बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
( १६७ ) लाभ उठाते हैं। यदि दोष युक्त त्रिभुज हो तो वह संचित पूंजी समाप्त करता है, तथा व्यापार में दिवालिया होकर समाज में बदनामी उठाता है । १६. यदि आयु रेखा पर त्रिभुज का चिह्न दिखाई दे तो व्यक्ति दीर्घायु होता है। १७. मस्तिस्क रेखा पर त्रिभुज का चिह्न रखने वाला तेज बुद्धि तथा श्रेष्ठ शिक्षा प्राप्त करने वाला होता है । १८. यदि हृदय रेखा पर त्रिभुज का चिह्न हो तो उस व्यक्ति का बुढ़ापे में भाग्योदय होता है । १९. यदि त्रिभुज का चिह्न स्वास्थ्य रेखा पर हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य अत्यन्त श्रेष्ठ होता है । २०. यदि सूर्य रेखा पर त्रिभुज का चिह्न दिखाई दे तो वह व्यक्ति किसी भी एक क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय सफलता प्राप्त करता है । २१. जिस व्यक्ति के भाग्य रेखा पर त्रिभुज का चिह्न हो तो वह भाग्यहीन होता है तथा जीवन में वह असफल ही होता देखा गया है । २२. अगर विवाह रेखा पर त्रिभुज का चिह्न हो तो उसके विवाह में कई प्रकार की बाधाएं आती हैं तथा उसका गृहस्थ जीवन प्रायः असफल सा रहता है । २३. यदि चन्द्र रेखा पर त्रिभुज का चिह्न हो तो वह अपने जीवन में कई बार विदेश यात्राएं करता है तथा सफलता प्राप्त करता है । २४. यदि जीवन तथा मस्तिष्क रेखा से त्रिकोण बनता है तो ऐसा त्रिकोण शुभ होता है । २५. यदि स्वास्थ्य तथा मस्तिष्क रेखा से मिलकर त्रिभुज का चिह्न बनता हो तो वह प्रखर बुद्धि का होता है । २६. यदि स्वास्थ्य तथा जीवन रेखा से मिलकर त्रिभुज का चिह्न बनता हो तो वह व्यक्ति को बहुत अधिक ऊंचा उठाने में सहायक होता है । २७. यदि हथेली में उभरा हुआ त्रिकोण हो तो वह व्यक्ति लड़ाकू स्वभाव का होता है । २८. यदि त्रिकोण की रेखाएं उभरी हुई पुष्ट तथा चौड़ी हों तो वह व्यक्ति दूसरों की भलाई करने वाला होता है । २६. यदि त्रिकोण की रेखाएं बहुत चौड़ी हों तथा मंगल पर्वत पुष्ट हो तो वह व्यक्ति बिना हिचकिचाहट के आगे बढ़ने वाला होता है । ३०. यदि दोनों हाथों में चपटा त्रिभुज हो तो उस व्यक्ति का जीवन एक प्रकार से महत्त्वहीन होता है ।
( १६८ ) ३१. यदि रेखाएं गहरी और पतली हों तो वह व्यक्ति जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है । ३२. यदि त्रिकोण की रेखाएं फीकी तथा कटी हुई हों तो वह व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भौतिक तथा स्वार्थी होता है । ३३. यदि त्रिकोण से कुछ सहायक रेखाएं ऊपर की ओर बढ़ रही हों तो उस व्यक्ति को काफी बाधाओं के बाद सफलता प्राप्त होती है । ३४. यदि त्रिकोण के अन्दर का भाग चौड़ा हो तो वह व्यक्ति आलसी होता है। ३५. यदि स्वास्थ्य रेखा उन्नत हो तथा त्रिकोण भी बड़ा हो तो वह व्यक्ति दीर्घायु होता है । ३६. यदि त्रिकोण के ऊपर क्रॉस का चिह्न हो तो उस व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की दुर्घटनाएं घटित होती हैं । ३७. यदि त्रिकोण के नीचे के भाग में क्रॉस का चिह्न हो तो वह व्यक्ति अपने जीवन में महत्त्वपूर्ण होता है । ३८. यदि लम्बी उंगलियां हों तथा त्रिकोण के अन्दर क्रॉस हो तो व्यक्ति दूसरों को दुखी करता है । ३९. यदि त्रिकोण के मध्य में क्रॉस हो तथा स्वास्थ्य रेखा के पास तारा हो तो वह व्यक्ति अन्धा होता है । ४०. त्रिकोण के अन्दर तारे का चिह्न हो तो वह प्रेम में बदनाम होता है । ४१. यदि त्रिकोण में वृत्त का चिह्न हो तो वह प्रेमिका से धोखा खाता है । ४२. अच्छा पुष्ट और बड़ा त्रिकोण व्यक्ति को सभी दृष्टियों से ऊंचा उठाने वाला माना गया है । २. क्रॉस : गणित में धन का चिह्न या एक आड़ी रेखा पर दूसरी खड़ी रेखा का जो चिह्न होता है, उसे क्रॉस का चिह्न कहते हैं । यह चिह्न केवल वृहस्पति पर्वत पर ही शुभ फल देने वाला है । इसके अलावा हथेली में कहीं पर भी यह चिह्न अनुकूल फल नहीं देता है । १. यदि गुरु क्षेत्र पर क्रॉस का चिह्न हो तो वह व्यक्ति सुखमय जीवन व्यतीत करने वाला तथा सोच-समझ कर कार्य करने वाला होता है । उसकी पत्नी शिक्षित होती है । ससुराल से विशेष धन प्राप्त होता है । तथा उसका गृहस्थ जीवन पूर्णतः सुखमय रहता है । २. यदि शनि पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तो लड़ाई झगड़े में कई बार शरीर पर चोट के निशान लगते हैं । ऐसे क्रॉस व्यक्ति की अकाल मृत्यु होती है ।
