बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
( १३७८ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | ब्रा० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| स एष संवत्सरः प्रजा० ... | १ | ५ | १४ | ३५८ |
| स ऐक्षत यदि वा ... | १ | २ | ५ | ७५ |
| स त्रेधात्मानं व्यकु० ... | १ | २ | ३ | ६६ |
| स नैव व्यभवत्तच्छ्रेयो० ... | १ | ४ | १४ | २६२ |
| स नैव व्यभवत्स विश० ... | १ | ४ | १२ | २६० |
| स नैव व्यभवत्स शौद्रं ... | १ | ४ | १३ | २६१ |
| समानमा सांजीवीपुत्रात् ... | ६ | ५ | ४ | १३६३ |
| स य इच्छेत्पुत्रो मे ... | ६ | ४ | १४ | १३५० |
| स य इमां्ँ स्त्रींल्लोकान् ... | ५ | १४ | ६ | १२३४ |
| स यः कामयेत ... | ६ | ३ | १ | १३१६ |
| स यत्रायमणिमानं न्येति ... | ४ | ३ | ३६ | १०१६ |
| स यत्रायमात्माबल्यं ... | ४ | ४ | १ | १०२४ |
| स यत्रैतत्स्वप्नया ... | २ | १ | १८ | ४४३ |
| स यथा दुन्दुभेर्हन्यमा० ... | २ | ४ | ७ | ५५४ |
| ” ” ... | ४ | ५ | ८ | ११३५ |
| स यथाऽऽर्द्रेधाग्नेरभ्याहितस्य ... | ४ | ५ | ११ | ११३६ |
| स यथाऽऽर्द्रेधाग्नेरभ्याहितात् ... | २ | ४ | १० | ५५७ |
| स यथा वीणायै वाद्य० ... | ४ | ५ | १० | ११३५ |
| ” ” ... | २ | ४ | ९ | ५५६ |
| सं यथा शङ्खस्य धमाय० ... | २ | ४ | ८ | ५५५ |
| ” ” ... | ४ | ५ | ९ | ११३५ |
| स यथा सर्वासामपाँ् ... | २ | ४ | ११ | ५६१ |
| ” ” ... | ४ | ५ | १२ | ११३६ |
| स यथा सैन्धवखिल्य ... | २ | ४ | १२ | ५६६ |
| स यथा सैन्धवघनो ... | ४ | ५ | १३ | ११३८ |
| स यथोर्णनाभि० ... | २ | १ | २० | ४५७ |
| स यामिच्छेत्कामयेत ... | ६ | ४ | ९ | १३४५ |
| स यो मनुष्याणाँ् ... | ४ | ३ | ३३ | १००४ |
| सलिल एको द्रष्टाद्वैतो ... | ४ | ३ | ३२ | १००१ |
| स वा अयमात्मा ब्रह्म ... | ४ | ४ | ५ | १०४१ |
| स वा अयमात्मा सर्वेषां ... | २ | ५ | १५ | ५६५ |
| स वा अयं पुरुषो जाय० ... | ४ | ३ | ८ | ६२१ |
| स वा एष एतस्मिन्सु० ... | ४ | ३ | १७ | ६५२ |
| स वा एष...संप्रसादे ... | ४ | ३ | १५ | ६४४ |
| स वा एष एतस्मिन् स्वप्नान्ते... | ४ | ३ | ३४ | १०१३ |
| स वा एष एतस्मिन् स्वप्ने ... | ४ | ३ | १६ | ६५१ |
( १३७६ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | ब्रा० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| स वा एष महानज आत्माजरो... | ४ | ४ | २५ | ११२४ |
| स वा...आत्मान्नादो ... | ४ | ४ | २४ | ११२२ |
| स वा...आत्मा योऽयं ... | ४ | ४ | २२ | १०६३ |
| स वै नैव रेमे तस्मादेकाकी न रमते | १ | ४ | ३ | १७५ |
| स वै वाचमेव प्रथमामत्यवहत्सा... | १ | ३ | १२ | १२८ |
| स ह प्रजापतिरीक्षांचक्रे ... | ६ | ४ | २ | १३३६ |
