कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
हाग साहिब
रक्षा किया करती थी। बतखोंको आदत है कि, सौझके समय कीड़ोंके आखेटके लिये फिरा करते हैं यह बात गिनी फाउलके विरुद्ध है पर इन बच्चोंके लिये उनकी धर्मकी माता उनके साथ फिरा करती थी। बच्चोंके साथ फिरते फिरते थक जाती तो कुछ कालके लिये किसी वृक्षपर बैठ जाती। अपनी दृष्टि प्रत्येक समय बच्चोंपर रखती थी। तनिकसी आपत्तिकी आशङ्का होनेपर चिल्लाती हुई उनके पास आ पहुँचती थी। रात अथवा दिन हो उन बच्चोंसे कदापि अचेत न रहती। ऐसे कितनेही पशु होते हैं जो दूसरेकी सन्तानको अपनी जानकर प्रेम पूर्वक पालते हैं।
बतख ।
नमरुद बादशाहकी बतख—मैंने इबराहीम गुलजार अथवा किसी दूसरी मुसलमानी पुस्तकमें पढ़ा था, नमरुद बादशाहके पास एक बतख थी। वह उसके सारे नगरमें फिरा करती थी, उसको भविष्यका हाल मालूम था। नगरमें जहाँ कहीं चोर देखती पहचानकर तुरन्त ही चिल्लाने लगती। लोग दौड़कर तुरन्त उसको पकड़ लेते। उसकी चोरी अवश्यही प्रमाणित हो जाती। यदि वह चोर, चोर होनेकी बातको अस्वीकार करता तो उसको एक हौजमें डाल देते। उसमें यह गुण था कि, जो चोर उसमें डाला जाता वह शीघ्र ही अपनी चोरी स्वीकार कर लेता।
कौंज ।
दोनोंकी प्रेमाधिक्यसे मृत्यु—पञ्जाब देशके फुल्लोर गाँवके पासके एक गाँवमें कौंजोंका झुण्ड उड़ा जाता था। आखेट करनेवालेने बन्दूक दागी, एक कौंजके परमें छर्रा लगा वह चक्कर खाकर पृथिवीपर गिरपड़ी पर वह चिड़िया शिकारीके बहुत दूँढ़नेपर भी नहीं मिली। वह साधुकी झोपड़ीपर उसके सामने आ गिरी। साधुने चिड़ियाको उठा लिया, अपनी छातीसे लगाकर बहुत रोया और दया की। वह फकीर उसके जख्मी परकी औषध करने लगा, उसकी बहुत सेवा की पर ठीक हो गया अन्तमें वह पक्षी आरोग्य हो गया। आगे वह चिड़िया साधुसे ऐसी हिल गई और प्रेम करने लगी कि, निश्चिदिन उस साधुके साथ ही फिरा करती थी, दूसरे वर्ष कौंजोंका झुण्ड उसी ऋतुमें उस स्थानसे होकर चला। समस्त कौंजोंने शब्द किया। उनका शब्द सुनकर यह भी नीचेसे बोली। ऊपरसे एक कौंज उत्तरा उसके निकट आकर उसके गलेसे अपना गला मिलाकर बहुत चिल्लाने लगा। दोनोंके प्रेमकी अधिकताके कारण दोनोंके प्राण निकल गये। इनके मरने पर साधु बहुत रोया दुःखी हुआ फिर उनको गाड़ दिया।
मारटन साहिब स्यायल डाग, रूप्योंकी सेंभाल
यँ कौँज जा दूर २ देशकी सफर किया करती हैं। जब वे विश्राममें होती हैं तो एक दो चौकीदारकी तरह खड़े पहरे दिया करती हैं, आपत्तिके समय शब्द करते ही अपने बैरियोंसे सचेत हो जाती हैं। ये कौँजे अपना अण्डा पर्वत पर छोड़कर चली आती हैं। उनके संकल्पसे उनका अण्डा पककर बच्चा हो जाता है।
कौवा तथा कुलाग।
कागोंका न्याय—कौवा बहुत चालाक जानवर है, स्काटलेण्ड किम्वा फिरोमें कागोंकी बहुत बड़ी सभा एकत्रित होती है। उस समय ऐसी भीड़ होती है जिससे प्रमाणित होता है कि, वे किसी विशेष अभिप्रायसे वहाँ बुलाये हुए इकट्ठे हुये हैं। उनमें कुछ उच्च श्रेणीके कौवे बहुत गम्भीर और न्यायी दिखाई देते हैं शेषके सारे सावधान तथा चिल्लाते दिखाई देते हैं। एक घण्टेके बाद सब उड़ जाते हैं। जब सब इधर उधर चले जाते हैं तो उस स्थानपर दो एक कौवे मरे पड़े हुये होते हैं।
डाक्टर एडमेन्स मेन साहबका कथन है कि, कौवोंका बड़ा जमाव दो एक दिनोंतक बराबर रहता है। जब तक उनके अभियोगका न्याय न हो जावे तबतक उन लोगोंकी सम बराबर उसी प्रकार रहा करती है। काग चारों ओरसे आकर नियत स्थानपर इकट्ठे हो जाते हैं। जब सब एकत्रित हो जाते हैं तो बहुत चिल्लाहट होती है। कुछ कालके पीछे सारे कौवे एक अथवा दोनों पर आक्रमण करके जानसे मार डालते हैं। जब न्याय हो चुकता है तो समस्त इधर उधर हो अपनी राह लेते हैं।
खरगोशकी शिकार—एक सरायवालेके पास बनैला कौवा था वह जङ्गली कौवे तथा कुत्तेको लेकर आखेट करने जाया करता था, कुत्ता तो झाड़ीमें घुसकर खरगोशको उठाता था, काग बाहर सावधानी किया करता था। खरगोशके झाड़ीके बाहर निकलते ही काग तुरन्त उसको पकड़ लेता था। कुत्ता पीछेसे शीघ्रही आकर कागका सहायक होता था। दोनों मिलकर खरगोशको पकड़ लेते थे। उनसे बचकर कोई भी खरगोश न जाने पाता था।
कुत्तेसे मित्रता—एक कुत्ते तथा कौवेकी मैत्री हो गयी। एक दिन कुत्ता गाड़ीके नीचे दबके आहत हो गया। कौवा कुत्तेकी सेवा किया करता, हड़ियां ले जाकर कुत्तेके सामने धरा करता। काग उसके साथ पला था, दोनोंमें अत्यन्त प्रेम था। जब तक वह अच्छा नहीं हुआ, तब तक बराबर उसकी सेवा करता रहा। एक रात कुत्ता अस्तबलमें बँधा था उस रातको कागने अपने मित्रसे
स्मानियल रोवरकुता, साम नामका कुता
मिलनेके लिये चौंच द्वारा द्वारमें सूरालख कर दिया । उसके इस प्रेमके कारण सारे मनुष्य उससे प्रीति करने लगे ।
मानुषी वाक्—एक दिन एक पथिक विनचेष्टरके बनमें चला जाता था । उसमें उसने एक बहुत अचम्भेका शब्द तथा दुःखभरी आवाज सुनी । जैसे कोई कहता हो कि, ऐ महाशय ! न्याय कीजिये न्याय कीजिये, अन्याय न करिये । पथिक इधर उधर देखने लगा कि, कौन सताया हुआ इस बनमें रो रहा है, यह शब्द कहाँसे आता है । यह सुनकर वह अत्यन्त आश्चर्यान्वित हुआ कि, यहाँ तो किसी मनुष्यका चिन्ह मात्र नहीं है । यहाँ मनुष्यका कष्ट स्वर कैसे सुनाई देता है ? वह शब्द सुनकर पथिक उसी ओर चला जहाँसे कि, वह आवाज आती थी । आगे जाकर देखा तो दो कौवे एक कौवेपर आक्रमण कर रहे थे । दोनों वेगपूर्वक उसको मार रहे थे । एक कौवा अपने कष्टके कारण कह रहा था कि, ऐ महाशय न्याय कीजिये अन्याय न कीजिये । जिसपर अत्याचार किया जाता था वह काग कहीं आसपासका था, एक मनुष्यका पलुवा था । ठीक मनुष्यके स्वरमें कह रहा था । पथिकने वहाँ पहुँचकर सताये हुये कौवेको अत्याचारियोंके हाथसे बचा लिया, कौवे भी सिखानेसे अच्छी तरह बातचीत कर सकते हैं ।
