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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

८४ हम्मीररासो दोहरा छंद घाटी घाटी साह कै, माटी मिलत अमीर । राव जंग दिन मैं करै, राति लड़ै रनधीर ॥४७७॥ तारागढ़ कै पीर कौ, करै याद पतसाह । रणतमँवर की फते¹ दे, कदमूँ आऊँ चाह ॥४७८॥ छप्पय छंद जबहीं मीरा सयद् साह की मदत पठाए । सिर उतारि कर लिये राव परि सम्मुख धाए ॥ जब हमीर की भीर च्यारि सुर सुद्ध सु आए । ... ... ... ... ... ॥ गणनाथ संभु दिनकर अवर छेत्रपाल मन रब्जिए² । रणथंभ खेत दुहुँ ओर सों बीर पीर दुव सज्जिए ॥४७६॥ छंद भुजंगप्रयात लरै नो सयद्द³ रणथ्थंभ³ देवा । करै क्रोध भारी पिलै हर्ष भेवा ॥ गरब्जंत⁴ घोरंत आतंक भारी । घनै घोर५ बर्षत बर्षा करारी ॥ ४८० ॥ कभू हल्लवै भुम्मि गज्जंत बीरं । कभू घोर अंधार बर्षत पीरं ॥ गणनाथ हथ्थं लिये तिक्षि फर्सी । पिनाकी पिनाँकं किये आप दर्सी ॥ ४८१ ॥ धरे मुद्गरं हथ्थ⁶ भैरव अमानो । इसे देव जुट्टे सु कट्टे अमानो ॥ इतैं पीर हजरत कै सथ्थ⁷ पिल्ले । १ विजय । २ रंजिए । ३ सयद् रणथम्भ । ४ गर्जंत, गज्जंत । ५ घाय । ६ हाथ । ७ साथ । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

हम्मीररासो ८५ अबदलल एकं¹ हुसैनं सुभिल्ले ॥ ४८२ ॥ रहीमं सयद्दं सुलत्तान जक्की । अहमद्द कानीर सूलं सु मक्को ॥ इतै बीर जुद्धे सु कट्टे पुरानं । भयौ जुद्ध भारी सु भूले² कुरानं ॥ ४८३ ॥ परे खेत नो सैद³ दड्ढे धरन्नी । हँसे संकरं भैरवं की करन्नी ॥ परे पीर यूं नौ रसूलं सु अल्ली । परचौ पीरे दूजो कुतव्वं सु चल्ली ॥ ४८४ ॥ परचौ जो हुसैनं करचौ जुम्भ⁴ भारी । परे हेरि हिम्मत्ति अल्ली सुधारी ॥ सयद्दं सुलत्तान आयौ जु मक्का । अदल्ली परे और तुकी सु बंका ॥ ४८५ ॥ परचौ दूसरो जो रसूलं सु खेतं । तबै बादस्याहू भयौ सो अचेतं ॥ परे मीर नौ सैद जानंत साहं । लरे अट्ठ बीरं हटै वैन काहं ॥ ४८६ ॥ अजंमत्त भारी हमीरं सु जानो । तबै कुच्च किन्नौ दरै छाड़ि कानी ॥ उलट्ठे परे जोय किन्नौ दिवानं । जुरे खाँन जेते सु तेते अमॉंनं ॥ ४८७ ॥ वजीरं अमीरं सबै खाँन बुल्ले । सबै बात मंत्रं सु संत्री सु खुल्ले ॥ ४८८ ॥ दोहरा छंद मरहम खाँ उज्जीर तब, अरज करी सब खोलि⁵ । १ इक्कं । २ भुल्ले । ३ सयद, सद्ह । ४ जुद्ध । ५ खुल्लि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

८६ हम्मीररासो लख बलखी उमराव तो, सदकै भए हरोल ॥४८९॥ अरु बकसी के बचन सुनि, साह कियौ१ अति सोच। निबहीं राव हमोर की, गिनौ हमें सब पोच२ ॥४६०॥ महिमा साह हमीर गढ़, ये तीनों३ साबूत। बाजो रही हमीर की, मैं कायर४ जु कपूत ॥४६१॥ छप्पय छंद महरम खाँ कर जोरि साह५ कौं ऐसैँ भाख्यौ। इक हिकमत तुम करो नीक जानो तो राखो६ ॥ महल७ छाड़ि करि फते बहुरि गढ़ सौं जुध८ किज्जिय। तोरि छाड़ि रणधीर मारि कै पकरि सु लिज्जिय९ ॥ आतंक संक गढ़ मैं परै मिलै राव हठ छोड़ि१० कै। गहि सेख देय मिलि सुत्तवै करो कूच जब उलटि कै ॥४६२॥ चौपाई छंद कहै साह महरम खाँ सुनियो। यह मत खूब किया तुम गुनिथो११ ॥ छाड़ि दरा कौ प्रथम दिली१२ जे। चंद रोज महँ फतह जु कीजे१३॥४९३॥ दोहरा छंद मरहम खाँ पतसाह को, हुकम पाय तिहिं बार। सकल सेन तजबीज करि, घेरी छाड़ि हँकार ॥ ४६४ ॥ छंद बियक्खरी कोप पतिसाह गढ़ छाड़ि लगै। १ कियव । २ सोच । ३ तीन्यू, दोऊ । ४ कातर । ५ तबै हजरति सों भाख्यौ । ६ रख्यौ भक्ख्यौ, रक्ष्यौ अंत्यानुप्रास । ७ पहल पहलै । ८ जंग कीजे । ९ लीजे । १० छाड़ि । ११ सुनिए, गुनिए अंत्यानुप्रास । १२ दिलिजिय । १३ किज्जिय । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

