भार्या (गरुड पू १०८) १५५।१११
दिश्याद्व शकुलाङ्क (शा प १२३) १७।८दुर्जन कृतशिकोऽपि ५४।२४दुष्टाविनीता (शा प.१४११) १४५।१०५
दिश्यान्महाशुरशिर स (सु ७७) १९।२१दुर्जन परिवर्तव्यो (हि १ ८९) ५४।५दुष्टैरपि निजै (शा प १४३९) १५३।१६
दीना दीनमुखैस्तथै (सु ३१९६) ९७।१२दुर्जन परिहर्तव्य (सु ३५५) ५५।७०दूति त्वं तरुणी (सु.११८६) २८७।९
दीनाना कल्पवृक्ष (मृच्छ १ ४८) ५३।२७६दुर्जन प्रियवादी च (हि १ ८२) ५५।४९दूति त्वया कृतमहो २९३।५
दीनानामिह प (भामिनी अ ९१) २१२।३६दुर्जन सुजनीकर्तु (सु ३८७) ५६।११४दूति श्वासविशेष एष २०३।९
दीनोन्नतचलप (शा प ८५३) २२६।१५३दुर्जन सुजनो न ५४।३५दूतीद नयनोत्पलद्वय २०३।८
दीपदशा कुलयुवती ३५१।२१दुर्जनगम्या (पच १ ३०१) १७०।७७२दूति विधुदुपागता ३५७।३४
दीपनिर्वाणगन्ध (हि १ ७६) १६३।४४८दुर्जनजनससर्गात्स ८८।१०दूतो न सचराति खे (वृ चा ९ ५) ४४।४
दीपयन्रोदसीरन्ध्र (सा द ४ १४) १३३।३दुर्जनदूषितमनसा (सु ३९०) ५६।१२४दृये कान्ताकर वीक्ष्य ६६।१०
दीपयन्नथ नभ (किरात ९.२३) ३००।४०दुर्जन प्रथमं वन्दे ५४।३४दूरं मुक्तालयता (स क ५.१७६) २९१।८
दीपा स्थितं वस्तु (सु २५८) ४९।१८१दुर्जनवचनाङ्गारैर्दग्धो ४७।९०दूरं यान्तु निशाच २०९।१८
दीपितस्मरमुरस्तु (शिशु १० ४७) ३१६।७दुर्जनचदनविनिर्गं ४८।१२०दूरं सुन्दरि निर्ग (सु १०६३) ३२९।१८
दीपो भक्षयते (वृ चा ८ ३) १५८।२४२दुर्जनसगति (विक्रम १९७) ३८४।२८३दूरत शोभते (चाणक्य १५) १६१।३४४
दीप्तक्षुद्रेगयोगाद्व (शा प ४०६५) १३।४०दुर्जनसहवासादपि ४८।१२९दूरतया स्थूलतया २२२।५८
दीप्प्यन्ता ये दीप्त्ये ७९।१७दुर्जनस्य विशिष्टत्वं ५४।२७दूरमस्तु दरघूर्णित २७८।३४
दीर्घेशृङ्गमनड्वाहं १६८।६५६दुर्जनस्य च सर्प (वृ चा ३ ४) ३७९।९१दूरलमप्रमेयैर २९४।१९
दीर्घाक्षं शरदिन्दु(मालवि २ ३) २७२।७०दुर्जनहुताशत्तप (शा प १५३) ३७।११दूरस्थं जलमध्यस्थं १५५।१००
दीर्घा वन्दनमालि (अमरु ४५) ३०५।४दुर्जनेन समं सख्यं (हि १ ८०) ५५।४८दूरस्था पवेता १५८।२१८
दीर्णोऽसि चेत्कनक २४६।२७दुर्जनैरुच्यमानानि (हि ३ २३) ५५।४१दूरस्थापितहृदयो ५७।१४०
दीव्यन्मौलित्रिदशपरि ५।४७दुर्जनो जीयते (दृ.श ४६) १६८।६९१दूरस्थोऽपि ब (शा प.१६०९) १४३।५३
दु ख दीर्घतर वह २७७।६४दुर्जनो दूषयत्येव सता (दृ श ३) ५।७३दूरस्थोऽपि स (विक्रम ७८) १६६।५९१
दु खं दु खमिति (प्र भ १७) ६६।१३दुर्जनो दोषरादत्ते दुर्गन्धे ५५।४६दूरादर्थं घटयति (भर्तृ ३ १८) १४२।३१
दु खाङ्गारकतौ (शान्तिश ३ १४) ८९।३दुर्जनो नार्जव याति (हि ३ २३) ५४।३९दूरादर्थिनमाकलय्य ९९।२४
दु खेन ल्छि (मा १२ ४१६७) १५४।५४दुर्दिंवेसे घनतिमि (पच १ १८४) ३५२।४दूरादुच्छ्रितपाणि (हि ३ १६४) ६१।२६२
दु प्रापमम्बु पवन २३४।१२७दुर्दैवप्रभवप्रभञ्जन २३०।६दूरादुत्सुकभागते (अमरु ४९) ३५८।६१
दु प्रेक्ष्यमुच्चैर्गगन ३३५।८दुर्बलस्य बलं रा (चाणक्य ३६) १५२।३९३दूरादुज्झति (सूक्ति १९.१०) २२४।१०४
दु सहसतापभया (सु १६९९) ३३६।३५दुर्बुद्धिमकृतप्र(भा ५ १४९४) ३९४।६७२दूरादेव कृतोऽज(सु १७०९) ३३९।११९
दुकूलं दोर्मूलात्प्रण ३१९।३४दुर्भग स्यात्प्रकृ (दृ श ८३) १६९।७०९दूरीकरोति कुमतिं (रसगगाधर) ८७।३०
दुग्ध च यत्तदनु (सु.३२५९) ७६।३९दुर्भिक्षादेव (मा १२.६७४७) ३९३।६६४दूरेऽपि परत्यागस्ति (सु ८०७) ५८।१८१