( १६६ ) ३. यदि सूर्य क्षेत्र पर क्रॉस का चिह्न हो तो समाज में उसे बहुत अधिक बदनामी का सामना करना पड़ता है । व्यापार में बाधाएं उठाता है तथा इसका भाग्य जीवन-भर इसका सहायक नहीं होता । ४. बुध पर्वत पर यदि क्रॉस का चिह्न दिखाई दे तो वह व्यक्ति धोखे बाज धूर्त तथा ठग होता है । ऐसा व्यक्ति कभी भी विश्वास पात्र नहीं माना जा सकता । ५. यदि चन्द्र क्षेत्र पर क्रॉस का चिह्न हो तो जल में डूबने से उसकी मृत्यु होती है, या जीवन-भर मस्तिष्क सम्बन्धी रोग बने रहते हैं । ६. यदि प्रजापति क्षेत्र पर क्रॉस का चिह्न हो तो वह व्यक्ति आलसी, कायर तथा डरपोक होता है । शत्रुओं से वह हरदम भयभीत रहता है । ७. केतु पर्वत पर क्रास का चिन्ह इस बात का सूचक है कि वह व्यक्ति दुख- मय बड़ा हुआ है तथा उसकी शिक्षा भली प्रकार से नहीं हो सकी है । ८. यदि शुक्र क्षेत्र पर क्रास का चिन्ह हो तो वह प्रेम के मामले में असफल होता है तथा उसकी बदनामी होती रहती है । ऐसे व्यक्ति जीवन-भर निन्दनीय कार्यों में संलग्न रहते हैं । ६. यदि मंगल पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तो निश्चय ही उस व्यक्ति को जेल की यात्रा सहन करनी पड़ती है । ऐसा व्यक्ति लड़ाई झगड़े में विश्वास करता है तथा उसकी मृत्यु आत्महत्या से ही होती है । १०. यदि राहू पर्वत पर क्रॉस का चिह्न दिखाई दे तो उसका यौवनकाल दुःखमय व्यतीत होता है तथा चेचक के रोग से वह व्यक्ति पीड़ित रहता है । ११. यदि गुरु पर्वत के अलावा और कहीं पर भी क्रॉस का चिह्न हो तो उस पर्वत का विपरीत फल मिलने लग जाता है । १२. यात्रा रेखा पर यदि क्रॉस का चिह्न हो तो यात्रा में उसकी आकस्मिक मृत्यु होती है । १३. यदि विवाह रेखा पर क्रॉस का चिह्न दिखाई दे तो उस व्यक्ति का विवाह जीवन में नहीं होता, और यदि होता भी है तो उसका गृहस्थ जीवन अत्यन्त दुख में होता है । १४. सन्तान रेखा पर क्रॉस का चिह्न सन्तान के अभाव का सूचक होता है । १५. स्वास्थ्य रेखा पर क्रॉस का चिह्न व्यक्ति के स्वास्थ्य के पतन का उत्तर- दायी है । १६. यदि भाग्य रेखा पर क्रॉस हो तो जीवन में वह अत्यन्त साधारण जीवन व्यतीत करने को बाध्य होता है । १७. यदि सूर्य रेखा पर क्रॉस हो तो उसकी उन्नति में बराबर बाधाएं बनी रहती हैं ।
( १७० ) १८. यदि हृदय रेखा पर क्रॉस हो तो वह हार्ट अटैक का मरीज होता है तथा बराबर कमजोर बना रहता है । १६. यदि मस्तिष्क रेखा पर क्रॉस का चिह्न हो तो वह जीवन-भर दिमाग सम्बन्धी बीमारियों से परेशान रहता है, तथा अन्त में पागल हो जाता है । २०. यदि जीवन रेखा पर क्रॉस का चिह्न हो तो आयु के उस भाग में वह मरण-तुल्य कष्ट उठाता है । २१. हाथ में छोटा या बड़ा, चौड़ा या पतला, किसी भी प्रकार का क्रास हानिकर ही माना गया है । ३. बिन्दु : हथेली में बिन्दुओं का प्रभाव भी महत्त्वपूर्ण देखा गया है । सफेद बिन्दु हमेशा उन्नतिकारक माने जाते हैं । हथेली में लाल रंग के बिन्दु व्यक्ति की बीमारियों के सूचक होते हैं । पीले रंग के बिन्दु शरीर में रक्त न्यूनता को बताते हैं । यदि हथेली में काले रंग के बिन्दु हों तो लक्ष्मीदायक माने गये हैं । यहां काले रंग के बिन्दुओं से तात्पर्य हथेली में पाये जाने वाले तिलों या तिल से है । आगे की पंक्तियों में इन काले बिन्दुओं या तिलों के बारे में विचार स्पष्ट कर रहा हूँ : १. यदि तिल हथेली में हो तथा मुट्ठी बन्द करने पर वह मुट्ठी में रहता हो तो ऐसे व्यक्ति के पास धन की कमी [चित्र: बिन्दु] नहीं रहती । २. यदि मुट्ठी में तिल न आता हो मुट्ठी के बाहर ही रहता हो तो ऐसे व्यक्ति के पास धन आता तो अवश्य है परन्तु वह टिक नहीं पाता ऐसा समझना चाहिए । ३. यदि काला तिल गुरु पर्वत पर हो तो उसके विवाह में बराबर बाधाएं आती हैं । समाज में प्रेम के क्षेत्र में उसे बदनामी उठानी पड़ती है । ऐसा व्यक्ति जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर पाता । ४. यदि शनि क्षेत्र पर काला तिल हो तो प्रेम के क्षेत्र में वह बराबर बदनाम रहता है । गृहस्थ जीवन दुःखमय होता है तथा पति या पत्नी में से कोई एक आग में जलकर समाप्त होता है । ५. यदि सूर्य पर्वत पर काला तिल हो तो उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा में बहुत बड़ा धक्का लगता है तथा वह समाज में निन्दनीय कार्य करने को बाध्य होता है ।
( १७१ ) ६. यदि बुध क्षेत्र पर काला तिल हो तो वह व्यक्ति कुटिल तथा धोखेबाज होता है । ऐसे व्यक्ति को व्यापार में हानि उठानी पड़ती है । ७. यदि चन्द्र क्षेत्र पर काला तिल हो तो व्यक्ति का विवाह विलम्ब से होता है । जीवन में उसे एक से अधिक बार जलघात से भी पीड़ित होना पड़ता है । ८. यदि प्रजापति क्षेत्र पर तिल की उपस्थिति हो तो उसके शरीर का एक अंग शस्त्र से कट जाता है । ६. केतु क्षेत्र पर काला तिल व्यक्ति के बचपन को दुखमय बनाता है । १०. यदि शुक्र क्षेत्र पर काला तिल हो तो वह व्यक्ति कामी होता है तथा जीवन भर उसके गुप्तांगों में रोग रहता है । ११. राहू क्षेत्र पर यदि काला तिल हो तो यौवनावस्था में उसे आर्थिक हानि उठानी पड़ती है । १२. जीवन रेखा पर यदि काला तिल हो तो व्यक्ति को लम्बे समय तक टी०बी० का मरीज रहना पड़ता है । १३. यदि मस्तिष्क रेखा पर काला तिल हो तो उसे सिर पर गम्भीर चोट लगती है तथा मस्तिष्क से सम्बन्धित रोग बराबर बने रहते हैं । १४. यदि हृदय रेखा पर काला तिल हो तो वह व्यक्ति दुर्बल हृदय वाला होता है । १५. सूर्य रेखा पर काला तिल व्यक्ति की उन्नति में बराबर बाधाएं डालता है । १६. यदि हथेली में भाग्य रेखा पर काला तिल हो तो उसका जीवन दुर्भाग्य- पूर्ण ही रहता है । १७. स्वास्थ्य रेखा पर काला तिल जीवन-भर उसके स्वास्थ्य को कमजोर बनाये रखता है । १८. विवाह रेखा पर काले तिल की उपस्थिति विवाह में बाधाएं पैदा करती है । १९. यदि मंगल रेखा पर तिल हो तो ऐसा व्यक्ति कायर तथा कमजोर हृदय वाला होता है । २०. चन्द्र रेखा पर तिल मानव की उन्नति में बाधाएं देता है । २१. यदि यात्रा रेखा पर तिल हो तो यात्रा में ही उस व्यक्ति की मृत्यु होती है । २२. अनामिका उंगली पर तिल का चिह्न व्यापार में असफलता देता है । २३. यदि कनिष्ठिका उंगली पर काला तिल हो तो वह व्यक्ति व्यापार में हानि उठाता है तथा व्यापार का विस्तार नहीं कर पाता ।
( १७२ ) २४. मध्यमा उंगली पर यदि तिल हो तो उसके भाग्य में बराबर बाधाएं बनी रहती हैं तथा भाग्य उन्नति के लिए उसे बराबर भटकना पड़ता है । २५. यदि तर्जनी उंगली पर तिल का चिह्न हो तो नौकरी में पद त्याग करना पड़ता है । एवं बदनामी का सामना करना पड़ता है । ४. वृत्त : हथेली में जो छोटे-छोटे गोल घेरे पाये जातेहैं उसे वृत्त या सूर्य या कन्दुक कहते हैं । १. यदि हथेली में गुरु पर्वत पर वृत्त का चिह्न हो तो ऐसा व्यक्ति प्रभावशाली होता है तथा निश्चय ही अपने प्रयत्नों से उच्च पद प्राप्त करने में सफल रहता है । ऐसे व्यक्ति को ससुराल से भी विशेष धन प्राप्ति होती है । २. यदि शनि पर्वत पर वृत्त का चिह्न हो तो उस व्यक्ति को अनायास धन लाभ होता है तथा लॉटरी, जुए या सट्टे से विशेष धन प्राप्त करता है । ३. यदि सूर्य पर्वत पर वृत्त हो तो वह व्यक्ति उच्च [वृत्त] एवं सात्विक विचारों वाला होता है तथा विश्व में वह प्रसिद्ध होता है । ४. बुध पर्वत पर वृत्त का चिह्न व्यक्ति को व्यापार में भारी सफलता देता है । ऐसे व्यक्ति का जीवन विलासितापूर्ण होता है । ५. प्रजापति क्षेत्र पर वृत्त का चिन्ह मानव को कमजोर तथा आलसी बना देता है । ६. यदि चन्द्र पर्वत पर वृत्त का चिन्ह हो तो उसका स्वास्थ्य कमजोर रहता है तथा जल में डूबने से उसकी मृत्यु होती है । ७. यदि शुक्र पर्वत पर वृत्त का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति भोगी तथा कामी होता है । कई बार ऐसे व्यक्ति नपुंसक भी होते देखे गये हैं । ८. मंगल क्षेत्र पर वृत्त की उपस्थिति व्यक्ति को कायर दिल वाला बना देती है । ६. यदि जीवन रेखा पर वृत्त का चिन्ह हो तो उसकी आंखें कमजोर होती हैं । १०. मस्तिष्क रेखा पर वृत्त मस्तिष्क सम्बन्धी रोगों को जन्म देता है । ११. हृदय रेखा पर वृत्त का चिन्ह होने से व्यक्ति हृदय रोग से पीड़ित रहता है ।
( १७३ ) १२. सूर्य रेखा पर यदि वृत्त का चिन्ह हो तो वह अपने जीवन में असाधारण सफलता प्राप्त करता है तथा भौतिक दृष्टि से वह पूर्ण सुखी एवं सम्पन्न होता है । १३. भाग्यरेखा पर वृत्त का चिन्ह व्यक्ति को भाग्यहीन बनाता है तथा जीवन-भर उसे परेशानियां भोगनी पड़ती हैं । १४. यदि यात्रा रेखा पर वृत्त का चिन्ह हो तो यात्रा में वह मरण-तुल्य कष्ट उठाता है । ५. द्वीप : हथेली में यह चिन्ह कहीं पर भी दिखाई दे सकता है । जिस स्थान पर भी यह चिन्ह होता है उस स्थान के प्रभाव को यह कमजोर करने में ही सहायक होता है । १. गुरु पर्वत पर यदि द्वीप का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति के आत्म-विश्वास में कमी आती है तथा उसे अपने आप पर ही भरोसा नहीं रहता । २. शनि पर्वत पर द्वीप का चिन्ह व्यक्ति को पग-पग पर परेशानियां देने में सहायक होता है । ३. यदि रवि पर्वत पर द्वीप का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति हमेशा निराशावादी भावना लिये हुए जीवित रहता है तथा उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है । ४. बुध पर्वत पर द्वीप का चिन्ह व्यापार या विज्ञान से सम्बन्धित कार्यों में हानि पहुंचाता है । ऐसे व्यक्ति को समाज में निन्दा का पात्र बनना पड़ता है । ५. यदि हथेली में चन्द्र पर्वत पर द्वीप हो तो उसका स्वभाव क्रूर तथा निर्दयी होता है । ६. शुक्र पर्वत पर द्वीप का चिन्ह पारिवारिक जीवन में घातक माना गया है । जीवन में चारों ओर से उसे निराशा का सामना करना पड़ता है । ७. जीवन रेखा पर यदि द्वीप हो तो व्यक्ति सैक्स की दृष्टि से कमजोर होता है । ८. मस्तिष्क रेखा पर द्वीप दिमाग से सम्बन्धित रोगों से पीड़ित रखता है । ९. हृदय रेखा पर यदि द्वीप का चिन्ह हो तो उसके जीवन में बराबर हृदय रोग बना रहता है । १०. यदि सूर्य रेखा पर द्वीप हो तो उसे जीवन में कई बार बदनामियों का सामना करना पड़ता है ।