चोर—डाक्टर स्टानली साहबने कहा है कि, एक महाशयके अनेक चांदीके चमचे तथा सामान खो गये थे । खानसामाको कुछ पता लगता नहीं था कि, चोर कौवे हैं । न किसीपर कुछ सन्देह ही था । अन्तमें उसने देखा कि, एक पलुवा कौवा मुंहमें चमचा लिये हुए है । खानसामा दूरसे विचारता रहा । जहाँ वह जड़ली कौवा चमचोंको छिपाकर रखता था, वहाँ छिपकर गया । वह स्थान उसने देख लिया, वहाँ बारह चमचे मिले ।
बगुला ।
बगुला अत्यन्त सावधानीके साथ मछलियोंको पकड़ता है । उसमें बहुत बल होता है । फरोटापूके रहनेवाले तथा कोई २ इङ्गलिलस्थानवासी भी ऐसा अनुमान करते हैं कि, यदि कोई बगुलेके पाँवको अपनी जेबमें रखकर आखेट करने जावे तो कृत्यकार्य हो जायगा, बगुलेके पाँवमें एक प्रकारका तेल है । जिसके कारण मछलियोंको अपनी ओर खींच लेता है विशेषतः बाम नामक मछली विशेषकरके उसकी ओर आकर्षित होती है । बगुलेमें एक विचित्र गुण है कि, वो अपनी छातीमेंसे एक प्रकारका प्रकाश निकालता है यह बहुत तीक्ष्ण होता है । उनके शरीरके अनेक स्थानोंपर पंखे नहीं होती उस स्थानमें वह वस्तु भरी होती है जो मछलियोंको खींचकर अपनी ओर लाती है । बगुलोंके
पूडल डाग
परोंमें भी एक प्रकारका बारूद भरा रहता है। उनका हाल अभी तक अवगत नहीं हुआ कि, किस अभिप्रायमें भरा गया। बगुले दूर दूरका भ्रमण किया करते हैं अपना सफर बहुत ही ठीक करते हैं। उनके चलने फिरनेसे उनकी बुद्धिकी तीक्ष्णता एवं विचारकी पवित्रता चमकती है।
मुर्गों ।
मुर्गाँकी अनेक मुर्गियां होती हैं। सबकी रक्षा और उनके बच्चोंका पालन मुर्ग करता है। यदि उनमें कुचाल दिखाई दे तो उसको दण्ड देता है। इसी पुस्तकका लेखक कहता है कि, एक दिन मैंने देखा कि, एक मुर्ग मुर्गाँको रगेदता फिरता था। उसके मुँहमें एक कीड़ा था। मुर्गने मुर्गाँके शिर पर चोंच तथा ठोकरें मारी जिस कारण उसके मुँहसे कीड़ा गिर पड़ा। उसको उसने छीन लिया एक अन्य दूर खड़ीको जाकर दे दिया। वास्तवमें वह कीड़ा उसी मुर्गाँका था, जिससे उस दूसरी मुर्गाने छीन लिया था। इस कारण उस मुर्गाने जिसपर अत्याचार किया गया था, उसी मुर्गाँका पक्ष करके हकदारका हक दिला दिया। समस्त जीवधारियोंकी अपेक्षा मुर्ग अपने बच्चोंसे अधिक प्रेम करते हैं।
मुरगाबी ।
सलबी साहब कहते हैं कि, सन् १८३५ में एक मुरगाबीने गर्मियोंमें तालाबके किनारे अपना घोंसला बनाया, वह बहुत विशाल तालाब था ऊपरके सोतों द्वारा तालाबको जलकी सहायता मिलती थी। एक बार ऐसी घटना हुई कि, मुरगाबी अपने अण्डोंपर बंठी थी पहले जितना जल था उससे कई इञ्च ऊपर चढ़ आया। जान पड़ा कि, जल अधिक होकर अण्डोंको नष्ट कर देगा। पक्षीको आपत्तिकी सूचना पहलेसेही मिल गई। उससे सचेत होकर तुरन्तही बचनेकी युक्तियोंमें लगी बाटिकाके रक्षकने देखा कि, दोनों पक्षी अत्यन्त संलग्न हैं दूर दूरसे घास फूस लाकर घोंसलेको ऊँचा करते जाते हैं। शीघ्रही उन्होंने अपने खोतेको इतना ऊँचा कर दिया कि, तालाबके किनारेसे अत्यन्त ऊँचा हो गया। उन्होंने उस स्थानसे अपने अण्डोंको उठाकर एक फीट ऊँचे तालाबके किनारे घासमें रख दिया, आधे घण्टेसे भी कममें वह मुरगाबी अपने अण्डोंको ऊपर ले जाकर सुखपूर्वक बैठ गई। पीछे बहुत वर्षा हुई।
उल्लू ।
एमेरिका देशमें एक उल्लू होता है यह बकरियों तथा चौपायोंमें जाकर उनके चिचड़ोंको खाया करता है बकरियोंकी छातीको चूसता है। उसके विषयमें
विविन्नपनिहा कुताकुतिया प्रणदेनेवाला, भविष्य दृष्टि, वर्तमानका ज्ञाता
वहाँके मनुष्य अनेकों प्रकारकी कहानियां कहा करते हैं। वे इस प्रकार विवरण करते हैं कि, उनके मृतक भाइयों तथा सम्बन्धियोंकी आत्मायें उनमें रहा करती हैं उनमें यह भी कहावत है कि, जब श्वेत मनुष्योंके घरके पास शब्द करें तो दुःख तथा शोक हो, यदि वे देशी मनुष्योंके घरके सामने चिल्लावें तो अनेक प्रकारकी आपत्तियां आती हैं।
मछली मार उल्लू—भी होता है वह मछलियोंका आखेट किया करता है। उसका यह नियम है कि, तालाबके किनारेपर जा बैठता है। उसकी आँख बहुत चमकीली तथा भड़कदार होती हैं। मछलियां उसकी आँखोंका प्रकाश देखनेको जलसे बाहर शिर निकालती हैं। उस समय वह उन मछलियोंको झपट्टा मारकर पकड़ लेता है, कदापि जाने नहीं देता। वह इस धोखेसे मछलियोंको पकड़ता है कि, तालाबके किनारे मछलियोंकी ताकमें चुपचाप बैठा रहता है मौका पाकर पकड़ लेता है।
कारभोरेण्ट ।
कारभोरेण्ट एक पक्षी है। चीन देशके मनुष्य इसके द्वारा आखेट किया करते हैं। एक २ मनुष्य दश बारह कारभोरेण्टको लेकर चला जाता है। समुद्रमें नाव जाती है। नावके बाहर उन समस्त पक्षियोंको छोड़ दिया जाता है। वे पानीपर इधर उधर फँल जाते हैं। मछलियां दूँदते फिरते हैं। उनकी तीक्ष्ण दृष्टियोंसे तुरंत जान पड़ता है कि, कहाँ गोता मारे। वे किसी मछलीको तीक्ष्ण चोंच द्वारा पकड़ लेते हैं तो फिर नहीं छोड़ते यदि मछली भारी हो एकके वशमें न आवे तो उसकी सहायता दूसरे सजातीय किया करते हैं उस आखेटको खींचकर अपने स्वामीके पास ले जाते हैं। उस मछलीको नावमें रखकर पुनः आखेटार्थ फिरने लगते हैं। उनमें से कोई भी आखेटमें मुस्ती करे तो उनका स्वामी एक लम्बे बाँसकी लाठी लेकर पानीपर भारता है रुष्ट होकर बोलता है। फिर वे सब अपने २ कार्यमें संलग्न हो जाते हैं। इन पक्षियोंकी शीवाके चारों ओर एक फीता लगा होता है जिसके कारण वे अपने आखेटको निगल नहीं सकते अत्यन्त ध्यान पूर्वक आखेट करते हैं गर्मीमें आखेट नहीं करते पर अक्टूबरसे मई मास तक करते हैं। यह पक्षी बत्तखके बराबर होता है यह बहुत खानेवाला है।
चमगीदड़ ।
रक्त पीनेवाली—दक्षिणी एमेरिकामें एक प्रकारकी चमगीदड़ होती है। जो बड़ी जातिका चमगीदड़ है उसके लगभग ढाई या तीन फीट लम्बे पर होते हैं। उसका यह नियम है कि, जब वह उड़ती और चलती है तो तनिकभी सूचना नहीं मिलती न शब्दही होता है। वह पशु पक्षियोंके शरीरमें इस प्रकार
मास्टिकजातिका कुता मास्टिककी बफादारी,
चपट जाती है कि उनको जान नहीं पड़ता समस्त रक्त चूस लेती है वे निर्जीव हो जाते हैं। जब वह उनका रक्त चूसती है तो अपने परोंमें पड़्डा करती जाती है, जिसमें कि वह जीव नितान्तही अचेत हो जाये। उसके दातोंकी तनिक भी घाव नहीं जान पड़ता। प्रायः घोड़ेकी श्रीवाका रक्त इस प्रकार पी जाती है कि, उसको तनिक भी सुधि नहीं होने पाती। सबेरे देखो तो उनकी गर्दन रक्तसे भरी जान पड़ती है।