संस्थाननिर्देशानुक्रमकोशः — ३७

दूरेऽपि श्रुत्वा भव १३५।१०दृष्ट्या केशव (सूक्ति २ ९३) २४।१५९देवेऽर्पितवरणस्रजि बहु १६।३
दूरे मार्गा (नीतिप्रदीप १०) २४१।१५२दृष्ट्वाडम्बरमम्बरे ३४२।७१देवे वर्षत्यक्ष (सूक्ति ६१ २२) ३४१।५९
दूरोक्षिप्तक्षिप्त (शिशु १८ ४५) १३०।८१दृष्ट्वा दर्पणमण्डले नि ३५९।९४देवैर्यद्यपि तक्रव २१६।३३
दूर्वाङ्कुरतृणाहारा (शा प ९३७) ८०।२२दृष्ट्वापि दृश्यते दृश्य (सु २२८) ४६।७८देवो राजा ३८७।४२१
दूर्वाया भूषणं पत्र (चा २४) ३८०।४१८दृष्ट्वा मण्डलम् १०८।२१०देवो हरिव्र्हतु व (शा प ७४०) २०९।८
दृकपात कमलासने (शा प ७५) १५।२५दृष्ट्वा वेद्यं परमथ ३६९।७१देव्या प्राक्परिरम्भणे ६।६७
दृगन्तव्यापारप्रबल २८०।८४दृष्ट्वा शाखावकीर्णं २२८।२०२देश सोऽयमराति (वेणी ३ ३३) ३६६।७
दृग्भङ्गभङ्ग्रिम (शा प ३७७७) ३५२।२८दृष्ट्वा स्फीतोऽभवद (अमरुश ६) २२३।९२देशकालविहीनानि (र ६ ६३) ३८०।३९७
दृग्भ्या यस्य विलोक १८।२१दृष्ट्वाकासनसस्थिते (अमरु १९) ३११।१६देशाटन पण्डि १७३।८६४
दृढ प्रेमा भग्न १७७।९८७दृष्ट्वैव विकृतं (शा.प ४१४५) ३७१।१२०देशानामुपरि (पञ्च १ १६६) १४९।२८५
दृढतरगलकनि (शा प ११९७) २४८।७०दृष्ट्वैवाङ्कुशमुद्रया १११।२६४देशानुत्सृज्य ग १६७।६३९
दृढतरनिबद्धमुष्टे को (कुव ५७) ७२।३५देय भो ह्यघने (वृ चा ११ १८) ६९।२८देशे देशे कलत्राणि ३६१।६
दृप्यद्दैत्यनितम्बिनी (शा प १२५)१८।३३देयमार्तस्य शय(भा ३ १०१)३८६।३७४देशे देशे किमपि कुतुका ९८।४
दृश पृथुतरीकृ (सूक्ति ५० ८) २५३।२८देव पायात्पयसि २३।१३३देशे देशे जडिमकु ३३५।५
दृशा किंचि (शा प ३७६४) ३५२।३३देव पायादपा(सा द १० ९८) २२।१००देशे देशे दुराशा ३७५।२३०
दृशा दग्धं मनसिज (विद्ध.१ २) २५०।१देव क्षीरसमुद्रसान्द्र १३७।६३देशैरन्तरिता शते (अमरु ९९) २०८।३३
दृशा विदधिरे दश ३४२।७६देव त्व जय (शा प १२२३) १०८।१९३देह हेमद्युति परि २६६।३२२
दृशा सपदि मीलि(सू २०९७) ३१९।३६देव त्व मल (सूक्ति ९७ ३३) १०७।१७७देहावान्निद्रकान्ता ८।११४
दृशो सीमावाद (सूक्ति ५२ १)२५५।२४देव त्वत्करनीरदे १०७।१७४देहि देहीति ज (शा प २६९) ३८३।२६१
दृशौ किमस्या (नैषध ७ ३४) २५९।८७देव त्वत्करपद्म कोश १२५।१४देहि मटकन्दुकं राधे (कुव ६९) २२।१०४
दृशौ तव मदा (गीत १०.७) ३१३।६६देव त्वच्चरणप्रतापत १३३।१४देहीति वक्तुकाम (शा प ३९२) ७२।१३
दृश्य दशा सह (शा प ३२७३) २५४।५देव त्वत्तुरणप्रतापाशि ११५।४९देहीति वचनं श्रु(भर्तृ स ५३५)३८२।२६१
दृश्यते पानगोष्ठीषु (सूक्ति ७३.७)३१४।१देव त्वद्धजवाजिप १२५।१५देहे दुर्ललितस्य देव ३५३।५५
दृश्यन्ते भुवि भूरिनि ५३।२६०देव त्वहानपाथो १०२।४४देहे पातिनि का (भोज ५३) ३५१।३५८
दृश्यन्ते मानसोत्तं २६९।४०७देव त्वद्भुजद (सु २६४०) १३४।१६दैल्यानामधिपे न (शा प ८४) १९।५४
दृष्टं दुर्जनचेष्टितं (सु ३१९३) ६८।८१देव त्वद्भुजदण्ड १३४।२५दैत्याना मनसि दया १८१।२६
दृष्ट कातरनेत्रया (अमरु ८५) ३२९।१६देव त्वद्यशसा सदा १३६।४४दैत्यारातिरसो वरा २०३।१०८
दृष्टः कापि स के (सु १००) २५।१८७देव त्वद्यशसि (शा प १२२६) १३६।३९दैत्यास्थिपञ्जरविदारण (सु ५२) १९।४६
दृष्टः सप्रेम देव्या कि(वेणी १.३)८।१०८देव त्वद्विजयप्र (शा प.१२४५) १२५।१०दैन्यं क्वचित्कच(शा प ४१०७)३६८।३३
दृष्टः साक्षादसुरवि १०७।१७८देव त्वद्विजयोद्यमे १२५।१२दैवं पुरुष (मत्स्य अ २२१) ८२।१०
दृष्टदुर्जनदौरात्म्य (सु.२९८) ४६।६२देव त्वमेव पा(का प्र ९.१२०) १०३।६०दैवं फलति सर्वत्र ९१।१०
दृष्टस्य यस्य हरिणा रण (सु ४९) १६।४६देव त्वामसमानदान १०७।१८५दैवं फलति सर्वत्र ९१।११
दृष्ट्वा सकष्टदाहाः ९।१३३देव ब्रह्माण्डभाण्डे १४८।८४दैवमुल्लङ्घ्य यत्कार्य ९०।१
दृष्ट्वा दृष्टिम् (नागानन्द ३ ३५) ३१८।१४देवराजो मया दृष्टो १८८।३१दैववशादुपलब्धे (पञ्च १ ३) ७१।३१
दृष्टान्तो न तवा १०९।२१९देव श्रीनृप रामचन्द्र १२०।१४८दैवात्पश्येर्जगति (मालती.९ २६) २९१।१
दृष्टिं देहि पुनर्बलि (शृङ्गारति.१) ३१२।६देवस्याम्बु (सूक्ति १०५ २) ३८३।३६३दैवादभ्युत्थमाना (हनु १३ १४) ६२।२८१
दृष्टिं सालसता बिभ २५४।४७देवस्त्रैगुण्यभेदात्सू १०१।५९दैवादहमत्र (रुद्रट ७ २९) २७८।२१
दृष्टिं हे प्रति (शा प ३७६९) ३५३।४३देवा दिक्पतय (शा प १०८) १०१।५०दैवायद्यपि २०९।२
दृष्टि. कापि सुरा २७२।७२देवाधिपो वा भुज १०४।१०५दैवीर्गीर केऽपि (सु १९४) ३८।३३
दृष्टि शैशवमण्ड (सूक्ति.५१.६)२५६।५२देवानामिदमाम (सूक्ति १०९ ७२) ३२।२दैवेन प्रभुणा (भर्तृ. २ ९०) १५१।२३
दृष्टिस्तृणीकृत (सूक्ति १०३ ६)३६०।२७देवी वाचमुपामते हि (कुव ५२) ३६।४०दैवे पराग्वदन (भामिनी.क १) ३६२।२७
दृष्टे चन्द्रमसि प्रल्लु(सु १३८७) २८९।६८देवी श्रीर्जे ३८३।२६४दैवे विमुखता याते ९१।७
दृष्टे लोचनव (अमरु १६०) ३११।२१देवे तीर्थे द्विजे (धर्मवि १८) १६८।६६८दैवे समर्थ्य (शान्तिश ३ २०) ९२।७६
दृष्टो वा सुकृतशतो ६०।२३१देवे दिग्विजयोद्यते १२५।११दो सदेहवशंवद ९४।१२१