| स होवाच गार्ग्यो य एवायमग्नौ... | २ | १ | ७ | ४१३ |
| स होवाच...एवायमप्सु ... | २ | १ | ८ | ४१४ |
| स होवाच...एवायमाकाशे ... | २ | १ | ५ | ४११ |
| स होवाच...एवायमात्मनि ... | २ | १ | १३ | ४१८ |
| स होवाच...एवायमादर्शे ... | २ | १ | ६ | ४१४ |
| स होवाच...एवायं छायामयः ... | २ | १ | १२ | ४१७ |
| स होवाच...दिक्षु ... | २ | १ | ११ | ४१६ |
| स होवाच...यन्तं ... | २ | १ | १० | ४१५ |
| स होवाच...वायौ ... | २ | १ | ६ | ४१२ |
| स होवाच...एवासावादित्ये ... | २ | १ | २ | ४०६ |
| स होवाच...चन्द्रे ... | २ | १ | ३ | ४०६ |
| स होवाच...विद्युति ... | २ | १ | ४ | ४१० |
| स होवाच तथा नस्त्वं गौतम ... | ६ | २ | ८ | १२८७ |
| स होवाच...तात ... | ६ | २ | ४ | १२८१ |
| स होवाच दैवेषु वै ... | ६ | २ | ६ | १२८४ |
| स होवाच न वा अरे पत्युः कामाय | २ | ४ | ५ | ५४८ |
| स होवाच...पत्युः ... | ४ | ५ | ६ | ११३२ |
| स होवाच प्रतिज्ञातो ... | ६ | २ | ५ | १२८३ |
| स होवाच महिमान ... | ३ | ९ | २ | ७८७ |
| स होवाच यदूर्ध्वं गार्गि...आकाश एव ३ | ८ | ७ | ७६४ | |
| स होवाच...आकाशे तदोतं ... | ३ | ८ | ४ | ७६२ |
| स होवाच याज्ञवल्क्यः प्रिया बतारे | २ | ४ | ४ | ५४७ |
| स होवाच...वै खलु ... | ४ | ५ | ५ | ११३१ |
| स होवाच वायुर्वै गौतम ... | ३ | ७ | २ | ७४६ |
| स होवाच विज्ञायते ... | ६ | २ | ७ | १२८४ |
| स होवाचाजातशत्रुः प्रतिलोमं ... | २ | १ | १५ | ४२१ |
| स होवाचाजातशत्रुरेतावन्नू ३ ... | २ | १ | १४ | ४१६ |
| स होवाचाजातशत्रुर्यत्रैष...पुरुषःक्वौष | २ | १ | १६ | ४३६ |
| स होवाचा...पुरुषस्तदेषां ... | २ | १ | १७ | ४३६ |
| स होवाचैतद्वै तदक्षरं ... | ३ | ८ | ८ | ७६६ |
( १३८० )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | ब्रा० | सं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| स होवाचोवाच वै सो० | ३ | ३ | २ | ६६४ |
| स होवाचोषस्तश्चाक्रायणो | ३ | ४ | २ | ७०२ |
| सा चेदस्मै न दद्यात्का० | ६ | ४ | ७ | १३४३ |
| सा चेदस्मै दद्यादि० | ६ | ४ | ८ | १३४४ |
| साम प्राणो वै साम | ५ | १३ | ३ | १२२० |
| सा वा एषा देवता | १ | ३ | ६ | १२२ |
| सा वा... पाप्मानं मृत्युमपहत्य | १ | ३ | १० | १२५ |
| सा वा... मृत्युमपहत्याथैना | १ | ३ | ११ | १२७ |
| सा ह वागुवाच | ६ | १ | १४ | १२६२ |
| सा होवाच नमस्तेऽस्तु | ३ | ८ | ५ | ७६३ |
| सा होवाच ब्राह्मणा | ३ | ८ | १२ | ७८० |
| सा होवाच मैत्रेयी। यन्नु म इयं भगोः सर्वार | ४ | २ | ५४५ | |
| सा होवाच... वित्तेन पूर्णा स्यात्स्यां | ४ | ५ | ३ | ११३० |
| सा होवाच मैत्रेयी येनाहं | २ | ४ | ३ | ५४६ |
| ,, ,, | ४ | ५ | ४ | ११३० |
| सा होवाच मैत्रेय्यत्रैव मा भगवानमू० | २ | ४ | १३ | ५७२ |
| सा होवाच... भगवान्मो० | ४ | ५ | १४ | ११३८ |
| सा होवाच यदूर्ध्वं याज्ञ० | ३ | ८ | ३ | ७६१ |
| ,, ,, | ३ | ८ | ६ | ७६४ |
| सा होवाचाहं वै त्वा | ३ | ८ | २ | ७५६ |
| सैषा गायत्र्येताँस्म्र्स्तुरीये | ५ | १४ | ४ | १२२८ |
| सोऽकामयत द्वितीयो | १ | २ | ४ | ७२ |
| सोऽकामयत भूयसा | १ | २ | ६ | ७८ |
| सोऽकामयत मेध्यं | १ | २ | ७ | ८० |
| सोऽबिभेतस्मादेकाकी | १ | ४ | २ | १६८ |
| सोऽस्यास्य आङ्गिरसो० | १ | ३ | १६ | १३८ |
| सोऽवेपहं वाव सृष्टि० | १ | ४ | ५ | १८० |
| सोष्यन्तीमद्भिरभ्युक्षति | ६ | ४ | २३ | १३५८ |
| सो हेयमीक्षाञ्चक्रे | १ | ४ | ४ | १७८ |
| स्वप्नान्त उच्चावचमीय० | ४ | ३ | १३ | ६३७ |
| हस्तौ वै ग्रहः | ३ | २ | ८ | ६५६ |
| हिरण्मयी अरणी | ६ | ४ | २२ | १३५८ |
| हिरण्मयेन पात्रेण | ५ | १५ | १ | १२४१ |
मुद्रक—नया संसार प्रेस, भदेनी, वाराणसी-१
॥ श्रीहरिः ॥
गीताप्रेस, गोरखपुरका सस्ता, सदा सेवनीय
आत्मकल्याणकारी साहित्य
पुराण-साहित्य—
संक्षिप्त पद्मपुराण
पद्मपुराणका यह संक्षिप्त भाषानुवाद है। भगवान् विष्णुका माहात्म्य विशेषरूपसे वर्णित होनेके कारण वैष्णवोंको यह अधिक प्रिय है। भगवान् श्रीराम तथा श्रीकृष्णके अवतार-चरित्रों एवं उनके परात्पर रूपोंका इसमें विस्तृत वर्णन ज्ञानप्रद है। इसकी कथाएँ अत्यन्त रोचक, शिक्षाप्रद और कल्याणकारी होनेसे इसका पठन-पाठन, अनुशीलन, पारायण आदि श्रेयस्कर हैं। पृष्ठ-संख्या ९०४, रंगीन चित्र १ एवं अनेक रेखा-चित्र।
श्रीहरिवंशपुराण सटीक (महाभारत-खिल भाग)
श्रीहरिवंशपुराण—महाभारतका खिल या प्रकीर्ण भाग है। इसमें भगवान् श्रीहरि (श्रीकृष्ण) के वंशका बृहद् वर्णन है। भगवद्भक्ति तथा भगवान् श्रीकृष्णसे सम्बद्ध इसकी भक्ति, ज्ञान, वैराग्यप्रद अनेक रोचक कथाएँ बड़ी आनन्दप्रद और कल्याणकारी हैं। वंश-वृद्धि या पुत्र-प्राप्तिकी कामनासे विधिपूर्वक 'हरिवंश'-श्रवणका माहात्म्य शास्त्रोंमें बताया गया है। मूल हिन्दी-अनुवाद-सहित, पृष्ठ-संख्या ११४२, भावपूर्ण सुन्दर रंगीन चित्र ८, सजिल्द।
संक्षिप्त श्रीमद्देवीभागवत
सुप्रसिद्ध देवीभागवत-पुराणके इस संक्षिप्त हिन्दी-रूपान्तरमें सच्चिदानन्द परब्रह्मकी मातृ-शक्तिके रूपमें उपासना और आद्याशक्ति भगवतीके तात्त्विक स्वरूपका विवेचनसहित महादेवीकी अद्भुत लीला-कथाओं एवं चरित्रोंका ज्ञानप्रद रोचक वर्णन है। इसके पौराणिक आख्यान एवं सुरुचिपूर्ण चरित्र-कथाएँ कल्याणकारी हैं। सजिल्द, पृष्ठ-संख्या ७०४, बहुरंगे चित्र ८, सादे चित्र १८, रेखा-चित्र १७६ तथा रेखाङ्कित यन्त्र ३, इसकी उल्लेखनीय विशेषताएँ हैं।
श्रीमद्भागवतमहापुराण (दो खण्ड)
सुप्रसिद्ध श्रीमद्भागवतमहापुराण भगवत्प्रेम-रसका छलकता हुआ ऐसा सागर है जिसकी कहीं कोई तुलना नहीं है—'स्वादु स्वादु पदे पदे।' इसमें सकाम-कर्म, निष्काम-कर्म, साधन-ज्ञान, सिद्ध-ज्ञान, साधन-भक्ति, प्रेमा-भक्ति आदि उत्तमोत्तम मोक्षदायक साधन-मार्गोंका रहस्य-विवेचन बड़ी ही मधुरताके साथ किया गया है। मानव-जीवनके चरम और परम लक्ष्य—भगवत्प्राप्ति या आत्म-कल्याणहेतु इस महान् ग्रन्थका पाठ, पारायण, श्रवण, अनुशीलन आदिका आश्रय ही इस घोर कलिकालमें एकमात्र परमोपयोगी साधन है। सम्पूर्ण ग्रन्थ मूल पाठ एवं अनुवादसहित दो खण्डोंमें उपलब्ध है। कुल पृष्ठ-संख्या २०२१, भावमय बहुरंगे चित्र २, सजिल्द, श्रीमद्भागवतकी महिमा, माहात्म्य, पूजन-विधि, आरती एवं पाठके विभिन्न प्रयोग आदि उपयोगी सामग्रीसहित।
॥ श्रीहरिः ॥
गीताप्रेस, गोरखपुरसे प्रकाशित विभिन्न गीताएँ
श्रीमद्भगवद्गीता-तत्त्वविवेचनी—
(टीकाकार-श्रीजयदयालजी गोयन्दका)
श्रीमद्भगवद्गीता साधक संजीवनी टीका—
(टीकाकार-स्वामी रामसुखदासजी महाराज)
गीता-दर्पण— (स्वामी रामसुखदासजी महाराज)
गीता-दर्पण— (पाकेट साइज)
गीता-माधुर्य
गीता-शांकरभाष्य
गीता-चिन्तन— (ले० श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार)
श्रीमद्भगवद्गीता— मूल, पदच्छेद, अन्वय, साधारण भाषाटीका
श्रीमद्भगवद्गीता— माहात्म्यसहित, सटीक मोटे अक्षरोंमें
श्रीमद्भगवद्गीता— श्लोक, साधारण भाषाटीका, टिप्पणी-प्रधान विषय, मोटा टाइप, अजिल्द
श्रीमद्भगवद्गीता— केवल भाषा
श्रीमद्भगवद्गीता— साधारण भाषाटीका, पाकेट साइज
श्रीमद्भगवद्गीता— मूल मोटे अक्षरोंमें
श्रीपञ्चरत्नगीता— (श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णुसहस्रनाम, श्रीभीष्मस्तवराज, श्रीअनुस्मृति, श्रीगजेन्द्रमोक्षके मूल-पाठ)
श्रीमद्भगवद्गीता— श्रीविष्णुसहस्रनामसहित छोटा साइज
गीताताबीजी— मूल
॥ श्रीहरिः ॥
गीताप्रेस, गोरखपुरसे
प्रकाशित
उपनिषद्
| ईशादि नौ उपनिषद् | अन्वय, हिंदी व्याख्यासहित |
|---|---|
| ईशावास्योपनिषद् | हिंदी अनुवाद शांकर भाष्यसहित |
| केनोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| कठोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| माण्डूक्योपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| मुण्डकोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| प्रश्नोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| तैत्तिरीयोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| ऐतरेयोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| श्वेताश्वतरोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
[मुद्रा / Seal:
K. P. SABHA AMBRI...
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