गायनाकी चमगिदड़ी—बड़ीही विचित्र होती है। इसका नियम है कि, वह जहां कहीं मनुष्यको सोते पाती है अत्यन्त धीरेसे उसके पाँवके निकट उतरती है। सोनेवालेको तनिक भी सुध नहीं होती अँगूठेमें ऐसा छेद कर देती है कि, सूईकी नोंकसे भी बहुत बारीक होता है। उसी छिद्र द्वारा रक्त पीती है अपने परोंसे पड़्डा करती जाती है जिसमें वह मनुष्य नितान्तही अचेत हो जाये। उसका रक्त पीना अपने परोंसे पड़्डा करनाही मानो उसका मंत्र और जादू है। रक्त पीकर उसका पेट मशकके समान फूल जाता है वह दूर जाकर कँ कर देती है फिर आकर पीने लगती है फिर पेट भर जाता है तो दूर जाकर कँ कर देती है। इसी प्रकार प्रत्येक क्षण वह मनुष्य अचेत होता जाता है। अन्तमें शरीरका समस्त रक्त पी लेती है जिससे वह मनुष्य वहीं मर जाता है। मनुष्यके अँगूठे तथा पशुवोंके कानमें जो बहुत रक्त चलनेका स्थान है वहांही वह लगती है उसमें ऐसी बुद्धि तथा युक्ति है कि, किसीका कुछ वश नहीं चलता। वेदके उपनिषदोंमें लिखा है कि, पहले प्राण मनुष्यके अँगूठेके मार्गसे घुसा था। शायद इस चमगी-दड़ीको वह स्थान मालूम है। उसी मार्ग द्वारा रक्त खींचती है। रक्तके साथ ही प्राण है। रक्त जल है, वायु प्राण है। जब वायु और जल दोनों गये तो जीवित कँसे रह सकता है।
फाखता या पण्डुक।
फीरोजपुर जिलाके मुक्तसर गांवमें साहबू नामका एक मनुष्य रहता था जो जातिका रोड़ा था। एक दिवस वह मेरे पास आया मैंने उसको शिक्षा दी कि, तुम मांस न खाना और मदिरा पीना छोड़ दो, ये बहुत पापकी बात है। उसने कहा कि, मैं खाता पीता तो हूँ पर प्राणबध नहीं करता। क्योंकि, मैंने एक दिन बन्दूकसे दो फाखता मारा, उनको पकाकर खा लिया। उस दिन मुझको स्वप्न हुआ तो मेरे कानोंमें ऐसा शब्द सुनाई देने लगा कि, हम दोनों साधु फाखताके स्वरूपमें इस देशका भ्रमण करने आये यह निर्दयी कसाई हमको मारकर खा गया। जब साहबूरोड़ाने ऐसा स्वप्न देखा तो प्रतिज्ञा की कि,
माउण्ट सेन्ट वर्नर्ड हाथ निउफौण्ड लेण्ड डाग
भविष्यमें कभी किसी जानवरको न मारूँगा उसी समयसे बन्दूक फेंक दी, शिकार न करनेकी शपथ ले ली । फाख्ता बहुत ही निर्दोष पक्षी है ।
नूहको समाचार—इसीने नूह पैगम्बरको पृथिवीके गीले और शुष्क होनेकी बात बताई थी । यों कहते हैं कि इस फाख्ताका यह नियम है कि, जब इसका नर मर जाये तो वह दूसरा नर नहीं करती । यदि मादा मर जाये तो नर अपने लिये दूसरी मादा नहीं ढूँढ़ता । जोड़ मरनेके पीछे कभी सम्भोग नहीं करता । अपनी सारी उम्र अत्यन्त पवित्रताके साथ बिताता है ।
कबूतर ।
कबूतर पवित्र पक्षी है । ये उत्तरीय अमेरिका तथा अन्यान्य देशोंमें अधिकतासे हुआ करते हैं । उनकी अनेक जातियाँ हैं । जब वे उड़ते हैं तो उनकी इतनी अधिकता होती है कि, वे दो सौ मील तक बराबर आकाशको घेर लेते हैं । गिनतीमें दो अरबके निकट होते हैं । ये कबूतर पूर्व कालसे समाचार पहुँचानेवाले पक्षी समझे जाते हैं ।
आना करिञ्जन एक यूनानी शायर कहता है कि, कबूतर पत्र पहुँचाया करते थे ।
प्लेनी—नामक एक मनुष्य जो रुमियोंका बहुत बड़ा नॅचुरलिष्ट था, लिखता है कि, मिटोनिया अर्थात् मोदीना नगरके दुर्गका घेर हुआ था उस समय हेरिटीस डिसमिस प्राविटस्के बीच बराबर पत्रादि पहुँचाया करते थे । यह भी लिखा है कि, सेण्ट टोनीसकी लड़ाईमें कबूतर पत्र तथा समाचार ले आया करते थे ।
हुद् हुद्पर कुरान—कुरानमें लिखा है कि, हुद् हुद् सुलेमान बादशाहका पैगाम पहुँचाया करता था उत्तर भी लाया करता था ।
कप्तान ब्राउन साहबका कथन है कि, चलटरहमके सरायवालेके पास एक कबूतर था उसका बारह वर्षका वय था । उसकी कबूतरी उसको छोड़कर चली गई । उसकी जुदाईसे उसको अत्यन्त दुःख था । उसने नवीन सम्बन्ध नहीं किया । दो वर्ष तक बिना स्त्रीके रहा अन्तमें उसकी अविश्वासिनी स्त्री फिर आई । चाहा कि, मैं अपने नरके साथ रहूँ उसने अनेकों युक्तियाँ कीं कि, मेरा नर मुझसे पहिलेकी तरह प्रेमसे मिले । उसने बहुत हठ किया तो उसने उसको चोंचोंसे मारकर निकाल दिया । एक रातको उसने अपने लिये एक स्थान निश्चित किया तब कबूतर कुछ प्रसन्न हुआ । कबूतरीको अपने साथ रहने दिया वह शीघ्रही मर गई । उसके छोड़ जानेसे उसने ऐसी स्वतंत्रता प्राप्त नहीं की थी
हिरण
जैसी कि, उसके मर जानेसे हुई। उसके मरनेके पीछे उड़ गया। कुछ घण्टोंके पीछे एक नवीन कबूतरी ले आया।
जर्मनी और फ्रांसके कबूतर।
मैंने सुना है कि, शाहंशाह जर्मनी और फ्रांस देशके अधिकारियोंके पत्रवाहक कबूतर भी हैं, वे कबूतरोंके गलेमें पत्र बाँध देते हैं वे उन्हें पहुँचाया करते हैं। डाकके हरकारे कबूतर हैं उनकी उड़ानमें ऐसा बल है कि, एक दिनमें डेढ़ सौ अथवा दो सौ कोस तक उड़ जाते हैं नियत स्थानपर पत्र पहुँचाते हैं। उनके लिये स्थान बने हुये हैं, जहाँ वे ठहरते हैं उन स्थानोंपर उनके लिये चारा दाना देनेवाले उपस्थित रहते हैं सारी चौकसी हुआ करती है।
मैना।
मैनाको अङ्गरेजीमें मेगपर्ड कहते हैं। यह पक्षी इङ्ग्लिस्तान देशका रहनेवाला है। ग्यारह इंचके लगभग लम्बा होता है लाल काले रङ्ग होते हैं। यह माँस तथा अन्न आदि सभी कुछ खाता है। चार पायोंकी बहुत सेवा करता है उनकी समस्त जुएँ इत्यादिको खा जाता है। बहुत अत्याचारी तथा स्वार्थी पक्षी है, बहुत सावधान तथा किसानोंका शत्रु है। इसको चोरीकी बड़ी लत है। बहुत धूर्त तथा चालाक है। यदि किसी भी प्रकारकी आपत्ति निकट हो तो वह बहुत चौखती चिल्लाती है। अपने समस्त सजातियोंको सचेत कर देती है। उसकी चिल्लाहट सुनकर सारे बनले पशु सचेत हो जाते हैं। सारे पशु पक्षी तथा हिंसक जीव उसके चिल्लानेके तात्पर्यको अच्छी तरह समझते हैं। सब चौकस हो जाते हैं। जिससे आखेट करनेवाला निराश हो जाता है। कवि ऐसा अनुमान करते हैं कि, पूर्वकालमें मेगपर्ड स्त्रियां थीं। यह कागका एक रूप है। ये बहुत चिल्लाती तथा हुल्लड मचाती हैं। उनके पर सुन्दर होते हैं। ऐसा समझा जाता है कि, वे पहलेसे समाचार दिया करती हैं यदि एक प्रगट हो तो उसे बुरा शकुन समझना चाहिये यदि चार देखनेमें आवें तो उससे मृत्युकी आशङ्का होती है, यदि पांच दिखाई दें तो अत्यन्त विपत्ति आती है।