३८ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां

पद्य / पादपृष्ठ/संख्यापद्य / पादपृष्ठ/संख्यापद्य / पादपृष्ठ/संख्या
दोग्ध्री धान्यं(मा १२ २७३३)३८८।४३९द्वन्द्वो द्विगुरपि१८९।५१धत्ते बर्हभरे३१४।७२
दोर्दण्डद्वयकुण्ड (रसगङ्गाधर)१०८।२०८द्वयमिदमलन्तस (सु १८१३)३४४।१२धत्ते भरं (भामिनी अ ८९)२३६।१४
दोर्दण्डद्वयलीलया१०।१५१द्वात्रिंशद्द (शा प ११९९)२४८।८०धत्ते वक्षसि३६५।५१
दोर्दण्डाञ्चित (सूक्ति ५५ ३)३६३।२३द्वारं खद्भि (सूक्ति १७ ७८)१०८।२०२धत्ते वियोगि१९९।२९
दोर्योस्तदन्तखण्ड सक२।२८द्वार गृहस्य (सु १८४३)३४७।१२धत्से मूर्धनि२३७।२९
दोर्भ्यां (काव्यप्र १० ११)१०६।१४८द्वार द्वार रट७१।१०धनं तावदसुलभं (हि १ १८९)६४।७
दोर्भ्यां सय (शा प ३६८६)३१।९४०द्वारि चक्षुर (किरात. ९.४३)३५७।४१धनं तावलब्ध कथ (प्रव ७७)३६८।४४
दोलाया जघ (सूक्ति ५१.१४)२५६।४५द्वारि प्रविष्ट१७३।८४८धनं यदि गतं (कविता ४३)६७।५२
दोषजातमवधीर्य४९।१६१द्वारि स्तम्भ३५२।११धन यदिह मे७१।२३
दोषपोषमभियाति५९।२१३द्वारे कल्पतरुगृहे२०१७३धन (वृ.चा १५ २१)१५९।२७५
दोषभीतेर (हि १ ५७)१६४।४७९द्वारे द्वारे परेवाम७४।४८धनक्षय शिष्टगर्हा(प्र भ १७)३८८।४२७
दोषमपि गुणवति (सु २४४)८२।३८द्वारे रुद्धमुपे (सु ३२३८)१५३।४२०धननाशेद (भा १२ ६६१९)३८७।४२३
दोषाकरोऽपि (भोज १३८)५०।१९५द्वारोपान्तनिर (काव्यप्र. ३ २)३०४।६धनधैर्यमराजैश्च१०१।३
दोषागमन३०३।१३९द्वाविमावम्भसि (भा ५ १०३०)६५।८धनबाहुल्यमहेतु (सु ५२२)७०।३०
दोषानपि गुणीकर्तुं (सु २१५)४६।७२द्वाविमौ न (भा.५ १०२७)३८३।२५३धनमपि परदत्तं (सु ३०७)६५।१८
दोषालोकन५७।१५१द्वाविमौ पुरुषौ (सु २९७३)१५५।१०८धनमर्जय काकुत्स्थ (प्र म.४)६४।३
दोषो गुणानां४८।१३८द्वाविमौ (भा ५ १०२८)१५५।१०५धनमस्तीति (शा प १४४६)१५३।२१
दोषोऽपि१५८।२४५द्वाविमौ पुरुषौ(शा प १५४९)१५५।१०९धनवानिति हि (हि १ १६८)३७४।२०८
दौर्गल्येन समीरिना७४।३९द्वाविमौ पुरुषौ(शा प १५४७)१५५।१०४धनवान्क्रोध३७९।९४
दौर्जन्य (शा प १०३१)२४१।२४३द्वाविमौ पुरुषौ(शा प १९३३)१५५।१०६धनवान्बलवाँलोके (हि १ १२३)६५।१
दौर्मनष्या (भर्तृ स २३)१७८।१०१०द्वाविमौ पुरुषौ(शा प १५५०)१५५।१०७धनहीनो न ही(वृ चा १० १)३८७।४२१
द्या निरुन्ध (किरात. ९ २०)३००।३७द्वावेव क (र गो २ ६१ १७)३८८।४३६धनहेतोर्य ईहे(भा १२ ७८५)३८६।३५१
द्वामारोहति (सूक्ति २७ १५)२१६।३०द्वि शर नाभि (हनु १ ४९)१६५।५५३धनागमेऽधिकं१६८।६८१
द्युति वहन्तो (किरात ८ ३९)३३८।८२द्विजकुलपते२२७।१९६धनानि जीवित चै (हि १ ४४)२८६।३४६
द्यूतं पुस्तक१५७।२०५द्विजराजशेखरो३६४।३६धनानि भूमौ पश (भर्तृ ३ ३५)९२।५५
द्यूतं यो यम (पच. १ ५७)१४८।२६६द्विजा (शा प १३८४)१४४।१००धनानि विद्वत्क११७।७३
द्रवतवात्सर्वं (हि.१ ९३)१६३।४५१द्विजातिपूजा (भा.५ १२५४)३८७।४२०धनाशाया खली (वृ श ६१)६४।११
द्रविणार्जनज परि (सु ५२४)७०।३१द्वित्रै केलि३५७।३५धनाशा कैतव३५५।४
द्रव्यप्रकृति (काम नी. ५ २)१४८।२५७द्वित्रैव्योम्नि३२५।५४धनाशा जीवि (हि १ ११२)१६६।५८४
द्रष्टव्येषु किमुत्तम (भर्तृ १ ७)२५२।५५द्विधा (सूक्ति १०९ ८)२६१।१५५धनिक (गरुड.पू.अ ११०)१५३।३४
द्राक्षा प्रवेहि२२७।१८६द्विरददन्तवलक्ष (शिशु ६ ३४)२४१।४०वनिनोऽपि नि (सा द १०.६६)४६।५३
द्राक्षा म्लानमुखी२९।१०द्विर्भव पुष्प (रसगङ्गाधर)११६।५८वनिनोऽप्यदानभोगा (भोज.१६)७२।४३
द्रागाक्रम्योद१३४।२७द्विषतामुदय. (किरात २ ८)१५१।३८६धनु पौष्प मौवीं (भोज १७१)५२।२५२
द्रागैन्द्रीमनु२९५।६६द्विषा त्रास (कुमार १६ ४२)९१।३९धनेन कि यो (हि २ ९)१७४।८९८
द्राघीयसा धाष्ट्य (सूक्ति ५ १)३७।१६द्वीपादन्यस्मादपि (रत्ना १ ७)९१।३९धनेन वाससा प्रे (द श ४४)३८७।४०४
द्राघीयास (शिशु १८.३३)१२९।७२द्वेषादिवैक्क३८३।१६९वनेनाधर्मल (भा ५ १२५१)३९४।७००
द्रुत यस्या२५२।४५द्वेषिद्वेष (पच १.६०)१४८।२६५धनेतु जीवित (शा प ४२५)१६८।६५७
द्रुततरकरदक्षा. (शिशु ११ ८)३२३।२४द्वेष्या (नैषध १२ १२)११०।२३४धनैर्निष्कुलीना (नीतिसार ३)६४।१२
द्रुततरमितो (सु ६४९)२३३।१०९धनैर्वियुक्तस्य (मृच्छ ५ ४०)६६।४४
द्रुतद्रवद्रथचरण१२७।९धत्तरकण्टक२४३।१११धन्यस्तन्वि स२९२।३२
द्रुतशातकुम्भ (शिशु ९ ९)२९४।३७धत्तूर धूर्तं२४३।११०धन्यस्त्वमसि२८३।१५६
द्रुतसमीरचले (शिशु ६ २८)३४१।३४धत्ते चक्षुर्मुफु (मालती.३.१२)२७४।५धन्या शरदि३४४।७
द्रुमा पाण्डुप्रथा३२४।४०धत्ते नायक१२०।१४१धन्या शुचीति (सु १८१)२९।१९
द्रोग्धव्यं न च(भा.३ ११४७)३९४।६९२धत्ते पद्मल्ल३३७।४४धन्या (शा प. १०४७)२४२।१७२
सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः३९
धन्या केयं स्थिता (मुद्रा १ १) ८।१०५धान्याना (हि ३ ५५) १४८।२३५धैर्यमाधाय लज्जा ३०४।२
धन्याना गिरि (भर्तृ ३ १५) ३७४।२२०धारयित्वा त्वया(भोज २३४) १०२।४६धैर्यमुलबण (शिशु १० ६८) ३१८।११
धन्या सा गृह २८०।९४धाराधरस्त्वद (भोज २२५) १२५।७धैर्यलावण्य १०३।५४
धन्यासि या (काव्यप्र ४ १७) ३२८।१०धारावीश (भोज २०२) ११७।८९ध्माता भालत २११।४३
धन्यास्ता (शा प ३७४८) ३२८।२०धाराधौतं (शा प ३८८१) ३४२।७९ध्माता भालत २९५।६७
धन्यास्ते कवयो ३४।५८धारेश त्वत्प्रतापेन(भोज १७३) ११०।८०ध्यानव्याज (शा.प १३१) २६।२०५
धन्यास्ते ये (गरुड पू अ ११५) ६६।२९धार्मिक (काम नी १ ११) १४२।३ध्यानशस्त्र १६०।३३०
धन्योऽय मणि २१७।५०धार्ष्टर्यलङ्घित (किरात ० ७२) ३१६।६४ध्रियते याव (शिशु २ ३५) १५१।३६२
धन्वन्तरिक्षपण ३७।३७धावन्त (शा प ६१००) ३६९।१८ध्रुवं ध्वसो (प्रब ८२) ३६२।३३
धम्मिल्लं परि (शा प ३१७४) ३२८।५धावन्तमनु १२३।२ध्वजपट ३३२।५५
धम्मिले नव (सा द ४ ९) १९४।१३धावित्वा सुस (शा प ४१५९) ३७५।२२२ध्वनिरिति २१८।७८
धम्मिल्लो भंग (सूक्ति ७८ १५) ३२०।५१धिक् चेष्टितानि (शा.प ९९६) २३७।४८ध्वस्त काव्यो (शा.प ३९९९)३६३।४१
धरणिधर ११५।५१धिक् तस्य मूर्ख (शा प ३३२३)२६२।१८६ध्वान्तोघे ३०२।१०२
धराध्र तव १३२।२७धिक्त्वा रे (शा प १९४) १००।३२
धर्म पालय ११२।२७०धिग्गृहं (स्काद वै अ २०) १५६।१३५न कठोर न (काव्या. २ ३२४) २५०।३
धर्मे प्रसङ्गादपि ३७५।२४०धिग्जीवि (स्काद काशी अ १) १७३।८७१न कदाचित्सता (सु ३०५) ४७।८३
धर्मे प्रत्न (गरुड पू अ ११५)२८०।४८८धिग्धिन्ता (शाति ४ १०) ३७१।१९२न करोति १९४।२४
धर्म प्रागेव (नवरत्न ४) १५३।४२२धिग्स्वैतां ६५।१४न कर्मणा ल (भा १२.७३६)१९२।४६०
धर्म एव प्लवो (भा ३ ११८३)३९४।६९०धिग्वारिंदं (शा प ८६५) २२६।१६१न कश्चि (शा प १३७६) १४६।१६०
धर्मशास्त्रार्थं (शा प १३४३) १४२।१६धीर वारि (अमरु १२) ३४३।९४न कश्चि (बृहस्पति नी ११४) १६१।३४६
धर्महन्त्यर्जिते १६६।५८८धीरध्वनिमिर (भामिनी अ ५९) २९२।१८न कश्चिदपि (शा प. ६४७) १५४।४०
धर्मात्मा (र गो २ ११४ १८)३९४।६९४धीराणा १६७।६४९न कस्यचित्कश्चि (हि.२ ४६) १७२।८३५
धर्माख्याने श्म (वृ चा १४.६)३९४।६८६धुनोति चांसि (काव्यप्र.१०.३०) ९३।९२न काकारि ३७४।२१२
धर्मार्थं प्रभ (र ३ ९ ३०) ३९४।६७७धुनोतु ध्वान्तं २५७।२५न का निशि (नैषध १ ३०) २५३।९
धर्मार्थौपजवनो (का.नी १ १४)३८७।३८७धुन्वन्त्यमूनि ३३३।८२न कामभोगा ३४९।५१
धर्मारम्भेऽप्य ५७।१४१धुन्वानाश्चन्द ३२६।३३न कार्येषु न ३५०।११
धर्मार्थ यस्य (भा ३ ९५) १६२।४६२धूम पयो (सु ४४३) ६०।२४४न काल (शा प १३२०) १६०।३३४
धर्मार्थकामत (हि २ १७९) १६४।४९४धूमव्याकुल १२।३२न कालस्य न (शा प ३९८८) ३६०।११
धर्मार्थकाम (ब्रह्म अ १२०) १५९।२५५धूमाङ्गाढमली (राजत ४ ११) ३९३।६४९न कालस्य (र ४ २७ ७) ३९३।६५३
धर्मार्थकाममोक्षेषु ३०।११धूमायन्ते व्य (भा ५ १३१९)२९३।१६६२न किंचित्(काम नी.११ ४७) ३९२।६४६
धर्मार्थकामहीनस्य (सु २१६७) ६६।२४धूमायिता (भामिनी अ ९९) २४८।८२न कुर्या २३२।७८
धर्मार्थो यत्र न १६७।६११धूर्त स्त्री वा (हि ३ १३१) १४८।२४२न कुर्यादभि (शा.प १५२६) १५५।८०
धर्मे तत्परता (वृ चा १२ १५) ५३।२६२धूर्तधोरण १२५।१४न कुल वृत्त (भा ५ ११३४) ३९४।६७१
धर्मो यशो नयो २९।७धूलिधूसरसर्वाङ्गो (शा.प ५७५) ८९।७न कुले वापि २४४।२१८
धवलकुसुमभाख १२२।७धूलीधारामिरन्धास्त १३३।४७न केनापि श्रुतं ३६।३४
धवलयति समग्र ५१।२१९धूलीधूसर (काव्याल ७.३२) २०८।३५न केवलं मनुष्येषु (शा प ४४४) ९०।३
धवलान्यात (पच.१.४३) १४८।२५३धूलीभिर्दिवमन्ध (नैषध १२.९९)१२४।९न कोकिला (शा प ८९२) २२९।२२७
धवलीकरोति २६३।२०९धृततुषार (शिशु ६ ६०) ३४६।२१नक्र. खस्थान (पञ्च.३ ४४) ८६।१
धातस्तात (भर्तृ स ५४५) ६१।२६५धृतधनुषि (शा.प ३९६५) ३६०।१३न क्रीडासु ३७२।६२
धातु परीक्षा १६०।३३२धृतबिस (किरात. १० २४) ३४०।२६न क्रोध ६।६८
धातु (काव्यप्र. १० ३९) २८९।५४धृत्वा पदस्खलन (भामिनी क ५)३६२।२९न क्रोधयालु १६६।६०५
धातुवादेषु १५५।१०३धृष्ट कि ३०७।६४न क्वचिच्च ८०।१६
धातुश्चतुर्मुखीकण्ठ ३।१धैर्य यस्य (शान्तिश ४ ९) ३७०।१०३न क्वापि १८२।३२
धान्याकनागर (शा प ४०३३) ३६४।४१धैर्य हि कार्यं (पच / २२५) ३८३।२६०नक्षत्रक्षिति ३२२।१३

४० | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां


पद्यांश / सन्दर्भपृष्ठ।सङ्ख्यापद्यांश / सन्दर्भपृष्ठ।सङ्ख्यापद्यांश / सन्दर्भपृष्ठ।सङ्ख्या
नक्षत्रभू१०४।९८न दानेन न (गरुड पू अ.१०९)३४९।३९न पश्यति च१५९।२८२
नक्षत्रभूषण चन्द्रो (चाणक्य ८)१६१।३४२न दानं शु (वृ चा १७ १०)३९३।६५५न पाणि (सूक्ति ६६ १०)३४८।१६
नक्षत्राणि बहूनि२११।४२न दिष्टमप्य (म ६ ७८)३९३।६५७न पिता ना (र २ २७ ६)३८१।१८६१
न क्षुधा पीड्यते (पच १.९९)१४४।९२नदीकूले च ये (वृ चा २ १५)१६२।४२०नपुंसकमिति ज्ञात्वा (कुव ९०)२७७।३
नखक्षतमुर स्थले३२८।१५नदीजलक्लेशवनिारि (बालभारत)१९०।६४न पुत्रत्वेन पूज्यन्ते (शा प १४८६)८१।४
न खनति खुरै (शा प ९७०)८२।४४नदीतीरेषु ये वृ (वृ चा २ १५)१७७।६४४न पुत्रात्परमो१६०।३३८
न गजाना (शा.प १३६३)१४३।६३नदीना च कुला (चाणक्य २७)१६५।५४०न पुत्रात्त (शा प.१५२४)१५४।७७
न गर्जनै नरै (शा प १६१०)१४३।५४नदीना (गरुड वृ अ १०८)१५४।७९न प्रसाद (किरात.९ २५)३००।४२
न गणस्याग्रतो (शा प १४६४)१५३।३३न दुर्जन (वृ चा ११ ६)५९।२२४न प्रीति पवने२८६।३१
न गम्यो (भर्तृ स १२६)२५०।१८न दुर्जनानामिह४९।१८०न बरीभरीति३५७।४६
न गुणा क्वापि४६।६९न दूतीसचारो न२८०।८२न ब्रह्मविद्या न च (प्र.राघव १ २३)३१।२७
न गृहं गृहमित्याहु (पच ३ १४६)३५०।६नदेभ्योऽपि (पूर्वचातका ७)२११।११न ब्रूते परुषा गि (सा द ३ ९७)३५८।६८
न गृह्णाति ग्रास (शा प ९२६)२३२।७५न देवकन्यका (काव्या २ ३२५)२५३।२न भयान्यभाष्य (मा १३ २२१९)३४९।४४
न च गन्ध (शा प १०१०)२३९।८९न देवसेवया याति९।१२८न भवति (भर्तृ सं ५५९)४७।१०७
न च मेडव (शिशु ९ ५६)२८७।२न देवाय (गरुड पू आ अ १०९)५५।५७न भवति मलयस्य२०९।६५
न च रात्रौ (मा ५ १४३७)३८१।१६३न देवे देवत्व (भर्तृ स ५५५)९९।१३नभसि जलद (अमरु १०३)३४३।१०३
न च विद्यासमो (चाणक्य ७५)१६२।४०६न देयो विद्यते१६६।५९६नभसि निरव (भोज.२०८)२१३।५१
न च शत्रुर (मा १२ २१०८)३८१।१६६न देव न पित्र्य च४४।३नभसि विरलतारा३२४।३५
न चाभिमानी३८०।११२न दवमिति सञ्चिन्त्य (शा प ४५४)८२।४न भिक्षा दुर्भिक्षे६७।५८
न चाराधि राधा३७४।२११नद्यो नीचगता (शा.प ८१४)२२२।३३न भिक्षा दुष्प्रा (भर्तृ ३ ९७)३८६।३५५
न चिर मम तापाय (कुव ७५)३३०।३न द्वारि द्विरदावली२३७।३६न भूतपूर्वो न च केन९२।५४
न चोरहार्यं न च (प्र भ ८)३०।१३न द्विषन्ति न (शा प १४२३)१५३।४नभोदिगन्तप्रतिघोष१२८।४६
न जल्प दशनत्विषा२९४।१८न द्रव्याणामविज्ञाय१६७।६२२नभोन्दीव्य (शिशु.१७ ६५)१२७।१३
न जातु (वायु ९३.९५)१६६।६०९न धर्मशास्त्र पठतीति (हि १ १७)८४।१६नभोभूषा पूषा (प्र.म १५)१७७।९९१
न जाने समुख (अमरु ६४)२७३।१न धातोर्विज्ञानं न च४४।८नभोलताकुञ्जुमुपा२९९।१५
न जिघ्रत्याघ्रातं स्पृशति४३।५न ध्यात पदं (शा प ४१५२)३७४।२१८नभोवन नक्तमसौ३२३।६
न जीमूतच्छेद स२५७।२४न ध्वानं कुरुषे (शा प ९६७)२३५।१४८न भ्रूणा स्फुरणं न२२९।२३२
न ज्ञातुं नाप्यनु (प्र.राघव ५.२)१५८।२३४न नटा न विटा (भर्तृ स १६५)८०।३०नम खलेभ्य क (सु ३२६)५९।२२०
नटोऽपि दयाद्रणकोऽपि४४।७न नरस्य नरो दासो (हि ३ ७८)६४।७नम शिवाय नि शेष (सु १६)४।९
न तच्छत्त्रेर्न (पंच १ १३५)१४६।१४७न निर्यायान्ति (सु ४८६)७२।५१नम सर्वविदे तस्मै३६।५५
न तज्जल यन्न (भट्टि २ १९)३३१।३५न र्नातमुपनासिकं२७६।३७नम स्तवन्नचिच्छक्ति (सु २१)१।७
न तथा तप्य (भाग ११ २३)३८४।३०१ननु नीलाञ्चल२६२।१७०न मणेरितोऽधिका२४७।६४
न तथा बाध्यते (पच २ ९५)६६।२२ननु सदिशोऽति (शिशु.९ ६१)२८७।३न मध्यव्यसनी (शा प १५०७)१५४।६४
न तथेच्छन्त्य (सु ३६९)५६।१००नन्दनजन्मा मधुप२२२।५७न मया गोर (काव्या ३ १०८)१९५।४७
न तथोत्थाप्यते (हि ३ ४२)१४८।२२९नन्दनरेन्द्राधिषणे (शा प ३८१)७२।३८न मया रचित२३७।३२
न तद्युक्तं न (शा.प ४७५)१५५।१९३नन्दन्ति म (शा प ४१२४)३७२।१६७नमस्कुर्म कूर्म नमद१८।१८
नतध्रुवो लोचन२५५।८९नन्दयति कस्य न (सु.१७४१)३४०।१०नमस्तस्मै गणेशाय२।४
न तस्यादिनं१८५।१७नन्वाश्रय (सु ४४१)२४८।६९नमस्तस्मै वराहाय (सु ७)१८।२३
न तादृक्कर्पूरे (शा प १०१६)२४०।१९९न पक्षकृत्तिर्न सपक्षक१२४।३नमस्तुङ्गशिरश्चुम्बिचन्द्र (सूक्ति १ १)३।१
न तिर्यगवलोकितं२६१।४८न पङ्करालेप (सूक्ति १ ३५)१८।२९नमस्तुभ्यं देवासुरसुकु (सूक्ति १.५)५।४९
न तृणाडु (नैषध १२ ४९)१०९।१६३न पण्डिता साह (दशरू ४ २६)३९।२२नमस्त्रिभुवनोत्पत्तिस्थिति (सु ५)१।४१
न तेजस्तेजस्वी (सूक्ति १० ९)७९।२०न पर फलति हि (सु ४१८)५८।१८९नमश्छिमूर्तये तुभ्यं१४।१
न दन्तुरमुर स्थलं२५६।३६न परस्यापराधे (हि २ १०३)१६४।४८८नमस्यामो देवाञ्जतु (भर्तृ २ ९२)९३।८८
न दातुं नोपभोक्तु च (भोज ७०)७१।११न पर्वताग्रे नलिनी (मृच्छ ४ १७)३५५।६न मातरि न (गरुड पू अ ११४)८८।१३

संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः ४१


न माता शपते (धर्मवि १८) १६८।६६९न लज्जते सज्जन (सु ३५९) ५९।२२५नवे वयसि (गरुड पू अ ११४) १५६।१३४
नमामि मामनो (शा.प ५४८) २०५।१न लज्जा न (हि १ १२०) ३४९।३८न वै ताडनात्ता २४६।१९
नमिता फलभारेण न ३४४।८न लभन्ते विनोयोगं (दृ श ३५) ८३।१७न वैरमुद्दीपेय (मा ५ १०८२) ३९४।६९७
न मिथ्यावादस्ते १०६।१५४नलिकागतमपि ५६।१९९न वैरण्यभि (मा २ २४३८) ३९४।६७८
न मुग्धदयिता (शा प १८३) ३७।६१नलिनं मलिन (नैषध २ २३) २५९।९१नवोक्तिजतिरि (शा प १५२) ३०।४
न मुद्रीयान्मुद्री (सु ५५) १८।३०नलिनान्तिकोप (शिशु १३ ४३) १२६।४३न व्यावयो (मा.२ १९७४) ३८६।३७७
न मे दु ख (शा प ३४५६) २७७।४नलिनि निपुणता २४४।२२४न व्याधिर्न (योगवा सा १ २७) ३८६।३७८
नमो नम काव्यरसाय (सु.१६८) ३१।३०नलिनीदलगत (शा प ५५७) १७१।७९०न व्यासिरेषा (दृ श ४१) १६८।६८९
नमो रामपदाम्भोजं २०१।६नलिनीदलगत (मोहमुद्गर) ३७३।१७२न शब्दशास्त्रे (पञ्च सू १९) ३८९।४८४
नमो वाङ्मनसातीत (सु १५) १।५नलिनीदलताल २८५।६न शान्तान्तस्तुष्णा (सु ४९१) ७२।५६
नमो विश्वसृजे (रघु १० १६) १४।२न लोकायत (शा प १५२१) १६६।६०६न शीलं दृग्भङ्गी २५५।३३
नम्रत्वेनोन्नमन्त (भर्तृ २ ५९) ५३।२७७न लोपो वर्णाना १०६।१५३नश्यतो युध्य (मार्कण्डेयर ४९) ३८६।३७७
नयगुणोपचितामि (रघु ९ २७) ३३२।४०नवं वयो (शा प.२०८३) १४५।१११न श्लाघते खल १९९।१९
न यज्वानो (पच १ ३२३) १४९।२९८नव वस्त्रं नव (नीतिप्र १५) १५९।२९६न श्वेतांगुव (शा प ११११) २१८।६५
न यत्नकोटिशतकैरपि ५५।४४नवकदम्बरजोरु (शिशु ६ ३२) ३४१।३८नष्ट मृतमति (पच १ ३६३) १६४।५१३
न यत्र गुणव (सूक्ति ३६ ३७) २४७।५५नवकनकपिंशङ्ग(शिशु ११ ४३)३२७।१२नष्टमपात्रे दान (सु ३४१) ५८।१६६
न यत्र स्थेमानं २३०।३३नवकिसलयतल्प (ताराश १२२)२७५।२२नष्टे वारिजविपिने २२२।५९
नयनच्छलेन सुत २५९।७५नवकुङ्कुमचर्चिका २९९।१८न सशयमना (मा १ ५६१३) १६३।४३४
नयननिपाते (शा प ३५५५) ३१२।२६नवकुङ्कुमारुणपयो (शिशु ९ ७)२९४।३५न ससारोत्पन्नं (भर्तृ स २६३) ३६८।४३
नयननीरज (शा प ३३३६) २६५।२८४नवकुमुदवनश्रीहा(शिशु ११ २२)३०२।९न सदश्वा कशाघातं (सु २२६५)८०।२७
नयनपंथनिरोधा (शा प ५९४) २७७।८न नवोज्जालैषप्रभृति २८०।८६न समास समर्थस्य १०३।५२
नयनमसि (शा प ७५५) २१०।२१नवचन्द्रिकाकुसुम(शिशु ९.२८)३००।५३न सर्पस्य मुखे १४७।१९३
नयनयुगासेचन (सा द ३ २६७)२७०।१८न वध्यन्ते ह्य (पच १ १२३)१६४।५०५न सवर्णो न च रूप २८८।९
नयनविकारै (शा प ३७६५) ३५९।५७नवनखपदमङ्ग (शिशु ११ ३४) ३०९।६न साधु कुत्रापि ५२।२३९
नयनस्य तुला चक्रे २५९।७०नवनीतोप (सूक्ति १३०.३) ३८५।३१२न सारणीया १५५।१०२
नयनाञ्चलचञ्चरी २६०।१०५नवनीलमेघरुचिर (शा प ७३) ३६७।२९न सा (स्काद नागर अ ११५) ६५।३
नयनानन्द (काव्यप्र १० ५४) २९९।५नवपय कणकोम (शिशु ६ ३६) ३४१।४२न सा प्रीति (मा १३ १८१८) ३९४।६७३
नयनेन निरीक्षिता २७८।३१नवपलाशपलाशव (शिशु.६ २) ३३२।५८न सा सभा (शौन नी ११५) १७४।८८४
नयनोत्पलजलधारा २७५।११न वाचा दुर्गम (र ६ ६७) ३९३।६६८न साहसैकान्त(हि ३० ११६)१७४।९०९
न यस्य चेष्टितं(पच १ २८४)१६४।५१२न वारयामो भवती २१९।८न सुख न च सौभाग्यं ८३।२
नयेन जाग्र (काम नी ७.५८) ३९४।६६९न वित्तं दर्शये (पच १ ४३३) ६४।२न सौख्यसौभाग्य(शा प ३००) ८३।४
न येनाङ्कुरितं (वृ श ५३) १५०।३५९न विद्यया नैव कुलेन ६५।१२न स्कन्दते न (म ७ ८४) ३९४।६९१
नं योजनशतं दूरं (हि १ १४८) ७५।११न विना परिवादेन (शा प ३४६) ५४।२न स्त्रीजित (शा प. १५११) १५४।६६
नरत्वं दुर्लभं लो(अग्निपुराण) १६७।६६०न विना पार्थिवो (पच १ ८७) १४४।८५न स्त्रीणामप्रिय (हि १ ११७) ३४९।४१
नरनारीसमुत्पन्ना १८५।१५न विप्रापादोदकपङ्कि ८९।२न स्वातन्त्र्य (शा प ३२४) १६७।६२६
नरपतिहित (शा प १३५३) १५२।४०९न विमोचयितु ४८।१३२न ज्ञानं न च २९२।३३
न रम्य नारम्य १७७।९८९न विश्वसे (शा प.१३०१) १६०।३२३न स्पृशल्या (काव्या ३ १२१) ३९४।७०३
नरस्य चिह्नं १७४।८९०न विश्वासा (मा ५ १३६१) ३९४।६९५न स्म माति (शिशु १०५०) ३१६।१०
नरस्याभरणं रूपं रूप (चा नी ४३) ८३।२न विष विष (स ७ ४४) ९८।१न स्वप्नेन (गरुड पू अ १०८) १६६।५७३
नरा सस्कार (सु ३०६) १७७।९८०न विषममृतं (शा प ३७७) ६१।२५५न स्वल्पमप्यध्य (हि १ १७२) १७२।८३४
नराणा नापितो (पच ३ ७४) १५९।२७९न विषयभोगो ३६७।२२न स्वल्पस्य कृते (भोज १३) १६१।३५५
नराधिपा नीच(पच १ ४१४)१५०।३९६न विषेण न (कुव १२३) ३४९।५६न खा करेणुमपि २३१।७३
नरेशे जीवलो(काम.नी ४.४२) १४५।१२८नवीनदीनभावस्य याच(कविता ३९) ७३।७न खादुनौषधमिदं १००।४
नरैर्विफलजन्मभिर्गिरि ३१७।४न वेत्ति यो य (वृ चा ११ ८) १७३।८६५न खे सुखे (मा.५ १०८२) ३९४।६८८