हम्मीररासो ८७ सहस¹ सब तीन नीसाँन बग्गै॥ सहस² दस सात आरब्ध छुट्टै। गरज गिरि मेरु पाषाण फुट्ठै॥४९५॥ उठत गुब्बार महि तोप लज्जौ। गए बन छंड़ि³ मृग सिंह भग्गै॥ लक्ख⁴ पच्चीस दल ओर फेरचौ। यह भाँति पतिसाह गढ़ छाड़ि घेरचौ॥४९६॥ कहै पतिसाह नहिं बिलम⁵ किज्जे। चंद दिन⁶ बीचि गढ़ छाड़ि लिज्जे॥ कहै रणधीर मन धीर धरिए। आय चहुआण⁷ सफजंग⁸ करिए॥४९७॥ निस्साँन⁹ सो सद्द१० सुंदर सुवज्जै। रोब रणधीर आयुद्ध११ सज्जै॥ बीर रस१२ राग सिंधू स१३ बज्जै। सहस इकतीस दल संग लिज्जै१४॥४९८॥ सहस दस सूर कुल तेग१५ खेलैं१६। अप्प जिय रक्खि परमाल१७ पेल्लैं१८॥ यह१९ भाँति रणधीर चौगाँन आए। गरद उड़ि जमी असमॉन छाए॥४९९॥ अबदल्ल२० कीरम्म२१ पतिसाह दिल्लै२२। १ तीन सहस नीसाँन दल माहिं बग्गै। २ दो सहस आरखौ तेज छुट्टै। ३ छाड़ि। ४ लाख। ५ विलम्ब (बिलंवं)। ६ रोज। ७ चौगाँन। ८ सफरजंग। ६ नीसाण सों साज सुर सद्द गज्जै। १० सब्द। ११ आवद्ध। १२ रण। १३ सिंधूल। १४ लज्जै। १५ तत्थ। १६ खिल्लैं। १७ परमार। १८ चिल्लैं। १६ इस। २० अवदुल, अबदुल्ल। २१ करीम, करींम। २२ पैले। CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

८८        हम्मीररासो मीर रणधीर चौगाँन खिल्लै ॥ बहै बाँन किरवाँन¹ औ चक्र² चल्लैं । रणधीर कह सूर तुम होहु भल्लै ॥५००॥ साह सों सूर संमुख्ख जुरिए । हवस के मीर दस सहस परिए ॥ दुट्टि³ सिर मीर धड़ पहुमि⁴ लक्खै । पंच सत सूर लड़ि गिद्ध⁵ भक्खै ॥५०१॥ राव रणधीर अप्पन⁶ सिधारे । अबदुल्ल⁷ कीरंम खाँ पुह्मि पारे ॥ साह रणधीर सफजंग⁸ जुरिए । साह दल उलटि दो कोस परिए ॥५०२॥ कहै रणधीर नहि बिलँम किज्जै⁹ । बीति चँद रोज गढ़ छाड़ि लिज्जे¹⁰ ॥ गढ़ कोटहू भाँति¹¹ नहिं हथिय¹² आवै । यूं ही¹³ पतिसाह दल क्यों खिसावै ॥५०३॥ दोहरा छंद बर्ष पंच¹⁴ गढ़ छाड़ि को, नहिं संबत् पतिसाह । द्वादस वर्ष रणथंभ सों, निधरक लरि अव¹⁵ साह ॥५०४॥ छप्पय छंद धनि सु राव रणधीर साह मुख आप सराह्रै । मुझ दिसि सम्मुख आय कोप करि सार समाहैं ॥ १ कैयार । २ चक्क । ३ टूटि । ४ पौहम । ५ गिरध, गिर्ज । ६ आपन । ७ अबदुलकरीम खाँ पौहुमि पारे । ८ सपरजंग । ९ कीजे । १० लीजे । ११ कबहूँ । १२ हाथि । १३ कोपि । १४ पाँच । १५ पति ।