चोर मैना—एक कहानी है कि, फ्लारेन्स नगरीमें बेसिनो नामक एक बेगम रहती थी। उसका एक बहुमूल्य हार खो गया। उस चोरीमें एक छोटी बालिकाके शिर दोषारोपण किया गया, जिसके कारण उस लड़कीको कष्ट पहुँचाया जाने लगा। जब वह न सह सकी तो उसने दोष स्वीकार कर लिया पर माल उसके पास नहीं निकला। उसको फांसीपर लटका दिया। उस अनजान लड़कीको फांसीपर लटका चुकनेके बाद उसके कुछ कालके पीछे प्रचण्ड आँधी
कस्तूरी मृग
आई महान् विपत्ति उपस्थित हुई । प्लारेन्स नगरपर कड़कड़ाके बिजलियां गिरें। अन्यायीके घरको गिरा दिया । उसपर मेघपयीका एक घोंसला था वह भी पृथ्वीपर गिर पड़ा । चिड़ियाके खोतेमेंसे मोतियोंकी माला निकल पड़ी । यह पक्षी बहुत चोर है । मनुष्य तथा समस्त जन्तुओंकी बोलीकी नकल करता है । वस्तुओंको चुराकर दूसरे स्थानमें धर देता है । तनिक भी पता नहीं चलता कि, किसने चोरी की ।
रोमसेन साहब—कहते हैं कि, एक मनुष्यके घर एक मेघपयी रहा करती थी । नकल करनेमें यह परम प्रसिद्ध थी । सीटी बजाती, राग और गीत गाती, मुर्गी तथा बतखकी बोली बोलती । मनुष्यके समान साफ २ बातें किया करती । द्वारपर बैठकर आहा आहा करती । मनुष्यके समान ऐसा शब्द करती कि, रखवाले दौड़ आते । वह चिड़िया जोरसे हँसती तथा ठठठा करती । जब नौकरकी स्त्री सम्बोंसा बनाती तो वह चिड़िया भी वही काम करती । यदि स्त्री उस चिड़ियाके ठठठेसे अनभिज्ञ होती तो दौड़ी आती, यदि मनुष्यके ध्यानसे कोई द्वार खोल दे तो चिड़िया भीतर घुस आती, अपनी चोंचमें भोजन लेकर चली जाती । इसके बाद बैठके हर्ष पूर्वक शब्द करती । कुसियोंके पीछे बैठके बोलती । अपने मुखसे प्रकट कहती कि, मैं भूखी हूँ । घरके छोटे लड़कोंको याद दिलाती कि अब मदरसा जानेका समय हो गया । तैयार हो । इधर उधर फिरती थी । कभी भी बिना हानि किये न रहती थी, चोरी करनेकी तो उसकी आदत ही थी । छोटी छोटी वस्तुएँ चुराकर दूसरी जगह धर देती थी ।
मैना चिड़िया ठीक मनुष्योंके समान बोलती है, सारी भाषाओंको ठीक ठीक बोल सकती है । एक मैना एक अस्पतालके पिंजरेमें थी वह ठीक रोगियोंके समान खाँसती थी । उसी प्रकार हाय हाय करती, रोती और बन्दूकके गर्जके समान झनझनाया करती थी । कोई ऐसी भाषा नहीं थी जिसे वह बोल न सकती हो ।
तोता ।
तोता शिक्षा ग्रहण करनेवाला अत्यन्त तीक्ष्ण बुद्धिका पक्षी है । यह मनुष्योंके समान अनेक बातें सीख सकता है ।
निशानेबाज और लिपिके जानकार—पञ्जाब देशस्थ जालन्धर प्रान्तमें एक फगबाडा बस्ती है । वहाँके तहसीलदारके पास एक ब्राह्मण तोते लाया था उनमें यह गुण था कि, छोटीसी तोप चलाया करता, दूसरा तोता खरे खोटे रूप्योंकी पहचान किया करता, तीसरा किसीका नाम किसी भाषामें लिख दो पहिचान लेता । ब्राह्मणने तोप भरकर तोतेके सामने धर दी । तोतेसे कहा देखो
पंचकमें घासका त्याग, बकरी कथासुननेवाली, सदनाको उपदेश
गङ्गाराम ! यह तोप ठीक निशानेपर है वा नहीं ? गङ्गाराम तोपपर बैठ गया । एक आँख दबाकर इधर उधरसे देखा । ठीक निशाना ताककर गङ्गाराम तोपसे उतरकर अगल बैठ गया । ब्राह्मणने पुनः निशाना ठीक लगा दिया, गङ्गाराम तोप पर बैठ गया । अपना शिर टेढ़ा कर तथा एक आँख दबाके देखा तो ठीक निशाना न पाया तोपसे उतरकर अलग जा बैठा । ब्राह्मणने निशानेको ठीक सामने लगाकर कहा, गङ्गाराम ! अब देखो. गङ्गारामने जाकर देखा निशानेको भली प्रकार मसेके साथ मिला हुआ जान लिया कि, अब तो निशाना ठीक हो चुका है । बत्तीको आगसे लगाया, आग नहीं लगी फिर लगाया तो खूब नंग गई । तोपके प्यालेसे बत्तीको लगाकर आप तोपसे उड़कर दूर जा बैठा तोप छूट गई । वह तोता इसी प्रकार तोप चलाया करता था ।
फिर बहुतेरे नामकोंको भिन्न भिन्न कागज पर लिखकर सबको मिलाकर एकट्ठा करके रख दिया करता, चाहे वह किसी भाषामें क्यों न लिखा गया हो । गङ्गारामसे कहा गया कि, अमुक मनुष्यके नामकी चिट्ठी निकाल दो, तो वह तोता समस्त कागजोंको उलट पलटकर उसीके नामकी चिट्ठी निकाल दिया करता सौ रुपया मँगवाया गया उसमें एक खोटा रुपया मिला दिया गया, उस पर चिह्न किया गया सबको मिलाके एक जगह रख दिया गया । तोतेसे कहा, खोटा रुपया बाहर निकाल देना । तीतेने समस्त रुपयोंको उलट पुलटकर देखा जो खोटा रुपया था उसको निकालकर बाहर धर दिया । तहसीलदार तोतेके लिय ब्राह्मणको सौ रुपया देने लगा पर उसने स्वीकार नहीं किया ।
उज्जैनके अध्यक्ष राजा शालिवाहनके पुत्र राजा रसालुके पास एक तोता था उसकी बहुत प्रशंसा सुनते हैं । वह राजा रसालुका मंत्री था । उसकी अंतर दृष्टि थी, राजा उसकी सम्मति बिना कोई काय्य नहीं करता था । गुरु गोविंदसिंहजीके त्रिया चरित्रमें लिखा है कि—
राजा रसालुके तोता मँना—ये दोनों बड़े बुद्धिमान थे मनुष्यके समान बातें किया करते थे । एक बार ऐसी घटना हुई कि, राजा यात्राके लिये गया, तोता मँना दोनोंको घर छोड़ गया । उस समय रानी एक पराये पुरुषको बुलाकर उसके साथ बातें करने लगी, तोता मँना दोनोंने उसको शिक्षा दी कि, तू अधर्म न कर । व्यभिचार अनर्थका मूल है, मँनाने कुछ कठोर वचन भी कहे । कहा कि, तू पापिष्ठा स्त्री है । मैं तेरा सारा हाल राजासे कह दूँगी । तोता तथा मँनाकी बातें सुनकर रानी जली मरी, लौड़ीको आज्ञा दी कि, दोनोंका पिजरा उठा ला. वह उठा लाई कहा कि, मँनाकी गरदन मरोड़कर मार डाल । मँनाका काम तो उसी समय समाप्त कर दिया गया तोताके लिये आज्ञा मिली कि, इसे
भेड़, स्वदेश प्रेम, लोमड़ी बिल्ली और डायन
घरके बाहर लेजाके मार डाल । लौंडी तोता लेकर घरके बाहर निकली, तोतेने लौंडीकी खुशामद की कि, तू मुझे मत मार, मेरे बदले किसी दूसरे तोतेके शव दिखा दे. लौंडीके मनमें दया आ गई, तोतेको छोड़ दिया, वह उड़कर राजा रसालुके पास जा पहुँचा, रानीका सारा हाल तथा मैनाके मरने और अपने प्राण बचाकर निकल आनेकी सब बातें कह दी । राजा अपने महलमें तुरन्त पहुँचा चोरकी पकड़कर मार डाला । रानी अटारीसे गिरकर मर गई ।
रसालुका अन्तर्दृष्टि तोता—एक और राजा था उसका नाम सरकप था । इसका यह नाम इस कारण पड़ा कि, उसकी अत्यन्त सुंदरी एक लड़की थी । राजाने उसके निमित्त यह विज्ञापन दिया था कि, जो कोई मेरे साथ चौसर खेलकर बाजी जीत जावेगा उसको मैं अपनी पुत्री दे दूँगा, हार जाएगा तो मैं उसका शिर काट लूँगा, इसी प्रकार उसने कितने ही राजोंके शिर काट लिया । चौसरकी बाजीमें उसपर कोई विजयी नहीं हुआ ।
जब यह बात राजा रसालुने सुनी तो वह घोड़ेपर सवार होकर तोतेको अपने साथ लेकर अकेला सरकपकी ओर चला । राहमें जाते हुये एक झाहा मिला । तोतेने कहा कि, राजा ! इस झाहेको पकड़ ले, यह तेरे काम आवेगा. राजाने झाहेको अपने साथ लिया । आगे जाते हुये बिल्लीके बच्चे मिले । तोतेने कहा, राजा ! इन बच्चोंमेंसे एक लेले, यह भी काम देगा । कुछ दूर जाकर राजाने घोड़ेको वृक्षसे बांध दिया आप सो गया । उस स्थानपर बहुत विषैला सर्प रहता था । उसने बाँबीसे निकलकर राजाके स्वाँसको खींच लिया, राजा मर गया । उस सांपका मित्र कौवा था. सर्पने उससे कहा कि, इसके मांसको आनन्द पूर्वक खा। उस समय तोतेने झाहेसे कहा कि, अब तू देख ! हमारा राजा तो मर गया, कौआ हमारे राजाका मांस खाने जाता है, तू उसकी टांग पकड़ लेना जबतक इसराल सांप राजाके दमको फिर न छोड़े राजाको जीवित न करे तबतक कौवेकी टांग न छोड़ना । झाहा तोतेके कथनानुसार राजाकी दाढ़ीके नीचे छिपकर बैठ। क्योंकि, राजाकी दाढ़ी बहुत बड़ी थी । कौवा राजाकी छातीपर आकर बैठ चाह। कि, राजाकी आँख निकालकर खावे, उसी समय झाहाने राजाकी दाढ़ीके नीचेसे निकलकर कौवेकी टांग पकड़ली तथा अपने कांटोंको फैलाकर बैठ गया कौवेने बहुत बल किया पर उसकी टांग नहीं छूटी, बहुत फिरा, चिल्लाया पर कोई युक्ति काम न आई । कौवेके मित्र इसरालका कुछ बल नहीं था कि, झाहेसे उसकी टांग छुड़ाये । यदि इसराल झाहेपर अपना मुँह चलाये तो वह आप मर जाये । कौवा बहुत पुकारता पर झाहा न छोड़ता । तोता बोला कि, इसराल!
लांडकी डाइन बिल्ली, रक्त दानसे आपत्ति, डायनकी सवारीकी शंका
तू राजाका दम छोड़ दे राजा जीवित होजाए तब तेर मित्र कौबेका यह झाहा छोड़ देगा । इसरालने राजाके दमको नाक द्वारा उसमें पँठाया । राजा जीवित होकर कहने लगा कि, मैं बहुत सोया । तोतेने राजाको कौवा तथा इसराल इत्यादिकी सारी बातें कह सुनाई । झाहेने कौबेको छोड़ दिया । सब अपनी अपनी जगह जा बैठे । राजा घोड़ेपर सवार होकर सरेकपके घर पहुँचा चौसर खेलनेकी अभिलाषा प्रगट की । तोतेने राजा रसालुको सिखा दिया कि, हे राजा ! सरेकप अपनी बाँहमें छोटे छोटे चूहे रखता है उनको दाव घातें सिखलादी हैं । राजा पांसा फेंकता है तो चूहे राजाकी बाजीका पांसा उलटकर फिर आस्तीनमें घुस जाते हैं । इस कारण तू युक्तिकर कि, बिल्लीके बच्चेको यहाँ छोड़ दे जिसके भयसे चूहेके बच्चे सरेकपकी आस्तीनके बाहर न निकलेंगे । तू बाजी जीत जायगा । रसालूने यही कार्य किया बाजी जीतली । राजा सरेकपकी बेटीको विवाहकर अपने घर ले आया ।
तोतेकी बुद्धिमानी तथा भविष्यका हाल जाननेके विषयमें लोग अनेक प्रकारकी कहानियां कहते हैं। समस्त पञ्जाब देश इस तोतेकाही गीत गा रहा है ।
लंगड़े तोतेकी बांतें—एक लंगड़ा तोता था । कोई मनुष्य उसके पास जाकर पूछता कि, पाँव कैसे टूटा तो वह उत्तर देता कि, मैंने एक सौदागरकी सेवामें अपना पाँव खोया है । महाशय ! लंगड़ेको न भूलना । यह तोता बिचित्र प्रकारकी बोलियाँ बोलता था, आवाज बदलकर बोलके घोड़ोंको ठहरा लेता और चला देता । हँसता तथा प्रसन्नतापूर्वक खिलखिलाता यह बात पूर्वोक्त पुस्तकमें लिखी है ।
एक चालांक तोता—था जो कुछ वह खाता उसका छिलका नीचे डाल देता इसके पीछे बिल्लीको बुलाता । पुश आ—पुश आ — जब बिल्ली जाकर तोतेकी ओर ताक लगाती तो तोता उसकी खुशामद करता हुआ कहता कि प्यारी बिल्ली ! पीछे प्यारकी ऐसी बातें सुनाता वो मोहजाती पर अपनी दृष्टि सदैव अपने बँरी पर रखता ।
हृबश देशका तोता—एक मनुष्यके पास था । वह बहुत धूर्त था । उसका नाम जेको था । वह ऊपर पांव करके मुरखेकी तरह पड़ जाता था । कहता कि जेको मर गया । जबतक उसकी स्वामिन न जाती तबतक मुर्देकी तरह पड़ा रहता । वह गाती तो जेको पुनः जीवित होजाता । यह अधिक हानि करता था इसी कारण इसका पिंजरा अकेलेमें नहीं छोड़ा जाता ।
झिडकीकी नकल— एक दिन वह तोता पिंजरेके बाहर आगया, अपनी
बिल्लियोंका प्रेम, चीलके रूपमें डायन
स्वामिनकी अनुपस्थितिमें अनेक सुनहली बहुमूल्य वस्तुओंको कुतर डाला । स्वामिनने आकर हानि देखी तो तोतेको अनेक झिड़कियां दीं । मारा फिर पिंजरेमें बंदकर दिया । सारे दिन उसने नाकुछ खाया न पिया, सांझ हुई तो तोतेने पुकारकर कहा कि जेको अब विश्रामके लिये विश्रामालयमें जाया चाहता है । नियमानुसार उसके पिंजरे पर पर्दा डाल दिया गया । उस समय सोनेके लिये पर्दाके भीतर कुड़कुड़ाने लगा । जिस प्रकार उसको झिड़की तथा दण्ड मिला था वेही सब बातें आपसे आप करने लगा कि, दुष्ट जेको नीच पक्षी तूने कैसे इतनी हानि की । आह मैं तुझको दण्ड दूंगी इत्यादि वे समस्त बातें जो उसकी मालकिनोंने कही थीं ज्योंकी त्यों कहा करता था । दूसरी सांझको भी उसी स्त्रीकी उसी प्रकार नकल किया करता था ठीक ठीक धीरे धीरे अपनी स्वामिनीकी तरह बोलता था ।
तोतेकी ईर्ष्या—समस्त पक्षी एक दूसरेसे ईर्ष्या करते हैं । पर तोता सबसे अधिक ईर्ष्या करता है । ली साहबका कथन है कि, मेरे मित्रके पास एक तोता था । उसकी मलकिन ने गानेवाली चिड़िया पर हाथ फेरकर प्यार किया उसपर हाथ फेरा उसका प्यार देखकर तोतेने ईर्ष्या की अप्रसन्न होकर बोलना छोड़ दिया । खाना भी त्याग दिया स्वामिनकी ओरसे मुँह फेर लेता । काटने दौड़ता । एक दिन धूप खानेके लिये गानेवाली चिड़ियाको बाहर रख दिया । इस चिड़ियाको अङ्गरेजीमें कोनेरी बर्ड कहते हैं यह अपने हर्षमें आकर गीत गाने लगी तोता ध्यान पूर्वक कान लगा शिर टेढ़ा करके चिड़ियाका गीत सुनने लगा । वह गाके चुप हुई तो तोता प्रशंसा करनेकी तरह उच्च स्वरसे बोला, बहुत अच्छा बहुत अच्छा ॥ फिर बोला, हा-हा-हा-हा ।
ईर्ष्यासे हत्या — इसी स्त्रीके भाईके पास भी एक तोता था । वह अपनी जातिकी छोटी चिड़ियोंसे बहुत ईर्ष्या करता था । इसके स्वामीके पास एक छोटी चिड़िया थी । जिसको वह बहुत प्यार करता था । उसका पिंजरा शयनागारके समीप लटकाया हुआ था । एक रात ऐसी घटना हुई कि, छोटी चिड़िया बहुत चिल्लाई । उसकी चिल्लाहटसे सरायका स्वामी जागा, दीआ लेकर पिंजरेके निकट गया तो देखा कि तोतेने किसी प्रकार पिंजरेसे बाहर निकलके छोटी चिड़िया के पिंजरेमें पञ्जा डालकर उसको अपनी ओर खींच टुकड़े २ कर दिया है ।
स्वाद — एक तोता था उसके पिंजरेमें भूलकर कुछ खराब रोटी रखी गई तोता रोटीकी ओर कुछ कालतक देखता रहा एक दो बार उसको चक्खा । अच्छा न जानकर रोटी नहीं खाई । चोंचसे इधर उधर बिखेर दिया कहने लगा कि, भ्रष्ट भोजन है भ्रष्ट भोजन है भ्रष्ट नष्ट भोजन है ।
उल्लूके रूपमें डायन बिल्लीके रूपमें, घात स्त्रीकी हत्या
तोडेकी चोरीपर आश्चर्य — इसने एक स्त्रीको कहते सुना कि, मेरा रुपयों का तोड़ा अथवा न्योली जाती रही । यह बात सुनकर तोता उच्च स्वरसे बोला कि कैसे आश्चर्यकी बात है ।
सरायका तोता — एक प्रसिद्ध तोता नारफोकोंकी सरायमें रहता था यह अपने स्वामी तथा उसकी स्त्रीसे विशेष अनुराग रखता था । वह उसके समस्त मित्रों तथा भृत्योंको पहचानता था । उनका नाम लेकर उनको पुकारता था उनको भीतर बुलाता कितनोंको कह देता कि दूर हो अपनी जगहपर जा ।
एक दिन एक मनुष्य उसके स्वामीकी स्त्रीसे पैसे कौड़ीकी बातें कर रहा था । मनुष्य बातचीत करनेमें कुछ गर्म हुआ । तोता उच्च स्वरसे बोला कि, ऐ महाशय ! आप इसको रख दीजिये आप इस विषयसे पूर्ण अनभिज्ञ हैं ।
अभ्यागतोंसे बात — इसी स्त्रीने हरे रङ्गका एक तोता पाला । वह अभ्यागतोंसे बातें किया करता था पूछता था कि, आप प्रसन्न तो हैं ? खाना पीना कीजिये । सीटी बजाइये नाचिये यह तोता बीस वर्षतक जीवित रहकर मृत्युको प्राप्त हो गया ।
द्वारपर बातें — व्यापारीके पास दो तोते थे एक हरा और दूसरा श्वेत रङ्गका था । श्वेतरङ्गके तोतेको सिखाया था कि, जब कोई घण्टा बजाये तो वह यह कहता कि द्वार पर कौन है ? एक मनुष्यने आकर द्वार खटखटाया । हरे रङ्गके तोतेने कहा कि, कौन है ? मनुष्यने उत्तर दिया कि, मैं वह मनुष्य हूँ जो चर्म लेकर आया हूँ । तोता बाह बाह करके चुप हो रहा । जब द्वार नहीं खुला तो उसने फिर द्वार खटखटाया । फिर हरे तोतेने कहा कि, कौन है ? वह रुष्ट होकर कहने लगा कि, तुम यहाँ क्यों नहीं आते । तोता फिर बाह बाह कहकर चुप हो रहा । उस मनुष्यने झुंझलाकर घण्टा बजाया । श्वेत तोतेने कहा कि, द्वारपर जाओ । जब श्वेत तोतेने उच्चस्वरसे कहा द्वार पर जाओ तो मनुष्य द्वारपर गया द्वार खुला न पाया तो उसने कहा कि, तुम मुझसे क्यों दुष्टता करते हो ? अत्यन्त क्रोधित हुआ । उसने मकानमें पीछे जाकर देखा तो जान लिया कि, जो उत्तर देते थे वो दोनों तोते हैं ।
विलियमका तोता — हिउम साहबके इङ्ग्लैण्डके इतिहासमें मैंने पढ़ा था कि, इङ्ग्लिस्तानी बादशाह चौथे विलियमका तोता किसी कारण टेम्स नदीमें गिरकर डूबने लगा । उस समय उसने पुकार कर कहा कि, नाव ! नाव !! एक नाव जल्दी लाओ, जो कोई शीघ्र नाव लायेगा सो दो सौ रुपया पारितोषिक पायेगा । एक मनुष्य दौड़कर गया, तोतेको पकड़के बाहर निकाल लाया ।
चीलके रूपमें बूढ़ी डायन बगुलेके रूपमें मारा निष्कर्ष, अन्तर्धान होना, विज्जू
नियमानुसार दो सौ रुपये भोगने लगा । बादशाहने कहा कि, यदि तोता कहे तो विश्वास करूं । बादशाहने पूछा कि, ऐ तोता ! इस मनुष्यको क्या दिया जाय ? तोता बोला कि, इस ठगको एक कूट दे दो । (कूट एक प्रकारका सिक्का है, जो एक अधेलेके बराबर होता है (यह बात सुनकर सारे दरबारी अचम्भमें हुये । बादशाहने हँसकर कहा कि, बहुत अच्छा, यही दिया जायगा ।
तोता नामा — एक बहुत प्रसिद्ध पुस्तक है जिसको कि, तोता नामा कहते हैं । तोता नामा फारसी तथा अङ्गरेजीमें भी मैंने देखा था । इसमें बहत्तर कहानियाँ हैं । इस पुस्तकको शुक्बहत्तरी भी कहते हैं । यह पुस्तक पहले संस्कृतमें थी । इसके पीछे फारसी तथा अंगरेजीमें हुई है । एक मनुष्य परदेशमें भ्रमणके लिये गया था । घरपर उसकी युवती स्त्री थी । एक मैना एक तोता रह गया था । तोता तथा मैना दोनों मनुष्योंकी तरह बातें किया करते थे । पुरुषके चले जानेके कुछ दिवसोंके पीछे स्त्रीको काम कामनाने पीड़ित किया । वह एक पुरुषके पास जानेको तैयार हुई । पहले उसने मैनासे पूछा कि, मैं अमुक मनुष्यके पास जाया चाहती हूँ, तू क्या कहती है । इस बात पर मैना ने उसको शिक्षा दी । कड़ी २ बातें कहीं, उस स्त्रीने उसको मार डाला । मैना भर गई, तोता देखता रहा इससे वह इस आपत्तिसे सचेत हो गया । उस दिन तो वह स्त्री ठहर गई, आगे दूसरे दिन अच्छे वस्त्राभूषण पहरे कर चलनेको तैयार हुई । तोतेसे पूछा कि, मैं अमुक पुरुषके निकट जाया चाहती हूँ तू मुझको आज्ञा दे, तोता उस विपत्तिसे सूचित था । उसने कहानी आरम्भ की, ऐसी बुद्धिमानी तथा चातुरीसे समझाने लगा । जिसे कि सुनकर स्त्री हर्षित हुई । अपने घर बैठ रही । दूसरे दिन प्रस्तुत होकर स्त्रीने आज्ञा माँगी तोतेने दूसरी कहानी आरम्भ की जिसको सुनकर वह स्त्री दूसरे दिन भी ठहर गई । इसी प्रकार उस तोतेने बहत्तर दिनों तक बहत्तर कहानियाँ सुनाई बहत्तरवें दिन उसका पति पलट आया । स्त्री व्यभिचारके महापापसे बच रही । वह पुस्तक शुक् बहत्तरी है ।
तोतेनामेके नामसे भी प्रसिद्ध पुस्तक है । पुस्तकोंमें तोता मैनाओंकी ही बातें लिखी हैं ।
बुलबुल ।
उर्दू साहित्यमें प्रेमके अकंटक पुजारियोंकी रसमयी गोष्ठीमें जो स्थान बुलबुलोंको मिला है वह दूसरे किसीको नहीं मिला । जहाँ कहीं प्रेमकी उत्कट प्रशंसाकी जाती है वहाँ बुलबुलको सबसे अगाड़ी रखा जाता है । शृंगारके कवियोंने तो इसके गुण गाये सो गाये ही हैं, पर स्वामी रामतीर्थजी जैसे त्यागी विरक्तों ने
विज्जूओंका परस्पर प्रेम उपसम, चूहा, श्वेत चूहा
भी इसकी प्रेम कहानी कह ही डाली है कि, "बुलबुलोंकी कबर बागहीमें बनती हैं" उर्दूका साहित्य तो इससे भरा ही पड़ा है।
बुलबुलोंकी मानुषी वाचा - डाक्टर गोल्डस्मिथ साहबकी नेचरल हिस्ट्री में लिखा है कि, एक पथिक पथमें चला जाता था। सांझ होते ही सरायमें उत्तर पड़ा। वहाँ बुलबुलके तीन पिंजरे लटकते थे। पथिकको बीमारीके कारण रातको नींद नहीं आई। बेचैनीकी अवस्थामें पड़ा करवटें लेता रहा चुपचाप था। आधी रात बीत गई चारों ओर सन्नाटा छा गया। मनुष्य अचेत होकर सो गया। समान अन्तर पर लटकाई हुई तीनों बुलबुलें आपसमें मनुष्योंकी भाषामें बातें करने लगीं। तीनोंने मनुष्योंकी भाषामें तीन कहानियां कहीं पहिली बढईकी कहानी थी दो और दूसरी कहानियां थीं उन बुलबुलोंकी कहानियां पथिक सुनता रहा। वे चुप होगई। सबेरा हुआ सरायका स्वामी उठा। पथिकने पूछा कि, तुमने इन बुलबुलोंको बातें करना सिखाया है? उसने उत्तर दिया कि, नहीं। मुसाफिरने कहा कि, ये तीनों बुलबुलें ठीक मनुष्योंके समान बातें करती हैं। इन्होंने आपसमें बहुत हँसी मसखरीकी तीन कहानियां कही हैं। मैं चुपचाप पड़ा सुनता रहा। क्योंकि, रोगकी वेदनासे मुझको रात भर नींद नहीं आई।
यह बात सुनकर सरायवाला अचंभा करने लगा कि, ये तो मेरे सामने कभी नहीं बोलीं न मैंने इनको बोलनाही सिखाया है। वे आपही बोलती होंगी, मैंने इनको कभी बातचीत करते नहीं देखा।
चण्डूल ।
चण्डूल बहुत चालाक पक्षी है बहुत सतर्कतासे अपना घोंसला बनाता है। बहुत युक्ति सहित घास फूसका घोंसला ऊंचे खजूरके वृक्षपर बनाता है वह बहुत बारीकीसे कोठडियां तैयार करता है नीचेकी ओर घोंसलोंका मुँह रखता है कैसी ही वृष्टि क्यों न हो उसके घोंसलेमें एक भी बूँद नहीं जाती उसके भीतर ओस इत्यादि भी नहीं घुस सकते। धूपकी गरमी जाड़ेकी सरदीका प्रवेश भी नहीं हो सकता।
चण्डूल और सांप - चण्डूलने वृक्ष पर अपना घोंसला बनाया। उसमें सांप घुस गया। चण्डूलके बच्चोंको खाकर उसीमें बैठ रहा। चण्डूल आया विपत्ति से सूचित हुआ। सांपको बैठे देख जान लिया कि, उसने मेरे बच्चोंको खा लिया है। दोनों चण्डूलोंने यह युक्ति की कि, जल्दी जल्दी घास फूस लाकर घोंसलेके द्वारको बन्द कर दिया उसमेंसे सर्प बाहर न निकल सका घोंसलेका मुँह बन्द हो चुका तब उन्होंने घोंसलेकी जड़ काट कर पृथिवीपर डाल दिया। उसको हिलते डोलते
देख कर लोगोंने जाना कि, इस खोतेके भीतर कुछ है जिसके कारण यह हिलता है । फड़ाके देखा तो सांप निकल पड़ा लोगोंने उसको मार डाला । इस युक्तिसे चण्डूलने सांपको अपने बच्चोंके बदलेमें मार लिया ।
विचित्र कर्तव्य — फिरोजपुरमें एक मनुष्यने चण्डूलको विचित्र कर्तव्य सिखाया था । उसके पास सोने चाँदीकी दो अँगूठियाँ थीं, वह दोनों अँगूठियोंको दूर रख कर कहता कि, चाँदीकी अँगूठी ला वह चाँदीकी अँगूठी लाता । जब वह कहता कि, सोनेकी अँगूठी ला तो सोनेकी लाता कुछ भी फर्क न पड़ता था ।
समझदार चिड़िया — फिरोजपुरके दूधगांवमें साहूकारके चौबारे पर एक साधू रहता था एक छोटी चिड़िया उसके समीप आकर अत्यन्त मधुर स्वरमें बोला और गाया करती थी । एक दिन वहाँ मुसलमान आ बैठे उस समय भी वहाँ चिड़िया आकर बोलने लगी । मुसलमानने कहा कि, मैं इसको फँसाऊंगा । चिड़ियाने यह बात सुनली । वह उस दिनसे उस जगह आना छोड़ दिया । दूर दूर बोलती पर उस जगह कभी न आती थी ।
थसकी बोली — एक प्रकारकी चिड़िया होती है उसका प्राकृतिक गुण यह है कि, बहुत मधुर भाषी होती है । भांति भांतिके मोठे राग गाया करती है नाना प्रकारकी बोलियाँ बोलती है । वह कुत्तोंकी तरह भूकती और बिल्लीकी तरह म्याँव २ भी करती है । मनुष्यके स्वरमें स्वच्छ बोलती है । बोरडरप साहबने स्वयम् अपने मित्रों सहित सुना था कि, वह बोलती थी । 'मेरी प्यारी । मेरी सुन्दरी प्यारी । मेरी छोटी सुन्दरी प्यारी ।'
सुर्खसीना ।
एक पक्षी होता है इसका खोता पुष्पके बरतनोंके पास था उसी जगह एक सांपने आकर उसका घोंसला घेर लिया । चिड़िया बागवानके मोड़े पर बैठ कर उच्च स्वरसे बोलने लगी । अपने खोतेकी ओर दौड़ती । पहले तो मालीने उस चिड़ियाके इशारेको न समझा । चिड़िया उसके मोड़े पर आबैठी उसी प्रकार बोलने लगी । मालीने बिचारा कि, यह निडर चिड़िया मेरे मोड़े पर आकर शब्द करके फिर अपने घोंसलेकी ओर दौड़ जाती है इसका कोई अवश्य कारण है, यह कुछ कहती है । उसने जाकर देखा त्हे उसका खोता सर्प द्वारा घिरा हुआ था । तब तक उसके बच्चोंको किसी प्रकारका कष्ट नहीं पहुँचा था । मालीने सर्पको मार डाला धन्यवाद देनेके बदले चिड़िया मधुर गाना गाने लगी ।
बड़ीआबाबील ।
कप्तान ब्राउन साहब कहते हैं कि, बड़ी जातिकी एक आबाबील थी उसके
सर्प सर्पोंके राजा, सर्प सभा
नरको शिकारीने बन्दूकसे मार डाला । वह सदाही अत्यन्त क्रुद्ध होकर अपने नरका परिशोध शिकारीसे लेती, उसपर अत्यन्त क्रुद्ध हो उसके माथेपर चोंचे मारा करती उसके चारों ओर चिल्लाती फिरती जहाँ कहीं उस शिकारीको देखती वहीं वह उसपर आक्रमण करती । रविवारके दिन आखेट करनेवाला अपना वस्त्र बदल के दूसरे प्रकारका वस्त्र पहनता उस समय वह पहचान न सकती थी इसी प्रकार उसपर आक्रमण करती थी ।
एक बहुतही मिष्टभाषी चिड़िया बहुत मीठा आवाजसे गाया करती थी । उसको प्रायः खिड़कीके बाहर रख देते थे । वह उच्च स्वरसे भली प्रकार गाया करती थी । एकदिन ऐसी घटना हुई कि, उसका पिंजरा मकानके बाहर वृक्षोंके पास धरा हुआ था उसके निकट एक अबाबील आकर पिंजरेके चोंगिंदे फिरेने लगी उस पिंजरेके ऊपर बैठके अपनी बोलीमें पिंजरेके भीतरवाली चिड़ियासे बोलने लगी कुछ काल तक दोनों आपसमें बातें करती रहीं कुछ कालके पीछे चिड़िया उड़ गई । क्षणोंमें एक कीड़ा मुहमें दबाकर लौट आई कीड़ेको गानेवाली चिड़ियाके पिंजरेमें डालकर चली गई । उस दिनसे वह नित्य अपने मित्र अबाबील के लिये एक कीड़ा लाया करती भेंट करके चली जाया करती । दोनों अबाबीलोंमें बहुत मैत्री होगई । आसपासके लोग इनका कौतुक देखनेके लिये उस चिड़ियाका पिंजरा रोज बाहर धर दिया करते । वह अबाबील पूर्वानुसार अपने मित्रकी सुधि लिया करती । जब कोई मनुष्य समीप आता तो दूर भाग जाती अकेलेमें आकर अपने मित्रसे मिला करती । सरदी का मौसम आया तो उड़ गई फिर कभी दिखाई नहीं दी ।
सांप निकाल लेनेवाली — सींगके समान चोंचवाली एक चिड़िया होती है । जिसे अङ्गरेजी भाषामें हार्न बिल कहते हैं वह कुरुप्पा होती है । उसका यह नियम है कि, पृथिवीमें जहाँ कहीं सांप छिपा हो खोदकर निकाल लेती है ।
रेल ।
रेल एक प्रकारकी चिड़ियाको कहते हैं । वह हरी घास तथा अनाजके खेतोंमें रहती है । बहुत दुष्ठा तथा धोखेबाज होती है जब कोई उसको पकड़ लेता है उसको भागनेकी कोई राह नहीं मिलती तो मरनेका बहाना करती है इतना स्वांस बन्द करती है कि, मानों उसमें तनिक भी प्राण नहीं रहा है ।
एक बार एक कुत्ता इसी जातिकी चिड़िया पकड़के एक मनुष्यके पास ले गया । उस समय जान पड़ा कि, वह निर्जीव है तब उस मनुष्यने उसको अलग धर दिया स्वयम् उसके पास खड़ा रहा । चिड़ियाने जान लिया कि, अब यहाँ कोई नहीं
तो कुछ कालके पीछे अपनी एक आंख खोली । मनुष्यने चिड़ियाकी धूर्तता जानके उसको उठा लिया । उसी समय उसका शिर तथा पांव लटक पड़ा, मानो वह मर गई हो मनुष्यने अपनी जेबमें रख लिया । कुछ कालके बाद भागने तड़फने लगी । उसने बाहर निकाला फिर उसी प्रकार मुर्दा होने लगी । उसने उसको फिर एक जगह रख दिया आप अलग खड़ा हुआ । पांच मिनटोंके पीछे अपना शिर उठाया इधर उधर देखकर भाग गई ।
पफन ।
एक प्रकारकी चिड़िया होती है । अङ्गरेजी भाषाका इसका नाम पफन है आइलैण्डकी भूमिमें होती है । लोग उसको बंसी लगाके फँसाते हैं जब एक चिड़िया फँस जाती है तो उसके साथी तीन चार मिल कर उसे अपनी ओर खींचते हैं । इस तरह कितनेही बच जाते हैं ।
क्रासबीक ।
बोर्डरिप साहबका कथन है कि, यह एक प्रकारका पक्षी होता है जिसको अङ्गरेजीमें क्रासबीक कहते हैं क्रासबीकका अर्थ टेढ़ी चोंचवाली चिड़िया है यह पक्षी थोरड़िया देशमें होता है वहाँके पहाड़ी लोग इसके विषयमें ऐसा ध्यान करते हैं कि जिसके घर यह पक्षी होता है वह अपने स्वामी की बीमारीको अपने ऊपर ले लेता है उसका स्वामी आरोग्य लाभ करता है । लोग इसी कारण इस चिड़ियाको अपने घरमें रखते हैं लोगोंका ऐसा भी विश्वास है कि यदि इस पक्षी का टेढ़ा चोंच दाहिनी ओर झुका हो तो मर्दकी देहसे सदी तथा गठिया आदिकका रोगभी दूर होता है । यदि बाये ओरको झुके तो स्त्रियोंके शरीरकी बीमारियोंको दूर कर दे यह प्रायः मिरगीकी बीमारी दूर हो जाती है । वहाँके लोग इसका जूठा पानी पीते हैं उनका ऐसा ध्यान है उसका जूठा जल रोगोंके लिये अच्छा है ।
भुजंगा ।
कप्तान ब्राउन साहब लिखते हैं कि, एक दिन एक बहुत ठट्ठेकी बात हुई विलियनसेनरेट नाम का एक मनुष्य एडनबर्गके पास कर्मर्टन नामके स्थानमें रहता था उसने भजैंटा पाला था । अङ्गरेजीमें इसको डा कहते हैं । हिन्दीमें भोजैंटा अथवा भुजङ्ग कहते हैं । एक दिनकी बात है कि, टेबुलपर ह्विस्की मदिराका आधा गिलास भरा रखवा था । भुजङ्ग उस जगह बैठ गया उसे पीलिया शराबीकी तरह मस्त हो गया । उसने पर तथा पांव लटक दिया । अपने मुँहके बल पृथिवी पर गिर पड़ा । उसके पांव ऊपरको उठ गये । ऐसा जान पड़ा कि, मानों वह मर गया । पानी उसके मुँहमें डाला गया पर पी न सका । वह लफानेलेके कपड़ेमें लपेट
ढोसी पर्वतका नागराज
कर धर दिया गया। लोगोंको निश्चय होगया कि, मर गया दूसरे दिन छः बजे द्वार खुला तो लोगोंने उसको लफानेके कपड़ेसे बाहर निकाला; तब वह उड़कर बाहर चला गया जिसमें चिड़िया पानी पीया करती हैं उसमें खूब पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई। पीछे तो इतना चेतता कि, मदिराके सभीप कभी भी नहीं जाता इस विचारसे सदैव भयभीत होता रहा कि, इसके पीनेसे मेरी बुरी गति हुई थी।
गोडस्किउ ।
एक प्रकारका पक्षी है यह अङ्गरेजी भाषाका नाम है इसका हिन्दीमें अर्थ दूध चूसनेवाला होता है। यों कहते हैं, कि वह रातको बकरियों और हरिणियोंके स्तनमें लगकर दूध चूस लिया करता है। पतङ्गे मार मार कर भी खा जाता है उसकी आँखें बड़ी २ और पर मुलायम सुन्दर एवं रङ्ग-बरङ्ग होते हैं उसका चोंच बहुत खुला हुआ होता है ये पृथिवीके सभी देशोंमें पाये जाते हैं।
कुञ्ज ।
कुञ्ज एक प्रकारका पक्षी होता है। अङ्गरेजीमें उसको बोअरबड कहते हैं इसकी अनेक जातियां हैं आष्ट्रेलियाके टापूमें रहते हैं। कुञ्ज इस कारण कहते हैं कि, वे सब वृक्षोंकी टहिनियां लेकर कुञ्ज बनाते हैं उनमें खेलते और कौतुक करते हैं। कुञ्ज वृक्षोंकी टहिनियोंसे चौड़ा रकाबीदारगुनके बनाते हैं। उनके बीच सिलसिलावार दोहरी महराबकी श्रेणी बनाते हैं वह कई फीटका लम्बा चौड़ा होता है। उसके भीतरसे सब चिड़ियां प्रसन्नतापूर्वक इधर उधर उड़ती फिरती हैं। महराबकी शोभा बढ़ानेको कौड़ियां चीथड़े टूटे बर्तन और पर इत्यादि लगाती हैं। यदि उनमेंसे कोई वस्तु खोजाय तो जिस चिड़िया अथवा जिसके कारणसे खोजाय वही दूँढ़कर फिर उसी जगह उपस्थित करदे, दूसरा नहीं ला सकता। जैसे मनुष्य चौसर तथा शतरञ्ज इत्यादि खेलते हैं वैसेही इन चिड़ियोंके मनोरंजनका एक मजेदार खेल है।
इनी ।
एक प्रकारका पक्षी कोकिलके समान होता है। अङ्गरेजीमें उसको इनी कहते हैं। जहां कहीं वे मधुका छत्ता देखते हैं चिल्लाकर पथिकको सचेत कर देते हैं कि, इस जगह शहदका छत्ता है। पथिक उस बातको समझ जाता है। मधुके छत्तेसे मधु निकाल लाता है। थोड़ा मधु उसको भी दे देता है। इसी कारण उसे इनी गाइड अर्थात् मधुतक लेजाने वाला कहते हैं।
हार्नबिल ।
एक प्रकारका पक्षी है, अङ्गरेजीमें जिसको हार्नबिल कहते हैं। यह एक