६ सुभा०अनु०

४२ | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां ---|---|---

न द्वयेन च (शा प ३०८०) २५।१२नानीयन्ते मधुनि ८०।३९नालम्बते दैष्टि(शिशु २ ८६) १४७।१८६
न हायनैर्न (भा ३ १०६३२) १६७।६१४नान्नृषि कुरुते १६०।३०३नालसा (भा १२ ५२६९) १५३।१०
न हार नाहार २८९।६१नान्त प्रवेशमरणं (अमरु ११४) २७३।५नालस्य (शा.प ११३७) २४४।२३६
नहि कस्य (श्रीकृष्णजन्मख ५) २९४।६८२नान्तरज्ञा (किरात ११.२४) १६१।३६७नालिङ्गन्ति (शा प १२४३) १०८।२००
नहि जन्मनि ज्येष्ठ (शा प गुण ४) ८२।२९नान्तर्विचिन्तयति (सु २७६) ५१।२१४नािलङ्गिता नवलवङ्ग २२३।८६
नहि बुद्धिगुणेनैव (मालवि ४ ६) ८८।१६नान्दीपदानि (दश २ ४०) २५२।४३नालीकभङ्गकृदतीव ११८।१२०
नहि भवति यन्न (भर्तृ स ५६९) ९१।४२नान्बौ स्कन्ध्नति २१४।७७नालेनेव स्थित्वा (शा प ८८९) २०८।२३
नहि भवति वियोग ५१।२१८नापरीक्ष्य नयेद्दण्डं १५०।२३७नालोक क्रियते (सु २२६) ४६।७७
न हीदृश सव (शा प १४७०) १५४।५१नापितस्य गृह ३९४।६८४नाल्पीयसि (शा प.२११) ३८६।३६३
नाकालतो (भा १२ ८८१) ३७९।१०३नापुष्ट (पञ्च पा अ.११०) १६६।६१०नावज्ञया प्रदा (र १ १२ ३१) ३८७।३९२
नाकालतो म्रि(भा १२ ७४२) ३७९।१०६नापेतोऽनुनयेन (अमरु ४२) ३११।२७नावज्ञा नाप्यवैद (सूक्ति २७ २) २१५।१
नाकालमत्ता (भा १२ ७४१) ३८०।१०९नाप्तं यत्केनचिदपि (सु ५१९) ७०।२७नावर्तो न च तरला २१६।६
नाकाले म्रियते(नीतिसार १९) १६०।३०१नाप्राप्यमभि (भा ५ ९९३) १६३।४५८नाविदग्ध प्रियं १६४।५१०
नाकाश न दि (सूक्ति ६९ ११) २९८।३४नाभिप्रभिन्नाम्बु(सा द १० १४) १४०।४नाशयन्तो घनध्वान्त(मा द ७ ८) २९९।६
नाक्रोशी स्या (भा ५ १२६५) ३८०।११२नाभिरन्ध्र २६७।३३९नाश्नन्ति पित(गरुड पू १०८) ३८९।४८६
नाक्षराणि पठता (नै १२५) ७०।३२नाभिषेको (शैन नी ११५) २२०।७नाश्रिय किमभूद्भव २०।७१
नागच्छन्नुपहूयते न ६१।२६१नाभिसङ्गेन २६७।३४१नाश्नाति सेवयौ (पच १ २९०) ९७।९
नागविशेषेषु शेषे २०६।१५नाभीपद्मवस (प्र राघव १ ३) १५।३०नाश्चर्यमेतदधुना (सु ४४५) ६०।२४५
नागुणी गुणिन ४५।१३नाभीबिलान्तर २६७।३५९नाश्रम कारण ३८७।३९४
नागेन्द्रहस्ता (कुव ४५) २६९।३१७नाभीवलयसबद्धा २६७।३४२नासत्यवादििन सख्य ८३।१
नागो भाति (पञ्चरत्न १) १८०।१०४२नाभूतिकालेषु(भा १२.७३८) ३८७।३९६नासा कश्चि (भा १३.१२१८) ३४८।१५
नाग्निस्तृप्यति (पंच २ १४८) १५४।६०नाभूवन्भुवि यस्य (शा प ९२४) २३२।८३नासादसीया (नै ७ ३६) २६०।११६
नाङ्गीकृतव्याकरणौष ४२।७नाभ्यस्ता (भर्तृ स.१९५) ३७४।२१७नासामौक्तिकमबले २६०।११८
नाजारज १६५।५६२नामृत न विषं (भर्तृ स ९१) २५१।१०नासावंशविनिर्मुक्त २५८।४४
नात पर (शा प ३७५२) ३५१।३०नामोदस्ताखिलामो २६१।९३नास्ति कामस (वृ चा ५ १२) १५९।२८६
नात पापीयसी (सु ३१६४) ६६।२१नाम्बुजैर्न कुसुमैरु ३५२।२७नास्ति वर्मसमो (प्रसगा १२) ३८०।३८९
नातिप्रसङ्ग (पच १ १४८) ३४९।६७नायं धार्यमधी २६३।२३१नास्ति क्षुवासमं दुख ९६।१
नात्यक्त्वा (भा १२ ६५८३) ३८६।३६५नाय प्रयाति विकृतिं २९।१८नास्ति मेघ (वृ चा ५ १७) १५९।२८८
नात्यर्थमर्थार्थी (शा प ४३३) १६७।६२५नायं मुवति २८९।७६नास्ति (भा.३ १३६४९) १५६।१४२
नात्युच्चशिखरो (सु २२६०) ८३।१८नायाति वाडवशि ७८।८नास्ति (वराह अ १५३) १६७।६२४
नात्र व्याधशरा २३४।१२०नायातो यदि (सु १४३८) ३५८।७३नास्ति सत्य १६५।५५६
नाथ मयूरो नृत्यति १८४।१९नारब्धं कुचपरि ३१३।४७नास्ति सत्या(भा १ ३०९७) ३८७।३९०
नाथ विलोकय मेघ १८४।९नारमेतान्यसा(भा २ १९७२) ३८७।४०२नास्ति स्त्रीणा (म ५ १५५) ३५१।१६
नाथे श्रीपुरु (शांति १ ११) ३७६।२५८नारसिंहाकृतिं वीक्ष्य १९४।१२नास्तीदृशं (मत्स्य अ ३६) ३८४।३००
नाथो मे विपणिं (कुव १५४) ३५५।८८नारिकेलसमाकारा (हि.१ ९४) ४५।२४नास्त्यन्या तृष्णया (शा प ४२२) ७६।५
नाद्रव्ये निहिता (हि प्र ४४) १६२।४३०नारीणा खलु ३५४।५८नास्माक शिबिका ८०।४४
नाधन्याना (सूक्ति १०३.२६) २१५।१नारीणा मृगनाभि ३२६।३१नास्मिन्सततवेष्ट (सु २२९०) ७८।१५
नाधीतेऽत्र जनो यदि ९९।९नारीणा वचनेन ६१।२६७नास्य भारग्रहे (शा प ९६१) २३४।१३९
नाध्यापयिष्यन्निगमाश्च ४२।१नारी परमुखद्रष्ट्री १५७।१८०नास्योच्छायवती (शा प ९०६) २३०।३९
नानन्दि कैरवमवर्धि २१०।२८नारीभिर्गुरुज (शिशु ८ ४७) ३३९।१०४नाहं रक्षो न (शा प ४०८८) ३६७।१५
नानन्वयस्ते न च ते १०४।९३नारुतुद (मनु २.१६१) १६७।६१५नाह दुश्चरिणी न ६३।३८
नानाभूषणभूषित १०९।२१३नारुहेद्विषमं वृक्ष १६७।६५१नाह धार्यमधी २६४।२३१
नानाविध (काव्य प्र १०.२७) १०५।१४४नार्य कुङ्कुमशङ्कया १३४।२१नाहूतापि पुर पद १०१।१३
नानिवेद्य (हि २ ९०) १४६।१४२नार्यस्तन्वि (अमरु ८) ३१७।४नि पद्म शिशिरेण २१४।७८
सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः४३

| नि पीतपीनति | २१६।१७ | नितरा नीचो (भामिनी अ ७) | २२०।६ | निम्नोन्नत वक्ष्यति | ८४।१७ | | नि पीते कलशो | ३६१।४७ | नितान्तस्वच्छहृदय | १९५।५० | निम्बे किं (शा प १०४०) | २४१।१५५ | | नि शङ्कं गजपति | २२३।७७ | नित्य छेदस्तुणूनाना (अष्टरत्न ३) | ३८५।२१८ | नियत (काम नी २ ४३) | १५२।४१० | | नि शङ्क बहिरम्ब | ३६५।९ | नित्यं (स्काद आ अ २५) | १६६।५९९ | नियत्तै पदैर्निक्षेप्य | १७१।७९७ | | नि शङ्कसोचित(नै ७ ७७) | २६५।२७८ | नित्य निरावृत्ति (सु ८९) | ९।१० | नियमयसि (अ शाकु ५ ८) | १०६।१९६७ | | नि शेषं व्यपनीय | ३२०।२० | नित्यं ब्रह्म (शा प १५५८) | २९१।३ | नियुक्त क्षत्रियो(हि २ ९७) | १४७।२०३ | | नि शेषच्युत (अमरु १०५) | २९३।७ | नित्यं मनोरथस्यापि | ३०४।१ | नियुक्तहस्ता (महा ना ९ ३४) | १५१।३८३ | | नि श्वासानलविद्ध | २७७।५८ | नित्य या (सु ५३८) | ७१।४२ | नियोगिभि (शा प १३३२) | १४४।-३ | | नि श्वासा वदनं (अमरु ९२) | ३०९।११ | नित्य वृद्धिसुपेषि | १८।१९४ | निरक्षरे वीक्ष्य | १७३।८५९ | | नि श्वासोद्गी (काम नी ३ १८) | ३८४।२८८ | नित्यं ज्ञाता सुगन्धा | ३५०।२ | निरञ्जने (किरात ८ ५२) | ३३८।९५ | | नि सारस्य (शा प ४८१) | १५५।११४ | नित्यमाचरतः | ३७१।११५ | निरतिशय (पच १ ३१) | १७१।७७५ | | नि सीम (भामिनी शृ.४६) | २५९।६१ | नित्यमाराधिता देवै | १९७।४९ | निरर्थकं जन्म (स क २ २५३) | २०५।५ | | नि सृप्तोऽह (शा प.४३२७) | ३७२।१४२ | नित्यमास्यं शुचि(शा प ६१२) | १५६।१४४ | निरवद्यानि पद्यानि | ३०।२ | | नि स्नेह नि करुण | ३५८।८० | नित्यानित्यविचारणा | ३७०।८४ | निरवधि (काव्यप्र १० ४२८) | १८।१६ | | नि स्नेह पतिरुज्झिता | २८७।९ | नित्यार्यपृथिवी | १५०।३२५ | निरस्थचालीके | ६७।५९ | | नि स्नेहो याति (शा.प ४१००) | ३६७।६ | निदधिरे (शिशु ६ २४) | ३३५।१२ | निरा (काव्यालं सू ३ १।१२) | २२३।९४ | | नि स्वो वष्टि शतं (अष्टरत्न ९) | ७७।५० | निद्रातुन्दिलशोण | ३२९।२३ | निरीक्षितुं (शिशु १७ ६२) | १२७।११ | | निकटस्थं (दृ श ७५) | १६९।७०६ | निद्रानिवृत्ता (का प्र १० २२) | ३२८।१ | निरीक्ष्य विद्युन्नयनै (कुव ६१) | ३४०।२० | | निकटस्थं दहल्यम्रिनं | १८४।११ | निद्रामीळित (भर्तृ.स ५७९) | २३१।५१ | निरीक्ष्य वेणी | ३३८।७१ | | निकाामं क्षामाङ्गी (मालती २ ३) | २७६।३४ | निद्रार्धमीलित (दश ४ २३) | २७८।४० | निरुत्साहं निरानन्दं(हि २ ७) | ९०।१० | | निखिलं जगदेव(रसगङ्गाधर ) | ३६७।२७ | निद्रितस्य बत | ३४०।४ | निरुद्यमानवद्याझ्या | १९३।२ | | निखिलेषु गुणेषु | १०४।८८ | निद्रे लोचनमुद्रणं | २८१।११० | निरुपादानसम्भार (वेणीसंहार ?) | ३।३ | | निचयिनि (किरात १० २९) | ३४६।१४ | निधे कलानामपि | २१०।१५ | निर्गतामलवाक्यस्य | ३४।३ | | निजकरनिकर (शा प ७५२) | २१०।८ | निन्दन्तु नीति (भर्तृ स.२६५) | ७८।११ | निर्गत्य न विशे | ३९३।६३५ | | निजगुणगरिमा | ८३।५ | निन्दा य (दृ श २७) | १६८।६८३ | निर्गुण इति मृत | ४०।२७ | | निजदोषा (का प्र.१० २३) | १७१।८०१ | निन्यते पितृभिस्त | ८९।८ | निर्गुणमप्यनुरक्त (सु २४२) | ४८।१४१ | | निजनयन (सा द ८ १५) | ३३४।१०३ | निन्यन्ते यदि (प्र राघव १ २०) | ३२।४८ | निर्गुणस्य हतं रूपं(वृ चा ८ १६) | ३८८।४३८ | | निजपतिराद्यः | १८१।२५ | निपतति किल | ९२।६२ | निर्गुणेष्वपि (शा प २३२) | ४६।३९ | | निजपदगतिगुप्परञ्जित | ४७।९६ | निपत्य युधि (शा प १६०७) | १४३।५१ | निर्जितसकलाराति | २०१।५९ | | निजपाणिपल्लव (शिशु ९.५२) | ३५९।८८ | निपपात संभ्रमभूत (शिशु ९ ७१) | ३१०।३ | निर्गतव्यो | २६८।३६५ | | निजप्रियमुरुखप्रान्त्या | ३३७।५९ | निपानमिव (हि १ १७६) | ८२।९ | निर्णेत्रुं शक्य (कुव १७१) | ३१२।१७ | | निजरज पटवास (६.३७) | ३४१।४३ | निग्रन्धनी (भा १२ ६५४८) | ३८०।१४८ | निर्दयं खङ्ग (कुमार १६ ६) | १२७।४ | | निजवर्षािहितस्नेहा | १४५।१२५ | निबिडतमत्तमाल | ३५४।७३ | निर्दहति कुल (प्रसंगा ८२) | ३८८।४२९ | | निजसौख्यं (हि १ १५८) | ७१।१८ | निबिडानुषक्त | २६६।३०८ | निर्धौते सति (शिशु ८.५१) | ३३९।१०८ | | निजा काय (शा प ३८३२) | ३३६।२१ | निभृत निभृतं | ३५२।२४ | निर्मग्नेन मयाम्भसि | १५।२६ | | निजांशुकावृता (शा.प ३७३४) | ३२७।२ | निमग्नस्य (घट नीति २०) | १६०।३०२ | निर्मजचक्षु (सूक्ति ९३ ३) | ३६६।१४ | | निजानपि गजा | ११७।७६ | निमित्तमुद्दि (घट नीति १०) | १७४।९०८ | निर्मासि मुखमण्डले | १२४।८ | | निजानुत्पत्त (भा ५ ११६५) | ३८६।३८४ | निमीलदाकेक (किरात ८ ५३) | ३३८।९६ | निर्माणकौशल(सा द १० ३३) | २५३।६ | | निजाशयवदाभाति | १८८।६९७ | निमीलनन्शंशजुषा(नै १ २७) | २५३।७ | निर्मथ्य खलजिह्वाग्रं (सु ३७६) | ५६।१०६ | | नितम्बगौरवेणासौ | २६८।३७५ | निमीलनाय (शा प.७४३) | २०९।४ | निर्मित्सु शुंदती | २५४।४५ | | नितम्बपीड्य | २६९।४०८ | निमेष (भा १२ १२५०३) | १६१।३५९ | निर्मुक्तरशेषधवलैरचले | १३५।२२ | | नितम्बबिम्ब | २६८।३७२ | निम्ननाभि (का प्र.१०.४६) | ३३८।९९ | निर्मुक्तांशैश (प्र.राघव २ १९) | २५३।२३ | | नितम्बिन्यो नित्यं विनय | ३५२।३७ | निम्नप्रदेशा (कुमार १४ १४) | १२८।४५ | निर्यच्छोणितपूरताम्र | ११५।४८ | | नितम्ब्यो विशाल. | १७५।९८४ | निस्त्रैण्वोधीभूत(शिशु १८ ६९) | १३०।९८ | निर्यद्द्वाससरजीव (विद्ध २ २२) | २९५।६२ |