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हम्मीररासो [Page 89: ८९] साह बचन इम कहै मीर महरम खाँ सुनिजे¹ । जीति² जंग रणधीर धन्य वह राव सुभनिजे ॥ पतसाह राडि सफजंग³ की मनै करिय आपन⁴ सबै । चहुँ ओर जोर उमराव सब किये मोरचा दृढ़ अबै⁵ ॥५०५॥ जबै⁶ राव रणधीर कहै हम्मीर सुणिज्जे⁷ । सबै⁸ हिंद को साथ बोलि⁹ रणथंभ सु लिज्जे¹⁰ ॥ लिखि फर्माँनहूँ¹¹ राव बंस छत्तीस बुलाए । जुरे जंग चौगाँन उमंग दल बहल छाए ॥ कर जोरि सबै हाजिर भए¹² राव बचन या¹³ विधि कहै । मैं गही तेग पतिसाह¹⁴ सों घरि जाहु जौन जीवौ चहै ॥५०६॥ कह काकौ रणधीर राव सुन बचन हमारे । अबै छंडि¹⁵ कित जाहिं¹⁶ खाय करि निमक तिहारे ॥ अलीदीन सों जुद्ध छंडि गढ़ चौरै मंडों । जिती साहि की सेन मारि खंग खंड बिहंडों ॥ चादूँ¹⁷ सुनीर या वंस को अकथ गत्थ¹⁸ ऐसी करूँ । रबि लोक भेदि भेटूँ सुभट अप्प¹⁹ सीस हरं हिय धरूँ ॥५०७॥ दोहरा छंद कहै राव हम्मीर खाँ, मंत्रि एक²⁰ रणधीर । जमीति गढ़ चित्तौर की, अजहुँ²¹ न आइय²² बीर ॥५०८॥ लिखि फर्मांन हमीर तब, पठए गढ़ चित्तौर । वंचि²³ खाँन बल्हन²⁴ कुँमर, हर्ष²⁵ कीन नहिं थोर ॥५०६॥


पाद-टिप्पणियाँ (Footnotes)

१ सुनिए । २ जित्ति । ३ सफरजंग । ४ अप्पन । ५ सबै । ६ जब सुराव । ७ सुणीजे । ८ सभै । ६ राण । १० लीजे । ११ फुरमाना । १२ अहै । १३ इम । १४ हजरत्ति । १५ छाड़ि । १६ जायें । १७ चाढूँ । १८ गाथ । १६' आप। २० इक्क । २१ अजौं । २२ आए । २३ वाँचि । २४ बाल्हन । २५ हर्ष न किन्न्यउ । ९९-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

९० हम्मीररासो चौपाई छंद हर्षे उभै कुँमर चौहाँनं। चतुरँग कै तुरंग सजि आनं॥ सोला सहस चमूँ सजि सारी। सजे खाँन बल्हन¹ सी भारी॥५१०॥ सहस तीन² कमध्वज्ज सु जानो। सहस अट्ठ³ चहुवाँन बखानो॥ सहस पंच पम्मार⁴ अमानै। सोला सहस सजे करिवानै⁵॥५११॥ मोतीदाम छंद मिले तब आय कुमार सु दोय। हमीर सुचाव कियौ बहु जोय॥ बढ़्यौ हिय हर्ष दुहूँ⁶ उर सोय। कहैँ⁷ तब बैन सु राव सु होय॥५१२॥ क्रियौ सनमाँन सुराव अपार। मिलंत कुँवार⁸ दयौ सिर भार॥ रख्यौ तुम सेख भए जग धन्य। रहै नहिं कोय सदा जग अन्य॥५१३॥ रहै जग कित्तिय⁹ नित्ति अभंग। सदा यह देह कहैँ¹⁰ छिनभंग। जिते हम सेवक ज्यों अब ठड्ढ¹¹। रहो निहचित्त¹² अभै यह गड्ढ¹³॥५१४॥ करैं हम जंग लखो अब हत्थ। १ बाल्हन । २ तीस । ३ आठ । ४ पँन्वारन आनो । ५ किरवानो । ६ दहूँ । ७ कियौ सु जुहार मिले वर दोय । ८ कुँमार । ६ कीरति । १० नहीं । ११ अवट्ठ । १२ रहै निश्चिंत । १३ गल्ह ।