( १७४ ) ११. भाग्य रेखा पर द्वीप का चिन्ह भाग्यहीनता की ओर संकेत करता है तथा उसे जीवन में जरूरत से ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है । १२. यदि यात्रा रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति की मृत्यु यात्रा में ही होती है । १३. चन्द्र पर्वत पर द्वीप का चिन्ह व्यक्ति के दिमाग को कुन्द बना देता है । १४. विवाह रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो तो शीघ्र ही प्रिय की मृत्यु का आघात सहन करना पड़ता है । १५. स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो तो उसे जीवन में कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता है । ६. वर्ग : चार भुजाओं से घिरे हुए स्थान या क्षेत्र को वर्ग कहते हैं । कुछ लोग इसको समकोण के नाम से भी पुकारते हैं । १. यदि गुरु पर्वत पर वर्ग का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति जीवन में सफल प्रशासक होता है । उसका सम्मान तथा कीर्ति पूरे संसार में फैलती है। एक साधारण घराने में जन्म लेकर के भी अत्यन्त उच्च पद पर पहुंचता है । २. यदि शनि पर्वत पर वर्ग का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति बार-बार मृत्यु के मुंह से आश्चर्यजनक रूप से बच जाता है । ३. यदि सूर्य क्षेत्र पर वर्ग का चिन्ह हो तो वह धन, मान, यश, पद, प्रतिष्ठा की दृष्टि से अत्यन्त उच्च स्तरीय जीवन व्यतात करता है, और उसके कार्यों की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैलती है । ४. यदि बुध पर्वत पर वर्ग हो तो वह जेल जाने से बच जाता है । ५. चन्द्र पर्वत पर वर्ग का चिन्ह उसकी कल्पना शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है । ऐसा व्यक्ति गम्भीर दयालु तथा विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य से कार्य करने वाला होता है । ६. यदि केतु पर्वत पर वर्ग हो तो ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय शीघ्र ही होता है तथा उसका यौवनकाल अत्यन्त सुखमय व्यतीत होता है । ७. यदि शुक्र पर्वत पर वर्ग हो तो वह प्रेम के क्षेत्र में सावधानी बरतता है और जीवन में उसे बदनामी का सामना नहीं करना पड़ता । ८. यदि मंगल पर्वत पर वर्ग का चिन्ह हो तो वह अपने क्रोध को सीमित रखने में सफल होता है तथा उसे जीवन में बहुत ही कम क्रोध आता है ।
३. तृतीय खण्ड: ग्रह-पर्वत लक्षण (गुरु, शनि, सूर्य, बुध, शुक्र व मंगल पर्वत)
( १७५ ) ९. यात्रा रेखा पर वर्ग की उपस्थिति इस बात की सूचक होती है कि वह जीवन में कई बार यात्राएं करेगा तथा यात्राओं से विशेष धन लाभ लेगा । १०. चन्द्र रेखा पर वर्ग की उपस्थिति मानव की सभी प्रकार की उन्नति में सहायक होती है । ११. यदि विवाह रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसकी पत्नी पढ़ी-लिखी, सुन्दर, सुशील तथा शिक्षित होती है । तथा उसे ससुराल से विशेष धन लाभ होता है । १२. यदि स्वास्थ्य रेखा पर वर्ग हो तो उसका व्यक्तित्व आकर्षक और जीवन भर स्वास्थ्य अनुकूल बना रहता है । १३. यदि भाग्य रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय छोटी अवस्था में ही हो जाता है । १४. सूर्य पर्वत पर अथवा सूर्य रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसके जीवन में यश, मान, पद, प्रतिष्ठा आदि की कोई कमी नहीं रहती । १५. यदि हृदय रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसका गृहस्थ जीवन सुखमय होता है तथा वह हृदय से परोपकारी एवं दयालु होता है । १६. मस्तिष्क रेखा पर वर्ग का चिन्ह इस बात का सूचक है कि ऐसे व्यक्ति का दिमाग सन्तुलित तथा निरन्तर क्रियाशील है । १७. यदि जीवन रेखा पर वर्ग का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति दीर्घायु होता है । १८. यदि राहू पर्वत पर वर्ग का चिन्ह हो तो उसका काफी समय साधु के रूप में जंगलों में व्यतीत होता है । वस्तुतः वर्ग का चिन्ह हथेली में कहीं पर भी हो वह पूर्णतः शुभ माना जाता है । ७. जाल : खड़ी रेखाओं पर आड़ी रेखाएं होने से एक प्रकार का जाल-सा बन जाता है। यह व्यक्ति की हथेलियों में सभी स्थानों पर देखने को मिल जाता है। इन स्थानों पर पड़े इन जालों का फलादेश निम्न प्रकार से है : १. यदि गुरु क्षेत्र पर जाल चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति क्रूर, निर्दयी, स्वार्थी, तथा घमण्डी होता है । २. यदि शनि पर्वत पर जाल का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति आलसी होता है तथा समाज में कंजूस होने की वजह से बदनामी सहन करनी पड़ती है । ३. यदि यह रेखा जाल सूर्य पर्वत पर हो तो समाज में बार-बार निन्दा का पात्र बनना पड़ता है । जाल