४४सुभाषीतरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
निर्यान्त्या (शा प ३७२८) ३२४।४८नीचस्तनोत्वश्रु निता (सु १७५) ४०।४३नृत्यत्तद्वद्विजिराजी (रसगङ्गाधर)१२६।२५
निर्लेपौ कुचकुड्मलौ ३२१।२९नीचावमानमलि (दृ श.२०) १६८।६७७नृत्यद्भगोदृहास (कुव १४८) ११६।५६
निर्वाणदीपे (नीतिप्र १३) १७३।८७४नीचेषु यावनी (शा प ५५९) ९९।१३३नृत्यारम्भसरत्सद्गरि ६।७०
निर्विवेकतया बाल्यं ३६७।१८नीचैर्धुर्यवने शुनी १००।३०नृप. कराभ्यासु (नै १२ ८०)१०४।११६
निर्विशेषो यदा (पंच १ ८६) १४६।१५७नीतं जन्म (अमरा ४ १२) २२४।१०८नृप कामासक्तो (हि २.१४२)१५२।४११
निर्विशेषेणापि (पच १ २२५) १५७।१७८नीत नवनवनीतं २२।१११नृपतिनिजाम तया ११५।३३
निर्विषोऽपि (शा प.१२९७) १४९।३१०नीता कुम्भस्थल क १२३।१नृपतिपुरुषशक्ति (मृच्छ ३ १०) २९६।२
निर्वीर्या पृथिवी ९९।२३नीतानामाकुली (कुव ६५) ३१२।१४नृपतिसुकुटरत्न (हनु ७ ३) ११८।१२१
निर्वृत्ताध्वरकृत्य १७८।१०८०नीतिर्भूमिभुजा (नवरत्न ३) १७९।१०३२नृपदीपौ धन (पच.१.२४४) १४९।२९३
निर्वृत्ते सुरतोत्सवे (सु २११६) ३२१।२६नीतिर्लक्ष्मीमुकुरो १११।२५६नृपाणा च नरा(शा.प १२८७)१४५।१२०
निर्व्याजा (शा प ३७५०) ३५१।३८नीते मेदं धौत (शिशु १८.२०)१२९।६५नृपोऽपकृष्ट (मुद्रा ४ १४) १५२।३९७
निर्ह्लादं क्रकचकक्षतै. ३१।४५नीत्वोच्चैर्विशिख (अमरु ११९) ३४७।४६नृसिंहदेवे चलिते १९०।७३
निलय श्रिय. (शिशु ९ १६) २९६।४नीपस्कन्धे कुहरिणि १४१।४नेता यस्य बृह (भर्तृ.स ४९) ९३।१००
निलीना वेश्मान्त २५४।३४नीपस्कन्धे निवसति १४०।१नेतु प्रयाणोन्मुखता १९०।६८
निलीयमानैर्विहगै (कुव १७१) २९३।६नीर दूर तदपि वि २१३।५७नेत्रे खञ्जनगञ्जने (सा.द ३ ५९)२७२।७१
निवासश्चिन्ताया (मृच्छ १.१५) ६७।५५नीरक्षीरविचे (भामिनी.अ १२) २२१।१०नेत्रे खञ्जनगञ्जने नव २८१।१०८
निविशते यदि (नै ४.११) २७५।१८नीरक्षीरे गृहीत्वा ११७।९६नेत्रैरिवोत्पलै (सा द १०.२५) १४०।१
निवृत्ता (भर्तृ स.१७३) ७७।४४नीरजान्यापि निषेव्य २२३।६८नेत्रोपान्तवतंसिते २७२।६०
निशम्य केलीभवनोप ३३०।२नीरन्ध्रं परिरभ्य (शृ ति.२ ६७) ३१०।३नेदं नभोम (सा द १०.३८) ३०४।१५१
निशाचरोऽपि दीनो २०९।६नीरसान्यापि (शा प.२९४) २४२।१८४नेदं मुख मृगवियुक्त २५३।२०
निशारत्नं चन्द्र (प्रसगा १५) ११५।४६नीरागा मृग (शा प ३४८८) २९०।७२नेदं समीरितमकारि ३५९।८९
निशितशरधि (काव्यप्र ४ १९) २५५।१६नीराञ्जिभं (भामिनी.अ ६१) २४४।२३७नेदं सर सरसवारि २२१।२१
निशीथे लीना (शा प ३८९२) ३४२।८६नीलनीरजनि (किरात ९ १९) ३००।३६नेपथ्यादपि रा (सूक्ति ८० २) ३२१।२५
निश्चितं समुद को १८७।९नीलाब्जद्युतिनं १८४।३९नेपालीनामराले १३८।७८
निषेवन्तामेते २३२।७७नीलाञ्जाना नय(स क २ ६७) २७१।४८नेयं विद्युद्भवमध्वि २७४।२१
निष्पन्दा किमु (शान्तिश ४ ३) ७४।४६नीलेन्दीवर (स क ३ ११५) २८१।१०२नैतच्चित्रं यद (अ शा २.१५) १०७।१७५
निष्पन्दामरवि(स क ४ ९४) २३५।१५५नीलोत्पलदल (सूक्ति ४ ९६) ३६।५४नैतद्दारिदगजितं ३४२।७०
निष्कलङ्ककलकैक (शा.प.४६४) ८२।४२नीलोत्पलाभ (शा प ४१२२) ३७२।१५१नैतद्विचित्रं म(भाग.१०.१२) ३८४।२९३
निष्कासयन्त्यनेके २७८।२५नीलोत्पलोल्लसित २५३।२४नैतत्सा प्रह्यति(शा प.३९४२) ३४८।१७
निष्कूजस्तिमिता. १४०।५नीवारप्रसवाग्रमुष्टि (सु.६३७) २३२।८१नैता स्वयमृप(शा प ७८८) २११।१७
निष्क्रामन्नमृश ३७२।१४३नीवारा शुकको (अ शा १ १३) १४१।७नैयायिकाना नलिनाम्ब ४३।४
निष्ष्णातोऽपि च (भामिनी.अ.८५) ५५।५९नीवारौदनमण्डमु १४६।१०नैयायिका वा ननु शाब्दिक ४३।४
निष्पाल्यासु हि • २६।१६५नीवीदर्भापरीतकरा ३१।८१८नैरन्तर्यच्छि (शिशु १८.७६) १३०।१०५
निष्पीडितो यद्य २१०।१६नीवीबन्धोच्छ्वस (मालती २.५) २७६।४८नैर्मल्य वपुषस्त २२९।२२९
निष्पेषोऽस्थिच २४३।१८६नीव्या सयमनं कचे ३२१।२८नैव व्याकरणाज्ञमे ३१।४३
निष्प्रत्यृहमनल्प (शा प १२४) १८।१९नीहाराकरसार (शा प ७७२) २१३।६०नैवाकृति फलति (भर्तृ स.४०) ९२।७२
निष्प्रत्यूहमुपासहे १५।३१नूनं दुग्धाब्धिम (सूक्ति ६ २) ४६।४७नैवात्मनो विनाशं(पच १.४४३)५६।११५
निसर्गसौरभोद्गान्त ३२०।३नून बादालशाइ शो(शा प ५५०)२०७।३नैवार्यं भगवानुद ३०३।१३४
निसर्गादारामे (भामिनी.अ ५२) २३८।७२नूनं हि ते क (भर्तृ स ११८) २५२।४२नैवालवालवलयं २१२।४४
निस्त्रिंशत्रुटि (नैषध.१२ ६६)११०।२४२नूनमयं मे पाप (सु १२६५) २७७।१८नैषा सध्याविधिरवि १३९।५
निहत निहत तूर्ण १४१।१नूनमाज्ञाकरस्त (भर्तृ १ ११) २५९।६०नैषा वेगं सुदुतर (मु २१०७) ३१९।३७
नीचं समृद्धमपि १७६।९६८नृणा धुरि स एवैको (सु ५१०) ७०।१९नैष्ठुर्यं कलकण्ठको २९०।८०
नीच समुत्थितो (शा प.३५६) ५५।६९नृणामन+यस्तफणामूदी ४२।६नो काम प्रति (सु.२५७६) १०८।१९६
नीचतामनवलम्ब्य ७२।२९नृत्यचन्द्रकिणि (सु.१७७३) ३४२।८९नो ग्लानिं भजते १२१।२५८