हम्मीररासो ९१ उठे दुहुँ बीर कही यह गत्थ ॥ चढ़े चतुरंग कियौ तन कोप। मनौं अरुनोदय भाँन सु ओप१ ॥५१५॥ बजे रणतूर सु भेरि रबद्द । भए पढ़ गोमुख बीर सु सह ॥ चढ़े कुँवरेस तबै चतुरंग । बढ्यौ हिय हर्ष करै रणरंग ॥५१६॥ कहै तब खाँन सु बाल्हन सीह । करे सफजंग अबैदल२ वीह ॥ रतन कुमार रखो गढ़ ओर। नरव्वल ग्वालिर ओर चितोर३ ॥५१७॥ नठै तब अन्न करो सफजंग । तजो मति टेक लरो४ अनभंग ॥ असो सुनि बैन हमीर सुभाय । भरे५ जल नैन रहे मुरझाय ॥५१८॥ कही६ तब कौर नहीं थिर कोय । चले गिर मेरु नहीं थिर सोय ॥ मिले सुरलोक ससोक सकौन । सुनी यह राव रहे गहि मौन ॥५१६॥ गए रणवास जहाँ दोउ७ बीर। कियौ परणाम जुहार सुधीर ॥ सवै८ रणवास भरे जल नैन । कही९ तद् आसमती यह बैन ॥५२०॥ करो तुम१० उछछह हैं यह बार । १ चढ़ तन नूर वढ़ मुख ओर । २ अबद्दल । ३ औ चित्तोर ४ लरो न अभंग। ५ ढरे । ६ कहे । ७ दुव । ८ सबै । ६ कहे । १० बहु। CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

९३ हम्मीररासो कहे तदि¹ बैन हँसे जु कुमार ॥ धरो तुम सीस हमारे जु² मोर । लरैँ सिर सेहर बाँधि³ सजोर⁴ ॥५२१॥ बँध्यौ तब मौर कुमारन सीस । दई बहु भाँतिन आस असीस ॥ कियौ बहु हर्ष कुमार अपार । गए हर मंदिर सो तिहिं बार ॥५२२॥ गनेसुर संकर पूजि⁵ सुभाय⁶ । करे बहु ध्याँन गहे जब⁷ पाय⁸ ॥ चढे बरबीर बढ्यौ हिय चाव । बजे बहु बाजि⁹ निसॉँनन घाव¹⁰ ॥५२३॥ गजे असमाँन धरा हुब भाय¹¹ । गजे¹² घनघोर घटा मनु छाय¹³ ॥ तुरंग अनेक सुफेरत सूर । बनी तिन उप्पर पक्खर पूर ॥५२४॥ झलक्कत नूर चमककत सेल । चढ़े मुख ओप¹⁴ बढ़े मुख मेल ॥ उड़े¹⁵ रज अंबर सुज्झ न भाँन । हँसे हर देखत¹⁶ लुट्ठिव ध्याँन ॥५२५॥ चली सँग अच्छरि जुग्गनि ताँम । मिली बहु पंखनि¹⁷ गिद्धनि जाँम ॥ मिले बहु भूचर खेचर हूर । चले पल चारिय भूत सुभूर ॥५२६॥ १ तब । २ सु । ३ वंधि । ४ मोर । ५ पुज्जि । ६ सुभाइ । ७ तव । ८ पाइ । ६ बादि । १० हाव । ११ भाइ । १२ गज । १३ छाइ । १४ नूर । १५ उठी । १६ दिक्खत, पिक्खत । १७ पक्खनि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

हम्मीररासो ९३ करे सु जुहार हमीरहिं ध्याय¹ । करो यह बात² परस्सि³ सुपाय ॥ मिले भव आनि⁴ सुनो चहुवाँन । करै कल रीति तजै नहिं बाँन ॥५२७॥ तजो⁵ धन धाँम रु लोभ सु⁶ मोह । धरो⁷ मनु टेक सरन्न सुजोह ॥ इती कहि सीस नवाय हमीर । कियौ रणथंभहिं वंदन⁸ धीर ॥५२८॥ चले सन्मुख उभै कुमरेस । सजे चतुरंग तनय करि रेस ॥ जहाँ पतिसाह अलावदि और । चली⁹ बर बीरति¹⁰ बाँधि¹¹ सुमौर ॥५२९॥ दोहरा छंद करि असुवारी कुमर दोउ, उतरे पौलि सु आए । डेरा करे उछाहजुत, बजि नोबति नीसाण¹² ॥५३०॥ सुणि नोबति के नाद¹³ तब, बहु उछाह गढ़ जाँन । तब अलावदी हसम दिसि, चाहत भयौ निर्धा(दा)न ॥५३१॥ बोलि खाँन सुलतान तब¹⁴, मसलति करी जु¹⁵ साहि । गढ़ मैं कहा उछाह अति, कहा (कौन) सबब यह आहि ॥५३२॥ हैं यह राव हमीर के, लघु भय्या¹⁶ के पूत । लरन काज¹⁷ इन सेहरो, सिर बाँध्यौ¹⁸ मजबूत ॥५३३॥ भय संक पतिसाह¹९ उर, कीनौ²⁰ बहुत बिचार । १ करे जहाँ राव हमीरहिं ध्याम ( धाम ) । २ बत्त । ३ पस्ति । ४ मिलै भव आन । ५ तजै । ६ रु । ७ धरै । ८ चंदन । ६ चले, चढ़े । १० बीरसु । ११ बंधि । १२ अप्रमाण । १३ नद । १४ सब । १५ सु । १६ भ्राता । १७ कज । १८ बंध्यौ । १६ अति । २० किन्नौ । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