( १७६ ) ४. यदि बुध पर्वत पर जाल हो तो वह व्यक्ति अपने ही किये गये कार्यों पर पछताता है तथा परेशानियां उठाता है । ५. यदि प्रजापति क्षेत्र पर जाल का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति के हाथ से अवश्य ही हत्या होती है तथा उसे कारावास का दण्ड भोगना होता है । ६. यदि चन्द्र क्षेत्र पर जाल का चिन्ह हो तो वह अस्थिर स्वभाव वाला तथा असन्तुष्ट व्यक्तित्व का स्वामी होता है । ७. यदि केतु पर्वत पर जाल हो तो वह जीवन भर बीमारियों से परेशान रहता है । ८. यदि शुक्र पर्वत पर जाल हो तो वह व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भोगी तथा लम्पट होता है । समाज में उसका किसी प्रकार का कोई स्थान नहीं होता । ६. यदि मंगल क्षेत्र पर जाल हो तो वह जीवन भर मानसिक दृष्टि से अशान्त बना रहता है । १०. यदि राहू पर्वत पर जाल का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति दुर्भाग्य पूर्ण जीवन व्यतीत करने के लिये बाध्य होता है । ११. यदि मणिबन्ध रेखा पर हो तो उसका जरूरत से ज्यादा पतन होता है । १२. हथेली में कहीं पर भी जाल का चिन्ह अनुकूल फल देने वाला नहीं माना जाता । ८. नक्षत्र या तारा : हथेली में कई स्थानों पर सूक्ष्मतापूर्वक देखने से नक्षत्र या तारे दिखाई देते हैं । अलग-अलग स्थानों में होने से इनके फलादेश में भी अन्तर आ जाता है । १. यदि गुरु पर्वत पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति निश्चय ही अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है । समाज में धन, मान, पद, प्रतिष्ठा, आदि की दृष्टि से उसके जीवन में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती । वह निरन्तर उन्नति की ओर अग्रसर रहता है तथा सम्माननीय पद प्राप्त कर समाज में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है । २. यदि शनि पर्वत पर नक्षत्र या तारे का चिन्ह हो तो ऐसे व्यक्ति का भाग्योदय शीघ्र ही होता है । वह अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहता है तथा जीवन में पूर्ण यश तथा सम्मान प्राप्त करने में सफल होता है ।
( १७७ ) ३. यदि सूर्य पर्वत पर नक्षत्र हो तो ऐसे व्यक्ति के जीवन में पूर्ण धन लाभ होता है। भौतिक दृष्टि से उसके जीवन में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती । ४. शारीरिक तथा मानसिक दृष्टि से पूर्ण स्वस्थ रहता है । ५. यदि बुध पर्वत पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति एक सफल व्यापारी तथा उच्च कोटि की योजना बनाने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति एक सफल कवि तथा साहित्यकार भी हो सकता है । ६. यदि केतु पर्वत पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति का बचपन अत्यन्त सुखमय बीतता है तथा जीवन में भौतिक दृष्टि से किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती । ७. यदि शुक्र पर्वत पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति भोगी होता है । पत्नी के अलावा अन्य स्त्रियों से भी सम्पर्क रहता है, तथा जीवन में उसकी पत्नी अत्यन्त सुन्दर तथा स्वस्थ रहती है। ८. मंगल पर्वत पर यदि नक्षत्र का चिन्ह हो तो ऐसा व्यक्ति धीरजवान तथा साहसी होता है। युद्ध में अतुलनीय साहस दिखाने से उसे देश व्यापी सम्मान मिलता है । ६. यदि राहू पर्वत पर चिन्ह हो तो हमेशा भाग्य साथ देता है तथा जीवन में पूर्ण यश तथा सम्मान प्राप्त करता है । १०. यात्रा रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह इस बात का सूचक होता है कि उस व्यक्ति की मृत्यु घर से दूर तीर्थ स्थान पर होती है । ११. चन्द्र रेखा पर यदि तारे का चिन्ह हो तो वह पेट संबंधी रोगों से ग्रस्त रहता है तथा थोडे बहुत रूप में वह बराबर बीमार बना रहता है । १२. यदि मंगल रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति की हत्या होती है। १३. यदि विवाह रेखा पर नक्षत्र या तारे का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति के विवाह में कई प्रकार की बाधाएं आती हैं तथा उसका गृहस्थ जीवन सुखमय नहीं कहा जा सकता । १४. यदि स्वास्थ्य रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य जीवन भर कमजोर बना रहता है। तथा उसकी मृत्यु अत्यन्त दुखदायी परिस्थितियों में होती है। १५. यदि सूर्य रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति को व्यापार में विशेष सफलता मिलती है तथा आकस्मिक धन प्राप्त के योग जीवन मे कई बार होते हैं।
( १७८ ) १६. यदि हृदय रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो वह हृदय से संबंधित रोगों से पीड़ित रहता है । १७. यदि मस्तिष्क रेखा पर नक्षत्र या तारे का चिन्ह हो तो वह जीवन भर स्नायु संबंधी रोगों से ग्रस्त रहता है । १८. यदि आयु रेखा पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति की यौवनकाल में ही आकस्मिक मृत्यु हो जाती है । १९. यदि अंगूठे पर नक्षत्र का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति परिश्रमी, सहनशील तथा सफल व्यक्तित्व का धनी होता है । २०. तर्जनी उंगली पर नक्षत्र का चिन्ह सभी प्रकार से शुभ माना गया है । २१. मध्यमा तथा अन्य उंगलियों पर नक्षत्र के चिन्ह से उससे संबंधित ग्रहों को विशेष बल मिलता है । वस्तुतः हाथ में नक्षत्र या तारे के चिन्ह का सावधानी पूर्वक अध्ययन करना चाहिए । ये चिन्ह व्यक्तित्व के निर्माण में तथा भविष्यकथन में बहुत अधिक सहायक होते हैं ।
