हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
हम्मीररासो ७५ किन्न^१ निरोध क्रोध करि बुल्लिव । देखो कुबुधि हमीर सु मुझिव ॥ ४१८ ॥ जब हमीर हर मंदिर आए । बहु बिधि पूजि सु बचन सुनाए ॥ धूप दीप आरती उतारी । संकर की अस्तुति उच्चारी ॥ ४१९ ॥ नाराच छंद नमामि ईस संकरं, जटी पिनाकयं हरं । सिवं त्रिसूल^२ पाणियं, बिभुं प्रसुं सुजाणियं ॥ ४२० ॥ त्रिनैन अगि^३ भालयं, गलै^४ सु मुंडमालयं । भवानि^५ बाम भागयं, ललाट चंद्र लागयं ॥ ४२१ ॥ धरैं^६ सु सीस गंगयं, कपूर गौर अंगयं । सुवंग^७ संग फुंकरैं, सु नीलकंठ हुँकरैं ॥ ४२२ ॥ गणं गणेस सांबुयं, कि बीरभद्र जांबुयं । प्रसीद नाथ बेगयं, करो कृपा सु मे जयं ॥ ४२३ ॥ सहाय नाथ किज्जिए, अभै सुदाँन दिज्जिए । अलावदोन आययं, मलेच्छ^८ संग ल्याययं ॥ ४२४ ॥ सुलक्ख बीस सातयं, चढ़े सु कुप्पि^९ गातयं । प्रताप तेज आपकैं, मिटे कुकर्म्म पाप कै ॥ ४२५ ॥ सरन्न सेख आययं, करो सहाय पाययं । उमा सु नाथ नाथयं, गहो सु मोर हाथयं । छुटंत लाज गड्डयं, सरन्नगन्न द्रड्ढय^१० ॥ ४२६ ॥ १ कीन । २ त्रिलोक । ३ अग्नि । ४ गरै । ५ भवा सुबाम भागयं । ६ टरैं । ७ भवंग । ८ मलेच्छ बंस भाइयं । ९ कोपि । १० दिड्डयं ।
७६ हम्मीररासो दोहरा छंद सिव स्वरुप उर धारि कै, मूँदि१ नयन धरि ध्याँन । यह अस्तुति नृप की सुनी, भय प्रसन्न बरदाँन ॥ ४२७ ॥ कहैं संभु हम्मीर सुनि, कीरति जुग जुग तोर । चौदह वर्ष जु साहि सौं, लरत बिघ्न नहिं और ॥ ४२८ ॥ बारै अरु२ द्वै बरष परि, सुदि अषाढ़ सनि सोइ । एकादशी जु पुष्य कौ, साको पूरन होइ ॥ ४२६ ॥ यह साको अरु जस अमर, फबै तोहिं कलि माहिं । छत्री को जुग जुग धरम, यह समाँन कछु नाहिं ॥ ४३० ॥ हरष सहित३ हम्मीर तव, ईस चरण दिय सीस । तब मंदिर तैं निकसि कै, करी जुद्ध कौं रीस ॥ ४३१ ॥ संकर कह्यौ हमीर सौं, सुनहु राव ध्रुव साखि । सहस सूर तेरे जहाँ, परैं मलेच्छ सु लाख४ ॥ ४३२ ॥ चौपाई छंद राव हमीर दिवाँन कराए । मंत्री मित्र५ बंधु सब आए ॥ सूर बीर रावत भट६ बंके । स्वामि धर्म्म तन मन तिन हंके ॥ ४३३ ॥ काछ बाछ दृढ़ बज्र सरीरं । माया मोह न लोभ अधीरं७ ॥ अमृत बचन सबन तैं भक्खे८ । जाचत आपुन प्राँन९ न रक्खे१०॥ ४३४ ॥ नाना११ बिरद बंदि बिरदावैं । १ मुदि । २ बारा सै । ३ सहीत, सहित्त । ४ आखि । ५ मंत्र । ६ भड । ७ अभीरं । ८ भाखे । ६ जीव । १० राखे । ११ बाना । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो ७७ लक्ख लक्ख १ कै पटा जु पावैं ॥ काको वीर राव रणधीरह । कर्यो जुहार राव हम्मीरह ॥ ४३५ ॥ आयस होय करव मैं सोई। देखो २ राव हाथ ३ मम जोई ॥ काकै कन्ह ४ करी जस आगे। कनवज कमध्वज सों रँग ५ पागै ॥ ४३६ ॥ कहै हमीर धीर सुनि बानी। तुम जु कहो सो मोहिं न छानी ॥ अब गढ़ कोट इसम पुर जेते । तुम रक्षक ६ हम जाँनत तेते ॥ ४३७ ॥ दोहरा छंद मैं पहलै पतिसाह सों, कही बात ७ करि टेक। सो अब चौरै ८ साहि सों, करौं जंग अब एक ॥ ४३८ ॥ त्रोटक छंद चढ़िए करि कोप हमीर मनं । करि दिड्ढ सगड्ढ सम्हारि पनं ॥ बहु तोप सुसिद्ध सँवारि ९ धरी। बुरजैं बुरजैं घर धूम परी ॥४३९॥ बहु कंगुर कंगुर बीर अरे । सब द्वारन द्वारन धीर १० परे ॥ सब ठौरन ठौरन राखि ११भरं । चढ़िए गजपै चहुवांन नरं ॥४४०॥ १ लाख लाख । २ देखहु । ३ हत्थ । ४ कहूँ । ५ रिस पागै । ६ रच्छक । ७ वत्त । ८ चौरह । ६ सँवार । १० बीर घरे । ११ रखि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
७८ हम्मीररासो बहु बीर हमीर सुसंग चढ़े । गजराजन उप्पर द्वंद बढ़े ॥ करि डंबर अंबर सीस लगे । मनु सोवत धीर सबीर जगे१ ॥४४१॥ बहु चंचल बाजि करत्त खुरी । तिन उप्पर पक्खर सोंज परी ॥ नर जाँन जवाँन लसैँ दल मैं । रन मैं उनमत्त लसैँ बल मैं२ ॥४४२॥ बहु दुंदुभि बज्जत३ घोर घनं । निकसे तब राव करन्न रनं ॥ बहु बारन बारन बीर कढ़े । गज बाजि सु सिंदन* जान चढ़े ॥४४३॥ लखि साह सनम्मुख कोप कियं । रणथंभ चहूँ दिसि घेर लियं ॥ मिलि राव हमीर सु साहि दलं । बिफरे बर बीर करंत हलं ॥४४४॥ सर छुट्टत फुट्टत पार गजं । सु मनौं अहि पच्छय४ मध्य रजं ॥ तरवारि बहैं कर पानि बलं । धर मध्य धरैं धर हक खलं५ ॥४४५॥ मुख अग्ग६ बढ़े रणधीर लरैं । तिनसों पतिसाह के बीर अरैं ॥ १ गजे । २ नर धीर मनं दरसैं बल मैं । ३ बाजत । ४ पन्नय । ५ घर सीस परैं सिरहाँक खलं । ६ अग्र । *सिंदन=स्यंदन, रथ । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो ७९ अजमंत १ महुम्मद इक अली । तिन संग असीसु सहस्स चली ॥४४६॥ तिहिं द्वंद अमंद बिलंद कियौ । रणधीर महा रण मेलि लियौ ॥ करि कोप तबै रणधीर मनं । वर बैन कहै पन धारि घनं ॥४४७॥ महिमंद २ अली मुख आय जुरचौ । दुहुँ बीर तहाँ तब जुद्ध करचौ ॥ अजमंत कमाँन लई कर मैं । रणधीर कै तीर कढ्यौ उर मैं ॥४४८॥ रणधीर सु कोपि कै साँगे लई । अजमंत कै फूटि ३ कै ४ पार गई ॥ परियौ अजमंत सु खेत जबै । महमंद अली फिरि आय ५ तबै ॥४४९॥ रणधीर सु कोपि कै बैन कहैं । कर देखि अचै मति भुल्लि ६ रहै ॥ किरवाँन सु धीर के अंग दई । कटि टोप कछू सिर माँझ ७ भई ॥४५०॥ तब कोप कियौ रणधीर मनं । किरवाँन दई महमंद तनं ॥ परियौ महमंद अमंद बली । तब साहि कि सैन सबै जु हली ॥४५१॥ लुथि ८ लुत्थि परैं बहु बीर अरैं । बहु खंजर पंजर पार करैं ॥ १ अजमत्ति । २ महमद्द । ३ फुटि । ४ रु । ५ आयौ । ६ भूलि । ७ माँहि । ८ जुथि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