९४ हम्मीररासो। जौ न सिंह के मुख चढ़ै, सो भिल्लै इन सार ॥५३४॥ चौपाई छंद कहै वजीर साह सुनि बत्तं । मीर अरब्बिय¹ जानि सु तत्तं ॥ मर्कट बदन² सूकर सम³ काँनं । द्रग मंजार बेसू खल जाँनं⁴ ॥५३५॥ तुम⁵ साँमत प्रथिराज सु अग्गैं । गढ़ गज्जनि आए⁶ गहि खग्गैं ॥ तुमहिं दिली के तख्त बसाए⁷ । गौरीसा कै भए सहाए ॥५३६॥ वै⁸ दोउ कुमर पकरि अब लावैं । सन्मुख होइ तो⁹ मारि गिरावैं¹⁰ ॥ सुनि वजीर के बचन सुहाए । मीर जमालखाँन बुलवाए¹¹ ॥५३७॥ कहै साह सुनि मीर जमालं । है यह काम तुम्हारे हालं ॥ आगै¹² तुम गहियो प्रथिराजं । त्यों¹³ तुम गहो कुँमर दोउ आजं ॥५३८॥ छप्पय छंद सुणि जमाल खाँ मीर हत्थ¹⁴ धरि मुच्छ सँवारिय¹⁵ । पाव परसि कर जोरि कवन बड़ काज¹⁶ निहारिय¹⁷ ॥ १ अरबी । २ मुख । ३ सुक्कर इव । ४ द्रगमजार बपुष (कू) खल जानं (जानहु) । ५ तिहिं सामत । ६ गजनी लाये । ७ बैसाये, बठाये । ८ वैदुव कुँमर पकरि गहि ल्याऊँ । ६ तोयसो । १० गिराऊँ । ११ बुल्लाए । १२ अग्गै । १३ तिम । १४ हाथ । १५ बकारिय । १६ कज । १७ निकारिय । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

हम्मीररासो ९५ जौ आयस अनुसरों सकल हिंदुव गहि लाऊँ । सम्मुख गहूँ¹ जुसार मागि तिहिं धूरि मिलाऊँ ॥ इम² कहि सलाँम कीनी ³तुरत सज्ज⁴ सथ्थ सब५ अप्पवल । सजि कवच टोप कर खग्ग गहि उभै ओर किन्निय सुलह⁶ ॥५३६॥ भुजंगप्रयात छंद इतैं कुमर⁷ चत्रंग⁸ कै जंग जुट्टे । उतैँ मीर आरब्ब कै बीर छुट्टे ॥ दुहूँ ओर घोरं निसाँनं सु बज्जं । मनौ पावसं मेघ घोरं सु गज्जं ॥५४०॥ दुहूँ ओर खंडं प्रचंडं सुभारी । छुटे नाल गोला बँदूकं सुभारी ॥ भयौ सोर घोरं धुँवा घोर घोरं । गई सुद्धि सुज्झै नहीं⁹ नैन ओरं ॥५४१॥ करैँ सेल खेलं महाबीर वंके । फुटैँ अंग अंगं करैँ दोय हंके ॥ बहैं तेग अंगं करैँ दुक१० दोई११ । हँसी कालिका देखि १२कौतुक सोई १३ ॥५४२॥ बहैं १४ जम्म दंड्ढं करैँ बाहु जोरं । कढैँ१५ अंत अंतं १६ कहूँ सीस तोरं ॥ कहूँ हथ्थ मथ्थं परे बीर बंके १७ । उठैं रुंड मुंडं करैँ जोर हंके १८ ॥५४३॥ १ गहूँ । २ यह । ३ किन्नी । ४ सजे । ५ सह । ६ बजे सुबीर सिंदुर, (सिंधुर) बदन उभै ओर किन्निय (कीनी, कीन्ही) सुलह । ७ कौर । ८ चतुरंग । ६ मही । १० टूक । ११ दोऊ । १२ दिक्खि, पिक्खि । १३ सोऊ । १४ चहैं । १५ गहैं । १६ अंतैं । १७ बक्के । १८ हक्के ।