काल-निर्धारण
पीछे के अध्यायों में मैंने हस्त रेखा से संबंधित तथ्य स्पष्ट किए हैं, साथ ही साथ सहायक रेखाओं तथा हस्त चिन्हों के बारे में भी जानकारी प्रस्तुत की है। परन्तु इसके साथ ही यह प्रश्न भी व्यक्ति के दिमाग में स्वाभाविक रूप से पैदा होता है कि जीवन में अमुक घटनाएं घटित होंगी, यह तो हस्तरेखा ज्ञान से स्पष्ट हो जाता है; परन्तु ये घटनाएं किस अवधि में घटित होंगी इसको समझना और जानना भी बहुत जरूरी है। व्यक्ति के जीवन में ये प्रश्न निरन्तर चक्कर लगाते रहते हैं कि भाग्योदय कब होगा, किस प्रकार के कार्य से भाग्योदय होगा, भाग्योदय इसी देश में होगा या बिदेश में होगा, विदेश यात्रा कब है नौकरी कब मिलेगी, व्यापारमें स्थिरता कब आ सकेगी, व्यापार में कितना लाभ होगा और कब होगा, किस वस्तु या किस कार्य से व्यापार में लाभ सम्भव है, आय वृद्धि कब होगी, नौकरी में प्रमोशन कब होगा, सन्तान सुख कैसा मिलेगा, विवाह कब होगा - आदि ऐसी सैकड़ों बातें हैं जो मानव मस्तिष्क में निरन्तर घुमड़ती रहती हैं इन सभी के लिये यह बहुत जरूरी है कि हम काल निर्धारण प्रक्रिया को समझें और उसके माध्यम से भविष्य कथन को स्पष्ट कर सकें। पीछे के पृष्ठों में मैंने हृदय रेखा, भाग्य रेखा, स्वास्थ्य रेखा, मस्तिष्क रेखा तथा जीवन रेखा आदि के बारे में जानकारी दी है। इनमें जीवन रेखा का सर्वप्रथम अध्ययन जरूरी है। जैसा कि मैं पीछे बता चुका हूं कि अंगूठे और तर्जनी के बीच में से जीवन रेखा प्रारंभ होकर शुक्र पर्वत को घेरती हुई मणिबन्ध तक पहुंचती है। यह जीवन रेखा कहलाती है। पहले अभ्यास के लिये किसी धागे के माध्यम से जहां से यह जीवन रेखा प्रारंभ होती है वहां से लगाकर जीवन रेखा के अन्तिम स्थल अर्थात् मणिबन्ध की पहली रेखा तक नापिये और इस पूरे धागे को १०० वर्ष का समझकर इसके बराबर १० हिस्से कर लीजिये। इस प्रकार एक हिस्सा १० वर्षों का प्रतिनिधित्व करेगा। इन १० वर्षों में भी जो दूरी है उसको यदि १० भागों में बांटें तो प्रत्येक भाग एक वर्ष का प्रतिनिधित्व करेगा। यद्यपि ये चिन्ह नजदीक हो सकते हैं, परन्तु यह प्रत्येक
( १८० ) चिन्ह एक वर्ष को सूचित करेगा । अभ्यास के बाद चिन्ह लगाने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी और हाथ देखकर ही यह अनुमान हो सकेगा कि यह जीवन रेखा कितने वर्ष का प्रतिनिधित्व करती है। यदि जीवन रेखा बीच में ही समाप्त हो जाती है, तो आयु के उस भाग में जीवन समाप्त समझना चाहिए । इससे यह भली भाँति ज्ञात हो सकेगा कि व्यक्ति की आयु कितने वर्ष की है। इसी प्रकार जीवन रेखा पर जहाँ भी क्रॉस का चिन्ह या जहां भी रेखा कमजोर पड़ी है आयु के उस भाग में बहुत बड़ी बीमारी आयेगी या मरण तुल्य कष्ट भोगना पड़ेगा, ऐसा समझना चाहिए। पूरे हाथ में घटनाओं को सूचित करने वाली जीवन रेखा ही है। अन्य जो भी रेखाएं हैं, उन पर बिन्दु लगा कर उससे एक सीधी रेखा जीवन रेखा की ओर खींचिये, जिस बिन्दु पर खींची हुई रेखा मिलेगी; आयु के उस भाग में ही वह घटना घटित होगी। उदाहरण के लिये भाग्य रेखा के मध्य में कटा हुआ हिस्सा है तो कटे हुए स्थान से यदि हम रेखा खींचें और वह रेखा जीवन रेखा के ४२वें वर्ष के बिन्दु से मिलती हो तो इससे यह सिद्ध हो जाता है कि इस व्यक्ति की ४२वें वर्ष में भाग्य-बाधा आयेगी और भाग्य से संबंधित कोई बहुत बड़ा कष्ट उठाना पड़ेगा। इसी प्रकार आप अन्य रेखाओं पर पाये जाने वाले चिन्हों का फल ज्ञात कर सकते हैं एवं उन घटनाओं को घटित होने का समय भी स्पष्ट कर सकते हैं। धीरे-धीरे इस संबंध में अभ्यास करना चाहिए। अभ्यास के बाद तो मात्र हथेली पर एक झलक पड़ने पर ही संबंधित घटना और उसका समय ज्ञात हो सकता है। वस्तुतः एक सफल भविष्यवक्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ तभी माना जाता है जबकि वह घटनाओं का समय सही-सही रूप में स्पष्ट कर सके और इसके लिये मैंने ऊपर बिन्दु स्पष्ट कर दिये हैं।
हस्त-चित्र लेने की रीति