८० \qquad\qquad\qquad\qquad\qquad हम्मीररासो धर सीस परै करि रीस मनं । कर पाँव कटै बहु कीन पनं ॥४५२॥ यहि भाँति भिरे चहुवाँन बली । मुरि साह की सेनि सु भग्गि चली१॥ बलखी जु परे जु हजार असी । लखि कालिय अट्ठ सु हास हँसी ॥४५३॥ चहुवाँन परे इक जो सहसं । सुरलोक सबै बर बीर बसं ॥४५४॥ दोहरा छंद असां सहस२ बलखी परे, महमद अजमत खाँन । तहाँ राव रणधीर कै, परे सहस इक ज्वॉन ॥४५५॥ भजी३ फौज सब४ साह की, परे मीर दोइ बीर । करे याद पतिसाह तब, गज्जति गढ़ कै पीर ॥४५६॥ चौपाई छंद भज्जिय५ फौज साह की जबहीं । फिरो फिरो बानी कह सबहीं ॥ तहाँ साह करि कोप सु बुल्लिव । समर भुम्मि अब खंडि सुचल्लिव ॥४५ ॥ सरबसु खाय भोग करि नाना । अबै परम प्रिय लागत६ प्राना ॥ समर बिमुख तैं जानव जोई । हनूँ७ आप कर तजौं न सोई ॥४५८॥ सुने साह कै कोप८ सु बैनं । फिरिय सैन इम मंत्र सु ऐनं९ ॥ १ हली । २ हजार । ३ भगी । ४ जब । ५ भागी, भाजी । ६ लगत । ७ हनों । ८ कोपि । ६ फिरि सैन इक मत्त सु ऐनं । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो ८१ बगतर पक्खर टोप सु सज्जिय । जुरे जंग बहु मीर सु गज्जिय ॥४५९॥ दोहरा छंद बादित ¹ खाँ पतिस्याह सों, करी सलाँम सु आय । हजरत देखहु ² हाथ ³ मम, कैसी करूँ ⁴ बनाय ॥४६०॥ पद्धरी छंद करि ⁵ कोप बादित खाँ जुरे जंग । मनौँ प्रलै पावक उठे अंग ॥ गुंजत निसाँन फहरात धुज्ज । जुटि जिरह टोप तन नैन सज्ज ⁶ ॥४६१॥ किए ⁷ हुक्म साह तन मैं रिसाइ । किन्हौ सु जंग फिर बीर आइ ⁸ ॥ छुटंत ⁹ तोप मनु वज्रपात । जल सुक्कि धरा छुटि गर्भ जात ॥४६२॥ बहु बाँन चलत ¹⁰ दोउ ओर घोर । अररात ¹¹ अमित मच्यौ महा सोर ॥ भए अंध धुंध सुझै न हथ्थ । बीर चहुवाँन तहाँ ¹² करि अकथ्थ ॥४६३॥ रणधीर उतै बायत्ति खाँन । बजरंग अंग जुट्टे सुयाँन ॥ हज़ार बीस बादित्य साथ ¹³ । १ वदितखाँ । २ पिक्खहु । ३ हथ्थ । ४ करौं । ५ करि कोप जुरे, जुरिव, जुर्यठ, जुरिग बादित्य जंग । ६ जुटि जिरह जिरै तहँ नैन सुज्झ । ७ किय । ८ सहनाय भरै बज्जे तबल्ल । बहु बोर ( चहुँ ओर ) सोर कै करत हल्ल । ६ छुट्टंत । १० छुट्ठि दुहुँ । ११ अर्रत (ट) अमित मच्यौ सु सोर । १२ जुज्झ कीनौ । १३ सत्थ । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
८२ हम्मीररासो सब जुरे आय रणधीर हाथ^१ ॥४६४॥ बज्जत सार गज्जंत भ्रम्भ । रणधीर सथ्थ आये स सभ्भ^२ ॥ करि क्रोध जोध बाहंत सार । टूटंत^३ अंग फूटंत^४ पार ॥४६५॥ करि खेल सेल दोउ^५ ओर बीर । बाहंत बीर किरवाँन धीर ॥ हज्जार बीस बघत साह^६ । धर परे बीर करि अकथ गाह^७ ॥४६६॥ रणधीर मीर दोउ भिरे आइ । बाहत्त गहि गुर्ज तब रोस बाइ ॥ लग्गी सुढाल भू त्रुटि^८ ताँम । फिर^९ दई सीस किरवाँन जाँम ॥४६७॥ लग्गी सु सीस धर परचौ जाय । दुइ टुक^१० होय भुमि^११ अद्ध काय ॥४६८॥ दोहरा छंद भयौ सोच जिय साह कै, जीतिय^१२ जंग हमीर । बादित खाँ से रन परे, बीस हजार सु बीर ॥४६९॥ महरम खाँ कर जोरि कै, करै अर्ज तिहिं बार । लै कर सेख हमीर अब, किसो(?) मिल्यौ यहिं बार ॥४७०॥ गही तेग तुम सौँ अबै^१३, हठ नहिं तजै हमीर । सेख देय मिल्लै नहीं, पन सचो^१४ बर बीर ॥४७१॥ १ हत्थ । २ सब्ब । ३ दुट्टंत । ४ फुट्टंत । ५ दुहुँ । ६ साथ सत्य । ७ गाय, गत्थ । ८ तुट्टि, फुट्टि । ६ फिरि धीर दई । १० टूक । ११ भुंमि । १२ जित्यौ, जित्यउ, जीत्यौ । १३ तबै । १४ साँचो । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो ८३ छप्पय छंद कर कुराँन गहि साह सीस साहिब कौ नायौ १ । गढ़ दिस२दल चहुँ ओर घेरि रज अंबर छायौ ॥ देखि अलावदि साह कहैं दल बहल भारी । अब हमीर की अहलि३आय पहौंचीह सुसारी ॥ महरम्म खाँन इम उच्चरै अदलि हाथ४साहिब तनै । होनहार५ ह्वैहै अबै को जानै कैसी बनै ॥४७२॥ दोहरा छंद हजरति अपने इष्ट पर, पावक जरत पतंग । यह हमीर कबहुँ न तजै, सेख टेक रणथंभ६ ॥४७३॥ साह दसों दिसि जित्ति कै, अब आए७ रणथंभ । कहै८ राव रणधीर सों, जुरौ सूर रण रंग ॥४७४॥ अप्पन९ धर्म न छंडिए, कहै बात१० रणधीर । निसि बासर अब साह सौं, किज्जिय जंग हमीर ॥४७५॥ छप्पय छंद को कायर को सूर द्यौस११बिन दृष्टि१२ न आवै । बिन सूरज की साखि सार छत्री न समावै ॥ बीर गिद्ध१३ अरु संभु सकल पलहारी जेते । धर पर धरैं न पाँव रैन मैं दिनचर जेते१४ ॥ इम कहै राव रणधीर सौं मैं अधर्म्म नाहिन१५ कहूँ । अब अलावदी साह सौं रैन सार कबहुँ न गहूँ ॥४७६॥ १ नाये । २ देसल । ३ अदलि रही चाँद रोज सुसारी । ४ हत्थ । ५ का होनहार । ६ गढ़ जंग । ७ आइय । ८ कहै राव हम्मीर तैं धीर जुड़न रणथ्रंभ । ६ अपणो । १० बत्त । ११ दिवस । १२ दिस्ट । १३ गृद्ध । १४ तेते । १५ नहींन । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
८४ हम्मीररासो दोहरा छंद घाटी घाटी साह कै, माटी मिलत अमीर । राव जंग दिन मैं करै, राति लड़ै रनधीर ॥४७७॥ तारागढ़ कै पीर कौ, करै याद पतसाह । रणतमँवर की फते¹ दे, कदमूँ आऊँ चाह ॥४७८॥ छप्पय छंद जबहीं मीरा सयद् साह की मदत पठाए । सिर उतारि कर लिये राव परि सम्मुख धाए ॥ जब हमीर की भीर च्यारि सुर सुद्ध सु आए । ... ... ... ... ... ॥ गणनाथ संभु दिनकर अवर छेत्रपाल मन रब्जिए² । रणथंभ खेत दुहुँ ओर सों बीर पीर दुव सज्जिए ॥४७६॥ छंद भुजंगप्रयात लरै नो सयद्द³ रणथ्थंभ³ देवा । करै क्रोध भारी पिलै हर्ष भेवा ॥ गरब्जंत⁴ घोरंत आतंक भारी । घनै घोर५ बर्षत बर्षा करारी ॥ ४८० ॥ कभू हल्लवै भुम्मि गज्जंत बीरं । कभू घोर अंधार बर्षत पीरं ॥ गणनाथ हथ्थं लिये तिक्षि फर्सी । पिनाकी पिनाँकं किये आप दर्सी ॥ ४८१ ॥ धरे मुद्गरं हथ्थ⁶ भैरव अमानो । इसे देव जुट्टे सु कट्टे अमानो ॥ इतैं पीर हजरत कै सथ्थ⁷ पिल्ले । १ विजय । २ रंजिए । ३ सयद् रणथम्भ । ४ गर्जंत, गज्जंत । ५ घाय । ६ हाथ । ७ साथ । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो ८५ अबदलल एकं¹ हुसैनं सुभिल्ले ॥ ४८२ ॥ रहीमं सयद्दं सुलत्तान जक्की । अहमद्द कानीर सूलं सु मक्को ॥ इतै बीर जुद्धे सु कट्टे पुरानं । भयौ जुद्ध भारी सु भूले² कुरानं ॥ ४८३ ॥ परे खेत नो सैद³ दड्ढे धरन्नी । हँसे संकरं भैरवं की करन्नी ॥ परे पीर यूं नौ रसूलं सु अल्ली । परचौ पीरे दूजो कुतव्वं सु चल्ली ॥ ४८४ ॥ परचौ जो हुसैनं करचौ जुम्भ⁴ भारी । परे हेरि हिम्मत्ति अल्ली सुधारी ॥ सयद्दं सुलत्तान आयौ जु मक्का । अदल्ली परे और तुकी सु बंका ॥ ४८५ ॥ परचौ दूसरो जो रसूलं सु खेतं । तबै बादस्याहू भयौ सो अचेतं ॥ परे मीर नौ सैद जानंत साहं । लरे अट्ठ बीरं हटै वैन काहं ॥ ४८६ ॥ अजंमत्त भारी हमीरं सु जानो । तबै कुच्च किन्नौ दरै छाड़ि कानी ॥ उलट्ठे परे जोय किन्नौ दिवानं । जुरे खाँन जेते सु तेते अमॉंनं ॥ ४८७ ॥ वजीरं अमीरं सबै खाँन बुल्ले । सबै बात मंत्रं सु संत्री सु खुल्ले ॥ ४८८ ॥ दोहरा छंद मरहम खाँ उज्जीर तब, अरज करी सब खोलि⁵ । १ इक्कं । २ भुल्ले । ३ सयद, सद्ह । ४ जुद्ध । ५ खुल्लि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
८६ हम्मीररासो लख बलखी उमराव तो, सदकै भए हरोल ॥४८९॥ अरु बकसी के बचन सुनि, साह कियौ१ अति सोच। निबहीं राव हमोर की, गिनौ हमें सब पोच२ ॥४६०॥ महिमा साह हमीर गढ़, ये तीनों३ साबूत। बाजो रही हमीर की, मैं कायर४ जु कपूत ॥४६१॥ छप्पय छंद महरम खाँ कर जोरि साह५ कौं ऐसैँ भाख्यौ। इक हिकमत तुम करो नीक जानो तो राखो६ ॥ महल७ छाड़ि करि फते बहुरि गढ़ सौं जुध८ किज्जिय। तोरि छाड़ि रणधीर मारि कै पकरि सु लिज्जिय९ ॥ आतंक संक गढ़ मैं परै मिलै राव हठ छोड़ि१० कै। गहि सेख देय मिलि सुत्तवै करो कूच जब उलटि कै ॥४६२॥ चौपाई छंद कहै साह महरम खाँ सुनियो। यह मत खूब किया तुम गुनिथो११ ॥ छाड़ि दरा कौ प्रथम दिली१२ जे। चंद रोज महँ फतह जु कीजे१३॥४९३॥ दोहरा छंद मरहम खाँ पतसाह को, हुकम पाय तिहिं बार। सकल सेन तजबीज करि, घेरी छाड़ि हँकार ॥ ४६४ ॥ छंद बियक्खरी कोप पतिसाह गढ़ छाड़ि लगै। १ कियव । २ सोच । ३ तीन्यू, दोऊ । ४ कातर । ५ तबै हजरति सों भाख्यौ । ६ रख्यौ भक्ख्यौ, रक्ष्यौ अंत्यानुप्रास । ७ पहल पहलै । ८ जंग कीजे । ९ लीजे । १० छाड़ि । ११ सुनिए, गुनिए अंत्यानुप्रास । १२ दिलिजिय । १३ किज्जिय । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो ८७ सहस¹ सब तीन नीसाँन बग्गै॥ सहस² दस सात आरब्ध छुट्टै। गरज गिरि मेरु पाषाण फुट्ठै॥४९५॥ उठत गुब्बार महि तोप लज्जौ। गए बन छंड़ि³ मृग सिंह भग्गै॥ लक्ख⁴ पच्चीस दल ओर फेरचौ। यह भाँति पतिसाह गढ़ छाड़ि घेरचौ॥४९६॥ कहै पतिसाह नहिं बिलम⁵ किज्जे। चंद दिन⁶ बीचि गढ़ छाड़ि लिज्जे॥ कहै रणधीर मन धीर धरिए। आय चहुआण⁷ सफजंग⁸ करिए॥४९७॥ निस्साँन⁹ सो सद्द१० सुंदर सुवज्जै। रोब रणधीर आयुद्ध११ सज्जै॥ बीर रस१२ राग सिंधू स१३ बज्जै। सहस इकतीस दल संग लिज्जै१४॥४९८॥ सहस दस सूर कुल तेग१५ खेलैं१६। अप्प जिय रक्खि परमाल१७ पेल्लैं१८॥ यह१९ भाँति रणधीर चौगाँन आए। गरद उड़ि जमी असमॉन छाए॥४९९॥ अबदल्ल२० कीरम्म२१ पतिसाह दिल्लै२२। १ तीन सहस नीसाँन दल माहिं बग्गै। २ दो सहस आरखौ तेज छुट्टै। ३ छाड़ि। ४ लाख। ५ विलम्ब (बिलंवं)। ६ रोज। ७ चौगाँन। ८ सफरजंग। ६ नीसाण सों साज सुर सद्द गज्जै। १० सब्द। ११ आवद्ध। १२ रण। १३ सिंधूल। १४ लज्जै। १५ तत्थ। १६ खिल्लैं। १७ परमार। १८ चिल्लैं। १६ इस। २० अवदुल, अबदुल्ल। २१ करीम, करींम। २२ पैले। CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
८८ हम्मीररासो मीर रणधीर चौगाँन खिल्लै ॥ बहै बाँन किरवाँन¹ औ चक्र² चल्लैं । रणधीर कह सूर तुम होहु भल्लै ॥५००॥ साह सों सूर संमुख्ख जुरिए । हवस के मीर दस सहस परिए ॥ दुट्टि³ सिर मीर धड़ पहुमि⁴ लक्खै । पंच सत सूर लड़ि गिद्ध⁵ भक्खै ॥५०१॥ राव रणधीर अप्पन⁶ सिधारे । अबदुल्ल⁷ कीरंम खाँ पुह्मि पारे ॥ साह रणधीर सफजंग⁸ जुरिए । साह दल उलटि दो कोस परिए ॥५०२॥ कहै रणधीर नहि बिलँम किज्जै⁹ । बीति चँद रोज गढ़ छाड़ि लिज्जे¹⁰ ॥ गढ़ कोटहू भाँति¹¹ नहिं हथिय¹² आवै । यूं ही¹³ पतिसाह दल क्यों खिसावै ॥५०३॥ दोहरा छंद बर्ष पंच¹⁴ गढ़ छाड़ि को, नहिं संबत् पतिसाह । द्वादस वर्ष रणथंभ सों, निधरक लरि अव¹⁵ साह ॥५०४॥ छप्पय छंद धनि सु राव रणधीर साह मुख आप सराह्रै । मुझ दिसि सम्मुख आय कोप करि सार समाहैं ॥ १ कैयार । २ चक्क । ३ टूटि । ४ पौहम । ५ गिरध, गिर्ज । ६ आपन । ७ अबदुलकरीम खाँ पौहुमि पारे । ८ सपरजंग । ९ कीजे । १० लीजे । ११ कबहूँ । १२ हाथि । १३ कोपि । १४ पाँच । १५ पति ।
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हम्मीररासो [Page 89: ८९] साह बचन इम कहै मीर महरम खाँ सुनिजे¹ । जीति² जंग रणधीर धन्य वह राव सुभनिजे ॥ पतसाह राडि सफजंग³ की मनै करिय आपन⁴ सबै । चहुँ ओर जोर उमराव सब किये मोरचा दृढ़ अबै⁵ ॥५०५॥ जबै⁶ राव रणधीर कहै हम्मीर सुणिज्जे⁷ । सबै⁸ हिंद को साथ बोलि⁹ रणथंभ सु लिज्जे¹⁰ ॥ लिखि फर्माँनहूँ¹¹ राव बंस छत्तीस बुलाए । जुरे जंग चौगाँन उमंग दल बहल छाए ॥ कर जोरि सबै हाजिर भए¹² राव बचन या¹³ विधि कहै । मैं गही तेग पतिसाह¹⁴ सों घरि जाहु जौन जीवौ चहै ॥५०६॥ कह काकौ रणधीर राव सुन बचन हमारे । अबै छंडि¹⁵ कित जाहिं¹⁶ खाय करि निमक तिहारे ॥ अलीदीन सों जुद्ध छंडि गढ़ चौरै मंडों । जिती साहि की सेन मारि खंग खंड बिहंडों ॥ चादूँ¹⁷ सुनीर या वंस को अकथ गत्थ¹⁸ ऐसी करूँ । रबि लोक भेदि भेटूँ सुभट अप्प¹⁹ सीस हरं हिय धरूँ ॥५०७॥ दोहरा छंद कहै राव हम्मीर खाँ, मंत्रि एक²⁰ रणधीर । जमीति गढ़ चित्तौर की, अजहुँ²¹ न आइय²² बीर ॥५०८॥ लिखि फर्मांन हमीर तब, पठए गढ़ चित्तौर । वंचि²³ खाँन बल्हन²⁴ कुँमर, हर्ष²⁵ कीन नहिं थोर ॥५०६॥
पाद-टिप्पणियाँ (Footnotes)