सस्थाननिर्देशसङ्क्रमकोशः (पृ. ४५)

स्तम्भ १स्तम्भ २स्तम्भ ३
नो चाटु श्रवणं (सा.द.३ ८२) ३०५।१३पक्ष्मालीपिज्र (मालती १ ४) ९।१४२पतिव्रता पतिप्रा (पच.३ १४४)३७७।१२
नो चापाकलनं न १३१।१२१पङ्कज जलेषु वा (शा प ९९) २४३।२१०पतिरतीव धनी सुभ ३५२।२६
नो चारु चर (सूक्ति १७ ९) २२८।२१८पङ्कसकराविगर्हितम(नैषध ५ ८७) ६९।२२पतिभार्या (मनु ९ ८) ३८६।३६१
नो चिन्तामणि (भर्तृ स.२६६) २१४।७५पङ्कानुषङ्गं पथि (शा प ३९१७)३४५।५७पतिर्हि देवो(बौधा स्मृ.१ १३) ३५१।१४
नोच्चै सत्यपि चक्षु (वेणी २ १) १३९।७पङ्गुष्वपि च देवर्षे ३४९।४८पतित्रताया कुच १७३।६६३
नो जानाति कुलीनमु ६३।४२पङ्गो वन्ध्यस्त्वम (स क.४ ११३)७४।३५पत्ति पंक्ति वाहमे १२९।५३
नो तल्पं भजसे न ३०९।२३पञ्चत्व यान्तु बाणा २८५।४५पत्ति पत्तिम (कुमार १६ २) १२७।२
नो तावत्कल्याणि ३६१।४६पञ्चत्वं तनुत्रेव भू (सु १३५५) २८४।३०पत्ति पदातिं र (रघु.७ ३७) १२८।२५
नोदन्वानर्थितामे (सु २६६५) १५३।११पञ्च त्वानुगमि (भा.५ १०४६) ३७७।२०पत्यु प्रवृत्तस्य रतौ ३१९।२४
नो धर्माय त (भर्तृ स ५८२) ३७५।२२३पञ्चदशीरजनिसमा १८६।१०पत्युर्यरपतितावशेष (सु ६३९) २३२।९०
नोपभोक्तु नच (हि १ ११३) ३८४।२७५पञ्चभि. कामिता १५५।११७पत्रं नैव यदा क (भर्तृ २ ८९) ९३।९६
नोपभोक्तुमपि क्लीबो (सु २६७६)७१।१५पञ्चभि. सम्भृत (हि.४ ७१) ३८६।३५०पत्रच्छायासु हं (मालवि २ १२)३३७।५६
नोपभोगपरानर्था १६९।७०४पञ्चभि सह गन्त १५५।८४पत्रपुष्पफलच्छाया (शा प ९७७) २३६।२
नोपभोगो न(काव्या.२ ३२६)३८८।४३५पञ्चभिर्याति दास (हि २ ३८)१६३।४७३पत्रफलपु (भामिनी अ.२२) २४२।१६०
नोपेक्षा न च दाक्षि २११।७पञ्चमेऽहनि षष्ठे (शा.प ३१४) ७५।६पत्राणि कण्टक (शा.प १०१२)२३९।९२
नोपेक्षितव्यो (सु २७६२) १४९।३१५पञ्चसायकमहेन्द्र २७८।३३पथि निपति (सूक्ति १७ ६) २२८।२१४
नो मन्ये दृढब (शा प ९३४) २३२।८९पञ्चास्यपञ्चदशनेत्र ९१।१६पथि पथि लता ३३४।१३१
नो मन्त्रीमयमी (शा प ८२०) २२४।१००पञ्चास्यस्य पराभवा (धर्मवि ७) ३७७।४पथि पथि (काव्य.प्र ४ २०) ३३३।८५
नो रविनं च (सूक्ति ६८ २०) २९४।१०पञ्चेन्द्रियस्य म (भा.५.१०४७) ३७७।५पदद्वयस्य सधान (सु १४०) ३९।१९
नोर्ध्वं न चा (कुमार १४ ३८) १२८।४१पञ्चैतानि विलि १६५।५५५पदन्यासो गेहाद्वहि ३५१।३२
नोर्ध्वमीक्षण (कुमार ८ ५६) २९७।११पञ्चैते पाण्डुपुत्राः ९५।१२८पदप्रणतमालोक्य ३१०।१
नो वा कियन्त २२०।२०पञ्चैव पूजयन् (भा ५.१०४५) ३७७।६पदबन्धोज्ज्वलो हारी ३५।३०
नो सलेन मृगा (भर्तृ १ ७७)३८४।२७६पटलमम्बुमुचा ३४१।३५पदमनन्तरवान्त्वि २०२।८४
नो सध्या समुपासते २०।७४पटालमे पत्यौ नमय (अमरु.४१) ३१८।९पदव्यक्तिव्यक्ती (सूक्ति ४.३५) ३३।४४
नो सेवा विहिता ६७।६५पटविघटितमपि २६५।२८८पदशब्दलीनहृद (सूक्ति ४६ ६) २९४।१
नौका वै भजते २४८।८५पटुत्वं सत्यवादित्वं (हि १ ९९)१६३।४५२पदस्थितस्य पद्मस्य (शा प ४८७) ८६।४
नौका च (शा प दुर्जन १८) ३८८।४३३पटु रटति पलितदूतो ९५।१०पदानि क्रतु (याज्ञ १.३२४) १५०।३४५
नौश्व दुर्जनजिह्वा (कविता.१०) ५४।१४पाठक पाठकश्चैव १५८।२५१पदाभ्यामुन्नि (प्र राघव २.९) २७१।४४
न्यग्रोधे फलशा २४१।१४७पठतो नास्ति मू(शा प.१४२४) १५३।५पदे पदे च रत्नानि (वृ चा २ १)१६०।३११
न्यञ्चञ्चल (सूक्ति.९६ १०) २०८।२५पण्डिते चैव मूर्खे १५८।२२९पदैश्चतुर्भि सुकृते (नै.१ ७) १०५।१२३
न्यञ्चति (भामिनी.शू ४१) २५५।६पण्डिते हि गुणा (स पाठो.५३) ३८।१पद्माकरं दिनकरो (भर्तृ २ ६५) ७५।१३
न्यस्तं यथा मू(शा प ४११५)३७२।१६६पण्डितै सह १५८।२५२पद्माकारैर्योधवक्रे १३०।१०१
न्यस्तं पन्नगमूर्ध्नि ३५३।५७पतङ्गपाकसमये पत ३३१।८पद्माक्षस्रग्दाम(नैषध ७ ४९) ४२६३।२२२
न्यस्तानि (सूक्ति ८६ ५) २६४।२४३पतति रविरपूर्ववारि २९४।४८पद्मातपन्नरसिके (कुव ९०) ३१३।५५
न्याय खलै (सु ३१७) ५०।२०८पतति व्यसने (सूक्ति ११० २३) ४६।२८पद्मानना पद्मपलाश १०१।१०
न्यायनिर्णीत (किरात ११ ३०) ८५।४पततु तवोरसि स (सु २१२०) ३२०।२पद्मापयोधरत (गीत.१ २.१०) १४।१८
न्यायार्जितधनस्तत्त्व ८९।१पततु नभसो गच्छ २०९।१४पद्माया स्तनहेमसद्म १६।१२
न्याय्यं मार्गमनु (सु ५३९) ७१।४३पतत्यविरतं वारि नृत्य (कुव ११४)३४०।७पद्मा सद्मनि केशवस्य १११।२६५
पतलेत्तत्तेजो (नैषध १२.४६) १३५।३१पद्मिनि किमिति २४४।२१४
पकानि प्रच्यवन्ते १४२।१४पतन्ति खङ्गधारासु (शा प ३४३) ६५।४पद्मिन्या सकला ३२४।४९
पकाक्षमिव (सु २७६६) १४४।८०पतन्ति नासि (किरात ४.२३) ३४४।१९पद्मिन्या दयितेऽनु ३२१।१०९
पक्षविकलश्च (मृच्छ.५ ४१) ६६।३३पतन्ति व्यसने दैवात् ४५।२८पद्मे त्वन्नयने स्म (कुव.२०) २४।१५८
पक्षावुत्क्षिप्य धुन्व (सु.२४१८)२०८।२६पतिते पतद्द्मृगराजि २९७।१४पद्मे मूढजने ददा ६३।३४
पक्षिभ्रेष्ठसखीबभूवुरा १९८।३पतितोऽपि राहुव (शा प.४८०) ४७।९२पद्मोदयदिना (सा.द १०.३०) १०३।५८
पक्ष्माग्रग्रथि (सूक्ति ३९ ११) २८६।२०