मेरे केन्द्र में हमेशा सैकड़ों पत्र आते हैं और उनका यह आग्रह रहता है कि हस्त-चित्रों के माध्यम से सही भविष्यफल स्पष्ट करके भेजा जाए। इस केन्द्र की सेवाएं देश में तथा विदेशों में सभी लोगों को सुलभ हैं और मेरे लिये यह प्रसन्नता का विषय है कि लोगों ने इस सेवा का भरपूर लाभ उठाया है। यद्यपि हस्तचित्रों की अपेक्षा व्यक्तिगत रूप से हाथ दिखाना और उससे भविष्य-फल ज्ञात करना ज्यादा अनुकूल होता है। क्योंकि इसके माध्यम से पर्वतों का उभार और छोटी से छोटी रेखाओं को भली प्रकार से जाना जा सकता है, परन्तु यह सभी के लिये सुलभ नहीं है। जो दूर हैं, या जो विदेशों में हैं उनके लिये हस्तचित्र ही एक ऐसा माध्यम होता है जिसके द्वारा वे अपना भविष्यफल ज्ञात कर सकते हैं। जहां तक मेरा अनुभव है एक अच्छे कैमरे से ही हाथ का सही-सही फोटो लिया जा सकता है और इसमें भी ग्रहों के पर्वतों का उभार देखा जा सकता है। इसके साथ ही कैमरे की आंख से छोटी से छोटी रेखा भी छिपी नहीं रहती और हथेली में सभी रेखाएं पूर्ण रूप से फोटो में आ जाती हैं जिसके माध्यम से सही-सही भविष्यफल स्पष्ट किया जा सकता है। मेरी राय में जो सही भविष्यफल चाहते हैं, उन्हें अपने दोनों हाथों के फोटो कुशल फोटोग्राफर से खिंचवा कर भेजने चाहिए। जहां फोटो की सुविधा न हो तो वे कागज पर हस्तचित्र उतार करके भी भेज सकते हैं। परन्तु इसके बारे में बहुत अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। जैसे— १. कागज सफेद हो तथा खुरदरा नहीं होना चाहिए। यह बात भी ध्यान रखनी चाहिए, कि कागज न तो बहुत पतला हो और न चिकना हो। स्याही सोखने वाला कागज भी नहीं लिया जाना चाहिए। २. कागज पर चित्र उतारते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कागज की लम्बाई और चौड़ाई अपने आप में पूरी हो। हथेली का कोई भी हिस्सा या उंगली का कोई भी हिस्सा कागज के बाहर नहीं रहना चाहिए। ३. चित्र लेते समय हाथ साबुन से धुले हुए होने चाहिए तथा उंगली में किसी प्रकार की कोई अंगूठी पहनी हुई नहीं होनी चाहिए।
( १८२ ) विधियां नीचे की पंक्तियों में मैं तीन चार विधियों का परिचय दे रहा हूँ जिनके माध्यम से हाथों का स्पष्ट चित्र ज्ञात किया जा सकता है । १. धुंयें के द्वारा चित्र उतारना :- एक सफेद चिकना और थोड़ा सा कड़ा कागज लें जो कि व्यक्ति की हथेली से बड़ा हो और पूरा हाथ उस कागज पर रखते समय चारों तरफ ३-३ उंगल खाली रह सके । इसके बाद एक कटोरी में शुद्ध कपूर की टिकियाएं रखकर उस में लौ या आग या माचिस लगा देनी चाहिए और कागज को दोनों हाथों से पकड़कर कटोरी के थोड़ा ऊपर रखना चाहिए पर इसमें यह साव- धानी बरतनी बहुत जरूरी है कि कपूर की आग उस कागज को पकड़ न ले या आंच से कागज जल न जाय । हमारा उद्देश्य मात्र इतना ही है कि उससे उत्पन्न धुएं से कागज के नीचे का हिस्सा काला हो जाए । धीरे-धीरे कागज को इधर-उधर घुमाते रहना चाहिए जिससे चारों तरफ से वह काला हो जाय । साथ ही वह कागज सुरक्षित भी रहे । यह भी ध्यान रखें कि बहुत जल्दी उस कागज को अलग न ले-लें बल्कि उस पर धुएं की मोटी परत जमने दें । इसमें सावधानी यह बरतें कि सभी जगह धुएं की परत बराबर जमें जिससे पूरे कागज में एक रूपता आ पायेगी । यदि कटोरी में एक कपूर की टिकिया समाप्त हो जाए तो उसमें दूसरी टिकिया डाल दें । यह कार्य प्रारंभ करने से पूर्व ८-१० टिकियाएं अपने पास निकाल कर रख लेनी चाहिए । जब कागज के नीचे का हिस्सा सभी जगह बराबर काला हो जाए तब उसे पलट कर किसी साफ चिकनी मेज पर रख दें । मेज पर कपड़ा बिछा हुआ नहीं होना चाहिए अर्थात् कागज के नीचे ठोस धरातल और साथ ही साथ चिकना धरातल होना आवश्यक है । कागज पर जो कालिख लगी हुई है वह ऊपर की ओर हो । अब आप अपना हाथ फैला कर उस कागज के ऊपर जमा दें । यह ध्यान रखें कि आपकी सभी उंगलियां तथा मणिबन्ध तक का हिस्सा उस कागज पर पूरी तरह से आ जाए । अब आप अपने हाथ को दबाव दें जिससे आपके हाथ की सभी रेखाएं उस कागज पर आ जाए । अब आप बिना हिलाये अपने हाथ को सीधे ऊपर उठा लें । आप देखेंगे कि आपके हाथ का चित्र और हथेली की प्रत्येक छोटी से छोटी रेखा कागज पर सही रूप में उत्तर आई है । यदि कागज के बीच के हिस्से में नीचे छोटा सा रूमाल रख दिया जाए और रूमाल वाले भाग पर आपकी हथेली का बीच का हिस्सा टिके तो ज्यादा उचित रहेगा और कोई भी स्थान खाली नहीं रहेगा ।
( १८३ ) अब इस कागज के एक कोने पर नाम, पता, जन्म तारीख, तथा हस्तचित्र लेने की तारीख लिख कर उस पर एक सफेद कागज रख दें जिससे कि बीच की रेखाएं मिट न जाएं। अब इस कागज को सावधानी के साथ मोड़कर आप हस्त रेखा विशेषज्ञ के पास भविष्यफल प्राप्त करने के लिये भेज सकते हैं। २. प्रेस की स्याही से चित्र लेना :—प्रेस में जहां पुस्तकों की छपाई होती है वहां एक बड़ा-सा रोलर लगा होता है, जिस पर स्याही लगी होती है। जब पुस्तकों की छपाई पूरी हो जाती है तो स्याही गहरी न होकर थोड़ी सी हल्की पड़ जाती है। हमें इस हल्की स्याही का ही प्रयोग करना चाहिए। सबसे पहले एक मेज पर सफेद कागज बिछा लें जिसके बीच में कागज के नीचे की ओर छोटा सा रूमाल समेट कर रख लें। अब आप अपना दाहिना हाथ रोलर पर लगा लें और देख लें कि आपकी पूरी हथेली में स्याही लगी है अथवा नहीं। जब पूरी हथेली पर स्याही लग जाए तो उस स्याही लगे हाथ को सावधानी के साथ उस कागज पर रखकर दबा लें। इसमें भी यह सावधानी बरतें कि अपनी हथेली