९६ हम्मीररासो उतैँ मीर जम्मील ध्यायौ हँकारं । इतैँ खाँन धायौ भिरचौ इक्क १ बारं ॥ उतैँ मीर तीरं चलायौ हँकारी । लग्यौ बाजि कै सो भयौ वारि पारी ॥५४४॥ पर्यौ खाँन को बाजि फुट्ठौ २ सु अंगं । चढ़े और बाजी करथ्यौ फेरि जंगं ॥ दई खाँन जम्मील ३ कै अंग बच्छी । पर्यौ भुम्मि मीरं सुतो आय मुच्छा ॥५४५॥ दोउ सैन देखैँ भिरे बीर दोई । भए लथ्थ वथ्थं कुमारं सु सोई ॥ पर्यौ जोर भारी कुमारं सु जान्यौ । तबै राव हम्मीर उप्पर सुठान्यो ॥५४६॥ लियौ बोलि संखोदरं सूर सोऊ ४ । करो ऊपर ५ जाय कुम्मार दोऊ ६ ॥ महाबीर ७ अजौँन बालगधु (बालक) सूरं । महायुद्ध ८ जानैँ इतो बै करूरं ॥५४७॥ चले सूर संखोदरं खेत आए । उतै आरबीसेन ९ द्वै १० लक्ख धाए ॥ उड़ैँ बाँन गोला गजं बाजि फुटैँ ११ । वहैँ बाँन कम्माँन ज्यौँ मेघ बुट्ठैँ ॥५४८॥ धरैँ १२ आयुधं १३ बीर सौं बीर बुल्लैँ । परैँ सीस भू मैं १४ किती १५ सीस मल्लैँ ॥ १ एक । २ फूट्यौ । ३ जम्माल । ४ सोई । ५ उप्परं । ६ सोई । ७ महाबीर अजौँन बाहू लघु सुसूरं । ८ कहा । ६ सेख । १० दोउ, है (अश्व) । ११ फूटैँ । १२ भरैँ । १३ आवच । १४ भुम्मी । १५ किती धूम झुललैँ । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

हम्मीररासो ९७ कहै खाँन कुम्मार वैनं हँकारी । सुनो सबै सथ्यं करो जुद्ध भारी ॥५४९॥ रहै नाँम लोकं महा मुक्ति मिल्लै । रहै नाहिं कोई सदा आय१ भिल्लै॥ चलाए गजं कोपि२ कुम्मार सोई । उतै आरबी मीर जम्माल३ होई ॥५५०॥ तबै वीर बालन्नसी कोप किन्नौ । महा४ तेग जम्माल कै मध्य (सीस) दिन्नौ ॥ कट्यौ टोप ओपं लगी जाय मध्यं । तबै मीर बालन्न भय लुब्ध वध्यं ॥५५१॥ कटार' कुमार' चलायौ५ सु भारी६ । पर्यौ मीर जम्मील भू मैं७सु थारी ॥ सबै सथ्थ जम्माल की कोपि८धायौ । तहाँ बालन्नं मारि धरनी गिरायौ९ ॥५५२॥ तबै खाँन कुम्मार धायौ१० रिसाई । घनी सेन आरब्ब धरनी मिलाई११ ॥ तबै बीर संखोदरं जंग१२ कीनौ । किते आरबी खेत पार्यौ नबीनौ ॥५५३॥ किते सेल खेलं करैं वार पारं । भभक्कैं घटैं घाव छुट्टैं पनारं । बहैं तेग बेगं परे१३ सीस भारी । उड़ैं घोर रुंडं परैं मुंड कारी ॥५५४॥ १ आप । २ कुप्पि । ३ जम्मीर । ४ तबै तेग (खग्ग) जम्मील कै अंग दीनौ । ५ लगायौ । ६ भुम्मिः । ७ धारी । ८ कुप्पि, जम्मील को देखि । ६ मिलायौ । १० धाये । ११ गिराई । १२ जुद्ध । १३ परी । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

९८ हम्मीररासो परे दोय कुम्मार किन्नी१ अकत्थं । बरी अच्छरी सूर लोकं सु मध्यं ॥ परे मीर आरब्ब कै पोन लक्खं । तहाँ हिंद की भीर सौरा सुभक्खं२ ॥५५५॥ परे दो कुमार महाबीर बंके । परे एक३ संखोदर कीन४ हंके ॥ तहाँ आठ५ हज्जार चहुवाँन जाँनं६ । परे तीन हज्जार कमधवज्ज७ माँनं ॥५५६॥ पँमारं परे पाँच८ हज्जार सोई । परे बीर सोला सहस्रं सुजोई ॥ परे स्वामि कै कज्ज९ कुम्मार दोई । सुनी राव हम्मीर जीते सु सोई ॥ भजे आरबी ज्यों बचे१० जंग तेयं । कहै साह देखो सु हिंदू अजेयं ॥५५७॥ दोहरा छंद परे सहस सत्तरि तहाँ, मीर अरब्विय११ संग । हय गय पाँच हजार परि, सत जमाल से अंग१२ ॥५५८॥ छप्पय छंद तब सु राव रणधीर साहि पै१३ तेग समाही । १ कीनी । २ सोरा सुसत्थं । ३ इक्क । ४ किन्न । ५ अष्ट । ६ ज्वाँनं । ७ राठ्यौर, रट्ठौर । ८ पंच । ९ काम । १० रहे । ११ आरबी । १२ तहाँ परे सोरह सहस दुहूँ कुँवर कै सत्थ । बरी इते तहँ अप्छरा (अच्छरी) धरे हार हर मत्थ । पाँच बरस गढ़ छाड़ि कै लरे राव रणधीर । तब अलावदी कोपि कै कहे बचन तजि नीर । १३ साहि सों । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

हम्मीररासो ९९

.समो¹ सु पहौँच्यौ आय सु तो मिट्टै नहीँ काही ॥ चढ़े खेत रणधीर साहि दोनू² बतराए । तजै न हठ हम्मीर कहा जो तुम सत³ आए ॥ रणधीर राव इम उच्चरै समुझि साहि चित लिजिए । . गढ़ रणथंभ हमीर को हजरति हठ न किजिए ॥५५६॥ कहै साहि रणधीर राव कौ किन सम्झावो । करो राज रणथंभ सेख⁴ कौ कद्मौँ लावो ॥ होनहार सो भई मिटे मेटी न मिटाई । घटै हटै हठ राव तबै हमारी पतिसाई ॥ नहिँ तजै⁵ राव हठ मैं तजौँ कौन⁶ साह मो सौँ कहै । यह प्रगट बत्त७ संसार८ महिँ भिरैँ दोय एकै९ रहै ॥५६०॥ कहै राव पतिसाह सुणो रणधीर अमानो । इतो राज तुम करो जितो हम सौँ नहिँ छानो ॥ ये१० गढ़ च्यारि सु धीर हुकुम किसकै तुम पाए । कबहुँक ११ फिरे रकेब सीस कबहुँ नहिँ १२ नाए ॥ गिरि सूरज पलटै पहुमि कोटि (रि) बचन कह कोय१३ । सेख छाड़ि उलटौ फिरै यह कबहुँ नहिँ होय१४ ॥५६१॥

दोहरा छंद

चढ़े साहि दल बिपुल जब, छे़किव१५ गढ़ रणधीर । तब चहुवाँन रिसाय कै, संमुख जुड़े१६ सु बीर ॥५६२॥


१ संमत । २ दोउ । ३ बतराए । ४ सेख गहि कद्मु लाओ । ५ नन तजै । ६ कै सहाय मोसों ( हमसन ) । ७ बात । ८ सारी मही । ९ इक्कै । १० यह । ११ कबहुँन । १२ ननवाए । १३ कोऊ कहो । १४ सेख छंडि उलटौ फिरौं तौ मोहिं साहि जग को कहो । १५ छिकिव । १६ जुट्टिग, जुट्टिय ।

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१०० हम्मीररासो छंद त्रोटक रणधीर चढ़े करि कोप मनं । सब सामँत सूर सजे अपनं ॥ गजराजन उप्पर डंबरयं । उछले¹ लगिं बीर सु अंवरयं ॥५६३॥ . बहु चंचल बाजि सु बग्ग² लियं । किय अग्ग³ सु पैदल लाग कियं ॥ गढ़ तैँ बहु भाँति⁴ सु तोप चली । पतिसाह⁵ समेत सु कोप चली ॥५६४॥ रणधीर सु बंधन⁶ दुग्ग⁷ कियं । करि मंगल बिप्रन दाँन दियं ॥ रबि कौ परणाम सु कीन⁸ तबै । कर जोरि सु आयसु माँगि९ जबै ॥५६५॥ अरु राव हमीर जुहार कियं । हर्षे¹⁰ चहुवाँन सु मोद हियं¹¹ ॥ बहु दुंदभि ढोल सुभेरि बजै । कसि आयुध सायुध बीर सजे ॥५६६॥ हलका करि बीर बढ़ै दल पैँ¹² । मनु राघव कोपि कियौ खल पैँ¹³ ॥ उत साहि हुकम्म कियौ रिस मैँ । सब सेन जु आय जुरयौ छिन मैँ¹४ ॥५६७॥ बिफरे सब बीर सुधीर मनं । सब स्वामि सु धर्म्म सु कीन¹५ पनं ॥


१ उससे । २ बाग । ३ अग्र । ४ भाँतिन । ५ पतिसाहि सुसैन सुकंप हली । ६ वंदन । ७ दुर्ग । ८ किन्न । ६ मंगि । १० वरखे । ११ दियं, जियं । १२ मैं । १३ पल मैं । १४ जुर्यौ निस मैं । १५ किन्न । . CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

हम्मीररासो १०१ दुहुँ ओर सु तोप सु कोप¹ छुटे। गढ़ कोट न रूंधत² पार फुटे ॥५६८॥ वरषै घर आगि³ सु धूम उठा। झर अंबर भुम्मि कराल बुठी ॥ बहु गोलन गोलन गोल परे। गजराजन सौँ गजराज जुरे४ ॥५६९॥ हय सौँ हय पयदल पयदल सौँ। जुरे५ बहु जोध महाबल सौँ ॥ बहु६ बाँन दुहूँ दल माँझ परैं। धर सीस कहूँ कर पाँव भरैं ॥५७०॥ बहु सोर अँधार सु घोर भयौ। निसि बासर काहु न जानि७ लयौ ॥ कर कुंडिय८ बीर कमान कसैँ। गज बाजिन फुट्त पार लसैँ ॥५७१॥ वरषैँ मनु पावस बुंद अयं। बहु फुट्त पक्खर९ कंगलयं ॥ तहँ लागत१० सेल सु पार हियं। मनु श्रोन पनारन तैँ बहियं ॥५७२॥ लगि तेग करैँ दुव दुक्क११ तनं। जिमि१२ सीस परैँ तरबूज मनं ॥ तहँ साह सु सेन मुरकि चली। चहुवाँन तबै करि कोप बली ॥५७३॥ मुरकी पतसाह तनी जु अनी। १ कोपि । २ रुकत । ३ अग्गि । ४ भिरे । ५ जुरिये, जुटिये । ६ चहुवाँन । ७ ज्ञान लह्यौ । ८ कुंडल, कुंडलि । ६ पाखर । १० लगत । ११ टूक । १२ जिन, जिहिं । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

१०२ हम्मीररासो मुख१ बात सबै पतसाह भनी ॥ करि कोप तबै पतिसाह कहै । मुहिं जीवत सेन सु भज्जि२ चहै ॥५७४॥ बकसी तब आय सलाँम कियं । लख रूमिय अप्प३ सु संग दियं४ ॥ रणधीर तबै सनमुख पिलै५ । बकसी करि कोप सु ओप मिले ॥५७५॥ गुरजैं रणधीर कै सीस दईं । तिन ढल्ल सु उप्परि६ ओट लईं ॥ बरछी रणधीर सु अंग दियं । धर फुट्टि७ सु बाजि८ कौ पार कियं ॥५७६॥ हय९ तैं बकसी धर माँहि पर्यौ । तिहिं१० संग सु मीर पचास गिरचौ११॥ इक रूमिय धीर सूँ आय जुरचौ । किरवाँन लिये मन नाहिं मुरचौ१२॥५७७॥ रणधीर इतैं उत खाँन बलं । लथ वत्थ भए दुख देखि दलं ॥ रणधीर कटार सूँ पार कियौ । बलखाँन सु तेग जु कंध दियौ ॥५७८॥ सिर तुट्टत१३ धीर उठ्यौ धड़यं । बलखाँनहिं आय गह्यौ करयं ॥

१ मुख वाह सुवाह सु साह भनी ! २ भाजि । ३ आप । ४ सनमुख सुई दिय (सुहिंदुव) पिल्लि दियं (पैपिलियं) । ५ लियं । ६ ऊपर । ७ फूट । ८ सुबाज कै । ६ गज तैं । १० तब सोंगी (संगी) सुधीर सु मीर अर्यौ । ११ परे, गिरे—अंत्यानुप्रास । १२ लख पाँच लिये मन माहिं मुर्यौ । १३ टूटत । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

हम्मीररासो १०३ अरि बत्थ सु हत्थ पछारि बलं । हिय पार कटार किये सु खलं ॥५७९॥ लख एक स रूमिय खेत परे । रणधीर सुरंड भरे खपरे ॥५८०॥ चौपाई छंद पर्यौ खेत बकसी बड़ भारी । और संग दल बीस हजारी ॥ मीर पचास संग तहँ सूते । इक लख रूमि बिहस्त¹ पहूँचे² ॥५८१॥ तीस सहस रणधीर सु³ संगी । परे खेत बर बीर उमंगी ॥ धीर⁴ रुंड द्वै पहर सु नच्यौ । एक सहस हनि गज जस संच्यौ ॥५८२॥ टूट्यौ गढ़ सु छाड़ि कौं सोई । सुनी श्रवण हम्मीर सु जोई ॥ तब आपन तन मन पन जान्यौ । छत्री मंगल मरन बखान्यौ ॥५८३॥ दोहरा छंद पक्ख ऊजरो⁵ चैत्र सुद्धि, तिथि नौमी सनिबार । बीस सहस छत्री परे, अबला जरीं हज़ार ॥ ५८४ ॥ जो कनवज काकै करी, करी छाड़ि रणधीर । हरष सोच सम करि दोऊ, चक्रत भए⁶ जु मीर ॥ ५८५ ॥ गज इकसठि दो लष तुरी, छप्परि⁷ बीस अमीर । जो कहता सोई करी, धन्य राव रणधीर ॥ ५८६ ॥ १ मिस्ति । २ पहुंचे । ३ कै । ४ धीर जुद्ध करि रुंड न नच्यौ । ५ पाख उजारी । ६ भयउ । ७ छपरि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri