भारतकोश
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बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ

॥ श्रीहरिः ॥

गीताप्रेस, गोरखपुरका सस्ता, सदा सेवनीय

आत्मकल्याणकारी साहित्य

पुराण-साहित्य—

संक्षिप्त पद्मपुराण
पद्मपुराणका यह संक्षिप्त भाषानुवाद है। भगवान् विष्णुका माहात्म्य विशेषरूपसे वर्णित होनेके कारण वैष्णवोंको यह अधिक प्रिय है। भगवान् श्रीराम तथा श्रीकृष्णके अवतार-चरित्रों एवं उनके परात्पर रूपोंका इसमें विस्तृत वर्णन ज्ञानप्रद है। इसकी कथाएँ अत्यन्त रोचक, शिक्षाप्रद और कल्याणकारी होनेसे इसका पठन-पाठन, अनुशीलन, पारायण आदि श्रेयस्कर हैं। पृष्ठ-संख्या ९०४, रंगीन चित्र १ एवं अनेक रेखा-चित्र।

श्रीहरिवंशपुराण सटीक (महाभारत-खिल भाग)
श्रीहरिवंशपुराण—महाभारतका खिल या प्रकीर्ण भाग है। इसमें भगवान् श्रीहरि (श्रीकृष्ण) के वंशका बृहद् वर्णन है। भगवद्भक्ति तथा भगवान् श्रीकृष्णसे सम्बद्ध इसकी भक्ति, ज्ञान, वैराग्यप्रद अनेक रोचक कथाएँ बड़ी आनन्दप्रद और कल्याणकारी हैं। वंश-वृद्धि या पुत्र-प्राप्तिकी कामनासे विधिपूर्वक 'हरिवंश'-श्रवणका माहात्म्य शास्त्रोंमें बताया गया है। मूल हिन्दी-अनुवाद-सहित, पृष्ठ-संख्या ११४२, भावपूर्ण सुन्दर रंगीन चित्र ८, सजिल्द।

संक्षिप्त श्रीमद्देवीभागवत
सुप्रसिद्ध देवीभागवत-पुराणके इस संक्षिप्त हिन्दी-रूपान्तरमें सच्चिदानन्द परब्रह्मकी मातृ-शक्तिके रूपमें उपासना और आद्याशक्ति भगवतीके तात्त्विक स्वरूपका विवेचनसहित महादेवीकी अद्भुत लीला-कथाओं एवं चरित्रोंका ज्ञानप्रद रोचक वर्णन है। इसके पौराणिक आख्यान एवं सुरुचिपूर्ण चरित्र-कथाएँ कल्याणकारी हैं। सजिल्द, पृष्ठ-संख्या ७०४, बहुरंगे चित्र ८, सादे चित्र १८, रेखा-चित्र १७६ तथा रेखाङ्कित यन्त्र ३, इसकी उल्लेखनीय विशेषताएँ हैं।

श्रीमद्भागवतमहापुराण (दो खण्ड)
सुप्रसिद्ध श्रीमद्भागवतमहापुराण भगवत्प्रेम-रसका छलकता हुआ ऐसा सागर है जिसकी कहीं कोई तुलना नहीं है—'स्वादु स्वादु पदे पदे।' इसमें सकाम-कर्म, निष्काम-कर्म, साधन-ज्ञान, सिद्ध-ज्ञान, साधन-भक्ति, प्रेमा-भक्ति आदि उत्तमोत्तम मोक्षदायक साधन-मार्गोंका रहस्य-विवेचन बड़ी ही मधुरताके साथ किया गया है। मानव-जीवनके चरम और परम लक्ष्य—भगवत्प्राप्ति या आत्म-कल्याणहेतु इस महान् ग्रन्थका पाठ, पारायण, श्रवण, अनुशीलन आदिका आश्रय ही इस घोर कलिकालमें एकमात्र परमोपयोगी साधन है। सम्पूर्ण ग्रन्थ मूल पाठ एवं अनुवादसहित दो खण्डोंमें उपलब्ध है। कुल पृष्ठ-संख्या २०२१, भावमय बहुरंगे चित्र २, सजिल्द, श्रीमद्भागवतकी महिमा, माहात्म्य, पूजन-विधि, आरती एवं पाठके विभिन्न प्रयोग आदि उपयोगी सामग्रीसहित।

॥ श्रीहरिः ॥

गीताप्रेस, गोरखपुरसे प्रकाशित विभिन्न गीताएँ

श्रीमद्भगवद्गीता-तत्त्वविवेचनी—
(टीकाकार-श्रीजयदयालजी गोयन्दका)

श्रीमद्भगवद्गीता साधक संजीवनी टीका—
(टीकाकार-स्वामी रामसुखदासजी महाराज)

गीता-दर्पण— (स्वामी रामसुखदासजी महाराज)
गीता-दर्पण— (पाकेट साइज)
गीता-माधुर्य
गीता-शांकरभाष्य
गीता-चिन्तन— (ले० श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार)
श्रीमद्भगवद्गीता— मूल, पदच्छेद, अन्वय, साधारण भाषाटीका
श्रीमद्भगवद्गीता— माहात्म्यसहित, सटीक मोटे अक्षरोंमें
श्रीमद्भगवद्गीता— श्लोक, साधारण भाषाटीका, टिप्पणी-प्रधान विषय, मोटा टाइप, अजिल्द
श्रीमद्भगवद्गीता— केवल भाषा
श्रीमद्भगवद्गीता— साधारण भाषाटीका, पाकेट साइज
श्रीमद्भगवद्गीता— मूल मोटे अक्षरोंमें
श्रीपञ्चरत्नगीता— (श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णुसहस्रनाम, श्रीभीष्मस्तवराज, श्रीअनुस्मृति, श्रीगजेन्द्रमोक्षके मूल-पाठ)
श्रीमद्भगवद्गीता— श्रीविष्णुसहस्रनामसहित छोटा साइज
गीताताबीजी— मूल

॥ श्रीहरिः ॥

गीताप्रेस, गोरखपुरसे

प्रकाशित

उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्अन्वय, हिंदी व्याख्यासहित
ईशावास्योपनिषद्हिंदी अनुवाद शांकर भाष्यसहित
केनोपनिषद्( ,, ,, )
कठोपनिषद्( ,, ,, )
माण्डूक्योपनिषद्( ,, ,, )
मुण्डकोपनिषद्( ,, ,, )
प्रश्नोपनिषद्( ,, ,, )
तैत्तिरीयोपनिषद्( ,, ,, )
ऐतरेयोपनिषद्( ,, ,, )
श्वेताश्वतरोपनिषद्( ,, ,, )
[मुद्रा / Seal:
K. P. SABHA AMBRI...
LIBRARY
No ............
Date..........
JAMMU]

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मिलनेका पता

गीताप्रेस, पो० गीताप्रेस
(गोरखपुर)