१ सुनिए । २ जित्ति । ३ सफरजंग । ४ अप्पन । ५ सबै । ६ जब सुराव । ७ सुणीजे । ८ सभै । ६ राण । १० लीजे । ११ फुरमाना । १२ अहै । १३ इम । १४ हजरत्ति । १५ छाड़ि । १६ जायें । १७ चाढूँ । १८ गाथ । १६' आप। २० इक्क । २१ अजौं । २२ आए । २३ वाँचि । २४ बाल्हन । २५ हर्ष न किन्न्यउ । ९९-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
९० हम्मीररासो चौपाई छंद हर्षे उभै कुँमर चौहाँनं। चतुरँग कै तुरंग सजि आनं॥ सोला सहस चमूँ सजि सारी। सजे खाँन बल्हन¹ सी भारी॥५१०॥ सहस तीन² कमध्वज्ज सु जानो। सहस अट्ठ³ चहुवाँन बखानो॥ सहस पंच पम्मार⁴ अमानै। सोला सहस सजे करिवानै⁵॥५११॥ मोतीदाम छंद मिले तब आय कुमार सु दोय। हमीर सुचाव कियौ बहु जोय॥ बढ़्यौ हिय हर्ष दुहूँ⁶ उर सोय। कहैँ⁷ तब बैन सु राव सु होय॥५१२॥ क्रियौ सनमाँन सुराव अपार। मिलंत कुँवार⁸ दयौ सिर भार॥ रख्यौ तुम सेख भए जग धन्य। रहै नहिं कोय सदा जग अन्य॥५१३॥ रहै जग कित्तिय⁹ नित्ति अभंग। सदा यह देह कहैँ¹⁰ छिनभंग। जिते हम सेवक ज्यों अब ठड्ढ¹¹। रहो निहचित्त¹² अभै यह गड्ढ¹³॥५१४॥ करैं हम जंग लखो अब हत्थ। १ बाल्हन । २ तीस । ३ आठ । ४ पँन्वारन आनो । ५ किरवानो । ६ दहूँ । ७ कियौ सु जुहार मिले वर दोय । ८ कुँमार । ६ कीरति । १० नहीं । ११ अवट्ठ । १२ रहै निश्चिंत । १३ गल्ह ।
हम्मीररासो ९१ उठे दुहुँ बीर कही यह गत्थ ॥ चढ़े चतुरंग कियौ तन कोप। मनौं अरुनोदय भाँन सु ओप१ ॥५१५॥ बजे रणतूर सु भेरि रबद्द । भए पढ़ गोमुख बीर सु सह ॥ चढ़े कुँवरेस तबै चतुरंग । बढ्यौ हिय हर्ष करै रणरंग ॥५१६॥ कहै तब खाँन सु बाल्हन सीह । करे सफजंग अबैदल२ वीह ॥ रतन कुमार रखो गढ़ ओर। नरव्वल ग्वालिर ओर चितोर३ ॥५१७॥ नठै तब अन्न करो सफजंग । तजो मति टेक लरो४ अनभंग ॥ असो सुनि बैन हमीर सुभाय । भरे५ जल नैन रहे मुरझाय ॥५१८॥ कही६ तब कौर नहीं थिर कोय । चले गिर मेरु नहीं थिर सोय ॥ मिले सुरलोक ससोक सकौन । सुनी यह राव रहे गहि मौन ॥५१६॥ गए रणवास जहाँ दोउ७ बीर। कियौ परणाम जुहार सुधीर ॥ सवै८ रणवास भरे जल नैन । कही९ तद् आसमती यह बैन ॥५२०॥ करो तुम१० उछछह हैं यह बार । १ चढ़ तन नूर वढ़ मुख ओर । २ अबद्दल । ३ औ चित्तोर ४ लरो न अभंग। ५ ढरे । ६ कहे । ७ दुव । ८ सबै । ६ कहे । १० बहु। CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
९३ हम्मीररासो कहे तदि¹ बैन हँसे जु कुमार ॥ धरो तुम सीस हमारे जु² मोर । लरैँ सिर सेहर बाँधि³ सजोर⁴ ॥५२१॥ बँध्यौ तब मौर कुमारन सीस । दई बहु भाँतिन आस असीस ॥ कियौ बहु हर्ष कुमार अपार । गए हर मंदिर सो तिहिं बार ॥५२२॥ गनेसुर संकर पूजि⁵ सुभाय⁶ । करे बहु ध्याँन गहे जब⁷ पाय⁸ ॥ चढे बरबीर बढ्यौ हिय चाव । बजे बहु बाजि⁹ निसॉँनन घाव¹⁰ ॥५२३॥ गजे असमाँन धरा हुब भाय¹¹ । गजे¹² घनघोर घटा मनु छाय¹³ ॥ तुरंग अनेक सुफेरत सूर । बनी तिन उप्पर पक्खर पूर ॥५२४॥ झलक्कत नूर चमककत सेल । चढ़े मुख ओप¹⁴ बढ़े मुख मेल ॥ उड़े¹⁵ रज अंबर सुज्झ न भाँन । हँसे हर देखत¹⁶ लुट्ठिव ध्याँन ॥