का मध्य भाग उस रूमाल पर टिके जिससे कि आपके पूरे हाथ का चित्र स्पष्ट रूप से आ सके। जब हाथ जम जाए तब आप हाथों के जोड़ों पर दूसरे हाथ से थोड़ा-थोड़ा दबाव दे दें जिससे कि कोई भी स्थान खाली न रहे। इसके बाद बिना हाथ को हिलाए ऊपर की ओर उठा लें। इस प्रकार आप देखेंगे कि आपके हाथ की रेखाएं भली प्रकार से कागज पर उतर आई हैं। इसी प्रकार आप बायें हाथ का चित्र भी कागज पर उतार लें और कागज पर उतरी स्याही को हवा में दो मिनट सूखने दें। जब सूख जाय तब उस पर नाम, पता व जन्म की तारीख लिखकर हस्तरेखा विशेषज्ञ के पास भविष्यफल जानने के लिये भेज सकते हैं। मेरी राय में प्रत्येक व्यक्ति को तीन-तीन हस्तरेखा चित्र भेजने चाहिए जिससे कि यदि किसी चित्र में कोई कमी रह गई हो तो दूसरे चित्र को देखकर उसके बारे में जाना जा सके। ३. इंक पैड से हस्तचित्र उतारना :—मुहर लगाने के लिये प्रत्येक घर में इंक पैड आसानी से प्राप्त हो सकते हैं। इक पैड के माध्यम से भी हस्तचित्र भली प्रकार से उतारा जा सकता है। इंक पैड से हस्तचित्र उतारने की विधि भी वही है जो कि ऊपर प्रेस की स्याही से हस्त चित्र उतारने की विधि मे स्पष्ट किया है। ४. फोटो द्वारा चित्र लेना:—यह विधि ज्यादा सही एवं प्रामाणिक मानी जा सकती है। इसके लिये कुशल फोटोग्राफर का चुनाव करना चाहिए और यह ध्यान
( १८४ ) रखना चाहिए कि लाइट व्यवस्था इतनी तेज न हो कि छोटी और हल्की रेखाएं उस चकाचौंध में छिप जायें और न लाइट व्यवस्था इतनी हल्की हो कि सूक्ष्म रेखाएं स्पष्ट ही न हो सके। फोटो खिंचवाने से पहले फोटोग्राफर को यह बात अच्छी तरह से समझा देनी चाहिए। साथ ही पूरी हथेली तथा मणिबन्ध तक का फोटो आना चाहिए और फोटो में हाथों की उंगलियां थोड़ी-सी खुली हुई होनी चाहिए अर्थात् एक दूसरे से चिपकी हुई होना ठीक नहीं। फोटो का कागज उत्तम कोटि का होना चाहिए तथा दोनों ही हाथों का एक चित्र या अलग-अलग लिया जा सकता है। मेरी राय में पोस्टकार्ड साइज से छोटा चित्र उपयुक्त नहीं माना जा सकता। ऊपर लिखी चारों पद्धतियों में से कोई भी पद्धति अपना कर व्यक्ति अपने हाथ की रेखाओं का चित्र भविष्यवक्ता के पास भेज कर अपना भविष्यफल सही-सही रूप में ज्ञात कर सकता है।
प'चांगुली देवी
पीछे के अध्यायों में मैंने हाथ की रेखाओं तथा पर्वतों के बारे में विस्तार से स्पष्ट किया है । परन्तु पंचांगुली देवी के बारे में जानकारी स्पष्ट नहीं कर सका हूं । इस अध्याय में इससे सम्बन्धित संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत कर रहा हूं । जिस व्यक्ति को इसके बारे में विस्तार से अध्ययन करना हो उसे मेरी पुस्तक 'हस्तरेखा विज्ञान और पंचांगुली साधना' का अध्ययन करना चाहिए ।
(चित्र शीर्षक: श्री पञ्चाङ्गुली देवी)
पंचांगुली देवी के बारे में अनेक प्राचीन ग्रन्थों में उल्लेख मिलता है और उसमें यह स्पष्ट किया गया है, कि यदि कोई व्यक्ति नियम पूर्वक पंचांगुली देवी की साधना करे तो शीघ्र ही वह सफल भविष्यवक्ता बन सकता है । किसी भी व्यक्ति का हाथ देखते ही उस व्यक्ति का भूत, वर्तमान और भविष्य उसके सामने साकार हो जाता है । साथ ही वह अनेक सूक्ष्म रहस्यों से भी भली भांति परिचित हो जाता है ।
( १८६ ) यह स्पष्ट है कि पाश्चात्य हस्तरेखा विशेषज्ञ कीरो या चीरियो भी पंचांगुली देवी की साधना करते थे। कीरो भारत में लगभग ३ वर्ष तक रहा था और उसने यहां के एक योगी से पंचांगुली साधना का अध्ययन किया था और इसी साधना की वजह से वह विश्वविख्यात हो सका था। मेरा स्वयं का यह अनुभव है कि इसकी साधना से व्यक्ति को हस्तरेखाओं का पूर्ण और सहज ज्ञान हो जाता है। पंचांगुली साधना में शुभ मुहूर्त का होना आवश्यक है। मास : यह साधना किसी भी महीने से प्रारंभ की जा सकती है। पर बैसाख, कार्तिक, आश्विन तथा माघ मास विशेष शुभ माने गये हैं। तिथि : यह साधना शुक्ल पक्ष की द्वितीया, पंचमी, सप्तमी, अष्टमी, दशमी, अथवा पूर्णमासी से प्रारम्भ की जा सकती है। वार : रवि, बुध, गुरु, तथा शुक्रवार इस कार्य को प्रारम्भ करने के लिये श्रेष्ठ माने गये हैं। नक्षत्र : कृतिका, रोहिणी, पुनर्वसु, हस्त, तीनों उत्तरा, अनुराधा, तथा श्रवण नक्षत्र विशेष अनुकूल माने जाते हैं। लग्न : स्थिर लग्न, वृष, सिंह वृश्चिक, कुंभ। स्थान : तीर्थभूमि, गंगा यमुना संगम, नदी का तट, पर्वत गुफाएं तथा स्कंध देव मन्दिर इसके लिये शुभ हैं। पर यदि ये स्थान सुलभ न हों तो घर के एकान्त कमरे का उपयोग किया जा सकता है। पंचांगुली यंत्र : किसी भी तंत्र साधना में आवश्यकता पड़ने पर यंत्र का उपयोग करना आवश्यक होता है। पंचांगुली साधना सिद्ध करने के लिये प्राण प्रतिष्ठा युक्त तंत्र सिद्ध पंचांगुली यंत्र तथा पंचांगुली देवी का चित्र बहुत अधिक आवश्यक है। केन्द्र से सम्पर्क स्थापित करने पर इस प्रकार का यंत्र अथवा चित्र भेजने की व्यवस्था की जा सकती है ।