५२५॥ चली सँग अच्छरि जुग्गनि ताँम । मिली बहु पंखनि¹⁷ गिद्धनि जाँम ॥ मिले बहु भूचर खेचर हूर । चले पल चारिय भूत सुभूर ॥५२६॥ १ तब । २ सु । ३ वंधि । ४ मोर । ५ पुज्जि । ६ सुभाइ । ७ तव । ८ पाइ । ६ बादि । १० हाव । ११ भाइ । १२ गज । १३ छाइ । १४ नूर । १५ उठी । १६ दिक्खत, पिक्खत । १७ पक्खनि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
हम्मीररासो ९३ करे सु जुहार हमीरहिं ध्याय¹ । करो यह बात² परस्सि³ सुपाय ॥ मिले भव आनि⁴ सुनो चहुवाँन । करै कल रीति तजै नहिं बाँन ॥५२७॥ तजो⁵ धन धाँम रु लोभ सु⁶ मोह । धरो⁷ मनु टेक सरन्न सुजोह ॥ इती कहि सीस नवाय हमीर । कियौ रणथंभहिं वंदन⁸ धीर ॥५२८॥ चले सन्मुख उभै कुमरेस । सजे चतुरंग तनय करि रेस ॥ जहाँ पतिसाह अलावदि और । चली⁹ बर बीरति¹⁰ बाँधि¹¹ सुमौर ॥५२९॥ दोहरा छंद करि असुवारी कुमर दोउ, उतरे पौलि सु आए । डेरा करे उछाहजुत, बजि नोबति नीसाण¹² ॥५३०॥ सुणि नोबति के नाद¹³ तब, बहु उछाह गढ़ जाँन । तब अलावदी हसम दिसि, चाहत भयौ निर्धा(दा)न ॥५३१॥ बोलि खाँन सुलतान तब¹⁴, मसलति करी जु¹⁵ साहि । गढ़ मैं कहा उछाह अति, कहा (कौन) सबब यह आहि ॥५३२॥ हैं यह राव हमीर के, लघु भय्या¹⁶ के पूत । लरन काज¹⁷ इन सेहरो, सिर बाँध्यौ¹⁸ मजबूत ॥५३३॥ भय संक पतिसाह¹९ उर, कीनौ²⁰ बहुत बिचार । १ करे जहाँ राव हमीरहिं ध्याम ( धाम ) । २ बत्त । ३ पस्ति । ४ मिलै भव आन । ५ तजै । ६ रु । ७ धरै । ८ चंदन । ६ चले, चढ़े । १० बीरसु । ११ बंधि । १२ अप्रमाण । १३ नद । १४ सब । १५ सु । १६ भ्राता । १७ कज । १८ बंध्यौ । १६ अति । २० किन्नौ । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri
९४ हम्मीररासो। जौ न सिंह के मुख चढ़ै, सो भिल्लै इन सार ॥५३४॥ चौपाई छंद कहै वजीर साह सुनि बत्तं । मीर अरब्बिय¹ जानि सु तत्तं ॥ मर्कट बदन² सूकर सम³ काँनं । द्रग मंजार बेसू खल जाँनं⁴ ॥५३५॥ तुम⁵ साँमत प्रथिराज सु अग्गैं । गढ़ गज्जनि आए⁶ गहि खग्गैं ॥ तुमहिं दिली के तख्त बसाए⁷ । गौरीसा कै भए सहाए ॥५३६॥ वै⁸ दोउ कुमर पकरि अब लावैं । सन्मुख होइ तो⁹ मारि गिरावैं¹⁰ ॥ सुनि वजीर के बचन सुहाए । मीर जमालखाँन बुलवाए¹¹ ॥५३७॥ कहै साह सुनि मीर जमालं । है यह काम तुम्हारे हालं ॥ आगै¹² तुम गहियो प्रथिराजं । त्यों¹³ तुम गहो कुँमर दोउ आजं ॥५३८॥ छप्पय छंद सुणि जमाल खाँ मीर हत्थ¹⁴ धरि मुच्छ सँवारिय¹⁵ । पाव परसि कर जोरि कवन बड़ काज¹⁶ निहारिय¹⁷ ॥ १ अरबी । २ मुख । ३ सुक्कर इव । ४ द्रगमजार बपुष (कू) खल जानं (जानहु) । ५ तिहिं सामत । ६ गजनी लाये । ७ बैसाये, बठाये । ८ वैदुव कुँमर पकरि गहि ल्याऊँ । ६ तोयसो । १० गिराऊँ । ११ बुल्लाए । १२ अग्गै । १३ तिम । १४ हाथ । १५ बकारिय । १६ कज । १७ निकारिय । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri